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                <title>World Blood Donor Day 2026 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>World Blood Donor Day 2026 RSS Feed</description>
                
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                <title>पूज्य गुरु जी के आह्वान पर डेरा सच्चा सौदा ने शुरू किया थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए विशेष अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए विश्व रक्तदाता दिवस इस बार उम्मीद की नई किरण लेकर आया। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के आह्वान पर सर्वधर्म संगम डेरा सच्चा सौदा ने देशभर व विदेशों में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को नियमित रक्त उपलब्ध करवाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/on-the-call-of-revered-guru-ji-dera-sacha-sauda/article-86342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/new-campaign-dss.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Thalassemia Patients Special Campaign: सरसा/पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर तूर)। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day 2026) इस बार उम्मीद की नई किरण लेकर आया। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh JI Insan) के आह्वान पर सर्वधर्म संगम डेरा सच्चा सौदा ने देशभर व विदेशों में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को नियमित रक्त उपलब्ध करवाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पहल के तहत साध-संगत ऐसे मरीजों को जरूरत के अनुसार समय-समय पर रक्तदान करेगी, ताकि किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशान न होना पड़े। अभियान की शुरूआत रविवार को पंजाब के पटियाला स्थित एमएसजी डेरा सच्चा सौदा एवं मानवता भलाई केंद्र शाह सतनाम जी नुरानी धाम तथा शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में स्थापित पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर में आयोजित विशेष रक्तदान शिविरों से हुई। </p>
<h3 style="text-align:justify;">पटियाला में साध-संगत ने किया 304 यूनिट रक्तदान </h3>
<p style="text-align:justify;">पटियाला में 304 यूनिट रक्तदान हुआ। शिविरों में बड़ी संख्या में सेवादारों ने रक्तदान कर इस मुहिम का समर्थन किया। उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत अब तक 33 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान कर मानवता सेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बना चुकी है। इस अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि थैलेसीमिया जैसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को जीवनभर नियमित रक्त की आवश्यकता होती है। कई बार समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत उनके लिए संबल बनेगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल रक्त उपलब्ध करवाएगी। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से आह्वान किया कि वे थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों की केवल रक्तदाता के रूप में नहीं, बल्कि संरक्षक और परिवार के सदस्य की तरह मदद करें। उनकी देखभाल और सहयोग इस प्रकार किया जाए कि मरीजों को कभी अकेलापन महसूस न हो। उन्हें यह एहसास हो कि साध-संगत ने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनकी हर जरूरत और रक्त की आवश्यकता की जिम्मेदारी उठा कर एक तरह से गोद ही ले लिया है तथा पूरा डेरा परिवार हर समय उनके साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में साध-संगत की अलग-अलग रक्तदाता टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें अपने क्षेत्र के थैलेसीमिया मरीजों का डाटा तैयार कर नियमित रूप से उनके संपर्क में रहेंगी। जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, टीम के सदस्य तुरंत रक्तदाताओं की व्यवस्था कर मदद पहुंचाएंगे। इससे मरीजों को रक्त के लिए अस्पतालों और ब्लड सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा समय पर उपचार सुनिश्चित हो सकेगा। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से आह्वान किया कि वे नियमित रक्तदान को सेवा का हिस्सा बनाएं और टीम बनाकर निरंतर इस अभियान से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित होकर आगे आए तो कोई भी मरीज रक्त के अभाव में परेशान नहीं होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ</h3>
<p style="text-align:justify;">नई पहल को लेकर साध-संगत में खासा उत्साह देखने को मिला। रक्तदान शिविरों में युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ सेवादारों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। सेवादारों ने भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने और थैलेसीमिया मरीजों की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है, जिसमें मरीजों को निश्चित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में नियमित रक्त उपलब्ध कराने की यह पहल हजारों मरीजों को राहत देगी। सामाजिक सरोकार और स्वास्थ्य सेवा को जोड़ने वाली इस मुहिम को मानवता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे देशभर के थैलेसीमिया मरीजों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने ली थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की सुध: डॉ. सुखविन्द्र सिंह</h3>
