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                <title>SIR Process - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>West Bengal SIR Case: पश्चिम बंगाल एसआईआर विवाद में सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[West Bengal SIR Case: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने सुनवाई करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायालय का उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-issues-notice-to-election-commission-in-west-bengal-voter-list-revision-dispute/article-80970"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/sir-w-bengal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">West Bengal SIR Case: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने सुनवाई करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायालय का उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशना है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई है। West Bengal News</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से वंचित नहीं होना चाहिए। न्यायालय ने आयोग को निर्देश दिया कि यदि नामों में त्रुटि या असंगति के आधार पर नोटिस भेजे जा रहे हैं, तो उसमें अत्यंत सावधानी बरती जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पूर्व सीमित समय शेष है और बड़ी संख्या में लोगों को नाम में मामूली वर्तनी भिन्नता के कारण नोटिस जारी किए गए हैं। यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ दस्तावेजों को स्वीकार न किए जाने से नागरिकों को कठिनाई हो रही है तथा लंबी कतारों में प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुईं और उन्होंने पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। उनका कहना था कि प्रक्रिया के दौरान भेदभाव की आशंका उत्पन्न हो रही है, विशेषकर उन मामलों में जहां विवाह के बाद उपनाम में परिवर्तन हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में प्रशासनिक दबाव की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्वाचन आयोग की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया विधिसम्मत प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जा रही है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि आवश्यक प्रशासनिक सहयोग के संबंध में राज्य सरकार को अवगत कराया गया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार कर संतुलित और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करेगा। आयोग से विस्तृत उत्तर मांगा गया है, जिसके आधार पर आगामी सुनवाई में आगे की दिशा तय होगी। West Bengal News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:47:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Election Commission: 12 राज्यों में एसआईआर की बढ़ी रफ्तार, भारतीय निर्वाचन आयोग का आया बड़ा ब्यान</title>
                                    <description><![CDATA[SIR Process increased: नई दिल्ली। देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष व्यापक पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, लगभग तीन सप्ताह के भीतर 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को विशेष पहचान प्रपत्र उपलब्ध करा दिए गए हैं। Election Commission निर्वाचन आयोग ने बताया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-pace-of-sir-has-increased-in-12-states-with-the-election-commission-of-india-issuing-a-significant-statement/article-78521"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/election-commision.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">SIR Process increased: नई दिल्ली। देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष व्यापक पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, लगभग तीन सप्ताह के भीतर 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को विशेष पहचान प्रपत्र उपलब्ध करा दिए गए हैं। Election Commission</p>
<p style="text-align:justify;">निर्वाचन आयोग ने बताया कि गोवा और लक्षद्वीप में प्रपत्रों का वितरण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 99.98 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 99.83 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 99.75 प्रतिशत तथा गुजरात में 99.69 प्रतिशत प्रपत्र बांटे जा चुके हैं। पिछले दिवस की तुलना में अंडमान-निकोबार और पश्चिम बंगाल के आँकड़ों में कोई परिवर्तन दर्ज नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग प्रतिदिन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े आँकड़े सार्वजनिक कर रहा है। नवीनतम विवरणानुसार, सर्वाधिक मतदाताओं वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 99.62 प्रतिशत प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। पुडुचेरी में 95.58 प्रतिशत, तमिलनाडु में 96.22 प्रतिशत और केरल में 97.33 प्रतिशत वितरण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। Election Commission</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया जिन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हो रही है, उनमें अंडमान एवं निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्वाचन आयोग के अनुसार, 4 नवंबर से शुरू हुए एसआईआर अभियान के अंतर्गत कुल 50.97 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से अब तक 50.50 करोड़ से ज्यादा प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया ने भी उल्लेखनीय गति पकड़ी है। अब तक इन 12 राज्यों में 24.13 करोड़ से अधिक प्रपत्र डिजिटल रूप से अपलोड किए गए हैं, जिससे कुल