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                <title>West Bengal Politics - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>West Bengal Politics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में जबरन वसूली-भ्रष्टाचार के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद और पूर्व विधायक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो नेताओं को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया है। इनमें एक मौजूदा नगर निगम पार्षद और एक पूर्व विधायक शामिल हैं। दोनों पर जबरन वसूली, जमीन से जुड़े विवादों और अन्य गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trinamool-congress-councilor-and-former-mla-arrested-on-charges-of/article-86025"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/arrested-photo8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो नेताओं को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया है। इनमें एक मौजूदा नगर निगम पार्षद और एक पूर्व विधायक शामिल हैं। दोनों पर जबरन वसूली, जमीन से जुड़े विवादों और अन्य गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के वार्ड संख्या 101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को कथित जबरन वसूली के मामले में हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें थाने लाया गया, तो वहां मौजूद लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की। पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और शिकायतों की जांच कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राजनीतिक सफर और विवाद</h3>
<p style="text-align:justify;">बप्पादित्य दासगुप्ता का राजनीतिक सफर भाजपा से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। नगर निगम राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्हें पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली थीं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उन पर स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगते रहे हैं, जिनमें कथित आर्थिक अनियमितताओं और निर्माण कार्यों से जुड़े विवाद शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे मामले में पश्चिम मिदनापुर जिले की मेदिनीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि उनके खिलाफ जमीन कब्जाने, जबरन वसूली और अन्य मामलों से संबंधित शिकायतें दर्ज थीं।<br />जांच एजेंसियों के अनुसार, सुजॉय हाजरा पिछले कुछ समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में थे। पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन बाद में उन्हें रेलवे स्टेशन क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जांच जारी, पुलिस जुटा रही साक्ष्य</h3>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में जांच प्रक्रिया जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी आरोपों और तथ्यों की गहन जांच की जाएगी। राज्य में इन दोनों गिरफ्तारियों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 14:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Trinamool Congress Crisis:: ममता बनर्जी की टीएमसी में मचा सियासी घमासान, ममता ने लिया ये बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती सियासी हलचल को देखते हुए ममता बनर्जी ने बड़ा फैसला करते हुए पार्टी की सभी समितियां और फ्रंटल संगठन को भंग किया। संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trinamool-congress-crisis-political-turmoil-in-mamta-banerjees-tmc-mamta/article-85827"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/tmc-mamta.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Trinamool Congress Crisis: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ता में 15 साल तक काबिज रही टीएमसी अब टूटने के कगार पर है और पार्टी को बचाने के लिए पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अहम फैसला लिया है। इस फैसले के तहत पार्टी की सभी समितियां, साथ ही इसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग कर दिए जाएंगे। TMC News</p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले के पीछे कारण यह है कि तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे। उनके साथ पार्टी के 59 विधायकों के समर्थन पत्र भी थे। उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही राज्य में मुख्य विपक्षी दल है, जबकि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार गुट अब अल्पमत में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए टीएमसी ने लिखा कि सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां, साथ ही इसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग कर दिए जाएंगे। पोस्ट में आगे लिखा गया कि पार्टी हर स्तर पर आत्मनिरीक्षण, प्रदर्शन समीक्षा, और संगठनात्मक मूल्यांकन का व्यापक अभ्यास करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अभ्यास के निष्कर्षों के आधार पर, मूल निकाय और सभी फ्रंटल संगठनों की संगठनात्मक संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर घोषणा की जाएगी। पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने और नए जोश और उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। TMC News</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में जब ममता बनर्जी ने टीएमसी विधायकों की बैठक बुलाई थी, तब 60 विधायकों ने बैठक से दूरी बना ली थी। तभी से कयास लगाए जाने लगे थे कि ममता बनर्जी की पार्टी टूट सकती है। इसी बीच, सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों को तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा वाली मांग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह किस तरह के जननेता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी की करारी हार के बाद वह 26 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले। अब वह अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की मांग कर रहे हैं। इससे पहले वह कहते थे कि जनता उनकी रक्षा के लिए मौजूद है। फिर अब उन्हें सुरक्षा बलों की जरूरत क्यों पड़ रही है? उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर तृणमूल कांग्रेस को कॉर्पोरेट शैली में चलाने का आरोप भी लगाया। ऋतब्रत ने कहा कि पार्टी पूरी तरह इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) पर निर्भर होकर काम कर रही है। TMC News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:20:42 +0530</pubDate>