<p style="text-align:justify;">राजेन्द्रा अस्पताल ब्लड बैंक से पहुंचे डॉ. सुखविन्द्र सिंह ने कहा कि वे डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं से बहुत प्रभावित हैं। कुछ ही समय में इन्होंने ब्लड बैंक का कोटा पूरा कर दिया। उन्होंने बताया कि राजेन्द्रा अस्पताल में 42 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं, जिनके लिए ये डेरा श्रद्धालु जिंदगी बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी ने इन बच्चों की सुध लेते हुए भविष्य में रक्त की कमी न आने देने का विश्वास दिलाया है। डॉ. अमरदीप सिंह ने कहा कि शिविर बहुत अनुशासित और उत्साहपूर्ण था तथा डेरा श्रद्धालुओं जैसा सेवा भाव कहीं और देखने को नहीं मिलता।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/patiala-blood-donation-camp.jpg" alt="Patiala-BLood-Donation-Camp" width="994" height="585"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 10:40:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व रक्तदाता दिवस विशेष: ‘ट्रयू ब्लड पंप’ देश-दुनिया में जगाए हुए हैं जिंदगी की मशाल </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/worlds-unique-blood-center-pujya-bapu-magghar-singh-ji-international/article-86313"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/world-blood-donor-day.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ/राजेश बैनीवाल/सुनील वर्मा)। </strong>World Blood Donor Day:<strong> </strong>आज का समय ऐसा है कि अपने ही अपनों के काम नहीं आते वो भी जरूरत पड़ने पर साथ छोड़ ही जाते हैं। लेकिन एक ऐसी संस्था आज इस दुनिया में मानवता की सेवा के लिए हर वक्त मौजूद है वहां के लोग दूसरों को भी अपना मान लेते हैं। और जरूरत पड़ने पर किसी भी मदद से पिछे हटना नहीं जानते। हम बात कर रहे हंै हरियाणा प्रदेश के जिला सरसा स्थित ‘डेरा सच्चा सौदा’ की। यहां पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां वैसे तो मानवता की भलाई के लिए सैकड़ों कार्य चलाए हुए हैं। परन्तु इसी में  28वां काम है ‘रक्तदान’। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार रक्तदान के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। इसीलिए पूज्य गुरु जी ने इन सेवादारों को ‘ट्रयू ब्लड पंप’ नाम दिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह ब्लड पंप एक आह्वान पर बच्चे -जवान ही नहीं बुजुर्ग भी बिना कुछ सोचे समझे रक्तदान करने के लिए जिद्द पर अड़ जाते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों द्वारा अब तक लगभग 24 लाख यूनिट खून दान किया जा चुका है।<br />डेरा सच्चा सौदा का नाम रक्तदान के क्षेत्र में 3 बार गिनिज वर्ल्ड, एशिया लिम्का, इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। यहां पर स्वस्थ, एवं स्वैच्छिक रक्तदाता हर समय देश-विदेश में रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं।  डेरा सच्चा सौदा ने स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। </p>
<h4 style="text-align:justify;">यूं बनते गए स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में रिकॉर्ड </h4>
<ul>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (7 दिसंबर 2003): मात्र 8 घंटों में 15,432 यूनिट रक्तदान कर पहली बार इतिहास रचा गया।</li>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (10 अक्टूबर 2004): राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक शिविर के दौरान 17,921 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।</li>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (8 अगस्त 2010): एक ही दिन में 43,732 यूनिट रक्तदान का सबसे बड़ा रिकॉर्ड।</li>
<li>एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स (23 सितंबर 2011): एक ही दिन में 61,752 लोगों द्वारा नियमित रक्तदान करने का संकल्प लेने का रिकॉर्ड दर्ज है।</li>
<li>भारतीय सेना, पुलिस, पत्रकार व थैलेसिमिया ग्रस्त मरीजों के लिए पूज्य गुरुजी द्वारा प्राथमिकता से व नि:शुल्क रक्त उपलब्ध करवाने का आहवान किया गया हैै।</li>
<li>दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 12 अपै्रल 2014 को 75,771 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया वो पल भी किसी कीर्तिमान से कम नहीं है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h4 style="text-align:justify;">क्यों मनाया जाता हैं विश्व रक्तदाता दिवस</h4>
<p style="text-align:justify;">हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। पहली बार साल 2004 में मनाया गया था, जिसकी शुरूआत वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गेनाइजेशन ने की थी। दरअसल, समय पर रक्त उपलब्ध न होने पर कई मरीज दम तोड़ देते हैं, ऐसे में रक्तदान ऐसे लोगों के लिए जीवनदान बन सकता है, इसलिए लोगों को इसके महत्व से रूबरू कराने के लिए वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दुनिया का अनोखा ब्लड सेंटर: पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर</h4>
</div>
<p style="text-align:justify;">विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है, तब सरसा स्थित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल का पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर मानवता सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से स्थापित हुआ है। पूज्य गुरुजी द्वारा शुरू की गई रक्तदान मुहिम का ही परिणाम है कि पिछले करीब दो दशकों से यह ब्लड सेंटर जरूरतमंद मरीजों को बिना रिप्लेसमेंट डोनर के रक्त उपलब्ध करवा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/corona-infected-will-get-better-treatment-at-shah-satnam-ji-speciality-hospital.gif" alt="Corona-infected-will-get-better-treatment-at-Shah-Satnam-Ji-Speciality-Hospital" width="600" height="294"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं अपनी तरह के इस अनूठे ब्लड सेंटर में रक्तदान करने के लिए दानियों को इंतजार करना पड़ता