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                <title>Stress - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अभी-अभी पूज्य गुरु जी के इंस्ट्राग्राम पर संगत के लिए आया कुछ खास, जल्दी देखें&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। अभी-अभी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड हुई। जिसमें पूज्य गुरु जी नौजवानों के सवालों के जवाब दे रहे हैं। सवाल : गुरू जी आजकल जैसे लाइफ में काफी चेंजिज हो रहे हैं। तो कई बार स्ट्रैस बहुत ज्यादा हो जाता है। स्ट्रैस और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/saint-dr-msg-tips-for-stress-relief/article-40744"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/saint-dr.-msg-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> अभी-अभी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के इंस्टाग्राम पर <a href="https://www.instagram.com/reel/Cl79_5CgGsQ/?igshid=YmMyMTA2M2Y=">एक वीडियो</a> अपलोड हुई। जिसमें पूज्य गुरु जी नौजवानों के सवालों के जवाब दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : गुरू जी आजकल जैसे लाइफ में काफी चेंजिज हो रहे हैं। तो कई बार स्ट्रैस बहुत ज्यादा हो जाता है। स्ट्रैस और टैंशन के कारण मेडिटेशन भी नहीं हो पाता तो इस स्थिति से कैसे रिकवर हों?</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरू जी का जवाब :</strong> <a href="https://www.instagram.com/reel/Cl79_5CgGsQ/?igshid=YmMyMTA2M2Y=">मेडिटेशन ही दिमागी परेशानी को दूर करता है। मेडिटेशन नहीं हो पा रहा तो आप सुबह-सुबह वॉकिंग करें। वॉकिंग करते हुए साथ-साथ सुमिरन करेंगे, मेडिटेशन करेंगे तो उससे मेडिटेशन भी हो जाएगा और आपका जो दिमागी बोझ है भी दूर हो जाएगा। अगर आपने यह वीडियो देखना है तो इस पर क्लीक करें।</a></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>इस बार मानवता भलाई के ये काम शुरू किए</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरूजी द्वारा 40 दिन के रूहानी यात्रा पर इस बार मानवता भलाई के चार नए कार्यों की शुरूआत करके संगत द्वारा की जाने वाली सेवा का दायरा बढ़ाया। नए कार्यों में 143वां कार्य पूरे देश को नशा मुक्त बनाना, 144वां कार्य साध-संगत द्वारा प्रदूषण रहित गाड़ियां चलाना, 145वां कार्य पर्यावरण, वातावरण शुद्धि के लिए रोजाना सुबह-शाम घरों में घी, तेल के दीये जलाना, 146वां कार्य मोबाइल से दूर रहकर शाम 7 से 9 बजे तक परिवार को समय देना और 147वां कार्य नेत्रहीनों की परीक्षाएं देने की सेवा करना है।</p>
<p><a href="https://instagram.com/saintdrmsginsan?igshid=YmMyMTA2M2Y="><strong>पूज्य गुरु जी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट को यहां क्लिक करके फॉलो करें </strong><strong>और देखें पूज्य गुरु जी का हर नया वीडियो और सुंदर सुंदर तस्वीरें</strong></a></p>
<p><a href="https://www.youtube.com/c/SaintMSGInsan/videos"><strong>पूज्य गुरु जी के ऑफिशियल यूट्यूब अकाउंट को यहां क्लिक करके सब्रसक्राइब करें</strong><strong> और देखें पूज्य गुरू जी का हर वीडियो</strong></a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 12:38:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जानें, गाय को गले लगाने से कैसे खत्म होता है तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कोरोना वारस से देश और विदेश में हाल बेहाल है। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार लॉकडाउन लगा रही है। लोग घरों में कैद से हो गए हैं। कोरोना संकट के बीच ब्लैक फंगस जैसी अनेक बीमारियों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-does-hugging-cow-eliminate-stress/article-23858"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/cow-hugging.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">अमेरिका में मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कोरोना वारस से देश और विदेश में हाल बेहाल है। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार लॉकडाउन लगा रही है। लोग घरों में कैद से हो गए हैं। कोरोना संकट के बीच ब्लैक फंगस जैसी अनेक बीमारियों ने चिंता का विषय बन गया है। इस बीच एक ऐसी खबर निकल कर आ रही है जिससे आप जी बहुत आश्चर्यचकित होंगे। अमेरिका में मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या को खत्म करने के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है।</p>
<p>https://twitter.com/thenewsoncnbc/status/1395404573091770371</p>
<h4 style="text-align:justify;">तनाव होता है कम</h4>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टरों के अनुसार, गाय को गले लगाने का एहसास घर पर एक बच्चे या पालतू जानवर को पालने के समान है। गले लगाने से हार्मोन आॅक्सीटोसिन, सेरोटोनिन और डोपामाइन को ट्रिगर करता है, जिससे कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करता है। ये तनाव के स्तर, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमेरिका में गाय को गले लगाने के लिए लोग दे रहें है पैसे</h4>