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                <title>Abhishek Banerjee Attacked: बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला, मारे गए थप्पड़ व फेंके गए अंडे</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वह कथित तौर पर चुनाव बाद हुई हिंसा के शिकार एक पार्टी कार्यकर्ता से मिलने पहुंचे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/abhishek-banerjee-attacked-tmc-mp-abhishek-banerjee-attacked-in-bengal/article-85702"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/abhishek-benerjee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Abhishek Banerjee Attacked: कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वह कथित तौर पर चुनाव बाद हुई हिंसा के शिकार एक पार्टी कार्यकर्ता से मिलने पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर को सीआईडी द्वारा पूछताछ के लिए नोटिस मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी अपने कोलकाता स्थित कालीघाट रोड आवास से सोनारपुर के लिए रवाना हुए। West Bengal News</p>
<p style="text-align:justify;">रास्ते में कमालगाजी इलाके में कुछ महिलाओं ने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध जताया। सोनारपुर पहुंचने पर विरोध और तेज हो गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे और उन्हें “चोर” कहकर संबोधित किया। इस दौरान अभिषेक बनर्जी अपनी कार से उतरकर एक स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ता की मोटरसाइकिल पर सवार होकर आगे बढ़ने लगे। इसी बीच प्रदर्शनकारियों की भीड़ उनकी ओर बढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोप है कि कुछ महिलाओं ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और थप्पड़ भी मारे। कई प्रदर्शनकारियों ने उन पर अंडे फेंके, जबकि कुछ ने पत्थर भी मारे, हालांकि पत्थर उन्हें नहीं लगे। हंगामे के दौरान उनकी शर्ट भी फट गई। सिर पर अंडे लगने के बाद उन्होंने सुरक्षा के लिए क्रिकेट हेलमेट पहन लिया। West Bengal News</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि हमला भाजपा समर्थित गुंडों द्वारा कराया गया। उन्होंने कहा कि वह अपने पार्टी कार्यकर्ता संजू कर्मकार से मिलने गए थे, जो कथित तौर पर चुनाव बाद हिंसा का शिकार हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले के समय वहां पुलिस मौजूद नहीं थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि वह इस मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि को भी पूरी घटना की जानकारी देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 4 मई से अभिषेक बनर्जी सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर थे। शनिवार को उन्होंने पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इससे पहले उन्होंने उत्तर कोलकाता के बेलियाघाटा क्षेत्र में भी कथित चुनाव बाद हिंसा के एक अन्य पीड़ित पार्टी कार्यकर्ता से मुलाकात की थी। West Bengal News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 20:15:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहली बार हुआ ऐसा! चुनाव जीतने वाला पक्ष ही हुआ हिंसा का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से तीखे संघर्ष, राजनीतिक टकराव और हिंसक घटनाओं के लिए चर्चा में रही है। राज्य की राजनीतिक संस्कृति में कई ऐसे शब्द और मुहावरे प्रचलित रहे हैं, जो केवल भाषाई अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष और प्रभाव की राजनीति का प्रतीक बन चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/for-the-first-time-in-the-politics-of-west-bengal/article-84402"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/bengal-ec-first.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">West Bengal Political Violence: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से तीखे संघर्ष, राजनीतिक टकराव और हिंसक घटनाओं के लिए चर्चा में रही है। राज्य की राजनीतिक संस्कृति में कई ऐसे शब्द और मुहावरे प्रचलित रहे हैं, जो केवल भाषाई अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष और प्रभाव की राजनीति का प्रतीक बन चुके हैं। West Bengal News</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल में सत्ता परिवर्तन भले कई बार हुआ हो, लेकिन राजनीतिक हिंसा की प्रवृत्ति विभिन्न दौरों में अलग-अलग रूपों में बनी रही। कांग्रेस शासनकाल से लेकर वाम मोर्चा और बाद में तृणमूल कांग्रेस के दौर तक विपक्षी दल लगातार चुनावी हिंसा, दबाव और स्थानीय स्तर पर भय का माहौल बनाने के आरोप लगाते रहे हैं। ‘दम दम दवाई’ जैसे शब्दों की उत्पत्ति राज्य के पुराने जन आंदोलनों से जुड़ी मानी जाती है। समय के साथ यह शब्द राजनीतिक विरोध को दबाने या सख्त कार्रवाई के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल होने लगा। राजनीतिक हलकों में इसे अक्सर ताकत प्रदर्शन और प्रत्यक्ष दबाव की रणनीति के रूप में देखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक कैडर आधारित राजनीति प्रभावी रही, जहां स्थानीय स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए प्रभावशाली समूहों और बाहुबलियों का उपयोग होने के आरोप लगते रहे। चुनावों के दौरान बूथ नियंत्रण, विरोधियों को डराने और क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित करने जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा में रहे हैं। वाम मोर्चा शासनकाल के दौरान ‘वैज्ञानिक धांधली’ शब्द काफी चर्चित हुआ। West Bengal News</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दलों का आरोप था कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र और स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं नंदीग्राम जैसी घटनाओं ने राज्य की राजनीति में हिंसा और टकराव को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया। 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक संघर्ष और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में ‘कट मनी’ और स्थानीय सिंडिकेट व्यवस्था जैसे मुद्दे बार-बार उठे। विपक्षी दलों ने कई चुनावों के दौरान हिंसा और राजनीतिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। हाल के वर्षों में भाजपा के उभार के साथ बंगाल की राजनीति और अधिक आक्रामक होती दिखाई दी।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनावों के बाद विभिन्न दलों ने अपने कार्यकर्ताओं पर हमलों और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाए। हालिया घटनाओं में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों ने एक बार फिर राज्य की राजनीतिक संस्कृति और कानून व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को हिंसा और भय की राजनीति से दूर रहकर संवाद और शांतिपूर्ण प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ना होगा। West Bengal News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:03:19 +0530</pubDate>
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