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                <title>Param Pita Shah Satnam Singh Ji - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>MSG Bhandara Month: &amp;#8221;सतगुरु के ऋण को चुकाया नहीं जा सकता! जो वचनों के पक्के रहें, दृढ यकीन रखें, उन्हें कोई कमी नहीं&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज पूरी साध-संगत के चेहरे खुशी से खिले हुए हैं और इन सबके पीछे शाह मस्तान-शाह सतनाम जी दाता रहबर का रहमो कर्म है और मालिक से यहीं दुआ है कि परम पिता परमात्मा आपको हर खुशी से नवाजे, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-debt-owed-to-the-true-guru-can-never-be-repaid/article-79885"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/shah-satnam-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज पूरी साध-संगत के चेहरे खुशी से खिले हुए हैं और इन सबके पीछे शाह मस्तान-शाह सतनाम जी दाता रहबर का रहमो कर्म है और मालिक से यहीं दुआ है कि परम पिता परमात्मा आपको हर खुशी से नवाजे, जो वचनों के पक्के रहें, दृढ यकीन रखें, उन्हें कोई कमी तो क्या मांगने के लिए सोचने तक की भी नौबत ना आए। सच्चे दाता रहबर शाह सतनाम जी महाराज के जितने गुण गाएं, उतने कम हैं। MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">परम पिता शाह सतनाम जी महाराज श्री जलालआणा साहिब में आए और माता आसकौर जी और अति पूजनीय पिता वरियाम सिंह जी के घर जन्म लिया। वो धरा, वो जगह धन्य-धन्य कहने के काबिल है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि हम और हमारी साध-संगत धन्य है जिस दाता ने हमें चरणों से लगाया। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि धन्य करने वाले एक कण को, एक कतरे को समुंद्र ही नहीं महासागर बना देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक नूर के जर्रे को सूरज ही नहीं करोड़ों सूरज की तरह चमका देते हैं, तो ऐसे मुर्शिद-ए-कामिल दाता रहबर का अरबों-खरबों बार गुणगान गाएं, सजदा करें, नमन करें, उतना कम है। गुण गाने जरूरी हैं, लेकिन अगर सारी उम्र गुण गाते रहें तो भी मुर्शिद का ऋण उतारा नहीं जा सकता। हम सब धन्य हुए क्योंकि दाता रहबर के दर्शन पाए। उस परम पिता परमात्मा ने धन्य बनाए, तभी धन्य हुए। वरना पता नहीं कौन सा जीव कहां पर भटक रहा था।</p>
<h3>शाह सतनाम जी महाराज ना आते तो आत्मा भटकती ही रह जाती</h3>
<p style="text-align:justify;">पता नहीं कितने युगों से आत्मा भटक रही थी और अगर वो (परम पिता शाह सतनाम जी महाराज) ना आते तो आत्मा भटकती ही रह जाती। शाह सतनाम जी दाता का जितना गुणगान गाएं, उतना कम है। परम पिता जी ने हम थे, हम है और हम ही रहेंगे, के वचन करके रूहानियत का इतिहास ही बदल डाला। पूज्य गुरु जी फरमाते है कि सतगुरु मौला ने हर तरह से अपने बच्चों की संभाल की, कर रहे हैं औैर अरबों-खरबों गुणा ज्यादा करेंगे जो वचनों पर अमल करेंगे। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को वचनों पर पक्के रहने और दृढ़ यकीन रखने का आह्वान किया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ऐसा कलियुग का समय है जिसमें मन, माया, काम वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार का बोल बाला है और लोगों को गुमराह कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि वो बच्चे भाग्यशाली हैं जो गुरुमंत्र लेकर राम-नाम का जाप कर रहे हैं और वो बच्चे बड़े ही भाग्यशाली हैं जिनके माँं-बाप ने उन्हें गुरुमंत्र दिलवा दिया। खानदानी सेवादार, खानदानी सत्संगी को हम सैल्यूट करते हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि परम पिता जी ने डरना नहीं सिखाया, झुकना सिखाया है, लड़ना नहीं सिखाया, प्रेम करना सिखाया है, अहिंसा में रहना सिखाया है, हिंसा करना नहीं सिखाया। इसके अलावा साध-संगत को बेगर्ज प्रेम करना सिखाया है व आत्मा व परमात्मा से ईश्क करना सिखाया है। आत्मिक ईश्क में जो नशा होता है वो बा कमाल, गजब, जबरदस्त होता है। MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 09:39:01 +0530</pubDate>
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