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                <title>Problem - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कैराना की सड़कों पर &amp;#8216;मौत&amp;#8217; का फर्राटा भर रहे डग्गामार वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना। Kairana News: नगर में डग्गामार वाहन सड़कों पर बेरोकटोक फर्राटा भर रहे हैं। ये अनफिट और खटारा वाहन हादसों को दावत देते नजर आ रहे हैं ।कैराना-पानीपत रूट पर करीब 48 से अधिक डग्गामार वाहन दौड़ते हैं। पालिका मार्केट के पास और  कांधला तिराहे से इनके अवैध स्टैंड धड़ल्ले से चल रहे हैं। डग्गामार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/daggamar-vehicles-filling-the-streets-of-kairana-with-death/article-49311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/kairana-news-19.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना। </strong>Kairana News: नगर में डग्गामार वाहन सड़कों पर बेरोकटोक फर्राटा भर रहे हैं। ये अनफिट और खटारा वाहन हादसों को दावत देते नजर आ रहे हैं ।कैराना-पानीपत रूट पर करीब 48 से अधिक डग्गामार वाहन दौड़ते हैं। पालिका मार्केट के पास और  कांधला तिराहे से इनके अवैध स्टैंड धड़ल्ले से चल रहे हैं। डग्गामार वाहनों में चालक भूसे की तरह सवारियां भरते हैं, जिसके बाद उन्हें तेज गति से चलाया जाता है। Kairana News</p>
<p style="text-align:justify;">इन वाहनों के कारण हादसे की आशंका भी बनी रहती है। पूर्व में भी कई बार हादसे होते रहे हैं, जिनमें लोग अकाल मौत के गाल में समा चुके हैं। पिछले दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध स्टैंड और डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भी परिवहन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार को चूना लगे रहे डग्गामार | Kairana News</h3>
<p style="text-align:justify;">नगर में रोडवेज बस स्टैंड स्थित है। बस स्टैंड के सामने से ही कांधला तिराहे से धड़ल्ले के साथ ओवरलोड वाहनों का जमघट लगता है और उनका बेरोकटोक संचालन किया जाता है। ये वाहन सड़क किनारे और सड़कों पर बेतरतीब खड़े होते हैं। ऐसे में जाम की समस्या तो बनती ही है, साथ ही डग्गामार वाहनों के कारण सरकार को प्रतिमाह भारी राजस्व का चूना भी लग रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खानापूर्ति में सिमट जाती है कार्रवाई | Kairana News</h3>
<p style="text-align:justify;">एआरटीओ रोहित राजपूत डग्गामार वाहनों के खिलाफ कभी-कभी अभियान चलाते हैं, जिसमें कार्रवाई चालान या फिर इक्का-दुक्का वाहनों को सीज करने तक सीमित नजर आती है। कार्रवाई भी ऐसी होती है कि कुछ ही देर बाद सड़कों पर फिर से डग्गामार वाहन नजर आते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अवैध वसूली के लग चुके हैं आरोप</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुई थी, जिसमें एआरटीओ के नाम पर ओवरलोड वाहनों से दलाल द्वारा वसूली किए जाने की बात सुनाई पड़ रही थी। इसकी शिकायत भी सीएम से की गई और यह मामला एआरटीओ के संज्ञान में भी आया। इसके बावजूद वसूली जैसे गंभीर आरोपों को लेकर भी एआरटीओ कोई कार्रवाई नहीं करा पाए हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 11:23:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>निसिंग उप तहसील में खाली रहती कुर्सियां, कैसे होंगे जनता के काम</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने समस्याओं को लेकर किसान नेताओं के साथ नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन निसिंग। (सच कहूँ/रिंकू गोंदर) निसिंग उपतहसील परिसर में भारतीय किसान यूनियन सर छोटू राम के किसानों ने क्षेत्र निसिंग के लोगों को तहसील संबंधित कार्य में आ रही परेशानी को देखते हुए नायब तहसीलदार शैली मलिक को उपायुक्त के नाम एक ज्ञापन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/chairs-remain-vacant-in-nissing-sub-tehsil-how-will-the-public-work/article-35779"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/nissing-1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>लोगों ने समस्याओं को लेकर किसान नेताओं के साथ नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>निसिंग। (सच कहूँ/रिंकू गोंदर)</strong> निसिंग उपतहसील परिसर में भारतीय किसान यूनियन सर छोटू राम के किसानों ने क्षेत्र निसिंग के लोगों को तहसील संबंधित कार्य में आ रही परेशानी को देखते हुए नायब तहसीलदार शैली मलिक को उपायुक्त के नाम एक ज्ञापन सौंपा। शुक्रवार को प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य अमन बब्बर, जिला प्रधान अमृतपाल बुगा, उपप्रधान जोश सिंह बालू ब्लॉक प्रधान सेवा सिंह महमल के नेतृत्व में उपतहसील कार्यालय में पहुंच किसानों तहसील परिसर में नायब तहसीलदार की स्थाई नियुक्ति न होने से परेशान क्षेत्र वासियों को जमीन की रजिस्ट्ररियां, इंतकाल, जाति, हरियाणा निवासी प्रमाण पत्र, शादी प्रमाण पत्र सहित अन्य कार्यों को लेकर बहुत अधिक समस्याओं का समाना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नायब तहसीलदार मंगलवार व शुक्रवार को भी तहसील कार्यालय में न मिलने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके साथ ही उपतहसील में कार्यरत कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते है। जिस कारण तहसील कार्यालय में अपने काम से आने वाले लोगों को अव्यवस्थाओं को झेलनी पड़ रही है। लाइनों में लगने के बाद भी कर्मचारी का सीट पर आने का इंतजार करना पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">न पेयजल की व्यवस्था है न शौचालय</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान नेताओं ने बताया कि इतना ही नहीं तहसील में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न शौचालय की। तहसील कार्यालय में दिनभर कुत्ते आराम करते हुए नजर आते हंै। किसान नेताओ ने शासन व प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि उपतहसील में सभी कर्मचारियों सरकार द्वारा निर्धारित समय पर पहुंचे और जनता का कार्य समय पर निपटाए। उन्होंने सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र निसिंग की इस सबसे बड़ी समस्या की और ध्यान दिया जाए। जिससे जनता को अपने कार्य के लिए भटकना न पड़े।