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                <title>International Women's Day 2026 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>International Women's Day 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महिला दिवस पर सिरसा से विशेष! विकट परिस्थितियों में भी जीत हासिल कर समाज का आइना बनीं ये महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत International Women’s Day 2026: ओढ़ां (सच कहूँ/राजू)। कई बार इंसान के जीवन में ऐसी विकट परिस्थितियां आ जाती हैं, जिसमें उसे कुछ भी नजर नहीं आता। कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों में घुटने टेक देते हैं तो वहीं भी होते हैं, जो हार न मानकर हिम्मत-हौसले को इस कदर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/these-women-have-triumphed-even-in-difficult-circumstances-and-become-a-mirror-of-society/article-82088"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/sirsa-womens-day.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत</h3>
<p style="text-align:justify;">International Women’s Day 2026: ओढ़ां (सच कहूँ/राजू)। कई बार इंसान के जीवन में ऐसी विकट परिस्थितियां आ जाती हैं, जिसमें उसे कुछ भी नजर नहीं आता। कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों में घुटने टेक देते हैं तो वहीं भी होते हैं, जो हार न मानकर हिम्मत-हौसले को इस कदर ढाल बना लेते हैं कि कभी बुरे समय को भी नतमस्तक होना पड़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम आपको कुछ ऐसी महिलाओं से रू-ब-रू करवा रहा है, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और वक्त के साथ स्वयं को मजबूत बनाते हुए वक्त को ही बदल दिया। कभी बुरे समय को याद कर सिहर उठने वाली इन महिलाओं को आज जिंदगी से कोई शिकवा नहीं है। आज ये महिलाएं समाज में प्रेरणास्त्रोत बन रही हैं। Sirsa News</p>
<h3 style="text-align:justify;">पति के मौत के बाद लगा था सब-कुछ खत्म हो गया</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव पन्नीवाला मोटा निवासी 35 वर्षीय रोशनी देवी के पति की अढ़ाई वर्ष पूर्व अचानक मृत्यु हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद रोशनी देवी के समक्ष अपने 4 बच्चों व स्वयं को संभालना बड़ी चुनौती बन गया। घर की आर्थिक दशा काफी कमजोर थी। पति की कोई चल-अचल संपत्ति भी नहीं थी। रोशनी को एक बार तो लगा कि जैसे सब-कुछ खत्म हो गया, लेकिन उसने किसी पर आश्रित न होकर दिहाड़ी-मजदूरी करते हुए अपने चारों बच्चों को बड़ी मुश्किल से पाला-पोषा और पढ़ाया-लिखाया। मौजूदा समय में रोशनी देवी मंडी कालांवाली में अटल कंटीन पर कार्य कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ पैसे कंटीन से आ जाते हैं, कुछ विधवा पेंशन से आ जाते हैं तो कुछ घर में टिफिन सर्विस से आ जाते हैं। इस पैसे से रोशनी देवी अपना घर व बच्चों को संभाल रही है। उसकी 3 बेटियां व एक बेटा है। जिनमें सबसे बड़ी 19 वर्ष की, उससे छोटी 17 वर्ष की तथा उससे छोटी बेटी 15 वर्ष की है। वहीं बेटा 13 वर्ष का है। चारों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। रोशनी देवी की 2 बेटियां बीएससी कर रही हैं तो वहीं एक बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। वहीं बेटा 9वीं कक्षा में पढ़ता है। रोशनी देवी अपने हिम्मत-हौसले को ढाल बनाकर अपने बच्चों को सफलता की राह पर अग्रसर कर रही है। रोशनी देवी का कहना है कि उसके पति जगदीश का सपना था कि वह अपनी बेटी को डॉक्टर बनाएगा। वह अपने पति का सपना एक दिन जरूर पूरा करेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों के लिए छोड़ दिया घर, उच्च शिक्षा दिलवाकर बनाया सफल | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव नुहियांवाली की बेटी सुमित्रा देवी का विवाह वर्ष 1996 में ढाणी बचन सिंह (ऐलनाबाद) निवासी लालचंद के साथ हुआ। शादी के 6 वर्ष बाद लालचंद की मृत्यु हो गई। एक तो पति की मौत में स्वयं और दूसरा 3 मासूम बच्चों (2 लड़की व 1 लड़का) को संभालना सुमित्रा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। ये समय उसके लिए अति विकट था, ऐसे में उसके माता-पिता ने उसमें हौसला भरा। सुमित्रा ने जैसे-तैसे कर स्वयं को परस्थितियों से लड़ने के लिए मजबूत बनाया। सुमित्रा ने ठान लिया कि वह अपने बच्चों को एक सफल इंसान बनाएगी चाहे उसके लिए उसे घर-बार ही क्यों न