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                <title>voter - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>देशभर में चुनाव संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए 1950 पर कर सकते हैं कॉल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Voter Helpline Toll Free Number: चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को देश के नागरिक मतदाताओं के सभी प्रश्नों/शिकायतों के समाधान के उद्देश्य से राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन और सभी 36 राज्यों एवं जिला स्तरीय हेल्पलाइनों को सक्रिय कर दिया है। राष्ट्रीय संपर्क केंद्र (एनसीसी) सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/you-can-call-1950-to-resolve-election-related-complaints-across-the-country/article-77535"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/new-delhi-18.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Voter Helpline Toll Free Number: चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को देश के नागरिक मतदाताओं के सभी प्रश्नों/शिकायतों के समाधान के उद्देश्य से राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन और सभी 36 राज्यों एवं जिला स्तरीय हेल्पलाइनों को सक्रिय कर दिया है। राष्ट्रीय संपर्क केंद्र (एनसीसी) सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हेल्पलाइन के रूप में कार्य करेगा। यह टोल-फ्री नंबर 1800-11-1950 प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होता है। इस पर नागरिकों और अन्य हितधारकों को चुनावी सेवाओं और प्रश्नों के समाधान के लिए कॉल प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा कार्यवाही और सहायता प्रदान किया जाता है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने समय पर और स्थानीय प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और जिले को क्रमश: अपना राज्य संपर्क केंद्र (एससीसी) और जिला संपर्क केंद्र (डीसीसी) स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं। यह केंद्र पूरे वर्ष सभी कार्य दिवसों में कार्यालय समय के दौरान संचालित होते हैं और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता प्रदान करेगा।सभी शिकायतों और प्रश्नों को राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी 2.0) के माध्यम से दर्ज और ट्रैक किया जाता है। चुनाव आयोग ने ‘बूथ स्तरीय अधिकारियों के साथ बुक-अ-कॉल’ सुविधा भी शुरू की है, जिसके माध्यम से नागरिक ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सुविधा के माध्यम से सीधे अपने संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिक ईसीआईएनईटी ऐप का उपयोग करके चुनाव अधिकारियों से भी जुड़ सकते हैं। चुनाव आयोग ने सभी सीईओ, डीईओ, ईआरओ को नियमित रूप से प्रगति की निगरानी करने और 48 घंटों के अंदर उपयोगकतार्ओं के अनुरोधों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। ये सुविधाएं चुनाव संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए मौजूदा तंत्र के अतिरिक्त हैं। नागरिक कम्पलिएंट्सएटदरेटईसीआईडॉटजीओवीडॉटइन पर ईमेल भी भेज सकते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शाम ढलते ही नए रेलवे स्टेशन पर छा जाता है अँधेरा, रोजाना भय के साये में सफ़र करने को मजबूर हजारो यात्री" href="http://10.0.0.122:1245/lack-of-lighting-around-the-new-kaithal-railway-station/">शाम ढलते ही नए रेलवे स्टेशन पर छा जाता है अँधेरा, रोजाना भय के साये में सफ़र करने को मजबूर हजारो यात्री</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 16:08:17 +0530</pubDate>
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                <title>Voter ID Update: नये वोटर कार्ड बनवाने के लिए आई जरूरी सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[Haryana Government: हरियाणा के सिरसा जिला प्रशासन के निदेर्शानुसार स्थानीय रानियां बाजार स्थित रेडक्रॉस भवन में युवाओं को अपना मतदाता पहचान पत्र समय पर बनवाकर मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया गया। जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव लाल बहादुर बैनीवाल ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की आयु एक जनवरी 2024 को 18 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/voter-id-update/article-54378"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/voter-id-update.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Haryana Government: हरियाणा के सिरसा जिला प्रशासन के निदेर्शानुसार स्थानीय रानियां बाजार स्थित रेडक्रॉस भवन में युवाओं को अपना मतदाता पहचान पत्र समय पर बनवाकर मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया गया। जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव लाल बहादुर बैनीवाल ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की आयु एक जनवरी 2024 को 18 वर्ष या इससे अधिक है तो वह 27 अक्टूबर से नौ दिसंबर 2023 तक अपने एरिया के बूथ लेवल अधिकारी के पास फार्म नंबर 6 जमा करवाएं। उन्होंने बताया कि सभी बूथ लेवल अधिकारी 4 व 5 नवंबर तथा 2 व 3 दिसंबर, 2023 को शनिवार व रविवार के दिन मतदान केंद्र में उपस्थित रहकर वोट बनाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार किसी भी लोकतांत्रिक समाज में मौलिक अधिकार है तथा 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति अपना वोट बनवाकर मताधिकार का प्रयोग करें। Voter ID Update</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/pakistan-made-a-big-change-after-defeating-bangladesh/">World Cup 2023: पाकिस्तान ने बांग्लादेश को हराकर किया बड़ा फेरबदल, अभी भी सेमीफाइनल की रेस में, जानें समीकरण</a></p>
