<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/shalgam-ki-kheti/tag-34024" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Shalgam Ki Kheti - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/34024/rss</link>
                <description>Shalgam Ki Kheti RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Shalgam: किचन गार्डन में ऑर्गेनिक तरीके से उगा ली 8 किलो की शलगम </title>
                                    <description><![CDATA[गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई रसायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक व ऑर्गेनिक तरीके से  खेती कर रहे कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Shalgam Ki Kheti: रसायनिक खेती छोड़कर अब प्राकृतिक व ऑर्गेनिक खेती अपनाना किसानों की जरूरत बनता जा रहा है। आजमन भी यही चाहने लगा है कि रासायनिक खेती कम हो, ताकि जहरमुक्त अन्न पैदा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/eight-kg-turnip-grown-organically-in-kitchen-garden/article-81489"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/shalgam.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई रसायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक व ऑर्गेनिक तरीके से  खेती कर रहे</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Shalgam Ki Kheti: रसायनिक खेती छोड़कर अब प्राकृतिक व ऑर्गेनिक खेती अपनाना किसानों की जरूरत बनता जा रहा है। आजमन भी यही चाहने लगा है कि रासायनिक खेती कम हो, ताकि जहरमुक्त अन्न पैदा हो सके। ऐसे ही कुरुक्षेत्र जिला के गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई किचन गार्डन ऑर्गेनिक तरीके से  खेती कर रहे हैं। किसान भाईयों द्वारा 8 किलोग्राम वजनी शलगम उगाई है। इनकी शलगम सोशल मीडिया पर भी सुर्खियां बटौर रही हैं। अभिमन्युपुर गांव के किसान अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि वह खेती का शौक रखते हैं। पिछले 45 साल से वह अपने भाई के साथ मिलकर खेती कर रहे हैं। करीब 30 एकड़ में वह खेती कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ साथ अपने खेतों में उन्होंने ऑर्गेनिक किचन गार्डन बनाया हुआ है। यहां वे किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं करते। उन्होंने अपने इस किचन गार्डन में 8 किलोग्राम की शलगम तैयार की है, जिसका पत्तों के साथ 15 किलोग्राम वजन है। अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती का ही कमाल है जो इतनी बड़ी शलगम उनके खेत में तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अक्टूबर महीने में शलगम की बुआई की थी। इसमें पानी की लागत भी बहुत कम होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शलगम का वजन देख हर कोई रह गया दंग | Kurukshetra News</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान अश्वनी कुमार शर्मा के भाई राजीव शर्मा ने बताया कि उन्होने इस शलगम को अपने खेत से 9 फरवरी को उखाड़ा था। उस समय इसके पत्तों के साथ वजन 15 किलोग्राम था। पत्ते काटकर इसका वजन 8 किलोग्राम रह गया। हर कोई इसको देखकर हैरान है, वह खुद भी इसको देखकर हैरान थे जब रिश्तेदारों को इसकी बात पता चली तो उन्होंने कुरुक्षेत्र शहर में इसको देखने के लिए अपने घर पर मंगवाया और वहीं पर कुछ दिन रखा। उनके रिश्तेदारों के घर पर शहर में भी बहुत लोग उसको देखने के लिए आए थे। हालांकि करीब 10 दिन पहले इसको उखाड?े के बाद अब इसका एक किलोग्राम वजन कम हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किचन गार्डन में करते हैं अच्छी सब्जी तैयार</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान ने बताया कि वह अपने किचन गार्डन में हर मौसम की सब्जी लगाते हैं जो शुद्ध आॅर्गेनिक होती हैं। वह मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जी लगाते हैं। उन्होने इस किचन गार्डन में पहले भी करीब चार किलोग्राम का चुकंदर, 6 किलोग्राम की मूली, 3 किलोग्राम से ऊपर पत्ता गोभी और फूलगोभी भी अपने इस किचन गार्डन से ली हुई है। लेकिन अब इस शलगम ने उनको और भी ज्यादा मशहूर कर दिया है। क्योंकि आज तक कितनी बड़ी शलगम ना ही उन्होंने कभी देखी और ना ही सुनी है। उन्होंने कहा कि वह अपने खाने के