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                <title>Human Trafficking - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Human Trafficking RSS Feed</description>
                
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                <title>Human Trafficking : मानव तस्करी के जाल में मासूम</title>
                                    <description><![CDATA[– Human Trafficking – हाल ही में सीमांचल एक्सप्रेस (12487) से 93 बच्चों को मानव तस्करी (Human Trafficking) के लिए राजस्थान और उत्तराखंड ले जाया जा रहा था। शुक्र है कि सभी बच्चों को प्रयागराज जंक्शन पर मानव तस्करों के चंगुल से सुरक्षित बचा लिया गया। इस मामले में नौ एजेंटों ने सीमांचल एक्सप्रेस के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/human-trafficking/article-57519"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/human-trafficking-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Human Trafficking –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में सीमांचल एक्सप्रेस (12487) से 93 बच्चों को मानव तस्करी (Human Trafficking) के लिए राजस्थान और उत्तराखंड ले जाया जा रहा था। शुक्र है कि सभी बच्चों को प्रयागराज जंक्शन पर मानव तस्करों के चंगुल से सुरक्षित बचा लिया गया। इस मामले में नौ एजेंटों ने सीमांचल एक्सप्रेस के विभिन्न डिब्बों में छह समूहों में बाल तस्करी को अंजाम दिया, जो अपराध की परिष्कृत और संगठित प्रकृति को रेखांकित करता है। यह स्पष्ट है कि मानव तस्कर किस प्रकार बेखौफ होकर काम करते हैं, खुलेआम कानूनों का उल्लंघन करते हैं और हाशिए पर मौजूद लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे अनगिनत उदाहरणों के बारे में सोचना चिंताजनक है जब ऐसे मामलों का पता ही नहीं चल पाता और निर्दोष जिंदगियां शोषण और दुर्व्यवहार के चक्र में फंस जाती हैं। हालांकि, मानव तस्करी (Human Trafficking) अंतरराष्ट्रीय अपराध के सबसे तेजी से बढ़ते रूपों में से एक है। विश्व स्तर पर अनुमानित 25 मिलियन वयस्क और बच्चे आधुनिक दासता या मानव तस्करी के अधीन हैं। भारत में 2021 तक मानव तस्करी के करीब 7 हजार मामले सामने आ चुके हैं। मौजूदा मामले में बच्चों की उम्र सीमा 9 से 16 साल के बीच है। जीवन के जिस प्रारंभिक चरण में बच्चों का पालन-पोषण किया जाना चाहिए, उन्हें शिक्षित किया जाना चाहिए और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाने चाहिए। इसके बजाय वे तस्करी की अंधेरी खाई में अपने अधिकारों, गरिमा और स्वतंत्रता से वंचित हो जाते हैं। मानव तस्करी सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह व्यक्तियों से उनकी स्वायत्तता, गरिमा और स्वतंत्रता छीन लेता है, उन्हें जबरन श्रम और यौन शोषण से लेकर अंग तस्करी और जबरन विवाह तक अकथनीय भयावहता का शिकार बनाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानव तस्करी से निपटने के प्रयास बहुआयामी और सहयोगात्मक होने चाहिए। कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और समुदायों को तस्करी नेटवर्क को खत्म करने, अपराधियों पर मुकदमा चलाने और बचे लोगों को व्यापक सहायता प्रदान करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इस जटिल मुद्दे को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए रोकथाम, सुरक्षा और अभियोजन साथ-साथ चलना चाहिए। निवारक उपायों को गरीबी, शिक्षा की कमी और सामाजिक असमानता जैसे असुरक्षा के मूल कारणों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जोखिम वाले व्यक्तियों को शिक्षा, आर्थिक अवसर और सामाजिक सहायता नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करने से शोषण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त समुदायों के भीतर जागरूकता बढ़ाने और सतर्कता को बढ़ावा देने से व्यक्तियों को तस्करी के मामलों को पहचानने और रिपोर्ट करने के लिए सशक्त बनाया जा सकता है। लिहाजा हम सभी को इस आधुनिक गुलामी को खत्म करने के अपने संकल्प में एकजुट होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चे को उनकी परिस्थितियों के बावजूद सम्मान और स्वतंत्रता का जीवन जीने का अवसर मिले।