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                <title>victim - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जिंदगी की जंग हार गई उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता, पिता ने कहा हमें पैसा नहीं इंसाफ चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता शुक्रवार देर रात आखिरी जिंदगी की जंग हार गई। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद परिवार सदमे में है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/unnao-rape-victim-dies/article-11671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/unnao-rape.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">उन्नाव जिले के बिहार कस्बे को छावनी में तब्दील कर दिया गया है । <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Unnao rape victim dies</span></span></h1>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>लखनऊ (सच कहूँ न्यूज</strong>)। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Unnao rape victim dies</span></span>)</strong> शुक्रवार देर रात आखिरी जिंदगी की जंग हार गई। परिजनों की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद परिवार सदमे में है। पिता ने कहा कि परिवार को एक पैसा नहीं चाहिए। पीड़ित की मौत के बाद उन्नाव जिले के बिहार कस्बे को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कस्बे में सन्नाटा पसरा है। ग्रामीण पिछले दो दिनों से अपने घरों में दुबके हुए हैं।  चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील गुप्ता ने दिन में बताया था कि ऐसे गंभीर मामलों में इलाज बहुत मुश्किल होता है।</p>
<h2>आरोपितों ने केरोसिन छिड़ककर लगाई थी आग</h2>
<ul>
<li><strong>25 वर्षीय पीडि़त युवती उन्नाव जिले के बिहार थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली थीं। </strong></li>
<li><strong> दो साल पहले शादी का झांसा देकर गांव का ही शिवम रायबरेली ले गया था। </strong></li>
<li><strong>शिवम व उसके दोस्त शुभम ने दुष्कर्म किया और वीडियो बना लिया। </strong></li>
<li><strong>शुभम को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी थी। </strong></li>
<li><strong>जबकि शिवम नौ माह रायबरेली जेल में रहकर 30 नवंबर को जमानत पर छूटा था। </strong></li>
<li><strong>आरोपित लगातार मुकदमा वापसी का दबाव बना रहा था। </strong></li>
<li><strong>गुरुवार सुबह पीडि़ता बैसवारा रेलवे स्टेशन जा रही थी।</strong></li>
<li><strong> गांव से लगभग तीन सौ मीटर दूर रास्ते में शिवम त्रिवेदी और उसके साथ कुछ लोगों ने रोका और केरोसिन छिड़ककर आग लगा दी और भाग निकले।</strong></li>
</ul>
<h2>अब मैं लड़ाई लड़ूंगी : पीड़िता की बहन</h2>
<p>पीड़िता से एक साल बड़ी बहन ने कहा, ‘‘हमारी बहन हमारा संबल थी। वह छोटी जरूर थी।लेकिन हमारे परिवार के लिए प्रेरणादायक थी। अब हम उसकी मौत के बाद चुप नहीं बैठेंगे। अब हम उसकी लड़ाई लड़ेंगे। जब तक आरोपियों को सजा नहीं मिलती। तब तक मेरी लड़ाई जारी रहेगी। मुझे तो आरोपियों ने पहले ही बदनाम कर दिया है। अब कुछ भी हो जाए। चाहे मुझे भी जला दिया जाए। लेकिन मैं अपनी बहन के हत्यारों को नहीं छोड़ूंगी। शव के पोस्टमाॅर्टम होने के बाद हम लोग सीधे उन्नाव अपने गांव जाएंगे। अंतिम संस्कार वहीं होगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2019 12:59:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आवारा पशुओं के कारण बेनूर हुई ‘सुलोचना’ की जिन्दगी</title>
                                    <description><![CDATA[नवनियुक्त डिप्टी कमिशनर ने दिया कार्रवाई का भरोसा नगर निगम मसले का हल निकालने में फेल बठिंडा(अशोक वर्मा)। नगर निगम द्वारा आवारा पशुओं का मसला हल करने में फेल रहने पर ‘सुलोचना’ की जिंदगी बेनूर हो गई है सुलोचना के पति बलजिन्दर कुमार की चार पांच दिन पहले आवारा पशु की चपेट में आने से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/sulochna-a-victim-of-stray-cattle/article-4912"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/salouchna-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">नवनियुक्त डिप्टी कमिशनर ने दिया कार्रवाई का भरोसा</h1>
<ul>