<p style="text-align:justify;">कोरोना संकट में अमेरिका में गाय को गले लगाने के लिए पैसे दे रहे हैं। कांग्रेस नेता मिलिंद देवरा द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए सीएनबीसी के एक वीडियो में कहा गया है कि अमेरिका में लोग गाय को गले लगाने के लिए एक घंटे के लिए 200 डॉलर तक का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में तो गायों को तीन हजार सालों से पूजा जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इम्यूनिटी को रेगुलेट करता है ‘गाय से मिलना’</h4>
<p style="text-align:justify;">गाय का स्वभाव शांत, कोमल और धैर्यवान होता हैं और गले लगाने वालों को जानवर उसके गर्म शरीर के तापमान, धीमी गति से दिल की धड़कन और बड़े आकार से फायदा होता है। यह सब शरीर के मेटोबोलिज्म, इम्यूनिटी और तनाव प्रतिक्रिया को रेगुलेट करने में मदद करता है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 May 2021 13:47:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर तनाव में</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पास कर दे रही झटके सरकारी अस्पतालों में नौकरी करने से कर रहे परहेज (Doctors Treating Patients Stress) जालंधर (सच कहूँ न्यूज)। जिंदगी और मौत में जूझ रहे मरीजों का इलाज कर उन्हें नई जिंदगी देने वाले डॉक्टर खुद तनाव में हैं। सरकारी व गैर सरकारी डॉक्टर मरीजों को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/doctors-treating-patients-in-stress/article-4618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/doctors-treating-patients-stress.jpg" alt=""></a><br /><h1>केंद्र सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पास कर दे रही झटके</h1>
<h3>सरकारी अस्पतालों में नौकरी करने से कर रहे परहेज</h3>
<p><strong>(Doctors Treating Patients Stress)</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर (सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिंदगी और मौत में जूझ रहे मरीजों का इलाज कर उन्हें नई जिंदगी देने वाले डॉक्टर खुद तनाव में हैं। सरकारी व गैर सरकारी डॉक्टर मरीजों को भले ही मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने का इलाज करते हैं परंतु खुद के मर्ज के इलाज को लेकर सरकारी दवा के इंतजार में हैं। केंद्र सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल पास कर डॉक्टरों को झटके दे रही है। वहीं राज्य सरकार की नीतियों के चलते डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में नौकरी करने से भाग रहे हैं। डॉक्टर मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे परंतु सरकार उनके घाव पर मरहम नहीं लगा सकी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठा रहे डॉक्टर</h3>
<p style="text-align:justify;">आइएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. पीएस बक्शी कहते हैं कि सुरक्षा के लिए पंजाब प्रोटेक्शन फॉर मेडिकेयर परसन एंड मेडिकेयर इंस्टीट्यूशनस (प्रीवेंशन आॅफ वायलेंस एंड डेमेज टू प्रॉपर्टी बिल 2008) बनने के 10 साल बाद भी डॉक्टर असुरक्षित हैं। राज्य में डॉक्टरों व अस्पतालों में छोटे-बड़े हमले व मारपीट को लेकर हर सप्ताह 2-3 मामले सामने आ रहे हैं। आइएमए पंजाब ने एक्ट को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य सरकार के मंत्रियों व पुलिस के डीजीपी स्तर पर बैठकें की परंतु नतीजे नहीं मिले।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू: सेहत मंत्री</h3>
<p style="text-align:justify;">सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा मानते हैं कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है। मेडिकल अफसर जनरल ड्यूटी के 306 डॉक्टरों की भर्ती के लिए पीपीएससी ने हरी झंडी दे दी है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 13:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफवाहों व सोशल मीडिया का दुरुपयोग बन रहे तनाव का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[अनपढ़ता और अफवाहें जब मिल जाएं तो यह उथल-पुथल मचा देती हैं। सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख लगा दिए हैं। असम में दो युवाओं को बच्चे उठाने वाले समझकर गांववासियों ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। पिछले कई दिनों से असम में बच्चों को उठाने संबंधी अफवाहें फैल रहीं थी। दूसरी तरफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">अनपढ़ता और अफवाहें जब मिल जाएं तो यह उथल-पुथल मचा देती हैं। सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख लगा दिए हैं। असम में दो युवाओं को बच्चे उठाने वाले समझकर गांववासियों ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। पिछले कई दिनों से असम में बच्चों को उठाने संबंधी अफवाहें फैल रहीं थी। दूसरी तरफ प्रशासन व पुलिस तंत्र इतना सुस्त है कि ऐसी अफवाहों पर तब ध्यान देता है जब कोई बड़ा हादसा घटित हो जाए। पिछड़ापन इतना ज्यादा है कि जनता और प्रशासन के बीच बड़ी खाई पैदा हो गई है। (Artical)</p>
