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                <title>Strait of Hormuz - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अमेरिका-ईरान जंग के 6 महीने: किसका कितना नुकसान? तेल से लेकर LPG तक बढ़ी कीमतें, अरबों डॉलर का पड़ा बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान जंग के 6 महीने: किसका कितना नुकसान? तेल से लेकर LPG तक बढ़ी कीमतें, अरबों डॉलर का पड़ा बोझ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/6-months-of-us-iran-war-whose-loss-was-so-much/article-90470"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/strait-of-hormuz.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>28 फरवरी 2026</strong>... अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की तो पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया पर टिक गई। आशंका थी कि यह संघर्ष अगर लंबा चला तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल की कीमतें आसमान छूने, महंगाई बढ़ने, सप्लाई चेन टूटने और दुनिया में आर्थिक मंदी आने की आशंकाएं जताई गईं। अब इस संघर्ष को करीब <strong>छह महीने</strong> हो चुके हैं और तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल, गैस और रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन शुरुआती दौर में लगाए गए हर अनुमान सही साबित नहीं हुए। सबसे बड़ी बात यह है कि इस जंग की आर्थिक कीमत सभी देशों और लोगों ने बराबर नहीं चुकाई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तो आखिर <strong>छह महीने से जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष में किसका कितना नुकसान हुआ और किन लोगों या कंपनियों को इसका फायदा मिला?</strong></p>
<h2 style="text-align:justify;">पहले समझिए, छह महीने बाद युद्ध की स्थिति क्या है?</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ <strong>‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’</strong> शुरू किया था। इसके पीछे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण <strong>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</strong> को सुरक्षित रखना प्रमुख उद्देश्य बताया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लेकिन छह महीने बाद भी संघर्ष का कोई निर्णायक अंत नजर नहीं आ रहा। ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी खतरा बरकरार है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यानी स्थिति किसी निर्णायक जीत या हार के बजाय <strong>लंबे गतिरोध और महंगे सैन्य संघर्ष</strong> में बदलती दिखाई दे रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमेरिका पर पड़ा अरबों डॉलर का बोझ</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत अमेरिका को अपनी सैन्य कार्रवाई और मध्य पूर्व में बढ़ी सैन्य मौजूदगी के रूप में चुकानी पड़ रही है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के हवाले से करीब <strong>38 अरब डॉलर</strong>, यानी लगभग <strong>3.62 लाख करोड़ रुपये</strong>, खर्च होने का आंकड़ा सामने आया है। हालांकि, युद्ध की कुल लागत को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने दावा किया है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर युद्ध का बोझ <strong>100 अरब डॉलर</strong> तक पहुंच चुका है। यह शुरुआती 25 अरब डॉलर के अनुमान से करीब चार गुना ज्यादा है। यानी युद्ध की वास्तविक लागत को लेकर आंकड़ों में बड़ा अंतर है, लेकिन इतना साफ है कि अमेरिकी सरकार के लिए यह अभियान बेहद महंगा साबित हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हर अमेरिकी परिवार की जेब पर असर</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युद्ध का असर सिर्फ सरकारी बजट तक सीमित नहीं रहा। ईंधन, किराना और ब्याज दरों में बढ़ोतरी ने आम अमेरिकी परिवारों पर भी दबाव डाला है। मूडीज एनालिटिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांडी के अनुमान के मुताबिक, एक अमेरिकी परिवार पर करीब <strong>1,000 डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ</strong> आया है। इसमें लगभग 300 डॉलर ज्यादा गैसोलीन, 200 डॉलर ज्यादा किराने के सामान और करीब 150 डॉलर अधिक ब्याज लागत का अनुमान शामिल है। एक अन्य अनुमान के मुताबिक, युद्ध के बाद अमेरिकी लोगों ने गैसोलीन और डीजल पर करीब <strong>87 अरब डॉलर अतिरिक्त</strong> खर्च किए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना को भी भारी नुकसान</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक <strong>50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक</strong> क्षेत्र में तैनात हैं। युद्ध से जुड़ी सैन्य गतिविधियों में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं। दिए गए आंकड़ों के अनुसार करीब <strong>18 अमेरिकी सैनिकों की मौत</strong> हुई है, जबकि <strong>759 सैनिक घायल</strong> हुए हैं। इनमें ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और बाद के सैन्य अभियानों में हुए नुकसान को शामिल किया गया है। यानी आर्थिक कीमत के साथ-साथ अमेरिका को मानवीय