<p style="text-align:justify;"> रेडक्रॉस के सहायक सचिव गुरमीत सिंह सैनी द्वारा युवाओं को जागरूक करते हुए वोट बनवाने तथा अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए शपथ दिलवाई गई कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान के तहत अपने वोटिंग अधिकार का प्रयोग करने के लिए अपने वोटर कार्ड को समय पर बनवाना सुनिश्चित करूंगा व इसके साथ ही वोटिंग वाले दिन अपने मताधिकार का प्रयोग करूंगा व दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा। इस अवसर पर रैडक्रॉस के प्राथमिक सहायता व गृह परिचर्या प्रवक्ता राजिन्द्र कुमार, टैक्नीकल को-ओर्डिनेटर रजत बंसल, लिपिक अजीत सिंह व सुशील कुमार भी उपस्थित थे।</p>
<h3>ऐसे बनवा सकते हैं आप अपना वोटर आईडी कार्ड</h3>
<p>अगर आपको अपना नया वोटर आईडी कार्ड बनवाना है तो आप आॅनलाइन व आॅफलाइन के माध्यमों से बनवा सकते हैं। आॅनलाइन कार्ड बनवाने के लिए आॅनलाइन मतदाता सेवा पोर्टल पर लॉगिन करें। वहीं अगर आपको वोटर आईडी कार्ड बनवाने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत पेश आ रही हो तो आप वोटर हेल्पलाइन नम्बर 1950 या वोटर हेल्पलाइन एप पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Nov 2023 10:57:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>वोटर की निराशा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है। (Voter) वोटर की जागरुकता से ही सफल चुनाव संभव है। जब वोटर अपनी बुद्धि से वोट का प्रयोग और देश व राज्य की कमान सही हाथों में सौंपने का मन बनाएगा, फिर ही वोट की सार्थकता का आभास होगा। केंद्र व राज्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/voters-despair/article-47507"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/how-big-will-the-voter-decide-the-mandate-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है। (Voter) वोटर की जागरुकता से ही सफल चुनाव संभव है। जब वोटर अपनी बुद्धि से वोट का प्रयोग और देश व राज्य की कमान सही हाथों में सौंपने का मन बनाएगा, फिर ही वोट की सार्थकता का आभास होगा। केंद्र व राज्य सरकार वोट का प्रयोग के लिए अरबों रुपये जागरुकता अभियानों पर खर्च करती है, फिर भी वोटरों में उत्साह नहीं बढ़ पा रहा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Old Age Pension Haryana: हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन धारकों के लिए खुशखबरी" href="http://10.0.0.122:1245/old-age-pension-haryana/">Old Age Pension Haryana: हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन धारकों के लिए खुशखबरी</a></p>
<p>पंजाब में बुधवार को जालंधर लोकसभा हलके के उपचुनाव हुए, जिसमें केवल 54 प्रतिशत वोटरों (Voter) ने अपने वोट के अधिकार का प्रयोग किया। उधर, कर्नाटक में 70 प्रतिशत मतदान के साथ वोटरों ने बढ़-चढ़कर प्रदर्शन किया। फिर भी 30 प्रतिशत वोटरों का वोट डालने में दिलचस्पी न लेना चिंताजनक है। जब 100 प्रतिशत वोटर अपने अधिकार को समझेंगे फिर ही देश का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विवेक और लोकतंत्र का सीधा संंबंध जनशक्ति से जुड़ा हुआ है। भले ही केंद्र व राज्य सरकार ने वोटरों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास भी किए, निशक्तजनों के लिए अलग पोलिंग बूथ भी बनाए, बूथों की गिनती भी बढ़ाई, वृद्धों को बूथों तक व्हीलचेयर से पहुंचाने के लिए अलग से टीमें भी गठित की, इन सब प्रयासों के बावजूद भी वोटर क्यों उदासीन है?</p>
<p>दरअसल, कम वोट पोल के पीछे क्या कारण, राजनीतिक दलों व सरकारों को मंथन करने की आवश्यकता है। वास्तव में कम वोट पड़ने के पीछे एक बड़ा कारण राजनीति में आ रही गिरावट भी है। सभी दलों के नेता भ्रष्टचार में लिप्त हैं और अधिकतर पर अपराधिक मामले भी दर्ज हैं, इन्हीं कारणों के चलते जनता में वोट डालने के प्रति उत्साह नहीं बढ़ पा रहा। इसके साथ ही राजनेताओं में जनसेवा व जनसम्मान की भावना भी खत्म होती जा रही है। अधिकतर नेता चुनाव जीतकर अपने हलके का दौरा तक नहीं करते, बुनियादी समस्याओं की तरफ ध्यान देना तो दूर। वह चुनाव जीतकर यह भूल जाते हैं कि अब उनकी ड्यूटी क्या है।</p>
