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                <title>World Bank - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>World Bank RSS Feed</description>
                
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                <title>World Bank: विश्व बैंक ने भारत की वृद्धि दर को बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत किया</title>
                                    <description><![CDATA[निर्यात में विविधता लाने का सुझाव नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। World Bank: विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत बताते हुए वर्ष 2024-25 की देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। वैश्विक वित्तीय संगठन ने अपनी पिछली छमाही रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/world-bank-raises-india-growth-forecast-to-seven-percent/article-61760"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/new-delhi-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">निर्यात में विविधता लाने का सुझाव</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> World Bank: विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत बताते हुए वर्ष 2024-25 की देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। वैश्विक वित्तीय संगठन ने अपनी पिछली छमाही रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। भारत में विश्व बैंक के निदेशक आगस्त तानो कुआमे ने बैंक की छमाही इंडिया डेवलपमेंट अपटेड (भारत की आर्थिक स्थित पर अद्यतन रिपोर्ट) रिपोर्ट को जारी करते हुये कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के आने वाले समय में भी मजबूत बने रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिये भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सालाना आधार पर औसतन 6.7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है। World Bank</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण के बीच असाधारण जुझारूपन दिखाते हुये वर्ष 2023-24 में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तीव्र वृद्धि दर्ज करने वाला देश रहा। भारत ने यह उपलब्धि ऐसे समय में दर्ज की, जबकि 2023 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत पर आ गयी थी। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के बाद भारत के शहरी श्रम बाजार में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन युवाओं में बेरोजगारी की दर अभी भी 17.0 प्रतिशत के साथ ऊंची बनी हुयी है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">कुआमे ने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था इस समय काफी अच्छी स्थिति में है और अच्छी गति से बढ़ रही है तथा आगे भारत की आर्थिक वृद्धि दर तीव्र बने रहने की संभावना है। भारत विश्व अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, ‘भारत की मजबूत वृद्धि दर और गिरती मुद्रास्फीति से देश में नितांत गरीबी को कम करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में वैश्विक रैंकिंग में भारत की स्थिति में सुधार तथा देश में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में भारत के अच्छे प्रदर्शन का उल्लेख किया गया है। भारत में बुनियादी ढांचे के विकास, कृषि एवं निर्यात क्षेत्र में सुधार और मुद्रास्फीति में कमी की संभावनाओं के बीच देश की आर्थिक वृद्धि बेहतर दिख रही संभावनाओं का उल्लेख करते हुये कुआमे ने कहा, ‘भारत वैश्विक व्यापार की संभावनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक वृद्धि को और मजूबत कर सकता है। World Bank</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उच्च तकनीक वाली वस्तुओं के निर्यात में भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है, लेकिन श्रमगहन- क्षेत्र की वस्तुओं के निर्यात में तुलनात्मक रूप से कमी देखने को मिला है। भारत में विश्व बैंक के निदेशक ने कहा कि देश को यदि वैश्विक बाजार की संभावनाओं का लाभ उठाना है, तो उसे चीन की तरह विकसित और कम विकसित, हर तरह के बाजार में निर्यात की रणनीति पर काम करना होगा। उन्होंने ऐसी नीति से ही निर्यात को रोजगार वृद्धि में सहायक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘सूचना प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक सेवाओं और औषधियों के निर्यात में भारत का प्रदर्शन शानदार है। देश अपने निर्यात सूचि का भी वृद्धि कर सकता है और इसके लिए उसे कपड़ा, परिधान, जूते-चप्पल जैसे उत्पादों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और हरित प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर भी बराबर ध्यान देना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट की सह लेखिका नोरो डी हेल और रान ली (दोनों अर्थशास्त्री) ने कहा, ‘लागत बढ़ने और उत्पादकता घटने से 2018 से 2022 के बीच विश्व के परिधान निर्यात में भारत का हिस्सा चार प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत पर आ गया। विश्व व्यापार से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये भारत को वैश्विक विनिर्माण श्रृंखला के साथ और व्यापक स्तर पर जुड़ना चाहिए। इससे नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि के अवसर उत्पन्न होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक एक लाख करोड़ डॉलर के वाणिज्यिक निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिये भारत को अपनी निर्यात सूची में विविधता लाने के साथ-साथ वैश्विक उत्पादन श्रृंखला के साथ जुड़ाव बढ़ाना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023-24 में विनिर्माण क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की मजबूद वृद्धि दर्ज की गयी, जबकि सेवाओं के बाजार में स्थिति मजबूत बनी रही। रिपोर्ट में 2024-25 के प्रारंभिक महीनों में देश के शहरी क्षेत्रों में महिला बेरोजगारी का अनुपात गिर 8.5 प्रतिशत पर आ गया, लेकिन शहरी युवाओं में बेरोजगारी का स्तर 17 प्रतिशत के करीब बना रहा। World Bank</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व बैंक के अनुसार भारत की खुदरा मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष में 4.5 प्रतिशत, अगले वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत तथा 2026-27 में 4.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के दौरान चालू खाते का घाटा डीजीपी के 1.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अगले साल 1.2 प्रतिशत और उसके अगले साथ 1.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="फैनसिंग चैंपियनशिप में प्रताप स्कूल के खिलाड़ियों ने 34 पदक जीते" href="http://10.0.0.122:1245/players-of-pratap-school-won-thirty-four-medals-in-the-fencing-championship/">फैनसिंग चैंपियनशिप में प्रताप स्कूल के खिलाड़ियों ने 34 पदक जीते</a></p>
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                <pubDate>Tue, 03 Sep 2024 17:17:07 +0530</pubDate>
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                <title>मंदी की गर्त में दुनिया ! विश्व बैंक की रिपोर्ट किस ओर कर रही इशारा</title>
                                    <description><![CDATA[इस वर्ष विकसित देशों में मंदी बढ़ने, वैश्विक आर्थिक वृद्धि गिर कर 1.7 प्रतिशत रहेगी: विश्व बैंक नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। विश्व बैंक ने इस वर्ष विकसित देशों में मंदी (World Bank) और बढ़ने तथा विश्व में आर्थिक वृद्धि मात्र 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। विश्व बैंक की सोमवार को जारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/this-year-recession-will-increase-in-developed-countries-global-economic-growth-will-fall-to-1-7-percent-world-bank/article-42189"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/world-bank.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>इस वर्ष विकसित देशों में मंदी बढ़ने, वैश्विक आर्थिक वृद्धि गिर कर 1.7 प्रतिशत रहेगी: विश्व बैंक</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विश्व बैंक ने इस वर्ष विकसित देशों में मंदी <strong>(World Bank)</strong> और बढ़ने तथा विश्व में आर्थिक वृद्धि मात्र 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। विश्व बैंक की सोमवार को जारी रिपोर्ट ग्लोबल इकोनामिक प्रोस्पेक्ट्स में यह छह महीना पहले के अनुमान का करीब आधा है। यदि ऐसा रहा तो यह है पिछले 30 वर्ष में 2019 और 2020 को छोड़कर विश्व अर्थव्यवस्था में सबसे कम जीडीपी वृद्धि का वर्ष होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या कहा विश्व बैंक ने | World Bank </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कहा है कि विकसित देशों में संकट गहरा हो रहा है। उन्होंने कहा है कि ताजा अनुमान बता रहे है कि स्थिति तेजी से और व्यापक रूप से बिगड़ रही है। दुनिया के करीब करीब सभी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय कोविड महामारी से पहले के दशक की तुलना में धीमी गति से बढ़ेगी क्योंकि विश्व अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के लिए चुनौती अभी बने रहने की आसार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के अंत में उभरते बाजारों और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं का सकल घरेलू उत्पाद( जीडीपी )कोविड-19 महामारी के शुरू होने के पहले की तुलना में छह प्रतिशत कम रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों के सामने ऋण भार और कमजोर निवेश के कारण कई साल तक आर्थिक वृद्धि नरम रहने का खतरा है।</p>
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                <pubDate>Wed, 11 Jan 2023 11:08:22 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व बैंक ने वैश्विक मंदी की दी चेतावनी, क्या भारत बचेगा खतरनाक मंदी से?