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                <title>Legislative Assembly - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>हरियाणा विधानसभा सत्र का दूसरा दिन: गांव में विकास कार्य का उठा मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही जारी है। वहीं महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने शून्यकाल के दौरान पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपने हल्के में जलभराव से खराब हुई फसलों के मुआवजे का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/second-day-of-haryana-legislative-assembly-session/article-41518"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/haryana-legislative-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही जारी है। वहीं महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने शून्यकाल के दौरान पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपने हल्के में जलभराव से खराब हुई फसलों के मुआवजे का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को मुआवजा दे। उधर शीतकालीन सत्र की दूसरे दिन की कार्यवाही में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला टूटी सड़कों को लेकर घिर गए। इसराना से विधायक ने कहा कि टूटी सड़कें नहीं बनाई जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">दुष्यंत चौटाला ने कहा कि कुछ सड़कें डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में हैं। बाकी के टेंडर लग रहे हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि जो सड़कें डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में हैं, उन्हें तो तुरंत ठीक कर सकते हैं। उसके लिए टेंडर की भी जरूरत नहीं। इस पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि इनकी लिस्ट दे दें तो तुरंत काम करा दिया जाएगा। वहीं शून्यकाल के दौरान नए सरपंचों को काम कराने के वित्तीय अधिकार घटाने को लेकर भी मुद्दा गूंजा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी होगा ओपीएस का मुद्दा: हुड्डा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विधानसभा में विपक्ष और कांग्रेस विधायक दल के नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि पार्टी सरकारी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना(ओपीएस) बहाल करने के लिये प्रतिबद्ध है तथा राज्य विधानसभा के अगले चुनावों में कांग्रेस का यह मुद्दा होगा। हुड्डा ने विधानसभा परिसर में विपक्ष के नेता के कक्ष में एक विशेष सवाल पर यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ओपीएस की मांग जायज है तथा पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में इसे मुद्दा बनाएगी और सत्ता में आने पर इसे अवश्य लागू करेंगे। उन्होंने दावा किया कि समाज का हर वर्ग राज्य की भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार से परेशान है। उन्होंने दावा किया कि स्कूलों में शिक्षक और अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। राज्य में सड़कों में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में सड़कें हैं। महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है। किसान और व्यापारी बद्हाल हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उमड़ रहा जन सैलाब इस बात का द्योतक है कि राज्य की मौजूदा सरकार के दिन लद गये हैं। जनता अब कांग्रेस को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गांव में विकास कार्य का उठा मुद्दा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गांव में विकास कार्य करवाने के लिए सरपंच की पावर को 20 लाख रुपए से घटाकर 2 लाख रुपए करने का मुद्दा सदन में जमकर गूंजा। जजपा विधायक जोगीराम सिहाग और कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने कहा कि यह फैसला बिल्कुल गलत है। जोगीराम सिहाग ने कहा कि सरपंचों का पावर को बढ़ाना चाहिए। इसी के साथ 2 लाख रुपए से ज्यादा के विकास कार्यों के लिए ई- टेंडरिंग के जरिए ठेकेदार को टेंडर देने को भी उन्होंने गलत बताया। शीशपाल केहरवाला ने भी सरपंचों की पावर को बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने की मांग की।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Dec 2022 14:43:56 +0530</pubDate>
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                <title>विस अध्यक्ष ने शहीद कैप्टन रोहित कौशल को पुष्प चक्र अर्पित कर दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[-गांव जलौली में निमार्णाधीन सामुदायिक केन्द्र का नामकरण शहीद कैप्टन रोहित कौशल के नाम पर किया जाएगा पंचकूला(चरण सिंह)। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने शहीद कैप्टन रोहित कौशल (Martyr Captain Rohit Kaushal) के 27वें शहीदी दिवस के अवसर पर आज उनके पैत्रिक गांव जलौली में शहीदी स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/martyr-captain-rohit-kaushal/article-39775"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/martyr-captain-rohit-kaushal.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">-गांव जलौली में निमार्णाधीन सामुदायिक केन्द्र का नामकरण<br />
शहीद कैप्टन रोहित कौशल के नाम पर किया जाएगा</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>पंचकूला(चरण सिंह)।