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                <title>Kapal Mochan Mela: 30 रुपये महीने की नौकरी पर जलेबी बनानी सीखी थी, आज पूरे भारत में मशहूर</title>
                                    <description><![CDATA[व्यासपुर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Kapal Mochan Mela: मेला श्री कपाल मोचन में हर साल विभिन्न प्रकार के सामान के स्टॉल लगाए जाते हैं और इन्ही स्टॉलों में देसी घी से बनी जलेबी की स्टॉल भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र होती है। इसी कड़ी में जलेबी को बनाने वाले बलजीत ने बताया कि उन्होंने 30 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/every-year-stalls-selling-various-types-of-goods-are-set-up-in-the-fair-shri-kapal-mochan/article-77684"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/vyaspur-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>व्यासपुर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)।</strong> Kapal Mochan Mela: मेला श्री कपाल मोचन में हर साल विभिन्न प्रकार के सामान के स्टॉल लगाए जाते हैं और इन्ही स्टॉलों में देसी घी से बनी जलेबी की स्टॉल भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र होती है। इसी कड़ी में जलेबी को बनाने वाले बलजीत ने बताया कि उन्होंने 30 रुपये महीने की नौकरी पर जलेबी बनानी सीखी थी, जलेबी बनाने का जुनून इतना बढ़ गया कि 1980 से उन्होंने अपना जलेबी बनाने का काम शुरू कर दिया जो बाद में जलेबी से गोहाना के जलेब के नाम से पूरे भारत में मशहूर हो गया। उन्होंने बताया कि कपाल मोचन मेले में वह कई सालों से आ रहे है। Vyaspur News</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं कपाल मोचन मेले में जहां श्रद्धालु दूर-दराज से पवित्र सरोवरों में स्नान करने तथा अपनी मनचाही मुराद मांगने आते हैं, वहीं श्रद्धालु खरीदारी भी करते हैं तथा खरीदारी करने के बाद गोहाना के शुद्ध देसी घी के जलेबी खाना नहीं भुलते है। प्रशासनिक खंड के सामने गोहाना के जलेबी की स्टॉल पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई जलेबी को सभी दलों के बड़े-बड़े राजनेताओं ने चखा है और उसे सराहा है। वे लगभग 40 साल से जलेबी बनाने का कार्य करते आ रहे है। इस साल मेला कपाल मोचन में उसके साथ जलेबी बनाने वाले 8 कलाकार आए हैं। उनके द्वारा बनाई गई जलेबी श्रद्धालुओं द्वारा काफी मात्रा में खरीद की जा रही है। जलेबी को बनाने वाले 57 वर्षीय बलजीत ने बताया कि उन्होंने 30 रुपये महीने की नौकरी पर जलेबी बनानी सीखी थी, जलेबी बनाने का जुनून इतना बढ़ गया कि 1980 से उन्होंने अपना जलेबी बनाने का काम शुरू कर दिया जो बाद में जलेबी से गोहाना के जलेब के नाम से पूरे भारत में मशहूर हो गया। उन्होंने बताया कि कपाल मोचन मेले में वह कई सालों से आ रहे है। Vyaspur News</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि गोहाना के जलेब किसी दुकान पर खाने को नहीं मिलते बल्कि भारत में लगने वाले मशहूर मेलों व जयन्तियों में खाने को मिलते है। बलजीत ने बताया कि उनके जलेब में न कोई रंग होता है और न कोई मसाला होता है। इनकी दुकान से कोई भी जलेब खरीदता है तो वह 20 दिन तक खराब नहीं होता है चाहे उसे फ्रिज में रख लें चाहे बाहर। बलजीत के जलेब सुरजकुण्ड, चण्डीगढ़ के कलाग्राम, कुरुक्षेत्र की गीता जयंती समारोह, देहरादून, जयपुर के पुष्कर मेले सहित ऐसे कई मशहूर मेले व जयन्ती है, जहां पर गोहाना के जलेब खाने का लोग इन्तजार करते है। बजलीत ने जिला प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस मेले में उन्हें किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हुई है, यहां सारा काम बेहद तरीके से किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेले में लगी जलेब की स्टॉल पर खरीदारी करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर साल अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ मेले में आते हैं और उनके लिए यह गोहाने का प्रसिद्ध जलेब खरीद कर ले जाते हैं, जिसे भी चाव से खाते हैं।</p>
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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 15:20:12 +0530</pubDate>
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