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                <title>Kishan News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Kishan News RSS Feed</description>
                
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                <title>Union Cabinet: किसानों को लेकर केन्द्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Union Cabinet: केंद्र की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2025 सीजन के लिए नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है। किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2026 सीजन के लिए नारियल गिरी मिलिंग ग्रेड का एमएसपी 12027 /- प्रति क्विंटल और नारियल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-central-government-took-a-decision-regarding-farmers/article-79130"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/union-cabinet.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Union Cabinet: केंद्र की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2025 सीजन के लिए नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है। किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2026 सीजन के लिए नारियल गिरी मिलिंग ग्रेड का एमएसपी 12027 /- प्रति क्विंटल और नारियल गोला का एमएसपी 12500 /- प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। Union Cabinet</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ा हुआ एमएसपी न केवल नारियल किसानों को बेहतर लाभकारी रिटर्न सुनिश्चित करेगा बल्कि किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। गौरतलब है कि मिलिंग वाले नारियल (मिलिंग कोपरा) में नमी की मात्रा थोड़ी अधिक होती है और इसका उपयोग मुख्य रूप से फैक्ट्रियों में तेल निकालने के लिए होता है। नारियल गोला (बॉल कोपरा) में नमी बहुत कम होती है जो इसकी उच्च गुणवत्ता के कारण इसे लंबे तक खाने के योग्य बनाता है। बॉल कोपरा अक्सर खाने और पूजा के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि मिलिंग कोपरा अनियमित आकार का होता है और व्यावसायिक तेल उत्पादन के लिए पसंदीदा है। Union Cabinet</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 17:39:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयुक्त किसान मोर्चा की अपील: किसान एकजुट हों, आंदोलन तेज करें </title>
                                    <description><![CDATA[आयातित कपास से किसानों पर संकट गहराया: संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान कहा-MSP\@C2+50 प्रतिशत  की घोषणा हो, कपास पर आयात शुल्क हटाने की अधिसूचना तत्काल वापस ले सरकार; आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मिले 25 लाख मुआवज़ा नई दिल्ली (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार द्वारा 19 अगस्त 2025 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/samyukta-kisan-morcha-appeals-to-farmers-to-unite-and-intensify-the-movement/article-75084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/new-delhi-15.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आयातित कपास से किसानों पर संकट गहराया: संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>कहा-MSP\@C2+50 प्रतिशत  की घोषणा हो, कपास पर आयात शुल्क हटाने की अधिसूचना तत्काल वापस ले सरकार; आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मिले 25 लाख मुआवज़ा</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। </strong>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार द्वारा 19 अगस्त 2025 को कपास पर लगाए गए 11 फीसद  आयात शुल्क और कृषि अवसंरचना विकास उपकर (एआईडीसी ) को हटाने के निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे किसान-विरोधी करार दिया है। एसकेएम  ने मांग की है कि यह अधिसूचना तुरंत वापस ली जाए और मध्यम रेशा कपास के लिए 10,075 प्रति क्विंटल  के  एमएसपी\@सी2+50 प्रतिशत की घोषणा की जाए। इसके साथ ही आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख का मुआवजा  देने की मांग भी दोहराई गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एफटीए  और विदेशी दबाव की आड़ में किसानों के हितों से समझौता:एसकेएम</h3>
<p style="text-align:justify;">मोर्चा ने कहा कि सरकार कोई ऐसा मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) स्वीकार न करे, जो भारतीय कृषि और किसानों के हितों को नुकसान पहुँचाए। एसकेएम   ने कपास किसानों से आह्वान किया है कि वे गाँव-गाँव में  अधिसूचना की प्रतियाँ जलाएँ, जनसभाओं का आयोजन करें और  प्रधानमंत्री के नाम प्रस्ताव पारित कर भेजें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘दीवार की तरह खड़े’ होने का दावा और नीतियों में विरोधाभास</h3>
<p style="text-align:justify;">एसकेएम  ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर दिया गया उनका यह बयान कि “सरकार किसानों के खिलाफ किसी भी नीति के सामने दीवार की तरह खड़ी होगी,एक विडंबना साबित हुआ है। एसकेएम  ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार विदेशी कॉरपोरेट दबाव में देश के किसानों को कुर्बान कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आयातित कपास से गिरेंगी घरेलू कीमतें, छोटे किसान होंगे बर्बाद</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषण के अनुसार, शुल्क हटने से आयातित कपास की कीमतें गिरेंगी, जिससे देश में कपास की बाज़ार कीमत और नीचे जाएगी। भारत के छोटे और वर्षा-आधारित कपास उत्पादक, अमेरिका के सब्सिडी प्राप्त किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। अमेरिका में कपास किसानों को उत्पादन लागत का लगभग 12 प्रतिशत  सब्सिडी  दी जाती है, जबकि भारत में यह आंकड़ा मात्र 2.37 प्रतिशत  है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों को 2024-25 में 1.23 लाख करोड़ का अनुमानित नुकसान</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी ) के अनुसार वर्ष 2024-25 में कपास की सी2 लागत  6,230/ क्विंटल आंकी गई, जिसके अनुसार  सी 2+50 प्रतिशत  एमएसपी  =  10,075 / क्विंटल बनता है। सरकार ने केवल ₹7,121 का एमएसपी  तय किया, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल लगभग  2,365  का नुकसान हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">52.1 मिलियन क्विंटल के उत्पादन पर कुल अनुमानित नुकसान-1.23 लाख करोड़ आँका गया है।खुले बाज़ार में कपास की औसत कीमतें -5,500-6,500 प्रति क्विंटल रही हैं, जिसके अनुसार वास्तविक नुकसान -18,850 करोड़  तक पहुँच गया। प्रति एकड़ नुकसान 31,500आँका गया है, जबकि PM किसान निधि केवल 6,000/वर्ष है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> एसकेएम की आगामी आंदोलन की रूपरेखा</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">संयुक्त किसान मोर्चा ने आगामी आंदोलन की योजना घोषित करते हुए बताया</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> 1-3 सितम्बर 2025: कपास उगाने वाले गाँवों में जनसभाएँ<br />