</strong> हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने शहीद कैप्टन रोहित कौशल <strong>(Martyr Captain Rohit Kaushal)</strong> के 27वें शहीदी दिवस के अवसर पर आज उनके पैत्रिक गांव जलौली में शहीदी स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा करी कि गांव जलौली में निमार्णाधीन सामुदायिक केन्द्र का कार्य पूरा होने के उपरांत इसका नामकरण शहीद कैप्टन रोहित कौशल के नाम पर किया जाएगा। इस मौके पर शहीद कैप्टन रोहित कौशल के पिता एसएस कौशल, माता श्रीमती वीना कौशल, नगर निगम के महापौर कुलभूषण गोयल, आयुक्त नगर निगम वीरेंद्र लाठर, एसडीएम डॉ. ऋचा राठी ने भी शहीद के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन् किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नगर निगम द्वारा 6 लाख की लागत से विकसित शहीद पार्क का किया उद्घाटन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">गुप्ता ने गांव जलौली में नगर निगम पंचकूला द्वारा 6 लाख रूपए की लागत से विकसित शहीद कैप्टन रोहित कौशल पार्क का उदघाटन किया। इसके अलावा उन्होंने स्मारक स्थल पर आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं को बैज लगाया और प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया। उन्होंने शहीद के परिवार की ओर से जरूतरमंद लोगों की मदद के लिए दान की गई एंबुलेंस का भी विधिवत श ुभारंभ किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>मुठभेड़ में उग्रवादियों से लड़ते हुए वीरगति को हुए प्राप्त: गुप्ता</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि कैप्टन रोहित कौशल आज ही के दिन 11 नवंबर 1995 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। इससे पहले भी कई मौके आए जब उन्होंने दुश्मनों और आतंकवादियों से लोहा लिया और देश की रक्षा के लिए उन्हें मौत के घाट उतार दिया। भारत सरकार द्वारा राष्ट्र के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान करने में उनके वीरतापूर्ण कार्य, नेतृत्व, साहस और समर्पण के उत्कृष्ट उदाहरण के लिए उन्हें मरणोपरांत वीरता पुरस्कार (सेना पदक) से सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:  </strong><a href="http://10.0.0.122:1245/mithibai-college/">बेजुबान जीवों की आवाज बने मीठीबाई क्षितिज के छात्र</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">सामुदायिक केन्द्रों का नामकरण शहीदों के नाम पर किया जा रहा है</h3>
<p style="text-align:justify;">गुप्ता ने कहा कि पंचकूला में सभी सामुदायिक केन्द्रों का नामकरण उन वीर शहीदों के नाम पर किया जा रहा है जिन्होंने देश को आजाद करवाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया ताकि हमारी युवा पीढी देश के लिए अपनी शहादत देने वालों को याद रख सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा प्रत्येक शहीद स्मारक की देख-रेख के लिए एक समिति का गठन किया गया है जिसमें शहीद के परिजनों के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के पार्षद और नगर निगम के कार्यकारी अभियंता को शामिल किया गया है। स्मारकों की मरम्मत और देख-रेख पर आने वाला खर्च नगर निगम द्वारा वहन किया जाता है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Nov 2022 21:13:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सदन का एक दिन केवल महिलाओं के नाम</title>
                                    <description><![CDATA[यूपी विधानसभा महिला सत्र के आयोजन के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि देश की आजादी में रानी लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई लोधी, चांद बीबी, कस्तूरबा गांधी और सरोजिनी नायडू समेत कई महिलाओं का योगदान रहा है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/assembly-session-of-women-in-up/article-38544"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/up-assembly.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>यूपी विधानसभा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">महिला सत्र के आयोजन के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि देश की आजादी में रानी लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई लोधी, चांद बीबी, कस्तूरबा गांधी और सरोजिनी नायडू समेत कई महिलाओं का योगदान रहा है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारत के सबसे बड़े विधानमंडल का यह सत्र देश के सामने एक उदाहरण पेश करेगा कि आखिर महिला सदस्य क्या बोलना चाहती है।</p>
<div><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/one-person-killed-in-gas-cylinder-explosion-in-tamil-nadu/">तमिलनाडु में गैस सिलेंडर फटने से एक व्यक्ति की मौत, छह लोग घायल</a></div>
<h3 style="text-align:justify;">सोनम लववंशी स्वतंत्र लेखिका एवं शोधार्थी</h3>
<p style="text-align:justify;">यूपी में महिलाओं के लिए सिर्फ महिलाओं के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया जाना अच्छी शुरूआत है। इस सबके बीच अच्छी बात यह भी रही कि ऐसे सत्र को लेकर किसी भी दल ने कोई खोट नहीं निकाला। सरकार के इस फैसले का विरोध किसी पार्टी द्वारा किया जाना अनुचित भी था। यह सोच भी अतिशयोक्ति ही थी। क्योंकि, जिस देश में पुरुषों से अधिक संख्या में महिलाएं बढ़-चढ़कर मतदान में भाग लें, वहां ऐसे कदम का विरोध होना असंभव ही है। ऐसे मुद्दों पर सर्वसम्मति से काम होना भी चाहिए। यूपी में विपक्ष के नेता अखिलेश यादव का विधानसभा में उठाया गया यह सवाल कि महिलाओं के लिए एक दिन या एक सत्र काफी नहीं है, प्रशंसनीय बयान है। देखा जाए तो बात सही भी है। आधी आबादी के लिए किसी विधानसभा में सिर्फ एक दिन या एक सत्र ही विशेष रूप से आयोजित हो, यह न्यायोचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूपी में विधानसभा की सदस्य संख्या 403 है। जिसमें महिला विधायकों की कुछ संख्या 47 है। इनमें 22 महिलाएं ऐसी हैं, जो पहली बार विधायक बनकर सदन में पहुंची और 100 सदस्यीय विधान परिषद में मात्र 6 महिलाएं ही हैं। ऐसे में प्रथम दृष्ट्या यह आंकड़ा काफी कम है। दूसरी बात यह कि महिलाओं से जुड़े अनगिनत मुद्दे हैं, जो आम सत्र के दौरान चर्चा का विषय नहीं बन पाते। ऐसे में महिलाओं के लिए विशेष सत्रों का आयोजन देश की सभी विधानसभाओं और लोकसभा में भी होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी तरफ से यह अनूठी पहल शुरू करके देश के बाकी राज्यों को नया रास्ता दिखाया है। वक्त की नजाकत भी यही कहती है, कि महिलाओं के विषयों को लेकर विस्तृत रूप से विधानसभाओं और संसद में चर्चा हो और इसके लिए विशेष सत्र का आयोजन एक बेहतर प्रयास हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं का योगदान शुरू से हमारे समाज के उत्थान में रहा है। यह वही देश है, जहां सावित्री ही एक पति या यूं कहें पुरुष की जान बचाती है और वह द्रौपदी भी एक महिला ही है, जो अपना सब कुछ दांव पर लगाकर पुरुष के वचन को निभाने को तत्पर रहती है। कुल-मिलाकर महिला शक्ति का त्याग और समर्पण ही सब कुछ है, जिसने पुरुष जाति का सदैव साथ निभाया है। उनके लिए अपने अस्तित्व को भी दांव पर लगाया। ऐसे में