छोड़ना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">सुमित्रा अपने तीनों बच्चों को शिक्षित करने के लिए 6 वर्ष तक अपने घर को छोड़कर राजस्थान के सीकर में रही। आज सुमित्रा के बड़ी बेटी 26 वर्षीय अंजनी स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल आॅफिसर है। तो वहीं उससे छोटी बेटी 24 वर्षीय प्रीति बागवानी में बीएससी कर आगे की तैयारी कर रही है। वहीं बेटा 23 वर्षीय प्रिंस आईआईटी करने के बाद आज मुंबई में एक अच्छी नौकरी कर रहा है। सुमित्रा जब बीता हुआ समय आज याद करती है तो सिहर उठती है, लेकिन आज बच्चों को सफल देखकर उसे अब जिंदगी से कोई शिकवा नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">परिवार ने दिया हौसला तो खुद को संभाला और हालातों पर पाया काबू</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव पन्नीवाला मोटा निवासी 57 वर्षीय निर्मला देवी का 5 वर्ष पूर्व पति का साथ छूट गया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पति रामसिंह किराये पर गाड़ी चलाकर व एक छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। कोरोना काल में रामसिंह की मृत्यु हो गई। हालांकि 3 बेटियों की शादी पति के रहते हो चुकी थी, लेकिन एक बेटा व एक बेटी अभी कुंवारे हैं। पति की मौत के बाद घर व 2 बच्चों को संभालना निर्मला देवी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। काफी समय तक तो निर्मला पति की मौत के सदमे से उभर भी नहीं पाई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवार के लोगों ने उसमें जीने का हौसला भरा। जिसके बाद उसने ठान ली कि वह बेटा-बेटी दोनों को अच्छी शिक्षा दिलवाकर अपने पैरों पर खड़ा करेगी। इसके लिए निर्मला देवी ने पति की दुकान को संभाला और जैसे-तैसे कर अपने बच्चों को पढ़ाया और घर को संभाला। निर्मला देवी के बेटे की डेढ़ वर्ष पूर्व सरकारी नौकरी लग गई, जबकि बेटी पुलिस की तैयारी कर रही है। निर्मला देवी की आँखें आज भी उस समय को याद कर नम हो जाती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जिम्मेदारी कंधों पर आई तो सर्वजीत कौर ने थामा ट्रैक्टर का स्टेयरिंग | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव ओढ़ां निवासी 42 वर्षीय महिला सर्वजीत कौर एक छोटी खेतिहर किसान है। महिला के एक बेटा व एक बेटी सहित 2 बच्चे हैं। थोड़ी-सी भूमि होने के चलते खेती कार्य से पति-पत्नी दोनों अपनी आर्थिक दशा में सुधार लाने में असक्षम थे। इसी बीच महिला सर्वजीत कौर के पति बलकरण सिंह की सेहत बिगड़ने के चलते वह चारपाई के अधीन हो गया। एक तो पहले से ही आर्थिक दशा कमजोर थी और ऊपर से पति के बीमार होने के चलते घर का पूरा बोझ सर्वजीत कौर के कंधों पर आ गया। खेती संभालने वाला कोई न होने के चलते सर्वजीत कौर ने खुद को मजबूत करते हुए ये ठान लिया कि वह किसी पर आश्रित न होकर खुद खेती करेगी। खेती कार्य से पूरी तरह से परीचित न होने के चलते शुरूआत के दौर में सर्वजीत कौर को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आने के बाद उसने स्वयं ही ट्रैक्टर का स्टेयरिंग थाम लिया। अपने पति से पूछ-पूछकर धीरे-धीरे वह खेती कार्य में इस कदर निपुण हो गई कि बुआई-बिजाई व सिंचाई तक खुद करने लग गई। सर्वजीत कौर ने अपने दम पर अपने दोनों बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ा-लिखाकर सफलता की राह पर अग्रसर किया। उसने अपने बच्चों की पढ़ाई के समक्ष आर्थिक दशा या कार्य को कभी आड़े नहीं आने दिया। आज उसकी बेटी मौजूदा समय में बठिंडा में एक निजी बैंक में अस्सिटेंट मैनेजर है तो वहीं बेटा बीए की पढ़ाई कर रहा है। Sirsa News</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 13:27:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>उत्थान संस्थान में दिव्यांग बच्चों ने कुछ इस तरह से मनाया अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[International Women’s Day 2026: प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। उत्थान संस्थान (Utthan Sansthan) की कोशिश इकाई में दिव्यांग बच्चो द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस दौरान बच्चो ने सुंदर-सुंदर चित्रकारी बनाई। इस अवसर पर उत्थान संस्थान की निदेकश डॉ. अंजू बाजपई ने कहा कि हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक थीम के साथ मनाया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/disabled-children-celebrated-international-womens-day-in-this-way-at-utthan-sansthan/article-82078"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/utthan-sansthan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">International