10 सितम्बर तक: स्थानीय निकायों को ज्ञापन देने हेतु हस्ताक्षर अभियान<br />
17-18 सितम्बर: एसकेएम  प्रतिनिधिमंडल का **विदर्भ क्षेत्र दौरा<br />
24 अगस्त: एनसीसी  द्वारा माँग पत्र और अपील का प्रारूप<br />
तिथि घोषित होने पर: मंडल महापंचायत और सांसदों के खिलाफ विरोध मार्च</p>
<h3 style="text-align:justify;">कपास खेती का राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत में कपास का क्षेत्रफल 120.55 लाख हेक्टेयर है, जो वैश्विक कपास क्षेत्रफल का 36 फीसद है। भारत, कपास क्षेत्रफल के हिसाब से  दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उत्पादन में महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना शीर्ष पर हैं। भारत की  67 फीसद  कपास खेती वर्षा पर निर्भर  है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हाल के वर्षों में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई</h3>
<p style="text-align:justify;">2014-15: 6.56 MMT<br />
2021-22: 5.36 MMT<br />
2023-24 (अनु.): 5.50 MMT</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसान आत्महत्याओं की भयावह स्थिति</h3>
<p style="text-align:justify;">1991 के बाद से भारत में 4.5 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। मोदी शासन में प्रतिदिन औसतन 31 किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन कोई व्यापक ऋण माफी योजना लागू नहीं की गई। इसके विपरीत 16.11 लाख करोड़ कॉरपोरेट ऋण माफ किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र विधानसभा में जुलाई 2025 में बताया गया कि केवल मार्च-अप्रैल 2025 में 479 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। वर्तमान में राज्य सरकार केवल  1 लाख मुआवजा देती है, जिसे एसकेएम  ने बढ़ाकर  25 लाख करने की मांग की है और इसे 2014 से प्रभावी करने की बात कही है। संयुक्त किसान मोर्चा  ने सभी कपास किसानों से आह्वान किया है कि वे इस निर्णय के खिलाफ संगठित होकर तीव्र जन आंदोलन छेड़ें। एसकेएम ने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो  मंडल स्तर पर महापंचायतें होंगी  और सांसदों के खिलाफ मार्च निकाला जाएगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="नाबालिग छात्रा को घर से अगवा कर किया दुराचार" href="http://10.0.0.122:1245/minor-girl-kidnapped-and-raped/">नाबालिग छात्रा को घर से अगवा कर किया दुराचार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Aug 2025 15:00:25 +0530</pubDate>
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                <title>पंजाब में मक्की का रकबा बढ़कर एक लाख हेक्टेयर हुआ: खुड्डियां</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (ब्यूरो)। Chandigarh News: पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार की फसली विविधता के तहत मक्की की फसल अधीन रकबे में 16.27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। वर्ष 2024 में मक्की का रकबा 86,000 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर एक लाख हेक्टेयर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/corn-acreage-in-punjab-increased-to-one-lakh-hectare-khuddian/article-74653"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/maize.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (ब्यूरो)।</strong> Chandigarh News: पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार की फसली विविधता के तहत मक्की की फसल अधीन रकबे में 16.27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। वर्ष 2024 में मक्की का रकबा 86,000 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर एक लाख हेक्टेयर हो गया। कृषि मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने कृषि विविधता और भूमिगत जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पायलट परियोजना शुरू की थी। Chandigarh News</p>
<p style="text-align:justify;">इसके तहत छह जिलों, बठिंडा, संगरूर, कपूरथला, जालंधर, गुरदासपुर और पठानकोट में 12,000 हेक्टेयर रकबे को धान से मक्की की खेती में परिवर्तित किया जाना था। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए, राज्य सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा भी की थी। इसके अतिरिक्त, इस बदलाव के संबंध में किसानों के मार्गदर्शन और सहायता के लिए 185 किसान मित्र नियुक्त किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खुड्डियां ने मक्की की निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने के लिए कृषि, पंजाब मंडी बोर्ड और मार्कफेड अधिकारियों की भागीदारी वाली जिला स्तरीय समितियों के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने मक्की उत्पादक किसानों से अपील की कि वे मंडियों में सूखी फसल लेकर आयें, ताकि उन्हें फसल बेचने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग के प्रबंधकीय सचिव डॉ. बसंत गर्ग ने मक्की की फसल में नमी के उचित स्तर को बनाये रखने के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि नमी की मात्रा 14 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। Chandigarh News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="गुरुग्राम में खुले में घूमने वाले पशुओं के मामले में की जा रही सख्त कार्रवाई" href="http://10.0.0.122:1245/strict-action-is-being-taken-in-the-case-of-animals-roaming-freely-in-gurugram/">गुरुग्राम में खुले में घूमने वाले पशुओं के मामले में की जा रही सख्त कार्रवाई</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/corn-acreage-in-punjab-increased-to-one-lakh-hectare-khuddian/article-74653</link>
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                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 20:59:32 +0530</pubDate>
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