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2024 10:17:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Human trafficking: मानव अंगों की तस्करी के बाद अब &amp;#8216;मानव तस्करी&amp;#8217;!</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा में गिरोह सक्रिय,हांसी से 2 महिलाएं काबू सच कहूँ/संदीप सिंहमार। हिसार। एक तरफ जहाँ इंसानियत को जिंदा रखने के लिए हमारे संत महापुरुष (Human trafficking) व सरकार विभिन्न प्रकार की मुहिम चलाते आए हैं वहीं इस घोर कलयुग में अब इंसानियत अपने ही किए गए बुरे कर्मों पर रोती नजर आ रही है। ऐसा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/after-trafficking-of-human-organs-now-human-trafficking/article-47366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/human-trafficking-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">हरियाणा में गिरोह सक्रिय,हांसी से 2 महिलाएं काबू</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संदीप सिंहमार।</strong><br />
<strong>हिसार।</strong><br />
एक तरफ जहाँ इंसानियत को जिंदा रखने के लिए हमारे संत महापुरुष (Human trafficking) व सरकार विभिन्न प्रकार की मुहिम चलाते आए हैं वहीं इस घोर कलयुग में अब इंसानियत अपने ही किए गए बुरे कर्मों पर रोती नजर आ रही है। ऐसा भी नहीं है कि मानवता को शर्मसार करने वाले इन कारनामों का किसी को पता ना हो। पता होने के बावजूद भी ऐसे बुरे कारनामे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। मानव अंगों की तस्करी का मामला तो पहले देशभर में चर्चा का विषय रह चुका है। दिल्ली व नोएडा के मामले पूरे शोरगुल के साथ देशभर में गूंजते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक वर्तमान में मानव अंगों की तस्करी का मामला अभी शांत हो या फिर चोरी छिपे से चल रहा हो लेकिन हरियाणा में मानव तस्करी का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यह मामला हिसार जिले के हांसी पुलिस जिला का है। जहां दो महिलाओं को मानव तस्करी के आरोप में रंगे हाथों काबू किया गया है। इन महिलाओं की पहचान हांसी निवासी सोनिया व पायल के रूप में हुई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसी ‘डायन’ से कम नहीं ये महिलाएं | Human trafficking</h3>
<p style="text-align:justify;">इन महिलाओं को मां की ममता से दूर यदि ‘डायन’ की संज्ञा भी दी जाए तो भी कम है। दरअसल हांसी की रहने वाली सोनिया व पायल लंबे समय से मानव तस्करी के गिरोह से जुड़ी हुई हैं। स्थानीय पुलिस को इस बात की मुखबरी लग चुकी थी। यह दोनों महिलाएं पैसे कमाने के चक्कर में गरीब व असहाय लोगों के साथ बच्चा पालने की दुहाई देकर सौदेबाजी करती थी। आमतौर पर गरीब महिला को यह कहा जाता था कि आपका बच्चा पालने के लिए किसी अमीर आदमी के घर में दे दिया जाएगा। भोले-भाले लोग इनके चंगुल में फस भी जाते। सोनिया व पायल ने एक दिन पहले ही एक महिला से ऐसे ही बहला-फुसलाकर एक बच्चा ले लिया। यह महिलाएं इस बच्चे को मानव तस्करी के तहत किसी को बेचने की फिराक में थी। लेकिन तभी इसकी मुखबरी हांसी किला चौकी पुलिस को लग गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पुलिस ने बच्चे सहित किया गिरफ्तार</h3>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्चे सहित दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। मानव तस्कर सोनिया व पायल को पुलिस ने अदालत में पेश कर 5 दिन के रिमांड पर लिया है। इस रिमांड के दौरान 5 दिनों तक पुलिस गहनता से पूछताछ करेगी। इस दौरान गहन राज उगलवाने की कोशिश की जाएगी कि आखिर यह मानव तस्करी के इस गोरखधंधे में कैसे पड़ी? यह भी पूछताछ की जाएगी कि अब तक यह महिलाएं कितने बच्चों को मानव तस्करी के तहत बेच चुकी हैं? 