<li>नगर निगम मसले का हल निकालने में फेल</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(अशोक वर्मा)।</strong> नगर निगम द्वारा आवारा पशुओं का मसला हल करने में फेल रहने पर ‘सुलोचना’ की जिंदगी बेनूर हो गई है सुलोचना के पति बलजिन्दर कुमार की चार पांच दिन पहले आवारा पशु की चपेट में आने से मौत हो गई थी। यह विधवा कहती है कि यदि नगर निगम ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो उसके साथ ऐसा नहीं होना था। घटना वाले दिन बलजिन्दर अपने दोस्त के साथ उसके खेत गया था घर से जाते जाने समय उसने अपनी पत्नी को जल्द लौटने की बात कही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब इस परिवार का कभी न खत्म होने वाला इन्तजार शुरू हो गया है। बलजिन्दर अपने दो लड़कों के लिए जिंदगी के सुनहरे सपने बुन रहा था कि अचानक सड़क पर पशुओं के रूप में बैठी मौत ने एक झटके में सब कुछ खत्म कर दिया। बड़े बेटे अरुण ने कहा कि उनको कल को चाहे सारा कुछ मिल जाए परन्तु लाड़ -लड़ाने वाला पिता कभी नहीं मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शोक में डूबे परिवार को संबंधियों-स्नेहिया व पड़ोसी परिवार को ईश्वरीय आदेश मानने की बात कह रहे हैं परंतु जख़्म अभी ताजा हैं , जिन पर फिलहाल कोई मरहम काम नहीं कर रही है यह सिर्फ एक ‘सुलोचना’ की कहानी है आवारा पशुओं के कारण ओर भी कई सुलोचना हैं, जिनमें से किसी के बेटे की व किसी के पति का इन्तजार बनी हुई है जोकि शहर की सड़कों पर चली फिरती मौत के मुंह में जा समाएं हैं। शहर का लाईनों पार इलाका, माडल टाऊन, अमरीक सिंह रोड, फायर ब्रिगेड चौंक और सिविल अस्पताल सहित शहर के मुख्य बाजार आवारा पशुआें के गढ़ बने हुए हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">सरकार पक्का हल निकाले व पीड़ितों को दे मुआवजा</h1>
<p style="text-align:justify;">नागरिक चेतना मंच के अध्यक्ष पूर्व प्रिंसिपल बग्गा सिंह का कहना था कि सरकार को आवारा पशुओं कारण मारे गए व घायल हुए व्यक्तियों को उपयुक्त मुआवजा दे। उन्होंने कहा कि शहर में हजारों की संख्या में आवारा कुत्ते व पशु घूम रहे हैं जो कि चिंता का विषय है इन कारण लोगों को हादसों का शिकार होना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस समस्या खत्म करने की मांग की। बठिंडा के नये डिप्टी कमिशनर परनीत ने कहा कि वह नगर निगम के आधिकारियों के साथ मीटिंग कर मसले का हल निकालने की कोशिश करेंगे।</p>
<h1 style="text-align:center;">बठिंडा जिले में हुई 6 सालों में दर्जनभर से अधिक मौतें</h1>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2011 में दो साड़ों की लड़ाई में नयी बस्ती का एक निवासी मारा गया था इस तरह ही जुलाई 2012 में माता जीवी नगर में आवारा पशु की चपेट में आकर एक युवक की मौत हो गई थी अगस्त व अक्तूबर 2012 में भी दो मौतें हुई थीं। सितम्बर 2014 में बाबा फरीद कॉलेज के विद्यार्थी भी पशुआें की लपेट में आ कर दम तोड़ दिया था 14 सितम्बर 2016 को आवारा पशु की तरफ से टक्कर मारने से धोबियाना बस्ती का रमेश कुमार कोमा में चला गया है, जिसके परिवार को हाईकोर्ट ने 30 लाख रुपया मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यदि जिले को एक तरफ रखें तो केवल शहर में पिछले छह वर्षाां  दौरान दो दर्जन से अधिक मौतें हो चुकी हैं और घायलों की संख्या तो दस गुणा से अधिक बताई जा रही है।</p>
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<p>Sulochna, Victim, Stray Cattle, Punjab</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jul 2018 04:12:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन की बद्नीयति का शिकार होता गिलगित</title>
                                    <description><![CDATA[चीन की शह और सहायता से पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को हथियाने का वैधानिक दांव चल दिया हैं। पाकिस्तान की कैबीनेट ने 21 मई 2018 को गिलगित-बाल्टिस्तान के संबंध में पांचवा प्रांत बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। क्षेत्रीय विधानसभा ने भी इसका समर्थन किया है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/chinas-victim-of-infamy-is-gilgit/article-3878"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/gilgit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चीन की शह और सहायता से पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को हथियाने का वैधानिक दांव चल दिया हैं। पाकिस्तान की कैबीनेट ने 21 मई 2018 को गिलगित-बाल्टिस्तान के संबंध में पांचवा प्रांत बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। क्षेत्रीय विधानसभा ने भी इसका समर्थन किया है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का यह आदेश गिलगित-बाल्टिस्तान के विवादित क्षेत्र को पांचवे प्रांत के रूप में पाकिस्तान का नया राज्य बनाने का हथकंडा है। पाकिस्तान की इस पहल से गिलगित-बाल्टिस्तान में तो आक्रोश, आक्रमकता के रूप में दिखाई देने ही लगा है, भारत ने भी अपना तीखा विरोध जताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को बुलाकर कठोर शब्दों में कहा है कि ‘जम्मू-कश्मीर की तरह गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह जम्मू-कश्मीर का ही एक प्रांत है। लिहाजा पाकिस्तान इसे स्वतंत्र राज्य का दर्जा दे ही नहीं सकता है।’ इधर दोहरी चाल चलते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनियंग ने कहा है कि ‘कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक समस्या है, इसलिए इसका दोनों देशों द्वारा ही बातचीत के जरिए निराकरण करना मुनासिब होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही अड़ियल रुख अपनाते हुए यह भी कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान से गुजरने वाले पचास अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीईपीसी) से उसका रुख प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि इस गलियारे का उद्देश्य आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की पहल हैं।’ चुनियंग का यह बयान चीन की दोहरी मानसिकता व विस्तारवादी नीति को पुष्ट करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में सरकार भले ही लोकतांत्रिक हो, लेकिन उसपर नियंत्रण आखिरकार सेना और आईएसआई का ही रहता है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के ताजा बयानों ने इस तथ्य की पुष्टि भी कर दी है। बावजूद पाकिस्तान के कामचलाऊ प्रधानमंत्री शाहीद खकन अब्बासी ने अपनी कार्यप्रणाली को अहमियत देने के नजरिए से 2009 के उस आदेश को पलटकर एक ऐसा विवादित व जोखिम भरा कदम उठाया है, जिसके तहत गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के निवासियों को स्वशासन के अधिकार प्राप्त थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अब्बासी ने 20 मई 2018 को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा से एक ऐसा आदेश पारित करा दिया, जिसके तहत अब खनिज, सीईपीसी और जल विद्युत परियोजनाओं के बारे में फैसले लेने का अधिकार परिषद् की बजाए विधानसभा को मिल गया है। अब गिलगित-बाल्टिस्तान स्वायत्त परिषद् के पास केवल सलाहकार की भूमिका रह गई है। नतीजतन अवामी एक्शन कमेटी के नेता सुल्तान रईस के नेतृत्व में सभी क्षेत्रीय दल इस फैसले के विरोध में हुंकार भरने लग गए है। सुरक्षाबल इन प्रदर्शनों का क्रूरतापूर्वक दमन करने में लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां सेना और आईएसआई के जुल्मों से आजिज आ चुके विद्रोही ‘कश्मीर का कसाई, पाकिस्तान आर्मी’ और ‘आईएसआई सेना का वफादार कुत्ता’ जैसे नारे लगा रहे हैं। भारत का मुखर समर्थन मिलने के बाद पाक अधिकृत कश्मीर का हिस्सा माने जाने वाले गिलगिट-बल्टिस्तान में न केवल पाकिस्तान के विरुद्ध आंदोलन तेज हुए हैं, बल्कि आजादी की बात भी उठ रही है। यह पूरा क्षेत्र पाक अधिकृत कश्मीर की ही तरह स्वायत्त क्षेत्र की मान्यता रखता है। हालांकि यह क्षेत्र भारत के जम्मू-कश्मीर का ही विस्तार क्षेत्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंग्रेंजों ने आजादी के समय इसे भारत का हिस्सा माना था, लेकिन 1947 में हुए कबाईली हमले के बाद भारत के कब्जे से यह क्षेत्र निकल गया था और तबसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में इसे विवादित क्षेत्र माना जाता है। अपनी ऊंची पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह क्षेत्र पयर्टन और पर्वतारोहन के लिए भी दुनिया के लिए मशहूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन और पाकिस्तान का आर्थिक गलियारा भी इसी क्षेत्र से गुजर रहा है। चीन की विस्तारवादी नीति के तहत वह इस क्षेत्र की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति को बदलने की कवायद में भी लगा है। इसलिए इस गलियारे का विरोध भी स्थानीय लोग कर रहे हैं। दूसरी तरफ वैश्विक मानवाअधिकारवादी सरंक्षण संस्थाओं का कहना है कि इन क्षेत्रों में मानवाधिकारों का हनन इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है कि उनको रेखांकित किया जाना मुश्किल है। यदि यह क्षेत्र पाकिस्तान के नए राज्य के रूप में आकार ले लेता है तो यहां विद्रोहियों का दमन और बढ़ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंग्रेजों ने भारत व पाकिस्तान के साथ ब्लोचिस्तान को भी एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया था साढ़े सात महीने तक यहां स्वतंत्र शासन रहा। किंतु, इस पर मोहम्मद अली जिन्ना ने 17 मार्च 1948 को सेना के बूते अवैध कब्जा कर लिया था। तभी से यहां राजनीतिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक आवाज उठाने वाले लोगों पर दमन और अत्याचार आज तक जारी हैं। बलूचों की मात्र भाषा ब्राहुई का विकास उर्दू भाषा थोप कर ठप कर दिया गया है। जबकि यह बेहद प्राचीन भाषा मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बलूच अपनी भाषा को लेकर बेहद संजीदा हैं। पाक के विरुद्ध ब्लोचिस्तान के संघर्ष में भाषा अहम मुद्दा है। पाक से बांग्लादेश के अलग होने का प्रमुख कारण बांग्ला भाषा रही है। इस नाते पाक बलूच में ब्राहुई भाषा के दमन में कब्जा करने के समय से ही लगा है। पाक की कुल भूमि का 40 फीसदी हिस्सा यहीं है। लेकिन इसका विकास नहीं हुआ है। करीब 1 करोड़ 30 लाख की आबादी वाले इस हिस्से में सर्वाधिक बलूच हैं। पाक और ब्लूचिस्तान के बीच संघर्ष 1945, 1958, 1962-63, 1973-77 में होता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">77 में पाक द्वारा दमन के बाद करीब 2 दशक तक शांति रही। लेकिन 1999 में परवेज मुशर्रफ सत्ता में आए तो उन्होंने बलूच भूमि पर सैनिक अड्डे खोल दिए। इसे बलूचों ने अपने क्षेत्र पर कब्जे की नाजायज कोशिश माना और फिर से संघर्ष तेज हो गया। इसके बाद यहां कई अलगाववादी आंदोलन वजूद में आ गए। इनमें सबसे प्रमुख ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी प्रमुख है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीओके, गिलगित-बाल्टिस्तान और ब्लूचिस्तान पाक के लिए बहिकृत क्षेत्र हैं। पीओके की जमीन का इस्तेमाल वह, जहां भारत के खिलाफ शिविर लगाकर गरीब व लाचार मुस्लिम किशोरों को आतंकवादी बनाने का प्रशिक्षण दे रहा है, वहीं ब्लोचिस्तान की भूमि से खनिज व तेल का दोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति बहाल किए हुए है। यहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीब महिलाओं को जबरन वेश्यावृत्ति के धंधों में धकेल दिया जाता है। 50 फीसदी नौजवानों के पास रोजगार नहीं हैं। 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। 88 प्रतिशत क्षेत्र में पहुंच मार्ग नहीं हैं। बावजूद पाकिस्तान पिछले 70 साल से यहां के लोगों का बेरहमी से खून चूसने में लगा है। जो व्यक्ति अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाता है, उसे सेना, पुलिस या फिर आइएसआई उठा ले जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे पाक में शिया मस्जिदों पर हो रहे हमलों के कारण पीओके के लोग मानसिक रूप से आतंकित हैं। दूसरी तरफ पीओके के निकट खैबूर पख्तूनख्वा प्रांत और कबाइली इलाकों में पाक फौज और तालिबानियों के बीच अकसर संघर्ष जारी रहता है, इसका असर गुलाम कश्मीर को भोगना पड़ता है। नतीजतन यहां खेती-किसानी, उद्योग-धंधे, शिक्षा-रोजगार और स्वास्थ्य-सुविधाएं तथा पर्यटन सब चैपट हैें।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लोचिस्तान ने 70 साल पहले हुए पाक में विलय को कभी स्वीकार नहीं किया। लिहाजा वहां अलगाव की आग निरंतर बनी हुई है। नतीजतन 2001 में यहां 50 हजार लोगों की हत्या पाक सेना ने कर दी थी। इसके बाद 2006 में अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले 20 हजार सामाजिक कार्यकतार्ओं को अगवा कर लिया गया था, जिनका आज तक पता नहीं है। 2015 में 157 लोगों के अंग-भंग किए गए। फिलहाल पुलिस ने जाने-माने एक्टिविस्ट बाबा जान को भी हिरासत में लिया हुआ है। पिछले 16 साल से जारी दमन की इस सूची का खुलासा अमेरिका के वॉशिंगटन में कार्यरत संस्था गिलगिट-ब्लूचिस्तान नेशनल कांग्रेस ने किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अब संघर्षरत गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूच नागरिकों को इतनी ताकत मिल गई है कि उन्होंने चीनी दूतावास के समक्ष प्रदर्शन करने की हिमाकत भी कर चुके हैं। इन जनविद्रोहियों ने इस मौके पर कहा था कि वे चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहे आर्थिक गलियारे के पक्ष में नहीं हैं। बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच हुई इस संधि का एक मात्र मकसद गिलगित-बाल्टिस्तान और ब्लूचिस्तान को लूटना है।</p>
