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                <title>Pesticide - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Pesticide RSS Feed</description>
                
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                <title>कीटनाशक सबसे पहले किसानों के लिए खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब-हरियाणा में कीटनाशक (Pesticide) के अंधाधुंध प्रयोग करने पर एक नई चुनौती उत्पन्न हो गई है। डॉ. इकबाल सिंह, जिन्हें भारत सरकार एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है, उन्होंने अपनी रिसर्च में यह दावा किया है कि फसलों पर कीटनाशक के प्रयोग करने से किसान फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। उनका […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/pesticides-are-the-first-threat-to-farmers/article-48564"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/pesticides.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब-हरियाणा में कीटनाशक (Pesticide) के अंधाधुंध प्रयोग करने पर एक नई चुनौती उत्पन्न हो गई है। डॉ. इकबाल सिंह, जिन्हें भारत सरकार एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है, उन्होंने अपनी रिसर्च में यह दावा किया है कि फसलों पर कीटनाशक के प्रयोग करने से किसान फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। उनका कहने का स्पष्ट अर्थ है कि जो किसान ज्यादा तेज कीटनाशकों का प्रयोग करने के उपरांत खेत में ही समय व्यतीत करते हैं, उनके फेफड़ों पर कीटनाशक का प्रभाव होने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहना है कि ऐसा प्रभाव अभी तक जैविक खेती करने वाले किसानों पर नहीं दिखा है। इसी सिलसिले में उन्होंने सुझाव दिया है कि कीटनाशक (Pesticide) प्रयोग वाले खेत में एक बोर्ड लगाया जाना चाहिए, जिस पर लिखा जाए कि लोग उक्त खेतों की तरफ न जाएं। स्प्रे वाली फसल के नजदीक से गुजरने वाला व्यक्ति भी प्रभावित होता है, जोकि बेहद चिंता का विषय है। अब इस समस्या से निपटने के लिए किसानों को खुद ही चेतना होगा। मानवीय जीवन का महत्व समझना और अधिक उपज की विचारधारा को त्यागना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो गई तो पैसा किस काम का। राज्य सरकारों को समय-समय पर किसानों के रक्त की जांच करवानी चाहिए ताकि किसी गंभीर स्थित से निपटने के लिए पहले से ही रणनीति बनाई जा सके। भले ही ताजा रिसर्च में बड़े खुलासे हुए, लेकिन यह तथ्य दो दशकों पहले भी सामने आ चुके हैं कि पंजाब कैंसर का घर बनता जा रहा है। बीकानेर को जाने वाली रेलगाड़ी को कैंसर एक्सप्रेस के नाम से चर्चा में रही है। पंजाब के बड़े शहरों में अस्पतालों की भरमार व अस्पतालों में मरीजों की भीड़ वास्तविक्ता बयान करती है। Pesticide</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के गांव-गांव में कैंसर के मरीज हैं। बीमारी की समस्या का समाधान केवल सस्ता उपचार या अस्पताल का निर्माण नहीं बल्कि बीमारी के कारणों का पता लगाकर मुक्ति दिलवाना है। आज भी किसान तेज कीटनाशक दवाईयां खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं। कभी निराई-गुड़ाई ही खरपतवार को खत्म करने के लिए काफी होती थी। इसी तरह खाल/नालों की सफाई कस्सियों से की जाती थी, लेकिन अब किनारों से घास की सफाई की बजाए उस पर कीटनाशक डालकर जला दिया जाता है, जिससे भूमि व वायु भी जहरीली बनती जा रहे हैं। Pesticide</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में पारंपरिक खेती को किसी न किसी रूप में अपानकर कृषि को जहरमुक्त बनाना अति आवश्यक है। ताजा रिसर्च के अनुसार सब्जी-फल खाने से ही लोग बीमार नहीं पड़ रहे बल्कि खुद किसान ही सबसे पहले कैंसर की चपेट में आ रहा है। पता नहीं अब तक ऐसी कितनी रिपोर्ट व खुलासे हो चुके हैं, लेकिन अब वक्त है सतर्क होने का। रिपोर्टों को अलमारियों में रखने की बजाए उन पर गहराई से विचार कर उन्हें धरातल पर लागू किया जाए। सरकारों को ऐसी रिपोर्र्ट्स पर गंभीर होना चाहिए। ज्ञान व रिसर्च का उद्देश्य पूरा होना आवश्यक है और यह सरकारों की जिम्मेवारी व नैतिक कर्तव्य भी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2023 16:04:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नरमे पर सफेद मच्छर व तेले का प्रकोप</title>