</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया बढ़ रही है खतरनाक मंदी की ओर: World Bank वाशिंगटन (एजेंसी)। विश्व बैंक (World Bank) ने कहा कि ऊंची मुद्रास्फीति, बढ़ रही ब्याज दरें और विकासशील देशों पर बढ़ रहे कर्ज के बोझ के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरनाक मंदी की ओर बढ़ रही है। विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने गुरूवार को आईएमएफ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/world-bank-warns-of-global-recession/article-38961"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/coronavirus-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>दुनिया बढ़ रही है खतरनाक मंदी की ओर: World Bank</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> विश्व बैंक (World Bank) ने कहा कि ऊंची मुद्रास्फीति, बढ़ रही ब्याज दरें और विकासशील देशों पर बढ़ रहे कर्ज के बोझ के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरनाक मंदी की ओर बढ़ रही है। विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने गुरूवार को आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हमने वैश्विक विकास के लिए अपने 2023 के विकास के अनुमान को तीन प्रतिशत से घटाकर 1.9 प्रतिशत कर दिया है वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरनाक मंदी की ओर बढ़ रही है। मलपास ने कहा, ‘हम विकासशील देशों में लोगों को आगे बढ़ने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इन देशों में कर्ज बढ़ने का कारण उच्च ब्याज दर है। एक तरफ कर्ज बढ़ रहा है और दूसरी तरफ उनकी मुद्राएं कमजोर हो रही हैं। मुद्रा के मूल्य में गिरावट कर्ज का बोझ बढ़ा रही है। विकासशील देशों के समक्ष कर्ज संकट की समस्या है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गरीबों पर असर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की समस्या है, ब्याज दर बढ़ रही है और विकासशील देशों में जो पूंजी प्रवाह हो रहा था, वह बंद हो गया है। इससे गरीबों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी कुछ परिस्थितियों के अंतर्गत है। सितंबर के मध्य में प्रकाशित एक अध्ययन में विश्व बैंक ने आगाह किया था कि जैसे-जैसे दुनिया भर के केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के जवाब में ब्याज दरों में वृद्धि करेंगे दुनिया 2023 में वैश्विक मंदी की ओर बढ़ती जायेगी। उन्होंने 0.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>यूक्रेन युद्ध बड़ी वजह</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कोविड -19 महामारी ने 1990 के बाद से वैश्विक गरीबी-घटाने के प्रयासों को सबसे बड़ा झटका दिया। कोविड के कारण 2020 में सात करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी की ओर धकेल दिया तथा यूक्रेन युद्ध ने इसे खराब किया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि नए व्यवसायों और विकासशील देशों में पूंजी प्रवाह की अनुमति देने के लिए दुनिया को जिन मुद्दों से निपटना है, उनमें से एक है, जो उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों की दिशा में बदलाव।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि दुनिया उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल का सामना कर रही है और इसके गंभीर निहितार्थ हैं जोकि विकासशील देशों के लिए खतरा हैं। मेरी चिंता इस बात को लेकर है कि स्थितियां और रुझान 2023 और 2024 तक बने रह सकती हैं।</p>
<p><a title="IMF ने वैश्विक मंदी की पच्चीस प्रतिशत संभावना का अनुमान लगाया" href="http://10.0.0.122:1245/imf-forecasts-25-percent-chance-of-global-recession/">IMF ने वैश्विक मंदी की पच्चीस प्रतिशत संभावना का अनुमान लगाया</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Oct 2022 10:15:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन को 72.3 करोड़ डॉलर की मदद करेगा विश्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। विश्व बैंक समूह ने कहा है कि उनके कार्यकारी निदेशक मंडल ने यूक्रेन को कुल 72.3 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है। विश्व बैंक ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने आज यूक्रेन के लिए 48.9 करोड़ डॉलर के पूरक बजट सहायता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/world-bank-to-provide-723-million-to-ukraine/article-31345"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/world-bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> विश्व बैंक समूह ने कहा है कि उनके कार्यकारी निदेशक मंडल ने यूक्रेन को कुल 72.3 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है। विश्व बैंक ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने आज यूक्रेन के लिए 48.9 करोड़ डॉलर के पूरक बजट सहायता पैकेज को मंजूरी दी, जिसे यूक्रेन को आर्थिक आपातकाल से निकलने या फ्री यूक्रेन का वित्तपोषण कहा जाता सकता है। बयान में कहा गया कि बोर्ड द्वारा स्वीकृत पैकेज में 35.0 करोड़ डॉलर का एक पूरक ऋण और 13.9 करोड़ डॉलर की गारंटी भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">13.4 करोड़ डॉलर का अनुदान वित्तपोषण और 10.0 करोड़ डॉलर के समानांतर वित्तपोषण भी जुटाया रहा है। इस तरह से कुल 72.3 करोड़ डॉलर का होगा। विज्ञप्ति में कहा गया कि इस वित्तीय सहायता से यूक्रेन की सरकार को अपने नागरिकों को सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी, जिसमें अस्पताल के कर्मचारियों के लिए वेतन, बुजुर्गों के लिए पेंशन और कमजोर वर्ग लोगों के लिए सामाजिक कार्यक्रम शामिल हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 10:44:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूक्रेन की मदद के लिए आगे आये आईएमएफ और विश्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेसी)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक (IMF and World Bank) ने घोषणा की है कि वे वित्त पोषण और नीतिगत मोर्चों पर यूक्रेन की सहायता के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और तत्काल उस समर्थन को बढ़ा रहे हैं। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉजीर्वा और विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/imf-and-world-bank-came-forward-to-help-ukraine/article-31210"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/imf-and-world-bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेसी)।</strong> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक (IMF and World Bank) ने घोषणा की है कि वे वित्त पोषण और नीतिगत मोर्चों पर यूक्रेन की सहायता के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और तत्काल उस समर्थन को बढ़ा रहे हैं। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉजीर्वा और विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मलपास ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की जा रही है और मुद्रास्फीति को बढ़ावा मिलने का जोखिम है, जो गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। उन्होंने कहा,”वित्तीय बाजारों में व्यवधान (टूटना) जारी रहेगा।” उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में घोषित प्रतिबंधों का भी महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव पड़ेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तीन अरब अमेरिकी डॉलर का पैकेज तैयार</h4>
<p style="text-align:justify;">दोनों संस्थान (IMF and World Bank) स्थिति का आकलन कर रहे हैं और अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ उचित नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर चर्चा कर रहे हैं। आईएमएफ यूक्रेन के आपातकालीन वित्तपोषण के अनुरोध पर भी काम कर रहा है, इस पर आईएमएफ बोर्ड अगले सप्ताह की शुरूआत में कदम उठा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, विश्व बैंक समूह आने वाले महीनों में सहायता का तीन अरब अमेरिकी डॉलर का पैकेज तैयार कर रहा है, जिसकी शुरूआत कम से कम 35 करोड़ अमेरिकी डॉलर के लिए द्रुत-संवितरण बजट समर्थन ऑपरेशन के साथ होगी, जिसे इस सप्ताह अनुमोदन के लिए बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए द्रुत-संवितरण बजट सहायता में 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर जोड़े जाएंगे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 12:15:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>75 वर्षों में ऋण लेने वालों से दानदाता बना भारत: विश्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। विश्व बैंक ने भारत के साथ अपने 75 वर्ष के रिश्तों का उल्लेख करते हुये आज कहा कि इन वर्षाें में भारत ने उल्लेखनीय मुकाम हासिल करते हुये ऋणलेने वाले देश की टैग से मुक्त होकर अब दान देने वाला देश बन गया है। विश्व बैंक ने कहा कि भारत के साथ उसकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-became-a-donor-in-75-years-world-bank/article-30270"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/world-bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> विश्व बैंक ने भारत के साथ अपने 75 वर्ष के रिश्तों का उल्लेख करते हुये आज कहा कि इन वर्षाें में भारत ने उल्लेखनीय मुकाम हासिल करते हुये ऋणलेने वाले देश की टैग से मुक्त होकर अब दान देने वाला देश बन गया है। विश्व बैंक ने कहा कि भारत के साथ उसकी भागीदारी के भी 75 वर्ष हो चुके हैं। वर्ष 1947 में आजादी के बाद भारत अल्प आय राष्ट्र ने निकलकर कम मध्यम आय वाला देश बन गया है और यहां की आबादी अभी 1.3 अरब है और तीन लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था है। इस दौरान भारत ऋण लेने वाले देश से मुक्त होकर दान देने वाला देश बना है। इस मौके पर विश्व बैंक के कंट्री निदेशक जुनैद अहमद ने उन छह लोगों से बात की है जिन्होंने भारत में सुधार को गति देने में महत्ती भूमिका निभाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दौरान उन्होंने उन लोगों से भारत के विकास में विश्व बैंक की भूमिका और उसके साथ भारत के अनुभव पर चर्चा की जिसको दुनिया के दूसरे देशों के साथ साझा किया जा सके। भारत जब ब्रिटिश उपनिवेश था तभी वर्ष 1945 में विश्व बैंक के संस्थापक सदस्य बना था। बाद में भारत ने ही सुझाव दिया था कि विकासशील देशों के लिए एक विशेष संगठन बनाया जाना चाहिए और बाद में इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसियेशन का गठन किया गया था। वर्ष 1947 में आजाद होने के बाद भारत ने वर्ष 1949 रेलवे के विकास के लिए विश्व बैंक से पहला ऋण लिया था। विश्व बैंक का किसी एशियाई देशों का भी यह पहला ऋण था। इसी के साथ विश्व बैंक के साथ ऋण करार पर हस्ताक्षर करने वाली विजय लक्ष्मी पंडित पहली महिला भी बनी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अहमद ने जिन लोगों से चर्चा की है उनमें योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया, 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह, कौशल विकास एवं उद्यमशिलता मंत्रालय के पूर्व सचिव के पी कृष्णन, आंध्र प्रदेश सरकार