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी अनिवार्य की जाए</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व हरियाणा सरकार से अनुरोध किया कि उपतहसील सहित अन्य कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी अनिवार्य की जाए जिससे कर्मचारी सुबह समय पर कार्यालय पहुंच सके। इस मौके पर बलजीत सिंह, बलविंद्र सिंह, मलकीत सिंह बुगा, प्रगट सिंह, अंग्रेज सिंह, सेवा सिंह, गोल्डी, कपूर सिंह सर्वजीत सिंह सहित अन्य किसानों ने नारेबाजी भी की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं नायब तहसीलदार</h3>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में नायब तहसीलदार शैली मलिक ने बताया कि किसानों ने उपायुक्त करनाल के नाम जो ज्ञापन सौंपा है उसे उपायुक्त के पास भेज दिया जाएगा। निसिंग उपतहसील में जरनेटर खराब पड़ा था उसे भी ठीक करवा दिया गया है और तहसील परिसर में घास फूस व कबाड़े की सफाई करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि लोगों के लिए शुद्ध पेयजल, शौचालयों की सफाई भी करवाई जा रही है। जिससे यहां अपने कार्य के लिए पहुंचने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Jul 2022 18:16:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनएचआई की परियोजनाओं के लिए पैसे की समस्या नहीं : गडकरी</title>
                                    <description><![CDATA[अब तक 9674 किलोमीटर का काम दिया जा चुका है और कुछ अभी देना बाकी है। उन्होंने कहा कि ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस राजमार्ग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस तरह का देश का पहला मुंबई पूना राजमार्ग था और अब दिल्ली मेरठ परियोजना पर काम चल रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/no-money-problem-for-nhi-projects-gadkari/article-12721"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nitin-gadkari.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari ) ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की परियोजनाओं को गति दी जा रही है और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-एनएचएआई के पास इन कार्यों को पूरा करने के लिए पैसे की कमी नहीं है। गडकरी ने एनएचआई तथा मंत्रालय की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर दो दिन तक चली समीक्षा बैठक के बाद शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि प्राधिकरण की कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है और कई अन्य परियोजनाओं के लिए काम आवंटित किया जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इन परियोजनाओं पर काम पूरा करने के लिए प्राधिकरण के पास पैसे की कमी नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">एनएचएआई का काम सबको दिखे इसके लिए एक पोर्टल भी बनाया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">पोर्टल के जरिए एनएचएआई के काम के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;"> सड़क परियोजनाओं को लेकर मंत्रालय तथा एनएचएआई की समीक्षा बैठक अब तीन महीने बाद फिर आयोजित की जाएगी।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">देश का पहला मुंबई पूना राजमार्ग था (Nitin Gadkari )</h3>
<p style="text-align:justify;">आगे होने वाली बैठकों में मंत्रालय, एनएचएआई तथा लोक निर्माण विभाग की सड़कों के निर्माण की अलग अलग समीक्षा बैठक की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की महत्वपूर्ण भारत माला परियोजना की भी बैठक में समीक्षा की गयी। इस परियोजना के लिए कुल साढे नौ लाख करोड़ रुपए की लागत आनी है। इसके तहत अब तक 9674 किलोमीटर का काम दिया जा चुका है और कुछ अभी देना बाकी है। उन्होंने कहा कि ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस राजमार्ग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस तरह का देश का पहला मुंबई पूना राजमार्ग था और अब दिल्ली मेरठ परियोजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा बडोदरा-मुंबई, दिल्ली अमृतसर कटरा, चेन्नई बंगलूर, कानपुर लखनऊ, अमृतसर बटिंडा जामनगर जैसे कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jan 2020 17:22:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देशव्यापी समस्या बन रहा कूड़ा निपटान</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आम लोगों की कॉलोनियों के पास कूड़ा डंप बनाने की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए संबंधित अथॉरिटी को फटकार लगाई है। अदालत ने सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि क्यों नहीं उप राज्यपाल के भवन के सामने कूड़Þा डंप बना दिया जाए। नि:संदेह इस टिप्पणी से सिर्फ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/countrywide-problem-is-the-waste/article-5235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/no-discrimination-with-women-on-the-name-of-religion1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आम लोगों की कॉलोनियों के पास कूड़ा डंप बनाने की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए संबंधित अथॉरिटी को फटकार लगाई है। अदालत ने सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि क्यों नहीं उप राज्यपाल के भवन के सामने कूड़Þा डंप बना दिया जाए। नि:संदेह इस टिप्पणी से सिर्फ दिल्ली के ही नहीं बल्कि पूरे देश के मध्य वर्गीय व गरीबों का दर्द झलकता है। महानगरों से लेकर छोटे-बड़Þे शहरों में कूड़ा समस्या की बजाए आफत बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में कूड़े के पहाड़ बनाए जा रहे हैं फिर भी मामले का हल नहीं हो सका। अथॉरिटी ने अपने सिर से बोझ उतारने के लिए कूड़ा डंप आम लोगों की आबादी के नजदीक बना दिए, जिसका लोगों ने विरोध किया। यही हाल पूरे देश का है। प्रशासन कूड़Þा डंप के लिए ऐसी जगह चुनता है जो पास के क्षेत्र से दूर होती है लेकिन नजदीक रहने वाले लोग अधिकारियों को नजर नहीं आते। सत्ता तक पहुंच वाले लोगों से प्रशासन को डर रहता है। आम लोग जिनके पास अपनी रोजी-रोटी से ही फुर्सत नहीं का भी हल नहीं वह धरना-प्रदर्शन के लिए कहां से समय निकाल सकते हैं, अगर विरोध कर जेल चले जाएं तो परिवार को रोटी के लाले पड़ जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन इन लोगों की लाचारी का फायदा उठाकर मनमानी करता है। फिर यह मजबूर लोग कूड़े का कहर भयानक बीमारियों के रूप में झेलते हैं। सर गंगा राम अस्पताल के एक सर्वेक्षण मुताबिक दिल्ली की 50 फीसदी आबादी को कैंसर का