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                <title>resignation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>resignation RSS Feed</description>
                
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                <title>पंजाब के कैबिनेट मंत्री फौजा सिंह सरारी का इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब से बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आप नेता फौजा सिंह सरारी ने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया है। पंजाब के सीएम भगवंत मान को उन्होंने इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने इस्तीफके पीछे निजि कारण बताए है। गौरतलब हैं कि पंजाब में आप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/resignation-of-punjab-cabinet-minister-fauja-singh-sarari/article-42045"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/fauja-singh-sarari.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब से बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आप नेता फौजा सिंह सरारी ने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया है। पंजाब के सीएम भगवंत मान को उन्होंने इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने इस्तीफके पीछे निजि कारण बताए है। गौरतलब हैं कि पंजाब में आप पार्टी की 10 महीने की सरकार में दूसरे कैबिनेट मंत्री की छुट्टी हुई है। दरअसल सरारी पर 3 महीने पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। विपक्ष उनकी इस्तीफे की मांग कर रहा था।</p>
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                <pubDate>Sat, 07 Jan 2023 14:06:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>हरसिमरत का इस्तीफा मंजूर, तोमर को मिला प्रभार</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शिराेमणि अकाली दल (बादल) की नेता हरसिमरत कौर बादल का केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। कोविंद ने संविधान के अनुच्छेद 75 की उपधारा दो के तहत  बादल के केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री पद के इस्तीफे को मंजूर कर लिया। इससे पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/harsimrat-kaur-badal-resignation-accepted-tomar-gets-charge/article-18536"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/harsimrat-kaur-badal-resignation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शिराेमणि अकाली दल (बादल) की नेता हरसिमरत कौर बादल का केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। कोविंद ने संविधान के अनुच्छेद 75 की उपधारा दो के तहत  बादल के केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री पद के इस्तीफे को मंजूर कर लिया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने की सिफारिश की थी। प्रधानमंत्री की सलाह पर कोविंद ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का भी प्रभार सौंपा है। वह कृषि मंत्रालय के साथ अब केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का भी काम काज देखेंगे।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 18 Sep 2020 11:24:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प ने आबे के इस्तीफे पर दुख जताया</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मद्देनजर अपना पद छोड़ने पर दुख जताया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, “मैं जापान के प्रधानमंत्री और मेरे मित्र शिंजो आबे को अपना सर्वोच्च सम्मान देना चाहता हूं। हमारी घनिष्ठ मित्रता है और उन्होंने जिन परिस्थितियों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trump-expressed-grief-over-abes-resignation/article-17924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/us-house-of-representatives-passed-impeachment-against-trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मद्देनजर अपना पद छोड़ने पर दुख जताया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, “मैं जापान के प्रधानमंत्री और मेरे मित्र शिंजो आबे को अपना सर्वोच्च सम्मान देना चाहता हूं। हमारी घनिष्ठ मित्रता है और उन्होंने जिन परिस्थितियों में इस्तीफा दिया उससे मैं व्यथित हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">वह अपने देश से बहुत प्यार करते हैं और उन्होंने जिस परिस्थिति में अपना इस्तीफा सौंपा है उसकी मैं अभी कल्पना नहीं कर पा रहा। वह एक महान इंसान हैं और मैं उन्हें अपना सबसे अधिक सम्मान देता हूं।” आबे लंबे समय से आंत से जुड़ी बीमारी से परेशान हैं और इसके मद्देनजर उन्होंने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह दूसरी बार है जब पैंसठ वर्षीय आबे ने स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दिया है। इससे पहले वर्ष 2007 में भी उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। वर्ष 2012 के चुनाव में आबे भारी बहुमत के साथ पुन: सत्ता में लौटे थे।