लिए इस किचन गार्डन में गन्ना, हरी सब्जियां, प्याज, फल फू्रट सभी लगाए हुए हैं। उन्होंने अपने खेत में असम राज्य की एक वैरायटी का नींबू का पौधा भी लगाया हुआ है जिसकी ग्रोथ भी काफी अच्छी है और वह अभी बंपर पैदावार दे रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">25 सालों से कर रहे ऑर्गेनिक फार्मिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान भाईयों ने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए वह खुद के खाने के लिए आॅर्गेनिक किचन गार्डनिंग कर रहे हैं। हालांकि बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक खेती करना चाहते हैं लेकिन मार्केटिंग की समस्या की वजह से वह बड़े स्तर पर इसको नहीं कर पाते। इसलिए वह अपने खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन चला रहे हैं। उनको 25 साल हो गए इस किचन गार्डन में उन्होंने आज तक कभी रसायन नहीं डाला। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;">वह इसमें गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं और अब उनकी पैदावार और उत्पादन भी और रसायन खेती से काफी अच्छा मिलता है। हालांकि शुरूआती कुछ सालों में उत्पादन कुछ काम रहता है लेकिन अब वह इससे अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। किसानों ने बताया कि वह पहली बार 1995 में आॅर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए सरकारी कृषि संस्थान में गए थ। तब से ही वह इस खेती को करते आ रहे हैं। उसके लिए उनको कई बार सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="HKRN: डीसी रेट कर्मचारियों को एचकेआरएन में भेजने के विरोध में बिजली निगम कर्मियों का प्रदर्शन" href="http://10.0.0.122:1245/electricity-corporation-employees-protest-against-sending-dc-rate-employees-to-hkrn/">HKRN: डीसी रेट कर्मचारियों को एचकेआरएन में भेजने के विरोध में बिजली निगम कर्मियों का प्रदर्शन</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/eight-kg-turnip-grown-organically-in-kitchen-garden/article-81489</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/eight-kg-turnip-grown-organically-in-kitchen-garden/article-81489</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 19:25:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/shalgam.jpg"                         length="93813"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Shalgam Ki Kheti: विटामिनों से भरपूर है शलगम</title>
                                    <description><![CDATA[बिजाई के समय फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा डालें। बिजाई के 30 दिनों के बाद नाइट्रोजन की बाकी की मात्रा को डाल दें। जब पौधे पर 70% फलियां जिनका रंग हल्का पीला हो तब कटाई कर लें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/turnips-are-full-of-vitamins/article-87044"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/shalgam.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;"><strong>ये है इसकी कृषि प्रकिया…</strong></h2>
<h4><strong>जलवायु | Turnip Cultivation</strong></h4>
<p>तापमान -12-30 डिग्री सेल्सियस<br />
वर्षा – 200-400 एमएम<br />
बिजाई के समय तापमान- 18-23 डिग्री सेल्सियस<br />
कटाई के समय तापमान – 10-15 डिग्री सेल्सियस</p>
<h3><strong>मिट्टी</strong></h3>
<p>इसे मिट्टी की कईं किस्मों में उगाया जा सकता है पर शलगम दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में हो, में उगाया जाए तो यह अच्छे परिणाम देती है। भारी, घनी या हल्की मिट्टी में खेती करने से बचें क्योंकि इससे विकृत जड़ों का उत्पादन होता है। अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी की पीएच 5.5-6.8 होनी चाहिए।</p>
<h3><strong>प्रसिद्ध किस्में और पैदावार</strong></h3>
<p>एल 1: यह किस्म 45 से 60 दिन बाद पक जाती हैे इसकी जड़ें गोल और पूरी तरह सफेद, मुलायम और कुरकुरी होती हैें इसकी जड़ों की औसतन पैदावार 105 क्विंटल प्रति एकड़ होती हैे<br />
Punjab Safed 4: इस खेती की सिफारिश पंजाब और हरियाणा में की जाती हैे इसकी जड़ें पूरी तरह सफेद, गोल, सामान्य आकार और स्वाद में बढ़िया होती हैें</p>