यह कहें कि मातृ शक्ति ही किसी भी समाज के विकास का आधार होती हैं और समाज में उनकी स्थिति से उस समाज की दिशा और दशा का ज्ञान होता है, तो यह बड़ी बात नहीं होगी। गत कुछ दशकों में महिलाओं के प्रति देश-दुनिया के नजरिए में भी बदलाव का दृष्टिकोण देखने को मिला है। इतना ही नहीं कहते हैं कि जिस समाज में महिलाओं के हाथ में बागडोर होती है, वहां ज्यादा मानवीय और संतुलित ढंग से विकास होता है। हमारा देश सदैव से मातृ शक्ति की अहमियत को स्वीकार करता आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन, कुछ रूढ़ियों और दकियानूसी सोच की वजह से एक समय ऐसा भी आया, जब समाज और विकास में महिलाएं भागीदारी न बन सकी। उन्हें हाशिए पर ढकेल दिया गया। पर, हर समय एक समान नहीं होता और अब देश में महिलाएं तेजी के साथ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। आज महिलाएं हमारे समाज में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सभी स्तरों पर आगे आ रही हैं और इसके लिए हमारी रहनुमाई व्यवस्था भी संजीदा दिखती है, जो एक सुखद पहलू है। इस बीच यूपी विधानसभा में महिला सत्र का आयोजन होना और उसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष की सकारात्मक भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि महिलाओं के मुद्दे पर देश में एक अच्छी और माकूल स्थिति का निर्माण हो रहा है। यह मातृ शक्ति के लिए हर दृष्टिकोण से बेहतर कदम होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">योगी सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ पर भी सदस्यों ने इस दौरान अपनी बात कही। ऐसे में इस सत्र के जो भी राजनीतिक मायने हों! लेकिन, इससे हर कोई सहमत होगा कि यह कदम महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आगामी समय में साबित होगा। योगी सरकार में नि: संदेह ही गुंडों और माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई से महिलाओं के खिलाफ अपराध में भी कुछ सालों में कमी आई है। अधिकारिक आंकड़ों को देखें, तो लगता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार तुलनात्मक रूप से महिलाओं के लिए काफी बेहतर काम किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार द्वारा जारी ‘मिशन शक्ति’ के आंकड़े में बताया गया कि यूपी में पिछले साढ़े पांच साल में एक लाख से अधिक महिलाओं को सरकारी नौकरी दी गई। वहीं सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर एक करोड़ महिलाओं को भी अब तक जोड़ा जा चुका है। ऐसे में महिला शक्ति यूपी में अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। विधानसभा में उनकी संख्या अभी नगण्य है। देश के बाकी राज्यों के हाल भी बेहतर नहीं। कुल-मिलाकर कहा जा सकता है कि योगी सरकार के महिला सत्र वाले कदम की सराहना तो चाहिए। किंतु, इस पहल पर व्यापकता से अमल की आवश्यकता है। यह देश के बाकी हिस्सों में भी देखने को मिले तो सचमुच का इसके ज्यादा बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे। इसके साथ महिलाओं की सामाजिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। क्योंकि, बात तभी बनती है, जब महिलाएं ही महिलाओं के मुद्दों पर पहल करती दिखाई दें, जैसी शुरूआत यूपी में हुई।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Oct 2022 14:54:39 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभाओं की बैठकों का कम होते जाना जनता की बेकद्री</title>
                                    <description><![CDATA[पाँच राज्यों में अगली विधानसभा के लिए मतदान का दौर अब पूरा हो चुका है, ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि करोड़ों का खर्च करके और महीनों के थकाऊ प्रचार अभियानों के बाद चुनकर आई विधानसभाएं आखिर काम कितना करती हैं। इस बारे में उपलब्ध आंकड़ों से जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-decrease-in-the-meetings-of-the-legislative-assemblies/article-31062"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/public-issues-were-ignored-in-politics-punjab-legislative-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाँच राज्यों में अगली विधानसभा के लिए मतदान का दौर अब पूरा हो चुका है, ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि करोड़ों का खर्च करके और महीनों के थकाऊ प्रचार अभियानों के बाद चुनकर आई विधानसभाएं आखिर काम कितना करती हैं। इस बारे में उपलब्ध आंकड़ों से जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, उसे उत्साहजनक तो कई नहीं कहा जा सकता। इसके मुताबिक, पिछले एक दशक में ज्यादातर विधानसभाओं का सालाना औसत बमुश्किल 30 दिन बैठता है, जो लोकसभा के सालाना औसत (63 दिन) से काफी कम है। लेकिन लोकसभा का भी यह औसत तब बहुत कम लगने लगता है, जब हम अन्य देशों पर नजर डालते हैं। अमेरिका में प्रतिनिधिसभा का साल 2020 में 163 दिन और 2021 में 166 दिन कामकाज का रिकॉर्ड रहा, जबकि सीनेट का दोनों साल 192 दिनों का।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन में हाउस आॅफ कॉमंस की 2020 में 147 बैठकें हुर्इं, हालांकि पिछले दस सालों में उसका सालाना औसत 155 दिनों का है। साफ है कि अपने देश में हालात विकसित देशों की तुलना में काफी खराब हैं। हालांकि किसी खास साल में विधायका की कम बैठकों के पीछे कोई विशेष परिस्थिति हो सकती है। उदाहरण के लिए, 2020 और 2021 में महामारी ने इन बैठकों को प्रभावित किया। राज्यों के संदर्भ में राष्ट्रपति शासन जैसी मजबूरियां भी किसी खास साल में इन बैठकों की संख्या कम कर देती हैं। लेकिन बात किसी खास साल की है ही नहीं। अपने देश में विधानसभाओं की कम बैठकें स्थायी प्रवृत्ति की तरह बनी हुई हैं, जो दशकों के औसत में सही ढंग से उभर कर आती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बड़े राज्यों में इसमें सिलसिलेवार गिरावट का ट्रेंड दिखता है। उदाहरण के लिए, यूपी में साठ के दशक से अस्सी के दशक तक जो सालाना औसत 47 दिनों का था, वह सदी के अंत तक आते-आते 30 दिन हो गया और अब महज 22 दिन है। ऐसे ही तमिलनाडु में 1955 से 75 के बीच सालाना बैठकों का जो औसत 56 दिनों का था, वह 1975 से 1999 के बीच घटकर 51 हुआ और 2000 के बाद की अवधि में 37 दिन पर आ गया है। हालांकि इन आंकड़ों के साथ कई तरह का अधूरापन भी जुड़ा