<p style="text-align:justify;">नतीजतन वे समझौते को नहीं मानते। गोया, यहां के लोग भारत की ओर ताक रहे हैं। लिहाजा भारत को चाहिए कि वह पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किए गए प्रस्ताव के उल्लंघन का पुरजोर विरोध करे और स्थानीय जनता की आवाज को वैश्विक मंच दे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रमोद भार्गव</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jun 2018 08:24:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल गैंगरेप : पुलिस की बजाय विक्टिम के पेरेंट्स ने ढूंढा आरोपी</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल। शहर के हबीबगंज आरपीएफ थाने से 100 मीटर की दूरी पर स्टूडेंट से गैंगरेप करने का मामला सामने आया। 31 अक्टूबर को शाम करीब 7.30 बजे 4 आरोपी बारी-बारी से ज्यादती करते रहे लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। किसी तरह लड़की रात 10 बजे आरपीएफ थाना पहुंची। लेकिन रेलवे पुलिस ने कुछ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bhopal-gangrape-accused-arrest/article-3484"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> शहर के हबीबगंज आरपीएफ थाने से 100 मीटर की दूरी पर स्टूडेंट से गैंगरेप करने का मामला सामने आया। 31 अक्टूबर को शाम करीब 7.30 बजे 4 आरोपी बारी-बारी से ज्यादती करते रहे लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। किसी तरह लड़की रात 10 बजे आरपीएफ थाना पहुंची। लेकिन रेलवे पुलिस ने कुछ नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार सुबह विक्टिम और उसके माता-पिता एमपी नगर पुलिस स्टेशन गए लेकिन वहां भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। एमपी नगर थाने से घटनास्थल जाते वक्त पेरेंट्स एक कॉम्प्लेक्स के पास रुके और वहीं बेटी की निशानदेही पर आरोपी को पकड़ लिया। रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए पेरेंट्स आरपीएफ, एमपी नगर थाने भटकते रहे। काफी मशक्कत के बाद हबीबगंज थाने में रिपोर्ट लिखी गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पेरेंट्स ने आरोपी को पकड़ा</h2>
<p style="text-align:justify;">1 नवंबर को एमपी नगर से हबीबगंज थाने जाते वक्त लड़की और उसके माता-पिता मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के पास कुछ देर के लिए रुक गए। वे लड़की के साथ हुई वारदात वाली जगह को देखने के लिए जा रहे थे। तभी पास की झुग्गी में रहने वाले गोलू पर लड़की की नजर पड़ गई।विक्टिम ने इशारा करते हुए अपने माता-पिता को कहा कि ये वही है, जिसने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर दरिंदगी की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद लड़की के माता-पिता ने मिलकर आरोपी को पकड़ लिया। उसे लेकर हबीबगंज थाने पहुंचे। यहां पूरा वाकया बताया तो पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू कर दी। टीआई के मुताबिक, कुछ देर बाद ही एक टीम उसके दूसरे साथी को पकड़ लाई। उससे लड़की का मोबाइल फोन और कान के बूंदे भी मिल गए। लड़की और उसके माता-पिता को लेकर मौके पर पहुंचे। जीआरपी को वहीं बुलाया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Nov 2017 05:41:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बराला ने चुप्पी तोड़ी, कहा- पीड़ित लड़की बेटी जैसी, जांच पर कोई दबाव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। बेटे के आइएएस अफसर की बेटी से छेड़छाड़ के मामले में फंसने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रधान सुभाष बराला पहली बार इस मामले पर सामने आए हैं। बराला ने पीड़ित युवती को अपनी बेटी की तरह बताया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में जांच को प्रभावित करने का कोई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/barala-says-victim-girl-like-my-daughter/article-2984"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/barala.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)।</strong> बेटे के आइएएस अफसर की बेटी से छेड़छाड़ के मामले में फंसने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रधान सुभाष बराला पहली बार इस मामले पर सामने आए हैं। बराला ने पीड़ित युवती को अपनी बेटी की तरह बताया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में जांच को प्रभावित करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है और न ही कोई दबाव बनाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बराला ने तीन दिन के अंतराल के बाद चुप्पी तोड़ी है। इस मामले को लेकर विपक्ष का हमला तेज होने के बाद सुभाष बराला ने मंगलवार को बयान जारी कर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि वर्णिका मेरी बेटी की तरह है। इस मामले की चंडीगढ़ पुलिस जांच कर रही है और इसे प्रभावित करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। बराला ने कहा कि पूरे मामले में किसी तरह को कोई दबाव नहीं डाला गया है और न ही ऐसा कोई प्रयास किया जाएगा। पुलिस इसकी तत्परता से जांच कर रही है और उस पर विश्वास किया जाना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जो भी दोषी हो पुलिस और कानून उस पर कारर्वाई करे</h2>