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2020 12:08:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में बड़ी संख्या में नर्सों का इस्तीफा, गृहराज्य का किया रुख</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) से लड़ाई के बीच पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में नर्सों के काम छोड़कर अपने गृहराज्य लौट जाने से यह राज्य अब एक बड़े संकट में घिरता नजर आ रहा है। यहां प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में विभिन्न अस्पतालों में सेवारत मणिपुर की कुल 185 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/resignation-of-large-number-of-nurses-in-bengal/article-15363"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/doctor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) से लड़ाई के बीच पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में नर्सों के काम छोड़कर अपने गृहराज्य लौट जाने से यह राज्य अब एक बड़े संकट में घिरता नजर आ रहा है। यहां प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में विभिन्न अस्पतालों में सेवारत मणिपुर की कुल 185 नर्सों ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है और अपने गृहराज्य लौट भी गयी हैं। रिपोर्टों से यह भी पता चल रहा है कि अन्य पूर्वोत्तर राज्यों और ओडिशा में भी काफी संख्या में नर्सें नौकरी छोड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल इतनी तादाद में नर्सों के इस्तीफे के वास्तविक कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। इस बीच कुछ वर्गों से नर्सों के इस्तीफों के मामले में केंद्र से हस्तक्षेप करने की मांग किये जाने की खबरें भी आ रही हैं। पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस से अब तक 2461 लोगों के संक्रमित होने के मामले सामने आए हैं और 225 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है जबकि 829 लोग भी ठीक हुए है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2020 12:40:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आलोक वर्मा के इस्तीफे के बाद सरकार पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[आखिरकार सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को नौकरी से ही इस्तीफा देना पड़ा। सीबीआई विवाद में (Question On Government After Alok Verma’s Resignation) उनकी इतनी फजीहत हो गई, जिसका अंदाजा किसी को नहीं था। खुद उन्हें भी नहीं होगा। शायद देश में एसा पहली बार हुआ कि किसी सीबीआई चीफ को इस तरह अपने पद से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">आखिरकार सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को नौकरी से ही इस्तीफा देना पड़ा। सीबीआई विवाद में (Question On Government After Alok Verma’s Resignation) उनकी इतनी फजीहत हो गई, जिसका अंदाजा किसी को नहीं था। खुद उन्हें भी नहीं होगा। शायद देश में एसा पहली बार हुआ कि किसी सीबीआई चीफ को इस तरह अपने पद से हाथ धोना पड़ा हो। इसे लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त सलेक्शन कमेटी के सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को हटाने के फैसले को लेकर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि सरकार राफेल विमान सौदे की जांच से डरी हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए, सरकार ने आलोक वर्मा को बीस दिन भी सीबीआई प्रमुख के पद पर नहीं रहने दिया। अब सवाल उठ (Question On Government After Alok Verma’s Resignation) रहा है कि क्या सरकार सीबीआई चीफ आलोक वर्मा से डर गई थी? यदि इसका जवाब हां में मिलता है तो बेशक देश की लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए यह ठीक नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा था कि आखिर सरकार को किस बात की घबराहट है। आखिर सरकार क्यों आलोक वर्मा को हटाकर अपने पसंद के अधिकारी को सीबीआई की जिम्मेदारी देने की जल्दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल्दबाजी कर सरकार कुछ चीजों पर परदा डालना चाहती है। खुद को पाक-साफ बताने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा भी अब संदेह के घेरे में है। आलोक वर्मा को हटाए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्रीय सर्तकता आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में सीवीसी की विश्वसनीयता कम हुई है। आलोक वर्मा पर सीवीसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट पर दस बिंदु बताए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें से छह पूरी तरह गलत पाए गए हैं। बाकी चार बिंदुओं पर भी कोई सीधा साक्ष्य नहीं है। सलेक्शन कमेटी से न्याय की उम्मीद की जाती है, पर कमेटी न्याय करने में नाकाम रही है। आनंद शर्मा ने कहा कि कमेटी ने आलोक वर्मा पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष नहीं सुना। साथ उन्होंने कहा कि वर्मा के बारे में सीवीसी की रिपोर्ट में दम होता, तो अदालत उस पर कार्रवाई करती। इससे साफ है कि सरकार ने जल्दबाजी में फैसला किया है। समझा जा रहा है कि इसे लेकर देश में सियासत भी तेज होगी। एक रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक