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                <title>Slowdown - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बाजवा की सिद्धू को हद में रहने की हिदायत</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धू अपनी रफ्तार धीमी करें, नहीं तो होगा नुक्सान चंडीगढ(अशवनी चावला)। नवजोत सिद्धू किसी को भी कुत्ता कहने वाला कौन होता है, उसने कुत्ता किसको कहा है, यह हर कोई जानता है। सिद्धू को अपनी शब्दावली को हद में रखने की जरूरत है और वह बहुत ही अधिक तेजी के साथ भाग रहे हैं। यदि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/bajwa-to-sidhu-slowdown-your-speed-otherwise-you-will-face-consequences/article-4916"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/navjot-singh-sidhu-.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सिद्धू अपनी रफ्तार धीमी करें, नहीं तो होगा नुक्सान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ(अशवनी चावला)।</strong> नवजोत सिद्धू किसी को भी कुत्ता कहने वाला कौन होता है, उसने कुत्ता किसको कहा है, यह हर कोई जानता है। सिद्धू को अपनी शब्दावली को हद में रखने की जरूरत है और वह बहुत ही अधिक तेजी के साथ भाग रहे हैं। यदि रफ़्तार धीरे न की तो नुक्सान हो सकता है। सिद्धू इस समय कईयों की आंखों में रड़का रहा है, क्योंकि वह अपने आप को ही सरकार समझता है।यह बड़ा हमला कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिन्दर बाजवा ने अपने ही साथी मंत्री नवजोत सिद्धू पर किया है तृप्त राजिन्दर बाजवा ने नवजोत सिद्धू के इंटरव्यू पर आपत्ति जाहिर की है, जिसमें नवजोत सिद्धू ने अपनी ही सरकार पर हमला करने के साथ ही कुछ राजनैतिक नेताओं को कुत्ता तक कह दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तृप्त राजिन्दर बाजवा ने कहा कि उनको बहुत दुख हुआ है कि नवजोत सिद्धू अपनी शब्दावली की सीमा को लांघते हुए कईयों के लिए कुत्ता शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह गैर जरूरी व गलत भाषा है, इसलिए नवजोत सिद्धू बताए कि उन्होंने आखिरकार कुत्ता कहा किसे है? बाजवा ने कहा कि सिद्धू ने अब यदि कुत्ता कह ही दिया है तो उनको खुल कर अपनी बात कर देनी चाहिए, जिससे हर किसी को पता चले कि सिद्धू किसके के लिए क्या शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तृप्त बाजवा ने कहा कि कुत्ता शब्द कांग्रेस के नेताओं के लिए नहीं इस्तेमाल किया है तो सिद्धू को शिरोमणी अकाली दल या फिर आम आदमी पार्टी के नेताआें के लिए भी इस तरह के शब्द का प्रयोग करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सिद्धू को खुल कर अपने दिल की बात करनी चाहिए। उन्होंने सिद्धू को सलाह दी कि वह संयम से काम लें व इतनी तेज रफ़्तार के साथ न भागें जिन हरकतों से वह भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवजोत सिद्धू की इस तरह की बातें हर किसी को चुभ सकतीं हैं, इस लिए इस तरह ही बातें करनी ही नहीं चाहिए।</p>
<h1 style="text-align:center;">खुद को ईमानदारी का सर्टीफिकेट दे रहा है सिद्धू</h1>
<p style="text-align:justify;">तृप्त राजिन्द्र बाजवा ने कहा नवजोत सिद्धू खुद को ही अपनी ईमानदारी का सर्टीफिकेट दे रहा है। उनको इस तरह नहीं करना चाहिए, क्योंकि आज सिर्फ नहीं बल्कि बहुत लोग ओर भी इमानदार हैं व ईमानदारी का सर्टीफिकेट जनता देती है कि कौन अच्छा काम कर रहा है और कौन अच्छा काम नहीं कर रहा है।</p>
<h1 style="text-align:center;">अवैध कॉलोनियों की पॉलिसी को लेकर बढ़ा विवाद</h1>
<p style="text-align:justify;">नवजोत सिद्धू व तृप्त राजिन्दर बाजवा के बीच पहले से ही सम्बन्ध सुखदायक नहीं थे परंतु अब ताजा विवाद पंजाब में बन रहा। वह पॉलिसी के कारण पैदा हुआ है, जिसके द्वारा अवैध कॉलोनियों को रेगुलर किया जाना है। हाऊसिंग विभाग द्वारा तृप्त राजिन्दर बाजवा व स्थानीय सरकारें विभाग द्वारा नवजोत सिद्धू पॉलिसी बना रहे हैं। दोनों की पॉलिसी में काफी अधिक अंतर है परन्तु दोनों ही इस नीति को बनाने वाली सब समिति के मैंबर हैं। इस लिए बीते दिनों बैठक दौरान यह विवाद पैदा हुआ व नवजोत सिद्धू ने एक इंटरव्यू देते हुए काफी कुछ विवादास्पद बयान दे दिए।</p>
<h1 style="text-align:center;">सिद्धू की हर बात नहीं मानी जा सकती : बाजवा</h1>
<p style="text-align:justify;">तृप्त राजिन्द्र बाजवा ने कहा नवजोत सिद्धू की हर बात नहीं मानी जा सकती है। इस लिए सिद्धू अपनी हर बात मनवाने के लिए जोर न दें। उन्होंने कहा कि हर बात किसी की भी नहीं मानी जा सकती है। कई बार मुख्य मंत्री अमरिन्दर सिंह उनकी बात भी नहीं मानते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वह कुछ भी कहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार में कईयों की बात मान ली जाती हैं व कईयों की नहीं मानी जाती है।</p>