<p style="text-align:justify;">खासकर बंगाल, बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों में ग्रामीण क्षेत्र अनपढ़ता व अफवाहों के कारण बदतर परिस्थितियों से गुजर रहा है। पिछले महीनों में चोटी काटने की अफवाहों ने तब कई जानें ले ली जब किसी अज्ञात वृद्ध महिला की तरफ से चोटी काटने की अफवाह फैला दी गई। सोशल मीडिया ने ऐसी अफवाहों का प्रभाव कई गुणा बढ़ा दिया। सोशल मीडिया बुरा नहीं पर इसका दुरुपयोग बुरा है। यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह समझाए की मीडिया की आजादी व समाज की सुरक्षा के बीच किस तरह संतुलन रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:सन्देह अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ कानूनन सजा का प्रावधान है लेकिन सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों की बड़ी गिनती इन कानूनों से ही अनभिज्ञ है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने संबंधी ऐसा कोई प्रबंध होना चाहिए कि इंटरनेट का कनैक्शन देने या मोबाइल फोन की खरीदारी के समय कानून संबंधी जानकारी लिखित रूप में दी जाए ताकि लोगों में जागरुकता के साथ-साथ कानून का भय भी पैदा हो। (Artical)</p>
<p style="text-align:justify;">कई पिछड़े क्षेत्रों में अनपढ़ता के कारण हिंसा इतनी ज्यादा बढ़ रही है कि लोग आरोपी को कानून के हवाले करने की बजाय कबीलाई सोच अपनाकर सजा देने लगे हैं। कई जगहों पर निर्दोष व्यक्तियों को चोर समझकर मार दिया गया। भड़की जनता बेगुनाह लोगों की जान ले लेती है। भीड़ पर कोई कार्रवाई नहीं होती, मामला रफा-दफा हो जाता है। भीड़ की आड़ में असामाजिक तत्व अपराध कर जाते हैं। ऐसी घटनाएं भारतीय सभ्यता, कानून और सरकार के नाम पर कलंक हैं। इस विष य में प्रभावी शिक्षाा व कानून व्यवस्था के प्रबंध किए जाने आवश्यक हैं। (Artical)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/rumors-and-misuse-of-social-media-are-becoming-the-cause-of-tension/article-4105</link>
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                <pubDate>Tue, 12 Jun 2018 09:36:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तनाव से चीन का ही आर्थिक नुकसान होगा</title>
                                    <description><![CDATA[डोकलाम के मसले को जिस तरह चीन नाक का सवाल बनाकर युद्ध का माहौल निर्मित कर रहा है और अगर भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सर्वाधिक खामियाजा भी चीन को ही भुगतना होगा। हालांकि भारत संयम का परिचय देते हुए हरसंभव कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/stress-will-cause-economic-damage/article-2763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/china-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डोकलाम के मसले को जिस तरह चीन नाक का सवाल बनाकर युद्ध का माहौल निर्मित कर रहा है और अगर भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सर्वाधिक खामियाजा भी चीन को ही भुगतना होगा। हालांकि भारत संयम का परिचय देते हुए हरसंभव कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की नौबत न आए। लेकिन इसके बावजूद भी अगर सीमा पर तनातनी बढ़ती है, तो उसके लिए पूर्णत: चीन जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन को समझना होगा कि उसके इस रवैये से भारत में उसके उत्पादों के बहिष्कार का माहौल बनना शुरु हो गया है और अगर चीन चेतता नहीं है, तो उसे भारी कारोबारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लोग न सिर्फ चीन के अड़ियल रवैये से नाराज हैं, बल्कि इससे भी अवगत हैं कि वह मैन्युफैक्चरिंग में घटिया कच्चे माल का इस्तेमाल कर अपना घटिया व सस्ता माल भारत में उतार रहा है। यही वजह है कि उसके उत्पादों की मांग भारत में तेजी से घटने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों पर ध्यान दें तो विगत दो दशकों में चीन का भारत में व्यापार कई गुना बढ़ा है। 1984 में दोनों देशों द्वारा ‘सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र’ यानी एमएफएन पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारत की अपेक्षा चीन कई गुना ज्यादा फायदे में रहा है। सन् 2000 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.9 अरब डॉलर था, जोकि आज 2016 में बढ़कर 75 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। इस अर्थ में चीन भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझीदार देश बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच कारोबार का सर्वाधिक फायदा चीन के पक्ष में गया है। भारत चीन को निर्यात के मुकाबले 50 अरब डॉलर का आयात ज्यादा करता है। लाभ की जोरदार संभावनाओं के कारण पिछले 3-4 वर्षों से चीन की कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाना शुरु कर दिया है। सालाना आधार पर वर्ष 2015 में यह छह गुना बढ़कर 87 करोड़ डॉलर हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की कंपनियों पर प्रतिबंधों में ढील और अनुकूल टैक्स दरों के चलते और निवेश की संभावना बढ़ गयी है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने पिछले वर्ष से ‘मेक इन इंडिया’ कंपेने में चीन का ज्यादा से ज्यादा निवेश हासिल करने के प्रयास किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2011 में चीन को भारतीय निर्यात 23.41 अरब डॉलर का था, जबकि भारत को चीन का निर्यात 50.49 डॉलर रहा। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच 75 अरब डॉलर का व्यापार रहा, लेकिन भारत को व्यापार घाटे से गुजरना पड़ा। यह सच्चाई है कि आज भारत का व्यापार घाटा का बड़ा हिस्सा चीन की वजह से है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा पिछले साल 46.56 अरब डॉलर पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी 2015 के 100 अरब डॉलर के लक्ष्य से नीचे रहा। वर्ष 2016 में 70.08 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2015 के 71.63 बिलियन डॉलर से 2.2 प्रतिशत कम था।