के कृषि एवं सहकारिता सलाहकार टी विजय कुमार, पंजाब की पूर्व मुख्य सचिव विनि महाजन और गैर सरकारी संगठन सेवा की कार्यकारी निदेशक रीमा नानावटी शामिल हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Jan 2022 12:04:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व बैंक की उपाध्यक्ष एवं मुख्य अर्थथास्त्री नियुक्त हुईं कारमेन रेनहार्ट</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफसर कारमेन रेनहार्ट विश्व बैंक की नयी उपाध्यक्ष एवं मुख्य अर्थथास्त्री नियुक्त की गई हैं। विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मेलपास ने इसकी घोषणा की। रेनहार्ट 15 जून से अपना कार्यभार संभालेंगी। मेलपास ने बुधवार को एक बयान में कहा, “मैं विश्व बैंक समूह में रेनहार्ट का स्वागत करते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/carmen-reinhart-appointed-as-vice-president-and-chief-economist-of-world-bank/article-15518"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/world-bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफसर कारमेन रेनहार्ट विश्व बैंक की नयी उपाध्यक्ष एवं मुख्य अर्थथास्त्री नियुक्त की गई हैं। विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मेलपास ने इसकी घोषणा की। रेनहार्ट 15 जून से अपना कार्यभार संभालेंगी। मेलपास ने बुधवार को एक बयान में कहा, “मैं विश्व बैंक समूह में रेनहार्ट का स्वागत करते हुए बहुत खुश हूं। हम विकास को बढ़ावा देने और अपने सदस्य देशों की ऋण एवं आर्थिक मंदी की समस्या को हल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “रेनहार्ट का करियर विकसित और विकासशील देशों में वित्तीय संकटों और उन पर काबू पाने के उपायों को समझने को लेकर समर्पित है।” ‘अंतरराष्ट्रीय वित्त एवं वित्तीय संकट’ विषय की अर्थशास्त्री रेनहार्ट वित्तीय संकटों पर लिखी अपनी किताब “दिस टाइम इज डिफरेंट: ऐट सेंचुरीज ऑफ फाइनेंशियल फोली” के लिए मशहूर हैं। उन्होंने यह किताब हार्वर्ड विश्विविद्यालय के अर्थशास्त्री केनेथ रोगोफ के साथ मिलकर लिखी थी। विश्व बैंक ने इस नियुक्ति से पहले मंगलवार को घोषणा की थी कि कोविड-19 के खिलाफ इसका आपातकाल अभियान 100 विकासशील देशों में पहुंच गया है जहां विश्व की 70 फीसदी आबादी निवास करती है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2020 14:51:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना से लड़ने के लिए विश्व बैंक ने भारत को दी एक अरब डॉलर की वित्तीय सहायता</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। विश्व बैंक ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए भारत को एक अरब डॉलर ( करीब 76 अरब रुपए) की मदद दी है। विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों के मंडल ने गुरुवार को विकासशील देशों के लिए आपातकालीन सहायता की पहली किस्त के तौर पर 1.9 अरब डालर की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/world-bank-gives-india-1-billion-financial-aid-to-fight-coronavirus/article-14098"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/coronavirus-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> विश्व बैंक ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए भारत को एक अरब डॉलर ( करीब 76 अरब रुपए) की मदद दी है। विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों के मंडल ने गुरुवार को विकासशील देशों के लिए आपातकालीन सहायता की पहली किस्त के तौर पर 1.9 अरब डालर की वित्तीय सहायता प्रदान की, जिसकी आधे से अधिक राशि भारत को दी गई है। यह राशि भारत को बेहतर स्क्रीनिंग, संपर्कों की पहचान में मदद के लिए प्रयोगशाला जांच, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण खरीदने और नये आईसोलेशन वार्ड बनाने में मदद के लिये दी गई है। विश्व बैंक ने कहा है कि उसने वैश्विक कोविड 19 महामारी की चुनौती से निपटने में राष्ट्रों की सहायता के लिए 15 माह में 160 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता जारी करने को स्वीकृति दी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भारत के बाद दक्षिण एशिया में सर्वाधिक अधिक सहायता पाकिस्तान को 20 करोड़ डॉलर दी गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">अफगानिस्तान को 10 करोड़, मालदीव को 73 और श्रीलंका के लिए 12.86 करोड़ डॉलर की सहायता को मंजूरी दी है।</li>
</ul>
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]]></content:encoded>
                
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2020 13:31:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत: विश्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगा | World Bank नई दिल्ली (एजेंसी)। विश्व बैंक ने वर्ष 2021 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का पूवार्नुमान जारी किया है, हालाँकि उसने कहा है कि भारत की विकास दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत पर पहुँच जायेगी और वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगा | World Bank</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> विश्व बैंक ने वर्ष 2021 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का पूवार्नुमान जारी किया है, हालाँकि उसने कहा है कि भारत की विकास दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत पर पहुँच जायेगी और वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। विश्व बैंक (World Bank) की ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2017 के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके 2019, 2020 और 2021 में 7.5 प्रतिशत पर बने रहने का पूवार्नुमान जारी किया गया है और इस प्रकार यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगा।</p>