<p>कई ऐसे भी हैं चुनाव जीतने के बाद चुनावों में हुए खर्चों को पूरा करने की रणनीति बनाने लगते हैं। मौजूदा हालात यह बने हुए हैं कि जनता का राजनीति से भरोसा उठता जा रहा है। स्वार्थ की राजनीति बढ़-फूल रही है। कई सांसद ऐसे हैं जो हर बार अनुपस्थित ही रहते हैं और कई ऐसे भी हैं जो संसद में पूरे कार्यकाल के दौरान अपने क्षेत्र के मुद्दों को बिना उठाए ही वापिस आ जाते हैं। यह राजनीति का दुर्भाग्य है कि ऐसे नेताओं को ही पार्टियां बार-बार टिकट थमा देती हैं और वे फिर जीतकर जनता को लावारिस हालत में छोड़ देते हैं। यह आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को जनता से संवाद करने की आदत डालने होगी, उनकी समस्याओं का निवारण करना होगा, फिर ही लोगों में वोट डालने के प्रति तत्परता बढ़ेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/voters-despair/article-47507</link>
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                <pubDate>Fri, 12 May 2023 09:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब जम्मू-कश्मीर में रह रहे बाहरी भी डाल सकेंगे वोट, जम्मू-कश्मीर में पार्टियों का भाजपा पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीनगर (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी हिरदेश कुमार ने कहा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश में रहने वाला देश का हर नागरिक यहां मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकता है और अगले विधानसभा चुनाव में वोट डाल सकता है। उनके इस बयान के बाद यहां के राजनीतिक दलों ने भारतीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/now-outsiders-living-in-jammu-and-kashmir-will-also-be-able-to-cast-their-votes/article-36730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/voters.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर (एजेंसी)।</strong> जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी हिरदेश कुमार ने कहा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश में रहने वाला देश का हर नागरिक यहां मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकता है और अगले विधानसभा चुनाव में वोट डाल सकता है। उनके इस बयान के बाद यहां के राजनीतिक दलों ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। जम्मू-कश्मीर में इस साल विधानसभा चुनाव होने की काफी कम संभावना है। प्रदेश के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य भाजपा की मदद करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा असुरक्षित है। उन्होंने ट्वीट किया,‘क्या भाजपा जम्मू-कश्मीर के वास्तविक मतदाताओं के समर्थन को लेकर इतनी असुरक्षित है कि उसे सीटें जीतने के लिए अस्थायी मतदाताओं को आयात करने की जरूरत है? यदि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौका दिया जाएगा, तो इनमें से कोई भी चीज भाजपा की मदद नहीं करेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव आयोग की घोषणा के बाद जम्मू-कश्मीर में पार्टियों का भाजपा पर हमला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य स्थानीय लोगों को कमजोर करने के लिए जम्मू-कश्मीर में सत्ता हासिल करना है। उन्होंने कहा,‘जम्मू-कश्मीर में चुनावों को स्थगित करने का भारत सरकार का निर्णय, भाजपा के पक्ष में संतुलन को झुकाने और अब गैर स्थानीय लोगों को वोट देने की अनुमति देना स्पष्ट रूप से चुनाव परिणामों को प्रभावित करना है। असली उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में सत्ता को कमजोर करने के लिए स्थानीय लोगों के अधिकारों को छीनना है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने इसे एक शरारत से कहीं अधिक करार दिया और केंद्र सरकार से 1987 को फिर से नहीं दोहराने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वह चुनाव व्यापक रूप से धांधली के लिए जाना जाता है और सशस्त्र विद्रोह के लिए एक कारण बन गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">माकपा नेता एम वाई तारिगामी ने कहा कि सीईओ ने जो कहा है वह जम्मू- कश्मीर के लोगों को और अधिक परेशान वाला है। उन्होंने कहा, ‘पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से परिसीमन प्रक्रिया क्षेत्र की चुनावी जनसांख्यिकी को बदलने का एक प्रयास था। जम्मू-कश्मीर में किसी भी प्रतिनिधि सरकार की अनुपस्थिति में केंद्र सरकार जून 2018 से एक नौकरशाही संरचना के माध्यम से क्षेत्र में निर्बाध नियंत्रण का प्रयोग कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज, सीईओ का बयान लोगों की जायज आकांक्षाओं पर खुला हमला है। वहीं, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हवाला देते हुए जम्मू-कश्मीर के सीईओ ने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, नौकरी, शिक्षा, श्रम, व्यवसाय, अन्य उद्देश्यों के लिए जम्मू-कश्मीर में रहने वाला प्रत्येक नागरिक जम्मू-कश्मीर में मतदाता के रूप में पंजीकरण कर सकता है और अगले विधानसभा चुनाव में अपना वोट डाल सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/now-outsiders-living-in-jammu-and-kashmir-will-also-be-able-to-cast-their-votes/article-36730</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Aug 2022 11:36:52 +0530</pubDate>