हुआ है। एक तो यह कि बैठक कितने घंटे चली इसका ब्योरा इसमें शामिल नहीं है। चाहे कार्यवाही दो-तीन घंटे में स्थगित हो गई हो या पूरे दिन चली हो, उसे एक बैठक माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी बात यह कि विधायक या जनप्रतिनिधि का काम सिर्फ विधानसभा की बैठक में शामिल होना नहीं होता। तीसरी बात यह कि बैठकों की संख्या से यह पता नहीं चलता कि बैठक में हुई चर्चा के विषय कैसे थे और उन विषयों पर हुई चर्चा कितनी महत्वपूर्ण या फलप्रद थी। मगर इन सीमाओं के बावजूद विधायिका के कामकाज के घंटों का सिमटते जाना इनकी अहमियत में गिरावट का संकेत है, जिसे गंभीरता से लेना चाहिए। अब नेताओं को जनता के खून पसीने की कमाई की कद्र करनी चाहिए और देश, प्रदेश और जनता के हित के मुद्दों पर फोकस करना चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Feb 2022 10:05:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विपक्षी विधायकों के हंगामा से अध्यक्ष को आया गुस्सा, फिर ये क्या बोल गए&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[रांची (एजेंसी)। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी विधायकों के व्यवहार से आहत स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि सदन को फुटपाथ ना बनाएं। इसके बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/speaker-got-angry-due-to-uproar-of-opposition-mlas/article-26597"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/jharkhand-legislative-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची (एजेंसी)।</strong> झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी विधायकों के व्यवहार से आहत स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि सदन को फुटपाथ ना बनाएं। इसके बाद भाजपा के विधायकों ने सदन के वेल में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को व्यवस्थित करने का हर संभव प्रयास किया। हंगामा बढ़ते देख अध्यक्ष ने 11 बजकर 37 मिनट पर विधानसभा की कार्यवाही 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा सत्र की कार्यवाही आज 11 बजकर 11 मिनट पर जैसे ही शुरू हुई और विधानसभा अध्यक्ष के अवसर पर बैठते ही भाजपा विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाने लगे। इस दौरान स्पीकर विधायकों से बैठने का आग्रह करते रहे। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक वेल में आकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। स्पीकर ने कहा कि उन्हें हनुमान चालीसा से कोई एतराज नहीं है। लेकिन आप लोग आसन के साथ मजाक मत करिए। अगर मजाक करना है तो हमसे करिए आसन से नहीं। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। कल आप भी आसन पर आइएगा। इसलिए ऐसा मत करें। स्पीकर ने कहा कि विरोध करने का तरीका से तकलीफ है। कल भी आप लोगों ने रिपोर्टिंग टेबल पर बैठकर महिला कर्मचारी को हटाकर जिस तरह का व्यवहार किया और हमने उसे बर्दाश्त किया। रिपोर्टिंग टेबल से सदन की गरिमा को तार-तार किया। हमने कुछ भी नहीं कहा। आप अपनी बात को रखिये, लेकिन आसन के साथ मजाक मत करिए। स्पीकर ने भानु प्रताप शाही से कहा कि आप मंत्री भी रहे हैं। ऐसा ना करें आसन को मजाक का पात्र मत बनाएं। साढ़े तीन करोड़ जनता की आस्था सदन से है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि अध्यक्ष महोदय आपने बहुत भावुकता वाली बात कही है। हम भी दुखी हैं। विधानसभा में स्पीकर की कुर्सी सर्वोच्च होती है। हमारी भी भावना है। जब हमारा अभिभावक आंखें मूंद लेता है तो कष्ट होता है। हम 26 विधायकों को कितना तकलीफ हुआ है। यह महसूस करने की आवश्यकता है। इस पर स्टीफन मरांडी ने कहा कि इतना दिन विधानसभा का सत्र चला। कोई भी स्पीकर आसन पर खड़ा नहीं हुआ। पहली बार ऐसा हुआ है कि जब स्पीकर आसन पर खड़े हुए तब सदस्य को बैठ जाना चाहिए था। इस दौरान भाजपा विधायक नियोजन नीति रद्द करो का नारा लगाते हुए वेल में आ गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री की बात को भी नहीं सुना जा सका। स्पीकर ने उन्हें बोलने के लिए कहा था। भानु ने हनुमान चालीसा का पाठ करने पर स्पीकर ने कहा कि राजनीति के लिए मजाक मत कीजिए। आप किसी पंडित से पूछ लीजिए कि कब और किस जगह हनुमान चालीसा पढ़ा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच विधायक सरयू राय ने भी वर्ष 2016 में झारखंड राज्य स्थापना दिवस में टॉफी एवं टी-शर्ट घोटाले का मामला उठाया और सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं। हो हंगामा की वजह से उनकी पूरी बात नहीं सुनी जा सकी। इसके बाद भाजपा विधायक वेल में आकर बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ फिर करने लगे। एक ही नारा एक ही नाम जय श्री राम, हर हर महादेव सहित अन्य नारेबाजी भाजपा विधायक करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर विधानसभा गेट के पास धरने पर बैठे विधायक आलोक चौरसिया और अपर्णा सेनगुप्ता को लाने के लिए स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम एवं विधायक नीरा यादव को भेजा। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री और नीरा यादव दोनों विधायकों को लेकर सदन पहुंचे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Sep 2021 13:09:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली विस में हंगामा: आप विधायकों ने कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी सरकार के कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन कानूनों का गुरुवार को दिल्ली विधानसभा में जमकर विरोध हुआ और सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों के सदन में कानून की प्रतियां फाड़ने से हंगामा हो गया। दिल्ली विधानसभा का वीरवार को एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। सत्र की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/uproar-in-delhi-legislative-assembly-aap-mlas-tore-copies-of-agricultural-laws/article-20626"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/delhi-legislative-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> नरेन्द्र मोदी सरकार के कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन कानूनों का गुरुवार को दिल्ली विधानसभा में जमकर