खतरा है चाहे वह बीड़ी-सिगरेट का सेवन न भी करते हों। राजधानी जो खूबसूरती व सफाई की मिसाल होनी चाहिए वह कूड़े की समस्या से दो-चार हो रही है। पूरे देश के लिए कूड़े के निपटारे संबंधी स्पष्ट व ठोस नीति होनी चाहिए ताकि कोई प्रॉजैक्ट समय पर पूरा हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन की जल्दबाजी के कारण व सही नीतियां न होने के कारण प्रॉजैक्ट विवादों में आ जाते हैं, जिस कारण 6 महीनों में होने वाला कार्य 2-4 वर्ष के लिए लटक जाता है। दिल्ली जैसे महानगरों के लिए ऐसे प्रॉजैक्ट में देरी घातक सिद्ध होगी। छोटे-बड़े शहरों में कूड़ा डंप का विरोध हो रहा है। कहीं न कहीं यह मामले चुनावी मुद्दे बनने लगे हैं। सफाई किसी देश के विकास व तंदरूस्ती की पहली शर्त है व इसके लिए लोगों के स्वास्थ्य व हितों की बलि नहीं ली जा सकती। सरकारें अपनी जिम्मेवारी निभाएं व जनता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। कुछ लोगों का कूड़ा किसी अन्य के लिए बीमारी न बनने दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट की नसीहत से शिक्षा लेनी चाहिए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/countrywide-problem-is-the-waste/article-5235</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Aug 2018 20:45:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो दिन इंटरनेट बंद होने से आमजन परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दो पारियों में सपन्न| Constable Recruitment  श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश में रविवार को दूसरे दिन कड़ी सुरक्षा में (Constable Recruitment) पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दो पारियों में सपन्न हुई। शनिवार और रविवार को इंटरनेट बंद होने से लोग परेशान होते रहे। वहीं अभ्यर्थियों को कड़ी जांच के बाद ही एग्जाम सेंटर्स में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/internet-service-haults-peoples-problem/article-4849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/h01.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दो पारियों में<br />
सपन्न| <b>Constable Recruitment </b></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। </strong>प्रदेश में रविवार को दूसरे दिन कड़ी सुरक्षा में <strong>(Constable Recruitment)</strong> पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दो पारियों में सपन्न हुई। शनिवार और रविवार को इंटरनेट बंद होने से लोग परेशान होते रहे। वहीं अभ्यर्थियों को कड़ी जांच के बाद ही एग्जाम सेंटर्स में प्रवेश दिया गया। प्रदेश में 13 हजार 142 पदों के लिए प्रदेश भर के 78 शहरों के 664 परीक्षा केन्द्रों पर शंतिपूर्वक सम्पन्न होने से पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीगंगानगर में 89.5 परिक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ के 12-12 व सूरतगढ़ के 2 परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा में नकल रोकने के नाम पर पूरे प्रदेश में जीवन की तकनीकी रफ्तार रोक दी गई। चार घंटे की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए दोनों दिन 10 घंटे तक पूरे प्रदेश की इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इस साइबर इमरजेंसी के कारण नेट बैंकिंग, रेलवे, सभी आॅनलाइन ट्रांजेक्शन तो ठप रहे ही डिजिटल दुनिया से ही लोग कट गए।</p>
<h3>नकल गिरोह से बचाने के लिए सुरक्षा के खास इंतजाम| Constable Recruitment</h3>
<p style="text-align:justify;">विडंबना ये है कि प्रदेश के 200 परीक्षा सेंटरों पर जैमर लगे होने के बावजूद ऐसा किया गया। आॅनलाइन परीक्षा होने के बावजूद नकल गिरोह की सक्रियता के चलते पिछली बार परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इस बार परीक्षा को नकल गिरोह से बचाने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए थे। दो दिन व चार पारियों के लिए अलग-अलग प्रश्न पत्र बनाए गए हैं। प्रत्येक अभ्यर्थी को एक आवेदन पत्र पर सिर्फ एक ही पारी में शामिल होना है।</p>
<h1 style="text-align:center;">कड़ी रही प्रवेश व्यवस्था| Constable Recruitment</h1>
<p style="text-align:justify;">पुलिस कांस्टेबल परीक्षा में नकल रोकने के लिए पुलिस द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। व्यवस्था इतनी सघन की मेल पुरूषार्थी अर्धनग्न होकर परीक्षा दे रहे थे तो महिला परीक्षार्थियों के गहने, चुनरी, कानों की बालियां, हाथ की मोली, चूड़ियां, कंगन, पायजेब, पूरी बांह का शर्ट, चोटी की रिबन, पांव के शूज, मोजे, मंगलसूत्र, बालों के क्लिप, रबर सभी उतारने के बाद परीक्षा केन्द्र में जा रही थी। परीक्षा केन्द्र के अंदर महिला परीक्षार्थियों के बीच लड़के बिना बनियान या बनियान के साथ परीक्षा दे रहे थे जिसके चलते परीक्षा दे रही महिला परीक्षार्थियों को शर्मसार होना पड़ा।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/internet-service-haults-peoples-problem/article-4849</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Jul 2018 15:28:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अभी तक नहीं बना अंडर ब्रिज, समस्या ज्यों की त्यों</title>
                                    <description><![CDATA[तलवंडी भाई(बसंत सिंह)। कृषि यंत्र बनाने में भारत में प्रसिद्ध फिरोजपुर का मशहूर कस्बा तलवंडी भाई अनेकों समस्याओं के साथ घिरा हुआ है। तलवंडी भाई नेशनल हाईवे 54 बठिंडा -अमृतसर राष्ट्रीय शाह मार्ग पर स्थित है व फिरोजपुर -लुधियाना रेलवे लाईन तलवंडी भाई को दो भागों में बांटती है। 35 हजार से अधिक की आबादी वाला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/problem-of-railway-gate-and-under-ground-bridge/article-4672"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/railway-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तलवंडी भाई(बसंत सिंह)। </strong>कृषि यंत्र बनाने में भारत में प्रसिद्ध फिरोजपुर का मशहूर कस्बा तलवंडी भाई अनेकों समस्याओं के साथ घिरा हुआ है। तलवंडी भाई नेशनल हाईवे 54 बठिंडा -अमृतसर राष्ट्रीय शाह मार्ग पर स्थित है व फिरोजपुर -लुधियाना रेलवे लाईन तलवंडी भाई को दो भागों में बांटती है।</p>