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                <title>देश का पहला वोटर पार्क गुरुग्राम में शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम के विकास सदन परिसर में बना है पाकौ -पार्क में लोगों को मतदान करने के लिए किया जा रहा है जागरुक -ईवीएम मशीन व वीवीपैट के जरिये बताया जा रहा है कैसे करे मतदान -गीत के माध्यम से वोट के प्रति किया लोगों को जागरूक सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। मतदाताओं को मतदान करने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/voter-park-gururgram/article-8484"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/voter-park.jpg" alt=""></a><br /><h2>गुरुग्राम के विकास सदन परिसर में बना है पाकौ</h2>
<ul>
<li><strong>-पार्क में लोगों को मतदान करने के लिए किया जा रहा है जागरुक</strong></li>
<li><strong>-ईवीएम मशीन व वीवीपैट के जरिये बताया जा रहा है कैसे करे मतदान</strong></li>
<li><strong>-गीत के माध्यम से वोट के प्रति किया लोगों को जागरूक</strong></li>
</ul>
<p><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा</strong><br />
<strong>गुरुग्राम।</strong> मतदाताओं को मतदान करने के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से गुरुग्राम में देश का पहला वोटर पार्क स्थापित किया गया है। गुरुवार को इसे निर्वाचन अधिकारी राजीव रंजन की मौजूदगी में आम जनता के लिए खोल दिया गया। यहां पर कोई भी व्यक्ति मतदान को लेकर किसी भी तरह की जानकारी हासिल कर सकता है। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में मतदान के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से यह वोटर पार्क बनाया गया है। जिस तरह से अधिकाधिक नये मतदाता इस बार निर्वाचन विभाग ने जोड़े हैं, उसी तरह से अब अधिकाधिक मतदान के लिए भी निर्वाचन विभाग सक्रिय है।</p>
<p>विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं कि इस बार के चुनावों में हर मतदाता अपने मत का प्रयोग करे। क्योंकि देश की सरकार बनाने में एक-एक वोट जरूरी होता है। हम अपने अच्छे प्रतिनिधि सही चुनने के लिए खुद वोट करें। इस तरह का संदेश भी दिया जा रहा है। सभी लोग अपने मत का प्रयोग करें, इसके लिए ही यह वोटर पार्क बनाया गया है। गुरुग्राम जिला प्रशासन की तरफ से मतदान के लिए जागरूक करने और लोगों को चुनाव प्रक्रिया के बारे में बताने के लिए विकास भवन के टेक्नॉलजी पार्क में वोटर पार्क बनाया गया है। छह लाख रुपये की लागत से बने इस पार्क को हरियाणा विधानसभा चुनाव तक बरकरार रखा जायेगा।</p>
<h2>ईवीएम, वीवीपैट की डमी पर दे रहे जानकारी</h2>
<p>निर्वाचन अधिकारी राजीव रंजन ने इसके उद्घाटन अवसर पर बताया कि इस वोटर पार्क में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की डमी रखी गई है। इन मशीनों के जरिए लोगों को मतदान प्रक्रिया और मशीन की जानकारी दी जा रही है। वही मतदान के दौरान बरती जाने वाली सावधानी भी बताई जा रही है। इसके अलावा इस पार्क के एक स्टॉल पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने का काम भी किया जा रहा है। यहा लोग आकर आॅनलाइन आवेदन करने के साथ मैनुअली फार्म भरकर कर्मचारी को दे रहे हंै। साथ ही लोगों के बैठने की व्यवस्था भी की गई है और चारों ओर स्पीकर लगाए गए है। जिनसे लोगों को मतदाता जागरूकता के संदेश सुनाए जा रहे है। साथ ही लोगों को जिले में चल रही स्वीप गतिविधियों के बारे में भी बताया जा रहा है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Apr 2019 17:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मतदाता कैसे तय करेगा जनादेश: एक बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[ यह चुनाव प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से बाहर करने और गैर-मोदीवादियों की सरकार बनाने के मद्देनजर होगा। यह तो साफ है, लेकिन गैर-मोदीवादी कौन हैं, यह अभी न तो तय है और न ही अभी परिभाषित है। लिहाजा कथित ‘महागठबंधन’ आकार नहीं ले पाया है। बेशक मंच पर विपक्षी दलों के नेता एकजुटता की बात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"> यह चुनाव प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से बाहर करने और गैर-मोदीवादियों की सरकार बनाने के मद्देनजर होगा। यह तो साफ है, लेकिन गैर-मोदीवादी कौन हैं, यह अभी न तो तय है और न ही अभी परिभाषित है। लिहाजा कथित ‘महागठबंधन’ आकार नहीं ले पाया है। बेशक मंच पर विपक्षी दलों के नेता एकजुटता की बात कर रहे हों, लेकिन चुनाव अलग-अलग लड़ रहे हैं, ये कड़वी सच्चाई है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के साथ महाराष्ट्र में एनसीपी और तमिलनाडु में द्रमुक का गठबंधन होता रहा है। बिहार में कांग्रेस और राजद साथ में गठजोड़ कर सकते हैं। सवाल है कि एकजुट विपक्ष की तस्वीर कहां गायब है?</p>