<p style="text-align:justify;">बराला ने कहा कि पुलिस और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। भाजपा का हमेशा से महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता में विश्वास रहा है। इस मामले में भी पार्टी का ऐसा ही रुख है। इस मामले में जो भी दोषी हो पुलिस और कानून उस पर कारर्वाई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से बराला निशाने पर हैं और दो दिनों से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से उनक इस्तीफे की चर्चाएं भी चलती रहीं। हालांकि भाजपा ने इन चर्चाओं को निराधार करार दिया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 07:30:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंकी अहमद डार को मानवाधिकार आयोग ने बताया पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश सरकार को 10 लाख मुआवजा देने को कहा  मेजर गोगोई ने सेना की जीप पर बांध कर घूमाया था श्रीनगर। जम्मू कश्मीर मानवाधिकार आयोग ने एक अजीब फैसला सुनाते हुए बीजेपी-पीडीपी की साझा सरकार को फारूक अहमद डार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा है। बता दें कि फारुक अहमद डार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/human-rights-commissioner-told-terror-ahmed-dar-is-victim/article-2190"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/terror1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> प्रदेश सरकार को 10 लाख मुआवजा देने को कहा</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong> मेजर गोगोई ने सेना की जीप पर बांध कर घूमाया था</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर।</strong> जम्मू कश्मीर मानवाधिकार आयोग ने एक अजीब फैसला सुनाते हुए बीजेपी-पीडीपी की साझा सरकार को फारूक अहमद डार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा है। बता दें कि फारुक अहमद डार वही हैं, जिन्हें पत्थरबाजों से निपटने के लिए सेना जीप के बोनट से बांधकर ढाल की तरह इस्तेमाल किया था। घाटी में पत्थरबाजों के बीच घिरे सेना के जवानों को बचाने के लिए मेजर नितिन लितुल गोगोई ने डार को जीप के बोनट से बांधने का फैसला लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मेजर के इस फैसले के बाद विवाद मच गया था। आयोग के आदेश के बाद मेजर गोगोई के डार को जीप के बोनट से बांधने के फैसले पर बार फिर विवाद उठने की आशंका है, क्योंकि आयोग के फैसले के बाद यह साबित हो गया है कि फारूक अहमद डार पीड़ित हैं। हालांकि सेना डार को पत्थरबाज कहती रही है और बीजेपी खुलकर सेना के समर्थन में है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 07:19:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मौड़ बम धमाका: इन्साफ के लिए भटक रहे पीड़ित परिवार</title>
                                    <description><![CDATA[छ: माह बीत जाने के बाद भी नहीं किए वायदे पूरे तीन बच्चों सहित छह जनों की हुई थी मौत घायल अंकुश दो माह बाद हार गया था जिंदगी की जंग भटिंडा(अशोक वर्मा)। बीती विधान सभा चुनावों के लिए चुनाव प्रचार की समाप्ति से पहले मौड़ मंडी में हुए बम धमाके में मारे गए बच्चों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/maur-bomb-blast-victim-families-wandering-for-justice/article-1991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/blast-case.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">छ: माह बीत जाने के बाद भी नहीं किए वायदे पूरे</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>तीन बच्चों सहित छह जनों की हुई थी मौत</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>घायल अंकुश दो माह बाद हार गया था जिंदगी की जंग</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भटिंडा(अशोक वर्मा)।