<p style="text-align:justify;">35 हजार से अधिक की आबादी वाला यह कस्बा और करीब 60 गांवों का केंद्र बिंदु है विधान सभा व लोक सभा की चुनावों में उम्मीदवारों की जीत-हार का यहां के वोटरों का अहम रोल रहता है परंतु जीत के बाद भी उम्मीदवारों द्वारा क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती जिस कारण लोगों की समस्याएं ज्यों की त्यों ही नजर आती हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">रेलवे फाटक व अंडर ग्राउंड ब्रिज की समस्या</h2>
<p style="text-align:justify;">रेलवे फाटक पर ट्रैफिक की समस्या से आम लोग परेशान हैं। इस का मुख्य कारण लुधियाना -फिरोजपुर रेलवे लाईन पर बने रेलवे फाटक है जो दिन में 20 बार बंद होता है और खुलता है व कई बार रेलवे क्रॉसिंग और स्पैशल गाड़ियों के समय के कारण बठिंडा -अमृतसर राष्ट्रीय मार्ग पर जाम लग जाते हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">लोगों को करना पड़ रहा परेशानियों का सामना</h2>
<p style="text-align:justify;">अभी तो तलवंडी भाई के बठिंडा -अमृतसर राष्ट्रीय मार्ग के बाइपास पर रेलवे ओवर ब्रिज बनने के कारण लम्बे रूट वाले वाहनों को तो बहुत फायदा हो गया है जो बायपास होकर गुजर जाते हैं परंतु तलवंडी भाई रेलवे लाईन के कारण दो पक्षों में बंटा होने के कारण क्षेत्रीय निवासियों और दुकानदारों का आना -जाना बना रहता है। जिससे राहगीरों का घंटों बद्धी समय ट्रैफिक जाम होने के कारण गुजर जाता है व कई बार एम्बूलैंस व फेयर ब्रिगेड की गाड़ियां को जाम में फंसना पड़ जाता है, जिस कारण कोई असुखद घटना घटने का खतरा बना रहता है।</p>
<h2 style="text-align:center;">अंडर ब्रिज बनाने के लिए सैंटर में रेलवे मंत्री से मिलेंगे : रूप लाल</h2>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस पार्टी के ब्लाक अध्यक्ष रूप लाल पूर्व एमसी व पंजाब आढ़तिया एसोसिएशन के वायस अध्यक्ष ने बताया कि हम कई बार उच्च आधिकारियों को रेलवे अंडर ग्राउंड अंडर ब्रिज संबंधी मिलकर आवेदनपत्र दे चुके हैं व अब हम जब रेलवे डिविजन फिरोजपुर के डीआरएम से मिले तो उन्होंने बताया कि तलवंडी भाई का अंडर-ग्राउंड, अंडर-ब्रिज मंजूर हो चुका है।</p>
<h2 style="text-align:center;">गांव वासी अधिक परेशान : राकेश कुमार</h2>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय शहर के रहने वाले राकेश कुमार पूर्व वायस अध्यक्ष व पंजाब प्रदेश कांग्रेस पार्टी के एससी, एसटी के जरनल सचिव ने बताया कि फाटकों की सबसे अधिक परेशानी गांव की तरफ रहने वाले शहर निवासियों को आती है क्योंकि शहर की मैन इमारतें जैसे मैन बाजार, प्राईवेट अस्पताल, नगर कौंसिल, तहसील कॉॅम्पलैक्स, मार्केट समिति व अनाज मंडी आदि होने के कारण गांव की तरफ रहने वाले शहरवासियों को कई बार बाजार की तरफ जाना पड़ता है जबकि फाटक अधिक बार बंद होने के कारण दो हिस्सों में बंटे तलवंडी भाई वासियों की आर्थिक हालत पतली हो रही है। इस कारण उन्होंने पंजाब सरकार से पुरजोर मांग की कि पास हुए अंडर ग्राउंड ब्रिज को जल्द से जल्द बनाया जाए।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jul 2018 03:55:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहर में पानी, लेकिन शाहपुर ग्रामीणों के सूखे हलक</title>
                                    <description><![CDATA[वाटर सप्लाई न होने निजी टैंकरों के भरोसे हैं ग्रामीण | Water हिसार (सच कहूँ न्यूज)। शहर के नजदीकी गांव शाहपुर में पिछले लंबे समय से पेयजल (Water) समस्या बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि गांव के बुस्टिंग स्टेशन में पानी नहीं है, बल्कि नहर में पानी आने के बाद से बुस्टिंग स्टेशन के टैंक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/drinking-water-problem/article-4666"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/water.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">वाटर सप्लाई न होने निजी टैंकरों के भरोसे हैं ग्रामीण | Water</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शहर के नजदीकी गांव शाहपुर में पिछले लंबे समय से पेयजल <strong>(Water)</strong> समस्या बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि गांव के बुस्टिंग स्टेशन में पानी नहीं है, बल्कि नहर में पानी आने के बाद से बुस्टिंग स्टेशन के टैंक से भरे हुए हैं। फि र भी गांव के विभिन्न इलाकों में पेयजल सप्लाई सुचारू नहीं की जा रही है। पेयजल की इस किल्लत पर शहीद भगत सिंह युवा संगठन शाहपुर ने भारी रोष व्यक्त किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संगठन के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह बैनीवाल ने बताया कि गांव के बुस्टिंग स्टेशन में बालसमंद ब्रांच से जुड़ी कबीर माइनर से पानी डाला जाता है। नहर में पानी आए हुए तीन दिन से अधिक समय हो चुका है। ऐसे में बुस्टिंग स्टेशन के टैंकों में भी पानी पहुंच गया है। लेकिन बुस्टिंग स्टेशन के कर्मचारियों की मनमानी के चलते गांव के विभिन्न इलाकों में पेयजल सप्लाई सुचारू तरीके से नहीं की जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष तौर पर हरिजन मोहल्ला व उंची जगह पर पानी नहीं पहुंच रहा है। जिसके चलते महिलाओं को मजबूरी वश बुस्टिंग स्टेशन से मटकों में तथा ग्रामीणों को बैलगाड़ी पर पानी ढोना पड़ रहा है। इसके अलावा जिन घरों में साधन नहीं है, वे निजी टैंकरों से पानी मंगवा रहे हंै। जब ग्रामीण बुस्टिंग स्टेशन के कर्मचारियों से बात करना चाहते हैं, तो जलघर पर कोई कर्मचारी मिलता ही नहीं।</p>
<h2 style="text-align:center;">समस्या का समाधान हो नहीं तो जलघर पर जड़ेंगे ताला | Water</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">गांव में पशुओं के लिए बने तालाब का भी यही हाल है।</li>
<li style="text-align:justify;">पिछले लंबे समय से तालाब में नहरी पानी नहीं डाला गया है,</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके चलते तालाब में काले रंग की गाद जमी हुई है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस दूषित पानी को पीकर पशु भी बीमारी के शिकार हो सकते हंै,</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि गांव की गलियों का गंदा पानी भी इसी तालाब में जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">लोगों ने प्रशासन से मांग की कि इस तालाब में भी नहरी पानी डलवाया जाए</li>