<p>वास्तव में किसी और बड़ी अर्थव्यवस्था की विकास दर सात प्रतिशत को भी पार नहीं कर पाएगी। रिपोर्ट में सरकार द्वारा किये गये ढाँचागत सुधारों की सराहना करते हुए कहा गया है कि उनके परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इसमें कहा गया है ‘भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो इसके बाद बढ़कर 7.5 प्रतिशत पर पहुँच जायेगी। हालिया नीतिगत सुधारों के लाभ दिखने लगे हैं और ऋण उठाव बढ़ा है। इससे निजी उपभोग मजबूत बने रहने और निवेश में तेजी जारी रहने की उम्मीद है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jan 2019 16:35:16 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>विश्व बैंक ने भारत के पक्ष को सही ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले पन बिजली परियोजनाओं के निर्माण की राह में बाधा खड़ी करने की पाकिस्तान की कोशिशों को करारा झटका लगा है। विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के एतराजों को दरकिनार करते हुए, भारत को पश्चिमी नदियों झेलम, चिनाब और सिंधु पर पनबिजली परियोजना बनाने को सही ठहराया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/world-bank-justified-indias-stand/article-2862"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले पन बिजली परियोजनाओं के निर्माण की राह में बाधा खड़ी करने की पाकिस्तान की कोशिशों को करारा झटका लगा है। विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के एतराजों को दरकिनार करते हुए, भारत को पश्चिमी नदियों झेलम, चिनाब और सिंधु पर पनबिजली परियोजना बनाने को सही ठहराया है। इस वैश्विक संस्था ने हाल ही में एक फैक्टशीट जारी करते हुए कहा कि भारत जिन रूपों में नदियों का पानी इस्तेमाल कर सकता है, उसमें पनबिजली परियोजनाएं भी शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंधु जल संधि के तहत भारत को झेलम और चिनाब की सहायक नदियों पर कुछ शर्तो के साथ पनबिजली संयंत्रों के निर्माण की अनुमति है। विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की वार्ता खत्म होने के बाद यह जानकारी दी। यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान को किशनगंगा पनबिजली परियोजना मामले में भारत से मुंह की खानी पड़ी है,</p>
<p style="text-align:justify;">बल्कि इससे पहले भी हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने साल 2013 में सुनाए अपने एक महवपूर्ण फैसले में भारत का पक्ष लेते हुए कहा था कि किशनगंगा पनबिजली परियोजना के लिए किशनगंगा नदी का जलमार्ग बदलने का भारत को अधिकार है और उसने अपनी इस परियोजना के लिए सिन्धु जल समझौते के सभी प्रावधानों का पालन किया है। लिहाजा भारत विद्युत उत्पादन के लिए किशनगंगा-नीलम नदी से पानी के प्रवाह की दिशा मोड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच इस विवाद में विश्व बैंक मध्यस्थ की भूमिका में है। पाकिस्तान ने पिछले साल भारत स्थित जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन पर सवाल उठाते हुए विश्व बैंक का दरवाजा खटखटाया था। पाकिस्तान का भारत पर इल्जाम है कि इन संयंत्रों की तकनीकी डिजाइन, संधि का उल्लंघन है।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा पाकिस्तान की मांग थी कि एक पंचाट गठित किया जाए, जो दोनों संयंत्रों की डिजाइन को लेकर उसकी चिंताओं पर गौर करे। जबकि भारत का कहना था कि पाकिस्तान की आपत्ति महज तकनीकी है। लिहाजा एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए, जो इस मामले की पड़ताल करे। बहरहाल इस मुद्दे पर जुलाई के आखिरी हफ्ते में भारत-पाक के बीच सचिव स्तरीय वार्ता हुई, जिसमें मध्यस्थता विश्व बैंक ने की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वार्ता के बाद विश्व बैंक ने भारत के पक्ष को सही ठहराया। इससे पहले दोनों देशों ने मार्च में पाकिस्तान में हुई स्थायी सिंधु आयोग की बैठक में भी दोनों प्रोजेक्टों पर चर्चा की थी। लेकिन तब कोई नतीजा नहीं निकला था। किशनगंगा परियोजना झेलम की सहायक नदी जबकि रातले परियोजना चेनाब नदी से जुड़ी हुई है। भारत-पाक के बीच हुए सिंधु जल समझौते के मुताबिक समझौते में दोनों नदियों को पश्चिमी नदी के तौर पर परिभाषित किया है और पाकिस्तान इन नदियों के पानी का असीमित इस्तेमाल कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संधु जल समझौता, अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिस पर भारत और पाकिस्तान ने साल 1960 में दस्तखत किए थे। इस संधि के लिए दोनों देशों के बीच करीब नौ साल तक लंबी वार्ता चली। चूंकि वार्ता में विश्व बैंक ने मदद की थी, लिहाजा इस संधि पर विश्व बैंक के भी हस्ताक्षर हैं। यही नहीं विवाद की सूरत में विश्व बैंक को मध्यस्थता का अधिकार है। यह समझौता तभी से अमल में है। भारत-पाक में तीन बार युद्घ के बावजूद यह संधि नहीं टूटी।