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि चीन इस स्थिति से अवगत नहीं है। अभी पिछले दिनों ही चीन की सरकारी मीडिया ने अपनी कंपनियों को सावधान किया है कि वे भारत में निवेश को लेकर सतर्क रहे। दरअसल चीन को डर है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो उसके हितों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। चीन को समझना होगा कि अगर ऐसी स्थिति उत्पन होती है तो उसके लिए स्वयं जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक भारत का सवाल है तो वह चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते को लेकर बेहद संवेदनशील है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि पिछले वर्ष चालू वित्त वर्ष में भारत ने पहली बार चीन से 18000 टन पेट्रोल और 39000 टन डीजल का आयात किया है। अब चीन को तय करना है कि वह भारत के साथ तनाव चाहता है या शांति।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अरविंद जयतिलक</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/stress-will-cause-economic-damage/article-2763</link>
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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 23:15:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सिक्किम का तनाव भारत से आमने-सामने की जंग में हो सकता है तब्दील: चीनी मीडिया</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग/ नई दिल्ली। सिक्किम में जारी तनाव के बीच चीन के स्टेट मीडिया ने एक बार फिर भारत को धमकी दी है। चीन के सरकारी अखबार ने एक आर्टिकल में लिखा- सिक्किम में दोनों देशों के बीच तनाव एलएसी पर आमने-सामने की जंग में बदल सकता है।  ट्राइजंक्शन नाम के इलाके में एक महीने से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sikkim-stress-may-be-transformed-into-war-with-india-chinese-media/article-2414"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/army1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग/ नई दिल्ली।</strong> सिक्किम में जारी तनाव के बीच चीन के स्टेट मीडिया ने एक बार फिर भारत को धमकी दी है। चीन के सरकारी अखबार ने एक आर्टिकल में लिखा- सिक्किम में दोनों देशों के बीच तनाव एलएसी पर आमने-सामने की जंग में बदल सकता है।  ट्राइजंक्शन नाम के इलाके में एक महीने से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि</h2>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल टाइम्स ने मंगलवार को लिखा, “ट्राइजंक्शन में भारतीय फौज का चीनी सैनिकों को सड़क बनाने से रोका जाना चीन की संप्रभुता में सीधे तौर पर दखल है। भारत एलएसी पर कई जगह तनाव पैदा कर रहा है। उसे नतीजों के बारे में सोचना चाहिए। ये तनाव एलएसी पर आमने-सामने की पूरी जंग में बदल सकता है।” आर्टिकल के आखिर में यह भी कहा है कि दोनों देशों को जंग से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश करना चाहिए। चीन के लोगों का कहना है कि भारतीय फौज को सिक्किम से फौरन हटना चाहिए। भारत के लोग इसे चीन से जंग की तरफ बढ़ते कदम के तौर पर देखते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li> भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी बॉर्डर है।</li>
<li> इस बॉर्डर का एक हिस्सा (करीब 220 किलोमीटर) सिक्किम में आता है।</li>
<li> चीन के ट्राइजंक्शन में रोड बनाने को लेकर भारत को सख्त एतराज है।</li>
<li>भारत का कहना है कि अगर इस इलाके में चीन रोड बनाता है कि इससे नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में भारत की आवाजाही रुक सकती है।</li>
<li>भारत की सिक्युरिटी पर पड़ेगा गंभीर असर।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2017 04:07:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिक्किम को लेकर मजबूत है भारत, जारी रहेगा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: बॉर्डर इश्यू पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव सर्दियों तक जारी रह सकता है। भारत ने अपनी फौजों को फिलहाल जो लोकेशन है, उससे हटाने से साफ इनकार कर दिया है। पोजीशन के हिसाब से भारत फायदे में है और इसीलिए वो किसी भी हाल में चीन के सामने झुकने को तैयार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/stress-between-india-and-china-continue/article-2239"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/sikkim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> बॉर्डर इश्यू पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव सर्दियों तक जारी रह सकता है। भारत ने अपनी फौजों को फिलहाल जो लोकेशन है, उससे हटाने से साफ इनकार कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पोजीशन के हिसाब से भारत फायदे में है और इसीलिए वो किसी भी हाल में चीन के सामने झुकने को तैयार नहीं है। भारत और चीन के बीच 2005 में सीमा विवाद सुलझाने के लिए एक सैटलमेंट हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके मुताबिक, दोनों देश बॉर्डर पर जो स्थिति है, उसी में रहेंगे। इसके लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स हैं जो विवाद सुलझाने के लिए मैकेनिज्म तैयार करते हैं। इनकी कोशिश रहती है कि आखिरी फैसला आने से पहले बॉर्डर पर किसी तरह का तनाव ना हो।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, 1998 में चीन और भूटान के बीच भी एक एग्रीमेंट हुआ था। इसके मुताबिक, दोनों देशों की फिलहाल जो सीमाएं तय हैं, वो ही रहेंगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बॉर्डर विवाद हल सकते हैं भारत और चीन</h2>