<li style="text-align:justify;">तथा जलघर के कर्मचारियों को भी गांव में पानी की सुचारू सप्लाई के लिए सख्त हिदायतें दी जाए।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/drinking-water-problem/article-4666</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Jul 2018 03:32:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रेन कैप्टन दूर करेगा रेल यात्रा के दौरान आई समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रेल में सर्वप्रथम जयपुर और बीकानेर मण्डल में कार्य प्रारम्भ नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को ट्रेन में यात्रा के दौरान सेवाओं से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिये अलग-अलग व्यक्तियों से सम्पर्क करने के स्थान पर एक ही जिम्मेदार व्यक्ति से सम्पर्क करने की सुविधा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/train-caption-solve-the-passenger-problem/article-4338"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/train-catpion.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">भारतीय रेल में सर्वप्रथम जयपुर और बीकानेर मण्डल में कार्य प्रारम्भ</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को ट्रेन में यात्रा के दौरान सेवाओं से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिये अलग-अलग व्यक्तियों से सम्पर्क करने के स्थान पर एक ही जिम्मेदार व्यक्ति से सम्पर्क करने की सुविधा प्रदान की जा रही है। लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस रेल सेवाओं में ट्रेन कैप्टन की अवधारणा को लागू किया जा रहा है। यात्रा के दौरान यात्रियों को प्रदान की जा रही सेवाओं तथा उनको होने वाली समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये ट्रेन में नामित ट्रेन कैप्टन जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी तरूण जैन के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे पर भारतीय रेलवे में सर्वप्रथम बीकानेर मण्डल पर ट्रेनों में ट्रेन कैप्टन नामित करने का कार्य शुरू हो गया है। बीकानेर मण्डल पर गाडी सं 12556, हिसार-गोरखपुर एक्सप्रेस, गाडी स. 14888, बाडमेर-कालका एक्सप्रेस, गाडी सं 22982, श्रीगंगानगर-कोटा एक्सप्रेस तथा गाडी स. 14724, भिवानी-कानपुर एक्सप्रेस में ट्रेन कैप्टन नामित कर कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही जयपुर मण्डल पर गाडी सं 12976/12955 में जयपुर-कोटा-जयपुर के मध्य, गाडी सं. 12985/86, जयपुर-दिल्ली सराय-जयपुर, गाडी सं 12956/19714 में जयपुर-कोटा-जयपुर के मध्य, गाडी सं.12215/16, में जयपुर-अहमदाबाद-जयपुर के मध्य तथा गाडी सं. 12413/14 में जयपुर-दिल्ली-जयपुर के मध्य कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।</p>
<h2>बैडरोल, पानी, एसी, सुरक्षा, खाना म्बन्धित शिकायत का उसी समय होगा निराकरण</h2>
<p style="text-align:justify;">ट्रेन कैप्टन यात्रा के दौरान होने वाली सभी समस्याओं जैसे बैडरोल, पानी, एसी, सुरक्षा, खाना इत्यादि के लिये ट्रेन में सम्बंधित कार्यरत कर्मचारियों से समन्वय का कार्य करेगा तथा सम्बन्धित शिकायत का उसी समय निराकरण के लिये कार्य करेगा। ट्रेन कैप्टन के पास गार्ड, टीटीई, पैन्ट्रीकार के कर्मचारी, सफाई कर्मियों सभी के नम्बर होगें जिससे वह उनसे तुरन्त समन्वय कर यात्रियों की शिकायत को तुरंत दूर करने का कार्य करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शताब्दी, राजधानी व दुरन्तों तथा ऐसी ट्रेन में जहॉ ट्रेन सुपरवाइजर है उनमें उन्हें ट्रेन कैप्टन के रूप में नामित किया जायेगा तथा अन्य ट्रेन में सबसे वरिष्ठतम टिकट निरीक्षक को ट्रेन कैप्टन के रूप में नामित किया जायेगा तथा यात्रियों से सम्पर्क के लिये आरक्षण चार्ट पर ट्रेन कैप्टन के नम्बर अंकित रहेंगे तथा ट्रेन कैप्टन को यूनिफार्म के साथ ट्रेन कैप्टन का बेंच होगा, जिससे यात्रा उसको आसानी से पहचान सकें और अपनी किसी भी प्रकार की समस्या से अवगत करवा सकें।</p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/train-caption-solve-the-passenger-problem/article-4338</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Jun 2018 13:40:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>डेरे की साध-संगत ने राहगीरों के लिए लगाया प्याऊ</title>
                                    <description><![CDATA[संगरिया (सुरेंद्र जग्गा)।  पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए लोक भलाई कार्यों में अग्रसर ब्लॉक संगरिया की साध-संगत ने बढ़ती हुई गर्मी को देखते हुए राहगीरों के लिए आज दूसरे प्याऊ का उद्घाटन ग्राम चक हीरा सिंह वाला बस स्टैंड पर किया। इस दौरान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/dera-man-thristy-water-problem-solve-good-work-huminty/article-3709"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/sangria.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरिया (सुरेंद्र जग्गा)। </strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए लोक भलाई कार्यों में अग्रसर ब्लॉक संगरिया की साध-संगत ने बढ़ती हुई गर्मी को देखते हुए राहगीरों के लिए आज दूसरे प्याऊ का उद्घाटन ग्राम चक हीरा सिंह वाला बस स्टैंड पर किया। इस दौरान शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के जिम्मेवार लालचंद इन्सां ने बताया कि चकहीरा सिंह वाला बस स्टैंड पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था न होने के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। यहां पर नुकेरा जंडवाला सादुलशहर गंगानगर व संगरिया की तरफ आने जाने वाले राहगीरों की भीड़ हमेशा लगी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु पीने के पानी के लिए कोई सार्वजनिक प्याऊ आदि की व्यवस्था न होने से इस भीषण गर्मी में राहगीरों को अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा था। ऐसे में साध-संगत ने यहां पर आज प्याऊ का उद्घाटन विनती का भजन बोलने के बाद किया। पानी पिलाने के लिए नियमित सेवा प्रेमी रोशनलाल इन्सां देंगे, इस मौके पर उपस्थित मार्केट प्रधान कृष्ण लाल कस्वा ने साध-संगत द्वारा किए गए। इस कार्य की भरपूर प्रशंसा की इस सेवा कार्य में मुख्य रूप से लालचंद इन्सां ट्विंकल इन्सां, निंदी सोनी इन्सां, अमनदीप इन्सां, सुरेंद्र जग्गा इन्सां, लखबीर मिस्त्री इन्सां, धन्नाराम इन्सां, बद्रीप्रसाद इन्सां, भंगीदास पृथ्वी इन्सां, भंगीदास रज्जीराम इन्सां, साजन इन्सां, जगनंदन इन्सां, बलकरन सिंह इन्सां, अक्षितइन्सां, गुरबचन इन्सां, मदनलाल, मोहनलाल, सुदेश वर्मा व जगतार मिस्त्री ने भरपूर सहयोग किया।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 May 2018 20:35:40 +0530</pubDate>