का वक्तव्य भी सरकार को कठघरे में खड़ा करता है। यानी कांग्रेस के जो आरोप हैं वह पुष्ट हो रहे हैं। पटनायक ने 11 जनवरी, 2019 को कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था। सीवीसी ने जो कहा वो अंतिम शब्द नहीं हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">पटनायक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं और उन्हें एपेक्स कोर्ट ने सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (सीवीसी) की निगरानी रखने के लिए कहा था, जिसमें सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद से हटा दिया गया। बता दें कि भ्रष्टाचार के आरोपों और गुरुवार को ड्यूटी खत्म करने के आरोप में सीबीआई निदेशक के पद से वर्मा को हटाने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली चयन समिति के बहुत-बहुत जल्दबाजी में लिए निर्णय के वो कड़े आलोचक थे। आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल करने के दो दिन पर सीवीसी ने उनके पद से हटा दिया। सीवीसी के तीन सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जस्टिस एके सीकरी, आलोक वर्मा के पद पर निरंतर बने रहने के खिलाफ थे। वहीं लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अन्य दो सदस्यों के फैसले के पक्ष में नहीं गए और सीवीसी रिपोर्ट पर अपनी असहमति दर्ज कराई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस पटनायक ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर आलोक वर्मा के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। पूरी जांच सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की शिकायत पर की गई थी। मैंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी निष्कर्ष मेरा नहीं है। जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को दो पेज की रिपोर्ट में जस्टिस पटनायक ने कहा कि सीवीसी ने मुझे 9 नवंबर, 2018 को राकेश अस्थाना द्वारा कथित रूप से हस्ताक्षरित एक बयान भेजा। मैं स्पष्ट कर सकता हूं कि राकेश अस्थाना द्वारा साइन किया गया यह बयान मेरी उपस्थिति में नहीं बनाया गया था। जस्टिस पटनायक ने कहा कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई पॉवर कमेटी को फैसला करना चाहिेए। मगर फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया गया। हम यहां एक संस्था के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें अपना दिमाग लगाना चाहिए था। खासतौर पर सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर। क्योंकि सीवीसी जो कहता है वह अंतिम शब्द नहीं हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि चयन समिति ने सीवीसी रिपोर्ट और वर्मा के खिलाफ सीवीसी गई टिप्पणियों की अत्यंत गंभीर प्रकृति का मानते हुए उन्हें निदेशक पद से हटाने का हवाला दिया। हालांकि आलोक वर्मा का नाम पहले से भी विवादों में रहा है, लेकिन मौजूदा मामला पुराने विवादों से अलग है। आलोक वर्मा को डीजी तिहाड़ बनने के पहले बहुत कम ही लोग जानते थे। उनका किसी विवाद में कोई नाम नहीं आया था। लेकिन 5 अगस्त 2014 को जब वे डीजी तिहाड़ बने तो विवादों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। यहां पुलिस मुख्यालय में बैठे कुछ आईपीएस उनके लिए एक स्क्रिप्ट लिख रहे थे। दरअसल उस दौर में तिहाड़ जेल में कुछ ऐसा चल रहा था जो उन्हें बार-बार एक डीजी के तौर पर सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा था। जानकार बताते हैं कि वर्ष 2016 में तिहाड़ जेल में लॉ आॅफीसर रहे सुनील गुप्ता ने जेल से जुड़े एक मामले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। शायद वह मामला कुछ कैदियों के एशिया की सबसे सुरक्षित जेल से भागने का था। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में 1979 बैच के यूटी कैडर के आईपीएस अफसर आलोक वर्मा भी आए जो उस समय डीजी तिहाड़ जेल थे। बताया गया कि पीसी वही करेंगे। वर्मा हॉट सीट पर बैठे। कैमरे तैयार थे और वर्मा बोलने ही वाले थे कि अचानक उन्होंने पीसी करने से मना कर दिया। उन्होंने अपने साथ बैठे एक आईजी रैंक के अधिकारी को प्रेसवार्ता करने की जिम्मेदारी सौंप दी। खैर प्रेसवार्ता हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद जब अधिकारियों से पूछा गया कि वर्मा को अचानक क्या हुआ तो उन्होंने बताया कि वे कैमरा फ्रेंडली नहीं हैं। उनको पहली बार किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस तरह देखा गया। वह आलोक वर्मा की आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी जो उनके बिना बोले ही खत्म हो गई। उसके बाद वे 11 महीने तक दिल्ली पुलिस कमिश्नर रहे, लेकिन कभी उन्हें मीडिया कर्मियों से मिलते या प्रेस कॉन्फ्रेंस करते नहीं देखा गया। तब पता चला कि वे कैमरा फ्रेंडली न होने के साथ-साथ मीडिया फ्रेंडली और यहां तक कि सबके लिए फ्रेंडली भी नहीं हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि आलोक वर्मा गलत नहीं हैं। उनकी बातों को मीडिया में भी ठीक से नहीं उठाया गया। मीडिया वालों ने ज्यादातर मामले में सरकार का ही पक्ष रखा यानी वर्मा के खिलाफ। जबकि कहा जा रहा है वर्मा सरकार से संबंधित