Women’s Day 2026: प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। उत्थान संस्थान (Utthan Sansthan) की कोशिश इकाई में दिव्यांग बच्चो द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस दौरान बच्चो ने सुंदर-सुंदर चित्रकारी बनाई। इस अवसर पर उत्थान संस्थान की निदेकश डॉ. अंजू बाजपई ने कहा कि हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल महिला दिवस के लिए थीम गिव टू गेन तय की गई है। गिव टू गेन अभियान उदारता और सहयोग की मानसिकता को प्रोत्साहित करता है। गिव टू गेन पारस्परिक सहयोग और समर्थन की शक्ति पर बल देता है। जब लोग, संगठन और समुदाय उदारतापूर्वक दान करते हैं, तो महिलाओं के लिए अवसर और समर्थन बढ़ते हैं। जब महिलाएं समृद्ध होती हैं, तो हम सभी का उत्थान होता हैं। महिलाओं की उन्नति में योगदान करना सहायक और परस्पर जुड़ी दुनिया बनाने में मदद करता है। Pratap Nagar News</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 10:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>International Women&amp;#8217;s Day 2026: हौंसले की उड़ान! सरसा के इन गांवों की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई अपनी विशेष पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[ममता ने 80 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा, चांदनी हॉकी में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची International Women’s Day: खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के गांवों से निकली तीन ऐसी महिलाओं की कहानियां सच कहूँ सामने लेकर आया हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसले और मेहनत से नई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/a-flight-of-courage-the-daughters-of-these-villages-in-sirsa-have-distinguished-themselves-at-the-national-level/article-82077"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/sirsa-daughters-success.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ममता ने 80 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा, चांदनी हॉकी में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची</h3>
<p style="text-align:justify;">International Women’s Day: खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के गांवों से निकली तीन ऐसी महिलाओं की कहानियां सच कहूँ सामने लेकर आया हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसले और मेहनत से नई पहचान बनाई। गांव चक्कां की ममता इन्सां, बालासर की हॉकी खिलाड़ी चांदनी सेन और चक्कां की बहू डॉ. प्रियंका इन्सां आज अपने-अपने क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरी हैं। किसी ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाया, किसी ने खेल के मैदान में संघर्ष से सफलता पाई और किसी ने शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाई हासिल की। सच कहूँ ऐसी मेहनती और हौसलेमंद महिलाओं के जज्बे, जोश और जुनून को सलाम करता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने दम पर नई पहचान बनाकर समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। Sirsa News</p>
<h3 style="text-align:justify;">12वीं पास ममता बनीं 80 महिलाओं के रोजगार की राह</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव चक्कां की बहू ममता इन्सां ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने शिक्षा या संसाधनों की कमी बाधा नहीं बनती। मात्र 12वीं पास ममता ने हरियाणा राज्य आजीविका मिशन से जुड़कर गांव में स्वयं सहायता समूहों की शुरूआत की। अगस्त 2019 में उन्होंने 10 महिलाओं के साथ एक छोटा समूह बनाया, जो हर महीने सिर्फ 10 रुपये बैंक में जमा करता था। धीरे-धीरे यह पहल बढ़ती गई और आज गांव में 8 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 80 महिलाओं को रोजगार मिला है। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं चूड़ियां, साबुन-सर्फ बनाना, मनियारी व किरयाणा की दुकान चलाना, कपड़ों का व्यापार, खेती-पशुपालन, डेयरी, कढ़ाई-बुनाई और ब्यूटी पार्लर जैसे काम कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे हर महिला को औसतन करीब 15 हजार रुपये मासिक आय हो रही है। ममता जल संरक्षण, पर्यावरण, स्वच्छता, नशा मुक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और दहेज प्रथा के खिलाफ भी गांव में जागरूकता अभियान चलाती रही हैं। उनके नेतृत्व में अब तक करीब 2800 पौधे वितरित और 1000 पौधे रोपित किए जा चुके हैं, साथ ही कई सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें ग्राम पंचायत से लेकर खंड, जिला और राज्य स्तर तक सम्मान मिला है। वर्ष 2024 में दिल्ली में आयोजित कैच द रेन अभियान के तहत गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भी सम्मानित किया गया। वहीं 26 जनवरी 2025 को लखपति दीदी योजना के तहत गणतंत्र दिवस परेड की झांकी में नेतृत्व करने का अवसर भी मिला। Sirsa News</p>
<h3 style="text-align:justify;">संघर्षों से लड़कर हॉकी में चमकी बालासर की चांदनी</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव बालासर की चांदनी सेन ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद हॉकी के मैदान में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके पिता शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर रही, लेकिन चांदनी ने हार नहीं मानी। उन्होंने वर्ष 2018 में कक्षा आठवीं के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया। शुरूआती दौर में परिवार ने लड़की होने के कारण बाहर खेलने भेजने से मना कर दिया, लेकिन चांदनी ने अपने सपनों को जिंदा रखा। बाद में परिवार के समर्थन से उन्होंने खंड, जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में भी उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया। आज चांदनी राजीव गांधी खेल स्टेडियम बालासर में सीनियर नेशनल टूर्नामेंट की तैयारी कर रही हैं। साथ ही आसपास के चार-पांच गांवों की करीब 30 लड़कियों को हॉकी की ट्रेनिंग भी दे रही हैं। खास बात यह है कि खेल की तैयारी के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च पूरे किए। उनका सपना है कि ओलंपिक में भारत को गोल्ड मेडल दिलाएं और भविष्य में सरकारी कोच बनकर युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच प्रियंका ने हासिल की पीएचडी | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव चक्कां की बहू और गोरीवाला की बेटी डॉ. प्रियंका इन्सां ने भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखते हुए फिजिक्स विषय में पीएचडी पूरी की। प्रियंका ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से एमएससी करने के बाद राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा भी पास की। इसके बाद उन्होंने एसकेडी कॉलेज हनुमानगढ़ से कंसंट्रेटेड सोलर पावर टेक्नोलॉजी विषय पर शोध कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में वह दमदमा स्थित एक निजी स्कूल में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। उनके तीन स्कोपस शोध पत्र और एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है। शादी, बेटी के जन्म और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। वर्ष 2023 में पिता के आकस्मिक निधन से भी उन्हें मानसिक आघात लगा, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने संकल्प से उन्होंने लक्ष्य हासिल किया। आज डॉ. प्रियंका इन्सां गांव चक्कां की चौथी पीएचडी होल्डर बनकर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रेरणा बन रहीं गांव की बेटियां</h3>
<p style="text-align:justify;">इन तीनों महिलाओं की कहानी बताती है कि अगर हौसले मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। सामाजिक कार्य, खेल और शिक्षा तीनों क्षेत्रों में इन बेटियों ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज की अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। Sirsa News</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/a-flight-of-courage-the-daughters-of-these-villages-in-sirsa-have-distinguished-themselves-at-the-national-level/article-82077</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 10:11:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पूज्य गुरु जी की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के महिला उत्थान को 20 सराहनीय अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[International Women’s Day 2026: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji) सिंह जी इन्सां ने अपनी ओजस्वी वाणी में रूहानी सत्संगों के माध्यम से साढ़े सात करोड़ से अधिक लोगों के नशे