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                <title>लिंगानुपात में असंतुलन की गंभीर समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समाज में बेटा-बेटी में फर्क करने की मानसिकता में बदलाव लाने और लड़कियों की दशा और दिशा सुधारने के लिए पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्तर पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए जाने के बावजूद हाल ही में ‘नीति आयोग’ की जो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, वह बेहद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/problem-of-imbalance-in-gender-equality/article-3560"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-02/save-child.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय समाज में बेटा-बेटी में फर्क करने की मानसिकता में बदलाव लाने और लड़कियों की दशा और दिशा सुधारने के लिए पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्तर पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए जाने के बावजूद हाल ही में ‘नीति आयोग’ की जो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। ‘हैल्दी स्टेट्स एंड प्रोग्रेसिव इंडिया’ (स्वस्थ राज्य और प्रगतिशील भारत) नामक इस रिपोर्ट के अनुसार देश के 21 बड़े राज्यों में से 17 में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जन्म के समय लिंगानुपात मामले में 10 या उससे अधिक अंकों की गिरावट वाले राज्यों में प्रधानमंत्री के गृह राज्य ‘गुजरात’ की हालत सबसे खराब है, जहां लिंगानुपात 53 अंकों की गिरावट के साथ 907 से घटकर महज 854 रह गया है। कन्या भ्रूण हत्या के लिए पहले से ही बदनाम हरियाणा लिंगानुपात मामले में 35 अंकों की गिरावट के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि राजस्थान में 32, उत्तराखण्ड 27, महाराष्ट्र 18, हिमाचल प्रदेश 14, छत्तीसगढ़ 12 और कर्नाटक में 11 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में लिंगानुपात में क्रमश: 19, 10 व 9 अंकों का सुधार हुआ है, जो आशाजनक तो है किन्तु यह स्थिति भी ऐसी नहीं है, जिसे लेकर हम ज्यादा उत्साहित हो सकें क्योंकि लिंगानुपात में मामूली सुधार के बावजूद इन राज्यों की स्थिति भी इस मामले में कोई बहुत बेहतर नहीं है। नीति आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी भी प्रति 1000 पुरूषों पर महिलाओं की संख्या मात्र 879 है जबकि बिहार में यह संख्या 916 है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा शुरू से ही ‘कन्या भ्रूण हत्या’ को निरूत्साहित करने के लिए जिस तरह की योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाता रहा है, उसके बावजूद लिंगानुपात के बिगड़ते संतुलन की इस तरह की रिपोर्ट सामने आना वाकई हमारे लिए गंभीर चुनौती है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘लाडली बेटी योजना’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ सरीखी सरकारी योजनाओं के अलावा विशेष रूप से मीडिया द्वारा चलाया गया कैंपेन ‘सेल्फी विद डॉटर’ नारी सशक्तिकरण की दिशा में बहुत अच्छे प्रयास किए गए किन्तु हालिया रिपोर्ट को देखें तो इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के परिणाम आशाजनक नहीं रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में यह गंभीर सवाल उठ खड़ा जाता है कि आखिर हमारे प्रयासों में कहां कमी रह गई?दरअसल हम आज भले ही 21वीं सदी में जी रहे हैं किन्तु हमारी रूढ़िवादी मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है। लिंग परीक्षण को लेकर देश में कड़े कानूनों के बावजूद आज भी अधिकांश लोग बेटे की ख्वाहिश के चलते लिंग परीक्षण का सहारा ले रहे हैं, जिससे कन्या भ्रूण हत्याएं जारी हैं या फिर बेटे की चाह में ज्यादा बच्चों को जन्म दे रहे हैं, जिससे अनचाही लड़कियों की संख्या बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में इस दौरान 2.1 करोड़ अनचाही लड़कियों का जन्म हुआ है। एक अन्य रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि पिछले कई वर्षों से प्रतिवर्ष देश में 3 से 7 लाख कन्या भ्रूण नष्ट कर दिए जाते रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश में महिलाओं की संख्या पुरूषों की तुलना में करीब पांच करोड़ कम है। विड़म्बना ही है कि नारी को या तो जन्म लेने से पहले ही कन्या भ्रूण हत्या के रूप में समाप्त करने के प्रयास होते हैं या फिर उसे दहेज की बलिवेदी पर जिंदा जला डालने की कुत्सित कोशिशें।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अजीब विड़म्बना है कि एक ओर जहां हिन्दुओं में लड़की को ‘घर की लक्ष्मी’ अथवा ‘देवी’, वहीं मुस्लिमों में बेटियों को ‘नेमत’ माना गया है, उसके बाद भी लड़कियों के साथ जिस तरह का दोयम व्यवहार किया जा रहा है, वह न केवल हमारी खोखली और विकलांग सामाजिक मानसिकता का परिचायक है, वहीं हमारी कथित आधुनिकता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाने के लिए पर्याप्त है। आधुनिक युग में भी हमारी विकलांग मानसिकता का अनुमान इस उदाहरण से सहजता से लगाया जा सकता है। हाल ही में राजस्थान के करौली जिले में एक 83 वर्षीय बुजुर्ग सुखराम बैरवा ने अपनी पत्नी की सहमति से अपने से 53 वर्ष छोटी युवती रमेशी बैरवा से सिर्फ इसलिए शादी की ताकि उसे पुत्र की प्राप्ति हो सके क्योंकि उसे अपनी पहली पत्नी से पुत्र प्राप्त नहीं हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पहले माना जाता था कि लिंगानुपात के बढ़ते असंतुलन का बड़ा कारण समाज में अशिक्षा और अंधविश्वास है और इसी कारण लड़के-लड़कियों में भेदभाव किया जाता रहा है किन्तु आज शिक्षित समाज में भी इस समस्या का निदान होने के बजाय यह समस्या नासूर की भांति फैल रही है बल्कि जिस प्रकार हालिया रिपोर्ट में देखा गया है कि देश के न्यूनतम साक्षर राज्य बिहार में लिंगानुपात की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है और शिक्षित राज्यों में हालत बिगड़ी है, यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में जहां वर्ष 1950 में लैंगिक अनुपात 970 के करीब था, वह वर्ष 2011 की जनगणना में 939 रह गया था। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी लैंगिक अनुपात में आई गिरावट को लेकर चिंता जताते हुए इसका कारण जानना चाहा था। एक सरकारी अध्ययन में तो यह भी सामने आया है कि अगर यही हालात रहे तो वर्ष 2031 तक प्रति 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या सिर्फ 898 रह जाएगी। लिंगानुपात के बढ़ते असंतुलन के खतरनाक परिणामों का आभास इसी से हो जाता है कि आज कुछ जगहों पर लोग बेटों की शादी के लिए दूसरे राज्यों से गरीब परिवारों की लड़कियों को खरीदकर लाने लगे हैं। ‘कन्या भ्रूण हत्या’ के लिए बदनाम हरियाणा जैसे राज्य में तो ‘मोलकी’ नामक यह प्रथा कुछ ज्यादा ही प्रचलित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर लड़कों के विवाह के लिए लड़कियों के अपहरण की घटनाएं भी जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उससे हमारा सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2016 की एक रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है कि देशभर में कुल 66225 लड़कियों का अपहरण हुआ, जिनमें से 33855 लड़कियों का अपहरण सिर्फ शादी के लिए ही किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की रिपोर्ट में ‘पूर्व गभार्धान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994’ (पीसीपीएनडीटी) को लागू करने तथा लड़कियों के महत्व के बारे में प्रचार करने के लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है और राज्यों से लिंग चयन कर गर्भपात की प्रवृत्ति पर कड़ाई से अंकुश लगाने का आग्रह किया गया है। हालांकि यह सुखद बात है कि हमारे समाज के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है बल्कि कई क्षेत्रों में लड़कियां लड़कों से कहीं आगे हैं लेकिन लैंगिक असमानता को लेकर जब तक लोगों की मानसिकता में अपेक्षित बदलाव नहीं आता, हालात में सुधार की उम्मीद बेमानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की बात है तो नारी सशक्तिकरण और बेटियों को गरिमामयी जीवन देने के लिए सरकार द्वारा कई बेहतरीन योजनाएं तो चलाई जा रही हैं लेकिन यहां यह ध्यान रखना होगा कि कहीं ऐसा न हो कि विभिन्न सरकारी योजनाएं सरकारी फाइलों या विभिन्न मंचों पर सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा फोटो खिंचवाने की प्रथा तक ही सीमित होकर रह जाएं। इसके लिए युद्धस्तर पर जनजागरण अभियान की भी महत्ती आवश्यकता है।</p>
<p><em>योगेश कुमार गोयल</em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2018 00:07:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेपो रेट में कटौती समस्या का समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बंैक द्वारा रेपो रेट में कटौती से अर्थव्यवस्था को संभवतया इससे अधिक कोई लाभ नहीं मिलेगा कि सरकार का वित्तीय घाटा कुछ कम होगा। सरकार को यह लाभ भी होगा कि आवास ऋण पर सब्सिडी का भार भी कुछ कम होगा। रेपो रेट में .25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6 प्रतिशत लाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/repo-rate-cuts-will-not-solve-the-problem/article-2930"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/rbi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बंैक द्वारा रेपो रेट में कटौती से अर्थव्यवस्था को संभवतया इससे अधिक कोई लाभ नहीं मिलेगा कि सरकार का वित्तीय घाटा कुछ कम होगा। सरकार को यह लाभ भी होगा कि आवास ऋण पर सब्सिडी का भार भी कुछ कम होगा। रेपो रेट में .25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6 प्रतिशत लाने से छोटे जमाकर्ताओ को नुक्सान हुआ है। इससे सेवानिवृत कर्मचारी, महिलाएं और अन्य लोग भी प्रभावित होंगे। बैंक जमा पर ब्याज दर में तेजी से कटौती कर रहे हैं, हालांकि इसका लाभ ऋण लेने वालों को नहीं दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रेपो रेट क्या है? ऋण लेने वाले बैंकों और वित्तीय संंस्थानों से ऋण लेते हैं और ये संस्थान उस पर ब्याज लेते हैं। इसलिए जिस दर पर ऋण लेने वाला बैंक से ऋण लेता है वह ब्याज दर होती है और बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से ऋण लेते हैं और इसके लिए वे अपनी सरकारी प्रतिभूतियों को भारतीय रिजर्व बैंक को बेचते हैं। जिस दर पर ये बैंक इन प्रतिभूतियों को बेचते हैं उसे ही रेपो रेट कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में यह नहीं माना गया है कि ऋण की लागत बढ़ गयी है। रेपो रेट में वृद्धि से अल्पकालिक ऋण महंगा हो जाता है और यदि इसकी दर कम होती है तो यह सस्ता हो जाता है। कुल मिलाकर रेपो रेट में कटौती से व्यापारियों को लाभ मिलता है। इससे नए घर खरीदने वालों को भी लाभ मिल सकता है क्योंकि इससे आवास ऋण पर ब्याज दर में कटौती होती है। रेपो रेट में इसलिए कटौती की गयी क्योंकि मुद्रा स्फीति में काफी गिरावट आ गयी और जून में यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर 1.5 प्रतिशत थी उसके बाद इसमें थोड़ी वृद्धि हुई। भारतीय रिजर्व बैंक ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रा स्फीति का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों का मानना है कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अपने आकलन में बहुत अधिक परंपरावादी है। 2010 से 2014 के बीच सकल मुद्रा स्फीति 48 प्रतिशत तक पहंच गयी थी और इसलिए इस तथ्य को नजरंदाज कर ब्याज दरों में यकायक कटौती बैंको, व्यापारियों और आम आदमी के हित में नहीं होगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में गिरावट जारी नहीं रहेगी। कम मुद्रा स्फीति के अनेक कारण हैं। अर्थव्यवस्था में नकदी का अभाव, कम उत्पादन और कम मांग प्रमुख हैं। मौद्रिक नीति समिति इस बात से चिंतित है कि देश में प्राइवेट निवेश कम है। कारपोरेट क्षेत्र अपनी आरक्षित निधि का निवेश नहीं कर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि वह अवसंरचना परियोजनाओं में अड़चनों और परियोजनाआें को स्वीकृति देने में विलंब से चिंतित है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक कारपोरेट ऋण लेने वालों पर दबाव से चिंतित है। वे अपनी ऋण राशि नहीं लौटा पा रहे हैं, इससे बैंकों की गैर-निष्पादनकरी आस्तियां बढ़ गयी। बैकों का बड़े पैमाने पर पुर्नपूंजीकरण किया जा रहा है और इससे सरकार की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। दूसरे शब्दों में जमाकर्ताआें का पैसा ऋण के रूप में दिया जा रहा है और यह ऋण दबाव युक्त ऋण बन रहा है और जमाकर्ता को दो तरह से नुक्सान हो रहा है। उसकी ब्याज दर में कटौती हो रही है और उसकी जमा की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। कारपोरेट क्षेत्र के लोग मूल राशि को भी नहीं लौटा रहे हैं और अपने भुगतान का पुनर्निर्धारण और रियायतें प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए रेपो रेट में कटौती के बिना भी बड़े कर्जदारों को लाभ मिल रहा है। इसलिए ब्याज दर में वृद्धि करनी चाहिए ताकि फिजूलखर्ची के लिए ऋण लेने वालों पर अंकुश लग सके।