<h1 style="text-align:center;">मैं कौन होता हूं सिद्धू को डराने वाला</h1>
<p style="text-align:justify;">तृप्त राजिन्द्र बाजवा ने कहा कि वह कौन होते हैं, जो कि नवजोत सिद्धू को डराऐंगे। उन्होंने कहा कि कोई किसी से डरने वाला नहीं है और न ही अमरिन्दर सिंह भी किसी को डराने वाले हैं, इस लिए सिद्धू को इस तरह की बातें करने से गुरेज करना चाहिए।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jul 2018 05:19:01 +0530</pubDate>
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                <title>अब सब्जियों पर मंदी की मार</title>
                                    <description><![CDATA[आलू उत्पादक किसानों को पहुंचा था नुक्सान, दो रूपए किलो बेचा था आलू सनौर (वरिन्दर बल्लू)।  इस साल का सब्जी सीजन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। पहले आलू उत्पादक किसानों को भाव न मिलने के कारण निराशा का सामना करना पड़ा। आलू खुदाई के दौरान बारिश ने फसल को नुक्सान पहुंचाया। इसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/now-the-slowdown-of-vegetables/article-1628"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/sabji.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">आलू उत्पादक किसानों को पहुंचा था नुक्सान, दो रूपए किलो बेचा था आलू</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सनौर (वरिन्दर बल्लू)।</strong>  इस साल का सब्जी सीजन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। पहले आलू उत्पादक किसानों को भाव न मिलने के कारण निराशा का सामना करना पड़ा। आलू खुदाई के दौरान बारिश ने फसल को नुक्सान पहुंचाया। इसके बाद फसल का उचित मूल्य नहीं मिला। बेशक आलू 4 से 5 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकता रहा लेकिन बाद में 2 रुपए किलो के हिसाब से ही आलू की बिक्री हुई। इतनी कम कीमत से तो आलू की फसल पर हुए खर्च को भी पूरा नहीं किया जा सकता था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पुण्य करना बेहतर समझा</h2>
<p style="text-align:justify;">किसान करनैल सिंह अनुसार भिंडी व मिर्च को तोड़ने के लिए सात रुपए प्रति किलो के हिसाब से मजदूरी और मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती है। कई किसानों ने अपनी घीया व कददू की सब्जी को गौशाला में ही भेज दिया है। किसानों का कहना था इतने कम रेट से कुछ पल्ले नहीं पड़ता। कम से कम गौशाला में सब्जी भेजने से पुण्य का काम ही करना सही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">घाटा पड़ना कोई नई बात नहीं</h2>
<p style="text-align:justify;">सब्जियों के रेट में आई भारी गिरावट संबंधी जब किसान रुपिन्दर सिंह जोशन और जसबीर सिंह से बातचीत की तो उन्होंने कहा उनका परिवार पिछली कई पीढ़ियों से सब्जी की काश्त कर रहा है। सब्जियों के रेट में इतनी गिरावट आना कोई नई बात नहीं, लेकिन आज के महंगाई के दौर में फसल पर होने वाले खर्च इतने बढ़ हो गए हैं कि फसल से होने वाले घाटे को बर्दास्त नहीं किया जा सकता।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ये भाव बिक रही सब्जियां</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>घीया 5 से 7 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>खीरा 3 से 5 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कददू 3 से 4 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भिंडी 12 से 15 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मिर्च 10 से 12 रुपए </strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>अन</strong>देखा करने का आरोप</h2>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने इस फसलों पर मंडराए संकट के लिए केंद्र व राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि समय की सरकारों ने किसानी मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने पंजाब सरकार व केंद्र सरकार से सब्जियों के रेट निर्धारित करने व पाकिस्तान से निर्यात की जाने वाली सब्जी पर पाबंदी लगाने की मांग की।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पहले तोरी के अच्छे रेट मिले थे</h2>
<p style="text-align:justify;">किसान रूपिन्द्र सिंह जोशन ने बताया अब मौजूदा समय में उन्होंने लगभग तीन एकड़ में तोरी की काश्त की गई है। तोरई 2 से 3 रुपए प्रति किलो बिक रही है, जोकि बहुत ही कम है। इस रेट से तो उनकी फसल पर लागत भी पूरी नहीं होती। उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों में तोरई की फसल का रेट ठीक रहा था जिसे देखकर इस बार किसानों ने इस फसल की अधिक पैदावार की।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2017 01:08:03 +0530</pubDate>
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