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                <title>Life Imprisonment - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Life Imprisonment RSS Feed</description>
                
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                <title>बेटे की हत्या के दोषी सेवानिवृत्त फौजी को आजीवन कारावास</title>
                                    <description><![CDATA[सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पाराशर की अदालत ने बंटवारे को लेकर हुई कहासुनी के बाद अपने बेटे की दाव (तेजधार हथियार) से गर्दन व हाथ पर वार करके हत्या करने के आरोपित रिटायर्ड फौजी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद (Life Imprisonment) व 50 हजार रुपये जुर्माने की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/retired-soldier-sentenced-to-life-imprisonment-for-killing-son/article-33049"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/life-imprisonment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सोनीपत।</strong> अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पाराशर की अदालत ने बंटवारे को लेकर हुई कहासुनी के बाद अपने बेटे की दाव (तेजधार हथियार) से गर्दन व हाथ पर वार करके हत्या करने के आरोपित रिटायर्ड फौजी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद (Life Imprisonment) व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दो साल अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। रिटायर्ड फौजी की पत्नी ने अपने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव जाहरी की रहने वाली कमलेश ने 10 जून, 2020 को सदर थाना पुलिस को बताया था कि उसके पति रिटायर्ड फौजी रामपत व छोटे बेटे राहुल में बंटवारे को लेकर एक महीने से कहासुनी चल रही थी। वह अपने बेटे राहुल के साथ पति रामपत से अलग रहती थी। कमलेश ने पुलिस को बताया था कि 10 जून, 2020 की रात को भी उसके बेटे राहुल की अपने पिता रामपत से बंटवारे को लेकर कहासुनी हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर रामपत गुस्से में घर के अंदर से लकड़ी काटने का दाव लेकर आ गए। उन्होंने आते ही दाव से राहुल पर वार कर दिया था। राहुल ने बचाव को अपना बांया हाथ आगे किया तो दाव लगने से हाथ कटकर दूर जा गिरा था। उसके बाद राहुल की गर्दन पर वार कर दिया था। उसके गिरने के बाद भी कई वार कर उसकी हत्या कर दी थी। कमलेश ने पुलिस को बताया था कि उसके साथ ही बड़े बेटे विकास और पुत्रवधू दीपिका ने बचाव का प्रयास किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तब उसके पति ने उन पर भी दाव से हमला करने की कोशिश की थी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर दाव बरामद करने के अदालत में पेश किया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए एएसजे अजय पाराशर की अदालत ने रामपत को बेटे की हत्या का दोषी करार दिया। शुक्रवार को इस मामले में सजा सुनाते हुए अदालत ने रामपत को उम्रकैद (Life Imprisonment)  व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 May 2022 21:09:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>युवती की हत्या के दोषी को उम्र कैद</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। मारपीट कर युवती की हत्या करने के मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश सूर्य प्रताप सिंह की अदालत ने पुख्ता सबूतों व गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (Life Imprisonment) व 10 हजार रुपए जुर्माने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/life-imprisonment-for-girls-murder/article-32658"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/life-imprisonment.