और बुराइयां छुड़वाई, जिससे नरक की मानिंद हुए घर स्वर्ग बन गए हैं, और खुशियों से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/inspired-by-the-revered-guru-ji-dera-sacha-sauda-launched-20-commendable-initiatives-for-womens-empowerment/article-82076"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/women-work-by-guru-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">International Women’s Day 2026: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji) सिंह जी इन्सां ने अपनी ओजस्वी वाणी में रूहानी सत्संगों के माध्यम से साढ़े सात करोड़ से अधिक लोगों के नशे और बुराइयां छुड़वाई, जिससे नरक की मानिंद हुए घर स्वर्ग बन गए हैं, और खुशियों से भर गए हैं। जिन परिवारों में महिलाएं एक वक्त खून के आंसू रोती थी, पूज्य गुरुजी के सद्प्रयासों की बदौलत आज वो खुशहाल जीवन जी रही हैं। International Women’s Day</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने गाँवों, कस्बों, शहरों और महानगरों में रूहानी सत्संगों के माध्यम से आमजन को कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराइयां त्यागने का संकल्प करवाकर न जाने कितनी ही बेटियों को कोख में मरने से बचाया। पूज्य गुरुजी के बेहतरीन प्रयासों की बदौलत आज अनेक बेटियां शिक्षा, खेल, सेना, पुलिस व प्रशासनिक सेवाओं में बड़े पदों को सुशोभित कर रही हैं और अपनी बेहतरीन कार्यशैली से एक अलग छाप छोड़ रही हैं। पूज्य गुरु जी ने महिला उत्थान के लिए 175 मानवता भलाई कार्यों के तहत अनेक बेमिसाल मुहिम चलार्इं हैं, जो उन्हें संबल प्रदान कर रही हैं। आज महिला दिवस पर आपको रूबरू करवाते हैं इन मुहिमों से:-</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">1. शुभदेवी:- इस मुहिम के तहत पूज्य गुरु जी वेश्यावृत्ति की दलदल में फंसी लड़कियों को इससे बाहर निकालकर उनका उपचार करवाते हैं और अपनी बेटियां बनाकर उनकी अच्छे समृद्ध संपन्न परिवारों के भक्तयोद्धाओं से शादी करवाते हैं और एक पिता के रूप में अपना हर कर्तव्य निभाते हैं, जैसे त्योहार, खुशी के मौके बेटियों को उपहार देना इत्यादि। International Women’s Day</li>
<li style="text-align:justify;">4. जीएफबी गुरु फादर बेटियां:- पूज्य गुरु जी ने इस मुहिम के तहत ऐसी बेटियों को अपनाया, जिन्हें या तो गर्भ में मार दिया जाना था या अपने हाल पर कूड़े के ढेर पर फेंक देना था। ऐसी बच्चियों को पूज्य गुरु जी ने माता-पिता के रूप में अपना नाम दिया और इन बच्चियों को बेहतरीन शिक्षा के साथ खेलों और जीवन के हर नेक क्षेत्र में आगे बढ़ाया, जिससे ये बेटियां आज देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसके साथ ही बालिग होने पर पूज्य गुरु जी इनमें से कई बेटियों की शादियां करवार्इं और पिता के रूप में स्वयं कन्यादान किया।</li>
<li style="text-align:justify;">25. आशीर्वाद- मुहिम के तहत पूज्य गुरु जी और डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत गरीब जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादियों में सहयोग देती है, जैसे घरेलू जरूरत का सामान, डबल बैड, बर्तन, सूट, मेज-कुर्सी, अलमारी इत्यादि के साथ यथासंभव शगुन, ताकि इन परिवारों को बेटियां बोझ न लगें और बिना परेशानी के उनकी शादी हो सके और वे खुशी-खुशी अपने ससुराल जा सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">42. अभिशाप मुक्ति:- मुहिम के तहत पूज्य गुरु जी द्वारा आमजन को शादियों में दहेज न लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। पूज्य गुरु जी के पावन सान्निध्य में डेरा सच्चा सौदा में ऐसी हजारों शादियां हो चुकी हैं और ये सिलसिला अनवरत जारी है। पूज्य गुरु जी की इस मुहिम से समाज के गरीब, जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिली है।</li>
<li style="text-align:justify;">44. गर्भ पवित्र:- मुहिम के तहत गर्भवती महिलाओं को सत्संग सुनने, भजन सुमिरन करने, योद्धा शूरवीरों की कहानियां पढ़ने व सुनने के लिए प्रेरित किया जाता है। ताकि उनका बच्चा बड़ा होकर बहादुर और देश का जिम्मेवार नागरिक बने और सद्गुणों से परिपूर्ण जीवन जीए।</li>
<li style="text-align:justify;">46. ज्ञानकली :- समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर कम रूझान को देखते हुए इस मुहिम का आगाज किया गया। इसके तहत माता-पिता और परिजनों को लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बनें।</li>