कीमत भी चुकानी पड़ी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा आर्थिक मोर्चा</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर इस युद्ध के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव की बात करें तो <strong>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</strong> सबसे ऊपर आता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। युद्ध के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी। युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड करीब <strong>72 डॉलर प्रति बैरल</strong> के आसपास था। संघर्ष के दौरान कीमत करीब 120 डॉलर तक पहुंच गई और अप्रैल में यह लगभग <strong>126.41 डॉलर प्रति बैरल</strong> के स्तर तक भी गई। बाद में कीमतों में गिरावट आई और यह करीब <strong>88 डॉलर प्रति बैरल</strong> के आसपास आ गई। यानी अपने शिखर से काफी नीचे आने के बावजूद कीमत युद्ध-पूर्व स्तर से करीब 21 फीसदी ज्यादा बताई जा रही है। गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक होर्मुज क्षेत्र से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात घटकर करीब <strong>15-16 मिलियन बैरल प्रतिदिन</strong> रह गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमेरिका में पेट्रोल हुआ महंगा</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल की कीमतों का सीधा असर पेट्रोल पर पड़ा। 27 फरवरी 2026 को अमेरिका में गैसोलीन का राष्ट्रीय औसत करीब <strong>2.98 डॉलर प्रति गैलन</strong> था। अब यह करीब <strong>4.09 डॉलर प्रति गैलन</strong> बताया जा रहा है। यानी करीब <strong>37 फीसदी की बढ़ोतरी</strong>।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह बढ़ोतरी अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पेट्रोल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ी चलाने के खर्च पर नहीं पड़ता। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाद्य पदार्थों और दूसरे रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">खाद्य संकट का खतरा क्यों बढ़ा?</h4>
<ul>
<li class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युद्ध का असर ऊर्जा के साथ-साथ <strong>फर्टिलाइजर सप्लाई</strong> पर भी पड़ा है।</li>
<li class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उर्वरक की उपलब्धता में कमी का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता है। अगर किसान को डीजल, गैस और खाद के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़े तो उसका असर अंततः खाद्य कीमतों पर आ सकता है।</li>
<li class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिए गए आंकड़ों के मुताबिक फर्टिलाइजर की आवाजाही करीब <strong>6 लाख टन प्रति सप्ताह से घटकर 60 हजार टन</strong> रह गई।</li>
<li class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी संघर्ष के वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर गंभीर आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।</li>
<li class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी किसानों के लिए भी डीजल और उर्वरक महंगा होने से करीब <strong>31 अरब डॉलर</strong> के नुकसान का अनुमान सामने आया है।</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन युद्ध में कुछ लोगों को फायदा भी हुआ</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हर युद्ध की तरह इस संघर्ष में भी जहां बड़ी संख्या में देश, कंपनियां और आम लोग आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं, वहीं कुछ क्षेत्रों को फायदा भी मिला है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1. घबराकर शेयर नहीं बेचने वाले निवेशक</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में शुरुआती गिरावट आई। लेकिन इसके बाद अमेरिकी बाजारों में जोरदार रिकवरी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च के निचले स्तर से:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>डॉव जोन्स</strong> करीब 19 फीसदी चढ़ा।</li>
<li><strong>S&amp;P 500</strong> में करीब 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।</li>
<li><strong>नैस्डैक</strong> करीब 27 फीसदी ऊपर गया।</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस रिकवरी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी <strong>AI सेक्टर में तेजी</strong> को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यानी जिन निवेशकों ने घबराकर बाजार से पैसा नहीं निकाला, उन्हें बाद की रिकवरी से फायदा मिला।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2. क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियां</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महंगे तेल और ऊर्जा संकट ने दुनिया के सामने एक बार फिर सवाल खड़ा किया कि पेट्रोलियम पर निर्भरता कितनी सुरक्षित है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसका फायदा इलेक्ट्रिक व्हीकल और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कुछ देशों में EV बिक्री में जबरदस्त सालाना वृद्धि दर्ज की गई:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सिंगापुर में करीब <strong>110 फीसदी</strong></li>