कुछ जांचों को करने वाले थे, इसलिए उन पर गाज गिराने की रणनीति बनाई गई। यदि वर्मा दोषी होते सुप्रीम कोर्ट ही उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे देता। लेकिन यह नहीं हुआ। बहरहाल, आलोक वर्मा की छुट्टी से बहुत सारे सवाल खड़े हो रहे हैं। देखना है कि इन सवालों का जवाब कब मिलता है। <strong>राजीव रंजन तिवारी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Jan 2019 19:38:31 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>टिकट नहीं मिलने पर धनखड़ का इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान में आगामी सात दिसम्बर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद टिकट नहीं मिलने के कारण पार्टी नेता कुलदीप धनकड़ (Kuldeep Dhankhar) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया हैं। धनकड़ ने टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/kuldeep-dhankhar-resignation-for-not-getting-ticket/article-6567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/dhankhar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर (एजेंसी)।</strong> राजस्थान में आगामी सात दिसम्बर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद टिकट नहीं मिलने के कारण पार्टी नेता कुलदीप धनकड़<strong> (Kuldeep Dhankhar)</strong> ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया हैं। धनकड़ ने टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने कहा कि अब वह बागी होकर विराटनगर से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने उनके बजाय श्री फूलचंद भिंडा को प्रत्याशी बनाकर विराट नगर की जनता का अपमान किया है। उल्लेखनीय है कि विराटनगर से मौजूदा विधायक श्री भिंडा को पार्टी ने फिर अपना उम्मीदवार बनाया हैं। धनकड़ पिछले बीस वर्षों से भी अधिक समय से भाजपा में सक्रिय थे।</p>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Nov 2018 17:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जेटली से मुलाकात के माल्या के बयान पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली, एजेंसी। [Edited by: Vijay Sharma] आर्थिक अपराधी विजय माल्या के देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने संबंधी बयान के बाद देश में सियासी हंगामा खड़ा हो गया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद माल्या की ओर से सफाई दी जा रही है तो विपक्ष वित्त मंत्री से इस्तीफा मांग रही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mallyas-statement-overheard-congress-demands-resignation/article-5912"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/vijay-malya.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, एजेंसी। [Edited by: Vijay Sharma] </strong>आर्थिक अपराधी विजय माल्या के देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने संबंधी बयान के बाद देश में सियासी हंगामा खड़ा हो गया है<strong>। </strong>मामले के तूल पकड़ने के बाद माल्या की ओर से सफाई दी जा रही है तो विपक्ष वित्त मंत्री से इस्तीफा मांग रही है<strong>। </strong>यह दिलचस्प है कि कांग्रेस और बीजेपी पहले ही एक-दूसरे पर भगोड़े आर्थिक अपराधियों की मदद का आरोप लगाते आए हैं<strong>।</strong> माल्या ने बुधवार को कोर्ट में सुनवाई के बाद बाहर यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि वो देश छोड़ने से पहले मामला सुलझाने के लिए वह वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे, लेकिन बैंकों की आपत्ति के वजह से मामला सुलझ नहीं सका<strong>।</strong></p>
<h2>जेटली ने सफाई देते हुए कहा, ‘माल्या का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है</h2>
<p>विजय माल्या के बयान के बाद फंसे जेटली को इस पर सफाई देनी पड़ गई<strong>।</strong>उन्होंने कहा कि संसद के गलियारे में माल्या उनके साथ हो लिए थे, उनसे कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हुई थी<strong>।</strong>जेटली ने फेसबुक पर इस संबंध में सफाई देते हुए कहा, ‘माल्या का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है<strong>।</strong> मैंने 2014 से अब तक उन्हें मिलने का टाइम नहीं दिया<strong>।</strong>वह राज्यसभा सदस्य थे और कभी-कभी सदन में आया करते थे<strong>।</strong>मैं सदन से निकलकर अपने कमरे में जा रहा था, इसी दौरान वह साथ हो लिए<strong>।</strong>उन्होंने समझौते की पेशकश की थी, जिस पर मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि मेरे साथ बात करने का कोई फायदा नहीं, यह प्रस्ताव बैंकों के साथ करें<strong>। </strong></p>
<h2>बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का एक तीन महीने पुराना ट्वीट भी चर्चा में</h2>
<ul>
<li>माल्या के जेटली से मिलने संबंधी बयान के बाद बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का एक तीन महीने पुराना ट्वीट भी चर्चा में आ गया<strong>।</strong></li>
<li>इस ट्वीट को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई लोगों ने रिट्वीट किया है जिसे 12 जून को शेयर किया गया था<strong>।</strong></li>