<li style="text-align:justify;">61. जीवनआशा:- इस मुहिम के तहत छोटी उम्र में विधवा हो जाने वाली लड़कियों की शादी करवाई जाती है, ताकि समाज में उसे तिरस्कृत भाव से न देखा जाए और वो अपना जीवन सुखमय जी सके।</li>
<li style="text-align:justify;">63. नई सुबह:- अक्सर देखने में आता है कि तलाक के बाद युवतियां मानसिक परेशानी में फंस जाती हैं और जीवन उन्हें बोझ सा लगने लगता है और ऐसी स्थिति में वे समाज के तानों-उलाहनों के चलते घातक कदम तक उठा लेती हैं। इसी समस्या को समझते हुए इस मुहिम का आगाज किया गया। इसके तहत तलाकशुदा युवतियों की शादी करवाई जाती है, ताकि वो सामान्य जीवन जी सके।</li>
<li style="text-align:justify;">73. कुल का क्राउन :- समाज में ऐसी धारणा थी कि सिर्फ बेटों से ही वंश चलता है। इसी समस्या को देखते हुए पूज्य गुरु जी ने इस मुहिमे का आगाज किया। कुल का क्राउन मुहिम के तहत लड़की शादी करके दुल्हे को अपने घर लेकर जाती है और इस दंपत्ति से जो संतान होती है उसके नाम के साथ लड़की का गौत्र लगता है। इस तरह बेटी से वंश आगे बढ़ता है।</li>
<li style="text-align:justify;">74. लज्जा रक्षा:- मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत द्वारा बेसहारा औरतों की यथासंभव मदद की जाती है, जैसे उन्हें राशन उपलब्ध करवाना, सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिलवाकर आत्मनिर्भर बनाना इत्यादि।</li>
<li style="text-align:justify;">79. सशक्त नारी:- मुहिम के तहत लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि मुश्किल वक्त में वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">92. जननी सत्कार:- मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत द्वारा गरीब गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर उपचार भी करवाया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">94. जननी-शिशु सुरक्षा:- मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा की ओर से गरीब जच्चा-बच्चा के भरण-पोषण के लिए पौष्टिक आहार दिया जाता है ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।</li>
<li style="text-align:justify;">97. नई किरण:- इस मुहिम के तहत ऐसे परिवार जिनमें बेटे की मृत्यु के पश्चात विधवा बहु रह जाती है तो परिवार उस बहू को बेटी बनाकर उसकी शादी करवाता है जिससे वो अपना जीवन खुशहाली में जी सके।</li>
<li style="text-align:justify;">105. उड़ान आत्मबल की:- मुहिम के तहत ऐसी लड़कियां, जिनके ऊपर रंजिशवश तेजाब डाल दिया गया और उनका चेहरा खराब होने से शादी में दिक्कत आती है, उनका उपचार करवाया जाता है और उनकी शादी करवाई जाती है ताकि वे भी समाज का अभिन्न हिस्सा बनकर जीवन जी सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">106. उम्मीद से भी आगे : मुहिम के तहत दुराचार पीड़ित महिलाओं का समुचित उपचार करवाया जाता है और उनकी भक्त योद्धाओं से शादी करवाई जाती है ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">107. बे गम सफर :- कई बार बेटी के शारीरिक रूप से अपंग, फुलवैरी, हकलाने जैसी समस्याओं से ग्रस्त होने पर परिवार के सामने मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं और इन बेटियों की शादी में भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को समझते हुए इस मुहिम का आगाज किया गया, जिसके तहत ऐसी बेटियों की शादी समृद्ध-संपन्न परिवारों से संबंध रखने वाले भक्त योद्धाओं से करवाई जाती है ताकि वे बेटियां हीन भावना से बाहर निकलकर खुशहाल जीवन जीएं।</li>
<li style="text-align:justify;">123. डेप्थ :- इस मुहिम के तहत चरस, हेरोइन, स्मैक, चिट्टा सहित अन्य भयानक नशों की गिरफ्त में फंसी युवतियों का नशा छुड़वाया जाता है।]</li>
<li style="text-align:justify;">124. सेफ :- इस मुहिम के तहत नशा छोड़ने वाली युवतियों को काजू, बादाम सहित पौष्टिक आहार की किटें भी दी जाती हैं ताकि ऐसी युवतियां जल्दी स्वस्थ होकर समाज में सुखमय जीवन जी सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">164 : इस मुहिम के तहत अनाथ, जरूरतमंद, बुजुर्ग व विधवा बहनें जो बेसहारा हैं, उनको गोद लेकर उनकी सेवा, संभाल की जाती है, जैसे तनख्वाह पर उनकी सेवा के लिए सेवादार रखा जाता है और जरूरतानुसार ब्लॉक के साथ मिलकर उन्हें घर बनाकर दिया जाता है। International Women’s Day</li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 09:53:51 +0530</pubDate>
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