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                <title>Iran Israel War Update - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Iran Israel War Update RSS Feed</description>
                
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                <title>Iran Israel War: ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले तेज, कितने दिन टिक पाएगा युद्ध? मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक जानिए ईरान की पूरी सैन्य ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने सीरिया और ईरान के तटीय इलाकों में एक बार फिर हवाई और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य बलों ने रात के समय सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास जैसे इलाकों को निशाना बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/iran-israel-war-america-israel-attacks-on-iran-intensify-how-long/article-90652"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/iran-israel-war.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Iran Israel War Update: अमेरिका ने सीरिया और ईरान के तटीय इलाकों में एक बार फिर हवाई और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य बलों ने रात के समय सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास जैसे इलाकों को निशाना बनाया। इन ताबड़तोड़ हमलों में 19 लोगों की मौत और 68 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ईरान कितने समय तक अमेरिका और इजराइल जैसी सैन्य ताकतों का सामना कर सकता है? उसकी मिसाइल क्षमता, ड्रोन नेटवर्क, सैन्य बल और भूमिगत ठिकाने इस युद्ध में कितने कारगर साबित हो सकते हैं?</p>
<h4 style="text-align:justify;">सीधी लड़ाई में कितने दिन टिक सकता है ईरान?</h4>
<p style="text-align:justify;">सैन्य विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ सीधी और बेहद तीव्र सैन्य भिड़ंत जारी रहती है तो ईरान अपनी मौजूदा सैन्य क्षमता के दम पर करीब 15 से 45 दिनों तक पूरी ताकत के साथ मुकाबला कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसके बाद ईरान की युद्ध क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अगर तेहरान पारंपरिक सीधी लड़ाई के बजाय छिटपुट मिसाइल हमले, ड्रोन अटैक और गुरिल्ला रणनीति अपनाता है, तो वह संघर्ष को कई महीनों तक खींच सकता है और फारस की खाड़ी तथा पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बनाए रख सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ईरान की सबसे बड़ी ताकत हैं बैलिस्टिक मिसाइलें</h4>
<p style="text-align:justify;">ईरान के सैन्य भंडार में बैलिस्टिक मिसाइलों को उसकी सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक ताकतों में गिना जाता है। संघर्ष की शुरुआत में उसके पास करीब 3,000 बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा होने का अनुमान लगाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद अब करीब 2,500 मिसाइलें और लॉन्चर बचे होने की बात कही जा रही है। ईरान हर महीने लगभग 100 नई मिसाइलों का उत्पादन भी कर रहा है। हालांकि, युद्ध में मिसाइलों के इस्तेमाल की रफ्तार उत्पादन की गति से काफी ज्यादा है। इसके बावजूद उपलब्ध खुफिया आकलनों के अनुसार ईरान अपनी मूल मिसाइल क्षमता का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखने में सफल रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भूमिगत सुरंगों में छिपी मिसाइलें बन सकती हैं बड़ी चुनौती</h4>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने लंबे समय से अपनी सैन्य रणनीति में भूमिगत ठिकानों को अहम भूमिका दी है। मिसाइलों और लॉन्चरों को सुरंगों, भूमिगत अड्डों और तहखानों में सुरक्षित रखने की वजह से दुश्मन के लिए उन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि करीब 2,100 मिसाइलें भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित हैं। इसके अलावा लगभग 60 से 70 प्रतिशत मोबाइल मिसाइल लॉन्चर अभी भी सक्रिय स्थिति में हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अन्य रणनीतिक लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ड्रोन नेटवर्क ईरान का सबसे सस्ता लेकिन खतरनाक हथियार</h4>
<p style="text-align:justify;">मिसाइलों के अलावा ईरान की दूसरी बड़ी ताकत उसका ड्रोन नेटवर्क है। उसके पास शाहेद-136 जैसे हजारों कम लागत वाले आत्मघाती ड्रोन मौजूद बताए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत उनकी कम कीमत और बड़ी संख्या है। ऐसे हथियारों के जरिए ईरान महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार व्यस्त रखने और विरोधी देशों के सैन्य ठिकानों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञों के लिए ईरान की सैन्य ताकत का आकलन केवल उसके लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की संख्या से करना पर्याप्त नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">6 लाख सैनिकों की बड़ी सेना, लेकिन तकनीकी चुनौती बरकरार</h4>
<p style="text-align:justify;">पारंपरिक सैन्य क्षमता की बात करें तो ईरान के पास करीब 6 लाख सक्रिय सैनिकों की बड़ी सेना है। उसके पास बड़ी संख्या में सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर और नौसैनिक संसाधन भी मौजूद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के पास कुल करीब 551 सैन्य विमान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 188 फाइटर जेट्स शामिल हैं। इसके अलावा करीब 128 हेलीकॉप्टर और 28 से 30 पनडुब्बियां भी उसके सैन्य बेड़े का हिस्सा हैं। हालांकि, अमेरिका और इजराइल की अत्याधुनिक वायु शक्ति, निगरानी तकनीक, सटीक हथियारों और एयर डिफेंस क्षमता के सामने ईरान के पारंपरिक सैन्य संसाधनों की सीमाएं भी सामने आ सकती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">परमाणु हथियार नहीं, लेकिन यूरेनियम संवर्धन बना बड़ी चिंता</h4>
<p style="text-align:justify;">परमाणु हथियारों को लेकर ईरान की स्थिति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रही है। आधिकारिक तौर पर ईरान के पास परमाणु बम होने की पुष्टि नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम अमेरिका और इजराइल के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चिंताओं में शामिल है। यही वजह है कि ईरान की परमाणु क्षमता और उसके परमाणु ढांचे पर किसी भी संघर्ष में विशेष नजर बनी रहती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रूस और चीन से मिलने वाली मदद कितना बदल सकती है युद्ध की तस्वीर?</h4>