                                    <description><![CDATA[कीटनाशक का छिड़काव करने में जुटे किसान ओढां(सच कहूँ/राजू)। बरसात के बाद नरमे-कपास की फसल पर सफेद मच्छर व तेले का प्रकोप देखा जा रहा है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए कीटनाशकों के छिड़काव में जुटे देखे जा रहे हैं। नुहियांवाली के किसान लीलाधर शर्मा, सीताराम नेहरा, सुनील सहारण, डॉ. जगदीश सहारण, रणवीर, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmers-engaged-in-spraying-insecticide/article-36341"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/insecticide.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>कीटनाशक का छिड़काव करने में जुटे किसान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां(सच कहूँ/राजू)।</strong> बरसात के बाद नरमे-कपास की फसल पर सफेद मच्छर व तेले का प्रकोप देखा जा रहा है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए कीटनाशकों के छिड़काव में जुटे देखे जा रहे हैं। नुहियांवाली के किसान लीलाधर शर्मा, सीताराम नेहरा, सुनील सहारण, डॉ. जगदीश सहारण, रणवीर, दलीप नेहरा व आशाराम ने बताया कि बरसात के बाद नरमे की फसलों में रोगों ने दस्तक दे दी है। इस समय सफेद मच्छर व तेले का काफी प्रकोप है। नरमे के पते काले पड़कर सिकुड़ने शुरू हो गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके चलते नरमे के उत्पादन पर काफी विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ग्वार की फसल में जड़ गलन व फंगस की भी शिकायतें हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में बरसात न होने की वजह से किसानोंं ने कई-कई बार नरमे की बिजाई की थी और अब अधिक बरसात आफत बन गई है। ओढां खंड से कृषि विभाग के सहायक तकनीक अधिकारी रमेश सहु ने बताया कि बरसात के बाद सफेद मच्छर, थ्रीप्स व हर तेले का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में किसान बिना जानकारी के दवा विक्रेताओं की राय पर छिड़काव न करते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि फसलों पर सफेद मच्छर व तेले के अलावा कुछ जगहों पर गुलाबी सुंडी की भरमार का भी होना सामने आ रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बिना जानकारी के अंधाधुंध छिड़काव करने से बचें किसान: सहु</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सहायक तकनीक अधिकारी रमेश सहु ने किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि किसान एकदम से अंधाधुंध छिड़काव करने से परहेज करें तथा एक साथ 2 या 3 कीटनाशक मिलाकर छिड़काव करने से बचें। उन्होंने बताया कि गुलाबी सुंडी, सफेद मच्छर व थ्रीप्स से बचाव के लिए 600 एमएल प्रफेनोफोस दवा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें। जहां सफेद मच्छर की अधिक शिकायत है वहां 400 एमएल लेनो या 80 एमएल उलाला दवा का प्रयोग करें। वहीं हरे तेले से बचाव के लिए 80 ग्राम एक्टारा दवा का छिड़काव करें।</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Aug 2022 11:36:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किटनाशक रसायनों में बरतें ये साफधानियां</title>
                                    <description><![CDATA[आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के युग में अधिक पैदावार लेने के लिए फसल सुरक्षा को लेकर कीटनाशी, फफूंदनाषी एवं अन्य रसायन जो फसल सुरक्षा में प्रयोग होते हैं, प्राय: बहुत जहरीले व हानिकारक होते हैं। इन रसायनों का प्रयोग करते समय सावधानी रखना भी उतना ही आवश्यक है, जितना कि इनसे फसल सुरक्षा व अधिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/clear-that-pesticide-chemicals/article-321"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/pestiside-awaree.jpg" alt=""></a><br /><p>आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के युग में अधिक पैदावार लेने के लिए फसल सुरक्षा को लेकर कीटनाशी, फफूंदनाषी एवं अन्य रसायन जो फसल सुरक्षा में प्रयोग होते हैं, प्राय: बहुत जहरीले व हानिकारक होते हैं। इन रसायनों का प्रयोग करते समय सावधानी रखना भी उतना ही आवश्यक है, जितना कि इनसे फसल सुरक्षा व अधिक पैदावार एवं अच्छी गुणवत्ताा वाली फसल लेकर अधिक लाभ उठाना। फसलों की पैदावार में कमी होने के कई कारणो में से कीट व बीमारियां मुख्य भूमिका निभाते हंै। अधिक उत्पादन लेने हेतु बुआई से पूर्व बीजोपचार तथा बुवाई के उपरान्त कीट नियन्त्रण एवं समय-समय पर बीमारियों से बचाव हेतु विभिन्न रासायनिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। जिनमें से अधिकांश रसायन अति विषाक्त होते हंै। जितनी आवश्यकता इनके प्रयोग करने हैं उससे कहीं अधिक आवश्यकता इनके प्रयोग में सावधानी रखने की है।<br />