<li>इस ट्वीट में स्वामी ने लिखा, ‘माल्या देश नहीं छोड़ सकता क्योंकि हवाई अड्डों पर उसके खिलाफ कड़ा लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था</li>
<li>इसके बाद वो दिल्ली आया और उसने किसी प्रभावी शख्स से मुलाकात की</li>
<li>जो विदेश जाने से रोकने वाले उस नोटिस को बदल सकता था. वो शख्स कौन ने जिसने नोटिस को कमजोर किया ?’</li>
</ul>
<h3>विपक्ष ने साधा निशाना: अभिषेक मनु ने कहा कि देश जानना चाहता है कि जेटली और माल्या की उस बैठक में क्या हुआ</h3>
<p>विजय माल्या के बयान के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को आड़े हाथ लिया और जमकर निशाना साधा<strong>।</strong>कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि माल्या को देश छोड़ने की अनुमति कैसे मिल गई<strong>।</strong>देश जानना चाहता है कि जेटली और माल्या की उस बैठक में क्या हुआ था कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर वित्त मंत्री जेटली पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मसले पर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की<strong>।</strong> साथ ही यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक के लिए वित्त मंत्री जेटली को अपना पद छोड़ देना चाहिए<strong>।</strong></p>
<h2>कैसे भागे थे माल्या?</h2>
<p>माल्या मार्च 2016 में देश छोड़कर चले गए थे<strong>।</strong> राज्यसभा के रिकॉर्ड के मुताबिक विजय माल्या 1 मार्च 2016 को राज्यसभा में उपस्थित थे और उसके अगले दिन ही 2 मार्च को वह देश से बाहर निकल भागने में कामयाब हो गए थे<strong>।</strong>वह जेट एयरवेज की फ्लाइट से दिल्ली से लंदन गए थे<strong>। </strong>माल्या ने दो मार्च को लगभग पौने बारह बजे एयरलाइन को फोन कर अपनी यात्रा की सूचना दी थी, जिसके बाद दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर वह जेट एयरवेज की फ्लाइट 9W122 से लंदन रवाना हो गए थे<strong>।</strong> उन्होंने बोइंग 777-300 के फर्स्ट क्लास में ट्रैवल किया, उनके साथ 7 से 11 बैग थे. उनके साथ एक महिला भी थी<strong>।</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Sep 2018 10:28:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हामिद अंसारी से यह उम्मीद नहीं थी</title>
                                    <description><![CDATA[उपराष्ट्रपति के बतौर संवैधानिक पद पर बैठे हामिद अंसारी के एक बयान ने एक संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। सामान्य तौर पर यह माना जाता है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सीमाएं तय होती हैं। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए देश के सभी नागरिक समान होते हैं। उसकी हर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/this-was-not-expected-from-hamid-ansari/article-3288"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/hamid-ansari.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उपराष्ट्रपति के बतौर संवैधानिक पद पर बैठे हामिद अंसारी के एक बयान ने एक संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। सामान्य तौर पर यह माना जाता है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सीमाएं तय होती हैं। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए देश के सभी नागरिक समान होते हैं। उसकी हर एक बात समाज को जोड़ने वाली होनी चाहिए, न कि समाज को विखंडित करने वाली।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में हामिद अंसारी का यह कहना कि देश के मुसलमानों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है, कितना तर्कसंगत माना जा सकता है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश का माहौल बदल गया है। अंसारी ने मुस्लिमों का हमदर्द बनकर यह साबित कर दिया है कि वे संकीर्ण भावनाओं से उबर नहीं सके हैं, भले ही संवैधानिक पद पर लंबे समय तक बैठे रहे हों या फिर इसी देश ने उन्हें ताउम्र इज्जत से जीने का पूरा मौका दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हामिद अंसारी को मुसलमानों की इतनी ही चिंता है, तो उन्हें उसी समय उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था, जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे। आखिर हामिद अंसारी को गुजरात के मुसलमानों की पीड़ा भी तो याद आई होगी या नहीं। या फिर उस समय तक उनके सब्र का बांध टूट नहीं पाया था? मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि हामिद अंसारी का दिल टूटकर बिखर गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बहस का दौर शुरू होता है, तो न कोई जीतता है और न ही कोई हारता है। खासतौर से यहां बात सामुदायिक हितों पर बहस की हो रही है। ऐसी बहसों से विद्वेष की भावना बढ़ती है और समाज में दो समुदायों के बीच घृणा का दौर नए सिरे से शुरू हो जाता है। तो क्या संवैधानिक पद पर बैठे हुए अंसारी को यह अहसास नहीं है कि उनके बयान से समाज में क्या हलचल पैदा होगी और उसके कितने प्रतिकूल परिणाम होंगे?</p>