विरोध हुआ और सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों के सदन में कानून की प्रतियां फाड़ने से हंगामा हो गया। दिल्ली विधानसभा का वीरवार को एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। सत्र की शुरूआत में ही परिवहन और पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने एक संकल्प पत्र पेश किया, जिसमें तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की बात कही गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्तारुढ़ दल के महेंद्र गोयल और सोमनाथ भारती ने सदन में कृषि कानून की प्रतियां फाड़ी और जय जवान, जय किसान के नारे लगाते हुए कहा कि जो कानून किसानों के पक्ष में नहीं हैं, उसे स्वीकार नहीं करेंगे। आप पार्टी कृषि कानूनों के पक्ष में आंदोलनरत किसानों के साथ नजर आ रही है। पार्टी तीनों कानून को किसानों के खिलाफ बताकर इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग कर रही है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Dec 2020 16:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान विस अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से ली याचिका वापस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के अंतरिम आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका सोमवार को वापस ले ली। राजस्थान उच्च न्यायालय ने गत 21 जून को अंतरिम आदेश सुनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष को सचिन पायलट और उनके खेमे के 18 विधायकों के खिलाफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-legislative-assembly-speaker-withdraws-petition-from-supreme-court/article-17112"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/supreme-court-dismisses-the-charge-of-pick-and-choose-in-the-registry1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के अंतरिम आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका सोमवार को वापस ले ली। राजस्थान उच्च न्यायालय ने गत 21 जून को अंतरिम आदेश सुनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष को सचिन पायलट और उनके खेमे के 18 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने से 24 जुलाई तक के लिए रोक लगा दिया था, जिसे अध्यक्ष ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि उच्च न्यायालय के गत शु्क्रवार के आदेश के बाद पहले के आदेश के खिलाफ याचिका जारी रखने का कोई मतलब नहीं रह जाता, इसलिए उन्हें इसे वापस लेने की अनुमति प्रदान की जाये। सिब्बल ने कहा कि गत 24 जुलाई को 32 पन्नों का आदेश सुनाया था, जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची की व्याख्या सहित कई सवाल खड़े किये गये हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें कानूनी विकल्प पर विचार करना है कि आगे क्या करना है। न्यायालय ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।</p>
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2020 16:58:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा विस. की विभिन्न समितियों का गठन</title>
                                    <description><![CDATA[ज्ञानचंद गुप्ता नियम समिति के पदेन अध्यक्ष चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने वर्ष 2020-21 के लिये विधानसभा की विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि इनमें नियम समिति के वह पदेन अध्यक्ष जबकि विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, इनेलो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/constitution-of-various-committees-of-haryana-legislative-assembly/article-15863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/winter-session-of-haryana-legislative-assembly.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">ज्ञानचंद गुप्ता नियम समिति के पदेन अध्यक्ष</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने वर्ष 2020-21 के लिये विधानसभा की विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि इनमें नियम समिति के वह पदेन अध्यक्ष जबकि विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, इनेलो विधायक अभय चौटाला, विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, डॉ. अभय सिंह यादव, भारत भूषण बतरा, नैना सिंह चौटाला और सुधीर कुमार सिंगला समिति के सदस्य होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा के उपाध्यक्ष रणबीर सिंह गंगवा को आवास समिति का पदेन अध्यक्ष जबकि विधायक लीला राम, असीम गोयल, प्रदीप चौधरी और रणधीर सिंह गोलन को सदस्य मनोनीत किया गया है। विधायक जगबीर सिंह मलिक को सरकारी आश्वासन समिति का पदेन अध्यक्ष तथा विधायक जयवीर सिंह, बिशन लाल सैनी, गोपाल कांडा, महिपाल ढांडा, प्रदीप चौधरी, निर्मल रानी, सत्य प्रकाश और अमरजीत ढांडा को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। विधायक हरविन्द्र कल्याण को लोक लेखा समिति का अध्यक्ष जबकि विधायक किरण चौधरी, डॉ. अभय सिंह यादव, भारत भूषण बतरा, नरेंद्र गुप्ता, सुधीर कुमार सिंगला, वरूण चौधरी, जोगी राम सिहाग और रणधीर सिंह गोलन को इस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया है।</p>
<h4>डॉ. कमल गुप्ता स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं से सम्बंधित समिति का अध्यक्ष</h4>