जैवनाशकों को निर्धारित मात्रा से अधिक या गलत तरीके से या असावधानी से प्रयोग करने पर कई हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। जैवनाशक रसायन न केवल मनुष्यों बल्कि पशुओं पक्षियों इत्यादि के लिए भी अति हानिकारक होते है। इन जैवनाश्क रसायनों के प्रयोग सें किसी भी प्रकार की दुर्घटना या हानि से बचने के लिए या इनका पर्यावरण पर कोई बुरा असर ना पड़ें इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इनके प्रयोग के समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिये, इनकी जानकारी भी किसानों को होना अति आवश्यक है। जैवनाषकों के घातक प्रभावों से बचने के लिए यह आवश्यक होता है कि उन पर लिखे हुए निर्देशों का पालन नियमानुसार किया जाए। जिनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। कुछ सावधानियों को ध्यान में रखते हुए यदि रसायनों को प्रयोग किया जाये तो इनसे होने वाले हानिकारक दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।<br />
<strong>कीटनाशकों की खरीददारी के समय बरते सावधानियां:</strong><br />
कीट व रोग की पहचान व उसकी गम्भीरता के आधार पर सिफारिश किऐ गये कीटनाशक ही खरीदें। इन कीटनाशकों रसायनों के विषैलेपन की जानकारी को पैकिंग पर छपे बर्फीनुमा आकृति के रंगों से समझना चाहिए। लाल रंग सबसे अधिक विषैला तथा पीला, नीला व हरा रंग क्रमश: कम विषैले होते हंै। यथासम्भव सुरक्षित रसायनों का ही चयन करें। इसके निमार्ता, इनमें उपस्थित सक्रिय तत्व तथा निष्क्रिय तिथि को ध्यान में रख कर उसका अनुसरण करें। कीटनाशक खरीदते, उनके भण्डारण व उपयोग करते समय बच्चों को शामिल नहीं करना चाहिए। खुली पैकिंग वाला कीट नाशक कभी नहीं खरीदना चाहिए। कीटनाशक अच्छी गुणवत्ताा का होना चाहिये। जिससे अधिक लाभ मिल सकें।<br />
<strong>प्रयोग से पहले ये बरतें सावधानियां:</strong><br />
किसानों को चाहिए कि कीटनाशक के प्रयोग करने से पहले पैकेट पर लेबल व दी गई निर्देश पुस्तिका आवश्य पढेÞ। केवल निर्धारित मात्रा में ही कीटनाशक का प्रयोग किया जाना चाहिए। आवश्यकता से अधिक मात्रा में कीटनाशकों का सेवन करना पर्यावरण और फसलों सहित अन्य जीव जंतुओं के लिए भी हानिकारक होता है। कीटनाशकों के प्रयोग से पहले छिड़काव यंत्र की अच्छी तरह जांच कर लें तथा पानी डालकर ताकि बाद में परिक्षण कोई रिसाव या परेशानी न हों। घर में काम आने वाले बर्तनों को छिड़काव के लिए कभी भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कीटनाशकों को पानी में हाथ से नही मिलाना चाहिए। बल्कि हाथों में दस्ताने पहनकर किसी लकडी की छड़ी से ही मिलाएं। छिड़काव करते समय मुंह पर साफ कपड़ा या मास्क लगा लेना जहा तक संम्भव हो सकें अपने शरीर को कपड़ों से पूरा ढक कर छिड़काव करें। छिडकाव करने से पहले देख लेवे की शरीर का कोई भाग चोटिल नहीं है। यदि चोटिल हो तो किसी दूसरे व्यक्ति से छिड़काव करावायें। यदि बरसात या आंधी आने की संभावना हो तो कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।<br />
<strong>कीटनाशकों का प्रयोग करते ये बरतें सावधानियां:</strong><br />
कीटनाशकों के डिब्बों को आंंखों व नाक से दूर रखकर खोलें। बीज उपचार करते समय हाथों में दस्तानों का प्रयोग करना चाहिए। बीज उपचार बिजाई से 1-2 दिन पहले कर लेना चाहिए। कीटनाशक का छिड़काव करते समय यह ध्यान रखें की ये रसायन पदार्थ शरीर के किसी भाग पर नहीं गिरना चाहिए। छिड़काव करते समय कम से कम एक आदमी को साथ रखे कभी भी अकेले छिड़काव नहीं करें। कीटनाशकों को घर या पशुओं के रहने के स्थान पर न मिलाएं बल्कि खेत में सुरक्षित स्थान पर ही मिलाएं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/clear-that-pesticide-chemicals/article-321</link>
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                <pubDate>Fri, 11 Nov 2016 01:48:53 +0530</pubDate>
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