<p style="text-align:justify;">बात जब मुस्लिम सुरक्षा की होती है तो भाजपा में पदोें पर आसीन मुसलमान चाहे नजमा हेपतुल्ला हों, मुख्तार अब्बास नकवी हों या फिर शाहनवाज हुसैन सहित सैकड़ों अन्य नेता हों, यही कहते नजर आते हैं कि यदि पूरी दुनिया में मुसलमान सबसे ज्यादा सुरक्षा के भाव में जीता है तो वह हिन्दुस्तान में। चाहे पड़ोसी देश पाकिस्तान पर नजर डाली जाए या फिर ईरान, इराक, अफगानिस्तान, सीरिया, लेबनान और सैकड़ों अन्य मुस्लिम बाहुल्य देशों पर, चारों तरफ हाहाकार मचा है। मुसलमान, मुसलमानों का ही खून बहा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं निर्दोष नागरिकों की बलि चढ़ाई जा रही है तो कहीं अल्लाह की इबादत करते मुसलमानों पर गोलियां बरसाई जा रही है। क्या हामिद अंसारी को मुस्लिम बाहुल्य उन देशों में मुसलमान महफूज नजर आ रहे हैं? या फिर हामिद अंसारी रिटायर होने से पहले एक बार फिर जमात में बैठने की खातिर इस तरह का बयान सुनियोजित तरीके से देने को मजबूर हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ भी हो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती। यदि वे कहते हैं कि सरकार और मुसलमानों के बीच भरोसे में कमी आई है तो इसका सीधा सा मतलब है कि भाजपा और मुसलमानों के बीच भरोसा कम हुआ है। यह कितनी हास्यास्पद बात है। जिन मुसलमानों का भाजपा पर भरोसा था, वे गिने-चुने मुट्ठी भर मुसलमान पहले भी भजपा सरकारों पर भरोसा करते आए हैं और अब भी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुसंख्यक मुसलमानों ने न कभी पहले भरोसा किया और न अब कर रहे हैं। यदि हामिद अंसारी तथ्यों के साथ यह आरोप लगाते कि केंद्र की भाजपा सरकारों ने मुसलमानों के साथ भेदभाव किया है, तब उनकी इज्जत मुसलमानों के साथ आम आदमी की नजर में भी बढ़ती, लेकिन तथ्यविहीन ऐसे बयान ने कहीं न कहीं हामिद के कद को कमतर ही किया है और संवैधानिक पद पर रहते हुए ऐसे बयान ने उनकी शख्सियत का मजाक ही बनाया है। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विदाई भाषण में उन्हें उनकी छटपटाहट याद दिला दी तो क्या गलत किया?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-गणेश शंकर भगवती</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2017 00:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेताओं के इस्तीफों को लेकर अखिलेश बोले- MLC तोड़ना राजनीतिक भ्रष्टाचार</title>
                                    <description><![CDATA[शाह तीन दिन के दौरे पर यूपी पहुंचे लखनऊ। यूपी विधान परिषद के 3 मेंबर्स ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। इनमें समाजवादी पार्टी (एसपी) के एमएलसी बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह और बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) के ठाकुर जयवीर सिंह शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कई नेताओं के इस्तीफों के बीच पूर्व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/akhilesh-comment-about-resignation/article-2693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">शाह तीन दिन के दौरे पर यूपी पहुंचे</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> यूपी विधान परिषद के 3 मेंबर्स ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। इनमें समाजवादी पार्टी (एसपी) के एमएलसी बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह और बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) के ठाकुर जयवीर सिंह शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कई नेताओं के इस्तीफों के बीच पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश ने बीजेपी पर कई आरोप लगाए। अखिलेश ने कहा कि विधायकों, पार्षदों को खरीदने की कोशिशें हो रही हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि ये एक तरह का पॉलिटिकल करप्शन है। अखिलेश ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वो हमारे MLC को तोड़ रहे हैं। लालच दे रहे हैं।</p>
<ul>
<li>बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह तीन दिन के दौरे पर लखनऊ पहुंचे हैं।</li>
<li>इस दौरान वह यूपी में पार्टी की एक्टिविटीज, बाई इलेक्शन और संगठन के विस्तार को लेकर पदाधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे।</li>
<li>योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव मौर्य और दिनेश शर्मा के विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीटों का सिलेक्शन करेंगे।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">माया की मदद को तैयार अखिलेश</h3>