<li>न्यूजीलैंड में करीब <strong>180 फीसदी</strong></li>
<li>कोलंबिया में करीब <strong>300 फीसदी</strong></li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">IEA के अनुमान के मुताबिक 2026 में वैश्विक वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब <strong>29 फीसदी</strong> हो सकती है, जबकि 2025 में यह करीब 25 फीसदी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऊर्जा संकट ने कई देशों को सोलर, न्यूक्लियर एनर्जी, घरेलू रिफाइनिंग और दूसरी वैकल्पिक ऊर्जा योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए भी मजबूर किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. अमेरिकी डिफेंस कंपनियों की बल्ले-बल्ले</h4>
<ul>
<li class="isSelectedEnd">युद्ध का एक बड़ा आर्थिक लाभ रक्षा उद्योग को मिला है।</li>
<li class="isSelectedEnd">मिसाइल, इंटरसेप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और दूसरी सैन्य तकनीकों की मांग बढ़ने से अमेरिकी रक्षा कंपनियों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिले।</li>
<li class="isSelectedEnd"><strong>लॉकहीड मार्टिन, जनरल डायनेमिक्स और नॉर्थrop ग्रुम्मन</strong> जैसी कंपनियों को बढ़ी हुई सैन्य मांग का फायदा हुआ है।</li>
<li class="isSelectedEnd">सबसे बड़े सौदों में से एक अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा लॉकहीड मार्टिन को दिया गया करीब <strong>58.6 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट</strong> है, जिसका उद्देश्य पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना है।</li>
<li class="isSelectedEnd">यह सात साल के लिए 2026 से 2032 तक का सौदा बताया गया है।</li>
<li>4. ट्रंप परिवार के कारोबारी हित</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युद्ध से जुड़े आर्थिक प्रभावों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़े कारोबारी हितों को लेकर भी सवाल उठे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ट्रंप परिवार के निवेश पोर्टफोलियो से जुड़ी कंपनियों को युद्ध के संभावित आर्थिक लाभार्थियों में शामिल किया गया है। हालांकि, इस तरह के दावों को अलग-अलग कंपनियों और निवेशों के स्तर पर स्वतंत्र रूप से जांचना जरूरी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">युद्ध की राजनीतिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छह महीने पहले जिस सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी जनता में काफी समर्थन दिखाई दे रहा था, अब उसके प्रति समर्थन में गिरावट का दावा किया जा रहा है। दिए गए सर्वे आंकड़ों के मुताबिक अब सिर्फ <strong>31 फीसदी अमेरिकी</strong> ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं, जबकि शुरुआती दिनों में यह आंकड़ा 83 फीसदी बताया गया था। वहीं करीब <strong>83 फीसदी अमेरिकी नागरिकों</strong> को लगता है कि युद्ध लंबा खिंच सकता है। इसका मतलब साफ है—युद्ध जितना लंबा होता जाएगा, सरकार के सामने सैन्य जीत के साथ-साथ जनता का समर्थन बनाए रखने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी होती जाएगी।</p>
<h1 style="text-align:justify;">अब बात भारत की—आम भारतीय की जेब पर कितना असर?</h1>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से भारत भी अछूता नहीं रहा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता दोनों पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिए गए आंकड़ों के मुताबिक युद्ध की वजह से भारत में महंगाई पर करीब <strong>2.5 फीसदी तक अतिरिक्त दबाव</strong> आया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">LPG की कीमतों में भी बढ़ोतरी बताई गई है। घरेलू गैस सिलेंडर करीब <strong>853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये</strong> और कमर्शियल सिलेंडर करीब <strong>1,768 रुपये से बढ़कर 3,071.50 रुपये</strong> तक पहुंचने का दावा किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खाने के तेल की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिला। सूरजमुखी तेल करीब <strong>15 रुपये प्रति लीटर</strong> और सरसों तेल करीब <strong>10 रुपये प्रति लीटर</strong> तक महंगा होने का आंकड़ा दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि, इन कीमतों में बदलाव को केवल युद्ध का परिणाम मानना सही नहीं होगा, क्योंकि भारत में ईंधन और खाद्य कीमतों पर घरेलू टैक्स, वैश्विक कमोडिटी कीमतें, विनिमय दर और सरकारी मूल्य निर्धारण जैसे कई कारक भी असर डालते हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">छह महीने बाद सबसे बड़ा सवाल—जीता कौन, हारा कौन?