<p style="text-align:justify;">विधायक डॉ. कमल गुप्ता को स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं से सम्बंधित समिति का अध्यक्ष तथा विधायक कुलदीप बिश्नोई, घनश्याम सर्राफ, सीमा त्रिखा, बिशम्बर सिंह, धर्म सिंह छोक्कर, सुरेंद्र पंवार, अमरजीत ढांडा और राकेश दौलताबाद को कमेटी का सदस्य बनाया है। विधायक सुभाष सुधा को अनुमान समिति का अध्यक्ष जबकि विधायक राव दान सिंह, रामकुमार गौतम, आफताब अहमद, लक्ष्मण नापा, सीताराम यादव, प्रमोद कुमार विज, अमित सिहाग और मेवा सिंह को इस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपक मंगला को जन स्वास्थ्य, ंिसचाई, विद्युत और लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) समिति के अध्यक्ष होंगे। विधायक मोहम्मद इलियास, विनोद भ्याणा, लीला राम, डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढ, प्रवीन डागर, मामन खान, शमशेर सिंह गोगी और देवेंद्र सिंह बबली को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। विधायक सीमा त्रिखा को शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समिति का अध्यक्ष विधायक डॉ. रघुवीर सिंह कादियान, जगदीश नैयर, राम कुमार कश्यप, डॉ. कमल गुप्ता, नैना चौटाला, श्रीमती शैली, शीशपाल सिंह और नयनपाल रावत को इस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विधायक असीम गोयल सार्वजनिक उपक्रम समिति का अध्यक्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">विधायक ईश्वर सिंह को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग कल्याण समिति का अध्यक्ष तथा विधायक जगदीश नैयर, राम कुमार कश्यप, लक्ष्मण नापा, सत्यप्रकाश, रेणु बाला, शीशपाल सिंह, राम करण तथा धर्म पाल गोंदर इस कमेटी के सदस्य होंगे। विधायक घनश्याम दास अरोड़ा याचिका समिति के अध्यक्ष तथा विधायक गीता भुक्कल, शकुंतला खटक, लक्ष्मण सिंह यादव, संजय सिंह, राम निवास और बलराज कुंडू को इस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह विधायक असीम गोयल सार्वजनिक उपक्रम समिति का अध्यक्ष तथा विधायक अभय चौटाला, दूड़ा राम, मोहन लाल बड़ोली, राजेश नागर, चिरंजीव राव, कुलदीप वत्स, नीरज शर्मा और देवेंद्र सिंह बबली को कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया है। इसी तरह विधायक राम निवास को अधीनस्थ विधान कमेटी का अध्यक्ष तथा विधायक डॉ. रघुवीर सिंह कादियान, राजेंद्र सिंह जून, दूड़ा राम, बलबीर सिंह, सुभाष गांगोली, सोमबीर सांगवान और महाधिवक्ता, हरियाणा को इस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2020 17:12:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनोहर को छोड़ के दिग्गज विधानसभा के कर्जदार, मंत्रियों सहित लम्बी कतार</title>
                                    <description><![CDATA[Debtors of Legislative Assembly | सिर्फ 4 फीसदी ब्याज पर मिलता है कार व हाउस लोन चंडीगढ़ (अश्वनी चावला/सच कहूँ)। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को छोड़कर सत्तासीन मंत्री, विधायक से लेकर विपक्ष के नेता तक विधानसभा के कर्जदार (Debtors of Legislative Assembly) हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/heavy-debtors-of-legislative-assembly-long-queues-including-ministers/article-13616"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/now-home-car-and-personal-loan-will-be-cheaper.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">Debtors of Legislative Assembly | सिर्फ 4 फीसदी ब्याज पर मिलता है कार व हाउस लोन</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अश्वनी चावला/सच कहूँ)।</strong> हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को छोड़कर सत्तासीन मंत्री, विधायक से लेकर विपक्ष के नेता तक विधानसभा के कर्जदार <strong>(Debtors of Legislative Assembly)</strong> हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों से अपना कर्ज नहीं चुका पाए हैं। हरियाणा विधानसभा के कर्जदारों की सूची में भाजपा-जजपा सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भी बाहर नहीं हैं। वहीं पर विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता व उनके सहयोगी डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा भी इस सूची से अछूते नहीं हैं। इनके नाम पर भी लाखों का लोन है।</p>
<h3>स्वर्गवासी पूर्व विधायकों के नाम भी खड़ी रकम</h3>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में इन कर्जदरों की सूची 200 के पार पहुंचने वाली दिख रही है। बता दें कि हरियाणा विधानसभा से लोन लेने वाले सभी विधायकों को मात्र 4 फीसदी ही ब्याज की अदायगी करनी पड़ती है। जोकि आजकल चल रहे बैंकों की ब्याज दर से बहुत कम है। वहीं हरियाणा विधानसभा से लोन ले चुके कई विधायक और पूर्व विधायक स्वर्गवासी भी हो चुके हैं और उनकी तरफ अभी भी लाखों का बकाया खड़ा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">16 साल पुराने भी कर्जदार | Debtors of Legislative Assembly</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विधानसभा कर्जदारों की सूची में ऐसे कई पूर्व विधायक भी शामिल हैं, जिनको लोन लिए दो दशक के करीब होने जा रहा है। कुछ विधायकों ने साल 2004, 2006 और 2007 में हरियाणा विधानसभा से कार लोन के साथ-साथ हाउस लोन भी लिया हुआ है। उन्होंने लोन की रकम तो चुका दी है, लेकिन ब्याज के रूप में लाखों रुपए बकाया खड़ा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अरबों की प्रॉपर्टी, फिर भी कर्जदार</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विधानसभा में पहुंचने वाले कई ऐसे विधायक हैं, जिनके पास करोड़ों या अरबों की प्राप्ति है, लेकिन फिर भी वह हरियाणा विधानसभा के कर्जदारों के सूची में शुमार हैं। ऐसे नामों में एक नाम सरसा से विधायक गोपाल कांडा का भी शामिल है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में गोपाल कांडा मंत्री भी रह चुके हैं और उनका बहुत बड़ा बिजनेस भी है। परंतु उनके नाम पर भी विधानसभा में लोन चल रहा है। गोपाल कांडा ने 28 अप्रेल 2010 को 10 लाख का कार लोन विधानसभा से लिया था। इस लोन की असल रकम गोपाल कांडा ने चुका दी है। जबकि उनकी तरफ अभी भी 69 हजार 916 रुपये ब्याज के बकाया हैं, जोकि उनकी तन्ख्वाह से हर महीने किस्त के रूप में काटे जा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले वसूली जाती है असल रकम</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विधानसभा से कार या हाउस लोन लेने वाले विधायकों से पहले लोन की असल रकम को तनख्वाह या पेंशन से किस्तों में काटा जाता है। उसके पश्चात जितनी देर लोन चलता है, उस पर ब्याज कैलकुलेट किया जाता है और लोन की असल रकम पूरी तरह से वसूल लेने के पश्चात ब्याज की बारी आती है। ब्याज को भी असल रकम की तरह किस्तों में काटकर रिकवर किया जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री भी कर्जदार</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विधानसभा में विधायक के तौर पर पहुचने के पश्चात लोन लेने वालों की सूची में 2 पूर्व विधायक ऐसे भी जो संसद दिल्ली में पहुंच चुके हैं और उनमें से एक तो केन्द्रीय