<p style="text-align:justify;">युद्ध के दौरान सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान अपने रक्षा उत्पादन को पूरी तरह ठप नहीं होने दे रहा है। रिपोर्टों में रूस और चीन से अप्रत्यक्ष तकनीकी सहायता तथा कलपुर्जों की आपूर्ति का भी उल्लेख किया जाता है।  ईरान के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह कम लागत वाली मिसाइल और ड्रोन तकनीक के जरिए अपने सैन्य संसाधनों की भरपाई करने की कोशिश कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यानी अमेरिका और इजराइल के पास जहां अत्याधुनिक और बेहद महंगे हथियारों की ताकत है, वहीं ईरान बड़ी संख्या में अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करके युद्ध की कीमत बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सीधी जंग बनाम लंबी लड़ाई की रणनीति</h4>
<p style="text-align:justify;">अगर संघर्ष केवल आमने-सामने की पारंपरिक लड़ाई तक सीमित रहता है, तो ईरान के लिए लंबे समय तक अमेरिका और इजराइल का मुकाबला करना बेहद मुश्किल हो सकता है। उसकी मिसाइलों, लॉन्चरों, विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों पर लगातार हमले उसकी क्षमता को तेजी से प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अगर ईरान संघर्ष को मिसाइल हमलों, ड्रोन अटैक, समुद्री दबाव और गुरिल्ला रणनीति में बदल देता है, तो तस्वीर काफी अलग हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी स्थिति में युद्ध कुछ हफ्तों की सीधी सैन्य भिड़ंत के बजाय कई महीनों तक चलने वाले क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। यही ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की सैन्य ताकत को केवल अमेरिका और इजराइल की तुलना में देखना सही तस्वीर नहीं देता। सीधी और तीव्र लड़ाई में उसके संसाधनों पर दबाव तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन बड़ी संख्या में मिसाइलें, हजारों ड्रोन, मोबाइल लॉन्चर, भूमिगत ठिकाने और विशाल सैन्य बल उसे लंबी अवधि तक संघर्ष जारी रखने की क्षमता देते हैं।<br />इसलिए आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि ईरान कितने दिनों में युद्ध हार सकता है, बल्कि यह होगा कि वह इस संघर्ष को कितने समय तक महंगी और अस्थिर क्षेत्रीय लड़ाई में बदल सकता है।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-09/iran-israel-war.jpeg" alt="Iran Israel War" width="631" height="356"></img>
Iran Israel War: ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले तेज, कितने दिन टिक पाएगा युद्ध मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक जानिए ईरान की पूरी सैन्य ताकत
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 11:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट पर भारत चिंतित, बढ़ते हमले रोकने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/indias-concern-over-west-asia-crisis-appeals-to-stop-increasing/article-86083"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/bharat-stetement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India on West Asia Conflict: नई दिल्ली। भारत ने सोमवार को पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ते हमलों पर गहरा खेद जताया और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की। साथ ही विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। मंत्रालय के बयान में कहा गया, “भारत पश्चिम एशिया में फिर से हुए हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करता है। ये घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं। यह संघर्ष अब 100 दिनों से अधिक समय से जारी है और इससे भारी मानवीय पीड़ा हुई है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।” India News</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में आगे कहा गया, “हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे तुरंत तनाव कम करें, यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को कोई नुकसान न हो, और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही वार्ताओं को पूरा करें ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौट सके।” इससे पहले, भारत के तेहरान स्थित दूतावास ने भी क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों से उपलब्ध सभी साधनों के माध्यम से देश छोड़ने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने सोमवार को कहा कि उसने ईरान के महशहर क्षेत्र में एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर “कई लक्ष्यों” को निशाना बनाया है। एक अन्य बयान में इजरायली सेना ने दावा किया कि सोमवार सुबह दागी गई सभी ईरानी मिसाइलों को रोक दिया गया। आईडीएफ ने यह भी कहा कि वेस्ट बैंक में खुले क्षेत्र में जो प्रभाव देखा गया, वह संभवतः इंटरसेप्शन के बाद गिरे बड़े मलबे के कारण था। ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, यरुशलम क्षेत्र में मिसाइल हमले की चेतावनी के बाद अलर्ट वापस ले लिया गया। India News</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख कमांडर अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिण स्थित दहियाह क्षेत्र में हमले बढ़ाता है, तो उसे और भी “विनाशकारी हमलों” का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए वो "पछता सकता है।" उन्होंने कहा कि इजरायल, लेबनान के लोगों के खिलाफ “शत्रुतापूर्ण कार्रवाई” कर रहा है और अमेरिका के समर्थन तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चुप्पी के कारण युद्ध अपराध कर रहा है, जिसमें फॉस्फोरस बम जैसे प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि चेतावनियों के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान और दहियाह पर हमले बढ़ा दिए हैं और सभी सीमाओं को पार कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमलों के बाद ये संघर्ष शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले कर इजरायल और अमेरिकी ठिकानों तथा क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाया। बाद में 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ, लेकिन इसके बाद शांति वार्ताएं विफल रहीं। हालांकि हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के लिए नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की कोशिश चल रही है। India News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:14:38 +0530</pubDate>
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