डिजिटाइजेशन दर 47.35 प्रतिशत पहुँच गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑनलाइन डिजिटाइजेशन में लक्षद्वीप 96.81 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद गोवा में 76.89 प्रतिशत तथा राजस्थान में 72.20 प्रतिशत डिजिटाइजेशन हुआ है। इसके विपरीत, केरल में यह दर मात्र 23.72 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 26.60 प्रतिशत दर्ज की गई है। Election Commission</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 16:51:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एसआईआर कार्य को लेकर शिक्षकों को मिलेगी राहत, आदेश शत प्रतिशत लागू करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किए निर्देश SIR Process: श्रीगंगानगर। राज्य में वर्तमान में 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें राज्य में कार्य कर रहे बीएलओ में लगभग 90 प्रतिशत शिक्षक कार्यरत है। साथ कार्य को अतिशीघ्र करवाने हेतु बीएलओ सहयोगी भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/teachers-will-get-relief-regarding-sir-work-demand-for-100-implementation-of-the-order/article-78419"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/sir-process.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किए निर्देश</h3>
<p style="text-align:justify;">SIR Process: श्रीगंगानगर। राज्य में वर्तमान में 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें राज्य में कार्य कर रहे बीएलओ में लगभग 90 प्रतिशत शिक्षक कार्यरत है। साथ कार्य को अतिशीघ्र करवाने हेतु बीएलओ सहयोगी भी लगाएं जा रहे है जिसमें अधिकांश शिक्षकों को लगाया जा रहा है। जिससे वर्तमान में चल रही अर्द्ध वार्षिक परीक्षाएं सहित नया सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा इसलिए अध्यापन कार्य भी जरूरी है लेकिन शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ में होने के कारण पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पा रहा है जिससे विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम प्रभावित होगा। Sri Ganganagar News</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संघ रेसटा लगातार राज्य सरकार से मांग कर रहा है कि शिक्षकों को कम से कम संख्या में बीएलओ लगाया जाएं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो। राज्य के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी रौनक बैरागी ने जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर स्पष्ट कर दिया कि बीएलओ के सहयोगी के रूप में अब शिक्षकों के स्थान पर अन्य विभागों के कार्मिक लगाए जाएं। जारी आदेशों में कहा गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में बीएलओ के सहायकों के रूप में अधिकांश शिक्षकों को तैनात कर दिया गया था। जबकि इसी अवधि में प्रदेशभर के विद्यालयों में अर्द्ध वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी थोपना उचित नहीं, इसलिए अन्य विभागों के कर्मचारियों को लगाया जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देर आए पर दुरुस्त आए | Sri Ganganagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संघ रेसटा लंबे समय विरोध जता रहा था कि पहले से ही सरकारी स्कूलों में पद रिक्त चल रहे है जिसके कारण शिक्षकों की भारी कमी है। अब विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में ड्यूटी होने के कारण परीक्षाओं सहित अन्य विभागीय कार्यों का पूरा भार संस्था प्रमुख और बचा सीमित स्टाफ उठा रहा है एवं अर्द्ध वार्षिक परीक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं। लेकिन न सरकार ने ध्यान दिया और न ही विभाग ने। हालात तब बदले, जब पुनरीक्षण कार्य के दबाव में कुछ शिक्षकों ने आत्महत्या तक कर ली। या हृदयघात से मौत जैसे मामले सामने आए। तभी निर्वाचन विभाग की आंख खुली और आदेश तेजी से जारी किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्देश जारी हो चुके हैं, लेकिन मैदान में असली परीक्षा अब जिला कलक्टरों की है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जिला प्रशासन तुरंत शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी और हेल्प डेस्क से कार्यमुक्त करेगा? या फिर यह आदेश कागजों में ही रह जाएंगे ? इधर शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि बीएलओ के अलावा बीएलओ सहायको और बनी हेल्प डेस्क पर लगे शिक्षकों को तत्काल स्कूलों के लिए कार्यमुक्त किया जाए। क्योंकि 20 नवंबर से परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और संस्था प्रधान निरीक्षण कर्ताओं की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। Sri Ganganagar News</p>
<p style="text-align:justify;">निदेशक,माध्यमिक शिक्षा राजस्थान,बीकानेर सीता राम जाट ने राज्य के समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक,समग्र शिक्षा को निर्देश जारी करके कहा है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य में अहर्ता तिथि एक जनवरी 2026 के संदर्भ में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के सम्बन्ध में वर्तमान में राज्य के विद्यालयों में आयोजित अर्द्ध वार्षिक परीक्षाओं को दृष्टिगत रखते हुए बीएलओ के सहायतार्थ लगाए जाने वाले कार्मिकों में शिक्षकों के अतिरिक्त अन्य विभागों के कार्मिकों को यथासंभव नियुक्त करवाएं जाने हेतु लिखा गया है</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त क्रम में सन्दर्भित पत्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की निरन्तरता में निर्देशित किया जाता है कि स्थानीय जिला कलक्टर कार्यालय से समन्वय स्थापित करते हुए प्रासंगिक निर्देशों की पालना सुनिश्चित करवाएं तथा गई कार्यवाही की सूचना इस कार्यालय की ई.मेल. आई.