<p style="text-align:justify;">2014 में आजादी के बाद पहली बार केंद्र में विशुद्ध गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। कांग्रेस सत्ता से हटी ही नहीं 44 के आंकड़े पर सिमटकर मान्यता प्राप्त विपक्षी दल की हैसियत से भी वंचित हो गई। बीते पांच साल में देश ने बहुत कुछ अच्छा-बुरा देखा। सरकार की सफलताओं और विफलताओं को लेकर अन्तहीन बहस भी चलती रही। राजनीतिक घटनाक्रम भी अत्यंत रोचक रहा जिसका सार यदि निकाला जाए तो भले ही कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार न हो सका हो किन्तु भाजपा ने अपने आपको सही अर्थों में राष्ट्रीय दल के रूप में स्थापित कर लिया जो 2014 के पहले तक अकल्पनीय माना जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका श्रेय निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को देना होगा लेकिन इसी के साथ ये कहना भी गलत नहीं होगा कि इस अंधी दौड़ में भाजपा ने अपनी सैद्धांतिक प्रतिबद्धता से काफी समझौते किये जो सफलता के शोर में भले ही उपेक्षित हो गए हों किन्तु सत्ता की चाहत में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाते-लगाते कांग्रेस युक्त भाजपा जैसी स्थिति भी बनती गई। बावजूद उसके बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने पूरे पांच साल अपने को प्रासंगिक बनाये रखा और ये कहना गलत नहीं होगा कि ये चुनाव भी पूरे देश में मोदी समर्थन और मोदी विरोध पर आकर सिमट गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के बाद बीजेपी की पेशानी पर पसीने की बूंदें साफ देखी जा सकती थीं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पहले बजट और उसके बाद पाकिस्तान के विरुद्ध बेहद आक्रमक रवैया अपनाते हुए पूरे देश का राजनीतिक वातावरण और सन्तुलन दोनों उलट पुलट कर दिए। इस वजह से विपक्ष जिन मुद्दों को बीते एक साल से जोरशोर से उठाते हुए भाजपा की राह में कांटे बिछा रहा था वे सभी फिलहाल तो गौण होकर रह गए हैं। वहीं दूसरी सबसे खास बात ये हुई कि सोनिया गांधी की लगातार कोशिशों के बावजूद भी गैर भाजपा पार्टियां एक झण्डे के तले नहीं आ सकीं।</p>
<p style="text-align:justify;">यद्यपि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाजपा विरोधी गठबंधन बने किन्तु उनका राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा। बिहार में लालू के जेल में होने की वजह से महागठबंधन का जितना हल्ला था उसके मुताबिक कुछ नहीं हो पा रहा और जिस उप्र को दिल्ली की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है वहां भी सपा-बसपा ने कांग्रेस से सलाह लेने तक की जरूरत तक नहीं समझी। अपनी उपेक्षा से आहत होकर वह अकेली मैदान में उतर रही है। इस वजह से भाजपा पर जो मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सकता था वह नहीं हो सका। इसका एक कारण घोर भाजपा विरोधी दलों के बीच कांग्रेस को लेकर सन्देह का भाव भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे लाया जाना भी इसके पीछे है। इस तरह विपक्षी दल चाहते हुए भी मोदी के विरोध में एकजुट होने का एहसास नहीं दिला सके। यही कारण है कि दिसम्बर 2018 में जो प्रधानमंत्री कमजोर लगने लगे थे वही दौड़ में सबसे आगे निकलते दिखाई देने लगे। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले ने केंद्र सरकार की जमकर किरकिरी कर दी थी लेकिन उसके बाद जो हुआ उसने पांसा पलटकर रख दिया। दबी जुबान ही सही लेकिन गैर भाजपाई दल भी ये स्वीकार करने लगे हैं कि बालाकोट में की गई सर्जिकल स्ट्राइक ने मोदी लहर को काफी हद तक पुनर्जीवित कर दिया है। लेकिन भाजपा यदि इसी खुशफहमी में रही तो उसके अच्छे दिन झमेले में पड़ सकते हैं। इसका कारण चुनाव अभियान का लंबा चलना है। जिन मुद्दों से जंग की शुरूवात होगी वे पूरे समय गर्म रहें ये कहना कठिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">राफेल के मामले को भले ही ठंडा माना जा रहा हो किन्तु सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान कोई ऐसी बात निकल आई जो प्रधानमंत्री के लिए नुकसानदेह हुई तब भाजपा के लिए स्थिति को संभालना बहुत कठिन हो जाएगा। अयोध्या विवाद में भी क्या स्थिति बनती है कोई नहीं बता सकता। सर्जिकल स्ट्राइक के श्रेय को प्रासंगिक बनाये रखना भी उतना आसान नहीं है जितना सोचा जा रहा है। उस दृष्टि से आगामी दो महीने बेहद असमंजस भरे होंगे जिनमें राजनीतिक दलों को भरी गर्मी में न सिर्फ पसीना और पैसा बहाना पड़ेगा अपितु जनता के सवालों का जवाब भी देना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा के साथ आंध्र, उड़ीसा, अरुणाचल और सिक्किम की विधानसभा के लिए भी मतदान होगा। पहले संभावना जताई जा रही थी कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के चुनाव भी लोकसभा के साथ करवाये जा सकते हैं लेकिन वैसा नहीं हुआ। इसी तरह 2020 में भी चुनावी बिगुल बजता रहेगा। लेकिन आम चुनाव की घोषणा होते ही अब यह साफ हो गया कि तकरीबन सवा दो महीने तक पूरा देश चुनाव के रंग में डूबा रहेगा। एक वाक्य में भारत की चुनाव प्रक्रिया को परिभाषित करना हो, तो उन्हें पारदर्शी, निष्पक्ष, निर्भीक करार दिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कोई दो राय नहीं है कि कि बीते तीन दशकों में पहली बार लगा था कि किसान, उसकी फसल, उसके सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक सरोकारों पर 2019 के चुनाव केंद्रित कर सकते हैं, लेकिन पुलवामा और पाकिस्तान के बालाकोट में हमारी वायुसेना के हवाई हमले के बाद स्थितियां और मानस ही बदल गए। किसान, किसानी ही नहीं, बेरोजगारी, महंगाई के साथ-साथ नोटबंदी, जीएसटी और अन्य मुद्दों की गूंज तो रहेगी, लेकिन फोकस राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और पाकिस्तान पर ज्यादा रहेगा और वे मुद्दे ही जनादेश तय करते दिखाई देंगे। सवाल है कि क्या ये चुनाव भावुकता पर आधारित होंगे? तो क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दों का क्या होगा?</p>
