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                <title>Prafulla Chandra Ray - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Prafulla Chandra Ray Birth Anniversary: भारतीय रसायन विज्ञान के जनक थे प्रफुल्ल चंद्र रे, साहित्य से प्रेम, विज्ञान से क्रांति, एक अद्भुत भारतीय वैज्ञानिक</title>
                                    <description><![CDATA[Prafulla Chandra Ray Birth Anniversary: नई दिल्ली। 2 अगस्त को भारत के महान वैज्ञानिक, शिक्षक, और राष्ट्रसेवक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती है। रसायन विज्ञान में भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाले इस वैज्ञानिक को ‘भारतीय रसायन विज्ञान का जनक’ कहा जाता है। उनका जीवन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में योगदान का प्रतीक है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/prafulla-chandra-ray-was-the-father-of-indian-chemistry/article-74171"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/re.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Prafulla Chandra Ray Birth Anniversary: नई दिल्ली। 2 अगस्त को भारत के महान वैज्ञानिक, शिक्षक, और राष्ट्रसेवक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती है। रसायन विज्ञान में भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाले इस वैज्ञानिक को ‘भारतीय रसायन विज्ञान का जनक’ कहा जाता है। उनका जीवन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में योगदान का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सेवा और स्वदेशी उद्योग के उत्थान की प्रेरणा भी देता है। Prafulla Chandra Ray</p>
<p style="text-align:justify;">प्रफुल्ल चंद्र रे का जन्म 2 अगस्त 1861 को वर्तमान बांग्लादेश के खुलना जिले के ररुली-काटीपाड़ा गांव में हुआ था। बचपन से ही वे ज्ञान की ओर आकर्षित थे, भले ही पढ़ाई से पहले उनका झुकाव साहित्य की ओर था। कोलकाता आकर उन्होंने हरे स्कूल और मेट्रोपॉलिटन कॉलेज में पढ़ाई की। प्रेसीडेंसी कॉलेज में अध्ययन के दौरान रसायन विज्ञान के प्रोफेसर अलेक्जेंडर पेडलर के व्याख्यानों ने उनका ध्यान विज्ञान की ओर मोड़ा। यहीं से उनकी वैज्ञानिक यात्रा की शुरुआत हुई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विदेश शिक्षा और भारत वापसी | Prafulla Chandra Ray</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रफुल्ल चंद्र रे ने एडिनबर्ग विश्वविद्यालय (स्कॉटलैंड) से बी.एससी. और डी.एससी. की डिग्री प्राप्त की। 1888 में भारत लौटकर उन्होंने एक वर्ष तक जगदीश चंद्र बोस की प्रयोगशाला में काम किया और फिर 1889 में प्रेसीडेंसी कॉलेज में रसायन विज्ञान के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने मरकरी नाइट्राइट पर जो शोध किया, उसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उनके शोध कार्यों से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय वैज्ञानिक भी विश्व स्तर पर अग्रणी हो सकते हैं। उन्होंने अनेक युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देकर एक नई वैज्ञानिक पीढ़ी तैयार की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रफुल्ल चंद्र रे का मानना था कि भारत की प्रगति स्वदेशी औद्योगिक विकास से ही संभव है। इस सोच को साकार करने के लिए उन्होंने 1901 में ‘बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड’ की स्थापना की — यह भारत का पहला रासायनिक उद्योग था, जो पूरी तरह स्वदेशी था।</p>
<p style="text-align:justify;">1921 में उन्होंने अपने संपूर्ण विश्वविद्यालयीय वेतन को दो शोध फेलोशिप और रसायन विज्ञान विभाग के विकास के लिए दान कर दिया, जिसकी उस समय कीमत लगभग दो लाख रुपये थी — यह आज के समय में करोड़ों के बराबर है। उनका यह योगदान शिक्षा और शोध के क्षेत्र में मील का पत्थर रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">व्यक्तित्व और सम्मान | Prafulla Chandra Ray</h3>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, “यह विश्वास करना कठिन है कि सादा जीवन जीने वाला कोई व्यक्ति एक महान वैज्ञानिक हो सकता है।” परंतु प्रफुल्ल चंद्र रे इस कथन के जीवंत उदाहरण थे — एक वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्योगपति, समाजसेवक और देशभक्त। उन्हें 1917 में ब्रिटिश सरकार ने ‘कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन एम्पायर (CIE)’ की उपाधि से नवाज़ा। उनका जीवन रसायन विज्ञान के क्षेत्र में न केवल योगदान का परिचायक है, बल्कि आत्मबल, सेवा और संकल्प की मिसाल भी है। प्रफुल्ल चंद्र रे का निधन 16 जून 1944 को हुआ। वे 82 वर्ष के थे। उन्होंने भारत में विज्ञान और स्वदेशी उद्योग के जो बीज बोए, वे आज भी भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार में सजीव हैं। Prafulla Chandra Ray</p>
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                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 16:57:01 +0530</pubDate>
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