<p style="text-align:justify;">फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर के मुताबिक- ऐसी कोई वजह नहीं है जिसके आधार पर कहा जाए कि भारत और चीन सीमा विवाद हल नहीं कर सकते। दोनों देशों के बीच काफी लंबी बॉर्डर है और ये कहीं भी कागज पर साफ नहीं है। इसलिए, कभी-कभी विवाद हो जाता है। हम पहले भी इस तरह के हालात देख चुके हैं, जिन्हें सुलझा लिया गया था। इस बार भी ऐसा ही हो सकता है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 22:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्ज ने ली एक और किसान की जान</title>
                                    <description><![CDATA[जंगल में पेड़ पर लटकी मिली लाश जयपुर। प्रदेश के किसाने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर रह है। दौसा जिले में ब्याज पर कर्ज लेकर खेती करने वाले एक किसान ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। किसान सोमवार को बैंक गया था और तभी से परेशान था। किसान शाम को घर से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/farmer-commits-suicide-for-loan-debt/article-2226"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/farmer1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">जंगल में पेड़ पर लटकी मिली लाश</h2>
<p><strong>जयपुर।</strong> प्रदेश के किसाने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर रह है। दौसा जिले में ब्याज पर कर्ज लेकर खेती करने वाले एक किसान ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। किसान सोमवार को बैंक गया था और तभी से परेशान था। किसान शाम को घर से पत्नी की साड़ी लेकर जंगल की ओर निकल गया था। दरे रात तक बाबूलाल घर नहीं आन पर परिवार वालों ने आस पास के इलाक में खोज बीन की लेकिन नहीं मिला। जिसका शव मंगलवार को जंगल में पेड़ पर लटका हुआ मिला।</p>
<ul>
<li>पुलिस ने किसान के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</li>
<li>जानकारी के अनुसार, दौसा जिले के भाड़ रेज की ढाणी में बाबू लाल बैरवा अपने परिवार के साथ रहता था।</li>
<li>घरवालों के अनुसार बाबू लाल सोमवार को बैंक गया था तभी से ही वह परेशान दिख रहा था।</li>
</ul>
<p>बाबूलाल ने गांव के लोगों के खेतों पर मजदूरी का काम करता था। खेतों की बुआई करने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे इसके लिए उसने बैंक से ब्याज पर कर्ज लिया था। लेकिन वह उसे चुकता नहीं कर सका। इस बार बाबूलाल के खेत में फसल तो बोई लेकिन खेती बर्बाद हो गई यह देख कर वह परेशान रहने लगा।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 05:05:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीमा विवाद के बहाने उन्माद में चीन</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले एक माह से सिक्किम की सीमा पर जारी तनाव से चीन लगातार उन्मादी तेवर दिखा रहा है। उसकी यह बौखलाहट इसलिए भी है, क्योंकि भारत भी पीछे हटने की बजाय सख्ती बरत रहा है। लिहाजा चीनी विदेश मंत्रालय में जहां पंचशील समझौता तोड़ने का आरोप भारत पर मढ़ा गया है, वहीं चीन का अंग्रेजी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/stress-on-the-border-of-sikkim/article-2074"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/chaina-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले एक माह से सिक्किम की सीमा पर जारी तनाव से चीन लगातार उन्मादी तेवर दिखा रहा है। उसकी यह बौखलाहट इसलिए भी है, क्योंकि भारत भी पीछे हटने की बजाय सख्ती बरत रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा चीनी विदेश मंत्रालय में जहां पंचशील समझौता तोड़ने का आरोप भारत पर मढ़ा गया है, वहीं चीन का अंग्रेजी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ भारत को निरंतर गीदड़ भभकी देने में लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के भारत में स्थित राजदूत ने यहां तक कह दिया है कि भारत की सेना पीछे नहीं हटी, तो सीमा पर चल रहे विवाद के परिप्रेक्ष्य में चीन सैन्य विकल्प का रास्ता भी चुन सकता है, लेकिन यह भारत को तय करना है कि वह शांति चाहता है अथवा सैन्य विकल्प।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी संपादकीय में उन्मादी तेवर दिखाते हुए लिखा है कि भारत को इस बार 1962 के युद्ध से भी ज्यादा हानि उठानी पड़ सकती है। चीन के इस रुख से साफ है कि चीन बीच का रास्ता निकालने की बजाय केवल अपनी शर्त थोपने का इच्छुक है।