<p style="text-align:justify;">क्या मोदी और भाजपा को ‘राष्ट्रवाद’ का पर्याय मान लिया जाएगा? इस चुनाव से भारत का भाग्य और भविष्य दोनों जुड़े हुए हैं। नतीजे क्या होंगे ये तो मतदाता ही तय करेंगे किन्तु यदि विकास, सुरक्षा और स्थायित्व लोगों के मन में बैठे तब मोदी सरकार की वापिसी की उम्मीद है किंतु मतदाताओं ने यदि इनसे अलग हटकर विचार किया तब परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। देश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। अब राजनीतिक दल और उनके नेता ज्यादा ही सक्रिय हो जाएंगे, हेलीकॉप्टर उड़ने लगेंगे, जनसभाएं सजने लगेंगी और जनता के सामने आश्वासन परोसे जाएंगे। इस पूरी कवायद में से निकलेगा-जनादेश। वही हमारे लोकतंत्र का बुनियादी हासिल है।<br />
<strong>राजेश माहेश्वरी</strong></p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Mar 2019 20:10:48 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक चौथाई मतदाता मतदान से दूर&amp;#8230;आखिर क्यों ?</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग की इसे बड़ी सफलता माना जाएगा कि हिमाचल में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हो गए। ईवीएम से मतदान के दौरान वीवीपैट यानी कि वोटर वैरिफाइड पेपर आॅडिट ट्रायल मशीन के प्रयोग से अब चुनाव नतीजे आने के बाद हारने वाली पार्टियां ज्यादा शोरगुल भी नहीं कर पाएंगी। चुनाव आयोग द्वारा आरंभिक आंकड़ों के आधार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/a-fourth-voter-away-from-voting-why/article-3505"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/vote.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की इसे बड़ी सफलता माना जाएगा कि हिमाचल में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हो गए। ईवीएम से मतदान के दौरान वीवीपैट यानी कि वोटर वैरिफाइड पेपर आॅडिट ट्रायल मशीन के प्रयोग से अब चुनाव नतीजे आने के बाद हारने वाली पार्टियां ज्यादा शोरगुल भी नहीं कर पाएंगी। चुनाव आयोग द्वारा आरंभिक आंकड़ों के आधार पर हिमाचल में पिछले 45 साल के मतदान आंकड़ों को देखते हुए इस बार सर्वाधिक मतदान बताया जा रहा है। 2012 की तुलना में इस बार दो फीसदी अधिक मतदान हुआ है पर अभी भी मतदान प्रक्रिया से एक चौथाई मतदाताओं का दूर रहना निश्चित रुप से चिंता का विषय है। यह केवल हिमाचल ही नहीं अपितु पूरे देश में मतदान के प्रति शत-प्रतिशत नहीं तो 90-95 के आंकड़े को छूआना चुनाव आयोग के सामने आज भी चुनौती से कम नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी सही है कि 2003 के चुनावों में भी हिमाचल में मतदान का आंकड़ा 74 प्रतिशन को पार कर गया था। इसके बाद के दो चुनावों में मतदान प्रतिशत में कमी रही। 2012 की ही बात करे तो इसके बाद लोकसभा चुनावों में भी हिमाचल में मतदान का प्रतिशत कम रहा। आखिर मतदाता मतदान केन्द्रों तक पहुंच क्यों नहीं पाते, यह चिंतन-मनन का विषय है। हांलाकि विश्लेषण तो यह बताता है कि पॉश कॉलोनियों के नागरिक जो अपने आप को बुुद्घिजीवी व सभ्रांत कहते हैं मतदान प्रतिशत भी उन्हीं के कारण कम होता है। जहां तक चुनाव आयोग का प्रश्न है यह साफ हो चुका है कि विश्व के देशों में हमारे देश में अधिक शांतिपूर्ण व निष्पक्षता से चुनाव होने लगे हैं। हांलाकि हारने वाले दल ही प्रक्रिया को लेकर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा सहित पांच राज्यों में हुए चुनावों के बाद विपक्षी दलों ने हार का ठीकरा ईवीएम मशीन पर ड़ालने का प्रयास करते हुए चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया था पर जिस तरह से चुनाव आयोग ने इसे खुली चुनौती के रुप में लेते हुए ईवीएम से छेड़छाड़ सिद्घ करने की जिस तरह से चुनौती दी उससे सभी दल बगले झांकने लगे। सही भी है हारने वाला दल ईवीएम को दोष देने लगता है जिसे उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करें पर लाख प्रयासों के बावजूद लोकतंत्र के प्रति आमआदमी की निष्ठा अभी तक परिलक्षित नही हो रही है। अभी हिमाचल और इससे पहले पांच राज्यों के मतदान के आंकड़े आईना दिखाने के लिए काफी है। यह सब तो तब है जब पिछले दिनों ही सर्वोच्च न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी आई कि जो मतदान नहीं करते उन्हें सरकार के खिलाफ कुछ कहने या मांगने का भी हक नहीं हैं। आखिर क्या कारण है कि शत-प्रतिशत मतदाता मतदान केन्द्र तक नहीं पहुंच पाते? सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी और चुनाव आयोग के मतदान के प्रति लगातार चलाए जाने वाले कैम्पेन के बावजूद मतदान का प्रतिशत ज्यादा उत्साहित नहीं माना जा सकता। यह भी सही है कि चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों की माकूम व्यवस्था व बाहरी पर्यवेक्षकों के कारण अब धन-बल व बाहु बल में काफी हद तक कमी आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईवीएम और चुनाव आयोग के निरंतर सुधारात्मक प्रयासों का ही परिणाम है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावों में दुरुपयोग के आरोप तो अब नहीं के बराबर ही लगते हैं। छुटपुट घटनाओें को छोड़ भी दिया जाए तो अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। हांलाकि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद सारा ठीकरा ईवीएम में हेराफेरी पर ढ़ोल कर सारी दुनिया में चुनाव आयोग को कठघरे में खड़े करने के प्रयास किए गए। पर चुनाव आयोग की दृढ़ता और खुली चुनौती ने सारे दावे फेल कर दिए। हम बड़े गर्व से दावे कर रहे है कि इस बार सर्वाधिक प्रतिशत लोगों ने लोकतंत्र के इस यज्ञ में आहुति दी है। मतदान के पुराने सारे रिकार्ड तोड़ दिए है। ज्यादा मतदान से इस दल को फायदा होगा या दूसरे दल को।</p>