</h1>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान की यह जंग सिर्फ मिसाइलों और बमों की लड़ाई नहीं है। इसकी असली कीमत <strong>तेल, गैस, खाद्य पदार्थ, शिपिंग, रक्षा बजट और आम लोगों की जेब</strong> में दिखाई दे रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च किए हैं। ईरान की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ा है। यूरोप और एशिया ऊर्जा कीमतों से प्रभावित हुए हैं। किसानों की लागत बढ़ी है और दुनिया के सामने खाद्य सुरक्षा का खतरा पैदा हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी तरफ रक्षा कंपनियों, कुछ ऊर्जा और क्लीन-टेक कंपनियों तथा बाजार में टिके रहने वाले निवेशकों को फायदा भी मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>यानी छह महीने बाद इस युद्ध का कोई साफ आर्थिक विजेता नहीं है।</strong> कुछ सेक्टर और कुछ निवेशक जरूर फायदे में रहे हैं, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ी ऊर्जा कीमतें, सप्लाई चेन का दबाव और अनिश्चितता इसकी सबसे बड़ी कीमत बनकर सामने आई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">और अगर होर्मुज स्ट्रेट में संकट लंबा खिंचता है, तो आने वाले महीनों में असली आर्थिक नुकसान अभी और बड़ा हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:27:11 +0530</pubDate>
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                <title>Oil Price Hike: अमेरिका का ईरान पर 24 घंटे में दूसरी बार हमला, तेल की कीमतों में आया बड़ा उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी सेना के होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर फायरिंग करने के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू कर दिए, जिससे दोनों देशों के बीच नाजुक सीजफायर और बिगड़ गया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई संघर्ष की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/oil-price-hike-america-attacks-iran-for-the-second-time/article-88012"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/crude-oil-price-hike.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वॉशिंगटन। ईरानी सेना के होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर फायरिंग करने के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू कर दिए, जिससे दोनों देशों के बीच नाजुक सीजफायर और बिगड़ गया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई संघर्ष की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगी है। दोनों देशों के बीच फिर से एक-दूसरे पर हमले के बाद तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से रुकावट की आशंका बढ़ गई है। Oil Price Hike</p>
<p style="text-align:justify;">सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, शाम 6:03 बजे ईटी तक यूएस क्रूड फ्यूचर्स 3.4 प्रतिशत बढ़कर 73.87 डॉलर प्रति बैरल हो गए। इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 3.5 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 78.67 डॉलर पर पहुंच गया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ब्रेंट की कीमत थोड़ी ज्यादा, लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल बताई। यह युद्ध से पहले की कीमत से लगभग 9 प्रतिशत ज्यादा थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया, "आज शाम 5 बजे ईटी पर, यूएस सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ईरान के खिलाफ और हमले शुरू किए गए। सेंट्रल कमांड की ओर से बताया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में हमला करने से ईरान की क्षमता को कम करना इसका उद्देश्य है। सेंट्रल कमांड की ओर से आगे कहा गया, "कमांडर-इन-चीफ ने ईरानी सेनाओं को जवाबदेह ठहराने के लिए ये हमले करने का निर्देश दिया है।" Oil Price Hike</p>
<p style="text-align:justify;">वॉल स्ट्रीट जर्नल की ओर से कहा गया कि 24 घंटों में तीसरी बार अमेरिका की ओर से हमला किया गया। इससे पहले के हमलों में जलमार्ग के आसपास ईरानी मिसाइल और एयर-डिफेंस सिस्टम, छोटी नावें, रडार और हथियारों के स्टोरेज ठिकानों को निशाना बनाया गया था। अमेरिका के हमलों के बाद ईरानी सेनाओं की ओर से कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की गई। सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने कहा कि अमेरिकी विमानों ने एक ईरानी क्रूज मिसाइल और एक वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने कहा कि जलडमरूमध्य को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि जहाज कानूनी रूप से आवाजाही जारी रख सकते हैं। सीएनबीसी के अनुसार, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने कहा, "ईरान का जलडमरूमध्य पर नियंत्रण नहीं है। ट्रैफिक चल रहा है।" मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड ने शनिवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नौ जहाजों को ट्रैक किया। जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर ने कहा कि ओमान के जलक्षेत्र से होकर जाने वाला दक्षिणी मार्ग आने-जाने वाले ट्रैफिक के लिए खुला रहा। फिर भी, इसने नाविकों को "बहुत ज्यादा सावधानी" बरतने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यूयॉर्क टाइम्स ने मैरीटाइम डेटा कंपनी का हवाला देते हुए बताया कि युद्ध से पहले हर दिन 130 से ज्यादा जहाज हॉर्मुज का इस्तेमाल करते थे, लेकिन गुरुवार को केवल 22 जहाज ही यहां से गुजरे। डेटा कंपनी की मिडिल ईस्ट रिसर्च हेड, अमेना बक्र ने अखबार को बताया, "वह भरोसा बहुत तेजी से खत्म हो गया। हम फिर से वहीं पहुंच गए हैं, जहां से शुरू किया था।" फॉक्स न्यूज की ओर से जानकारी दी गई कि अमेरिका ने रात भर चले हमले में ईरान के लगभग 140 ठिकानों पर हमला किया। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। कुवैत ने कहा कि हमलों में तीन बॉर्डर पोस्ट और समुद्र में बने एक ऑयल प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचा, जिससे एक कर्मचारी घायल हो गया। Oil Price Hike</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 10:40:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>US Airstrikes: कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद बौखलाया अमेरिका, ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर किया बड़ा सैन्य हमला</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों के निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने भी ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया कि ये हमले सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों से किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-airstrikes-america-panicked-after-attacks-on-commercial-ships-launched/article-87765"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/us-airstrike-again.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वॉशिंगटन। ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों के निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने भी ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया कि ये हमले सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों से किए गए। यूएस सेंट्रल कमांड की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया गया, "यूएस सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने 7 जुलाई को ईरान के खिलाफ हमले का एक नया दौर पूरा किया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों के जवाब में, सटीक हथियारों से 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया।" US Airstrikes</p>
<p style="text-align:justify;">'एक्स' पर पोस्ट में आगे कहा गया, "अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार साइटों, एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं और जलडमरूमध्य के अंदर और उसके पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की 60 से ज्यादा छोटी नावों पर हमला किया। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार कॉरिडोर से होने वाले व्यापार पर ईरान के हमले जारी रखने की क्षमता को कम करना था।"</p>
<p style="text-align:justify;">यूएसए के अनुसार, ईरान ने हाल ही में जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था, जिनमें मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एम/टी अल रेकय्यात, सऊदी अरब के झंडे वाला एम/टी वेड्यान और लाइबेरिया के झंडे वाला एम/टी साइप्रस प्रॉस्पेरिटी शामिल हैं। US Airstrikes</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया, "ईरानी सेनाओं की तरफ से बिना किसी उकसावे के की गई आक्रामकता, युद्धविराम का साफ और खतरनाक उल्लंघन है और यह नेविगेशन की आजादी को कमजोर करती है।" आगे कहा गया, "जब समझौते का पालन नहीं किया जाता है या उसे नहीं माना जाता है, तो अमेरिकी सेनाएं ईरान को जवाबदेह ठहराने के लिए तैयार रहती हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में ईरान के कई सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया गया, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर, तटीय रडार इंस्टॉलेशन, एंटी-शिप मिसाइल क्षमताएं और होर्मुज जलडमरूमध्य के अंदर और उसके आसपास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की ओर से संचालित दर्जनों नावें शामिल थीं। US Airstrikes</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:19:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई की मौत के बाद हॉर्मुज में बढ़ा तनाव, दो जहाजों पर हमला, अमेरिका ने ईरान पर लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[खामेनेई की मौत के बाद हॉर्मुज में बढ़ा तनाव, दो जहाजों पर हमला, अमेरिका ने ईरान पर लगाया आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/tension-increased-in-hormuz-after-khameneis-death-america-accused-iran/article-87718"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/strait-of-hormuz.