<p style="text-align:justify;">मायावती पर अखिलेश ने कहा कि अगर मायावती चुनाव लड़ती हैं तो मैं केवल इतना कहूंगा की समाजवादियों के सबसे अच्छे संबंध हैं। परिस्थिति के अनुसार राजनीति में किसकी कब मदद करनी पड़े या चाहिए उसके लिए तैयार रहना चाहिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2017 04:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा ने किया मायावती का इस्तीफा मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[नाराज मायावती ने मंगलवार शाम को राज्यसभा मेंबरशिप से दिया था इस्तीफा नई दिल्ली: राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो Mayawati का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। सदन में अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलने से नाराज मायावती ने मंगलवार शाम को राज्यसभा मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया था। सदन की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">नाराज मायावती ने मंगलवार शाम को राज्यसभा मेंबरशिप से दिया था इस्तीफा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो Mayawati का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। सदन में अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलने से नाराज मायावती ने मंगलवार शाम को राज्यसभा मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया था। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मायावती ने नोटिस देकर अपनी बात रखने की इजाजत मांगी थी। उपसभापति पीजे कुरियन ने उन्हें 3 मिनट का वक्त दिया। मायावती जब दलितों पर हमलों और सहारनपुर हिंसा पर बोलने लगीं तो बीजेपी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। शोर-शराबे और कुरियन के बार-बार रोकने पर भी वो 7 मिनट तक बोलती रहीं। जिसके बाद मायावती की उपसभापति से बहस भी हुई। सदन में ही इस्तीफे की धमकी देकर मायावती बाहर चली गईं। शाम को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी (राज्यसभा के सभापति) से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया था।</p>
<h2>Mayawati की कुरियन से हुई थी बहस</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">शून्यकाल नहीं है कि केवल तीन मिनट दिए जाएं। अपनी बात कहने के लिए ज्यादा समय दिया जाना चाहिए था।</li>
<li style="text-align:justify;">कुरियन ने कहा कि मायावती को बोलते हुए सात मिनट हो गए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">मायावती ने कहा कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है तो सदन में रहने का कोई मतलब नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">कुरियन ने चर्चा के लिए विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का नाम पुकारा।</li>
<li style="text-align:justify;">आजाद ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षों को अपनी बात कहने का मौका देने का भरोसा दिया था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी सदन से बाहर चले गए।</li>
<li style="text-align:justify;">बीएसपी के सतीशचंद्र मिश्रा मायावती के साथ राज्यसभा से बाहर गए लेकिन जल्दी ही वापस लाैटे।</li>
<li style="text-align:justify;">बसपा के सदस्यों ने ‘दलितों की हत्याएं बंद करो’ के नारे लगाए।</li>
<li style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने भी उनका साथ दिया।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/mayawati-resignation-accepted/article-2471</link>
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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2017 05:33:28 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय लोकतंत्र के मंदिरों को अपमानित नहीं करें मायावती</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री कु. मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर एक बार पुन: अपने-आपको दलित मसीहा के तौर पर स्थापित करने की जद्दोजहद छेड़ दी है। जब से देश में राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा तत्पश्चात कांगे्रस ने दलित उम्मीदवारों पर दांव खेला है, दलित कार्ड खेलने वाले अन्य कई नेता व दल बेचैन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री कु. मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर एक बार पुन: अपने-आपको दलित मसीहा के तौर पर स्थापित करने की जद्दोजहद छेड़ दी है। जब से देश में राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा तत्पश्चात कांगे्रस ने दलित उम्मीदवारों पर दांव खेला है, दलित कार्ड खेलने वाले अन्य कई नेता व दल बेचैन हो गए हैं। देश की आजादी के बाद संविधान निर्माण के वक्त संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भारत के शोषित, दबे-कुचले लोगों के लिए कुछ विशेष अवसर जोड़ने के लिए संविधान में आरक्षण की नीति को तैयार किया। चूंकि डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्वयं एक दबे-कुचले परिवार में जन्मे थे, उन्हें अहसास था कि तब के भारतीय समाज में शोषित व दबा-कुचला होना कितना बड़ा अभिशाप था।