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                <title>Latur News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Ravindra Chavan apology: दिवंगत पिता पर टिप्पणी को लेकर अभिनेता रितेश देशमुख की भावुक अपील, भाजपा नेता ने मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[Ravindra Chavan apology: मुंबई। अभिनेता रितेश देशमुख ने मंगलवार को महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की उस टिप्पणी पर भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें उनके दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को लेकर बयान दिया गया था। रितेश ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में संयमित शब्दों में अपनी बात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ritesh-deshmukhs-emotional-appeal-over-comment-on-vilasrao-deshmukh-bjp-leader-apologizes/article-80071"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/ritesh-deshmukh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ravindra Chavan apology: मुंबई। अभिनेता रितेश देशमुख ने मंगलवार को महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की उस टिप्पणी पर भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें उनके दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को लेकर बयान दिया गया था। रितेश ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में संयमित शब्दों में अपनी बात रखी और सभी से मर्यादा बनाए रखने की अपील की। Latur News</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो संदेश में रितेश देशमुख ने कहा कि जो व्यक्ति अपना जीवन जनता की सेवा में समर्पित करते हैं, वे लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बना लेते हैं। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा कि किसी नाम या लिखे हुए शब्द को मिटाया जा सकता है, लेकिन जो स्मृतियां लोगों के मन में बस जाती हैं, उन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">यह प्रतिक्रिया भाजपा नेता रविंद्र चव्हाण के उस बयान के बाद सामने आई, जो उन्होंने दिवंगत कांग्रेस नेता विलासराव देशमुख के गृह नगर लातूर में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक के दौरान दिया था। अपने संबोधन में चव्हाण ने कहा था कि लातूर से विलासराव देशमुख से जुड़ी स्मृतियां समाप्त कर दी जाएंगी। इस टिप्पणी के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। Latur News</p>
<h3>विलासराव देशमुख की स्मृतियों को लातूर से मिटाना असंभव है</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस पार्टी ने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भाजपा पर एक ऐसे नेता की विरासत को कमतर आंकने का आरोप लगाया, जिसने महाराष्ट्र और विशेष रूप से लातूर के विकास के लिए जीवनभर कार्य किया। मुंबई से जारी बयान में कांग्रेस ने कहा कि विलासराव देशमुख की स्मृतियों को लातूर से मिटाना असंभव है, क्योंकि वे जनता के मन और इतिहास में गहराई से अंकित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने यह भी कहा कि इससे पहले भी इस तरह के प्रयास किए गए, लेकिन लातूर के जागरूक और स्वाभिमानी नागरिकों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी के अनुसार, विलासराव देशमुख ने लातूर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास किए।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद रविंद्र चव्हाण ने अपने बयान पर सफाई देते हुए खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की आलोचना करना नहीं था और स्थानीय निकाय चुनावों में मूलभूत नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके कथन से रितेश देशमुख की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं और उनके बयान को राजनीतिक दृष्टि से न देखा जाए। Latur News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
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                <title>Latur Earthquake: महाराष्ट्र की भयानक सुबह! सूरज निकलने से पहले बिछ गईं हजारों लाशें!</title>
                                    <description><![CDATA[Latur Earthquake History: 30 सितम्बर 1993 की तड़के चार बजे से कुछ पहले, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तब धरती अचानक थर्रा उठी। महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के किल्लारी गाँव और उसके आसपास के क्षेत्रों में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने देखते ही देखते सैकड़ों बस्तियों को खंडहर में बदल दिया। Latur […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/killari-earthquake-a-horror-maharashtra-will-never-forget/article-76318"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/mayamar-earthquake1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Latur Earthquake History: 30 सितम्बर 1993 की तड़के चार बजे से कुछ पहले, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तब धरती अचानक थर्रा उठी। महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के किल्लारी गाँव और उसके आसपास के क्षेत्रों में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने देखते ही देखते सैकड़ों बस्तियों को खंडहर में बदल दिया। Latur Earthquake News</p>
<p style="text-align:justify;">भूकंप का केंद्र किल्लारी के समीप, लगभग दस किलोमीटर की गहराई में था। लगातार आए तीन तीव्र झटकों ने पलभर में पक्के मकानों से लेकर झोपड़ियों तक को ध्वस्त कर दिया। खेतों की मेड़ें टूट गईं, सड़कें दरक गईं और चारों ओर चीख-पुकार गूँज उठी। उस दिन महाराष्ट्र में अनंत चतुर्दशी का पर्व था। गणेश विसर्जन की धूमधाम के बाद लोग थके-मांदे अपने घर लौटकर विश्राम में लीन हो गए थे। किसी को आभास भी न था कि उत्सव की वह रात अगली सुबह शोकगीत में बदल जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस आपदा की चपेट में लातूर और उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जिलों के 50 से अधिक गाँव आए। औसा और उमरगा तहसीलें सबसे अधिक प्रभावित हुईं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार लगभग आठ हज़ार लोगों ने प्राण गँवाए, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक मानी जाती है। सोलह हज़ार से अधिक लोग घायल हुए और असंख्य पशुधन भी मलबे में दबकर काल के ग्रास बने।</p>
<p style="text-align:justify;">हज़ारों घर जमींदोज़ हो गए। किल्लारी जैसे कई गाँव तो मानो नक्शे से मिट गए। सुबह होते-होते हर ओर केवल मलबे के ढेर और शोकाकुल लोगों की आँखों से बहते आँसू दिखाई दे रहे थे। लोग अपने प्रियजनों को ढूँढते रहे, परंतु हाथ आया तो केवल सन्नाटा।</p>
<p style="text-align:justify;">आज तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उस रात की स्मृति किल्लारी और आसपास के गाँवों के लोगों को कंपा देती है। जिन बच्चों ने उस भयावह त्रासदी को देखा था, वे आज जवान हो चुके हैं। उन्होंने जीवन को फिर से सँवारने का प्रयास किया है, किंतु उस आपदा का घाव समय के साथ भी पूरी तरह नहीं भर पाया। यह भूकंप केवल प्राकृतिक आपदा नहीं था, बल्कि मानव जीवन की नश्वरता और प्रकृति की अनियंत्रित शक्ति का गंभीर स्मरण भी है। Latur Earthquake History</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 12:43:30 +0530</pubDate>
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