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश में शोक का माहौल बताया जा रहा है। इसी बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में दो जहाजों पर हमले की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर रहे दो जहाजों को मिसाइलों से निशाना बनाया गया, जिससे दोनों जहाजों को गंभीर नुकसान पहुंचा। हालांकि राहत की बात यह रही कि हमले में किसी भी चालक दल के सदस्य के हताहत होने की सूचना नहीं है और सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पत्रकार बराक राविद की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह हमला क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाने वाला कदम है। हालांकि, इस घटना को लेकर ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक चले सैन्य तनाव के बाद युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर इस क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान को करारा जवाब दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब ईरान अपने मृतकों के शोक में है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग भी तेज होती दिखाई दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या हमला अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा पर व्यापक असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:28:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>India News: ऊर्जा संकट में भी भारत सुरक्षित, भारत के 12 एलपीजी जहाजों ने हॉर्मुज स्ट्रेट बिना टोल दिए किया पार: हरदीप पुरी </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि भारत के 12 एलपीजी जहाजों ने हॉर्मुज स्ट्रेट बिना टोल दिए पार किया है, साथ ही कुकिंग गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए तेजी से रिफाइनरियों में बदलाव किए। इन उपायों ने देश को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट से निपटने में मदद की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/india-news-india-safe-even-in-energy-crisis-12-lpg/article-87333"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/hardeep-singh-puri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Energy Crisis: नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि भारत के 12 एलपीजी जहाजों ने हॉर्मुज स्ट्रेट बिना टोल दिए पार किया है, साथ ही कुकिंग गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए तेजी से रिफाइनरियों में बदलाव किए। इन उपायों ने देश को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट से निपटने में मदद की। चार महीने तक होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि सरकार ने बिना रुकावट ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को इस व्यवधान के असर से बचाने के लिए कई आपातकालीन उपाय किए। India News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "जब दुनिया ऊर्जा के सबसे बुरे संकटों में से एक और बाधित आपूर्ति श्रृंखलाओं का सामना कर रही थी, तब पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ऊर्जा उपभोक्ताओं को किसी भी नकारात्मक असर से प्रभावी ढंग से बचाया।" मंत्री ने कहा कि भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाकर, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करके और कई देशों से एलपीजी की वैकल्पिक सप्लाई सुनिश्चित करके घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई की कमी से बचाया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार के कदमों से यह सुनिश्चित हुआ कि ग्लोबल एनर्जी संकट के बावजूद कुकिंग गैस और ईंधन की सप्लाई स्थिर बनी रही। संकट के दौरान उठाए गए कदमों में मार्च में ईंधन पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती भी शामिल थी। उन्होंने कहा, "घरों तक पहुंचने वाली कुकिंग गैस की पूरी सुरक्षा की गई और कालाबाजारी करने वालों द्वारा इस कीमती सप्लाई की हेराफेरी रोकने के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड जरूरी कर दिया गया।" India News</p>
<p style="text-align:justify;">पुरी ने बताया कि जिन रिफाइनरियों में पहले कभी कुकिंग गैस का उत्पादन नहीं हुआ था, उनमें उत्पादन बढ़ाने के लिए कुछ ही दिनों में बदलाव किए गए। नतीजतन, एलपीजी का उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) प्रतिदिन से बढ़कर 54 टीएमटी प्रतिदिन हो गया। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने अल्जीरिया, जापान और कनाडा जैसे देशों के साथ एलपीजी सप्लाई के नए इंतजाम किए, साथ ही घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका से अतिरिक्त खेप हासिल कीं। India News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:32:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट में फंसे श्रीगंगानगर के वाइस कैप्टन संजय माहर सहित 21 क्रू मेंबर, वीडियो आया सामने</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय की पुष्टि, ईरानी कार्रवाई के बावजूद राजस्थान के वाइस कैप्टन संजय माहर समेत सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित श्रीगंगानगर। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत-बाउंड कंटेनर शिप ‘एपामिनोडेस’ पर फायरिंग और कब्जे की घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने आज आधिकारिक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/21-crew-members-including-vice-captain-sanjay-mahar-from-sri-ganganagar-stranded-in-the-strait-of-hormuz/article-83827"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/captain-sanjay-mahar.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय की पुष्टि, ईरानी कार्रवाई के बावजूद राजस्थान के वाइस कैप्टन संजय माहर समेत सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित</h3>
