<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/nepal-politics/tag-34435" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Nepal Politics - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/34435/rss</link>
                <description>Nepal Politics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नेपाल में बालेन सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव, चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर तनातनी</title>
                                    <description><![CDATA[ नेपाल में कार्यपालिका और न्यायपालिका के मध्य तनाव खुलकर सामने आने लगा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पद पर वरिष्ठता क्रम की परंपरा से हटकर नियुक्ति की सिफारिश किए जाने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/clash-between-balen-government-and-judiciary-in-nepal-tension-over/article-84563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/nepal-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nepal Chief Justice Appointment Tensions: काठमांडू। नेपाल में कार्यपालिका और न्यायपालिका के मध्य तनाव खुलकर सामने आने लगा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पद पर वरिष्ठता क्रम की परंपरा से हटकर नियुक्ति की सिफारिश किए जाने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री बालेन शाह (PM Balen Shah)  की अध्यक्षता वाली संवैधानिक परिषद ने 7 मई को न्यायमूर्ति मनोज शर्मा को नेपाल के प्रधान न्यायाधीश पद के लिए राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल  के समक्ष अनुशंसित किया। विशेष बात यह रही कि न्यायमूर्ति शर्मा सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठता सूची में चौथे स्थान पर हैं। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल में परंपरागत रूप से सर्वोच्च न्यायालय (Nepal Supreme Court) के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया जाता रहा है। ऐसे में इस निर्णय ने दशकों पुरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहल तथा प्रतिनिधि सभा में विपक्ष के नेता भीष्म राज अंगदेम्बे ने परिषद के निर्णय पर असहमति प्रकट करते हुए लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्थापित परंपराओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला ने भी परिषद के निर्णय पर कड़ा प्रतिरोध व्यक्त किया।</p>
<p style="text-align:justify;">74वें राष्ट्रीय विधि दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के पश्चात उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को कार्यपालिका के प्रभाव में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय व्यवस्था को ऐसी संस्था में परिवर्तित करने का प्रयास हो रहा है, जो शासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दे। मल्ला ने कहा कि वरिष्ठता की स्थापित परंपरा को तोड़ना न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए गंभीर संकेत है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि न्यायमूर्ति मनोज शर्मा ने अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों की तुलना में अधिक दक्षता और कार्यक्षमता प्रदर्शित की है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सपना प्रधान मल्ला ने कहा कि केवल मामलों की संख्या के आधार पर किसी न्यायाधीश की योग्यता का आकलन नहीं किया जा सकता। न्यायिक निर्णयों की गुणवत्ता और उनके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। विधि दिवस समारोह के दौरान मल्ला ने न्यायाधीशों से निर्भीक होकर न्याय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव, बहुमत की शक्ति अथवा महाभियोग की आशंका से न्याय की गरिमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखने के लिए निष्पक्ष एवं साहसपूर्ण निर्णय आवश्यक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व प्रधान न्यायाधीश Sushila Karki ने भी परिषद के निर्णय की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अत्यंत योग्य महिला न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला को शीर्ष पद से वंचित करना निराशाजनक है। कार्की ने इसे देश की महिलाओं के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि न्यायपालिका में योग्यता और अनुभव को सर्वोच्च महत्व मिलना चाहिए। संवैधानिक विशेषज्ञ बिपिन अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि संविधान परिषद को कनिष्ठ न्यायाधीश की सिफारिश करने से नहीं रोकता, किंतु वरिष्ठता की परंपरा टूटने से भविष्य में सरकारों को अपनी पसंद के उम्मीदवारों को शीर्ष पदों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">इससे न्यायपालिका की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल निर्णयों की संख्या से नहीं किया जा सकता। न्यायिक दृष्टांत स्थापित करने की क्षमता तथा फैसलों की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण होती है। नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार, जो न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय में कम से कम तीन वर्ष तक सेवा दे चुका हो, वह प्रधान न्यायाधीश पद के लिए पात्र माना जाता है। हालांकि, अब तक सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को यह दायित्व सौंपने की परंपरा कायम रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/clash-between-balen-government-and-judiciary-in-nepal-tension-over/article-84563</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/clash-between-balen-government-and-judiciary-in-nepal-tension-over/article-84563</guid>
                <pubDate>Sun, 10 May 2026 16:10:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/nepal-supreme-court.jpg"                         length="36418"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम बनते ही बालेंद्र शाह का बड़ा एक्शन! पूर्व पीएम व पूर्व गृह मंत्री पर सख्त कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[KP Sharma Arrested: काठमांडू में राजनीतिक हलचल के बीच नेपाल की नई सरकार के गठन के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर Balendra Shah के नेतृत्व में सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli तथा पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/immediately-after-becoming-pm-balendra-shah-takes-strict-action-against-former-pm-kp-oli-and-former-home-minister/article-82818"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/nepal-former-pm-arrested.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">KP Sharma Arrested: काठमांडू में राजनीतिक हलचल के बीच नेपाल की नई सरकार के गठन के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर Balendra Shah के नेतृत्व में सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli तथा पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को हिरासत में लेने का निर्णय लागू किया। यह कार्रवाई पिछले वर्ष हुए तथाकथित “जेन-जी जनआंदोलन” से जुड़े घटनाक्रमों की जांच के संदर्भ में की गई है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान गृह मंत्री Sudan Gurung ने इस विषय में सामाजिक माध्यम के जरिए जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता विधि-सम्मत कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि शासन-व्यवस्था में किसी भी पद पर आसीन व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में प्रारंभिक चरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में नेपाल में भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी के मुद्दों को लेकर युवाओं के नेतृत्व में व्यापक विरोध-प्रदर्शन प्रारंभ हुए थे। प्रारंभ में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन बाद में कई स्थानों पर हिंसक हो गए, जिनमें अनेक लोगों की मृत्यु और संपत्ति की क्षति की घटनाएँ सामने आईं। उसी संदर्भ में तत्कालीन प्रशासनिक निर्णयों की भूमिका की जांच हेतु एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया गया था। Nepal News</p>
<h3>पुलिस ने शनिवार प्रातः गुंडू स्थित आवास से पूर्व प्रधानमंत्री ओली को हिरासत में लिया</h3>
<p style="text-align:justify;">नेपाली दैनिक The Himalayan Times की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने शनिवार प्रातः गुंडू स्थित आवास से पूर्व प्रधानमंत्री ओली को हिरासत में लिया। इसी क्रम में पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भक्तपुर क्षेत्र के कुटुंजे स्थित निवास से गिरफ्तार किया गया। दोनों के विरुद्ध सितंबर 2025 की घटनाओं से संबंधित आरोपों की जांच जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच आयोग की हाल ही में सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया था कि उस समय के कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों एवं राजनीतिक पदाधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी आधार पर दंड संहिता 2017 की धारा 182 के अंतर्गत प्रारंभिक कार्रवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में आयोग की अनुशंसाओं को लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके पश्चात गृह मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जांच प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश जारी किए। विधि सचिव स्तर पर भी पूरी रात रिपोर्ट के क्रियान्वयन से संबंधित प्रशासनिक प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया जारी रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम Nepal की समकालीन राजनीति में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। Nepal News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/immediately-after-becoming-pm-balendra-shah-takes-strict-action-against-former-pm-kp-oli-and-former-home-minister/article-82818</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/immediately-after-becoming-pm-balendra-shah-takes-strict-action-against-former-pm-kp-oli-and-former-home-minister/article-82818</guid>
                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:54:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-03/nepal-former-pm-arrested.jpg"                         length="61861"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        