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>अदालत ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मारपीट कर युवती की हत्या करने के मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश सूर्य प्रताप सिंह की अदालत ने पुख्ता सबूतों व गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (Life Imprisonment) व 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने का भुगतान न करने पर दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार गत 15 अप्रैल 2021 को जिले के गांव चकरपुर में किराए के एक मकान में एक युवती की मारपीट कर हत्या कर देने का मामला प्रकाश में आया था। डीएलएफ सेक्टर-29 थाना पुलिस ने बिल्डिंग के केयर टेकर की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि चकरपुर गांव में किराए के लिए कई कमरे बने हुए हैं। कमरा नंबर-17 में आकाश बंसती के साथ किराए पर रहता था। जब उसने किराए पर कमरा लिया था तो उसने बसंती की पहचान अपनी पत्नी के रूप में कराई थी। उन दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। 14-15 मार्च की रात्रि में भी दोनों में किसी बात को लेकर झगड़ा व मारपीट भी हुई थी। सुबह पता चला कि बसंती की मौत हो गई है। अन्य कमरों में रहने वाले लोगों ने भी रात में घटित हुई इस घटना की जानकारी उसे दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने आकाश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तभी से वह जिला जेल में बंद है। मामला अदालत में चला। अभियोजन पक्ष ने अदालत में जो सबूत व गवाह पेश किए, उनसे आरोपी पर लगे आरोप सिद्ध होना पाते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 19:13:43 +0530</pubDate>
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                <title>डेरा श्रद्धालु गुरदेव सिंह के हत्यारों को उम्र कैद</title>
                                    <description><![CDATA[जून 2016 में गोलियां मारकर की थी हत्या फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)। गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला में वर्ष 2016 में डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु गुरदेव सिंह के हत्या(Life Imprisonment) मामले में शुक्रवार को फरीदकोट की माननीय अदालत ने तीन दोषियों को उम्र कैद की सजा व 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। प्राप्त जानकारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/life-imprisonment-for-the-killers-of-dera-devotee-gurdev-singh/article-30550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/life-imprisonment.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>जून 2016 में गोलियां मारकर की थी हत्या</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला में वर्ष 2016 में डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु गुरदेव सिंह के हत्या(Life Imprisonment) मामले में शुक्रवार को फरीदकोट की माननीय अदालत ने तीन दोषियों को उम्र कैद की सजा व 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने इस मामले की जांच करते हुए तीन आरोपियों गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी (27) पुत्र भाग सिंह, अशोक कुमार (31) पुत्र देसराज निवासी गांव कोहाला जिला फिरोजपुर और जसवंत सिंह उर्फ काला (45) पुत्र गुरविन्दर सिंह निवासी सोहणेवाला, जिला श्री मुक्तसर साहिब को गिरफ्तार किया था। मुदई पक्ष के वकील एडवोकेट विनोद मोंगा ने बताया कि मामले की सुनवाई दौरान शुक्रवार को माननीय एडीशनल जैशन जज जगदीप सिंह मारोक की अदालत ने उपरोक्त तीनों आरोपियों गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी, अशोक कुमार और जसवंत सिंह उर्फ काला को धारा 302 /34 के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए उम्र कैद(Life Imprisonment) की सजा सुनाई व सभी को 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मृतक गुरदेव सिंह निवासी बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव के ही गुरुद्वारा साहिब के पास दुकान करता था। आरोपियों ने गुरदेव सिंह पर 13 जून 2016 को उसकी दुकान में घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थी। गंभीर रूप से घायल गुरदेव सिंह को उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, जहां 17 जून को उसकी मौत हो गई थी। इस संबंध में मृतक की पत्नी सरबजीत कौर ने थाना बाजाखाना पुलिस के पास अपने बयान दर्ज करवाए थे।