डी. massecondary@gmail.com पर प्रेषित करवाया जाना सुनिश्चित करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आदेशों की शत प्रतिशत हो पालना</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक समुदाय देश एवं राज्य में कभी भी विकट स्थिति हो हमेशा अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाते है और निभाते रहेंगे। कोरोना काल हो या चुनाव या कोई आपदा। लेकिन शिक्षक का मुख्य कार्य विद्यार्थियों को पढ़ाना है,वर्तमान में अर्द्ध वार्षिक परीक्षाएं चल रही है और फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं प्रस्तावित है। अगर परिणाम कम रहा तो नोटिस मिलने की संभावना। इसलिए विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में कम से कम शिक्षकों को लगाया जाना चाहिए एवं निर्वाचन आयोग के जारी निर्देशों के अनुसार राज्य के सभी जिलों में चुनाव कार्यालय, बीएलओ सहायक एवं हेल्प डेस्को पर लगे शिक्षकों को अपनी स्कूलों के लिए अतिशीघ्र कार्यमुक्त किया जाएं। Sri Ganganagar News<br />
<strong>मोहर सिंह सलावद,प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/teachers-will-get-relief-regarding-sir-work-demand-for-100-implementation-of-the-order/article-78419</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 11:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Election Commission: 270 से ज़्यादा पुराने जजों, आर्म्ड फोर्सेज़ के अधिकारियों ने राहुल गांधी के ‘बेवकूफ़ी भरे गुस्से’ की आलोचना की</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। देश की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर अभियान सामने आया, जिसमें 272 प्रतिष्ठित नागरिक—जिनमें से कई पूर्व उच्च न्यायाधीश, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी और सशस्त्र बलों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं—ने एक खुला पत्र जारी कर चिंता व्यक्त की। इस पत्र में लोकसभा में विपक्ष के नेता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/over-270-former-judges-and-armed-forces-officers-criticized-rahul-gandhis-stupid-outburst/article-78311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/delhi-assembly-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। देश की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर अभियान सामने आया, जिसमें 272 प्रतिष्ठित नागरिक—जिनमें से कई पूर्व उच्च न्यायाधीश, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी और सशस्त्र बलों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं—ने एक खुला पत्र जारी कर चिंता व्यक्त की। इस पत्र में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों की कड़ी आलोचना की गई है। Election Commission</p>
<p style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक दल चुनाव आयोग पर “मतदाता सूची में हेरफेर” और “सत्ता पक्ष के साथ मिलीभगत” जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिनका कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि यद्यपि राहुल गांधी का नाम सीधे नहीं लिया गया, परंतु विपक्षी दलों की ओर से आयोग पर किए जा रहे हमलों को अत्यंत “अत्युक्तिपूर्ण और आधारहीन” बताया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संवैधानिक संस्थाओं पर ‘अनुचित प्रहार’ की चिंता | Election Commission</h3>
<p style="text-align:justify;">पूर्व न्यायाधीशों और अधिकारियों ने लिखा कि लोकतंत्र की मजबूती उसके संस्थागत ढांचे पर आधारित है, और इन संस्थानों को बिना पर्याप्त तथ्यों के कटघरे में खड़ा करना लोकतांत्रिक आचरण के विरुद्ध है। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक नेता नीतिगत विकल्प प्रस्तुत करने के बजाय “नाटकीय और उत्तेजक आरोपों” के सहारे जनभावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि देश की न्यायपालिका, संसद, सेनाओं तथा अब चुनाव आयोग तक—सभी संस्थानों पर संदेह का वातावरण बनाना “एक खतरनाक प्रवृत्ति” है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अविश्वास बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि SIR प्रक्रिया पर बार-बार सवाल उठाना तथ्यहीन है, क्योंकि आयोग ने अपनी प्रक्रिया सभी के समक्ष स्पष्ट की है। उनके अनुसार, पात्र मतदाताओं का पंजीकरण और अपात्र नामों का हटाया जाना एक नियमित और न्यायालयों द्वारा अनुमोदित कार्यप्रणाली है। उन्होंने कहा कि भावनात्मक रूप से तीखे शब्द भले जनता को प्रभावित कर सकते हों, किंतु व्यवहारिक परीक्षण में ये आरोप टिक नहीं पाते।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चुनावी परिणामों पर ‘चयनात्मक प्रतिक्रिया’ पर सवाल | Election Commission</h3>
<p style="text-align:justify;">पत्र में विपक्षी दलों के “चुनिंदा रोष” का भी उल्लेख किया गया। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि जब विपक्ष कुछ राज्यों में जीत दर्ज करता है, तब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जाता; किंतु हार की स्थिति में आयोग को दोषी ठहराया जाना राजनीतिक अवसरवाद दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संदर्भ में बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र के हालिया चुनावों का उल्लेख किया गया, जहां विपक्ष की हार को आधार बनाकर आयोग पर आरोप लगाए गए। पत्र में देशवासियों और नागरिक संगठनों से आग्रह किया गया है कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास बनाए रखें तथा चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के समर्थन में खड़े हों—आलोचना से ऊपर उठकर, तथ्य और भरोसे के आधार पर।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 14:18:09 +0530</pubDate>
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