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                <title>Saint Dr MSG - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Saint Dr MSG RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मानवता के पथ पर पूज्य गुरु जी की एक और मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  ने पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा के 20 वर्षीय जसप्रीत को बनाकर दिया पक्का मकान, सौंपी घर की चाबी सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। मानवता और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार चलाए जा रहे कार्यों के तहत डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक बार फिर सेवा और परोपकार का उदाहरण प्रस्तुत किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/another-example-of-revered-guru-ji-on-the-path-of/article-86660"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/aashiyana-campaign-sangrur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aashiyana Campaign: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  ने पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा के 20 वर्षीय जसप्रीत को बनाकर दिया पक्का मकान, सौंपी घर की चाबी सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। मानवता और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार चलाए जा रहे कार्यों के तहत डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक बार फिर सेवा और परोपकार का उदाहरण प्रस्तुत किया है।  </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस और फादर्स डे के अवसर पर पूज्य गुरु जी ने समाज में सेवा, संस्कार और मानवता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। आपजी ने फरमाया कि समाज के सक्षम लोगों का यह नैतिक दायित्व है कि वे जरूरतमंदों और असहाय लोगों की सहायता के लिए आगे आएं। डैप्थ कार्यक्रम (नशा व बुराईयां छुड़वाने का कार्यक्रम) के दौरान महाराष्ट्र के सासावार स्थित ममता बाल सदन नामक एनजीओ द्वारा संचालित अनाथ आश्रम की प्रभारी स्मिता ने आश्रम में रह रहे बच्चों की शिक्षा और देखभाल को लेकर सहयोग की अपील की।  इस पर पूज्य गुरु जी ने आश्रम के बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और उनके विवाह तक का संपूर्ण खर्च वहन करने की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित साध-संगत ने जोरदार समर्थन किया और मानवता भलाई के इस कार्य की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम का एक भावुक क्षण उस समय और देखने को मिला जब पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा निवासी 20 वर्षीय जसप्रीत कौर को नए मकान की चाबी सौंपी गई। जसप्रीत कौर के पिता का वर्ष 2021 में निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार आर्थिक संकट से जूझने लगा। परिवार जिस मकान में रह रहा था, उसकी हालत बेहद खराब थी। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था और कई बार परिवार को पड़ोसियों के घरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता था। परिवार की कठिन परिस्थितियों की जानकारी जब जसप्रीत कौर द्वारा पूज्य गुरु जी को दी गई तो तुरंत पूज्य गुरु जी ने उनके लिए नया मकान बनवाने का निर्णय लिया। इसके बाद पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा जसप्रीत कौर का पक्का मकान महज 48 घंटे में तैयार करवा दिया गया। मकान निर्माण का पूरा खर्च पूज्य गुरु जी ने वहन किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मकान की चाबी मिलते ही छलक पड़े खुशी के आंसू</h3>
<p style="text-align:justify;">नए घर की चाबी मिलने पर जसप्रीत कौर, उसकी माता और उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार ने भावुक होकर पूज्य गुरु जी और सेवा में जुटे सभी सेवादारों का आभार व्यक्त किया। स्थानीय निवासियों ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंद परिवार को नया आशियाना मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 10:23:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘तो दु:ख कभी आयेंगे ही नहीं ’</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सुबह-सवेरे मालिक को याद करना चाहिए लेकिन कोई-कोई होता है जो ऐसा करता है। अधिकतर तो तब याद करते हैं जब कोई परेशानी आती है या आने वाली होती है। नौकरी जाने का डर हो, तो मालिक शहद जैसा लगने लगता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/then-sorrow-will-never-come/article-86479"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि सुबह-सवेरे मालिक को याद करना चाहिए लेकिन कोई-कोई होता है जो ऐसा करता है। अधिकतर तो तब याद करते हैं जब कोई परेशानी आती है या आने वाली होती है। नौकरी जाने का डर हो, तो मालिक शहद जैसा लगने लगता है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">जब बच्चा बीमार हो और डॉक्टर कह दे कि यह बीमारी लाइलाज है, तब मालिक बहुत मीठे लगते हैं। कोई नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाता है, उस समय वो मालिक से कहता है कि हे भगवान, थोड़ा सा धक्का लगा देना, तेरा क्या जायेगा। मेरा रोजगार बन जायेगा और बदले में तुझे प्रसाद खिलाऊंगा। </p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि लोग भगवान को एक खिलौने की तरह समझते हैं। जिस तरह किसी बच्चे से काम करवाने के लिए आप उसे टॉफी का लालच देते हैं और बच्चा उस टॉफी के लालच में काम कर देता है। उसी तरह क्या आपने भगवान को बच्चा नहीं समझ रखा। जब कोई काम पड़ता है तो कहता है कि हे भगवान, आ जा तुझे लड्डू, पेड़े, देसी घी, चीनी खिलाऊंगा और जब काम निकल गया तो उसे पता ही नहीं होता कि भगवान जी भूखे हैं या भर पेट खा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">आदमी के जीवन में दुखों का दौर भी आता है लेकिन सभी धर्मों में लिखा है कि इन्सान अगर सुख में सुमिरन करे तो उसे दु:ख कभी नहीं आते लेकिन इन्सान तो दु:ख का इंतजार करता रहता है कि कब दु:ख आए और वह सुमिरन करे। अगर सुख में ही सुमिरन कर लिया जाए तो दु:ख कभी आयेंगे ही नहीं और जीवन सुखमय गुजरता रहेगा। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 08:23:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>ऐसे बन सकती है आत्मा, मालिक के दर्श-दीदार के काबिल</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सभी धर्मों में लिखा है कि मनुष्य शरीर सबसे श्रेष्ठ शरीर है और जीवात्मा को यह शरीर 84 लाख जूनियों के बाद सबसे अंत में प्राप्त होता है। मनुष्य शरीर ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिसमें आत्मा आवागमन से आजादी प्राप्त कर सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/this-is-how-the-soul-can-become-worthy-of-seeing/article-86430"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/naamcharcha-dera-sacha-sauda-sirsa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सभी धर्मों में लिखा है कि मनुष्य शरीर सबसे श्रेष्ठ शरीर है और जीवात्मा को यह शरीर 84 लाख जूनियों के बाद सबसे अंत में प्राप्त होता है। मनुष्य शरीर ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिसमें आत्मा आवागमन से आजादी प्राप्त कर सकती है। जीव इस मनुष्य जूनी में मालिक की भक्ति-इबादत करे और उसकी याद में समय लगाए तो आत्मा आवागमन से आजाद हो सकती है और मालिक के दर्श-दीदार के काबिल बन सकती है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि कबीर जी ने भी मनुष्य शरीर के बारे में लिखा है कि मनुष्य शरीर को पाने के लिए तो देवी-देवता भी तरसते हैं कि कब मनुष्य शरीर प्राप्त हो और वो मालिक की भक्ति-इबादत करें लेकिन आपको यह मनुष्य शरीर मिल चुका है। इसलिए आपको उस प्रभु, परमात्मा का नाम जपना चाहिए ताकि आप परमानन्द को पा सकें। </p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि धर्म शास्त्रों में यह वर्णित है कि इन्सान केवल इन्सान नहीं है, बल्कि बहुत से धर्म इससे जुड़े हुए हैं और धर्म कहता है कि इन्सान को सुबह 2 से 4 बजे के बीच जागना चाहिए और ओम, हरि, राम की भक्ति करनी चाहिए। इसके बाद जो काम-धन्धे करते हैं उसमें मेहनत करें, न कि रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, ठगी, बेईमानी। हमेशा मेहनत, हक-हलाल की कमाई और कमाई का पांचवां या सातवां हिस्सा नेकी पर नेक दिल से लगाएं, साथ ही प्रभु की बनाई सृष्टि से बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्रेम करें। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:27:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>''एक ही है ऐसा जो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता'' </title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानीजनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/there-is-only-one-who-does-not-come-in-the/article-86237"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि सत्संग का अर्थ है सच का साथ। सच उसे कहते हैं जिसे कहा जा सकता है कि जो सच था, सच है और सच ही रहेगा। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब ही इस दुनिया में एकमात्र सच है। भगवान के अनेक नाम हैं, लेकिन वो सुप्रीम पावर यानी सबसे बड़ी ताकत एक ही है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानीजनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है। कोई भी जगह उससे खाली नहीं होती। हर जगह, कण-कण, जर्रे-जर्रे में उसकी मौजूदगी का अहसास होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक हमारी निगाह जाती है वहां तक वो मालिक, परमात्मा है और जहां तक निगाह नहीं जाती वो वहां तक भी है। दोनों जहानों यानी त्रिलोकी, जहां आत्मा जाती है और जहां शरीर नहीं जाता है, वहां भी वो है। ऐसा मालिक, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा, सुप्रीम पावर जो सारी सृष्टि को बनाने वाला है। उसे देखा, महसूस किया जा सकता है लेकिन उसके लिए भक्ति करनी अति आवश्यक है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप कोई भी काम-धन्धा करते हैं तो उसके लिए मेहनत भी जरूर करते हैं, क्योंकि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिल सकती। किसान भाई अपने खेत में अच्छी फसल पैदा करने के लिए जमीन को साफ-सुथरा करते हैं, बुआई, निराई, गुड़ाई, बिजाई, खाद, स्प्रे हर तरह से उसे संभालते हैं। बीज डालते समय भी संभाल जरूरी है, क्योंकि ऐसी बीमारियां हैं जो धरती में ही लग जाती हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि यदि पेड़-पौधे की अच्छी तरह से संभाल की जाए तो वो बहुत जल्दी लहलहाने लगता है।  इसी तरह इन्सान को मनुष्य शरीर रूपी धरती तो मिल चुकी है।इसमें पाप-कर्म, ठगी, बेईमानी, रिश्वतखोरी, नशों रूपी खरपतवार भी बहुत उगे हुए हैं। इस तरह यह धरती उपजाऊ होते हुए भी झाड़, फूस से भर गई है। धरती को साफ करने के लिए हल चलाना पड़ता है, उसी तरह इस शरीर रूपी धरती में भी जो घास-फूस, बुराई पैदा हो गई है उसे राम-नाम रूपी हल से साफ करना होगा। जैसे-जैसे घास-फूस साफ होता जायेगा, वैसे-वैसे राम-नाम का बीज फलता-फूलता जायेगा। जिस धरती रूपी शरीर में पहले से पाप-कर्म कम होते हैं या होते ही नहीं, उस धरती में बीज पड़ते ही पौधा जल्दी ही फलने-फूलने लग जाता है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:45:28 +0530</pubDate>
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