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                <title>PFI Ban Case: पीएफआई प्रतिबंध मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने लिया ये बड़ा संज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[PFI Ban Case: नई दिल्ली। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर लगाए गए पांच वर्ष के प्रतिबंध को लेकर कानूनी विवाद अब भी जारी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए पीएफआई द्वारा दायर याचिका को विचारणीय माना और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-delhi-high-court-has-taken-significant-action-in-the-pfi-ban-case/article-76847"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/high-court-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">PFI Ban Case: नई दिल्ली। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर लगाए गए पांच वर्ष के प्रतिबंध को लेकर कानूनी विवाद अब भी जारी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए पीएफआई द्वारा दायर याचिका को विचारणीय माना और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। PFI Ban News</p>
<p style="text-align:justify;">पीएफआई ने अपनी याचिका में गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के अंतर्गत गठित ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें संगठन पर प्रतिबंध को सही ठहराया गया था। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह यह तय करेगी कि क्या पीएफआई पर लगाया गया प्रतिबंध विधिसम्मत और न्यायसंगत है या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मार्च 2023 में यूएपीए ट्रिब्यूनल ने केंद्र सरकार द्वारा पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंध को कायम रखा था। ट्रिब्यूनल का कहना था कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर प्रतिबंध उचित है। इसके विरोध में पीएफआई ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इससे पूर्व, संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल की थी, किंतु वहां से उन्हें उच्च न्यायालय में ही राहत पाने की सलाह दी गई थी। PFI Ban News</p>
<h3>केंद्र सरकार ने पीएफआई को  ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित किया था</h3>
<p style="text-align:justify;">सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को यूएपीए की धारा 3 के तहत ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित किया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि यह संगठन देश की आंतरिक सुरक्षा और एकता के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है तथा इसकी गतिविधियाँ आतंकवाद से जुड़ी हुई हैं। सरकार ने इस प्रतिबंध के दायरे में पीएफआई के साथ-साथ रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (AIIC) और अन्य संबद्ध संगठनों को भी शामिल किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि अदालत के पास यूएपीए अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत इस मामले की सुनवाई का अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा दायर उत्तर के बाद ही यह तय होगा कि प्रतिबंध के पीछे के कारण पर्याप्त और वैध हैं या नहीं। अब सभी की निगाहें 20 जनवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि पीएफआई पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा या उसमें कोई संशोधन किया जाएगा। PFI Ban News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-delhi-high-court-has-taken-significant-action-in-the-pfi-ban-case/article-76847</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 15:53:43 +0530</pubDate>
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