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते के मुताबिक सिंधु घाटी की छह नदियों को पूर्वी व पश्चिमी दो हिस्सों में बांटा गया था। पूर्वी पाकिस्तान की तीन नदियों व्यास, रावी और सतलज का नियंत्रण भारत के पास है। जबकि सिंधु, चेनाब, झेलम का नियंत्रण पाक के पास है। समझौते में दोनों देशों के बीच सिंधु नदी के जल के इस्तेमाल को लेकर साफ-साफ दिशा निर्देश हैं। समझौते के तहत भारत पश्चिमी नदियों मसलन सिंधु, झेलम और चिनाब और उनकी सहायक नदियों के पानी का उपयोग घरेलू, विशेषीत कृषि कार्य और पनबिजली परियोजना हेतु कर सकता है और बाकी बचे पानी को पाकिस्तान के लिए छोड़ेगा। जाहिर है कि भारत ने पनबिजली परियोजनाओं पर अपना जो भी काम आगे बढ़ाया, वह सिंधु जल समझौते के मुताबिक ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">850 मेगावट की रातले पनबिजली परियोजना, जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में चिनाब नदी पर बन रही है। जिसमें दो संयंत्र हैं। 25 जून, 2013 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी आधारशिला रखी थी। जिसका निर्माण साल 2018 तक पूरा किया जाना है। जबकि किशनगंगा नदी पर बन रही किशनगंगा पनबिजली परियोजना भारत की महवाकांक्षी परियोजना है।</p>
<p style="text-align:justify;">परियोजना उत्तरी कश्मीर में बांदीपुरा के निकट गुरेज घाटी में स्थित है। नेशनल पावर कारपोरेशन द्वारा इस परियोजना का काम साल 1992 में शुरू किया गया था। 330 मेगावट की इस परियोजना की लागत कोई 3 हजार 6 सौ करोड़ रुपए है। परियोजना पूरे होने के बाद जहां उत्तरी कश्मीर के लोगों की बिजली की जरूरतें पूरी होंगी, वहीं किसानों को खेती के लिए पानी भी मुहैया होगा। केएचईपी की रूपरेखा ऐसे तैयार की गई है, जिसके तहत किशनगंगा नदी में बांध से जल का प्रवाह मोड़कर झेलम की सहायक नदी बोनार नाला में लाया जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने जब इस परियोजना पर काम शुरू किया, तो पाकिस्तान को इस पर कोई एतराज नहीं था, लेकिन जैसे ही परियोजना आकार लेने लगी, उसने अपना रुख बदल लिया और इसका विरोध करने लगा। पाकिस्तान का कहना है कि भारत की इस परियोजना की वजह से किशनगंगा नदी जल में उसका करीब पन्द्रह फीसद हिस्सा गायब हो जाएगा। पाकिस्तान के इस अचानक एतराज की वजह, दरअसल उसकी नीलम-झेलम जल विद्युत परियोजना है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो उसने भारत की किशनगंगा जल विद्युत परियोजना के बाद शुरू की थी। पाकिस्तान को लगने लगा है कि भारत द्वारा किशनगंगा नदी के बहाव को मोड़ने से उसकी नीलम-झेलम जल विद्युत परियोजना को नुकसान पहुंंचेगा। यही वजह है कि पाकिस्तान अब हर मंच पर किशनगंगा पनबिजली परियोजना का विरोध कर रहा है। पाकिस्तान की इस आपत्ति पर एक वक्त स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (सीओए) ने साल 2011 में इस पर अस्थायी रोक भी लगा दी थी। लेकिन साल 2013 में उसने भारत को किशनगंगा नदी के बहाव को मोड़ने की मंजूरी दे दी। अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय में हार के बाद पाकिस्तान विश्व बैंक पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर पहले अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय और अब विश्व बैंक ने भारत द्वारा पश्चिमी नदियों झेलम, चिनाब और सिंधु पर पनबिजली परियोजना बनाने को सही ठहराया है। इस मामले में भारत के रुख की वैधता की दोबारा पुष्टि हुई है। विश्व बैंक का हालिया नजरिया, एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि भारत, सिंधु जल समझौते का पालन करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी परियोजना के लिए उसने कभी सिन्धु जल समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया है। पाकिस्तान ने विश्व बैंक में भारत के खिलाफ जो भी इल्जाम लगाए थे, वे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। पाकिस्तान का कश्मीर में झेलम की सहायक नदी किशनगंगा पर किशनगंगा परियोजना और चिनाब नदी पर रातले पनबिजली परियोजना के निर्माण का विरोध दुर्भावनापूर्ण है। यही वजह है कि उसे हर मंच पर हार मिल रही है और भारत को जीत। हांलाकि इस मसले पर भारत-पाक के बीच अगले दौर की बातचीत अब सितंबर में वशिंगटन के अंदर होगी, लेकिन इस वार्ता में इतना तय है कि भारत का पक्ष मजबूत रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-जाहिद खान</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 23:48:22 +0530</pubDate>