5 दिनों की इस पूछताछ में मानव तस्करी के इस मामले के तार लंबे जुड़े होने के अंदाजा लगाया जा रहा है,क्योंकि स्थानीय स्तर पर मानव तस्करी का इस तरह का खेल कभी नहीं चल सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चा बदलने के मामले आ चुके हैं सामने | Human trafficking</h3>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल में डिलीवरी के दौरान बच्चे बदलने के मामले तो पहले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन इन मामलों को मानव तस्करी के मामलों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। फिर भी बच्चा बदलने के आरोप हमेशा वार्ड में काम करने वाली नर्सिंग स्टॉफ पर लगते रहे हैं। हिसार व भिवानी के अस्पतालों में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं लेकिन तब इस नजरिए से इन मामलों को किसी ने नहीं देखा। पर अब इस तरह के मामलों पर भी नजर रखने की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसी घटना ना घटे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 19:25:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिस्र में मानव तस्करी के जुर्म में 40 लोगों को कैद</title>
                                    <description><![CDATA[काहिरा (एजेंसी) मिस्र की एक अदालत ने मानव तस्करी के जुर्म में 40 लोगों को तीन से 16 वर्ष की कैद की सजा सुनायी है। अदालत ने मंगलवार को आधिकारिक दस्तावेजों की जालसाजी, सरकारी एजेंसियों की नकली मोहर बनाने, रिश्वत देने और वेश्यावृत्ति के जरिये मानव तस्करी करने के जुर्म में एक आपराधिक समूह के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>काहिरा (एजेंसी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिस्र की एक अदालत ने मानव तस्करी के जुर्म में 40 लोगों को तीन से 16 वर्ष की कैद की सजा सुनायी है। अदालत ने मंगलवार को आधिकारिक दस्तावेजों की जालसाजी, सरकारी एजेंसियों की नकली मोहर बनाने, रिश्वत देने और वेश्यावृत्ति के जरिये मानव तस्करी करने के जुर्म में एक आपराधिक समूह के 40 लोगों को तीन से 16 वर्ष की कैद की सजा सुनायी। जांच में खुलासा हुआ कि समूह के कुछ सदस्यों ने एक बालिका की नकली दस्तावेजों की मदद से अरब देशों में तस्करी की थी। दस्तावेजों में उसे एक विदेशी व्यक्ति की पत्नी बताया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी पता चला कि मिस्र की 13 लड़कियों के पास नकली जन्म प्रमाण पत्र थे जिनसे यह साबित होता था कि उन के बच्चे हैं। प्रमाण पत्र के मुताबिक लड़कियों की शादी उम्र से उन से 25 वर्ष से भी अधिक बड़े विदेशी नागरिकों के साथ हुई थी। देश की आधिकारिक भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ‘प्रशासनिक नियंत्रण प्राधिकरण’ ने गत वर्ष दिसंबर की शुरुआत में मानव तस्करी के मामलों में मिस्र, अरब और यूरोपीय नागरिकता वाले 20 लोगों को हिरासत में लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मिस्र में बढ़ती मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए 2016 में एक कानून बनाया गया था। इस कानून के तहत दोषियों को जेल की सजा और जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया। साथ ही तस्करी कर लाये गये शरणार्थियों को शरण देने और उनकी तस्करी में मदद करने वाले लोगों को भी कैद की सजा का प्रावधान है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2019 09:06:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानव तस्करी का शिकार हो रहे हैं मासूम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल सरहद पर मानव तस्करी की रोकथाम को ले कर काम कर रहे एक स्वयंसेवी संगठन के डायरेक्टर के अनुसार हमारे देश में मानव तस्करी के मामले में सीमांचल इलाका ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। इस संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों में 519 बच्चे गायब हुए, जिनमें लड़के और लड़कियां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-are-being-victim-of-human-trafficking/article-1590"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/child.