मंत्री भी हैं। इन दोनों को तरफ भी हरियाणा विधान सभा का लाखों के कर्ज खड़ा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इन प्रमुख माननीय की तरफ खड़ा है विधान सभा का लोन</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नाम                          लोन की श्रेणी                   लोन रकम                        बकाया</strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अनिल विज (मंत्री)           हाउस लोन                 36 लाख 50 हजार               7,66,500 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">अनिल विज (मंत्री)           कार लोन                    7 लाख 30 हजार               4,82,189 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">किरण चौधरी                 हाउस लोन                     30 लाख                       4,85,550 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">अनूप धानक (मंत्री)         हाउस लोन                     40 लाख                       20,40,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">अनूप धानक (मंत्री)          कार लोन                    10 लाख                        04,90,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">कंवरपाल (मंत्री)             हाउस लोन                     60 लाख                      37,20,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">रणबीर गंगवा                हाउस लोन                     60 लाख                       31,80,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">रणबीर गंगवा                कार लोन                        20 लाख                       10,20,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">कृष्णपाल गुज्जर             हाउस लोन                     40 लाख                       4,40,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">कृष्णपाल गुज्जर            कार लोन                      10 लाख                         1,40,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">नायब सैनी                  हाउस लोन                     60 लाख                         52,20,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">नायब सैनी                 कार लोन                       10 लाख                        01,59,575 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">अभय चौटाला              कार लोन                       16 लाख 78 हजार             16,10,880 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">सुभाष बराला               कार लोन                       10 लाख                         04,40,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">सुभाष बराला             हाउस लोन                       40 लाख                         20,00,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">भूपेन्द्र हुड्डा              कार लोन                        20 लाख                           12,60,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">गीता भुक्कल             कार लोन                         20 लाख                         13,40,000 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">ज्ञानचंद गुप्ता              कार लोन                         20 लाख                          13,40,750 रुपए</li>
<li style="text-align:justify;">गोपाल कांडा               कार लोन                       10 लाख                             69,916 रुपए</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/heavy-debtors-of-legislative-assembly-long-queues-including-ministers/article-13616</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2020 14:47:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र: कांग्रेस के नाना पटोले बने विधानसभा स्पीकर</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र  में आज विधानसभा स्पीकर का चुनाव निर्विरोध हुआ। महा विकास अघाड़ी से नाना पटोले निर्विरोध स्पीकर चुने गए। पटोले के खिलाफ भाजपा ने किशन कथोरे को अपना उम्मीदवार बनाया था
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nana-patole-becomes-speaker-of-maharashtra-legislative-assembly/article-11356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/nana-patole.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पटोले के खिलाफ भाजपा ने किशन कथोरे को अपना उम्मीदवार बनाया था| <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Maharashtra Legislative Assembly</span></span></h1>
<p><strong>Edited By Vijay Sharma</strong></p>
<p><strong>नई दिल्‍ली(एजेंसी)।</strong> महाराष्ट्र  में आज विधानसभा स्पीकर <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Maharashtra Legislative Assembly</span></span>)</strong> का चुनाव निर्विरोध हुआ। महा विकास अघाड़ी से नाना पटोले निर्विरोध स्पीकर चुने गए। पटोले के खिलाफ भाजपा ने किशन कथोरे को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने उम्मीदवारी वापस ले ली। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि भाजपा ने कल महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए किशन कथोरे को नामित किया था। लेकिन, नई सरकार के अनुरोध के बाद, हमने कथोरे की उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया है। प्रोटेम स्पीकर दिलीप वाल्से पाटिल ने आज स्पीकर चुने जाने के लिए ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई थी इसी दौरान यह फैसला हुआ।</p>
<h2><strong>दिसंबर के पहले सप्ताह में उद्धव सरकार का कैबिनेट विस्तार होगा</strong></h2>
<ul>
<li><strong>स्पीकर के चुनाव के अलावा अब उद्धव सरकार के कैबिनेट का भी विस्‍तार होना है। </strong></li>
<li><strong> जिसमें 14 मंत्री शपथ ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार उद्धव सरकार में सीएम समेत शिवसेना के कुल 16 मंत्री, एनसीपी के 15 मंत्री और कांग्रेस के 12 मंत्री शामिल होंगे।</strong></li>