</strong> बीती विधान सभा चुनावों के लिए चुनाव प्रचार की समाप्ति से पहले मौड़ मंडी में हुए बम धमाके में मारे गए बच्चों के परिवारों को इन्साफ के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने का वायदा डिप्टी कमिश्नर भटिंडा ने उस वक्त किया था जब दो माह बाद मौत के मुंह में जा समाए बच्चे सौरव सिंगला का परिवार व सार्वजनिक पक्षों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। पीड़ित परिवारों का दर्द है कि छह माह बाद भी पुलिस इस मामले को सुलझा नहीं सकी और न ही उनके साथ किए वायदों को पूरा किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन धमाकों दौरान तीन बच्चों सहित छह जनों की मौत हो गई थी, जबकि घायल हुआ बच्चा अंकुश दो माह बाद जिंदगी की जंग हार गया था। मौड़ मंडी में राकेश कुमार की किरयाणा की छोटी सी दुकान है परंतु उसके दुखों का पहाड़ सबसे बड़ा है। चुनावी हिंसा की आग में राकेश कुमार का सातवीं कक्षा में पढ़ता पुत्र सौरव सिंगला जल गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस परिवार को अब भी अपने पुत्र के आने का इंतजार है। इसी तरह खुशदीप सिंह के घर का चिराग सदा के लिए बुझ गया। नौवीं कक्षा में पढ़ता जपसिमरन सिंह इस धमाके में दुनिया से विदा हो गया परिवार में पीछे जपसिमरन की छोटी बहन बची है। जपसिमरन के दादा डॉक्टर बलबीर सिंह ने भरे मन से कहा कि पंजाब चुनाव में कोई भी पक्ष जीता हो परंतु उन्होंने जंग हार दी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">परिवारों का न खत्म होने वाला इंतजार शुरू</h2>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक कार्यकर्ता राकेश नरूला का कहना था कि इस बम धमाके में जान गवाने वाले बच्चों के मां-बाप के अरमान राख हो गए हैं और परिवारों का न खत्म होने वाला इंतजार शुरू हो गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जल्द होंगे मामले हल: डिप्टी कमिश्नर</h2>
<p style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर भटिंडा दिपारवा लाकड़ा का कहना था कि दो पीड़ित परिवारों को नौकरी देने की मंजूरी मिल गई है जिनको जल्द ही नियुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाकी पांच बच्चों का केस सरकार के पास भेजा हुआ है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में मसला हल कर लिया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अब बची है तो यादों की पिटारी</h2>
<p style="text-align:justify;">धमाके में मारे गए अंकुश के परिवार के साथ भी ऐसी ही घटना घटित हुई है। अंकुश सहित मौड़ धमाके में मौत के मुंह में जा समाए चारों बच्चों की दोस्ती थी जोकि जिंदगी की पगडंडियों पर चलने से पहले ही विदा हो गए। गांव संदोहा का चौथी कक्षा में पढ़ता रिपनदीप सिंह भी इन दोस्तों के साथ दोस्ती निभाने का वायदा पूरा कर गया।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपनदीप सिंह के होश संभालने से पहले ही उसके पिता इस जहान से चल बसे तो पुत्र के हौसले के साथ मां ने अपने स्वामी की तस्वीर संभाल ली। अब इस दुखी मां के पास दो तस्वीरें हो गई हैं जिनकी याद उससे बर्दाश्त नहीं होती । यह बच्चे घटना वाली जगह के नजदीक गली की नुक्कड़ पर खेल रहे थे परंतु बम धमाके ने उनकी खेल को ऐसा बिगड़ा कि अब पीछे परिवारों के पास दुखों की गठरी और यादों की पिटारी बची है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/maur-bomb-blast-victim-families-wandering-for-justice/article-1991</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 00:22:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसिड अटैक की शिकार पीड़िता पर फिर फेंका एसिड</title>
                                    <description><![CDATA[यूपी के CM योगी आदित्यनाथ पीड़िता से मिलने पहुंचे थे अस्पताल लखनऊ: एसिड अटैक की शिकार हो चुकी युवती पर एक बार फिर एसिड फेंकने की घटना सामने आई है। पीड़िता के लखनऊ स्थित हॉस्टल में घुसकर किसी अनजान शख्स ने वारदात को अंजाम दिया। बता दें कि यह वहीं युवती है, जिस पर मार्च माह में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/acid-attack-victim-attacked-again-with-acid/article-1849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/acid.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">यूपी के CM योगी आदित्यनाथ पीड़िता से मिलने पहुंचे थे अस्पताल</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ:</strong> एसिड अटैक की शिकार हो चुकी युवती पर एक बार फिर एसिड फेंकने की घटना सामने आई है। पीड़िता के लखनऊ स्थित हॉस्टल में घुसकर किसी अनजान शख्स ने वारदात को अंजाम दिया। बता दें कि यह वहीं युवती है, जिस पर मार्च माह में ट्रेन में एसिड अटैक हुआ था। जिसके बाद यूपी के CM योगी आदित्यनाथ पीड़िता से मिलने अस्पताल पहुंचे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, रायबरेली की रहने वाली यह युवती अलीगंज स्थित श्रमजीवी हॉस्टल में रहती है। वह निजी कंपनी में जॉब करती है। शनिवार शाम वह हॉस्टल के वॉशरूम में मुंह धोने के लिए पहुंची थी, उसी दौरान किसी अनजान शख्स ने उसके ऊपर तेजाब फेंक दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती की चीख-पुकार सुन हॉस्टल के लोग वहां जमा हो गए। गार्ड ने फौरन पुलिस को सूचना देते हुए युवती को अस्पताल पहुंचाया।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2017 23:23:28 +0530</pubDate>