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने भी तब ऐसे करोड़ों भारतीयों को हरिजन कहकर पुकारा था। भारतीय समाज में पुरानी शासन व अर्थव्यवस्था जाति आधारित थी, जहां किसी भी व्यक्ति के लिए जन्म पूर्व ही निर्धारित था कि किसे क्या काम करना है एवं उसके अधिकार कर्त्तव्य क्या रहेंगे। निश्चित रूप से भारत के संविधान में ऐसे शोषित व दबे-कुचले वर्ग के लिए कुछ विशेष स्थान, अवसर उपलब्ध करवाया जाना निहायत ही जरूरी था। परंतु डॉ. भीमराव अंबेडकर की इस स्वस्थ सोच, एवं व्यवस्था परिवर्तन की नीति को सत्ता लोलुप नेताओं ने अपने वोट बैंक का अचूक अस्त्र बना लिया, जिसे कि अब ये नेता भारतीय राजनीति में हर मंच पर, हर चुनाव में अपने लिए एक ढाल की तरह अजमाने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कु. मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया कि वह दलितों एवं पीड़ितों के लिए आवाज उठाना चाहती हैं, क्योंकि देश की संसद उसे महज तीन मिनट का ही समय दे रही है, यह दलितों के साथ ज्यादती है वगैरह-वगैरह। यहां इस्तीफा देकर मायावती साफ-साफ राजनीतिक नौटंकी कर रही हैं। पूरे देश से पहले उत्तरप्रदेश की ही बात कर ली जाए, जहां कु.मायावती को राज्य के दलितों सहित अन्य वर्गों ने एक नहीं, तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, वहां दलितों के लिए ये नेता इतना भी नहीं कर पाई कि लोग दो जून की रोटी को सम्मानजनक ढंग से कमा कर खा पाएं। 15 वर्ष के करीब इस दलित नेता पूरा शासन चलाने का समय दिया गया, फिर भी वह महज तीन मिनट की दुहाई दे रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं, भारतीयों ने अपने सर्वोच्चय पद के लिए दलित नेताओं को उम्मीदवार बनाया, जिनमें एक अब भारत के राष्ट्रपति होंगे, ऐसे में मायावती का यह आरोप कि उन्हें दलितों की बात रखने के लिए राज्यसभा में वक्त नहीं दिया जा रहा, महज राजनीतिक पैंतरा ही कहा जा सकता है। कु. मायावती की असलियत यह है कि दलित राजनीति के नाम पर इस नेता ने करोड़ों रुपए का चंदा इकट्ठा किया है। गरीबों के चंदे से एवं गरीबों द्वारा अपना नेता चुन लिए जाने पर भी मायावती ने उनके लिए कुछ नहीं किया और स्वयं राजसी जीवन जी रही हैं। कु. मायावती को यदि अपना खोया हुआ राजनीतिक जनाधार पाना है, तब वह इसके लिए ईमानदार होकर सड़कों एवं सदन में दलित वर्ग के लिए संघर्ष करें, न कि भारतीय लोकतंत्र के पवित्र मंदिरों लोकसभा व राज्यसभा को अपमानित करें, जिनमें कि सवा सौ करोड़ भारतीयों की आस्था है, जोकि भारत के गौरव का प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/do-not-insult-of-the-indian-democracy/article-2441</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2017 05:41:20 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>JDU एग्जीक्यूटिव की बैठक आज</title>
                                    <description><![CDATA[पटना: डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के इस्तीफा नहीं देने के आरजेडी के दो-टूक फैसले के बाद अब नजरें जेडीयू की ओर टिक गई हैं। मंगलवार को सीएम आवास में जेडीयू स्टेट एग्जीक्यूटिव की मीटिंग के बाद सियासी तस्वीर साफ हो सकती है। सीएम ने प्रदेश जेडीयू प्रेसिडेंट वशिष्ठ नारायण सिंह, नेशनल जनरल सेक्रेटरी आरसीपी सिंह, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/jdu-executive-meeting-today/article-2218"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/nitish-kumar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना:</strong> डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के इस्तीफा नहीं देने के आरजेडी के दो-टूक फैसले के बाद अब नजरें जेडीयू की ओर टिक गई हैं। मंगलवार को सीएम आवास में जेडीयू स्टेट एग्जीक्यूटिव की मीटिंग के बाद सियासी तस्वीर साफ हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएम ने प्रदेश जेडीयू प्रेसिडेंट वशिष्ठ नारायण सिंह, नेशनल जनरल सेक्रेटरी आरसीपी सिंह, मंत्री विजेंद्र यादव और ललन सिंह के साथ राजनीतिक हालात पर चर्चा की। मीटिंग में शामिल नेताओं ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया गया। यहां तक की प्रदेश प्रेसिडेंट ने तो मीडियाकर्मियों के लिए घर का गेट तक बंद करवा दिया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नीतीश सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करेंगे: जेडीयू नेता</h2>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, मंत्री और जेडीयू नेता जय कुमार सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार अपने सिद्धांतों और छवि के साथ कभी समझौता नहीं करते हैं। नीतीश इससे पहले भी कई बड़े पद को छोड़ चुके है। जेडीयू स्पोक्सपर्सन श्याम रजक ने कहा कि नीतीश कुमार ने ना कभी सिद्धांतों के साथ समझौता किया है, ना आगे करेंगे। यह मीटिंग पहले से तय है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आरजेडी की मीटिंग में तेजस्वी के इस्तीफे पर चर्चा नहीं</h2>
<p style="text-align:justify;">लालू प्रसाद यादव के परिवार पर सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की कार्रवाई के बाद सोमवार को पहली बार आरजेडी विधायक दल की मीटिंग हुई थी। पार्टी के सीनियर नेता नेता अब्दुल बारी सिद्धीकी ने बताया था कि मीटिंग में तेजस्वी यादव के इस्तीफे पर चर्चा नहीं हुई। वे डिप्टी सीएम के पद से इस्तीफा नहीं देंगे। वे विधानमंडल के नेता हैं और रहेंगे। इस मीटिंग में तीन मुद्दों पर चर्चा हुई थी। पहला- देश के बिगड़ते हालात, दूसरा- राष्ट्रपति चुनाव, तीसरा- 27 जुलाई को पार्टी की रैली।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 01:03:06 +0530</pubDate>
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