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Feb 2022 21:31:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीड़ द्वारा हत्या निवारण कानून-अनावश्यक ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने विधान सभा में भीड़ द्वारा हत्या निवारण विधेयक पारित करवाकर भीड़ द्वारा हिंसा और हत्या को तीन वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा करने का प्रावधान किया है। इस विधेयक में किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने के लिए आजीवन सजा और किसी की मृत्यु हो जाने पर मृत्यु दंड का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/mob-lynching-prevention-law-unnecessary/article-10378"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/west-bengal-life-imprisonment-unnecessary-law-to-stop-mob-killing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल सरकार ने विधान सभा में भीड़ द्वारा हत्या निवारण विधेयक पारित करवाकर भीड़ द्वारा हिंसा और हत्या को तीन वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा करने का प्रावधान किया है। इस विधेयक में किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने के लिए आजीवन सजा और किसी की मृत्यु हो जाने पर मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है। विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि भीड़ द्वारा हत्या करने का षड़यंत्र करने तथा उसके लिए उकसाने को भी दंडनीय बनाया गया है। महिलाओं पर हमला सहित यौन उत्पीड़न के आधार पर भीड़ द्वारा हिंसा को भी भीड़ द्वारा हत्या के रूप में शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित की मृत्यु की दशा में अपराधी को मृत्यु दंड या सश्रम कारावास की सजा और पांच लाख रूपए तक का जुमार्ना किया जा सकता है। किसी भी प्रकार से आक्रामक सामग्री का प्रकाशन या संप्रेषण को भी अपराध बनाया गया है और इसके लिए एक वर्ष जेल की सजा और 50 हजार रूपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विधेयक में गवाहों के संरक्षण और पीड़ित को मुआवजा देने का प्रावधान भी किया गया है। सोशल मीडिया के कारण आजकल पशुओं और बच्चों की उठाईगिरी की अफवाहें तेजी से फैलाई जा रही हैं और इनके चलते हिंसक प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा एक सामाजिक बुराई है और इसे रोकने का कोई विरोध नहीं कर सकता है। किंतु इसमें कानून के प्रभावीपन के बारे में लोगों की राय अलग अलग हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में अपराध अभिलेख ब्यूरो भीड़ द्वारा हत्या की घटनाओं का आंकड़ा नहीं रखता क्योंकि इन्हें हत्या का मामला माना जाता है। इनकी संख्या बढ़ती जा रही है और इनमें दंड कम मिलता है। राजस्थान में गोरक्षकों द्वारा हत्या के मामले में सभी आरोपी बरी हो गए हैं। राजस्थान के बहरोड़ में पशु और दुग्ध विक्रेता पहलू खान की पिटाई के कारण मौत हो गयी थी और भीड़ द्वारा यह हमला इस शक के आधार पर किया गया था कि पशु मेले से जो वह गाएं ला रहा है वो काटने के लिए है। अलवर सेशन न्यायालय ने भीड़ द्वारा पहलू खान की हत्या के मामले में आरोपी छह व्यक्तियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इस मामले की दुबारा जांच करने के लिए विशेष जांच दल का गठन करने की घोषणा की है कि क्या इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है या मामले को कमजोर बनाया गया है या जांच में कोई खामी रही है और इस मामले को न्यायालय में साबित न करने के लिए अभियोजन की विफलता के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले वर्ष दिसंबर में मणिपुर विधन सभा में भीड़ द्वारा हिंसा में शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान करने के बारे में विधेयक पारित किया। अगस्त 2019 में राजस्थान विधान सभा में भी एक ऐसा ही विधेयक पारित किया गया जिसमें भीड़ द्वारा हिंसा को गैर-जमानती अपराध बनाया गया और इसके लिए आजीवन कारावास तथा पांच लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया। भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं के बढ़ने के कारण उच्चतम न्यायालय ने 2017 में केन्द्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वह इन पर रोक लगाने के लिए निवारात्मक, सुरक्षात्मक और दंडात्मक उपाय करे और इन अपराधों को भीड़ द्वारा भीषण अपराध कहा था। इनमें गैर-जिम्मेदारना और भड़काऊ संदेश, वीडियो भी शामिल थे। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिला न्यायालय में फास्ट टैÑक न्यायालय बनाने का भी निर्देश दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने भीड़ द्वारा हत्या को एक अलग अपराध घोषित किया और उसके लिए दंड का प्रावधान किया। किंतु उच्चतम न्यायालय के इन निदेर्शों को नजरंदाज किया गया। भीड़ द्वारा हत्या के मामले बढते जा रहे हैं। गोरक्षक अक्सर बिना सबूत के ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों और राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन को उच्तचम न्यायालय के इन निदेर्शों के प्राप्त होने और इस निर्णय को लागू करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक अधिकार संपन्न मंत्री समूह का गठन किया गया। भीड़ द्वारा हिंसा को किसी समूह द्वारा किसी व्यक्ति की सोच-समझकर न्यायेत्तर हत्या के रूप में परिभाषित किया गया है। यह कार्य सार्वजनिक रूप से किया जाता है और इसका उद्देश्य व्यक्ति को दंडित करना और ऐसा करने वाले समूह को धमकाना होता है। यह सामाजिक नियंत्रण का अनौपचारिक उपाय होता है। पीड़ित किसी विशेष समूह या विशेष विचारधारा का होता है। आज भी सभी समाजों में भीड़ द्वारा हिंसा जारी है हालांकि इसे एक बर्बर कृत्य माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भीड़ द्वारा हत्या का वाक्यांश का संबंध अमरीकी क्रांति से है। अमरीका में लिंच लॉ बिना सुनवाई के दंड देने के लिए प्रयोग किया जाता था। अमरीका में गृह युद्ध के दौरान और उसके बाद ऐसी घटनाएं आम बात हो गयी थी और इसके शिकार अफ्रीकन अमरीकी थे। 1918 में अमरीकी कांग्रेस में एलसी डायर ने भीड़ द्वारा हत्या निवारण विधेयक पेश किया और इसे प्रतिनिधि सभा ने 1922 में पारित किया किंतु सीनेट ने इसे पारित नहीं किया तथा 2018 तक यही स्थिति बनी रही जब सीनेट ने सर्वसम्मति से भीड़ द्वारा हत्या के पीड़ित लोगों के लिए न्याय अधिनियम पारित किया जिसे अभी प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित किया जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में मार्क ट्वेन का उल्लेख करना आवश्यक है जिन्होने अमरीका को यूनाइटेड स्टेट्स आॅफ लिंचरडम में बदलने की आशंका व्यक्त की थी। इस शीर्षक से प्रकाशित उनके लेख में 1901 में मिशौरी में बडेÞ पैमाने पर भीड़ द्वारा हत्या की घटनाओं का उल्लेख है। लैटिन अमरीकी देश विशेषकर ब्राजील भीड़ द्वारा हत्या के मामलों के लिए कुख्यात है जहां इसे लोकप्रिय न्याय कहा जाता है किंतु इसके कोई विश्वसनीय आंकडे उपलब्ध नहीं हैं। उन देशों में भीड़ द्वारा हत्या आम बात है जहां पर अपराध अधिक होते हैं। नाइजीरिया में भीड़ द्वारा हत्या को जंगल न्याय कहा जाता है तो दक्षिण अफ्रीका में यह नक्सलवाद का हिस्सा रहा है। रंगभेद के दिनों में दक्षिण अफ्रीका में ऐसी घटनाएं आम बात थी। कुछ लोगों का यह भी मत है कि भीड़ द्वारा बड़े पैमाने पर हत्याओं का मुख्य कारण प्राधिकारियों द्वारा न्याय दिलाने में विफल रहना है जिसके चलते लोगों का पुलिस से विश्वास खत्म हो गया है। कुछ स्थानों पर आज भी छोटे-मोटे अपराधों के लिए स्थानीय न्याय प्रणली प्रचलित है।</p>
<p style="text-align:justify;">जघन्य तरीके से किए गए हत्या का यह अपराध कुछ समूहों के प्रति दुर्भावना विभिन्न पंथों के बीच दुश्मनी और धार्मिक असहिष्णुता से जुडा हुआ है। यह मूलत: कानून और व्यवस्था की समस्या है। इसलिए इसके लिए दांडिक प्रावधान उपलब्ध होने चाहिए। इस नए कानून के प्रभावीपन के बारे में संदेह है क्योंकि जो लोग कानून का उल्लंघन करते हैं और सीधा न्याय करने में विश्वास करते हैं वे इसका उल्लंघन करने से नहीं हिचकेंगे। यह कानून एक तरह से अनावश्यक है और इसके आश्चर्यजनक परिणामों की आशा नहीं की जा सकती है। विशेषकर तब जब लोगों का कानून और न्याय तथा सौहार्दपूर्ण सामाजिक संबंधों से विश्वास उठता जा रहा हो।<br />
<strong><em>-डॉ. एस सरस्वती</em></strong></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Sep 2019 20:15:34 +0530</pubDate>