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                <title>मानव तस्करी का शिकार हो रहे हैं मासूम</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-are-being-victim-of-human-trafficking/article-1590"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/child.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत-नेपाल सरहद पर मानव तस्करी की रोकथाम को ले कर काम कर रहे एक स्वयंसेवी संगठन के डायरेक्टर के अनुसार हमारे देश में मानव तस्करी के मामले में सीमांचल इलाका ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। इस संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों में 519 बच्चे गायब हुए, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शादी और नौकरी का लालच दे कर लड़कियों की तस्करी की जाती है। बच्चे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। खासकर लड़कियों को गायब करने के बाद उन्हें कोठों में पहुंचा कर देह धंधे में झोंक दिया जाता है। अपने आसपास खेलते-कूदते, स्कूल आते-जाते और छोटी-मोटी चीज खरीदने के लिए मुहल्ले की दुकानों पर जाने वाले बच्चों को उठाना अपराधियों के लिए काफी आसान होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवार और पड़ोस के लोगों की आपराधिक सोच और साजिश का पता लगा पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है। पता नहीं, कब किसके अंदर का शैतान जाग उठे और वह किसी मासूम बच्चे को अपनी खतरनाक साजिश का निशाना बना डाले। ऐसे में हर मां-बाप को अपने बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों की गुमशुदगी के बढ़ते आंकड़ों पर काबू पाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर साल 2014 में देशभर में ‘आॅपरेशन स्माइल’ शुरू किया गया। मार्च, 2017 में इस आॅपरेशन के तहत बिहार में 185 बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। सभी बच्चों की उम्र 10-11 साल की थी और उनमें से ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर लावारिस जिंदगी जी रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अपहरण कर बच्चों के मां-बाप से फिरौती वसूलने, बच्चों के गुर्दे, लिवर, आंख वगैरह अंगों को बेचने, उन्हें गुलाम की तरह घर और फार्महाउस में काम कराने, शीशा, सीमेंट, कालीन जैसे कारखानों में मजदूर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए गायब किया जाता रहा है। साथ ही घर से भटके हुए बच्चों को दलाल बहला-फुसला कर मानव तस्करी करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी वजह से गायब हुए बच्चों का पता नहीं चल पाता है। गायब किए गए बच्चों को बड़े शहरों के कारखानों में काम पर लगा दिया जाता है। इसके पीछे अपराधियों का बहुत बड़ा नेटवर्क काम करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के स्कूल, कॉलेज या कोचिंग, खेलने-कूदने, बाजार वगैरह जाने पर हम समय, हर जगह उनके मां-बाप का नजर रखना मुमकिन नहीं है। अक्सर ऐसा होता है कि किसी बच्चे के पिता दफ्तर में हैं, तो मां बाजार में। इस बीच उनका बच्चा स्कूल से घर आ जाता है और पड़ोस के ही अंकल या आंटी के पास मजे में रहता है। वे ही बच्चे को खाना भी खिला देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सबके पीछे इंसानी भरोसा ही काम करता रहा है। अब कुछ खुराफाती सोच वाले लोगों की वजह से यह भरोसा ही कठघरे में खड़ा हो चुका है। मासूमों को बचाने के लिए उनके मां-बाप को खासतौर पर सावधान रहने की जरूरत है। वे अपने बच्चों को यह बताते और समझाते रहें कि उन्हें किसके साथ कहीं जाना है या नहीं जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंखें मूंद कर किसी पर भी यकीन नहीं करना है चाहे आपका उससे कितना भी करीबी या गहरा रिश्ता हो। बच्चों को बताएं कि स्कूल आने-जाने के दौरान कोई आदमी अपने साथ चलने को कहे, तो न जाएं। बच्चों के दोस्तों और उनके माता-पिता के मोबाइल फोन नंबर और घर के पते अपने पास जरूर रखें। परिवार या पड़ोस के ऐसे लोगों के पास बच्चों को न जाने दें जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो। किसी अनहोनी का डर होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– नरेंद्र देवांगन</strong></p>
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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 22:49:37 +0530</pubDate>
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