<p style="text-align:justify;">मतदान प्रतिशत से किसको कितना लाभ मिलेगा या हानि होगी इसका विश्लेषण भी होने लगा है। यह विश्लेषण भी होने लगा हैं कि किस जाति-धर्म व किस आयु वर्ग के लोगों ने कितना मतदान किया है। यह भी विश्लेषण करते नहीं चूक रहे कि महिलाओं का अमुक दल के प्रति झुकाव अधिक है या पुरुषों का अमुक दल के साथ अधिक झुकाव है। टेलीविजन चैनलों पर हम यह विश्लेषण करते भी नहीं थक रहे कि किस दल को कितना मत मिलने जा रहा है। कौन जीत रहा है और कौनसा दल हार रहा है। किसको कितना मत प्रतिशत मिल रहा है। यह भी कि किस दल के प्रति मतदान का प्रतिशत कितना स्विंग कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के मतदान करने के लिए सघन प्रचार अभियान और सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों और मीडिया द्वारा मतदान के लिए प्रेरित करने के बावजूद मतदान का यह प्रतिशत आया है तो क्या कहा जाए। आखिर मतदाता मताधिकार का प्रयोग करते हुए क्यों झिझकते हैं? क्या परेशानी है मतदान करने में? अब तो चुनाव आयोग ने मतदान को आसान बना दिया है। मतदाता के निकटतम स्थान पर मतदान केन्द्र बनाए जा रहे हैं। एक मतदान केन्द्र पर सीमित संख्या में ही मतदाता हैं जिससे मतदाताओं को अनावश्यक लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़े। मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा है ताकि केवल निर्वाचन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई परची के आधार पर ही मतदान कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि अपनी पसंद का उम्मीद्वार नहीं है तो अब नोटा का विकल्प भी दे दिया गया है। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी यदि मतदाता घर से निकल कर मतदान केन्द्र तक नहीं आता है तो इसे क्या कहा जाए? क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि मतदाताओं में उत्साह नहींं है। मतदाता मतदान के अधिकार का उपयोग करने के लिए उत्साहित नहीं है। लोकतंत्र में मताधिकार ही सबसे बड़ा अधिकार है। ऐसे में लगभग एक चौथाई मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं तो यह निराशाजनक है। मतदान के आंकड़ों का यह संकेत भी उभर कर आ रहा है कि साक्षरता दर बढ़ने के बावजूद मतदान प्रतिशत नहीं बढ़ रहा है। अब तो युवा मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी माना जा रहा है कि युवा मतदाता चुनावों में आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, ऐसे में कम मतदान होना मतदान के प्रति उदासिनता ही दर्शाता है। सरकार चुनने के लिए हमें पांच साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। समग्र प्रयास गुजरात चुनावों में मतदान के प्रतिशत को 90 फीसदी के पार पहुंचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। चुनाव आयोग की इस बात की तारीफ की जानी चाहिए कि निष्पक्ष पर सहजता से मतदान के कारगर प्रयास किए जाने लगे हैं। अभियान चलाकर लोगों को मतदान के प्रति जागरुक किया जाता है। चुनाव व्यवस्था में सुधारों का सिलसिला जारी रखते हुए धन बल व बाहु बल को कम करने का प्रयास किए गए हैं। यह दूसरी बात है कि अभी इस दिशा में और काम किया जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ़ राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Nov 2017 03:23:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अब फेसबुक से होगा मतदाता पंजीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने देश के ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को मतदाताओं के रूप में पंजीकृत करने की मुहिम के तहत सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली है। चुनाव आयोग इसके लिए पहली जुलाई से मतदाता होने की सभी शर्तें पूरी करने वाले लोगों को फेसबुक ‘वोटर रजिस्ट्रेशन रिमांइडर’ के नाम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/facebook-will-now-have-voter-registration/article-1740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/facebook.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> चुनाव आयोग ने देश के ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को मतदाताओं के रूप में पंजीकृत करने की मुहिम के तहत सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली है। चुनाव आयोग इसके लिए पहली जुलाई से मतदाता होने की सभी शर्तें पूरी करने वाले लोगों को फेसबुक ‘वोटर रजिस्ट्रेशन रिमांइडर’ के नाम से संदेश भेजेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए फेसबुक ने अपनी वेबसाइट पर ‘रजिस्टर नाउ’ के नाम से एक बटन बनाया है। इस बटन को क्लिक करते ही मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। देश में करीब एक करोड़ अस्सी लाख लोग फेसबुक से जुड़े हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि चुनाव आयोग उन सभी लोगों को मतदाता के रूप में पंजीकृत करने का विशेष अभियान शुरू कर रहा है,</p>