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा विवाद चीन की तरफ से डोकलम क्षेत्र में सामरिक सड़क के निर्माण को लेकर है। डोकलम क्षेत्र को चीन ने चीनी नाम डोगलांग दिया है, जिससे यह क्षेत्र उसकी विरासत का हिस्सा लगे। इस क्षेत्र को लेकर चीन और भूटान के बीच कई दशकों से विवाद जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन इस पर अपना मालिकाना हक जताता है, जबकि वास्तव में यह भूटान के स्वामित्व का क्षेत्र है। चीन सड़क के बहाने इस क्षेत्र में स्थाई घुसपैठ की कोशिश में है। जबकि भूटान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चीन अर्से से इस कवायद में लगा है कि चुंबा घाटी, जोकि भूटान और सिक्किम के ठीक मध्य में सिलीगुड़ी की ओर 15 किलोमीटर की चौड़ाई के साथ बढ़ती है, उसका एक बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण के बहाने हथिया ले।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने इस मकसद की पूर्ति के लिए भूटान को यह लालच भी दिया था, कि वह डोकलम पठार का 269 वर्ग किलोमीटर भू-क्षेत्र चीन को दे दे और उसके बदले में भूटान के उत्तर पश्चिम इलाके में लगभग 500 वर्ग किलोमीटर भूमि ले ले।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन 2001 में जब यह प्रस्ताव चीन ने भूटान को दिया था, तभी वहां के शासक जिग्में सिग्ये वांगचूक ने भूटान की राष्ट्रीय विधानसभा में यह स्पष्ट कर दिया था कि भूटान को इस तरह का कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं है। छोटे से देश की इस दृढ़ता से चीन आहत है। इसलिए घायल सांप की तरह वह अपनी फुंकार से भारत और भूटान को डस लेने की हरकत करता रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और भूटान के बीच 1950 में हुई संधि के मुताबिक भारतीय सेना की एक टुकड़ी भूटान की सेना को प्रशिक्षण देने के लिए भूटान में हमेशा तैनात रहती है। इसी कारण जब चीन, भूटान और सिक्किम सीमा के त्रिकोण पर सड़क निर्माण को आगे बढ़ा रहा था, तब भूटान ने इसे अपनी भौगोलिक अखंडता एवं संप्रभुता पर हस्तक्षेप माना।</p>
<p style="text-align:justify;">नतीजतन संधि के अनुसार भारतीय सेना का दखल अनिवार्य हो गया। सेना ने भी सड़क निर्माण का कार्य रोकने में शक्ति का प्रयोग न करते हुए, मानव श्रृंखला बनाकर कार्य बाधित किया। किसी विवाद को तत्काल रोकने का शालीनता से भरा इससे अच्छा कोई और उपाय सीमा पर संभव ही नहीं था? बावजूद चीन का सरकारी अखबार और विशेषज्ञ इस उदार स्थिति को युद्ध की पूर्व भूमिका बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मई 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कुशल कूटनीति के चलते सिक्किम भारत का हिस्सा बना था। सिक्किम ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसकी चीन के साथ सीमा निर्धारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सीमा 1898 में चीन से हुई संधि के आधार पर सुनिश्चित की गई थी। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चीन और ब्रिटिश भारत के बीच हुई संधि को 1959 में एक पत्र के जरिए स्वीकार कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय चीन में प्रधानमंत्री झोऊ एनलाई थे। इसके बाद भारत में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, जो नेहरू के पत्र की स्वीकरता को द्विपक्षीय संधि की तरह ढोती रही हैं। अब राजग की सरकार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जो अब कांग्रेस के ऐसे आश्वासनों को मानने को कतई तैयार नहीं हैं, जो वस्तुस्थिति को टालने वाले हों।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि 1998 में चीन और भूटान सीमा-संधि के अनुसार दोनों देश यह शर्त मानने को बाध्य है, जिसमें 1959 की स्थिति बहाल रखनी है। बावजूद चीन इस स्थिति को सड़क के बहाने बदलने को आतुर तो है ही, युद्ध के हालात भी उत्पन्न कर रहा है। भारत इस विवादित क्षेत्र डोकाला, भूटान डोकलम और चीन डोगलांग कहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ऐसा क्षेत्र है, जहां आबादी का घनत्व न्यूनतम है। पिछले एक दशक से यहांं पूरी तरह शांति कायम थी, लेकिन पड़ोसियों से हरकत की प्रवृत्ति रखने के आदी चीन ने सड़क का निर्माण कर इस शांत क्षेत्र में अशांति ला दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की जून-2016 में आई रिपोर्ट ने भारत को सचेत किया था कि चीन भारत से सटी हुई सीमाओं पर अपनी सैन्य शक्ति और सामरिक आवागमन के संसाधन बढ़ा रहा है। अमेरिका की इस रिपोर्ट को भारत ने तत्काल गंभीरता से लेकर आपत्ति जताई होती तो शायद मौजूदा हालात निर्मित नहीं होते।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन के बीच अक्साई चिन को लेकर करीब 4000 किमी और सिक्किम को लेकर 220 किमी सीमाई विवाद है। तिब्बत और अरुणाचल में भी सीमाई हस्तक्षेप कर चीन विवाद खड़ा करता रहता है। 2015 में उत्तरी लद्दाख की भारतीय सीमा में घुसकर चीन के सैनिकों ने अपने तंबू गाढ़कर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तब दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 5 दिन तक चली वार्ता के बाद चीनी सेना वापस लौटी थी। चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाकर पानी का विवाद भी खड़ा करता रहता है। दरअसल चीन विस्तारवादी तथा वर्चस्ववादी राष्ट्र की मानसिकता रखता है। इसी के चलते दक्षिण चीन सागर पर एकाधिकार को लेकर वियतनाम, फिलीपींस, ताइवान और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ उसकी ठनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला अंतरराष्ट्रीय पंचायत में भी लंबित है। बावजूद चीन अपने अड़ियल रवैये से बाज नहीं आता है। दरअसल उसकी मंशा दूसरे देशों के प्राकृतिक संसाधन हड़पना है। इसीलिए आज उत्तर कोरिया और पाकिस्तान को छोड़ ऐसा कोई अन्य देश नहीं है, जिसे चीन अपना पक्का दोस्त मानता हो।