<p style="text-align:justify;">श्रीगंगानगर। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत-बाउंड कंटेनर शिप ‘एपामिनोडेस’ पर फायरिंग और कब्जे की घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने आज आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। इस जहाज पर श्रीगंगानगर के सद्भावना नगर निवासी वाइस कैप्टन संजय माहर (38) अकेले भारतीय क्रू सदस्य के रूप में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि दो विदेशी जहाजों पर फायरिंग हुई है जिसमें कुछ भारतीय नागरिक शामिल हैं और वे सभी सुरक्षित हैं। मंत्रालय ईरान सरकार से लगातार बातचीत कर बाकी जहाजों को वापस लाने के प्रयास कर रहा है। <span style="text-align:justify;color:#222222;font-family:Verdana, BlinkMacSystemFont, '-apple-system', 'Segoe UI', Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, 'Open Sans', 'Helvetica Neue', sans-serif;font-size:15px;">Sri Ganganagar News</span></p>
<h3>जहाज के अंदर का वीडियो भी परिवार को भेजा</h3>
<p style="text-align:justify;">संजय ने विगत बुधवार सुबह परिवार को फोन करके पूरी घटना बताई और बताया कि ईरानी सेना ने उनके जहाज पर फायरिंग की जिसके बाद पूरा क्रू अंदर शरण लेने को मजबूर हो गया। उन्होंने जहाज के अंदर का वीडियो भी परिवार को भेजा,जिसमें सभी 21 क्रू सदस्य दिख रहे हैं। संजय पिछले 15 साल से मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं। वे 20 दिन पहले सऊदी अरब से इस लाइबेरिया-फ्लैग वाले जहाज पर सवार हुए थे जो गुजरात के मुंद्रा पोर्ट जा रहा था। जहाज परमिशन का इंतजार कर रहा था लेकिन जैसे ही होर्मुज स्ट्रेट पार करने लगा ईरानी बलों ने कार्रवाई कर दी। ईरान का आरोप है कि जहाज में नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की गई थी और बिना अनुमति गुजरने की कोशिश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">संजय के परिवार ने विदेश मंत्रालय की इस पुष्टि से राहत की सांस ली है लेकिन वे अभी भी संजय की तुरंत सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की है कि राजनयिक स्तर पर तेज हस्तक्षेप किया जाए। परिवार के सदस्यों ने कहा कि विदेश मंत्रालय की पुष्टि से वे थोड़े आश्वस्त हैं लेकिन संजय को घर वापस लाने तक उनकी चिंता बनी रहेगी। विधायक जयदीप बिहाणी भी परिवार के साथ खड़े होकर उच्च स्तर पर बात कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ईरान के साथ लगातार संपर्क में है और भारतीय नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए गए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अन्य भारतीय सीफारर्स भी सुरक्षित हैं और भारत ने ईरान से जहाज की रिहाई तथा क्रू की सुरक्षा की गारंटी मांगी है।<span style="text-align:justify;color:#222222;font-family:Verdana, BlinkMacSystemFont, '-apple-system', 'Segoe UI', Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, 'Open Sans', 'Helvetica Neue', sans-serif;font-size:15px;"> Sri Ganganagar News</span></p>
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:02:50 +0530</pubDate>
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                <title>Iran-US Conflict: ईरान संघर्ष पर बड़ी चेतावनी: टकराव का सबसे गंभीर व खतरनाक दौर आना अभी बाकी</title>
                                    <description><![CDATA[Ray Dalio Warning: नई दिल्ली। दुनिया के जाने-माने निवेशक और ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो ने ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इस टकराव का सबसे गंभीर और निर्णायक चरण अभी बाकी है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर होने वाली अंतिम लड़ाई ही यह तय करेगी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/major-warning-on-the-iran-conflict-the-most-severe-and-dangerous-phase-of-the-confrontation-is-yet-to-come/article-83364"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/ray-dalio.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ray Dalio Warning: नई दिल्ली। दुनिया के जाने-माने निवेशक और ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो ने ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इस टकराव का सबसे गंभीर और निर्णायक चरण अभी बाकी है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर होने वाली अंतिम लड़ाई ही यह तय करेगी कि इस युद्ध में कौन जीतेगा और कौन हारेगा। Iran-US Conflict</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी अरबपति डालियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस संघर्ष में शामिल सभी पक्ष जानते हैं कि असली और निर्णायक लड़ाई अभी नहीं लड़ी गई है। उनके अनुसार, यह ‘फाइनल बैटल’ ही युद्ध का परिणाम तय करेगी और इसका असर लंबे समय तक वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना को लगभग खारिज करते हुए कहा कि इस स्थिति में समझौते ‘बेकार’ साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा है कि आगे आने वाला दौर इस संघर्ष का सबसे खतरनाक चरण हो सकता है।</p>