<h3><strong>जमीन की तैयारी | Turnip Cultivation</strong></h3>
<p>खेत की जोताई करें और खेत को नदीन रहित और रोड़ियों रहित बनायें। गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और खेत की तैयारी के समय मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें। बिना गले हुए गोबर का प्रयोग करने से बचे इससे जड़ें दोमुंही हो जाती हैं।</p>
<h3><strong>बिजाई का समय</strong></h3>
<p>देसी किस्मों की बिजाई का उचित समय अगस्त-सितम्बर, जबकि यूरोपी किस्मों का अक्तूबर- नवंबर में होता हैें</p>
<h3><strong>फासला</strong></h3>
<p>पंक्तियों के बीच 30-40 सैं.मी. का फासला और पौधों के बीच 6-8 सैं.मी. का फासला होना चाहिए।</p>
<h3><strong>बीज की गहराई | Turnip Cultivation</strong></h3>
<p>बीजों को 1.5 सैं.मी. की गहराई में बोयें।</p>
<h3><strong>बिजाई का ढंग</strong></h3>
<p>इसकी बिजाई बैड पर सीधे बो कर या मेंड़ पर कतारों में बो कर की जाती है।</p>
<h3><strong>बीज की मात्रा</strong></h3>
<p>एक एकड़ खेत के लिए 2-3 किलो बीजों की जरूरत होती है।</p>
<h3><strong>बीज का उपचार</strong></h3>
<p>जड़ गलन से फसल को बचाने के लिए बिजाई से पहले थीरम 3 ग्राम प्रति किलो से बीजों का उपचार करें।</p>
<h3><strong>खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)</strong></h3>
<p>खाद की मात्रा स्थान के हिसाब से बदलती रहती है। यह जलवायु, मिट्टी की किस्म, उपजाऊ शक्ति पर आधारित होती है। बिजाई के समय गाय के गोबर के साथ नाइट्रोजन 25 किलो (यूरिया 55 किलो), फासफोरस 12 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 75 किलो प्रति एकड़) में डालें।</p>
<h3><strong>खरपतवार नियंत्रण</strong></h3>
<p>अंकुरण के 10-15 दिनों के बाद छंटाई की प्रक्रिया करें। मिट्टी को हवादार और नदीन-मुक्त बनाये रखने के लिए कसी के साथ गोड़ाई करेें बिजाई के दो से तीन सप्ताह बाद एक बार गोडाई करें। गोडाई के बाद मेंड़ पर मिट्टी चढ़ाएें</p>
<h3><strong>सिंचाई</strong></h3>
<p>लगम को तीन से चार सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। बिजाई के बाद पहली सिंचाई करें, यह अच्छे अंकुरण में मदद करती है। गर्मियों में मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार, बाकी की सिंचाइयां 6-7 दिनों के अंतराल पर करें। सर्दियों में 10-12 दिनों के अंतराल पर करें। शलगम को 5-6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती हैे अनावश्यक सिंचाई ना करेें इससे जड़ों का आकार विकृत होगा और इस पर बाल उग जाते है।</p>
<h3><strong>फसल की कटाई</strong></h3>
<p>शलगम की पुटाई, किस्म के आधार पर और मंडी के आकार के हिसाब से जैसे कि 5-10 सैं.मी. व्यास के हो जाने पर करेें आमतौर पर शलगम के फल 45-60 दिनों में तैयार हो जाते है। कटाई में देरी होने के कारण इसकी पुटाई में मुश्किल और फल रेशेदार हो जाती हैं। इसकी पुटाई शाम के समय करें। कटाई के बाद शलगम के हरे सिरों को पानी से धोया जाता है। उन्हें टोकरी में भरा जाता है और मंडी में भेजा जाता है। इसके फलों को ठंडे और नमी वाले हालातों में 2-3 दिन के लिए 8-15 सप्ताह के लिए स्टोर करके रखना हो तो उन्हें रखा जाता है।</p>
<h3><strong>बीज उत्पादन</strong></h3>
<p>बीज उद्देश्य के लिए, शलगम के बीजों को मध्य सितंबर में बोयें और फिर दिसंबर के पहले सप्ताह में नए पौधों को रोपण किया जाता है। 45 सैं.मी गुणा 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। नाइट्रोजन 30 किलो (यूरिया 65 किलो) और फासफोरस 8 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ में डालें। बिजाई के समय फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा डालें। बिजाई के 30 दिनों के बाद नाइट्रोजन की बाकी की मात्रा को डाल दें। जब पौधे पर 70% फलियां जिनका रंग हल्का पीला हो तब कटाई कर लें।</p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/turnips-are-full-of-vitamins/article-87044</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/turnips-are-full-of-vitamins/article-87044</guid>
                <pubDate>Sat, 25 Jan 2025 16:10:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-01/shalgam.jpg"                         length="90662"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        