<p style="text-align:justify;">जो किन्हीं कारणों से छूट गए हैं। इस अभियान में उन लोगों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो पहली बार मतदाता बनने जा रहे हैं। जैदी ने लोगों से एक जिम्मेदारी नागरिक बनने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह पहल चुनाव आयोग के मतदाता पंजीकरण अभियान को मजबूत बनाएगी</p>
<p style="text-align:justify;">और भविष्य के मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय हिस्सेदारी के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि यह अभियान चुनाव आयोग के मुख्य उद्देश्य कोई भी मतदाता बनने से न छूटे को पूरा करने में मददगार होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कई भाषाओं में पहुंचेगा संदेश</h2>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से पंजीकरण की याद दिलाने वाला यह संदेश फेसबुक पर अंग्रेजी, हिन्दी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी, बंगला, उर्दू, असमी, मराठी और ओड़िया सहित 13 विभिन्न भाषाओं में प्रेषित किया जाएगा।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2017 01:28:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>1 जुलाई से चलेगा युवा पंजीकरण महोत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[आॅनलाईन भी वोट बनवाएं जा सकते हैं 54 हजार युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 18 से 19 आयुवर्ग के समस्त पात्र युवाओं का नाम मतदाता सूची में पंजीकृत करने के लिए 1 से 31 जुलाई तक युवा पंजीकरण महोत्सव अभियान 2017 चलाया जाएगा। इस अभियान में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/vote-registration-process-start-from-july-1/article-1574"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/ganganagar-04-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">आॅनलाईन भी वोट बनवाएं जा सकते हैं</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>54 हजार युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 18 से 19 आयुवर्ग के समस्त पात्र युवाओं का नाम मतदाता सूची में पंजीकृत करने के लिए 1 से 31 जुलाई तक युवा पंजीकरण महोत्सव अभियान 2017 चलाया जाएगा। इस अभियान में जिले के लगभग 54 हजार 832 युवाओं के वोट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपजिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम प्रशासन नख्तदान बारहठ ने बताया कि 1 से 15 जुलाई तक शैक्षणिक संस्थाओं में शिविर लगाकर वोट बनाए जाएंगे। शिक्षण संस्थाओं, छात्रावासों में रह रहे विधार्थियों के वोट बनाए जाएंगे। प्रत्येक शिक्षण संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। नोडल अधिकारी को वोट बनाने के लिए आॅनलाईन आवेदन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">261 शिक्षण संस्थान चिन्हित</h3>
<p style="text-align:justify;">जिले भर में 261 शिक्षण संस्थाओं को चिन्हित किया गया है, जिनमें राजकीय व निजी संस्थान शामिल है। इन संस्थानों में अधिकांश युवा वोटर मिलेंगे। असंगठित क्षेत्र में भी र्इंट, भट्टा इत्यादि क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों के भी वोट बनाए जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विशेष योग्यजनों पर रहेगा ध्यान केंद्रित</h3>
<p style="text-align:justify;">आयोग के निर्देशानुसार कोई भी विशेष योग्यजन बिना वोट के नहीं रहे, इसके लिए जिले में लगभग 13 हजार विशेष योग्यजनों को चिन्हित किया गया है। विशेष अभियान के दौरान पात्र विशेष योग्यजनों के वोट बनाए जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महिला मतदाताओं के बनाए जाएंगे वोट</h3>
<p style="text-align:justify;">जिले की 6 विधानसभा क्षेत्र में वोट से वंचित ऐसी महिला मतदाताओं के भी वोट बनाए जाएंगे। अविवाहित युवतियां जिनकी आयु 18 वर्ष की हो चुकी है, इनके वोट भी बनाए जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आॅनलाईन वोट बनवा सकते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">कोई भी पात्र नागरिक घर बैठे आॅनलाईन प्रक्रिया से अपना वोट बनवा सकता है। चुनाव आयोग की साईट एनवीएसपी पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदनकर्ता का फोटो, जन्म स्थान वजन्म तिथि का प्रमाण पत्र देना होगा। आॅनलाईन आवेदन करने के पश्चात एप्लीकेशन नम्बर दिया जाएगा, जिससे प्रार्थी अपने प्रार्थना पत्र की स्थिति जान सकेंगे। इसके अलावा सीईओ राजस्थान साईट पर भी मतदाता अपने वोट पंजीकरण की स्थिति, स्थान इत्यादि की जानकारी ले सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">16 से 31 तक घर-घर देंगे दस्तक</h3>
<p style="text-align:justify;">स्वीप प्रभारी मदनलाल सोनी ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार अभियान के दौरान 16 से 31 जुलाई के मध्य बीएलओ घर-घर जाकर वोट बनाने का कार्य करेंगे। सोनी ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विभिन्न निर्देशों की जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 06:40:37 +0530</pubDate>
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