<h3>”अमेरिका ऐसा करने में विफल रहता है, तो इसे उसकी हार मानी जाएगी”</h3>
<p style="text-align:justify;">डालियो के मुताबिक, पूरे संघर्ष का केंद्र एक अहम सवाल पर टिका है—क्या अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित व्यापारिक आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसा करने में विफल रहता है, तो इसे उसकी हार मानी जाएगी, भले ही ईरान को थोड़ी भी नियंत्रण शक्ति मिल जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसमें खाड़ी देशों के साथ संबंधों को नुकसान, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, सहयोगी देशों का भरोसा कम होना और डॉलर की वैश्विक स्थिति पर खतरा शामिल है। इससे निवेश और पूंजी का रुख भी बदल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पांच शताब्दियों के साम्राज्यवादी चक्रों के अपने अध्ययन के आधार पर, डालियो ने कहा कि अगर अमेरिका इस संकट को संभालने में विफल रहता है, तो यह स्थिति 1956 के स्वेज नहर संकट जैसी हो सकती है, जिसने ब्रिटेन की वैश्विक ताकत को कमजोर कर दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह का पैटर्न 18वीं शताब्दी में डच साम्राज्य और 17वीं शताब्दी में स्पेनिश साम्राज्य के पतन के दौरान भी देखा गया था, जब किसी अहम व्यापारिक मार्ग पर नियंत्रण खोने से वैश्विक शक्ति संतुलन बदल गया। डालियो के मुताबिक, ईरान-होर्मुज संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है। Iran-US Conflict</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 16:37:29 +0530</pubDate>
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                <title>भारत का एक और एलपीजी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट को पार करके भारत पहुंचा, दो और टैंकर लाइन में</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर Green Sanvi LPG tanker सुरक्षित रूप से Strait of Hormuz से होकर गुजर गया है। जहाज निगरानी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव शुरू होने के बाद यह इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार करने वाला सातवाँ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/another-indian-lpg-tanker-crosses-the-strait-of-hormuz-and-arrives-in-india-two-more-tankers-in-the-pipeline/article-83079"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/houmuz-india-lpg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर Green Sanvi LPG tanker सुरक्षित रूप से Strait of Hormuz से होकर गुजर गया है। जहाज निगरानी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव शुरू होने के बाद यह इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार करने वाला सातवाँ भारतीय एलपीजी पोत है। सूत्रों के अनुसार यह टैंकर ईरान के समुद्री क्षेत्र के निर्धारित मार्ग का उपयोग करते हुए सावधानीपूर्वक आगे बढ़ा। अनुमान है कि जहाज में लगभग 44 हजार टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लदी हुई है, जो भारत की लगभग आधे दिन की घरेलू खपत के बराबर मानी जा रही है। India News</p>
<p style="text-align:justify;">समुद्री परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में भारतीय ध्वज वाले दो अन्य एलपीजी टैंकर Green Asha LPG tanker तथा Jag Vikram LPG tanker के भी इसी मार्ग से होकर भारत पहुँचने की संभावना है। इससे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता बनाए रखने में सहायता मिलेगी। बताया गया है कि वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने वाले सभी सात भारतीय जहाज एलपीजी टैंकर रहे हैं। इनके सुरक्षित पारगमन के साथ ही फारस की खाड़ी क्षेत्र के पूर्वी भाग में भारतीय ध्वज वाले कुल 17 व्यापारी जहाज मौजूद बताए जा रहे हैं।</p>
<h3>मित्र देशों से संबंधित जहाजों को समन्वय के साथ गुजरने की अनुमति प्रदान की जा रही है</h3>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध शिपिंग अभिलेखों के अनुसार इन जहाजों में अतिरिक्त एलपीजी टैंकरों के अलावा कच्चे तेल के टैंकर, एलएनजी पोत, रासायनिक उत्पाद वाहक जहाज, कंटेनर पोत तथा बल्क कैरियर भी शामिल हैं। कुछ जहाज नियमित रखरखाव कार्यों में भी संलग्न बताए गए हैं। भारत सरकार समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संबंधित देशों के साथ राजनयिक स्तर पर निरंतर संवाद बनाए हुए है। क्षेत्रीय तनाव के चलते जहाजों की आवाजाही पर आंशिक प्रतिबंध लगाए गए थे, किन्तु मित्र देशों से संबंधित जहाजों को समन्वय के साथ गुजरने की अनुमति प्रदान की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिया है कि भारत सहित कुछ देशों के जहाजों को निर्धारित समन्वय प्रक्रिया के तहत इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। India News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 15:29:08 +0530</pubDate>
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