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा चीन को यह समझाना जरूरी है कि अब अंतरराष्ट्रीय स्थितियां 1962 जैसी नहीं है और न ही भारत उन दिनों जैसी लाचार स्थिति में है। अब वह एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और नरेंद्र मोदी ने अनेक देशों से नए मजबूत राजनयिक संबंध बनाए हैं। बावजूद इस मोर्चे पर राजनयिक सक्रियता की और जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी का पहले यूरोप, फिर अमेरिका और अब इजराइल दौरा होने के साथ, भारत, जापान और अमेरिका की सेनाओं का बंगाल की खाड़ी में साझा मालाबार अभ्यास इसी रणनीति का हिस्सा कहा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस युद्धाभ्यास में तीनों देशों के श्रेष्ठतम जंगी बेड़े शामिल होंगे। चीन से फिलहाल दक्षिण-पश्चिम एशिया के भी कई देश खुश नहीं है। गोया, भारत इनसे अच्छे संबंध विकसित करके चीन की कुटिल रणनीति का जबाब दे सकता है। चीन के बरक्श भारत-अमेरिका-इजराइल गठबंधन को भी अस्तित्व में लाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन से जापान की नाराजगी जगजाहिर है, लिहाजा जापान भी यदि इस गठजोड़ का हिस्सा बन जाता है तो चीन को दिन में तारे दिखने लग जाएंगे। हालांकि मौजूदा समस्या का समाधान न तो युद्ध में है और न ही लगातार राष्ट्रीय संप्रभुता का झण्डा बुलंद किए रहने में है, गोया, दोनों देशों के बीच संतुलन और शांति बनी रहती है तो यह एशिया ही नहीं समूची दुनिया के लिए बेहतर स्थिति होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 23:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मोदी और जिनपिंग ने मिलाया हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों को सराहा हैम्बर्ग (एजेंसी)। जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में जी-20 बैठक से पहले शुक्रवार को यहां हुई ब्रिक्स देशों की अनौपचारिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक-दूसरे से गर्मजोशी से मुलाकात की और अपने वक्तव्यों में एक-दूसरे के बारे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/modi-and-xi-jinping-shake-hands/article-2058"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/modi2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">चीनी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों को सराहा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>हैम्बर्ग (एजेंसी)।</strong> जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में जी-20 बैठक से पहले शुक्रवार को यहां हुई ब्रिक्स देशों की अनौपचारिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक-दूसरे से गर्मजोशी से मुलाकात की और अपने वक्तव्यों में एक-दूसरे के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां करके वातावरण खुशगवार बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मोदी ने अपने भाषण की शुरूआत में ही कहा, ‘सर्वप्रथम राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत भरे शब्दों तथा इस बैठक की मेजबानी करने के लिए धन्यवाद।’ मोदी ने इसके बाद आतंकवाद, पश्चिम एशिया, उत्तर कोरिया में तनाव आदि का उल्लेख करने के साथ वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में सुधार पर संतोष जताया। उन्होंने भारत में इस साल 7 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर की संभावना व्यक्त करते हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे 1.3 अरब लोगों का एकीकृत बाजार बनेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भारत और चीन में करीब 3 हफ्ते से तनाव</h2>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने संरक्षणवादी आर्थिक नीतियों के विरुद्ध आवाज बुलंद की और पेरिस समझौते को लागू करने एवं आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक कार्रवाई में ब्रिक्स के नेतृत्व पर बल दिया। उन्होंने ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी का गठन करने एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों द्वारा संतुलित व्यवहार पर भी जोर दिया। अंत में मोदी ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता में ब्रिक्स की गतिशीलता तथा सकारात्मक प्रगति ने हमारे आपसी सहयोग को और भी गहरा किया है। उन्होंने कहा, ‘अंत में मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग को आगामी नौवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं तथा पूर्ण समर्थन देता हूँ।’</p>
<p style="text-align:justify;">चीनी राष्ट्रपति ने अपने वक्तव्य में आतंकवाद के विरुद्ध भारत के दृढ़ संकल्प और उसके अध्यक्षीय काल में संगठन की गतिशीलता की सराहना की। उन्होंने गत वर्ष गोवा में ब्रिक्स शिखर बैठक के निष्कर्षों का भी उल्लेख किया। चीनी राष्ट्रपति ने आर्थिक एवं सामाजिक विकास में भारत की सफलता की सराहना की तथा भविष्य में और प्रगति की कामना की। बैठक के बाद मोदी और जिनपिंग ने एक-दूसरे से गर्मजोशी से हाथ मिलाया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी प्रधानमंत्री के साथ मौजूद थे। बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन भी मौजूद थे।<br />