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंक आम आदमी की जमा राशि के सहारे चल रहे हैं और आम आदमी को हर मोर्चे पर नुक्सान उठाना पड़ रहा है। ब्याज की आय कम हो रही है और जो थोड़ी बहुत राशि उन्हें ब्याज के रूप में मिल रही है उस पर भी आयकर लगाया जा रहा है। इसलिए नीति निर्माताओं को ध्यान में रखना होगा कि जमा पर ब्याज दर मुद्रा स्फीति से कम है और बैंकों द्वारा आम आदमी की जमा राशि का उपयोग अपने व्यवसाय चलाने के लिए किया जा रहा है। किंतु वे जमाकर्ता को समुचित क्षतिपूर्ति नहीं दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही ऐसी राशि आय में भी शामिल नहीं की जानी चाहिए। जमाकर्ताओं को कम लाभ देने और उन पर कर लगाने से अर्थव्यवस्था को लाभ नहीं मिलेगा। इससे जमाकर्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होगी। यह मई में निक्की के विनिर्माण क्षेत्र के लिए परचेंजिंग मैनेजर इंडेक्स में गिरावट से स्पष्ट है जो 51.6 प्रतिशत से गिरकर 50.9 प्रतिशत रह गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मांग की कमी और जीएसटी की चिंता के कारण जून में विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर काफी कम रही। यह एक संक्रमण काल है और जीएसटी के कारण व्यवसाय की लागत भी बढ़ी है। तो क्या इससे भी मुद्रा स्फीति बढ़ेगी? इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। यदि इससे लागत में वृद्धि हुई तो या तो मूल्य बढ़ेंगे या इसे लागत में खपाना पड़ेगा और यदि इसे लागत में खपाया गया तो लाभ कम होगा। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मई में कारखाना उत्पादन में गिरावट आयी।</p>
<p style="text-align:justify;">आठ मुख्य उद्योगों में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि अन्य उद्योगों में गिरावट आयी। प्राथमिक वस्तुआें के उत्पादन में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि पूंजीगत उत्पादन में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आयी। अवसंरचना और निर्माण वस्तुओं के उत्पादन में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हई। सेन्टर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनोमी के अनुसार सरकारी और निजी क्षेत्र की कुल परियोजनाओं में से 12.3 प्रतिशत परियोजनाएं 2017 की पहली तिमाही में ठप्प रही। 1995 के बाद यह तीसरी बार सर्वाधिक उच्च स्तर था और 2004 के बाद पहली बार ऐसा अवसर था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए लगता है रेपो रेट में कटौती से उन लोगों के अलावा किसी को लाभ नहीं हो रहा है जो अपनी जमा राशि को बैंक से निकाल रहे हैं। इसके अलावा सभी नीतिगत मुद्दों को रेपो रेट में कटौती के साथ जोड़ना बुद्धिमता नहीं है। यह दुधारी तलवार है। ब्याज दर अपने निम्नतर स्तर पर हैं और बैंक प्रभार अपने उच्चतम स्तर पर हैं और इसी स्थिति में सुधार की आवश्यकता है। इसलिए ब्याज दरों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। कम ब्याज दर से अर्थव्यवस्था में तेजी नहीं आएगी किंतु कम बैंक प्रभारों से निश्चित रूप से आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
<strong>–<em>शिवाजी सरकार</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2017 04:26:14 +0530</pubDate>
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                <title>जंग किसी समस्या का हल नहीं : सुषमा स्वराज</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के पड़ोसियों के साथ रिश्ते अच्छे नहीं : कांग्रेस नई दिल्ली: संसद में आज भी हंगामे के आसार हैं। विपक्ष शुक्रवार को सुषमा स्वराज के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकता है। अपोजिशन का आरोप है कि सुषमा ने नरेंद्र मोदी के लाहौर दौरे और बांडुंग कॉन्फ्रेंस के बारे में गलत जानकारी दी। अपोजिशन को सुषमा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/jung-does-not-solve-any-problem-sushma-swaraj/article-2861"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sushma-savraj.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">भारत के पड़ोसियों के साथ रिश्ते अच्छे नहीं : कांग्रेस</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> संसद में आज भी हंगामे के आसार हैं। विपक्ष शुक्रवार को सुषमा स्वराज के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकता है। अपोजिशन का आरोप है कि सुषमा ने नरेंद्र मोदी के लाहौर दौरे और बांडुंग कॉन्फ्रेंस के बारे में गलत जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपोजिशन को सुषमा के इस बयान पर भी नाराजगी है, नेहरू ने व्यक्तिगत रूप से सम्मान कमाया लेकिन मोदी ने पूरे देश को सम्मान दिलाया। कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार की फॉरेन पॉलिसी पर जमकर हमला बोला और कहा कि भारत के पड़ोसियों के साथ रिश्ते अच्छे नहीं हैं। जवाब में डोकलाम पर सुषमा स्वराज ने कहा जंग किसी समस्या का हल नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, सुषमा स्वराज ने सदन में कहा था कि बानडुंग एशिया अफ्रीका संबंधों पर हुए सम्मेलन में उन्हें बयान देना का मौका ही नहीं मिला वहीं, कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ये कहते रहे कि उन्होंने भाषण दिया और पूर्व पीएम पंडित नेहरू का नाम नहीं लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान से भारत के संबंधों पर सदन में बताया था कि 2016 में कश्मीर में बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद दोनों देशों के रिश्तों में बिगाड़ आया।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि कांग्रेस का कहना है कि 2015 में पीएम मोदी जब पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बर्थडे की मुबारकबाद देने लाहौर गए, उसके कुछ वक्त बाद ही पठानकोट में आतंकी हमला हुआ। विपक्ष का ये भी मानना है कि पठानकोट के अलावा पांच और घटनायें भी हुईं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 23:35:54 +0530</pubDate>
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