<li><strong>जानकारी के मुताबिक शिवसेना को शहरी विकास, आवास, सिंचाई और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम मंत्रालय मिलेगा। </strong></li>
<li><strong>एनसीपी के खाते में गृह, वित्त योजना, बिजली और वन पर्यावरण मंत्रालय आएगा। </strong></li>
<li><strong>जबकि कांग्रेस को राजस्व, पीडब्ल्यू, और उत्पाद शुल्क मंत्रालय मिलने की संभावना है। उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय को लेकर अभी निर्णय नहीं हुआ है। </strong></li>
<li><strong>महा विकास अघाड़ी बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है, क्योंकि उसे मालूम है कि तीनों दलों में से एक भी नाराज हुआ तो मामला बिगड़ जाएगा।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2019 11:34:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>शराबबंदी की उम्मीदें खत्म, अब हाईवे पर चलेंगे मयखाने</title>
                                    <description><![CDATA[निराशाजनक: भटिंडा जिले की पहल कदमी गई बेकार राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर होटलों में शराब पीने पर लगी पाबंदी समाप्त करने संबंधी विधान सभा में बिल पास भटिंडा (अशोक वर्मा)। पंजाब विधान सभा में राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर क्लबों, रेस्तरों व होटलों में शराब पीने पर लगी रोक को हटाने संबंधी नया बिल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/end-of-the-prohibition-of-alcoholism/article-1594"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/sharab-bandi.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">निराशाजनक: भटिंडा जिले की पहल कदमी गई बेकार</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर होटलों में शराब पीने पर लगी पाबंदी समाप्त करने संबंधी विधान सभा में बिल पास</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भटिंडा (अशोक वर्मा)।</strong> पंजाब विधान सभा में राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर क्लबों, रेस्तरों व होटलों में शराब पीने पर लगी रोक को हटाने संबंधी नया बिल पास होने से शराबबंदी संबंधी भटिंडा जिले द्वारा की गई पहलकदमी बेकार चली गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम के पीछे शराब लाबी का दबाव है, किन्तु इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर राष्ट्रीय व राज्य मार्गों से शराब के ठेके बंद करवा दिए थे, ताकि जिले के लोगों को बड़ी राहत मिल सके।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सड़क हादसों का संकट</h2>
<p style="text-align:justify;">समाजिक चिंतकों का कहना है कि सरकार के इस नए फैसले से सड़कों पर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के कारण होने वाले सड़क हादसों का संकट पैदा हो गया है। वर्णनीय है कि ‘अराईव सेफ’ नामक गैर सरकारी समाज सेवी संस्था द्वारा दायर जनहित पटीशन की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के 500 मीटर के घेर में शराब के ठेके खोलने पर रोक लगा दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अराईव सेफ का प्रतिक्रम था कि शराब के ठेके सड़कों हादसों में जाने वाली कीमती जानों के लिए जिम्मेवार हैं। इस लिए ठेके बंद होने चाहिए। उस वक्त भी काफी समय तक इस फैसले को लागू नहीं किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जब पंजाब में कांग्रेस सत्ता में आई तो नई सरकार ने 500 मीटर के दायरे में ठेके खोलने, होटल कम मैरिज पैलेसों, रिजोर्ट व क्लब वगैरा में शराब परोसने पर रोक लगा दी थी। होटल, रेस्टोरेंट एंड रिजोर्ट एसोसिएशन पंजाब मुताबिक जिला भटिंडा में 100 के करीब मैरिज पैलेस आदि हैं, जिनमें से 80 के करीब राष्ट्रीय मार्गों पर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भटिंडा शहर की कोई भी सड़क ऐसी नहीं है, जिस पर रिजोर्ट वगैरा न हो। सरकार के आदेशों के बाद जिले में काफी बार भी बंद हो गए थे। रामपुरा, भगता भाई, मौड़ मंडी, तलवंडी साबो व रामा मंडी शहरों में भी इस तरह के होटल व मैरिज पैलेस काफी संख्या में है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश कुमार अरोड़ा का सिर्फ यही कहना था कि नोटीफिकेशन जारी होने के बाद शराब पर रोक खत्म हो जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नए फैसले से हादसों में मौत की दर बढ़ेगी: महेश्वरी</h2>
<p style="text-align:justify;">नौजवान वैल्फेयर सोसायटी के अध्यक्ष सोनू महेश्वरी ने कहा कि राष्ट्रीय मार्गों पर ठेके बंद करने के काफी अच्छे परिणाम सामने आए थे। उन्होंने कहा कि नए आदेशों के बाद जब उक्त जगहों से शराबी होकर लोग वाहन लेकर सड़क पर उतरेंगे तो नि:संदेह हादसे घटित होंगे और हादसों में मौत की दर बढ़ेगी। उन्होंने मांग की कि सरकार अपने फैसले पर पुन: विचार करे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आदेश आने पर होगी कार्रवाई: ठाकुर</h2>
<p style="text-align:justify;">आबकारी व कर अधिकारी भटिंडा विक्रम देव ठाकुर ने कहा कि उन्हें भी पता चला है कि सरकार ने राष्ट्रीय व राज्य मार्गों से शराब संबंधी कोई नया कानून पास किया है। उन्होंने कहा कि जब भी नए नियमों बारे नोटीफिकेशन जारी होगा तो भटिंडा के डूनज क्लब सहित सभी क्लबों व जिले अधीन राष्ट्रीय मार्गों पर स्थित होटलों, बार व रेस्टोरेंट में शराब परोसने की आज्ञा दे दी जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अधिकारियों का क्लब भी परोसेगा शराब</h2>
<p style="text-align:justify;">भटिंडा के अधिकारियों का डूनज क्लब भी अब शराब परोसेगा, जबकि पहले यह शराब मुक्त बन गया था। डूनज क्लब के करीब 550 सदस्य हैं, जिनमें से 50 फीसदी सदस्य सरकारी अधिकारी हैं, जबकि बाकी निजी सदस्य हैं। पद की गरिमा अनुसार डूनज क्लब का अध्यक्ष डिप्टी कमीश्नर है, जबिक एडीसी इस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय मार्ग से यह क्लब 500 मीटर के दायरे में होने के कारण कर व आबकारी अधिकारियों ने डूनज क्लब के बार को सील कर दिया था। इस क्लब के सदस्य खास तौर पर सरकारी अधिकारी अंदर से परेशान थे, क्योंकि बड़े अधिकारियों का टिकाना ही नए आदेशों ने उजाड़ दिया था।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 23:30:23 +0530</pubDate>
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