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत-नेपाल सरहद पर मानव तस्करी की रोकथाम को ले कर काम कर रहे एक स्वयंसेवी संगठन के डायरेक्टर के अनुसार हमारे देश में मानव तस्करी के मामले में सीमांचल इलाका ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। इस संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों में 519 बच्चे गायब हुए, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शादी और नौकरी का लालच दे कर लड़कियों की तस्करी की जाती है। बच्चे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। खासकर लड़कियों को गायब करने के बाद उन्हें कोठों में पहुंचा कर देह धंधे में झोंक दिया जाता है। अपने आसपास खेलते-कूदते, स्कूल आते-जाते और छोटी-मोटी चीज खरीदने के लिए मुहल्ले की दुकानों पर जाने वाले बच्चों को उठाना अपराधियों के लिए काफी आसान होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवार और पड़ोस के लोगों की आपराधिक सोच और साजिश का पता लगा पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है। पता नहीं, कब किसके अंदर का शैतान जाग उठे और वह किसी मासूम बच्चे को अपनी खतरनाक साजिश का निशाना बना डाले। ऐसे में हर मां-बाप को अपने बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों की गुमशुदगी के बढ़ते आंकड़ों पर काबू पाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर साल 2014 में देशभर में ‘आॅपरेशन स्माइल’ शुरू किया गया। मार्च, 2017 में इस आॅपरेशन के तहत बिहार में 185 बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। सभी बच्चों की उम्र 10-11 साल की थी और उनमें से ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर लावारिस जिंदगी जी रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अपहरण कर बच्चों के मां-बाप से फिरौती वसूलने, बच्चों के गुर्दे, लिवर, आंख वगैरह अंगों को बेचने, उन्हें गुलाम की तरह घर और फार्महाउस में काम कराने, शीशा, सीमेंट, कालीन जैसे कारखानों में मजदूर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए गायब किया जाता रहा है। साथ ही घर से भटके हुए बच्चों को दलाल बहला-फुसला कर मानव तस्करी करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी वजह से गायब हुए बच्चों का पता नहीं चल पाता है। गायब किए गए बच्चों को बड़े शहरों के कारखानों में काम पर लगा दिया जाता है। इसके पीछे अपराधियों का बहुत बड़ा नेटवर्क काम करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के स्कूल, कॉलेज या कोचिंग, खेलने-कूदने, बाजार वगैरह जाने पर हम समय, हर जगह उनके मां-बाप का नजर रखना मुमकिन नहीं है। अक्सर ऐसा होता है कि किसी बच्चे के पिता दफ्तर में हैं, तो मां बाजार में। इस बीच उनका बच्चा स्कूल से घर आ जाता है और पड़ोस के ही अंकल या आंटी के पास मजे में रहता है। वे ही बच्चे को खाना भी खिला देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सबके पीछे इंसानी भरोसा ही काम करता रहा है। अब कुछ खुराफाती सोच वाले लोगों की वजह से यह भरोसा ही कठघरे में खड़ा हो चुका है। मासूमों को बचाने के लिए उनके मां-बाप को खासतौर पर सावधान रहने की जरूरत है। वे अपने बच्चों को यह बताते और समझाते रहें कि उन्हें किसके साथ कहीं जाना है या नहीं जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंखें मूंद कर किसी पर भी यकीन नहीं करना है चाहे आपका उससे कितना भी करीबी या गहरा रिश्ता हो। बच्चों को बताएं कि स्कूल आने-जाने के दौरान कोई आदमी अपने साथ चलने को कहे, तो न जाएं। बच्चों के दोस्तों और उनके माता-पिता के मोबाइल फोन नंबर और घर के पते अपने पास जरूर रखें। परिवार या पड़ोस के ऐसे लोगों के पास बच्चों को न जाने दें जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो। किसी अनहोनी का डर होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– नरेंद्र देवांगन</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-are-being-victim-of-human-trafficking/article-1590</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 22:49:37 +0530</pubDate>
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