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                <title>मिर्जापुर में वृद्ध के हत्यारे चाचा-भतीजे को आजीवन कारावास</title>
                                    <description><![CDATA[मिर्जापुर (एजेंसी) उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर (Mirzapur) की एक अदालत ने वृद्ध की हत्या के मामले में बुधवार को चाचा और भतीजे को अाजीवन कारावास के साथ ही सत्रह-सत्रह हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनायी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार लालगंज क्षेत्र के पियुरी गांव निवासी और वादी रामजी गौड़ ने तीस अप्रैल 2008 को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/life-imprisonment-murderer-uncle-nephew-mirzapur/article-5242"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/court-hummer.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मिर्जापुर (एजेंसी)</strong> उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर <strong>(Mirzapur)</strong> की एक अदालत ने वृद्ध की हत्या के मामले में बुधवार को चाचा और भतीजे को अाजीवन कारावास के साथ ही सत्रह-सत्रह हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनायी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार लालगंज क्षेत्र के पियुरी गांव निवासी और वादी रामजी गौड़ ने तीस अप्रैल 2008 को पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसके चाचा त्रिवोणी गौड़ को कोई संतान नहीं थी।</p>
<p>उसने आरोप लगाया कि उनकी जमीन हड़पने की नियत से पूर्व प्रधान रामजग मौर्य उन्हें अपने पास रखते थे। पूर्व प्रधान रामजग उसके भाई श्यामजग और रामजग के पुत्र संतलाल ने 29 अप्रैल 2008 को उसके चाचा की हत्या करके शव तालाब के किनारे फेंक दिया था।</p>
<p>इस सम्बंध में पुलिस ने मामला दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाखिल किया था। जिला न्यायाधीश नवीन श्रीवास्तव ने सुनवाई के दौरान त्रिवेणी गौड़ की हत्या का दोषी पाते हुए श्यामजग और उसके भतीजे संतलाल को आजीवन कारावास और सत्रह-सत्रह हजार रूपए के जुर्माने की सजा सुनायी जबकि रामजग मौर्य को आरोप मुक्त कर दिया।</p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Aug 2018 15:18:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हत्या के मामले में पति को उम्र कैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[कुरुक्षेत्र (सच कहूँ न्यूज)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश मधु खन्ना लाली की अदालत ने अपनी पत्नी का कत्ल कर उसकी लाश को घर में बन्द करके फरार होने वाले पति को उम्र कैद व 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। जिला उप न्यायवादी गोपाल कुमार ने बताया कि 7 दिसंबर 2015 को थाना सदर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ न्यूज)। </strong>अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश मधु खन्ना लाली की अदालत ने अपनी पत्नी का कत्ल कर उसकी लाश को घर में बन्द करके फरार होने वाले पति को उम्र कैद व 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। जिला उप न्यायवादी गोपाल कुमार ने बताया कि 7 दिसंबर 2015 को थाना सदर थानेसर मे दी गई अपनी शिकायत मे मिथुन मोहलदार निवासी मुछयाबारोई जिला मालदा पश्चिम बंगाल ने बताया कि करीब 12 साल पहले उसकी बहन की शादी राजेश निवासी ग्राम पंडित का पूर्वा जिला अमेठी यूपी के साथ हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले उसकी बहन कल्पना की शादी तुलसी के साथ हुई थी लेकिन तुलसी की मौत हो गई थी जिस कारण तीन बच्चों को लेकर कल्पना राजेश के साथ शादी करके रहने लग गई थी। राजेश और उसकी बहन पीछले करीब दो साल से खेडी मारकंडा में किराए पर रहकर दिहाड़ी कर रहे थे। राजेश उसकी बहन के साथ मारपीट करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">1 दिसंबर 2015 को उसकी बहन और राजेश का फोन बंद आ रहा था तो उसने उसकी भांजी को फोन मिलाया तो राजेश ने बताया कि उसकी बहन कल्पना की मौत हो चुकी है तथा उसका दाह संस्कार कुरुक्षेत्र में कर दिया है। इस बात की तसल्ली के लिये जब वह कुरुक्षेत्र आया तो उसे पता चला कि उसकी बहन की लाश तो उसके किराये के मकान से मिली थी।अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुऐ धारा 302 के तहत उम्र कैद व 25 हजार रुपये की सजा सुनाई है तथा जूमार्ना अदा ना करने पर 2 साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Mar 2018 07:28:34 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुग्राम : पत्नी व बेटी के हत्यारे को उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)। पत्नी व मासूम पुत्री की हत्या करने के आरोपी पति को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरनाम सिंह ठाकुर की अदालत ने शनिवार को उम्रकैद व आर्थिक जुमार्ने की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 की 9 मई को मानेसर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि आईएमटी सैक्टर 7 के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)।</strong> पत्नी व मासूम पुत्री की हत्या करने के आरोपी पति को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरनाम सिंह ठाकुर की अदालत ने शनिवार को उम्रकैद व आर्थिक जुमार्ने की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 की 9 मई को मानेसर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि आईएमटी सैक्टर 7 के एक खाली पड़े प्लाट में महिला का शव पड़ा हआ है, जिसे कुत्ते नौंच रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी और शव को कब्जे में ले लिया था और लोगों के बयान भी दर्ज किए थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शव को हत्या करने के बाद गाड़ा</h2>
<p style="text-align:justify;">खाली पड़े प्लाट के पास ही भिवानी का आशाराम खोखा लगाता था और निकट ही अपनी पत्नी उपदेश उर्फ सुमन व 12 वषीर्या पुत्री ज्योति के साथ रहता था। उपदेश के घर से गायब होने पर जब ज्योति ने अपने पिता से अपनी मां के बारे में जानकारी चाही तो आशाराम ने ज्योति का गला दबाकर उसकी हत्या कर शव को खाली प्लाट में उसी स्थान पर गाड़ दिया था, जहां उसकी माता का शव हत्या करने के गाड़ा गया था। आशाराम के गायब होने पर पुलिस को उस पर ही दोनों हत्याओं का शक हो गया था। मृतका के शव की पहचान नहीं हो पाई थी। सतेंद्र पाण्डेय की शिकायत पर 24 मई को भिवानी के आशाराम के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को भिवानी से गिरफ्तार कर लिया था और उसने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 09:17:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बालक की हत्या मामला: चार को उम्र कैद</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित अजमेर । अजमेर के दरगाह थाना क्षेत्र में गत 13 साल पहले एक मासूम बच्चे की हत्या करने के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने बुधवार को फैसले में आरोपी पूर्व पार्षद एहसान सुल्तानी, उनके भाई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अजमेर ।</strong> अजमेर के दरगाह थाना क्षेत्र में गत 13 साल पहले एक मासूम बच्चे की हत्या करने के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने बुधवार को फैसले में आरोपी पूर्व पार्षद एहसान सुल्तानी, उनके भाई तथा दो अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं संदेह का लाभ देते हुए दो अन्य को बरी कर दिया गया। इस फैसले को सुनने के लिए अदालत परिसर में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त किए तथा दरगाह क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। मामले के तथ्यों के अनुसार गत 28 अक्तूबर 2004 को एक बारह वर्षीय मासूम जाकिर को घेरकर आरोपियों ने उसकी अंगुलियां काट दी और बुरी तरह से उसे लहुलुहान कर दिया। बाद में उसकी हस्पताल में मृत्यु हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/life-imprisonment-in-child-murder-case/article-1716</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2017 08:32:29 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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