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                <title>भारत को किशनगंगा, रातले परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति दी गई : विश्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। विश्व बैंक ने कहा है कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत भारत को झेलम और चेनाब नदियों की सहायक नदियों पर कुछ शर्तों के साथ पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण की अनुमति दे दी गई है। आईडब्ल्यूटी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की बातचीत खत्म होने पर जारी एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/world-bank-allowed-india-for-construct-kishanganga/article-2801"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/kishanganga.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> विश्व बैंक ने कहा है कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत भारत को झेलम और चेनाब नदियों की सहायक नदियों पर कुछ शर्तों के साथ पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण की अनुमति दे दी गई है। आईडब्ल्यूटी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की बातचीत खत्म होने पर जारी एक ‘फैक्ट शीट’ में कहा गया है कि पाकिस्तान किशनगंगा (330 मेगावॉट) और रातले (850 मेगावॉट) पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण का विरोध कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन संयंत्रों का निर्माण भारत कर रहा है। गौरतलब है कि दोनों संयंत्रों के तकनीकी डिजाइन संधि के प्रतिकूल है या नहीं, इस बात को लेकर दोनों देश असहमत हैं। इस संदर्भ में आईडब्ल्यूटी ने इन दोनों नदियों और सिंधु को पश्चिमी नदियां घोषित किया है, जिसका पाकिस्तान असीमित इस्तेमाल कर सकता है। फैक्ट शीट में विश्व बैंक ने कहा है कि अन्य इस्तेमालों के साथ-साथ भारत संधि के अनुलग्नक में शामिल शर्तों को ध्यान में रखते हुए इन नदियों पर पनबिजली विद्युत संयंत्र का निर्माण कर सकता है। बैंक ने कहा कि आईडब्ल्यूटी के तकनीकी मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव-स्तरीय बातचीत सद्भावना और सहयोग के माहौल में हुई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सद्भावना माहौल में हुई भारत-पाकिस्तान में वार्ता</h2>
<p style="text-align:justify;">विश्व बैंक के कहा है कि सिंधु नदी जल संधि को लेकर भारत एवं पाकिस्तान के बीच सद्भावना एवं सहयोग की भावना के साथ वार्ता हुई और दोनों पक्षों ने इस मामले पर वार्ता जारी रखने के लिए यहां सितंबर में फिर से बैठक करने पर सहमति व्यक्त की है। विश्व बैंक ने सिंधु नदी जल संधि (आईडब्ल्यूटी) पर चर्चा के लिए हुई बैठक के बाद जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा कि पक्षों ने वाशिंगटन, डीसी में सितंबर में फिर से बैठक करने और वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। इससे पहले विश्व बैंक ने 25 जुलाई को पत्र लिखकर अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरना को आश्वासन दिया था कि वह इस मामले में अपनी तटस्थता और निष्पक्षता को बरकरार रखेगा, ताकि सुलह का रास्ता खोजा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 07:35:07 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय युवाओं के प्रशिक्षण हेतू 25 करोड़ डॉलर देगा विश्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[रोजगार के अवसर बढ़ाने की कवायद: नई दिल्ली (एजेंसी)। विश्व बैंक ने भारत में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए 25 करोड़ डॉलर का कर्ज मंजूर किया है। इससे युवाओं को अधिक कुशल बनाया जा सकेगा, जिससे उन्हें रोजगार पाने में आसानी है। यह कदम कौशल भारत मिशन के अनुकूल है। विश्व बैंक ने कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/world-bank-to-give-25-million-dollars-for-training-of-indian-youth/article-1672"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/world-bank.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">रोजगार के अ<strong>वसर बढ़ाने की कवायद:</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> विश्व बैंक ने भारत में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए 25 करोड़ डॉलर का कर्ज मंजूर किया है। इससे युवाओं को अधिक कुशल बनाया जा सकेगा, जिससे उन्हें रोजगार पाने में आसानी है। यह कदम कौशल भारत मिशन के अनुकूल है। विश्व बैंक ने कहा है कि वह भारत सरकार के युवाओं को अधिक कुशल बनाने के प्रयासों में समर्थन का इच्छुक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस सहयोग से युवा भारत की आर्थिक वृद्धि और समृद्धि में और अधिक योगदान कर सकेंगे। बैंक ने बयान में कहा कि 25 करोड़ डालर के कौशल भारत मिशन परिचालन (सिमो) को बैंक के कार्यकारी निदेशकों के बोर्ड ने मंजूर किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे राष्ट्रीय स्तर पर 3 से 12 माह या 600 घंटे की अवधि के लघु अवधि के कौशल विकास कार्यक्रमों का बाजार के हिसाब से तर्क संगत बढ़ सकेगी। इस कार्यक्रम के तहत 15 से 59 साल के बेरोजगारों या अनुकूल रोजगार से वंचित लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें 1.2 करोड़ 15 से 29 साल के ऐसे युवाओं को भी शामिल किया जाएगा, हर साल श्रम बाजार में उतरते हैं। इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को रोजगार और उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे और उनका कौशल विकास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के युवाओं को अधिक कुशल बनाने के प्रयासों में समर्थन का इच्छुक है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से युवा भारत की आर्थिक वृद्धि और समृद्धि में और अधिक योगदान कर सकेंगे। बैंक ने बयान में कहा कि 25 करोड़ डालर के कौशल भारत मिशन परिचालन (सिमो) को बैंक के कार्यकारी निदेशकों के बोर्ड ने मंजूर किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2017 01:39:40 +0530</pubDate>
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