बता दें कि सिक्किम सेक्टर में डोकलाम में भारतीय सेनाओं की मौजूदगी को लेकर भारत और चीन में करीब 3 हफ्ते से तनाव बरकरार है। चीन ने भारतीय सेनाओं को पीछे हटने को कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 07:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एएसआई ने सर्विस रिवॉल्वर से गोली मार की आत्महत्या</title>
                                    <description><![CDATA[ ड्यूटी बदलने से था परेशान सवाईमाधोपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान के सवाईमाधोपुर में तनाव में आ कर एक पुलिस अधिकारी ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। शहर की मोबाइल यूनिट में तैनात एएसआई ने अपने क्वार्टर में ही सुसाइड की घटना को अंजाम दिया। मृतक एएसआई का नाम किशोर सिंह है, जिसने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/asi-suicide-by-service-revolver/article-1932"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/police.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> ड्यूटी बदलने से था परेशान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाईमाधोपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान के सवाईमाधोपुर में तनाव में आ कर एक पुलिस अधिकारी ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। शहर की मोबाइल यूनिट में तैनात एएसआई ने अपने क्वार्टर में ही सुसाइड की घटना को अंजाम दिया। मृतक एएसआई का नाम किशोर सिंह है, जिसने अपने क्वार्टर में गोली मार कर सुसाइड कर लिया। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को सुबह जब किशोर सिंह के घर पर पुलिस कैंटीन से एक व्यक्ति टिफिन लेने आया तो उसे घर का दरवाजा बंद मिला। इस पर टिफिन लेने आए शख्स ने खिड़की से अंदर देखा तो बेडरूम में किशोर सिंह की लाश पड़ी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिन पहले ही किशोर सिंह को लाईन आॅफिसर के पद से हटाकर मोबाइल यूनिट में लगाया गया था। इस बात से ही किशोर सिंह तनाव में था। फिलहाल पुलिस की टीम इस पूरे मामले की जांच कर रही है। किशोर सिंह के परिवार को इस घटना की जानकारी दे दी है। किशोर सिंह का परिवार नागौर जिले के पलवा तहसील के सतावर गांव में रहता है। परिवार वालों के आने के बाद ही शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 08:41:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन की दोगली नीति , बॉर्डर पर फिर दिखाई दादागिरी</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग/नई दिल्ली। चीन की आर्मी ने हाल ही में सिक्किम सेक्टर में घुसने की कोशिश की और भारतीय जवानों से हाथापाई की। इस दौरान चीन के सैनिकों ने हमारे 2 बंकर भी तोड़ दिए। चीनी सैनिकों को रोकने के लिए भारतीय सैनिकाें को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने लाइन आॅफ एक्चुअल कंट्रोल के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/stress-on-border-india-china-face-to-face/article-1677"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/border-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग/नई दिल्ली।</strong> चीन की आर्मी ने हाल ही में सिक्किम सेक्टर में घुसने की कोशिश की और भारतीय जवानों से हाथापाई की। इस दौरान चीन के सैनिकों ने हमारे 2 बंकर भी तोड़ दिए। चीनी सैनिकों को रोकने के लिए भारतीय सैनिकाें को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने लाइन आॅफ एक्चुअल कंट्रोल के पास ह्यूमन चेन बनाकर चीनियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे धक्का-मुक्की करते रहे। लेकिन चीन ने सोमवार देर रात उलटा भारतीय सैनिकों पर ही बॉर्डर क्रॉस करने का आरोप लगा दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मानसरोवर यात्रा को किया बंद</h3>
<p style="text-align:justify;">चीन ने मानसरोवर यात्रा को बंद कर दिया है। चीन की ओर से नाथुला दर्रे रास्ते को बंद कर दिया गया है। अभी इस पर भारत के विदेश मंत्रालय का कोई बयान नहीं आया है। इससे पहले खबर थी कि इस मुद्दे पर अभी दोनों देशों में बात चल रही है। चीन ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक भारत सिक्किम बॉर्डर से अपनी सेना नहीं हटाएगा तब तक वह इस मार्ग को नहीं खोलेगा। बता दें कि अभी भी लगभग 6 गुटों को यात्रा करनी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है विवाद</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन के बीच विवादित इलाका 4000 किलोमीटर का है। लेकिन चीन का कहना है कि सीमा विवाद वाला क्षेत्र महज 2000 किलोमीटर का है। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में से अक्साई चीन को चीन के ही सुपुर्द कर दिया है। चीन के साथ भारत का विवाद 64 साल पुराना है। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेशनल बॉर्डर का क्लियर न होना है। भारत मानता आ रहा है कि चीन जानबूझकर इस विवाद का हल नहीं कर रहा है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/stress-on-border-india-china-face-to-face/article-1677</link>
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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2017 05:07:42 +0530</pubDate>
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