है और रक्तदान के बाद वे चिकित्सकों का धन्यवाद कर लौटते हैं। वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक इस ब्लड सेंटर में 2 लाख 3 हजार 753 यूनिट रक्तदान हो चुका है। यहां से 52 हजार 608 यूनिट होल ब्लड, 1 लाख 33 हजार 304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स, 1 लाख 41 हजार 994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, 57 हजार 728 यूनिट प्लेटलेट्स तथा 6 हजार 556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आमतौर पर अस्पतालों में मरीज के परिजनों को रक्त लेने से पहले किसी अन्य व्यक्ति से रक्तदान करवाना पड़ता है, लेकिन यहां व्यवस्था बिल्कुल अलग है। डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं, जिसके कारण ब्लड सेंटर में रक्त की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहती है। यही वजह है कि दुर्घटना, आॅपरेशन अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और उनके परिजनों को रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी ब्लड सेंटर की सबसे बड़ी पूंजी उसके नियमित रक्तदाता होते हैं और यही पूंजी इस ब्लड सेंटर को अलग पहचान दिलाती है। पूज्य गुरुजी की प्रेरणा से लाखों अनुयायी वर्षों से रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानते हुए इस अभियान से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि हजारों जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिल सका है और अनगिनत जिंदगियां बचाई जा चुकी हैं। आज जब देशभर में रक्त की मांग लगातार बढ़ रही है, तब सरसा का यह ब्लड सेंटर समाज को यह संदेश दे रहा है कि यदि लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के लिए आगे आएं तो किसी भी व्यक्ति को रक्त के अभाव में अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी। यही विश्व रक्तदाता दिवस का वास्तविक संदेश है रक्तदान महादान, जीवनदान के समान।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक 2,03,753 यूनिट रक्तदान</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">52,608 यूनिट होल ब्लड वितरित</li>
<li style="text-align:justify;">1,33,304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स उपलब्ध कराई</li>
<li style="text-align:justify;">1,41,994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा वितरित</li>
<li style="text-align:justify;">57,728 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई</li>
<li style="text-align:justify;">6,556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) मरीजों को दी गई</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h4 style="text-align:justify;">रक्तदान का कोई विकल्प नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">रक्तदान का कोई विकल्प नहीं है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों का जीवन बचाने में सहायक हो सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करना और नियमित रक्तदाता बनने के लिए प्रेरित करना है।<br /><strong>— डॉ. प्रदीप अरोड़ा, बीटीओ, पूज्य बापू </strong><br /><strong>मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर सरसा। </strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">प्लेटलेट्स डोनेशन की भी आधुनिक सुविधा</h4>
<p style="text-align:justify;">यह ब्लड सेंटर केवल रक्त संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अत्याधुनिक एफेरेसिस मशीन भी उपलब्ध है। इस मशीन के माध्यम से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) तैयार किए जाते हैं। मशीन रक्त से केवल प्लेटलेट्स अलग कर लेती है और शेष रक्त दाता के शरीर में वापस पहुंचा देती है। डेंगू, कैंसर, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए प्लेटलेट्स जीवनरक्षक साबित होते हैं। विशेषकर डेंगू के मौसम में प्लेटलेट्स की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में एफेरेसिस मशीन के माध्यम से तैयार किए जाने वाले सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मरीजों के लिए संजीवनी साबित होते हैं और उन्हें प्लेटलेट्स की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/world-blood-donor-day.jpg" alt="World Blood Donor Day" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 09:28:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>World Blood Donor Day: 14 जून को कौन कर सकता है रक्तदान? डॉ. हिमांशु शर्मा से जानें, पात्रता और सुरक्षा से जुड़े मिथकों का सच</title>
                                    <description><![CDATA[रक्तदान एक ऐसा कार्य है जो सबसे आसान, सुरक्षित और निःस्वार्थ सेवाओं में से एक माना जाता है। रक्त को तीन प्रमुख घटकों—रेड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स में विभाजित किया जा सकता है। एक यूनिट रक्तदान से आप दुर्घटना पीड़ितों, कैंसर मरीजों, सर्जरी कराने वाले रोगियों और गंभीर अवस्था में नवजात शिशुओं की मदद कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/world-blood-donor-day-who-can-donate-blood-on-14th/article-86285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/dr-himanshu-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Blood Donor Day 2026: जयपुर। रक्तदान एक ऐसा कार्य है जो सबसे आसान, सुरक्षित और निःस्वार्थ सेवाओं में से एक माना जाता है। रक्त को तीन प्रमुख घटकों—रेड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स में विभाजित किया जा सकता है। एक यूनिट रक्तदान से आप दुर्घटना पीड़ितों, कैंसर मरीजों, सर्जरी कराने वाले रोगियों और गंभीर अवस्था में नवजात शिशुओं की मदद कर सकते हैं। इसके बावजूद, रक्त की निरंतर आवश्यकता के बीच कई योग्य लोग भय, गलत जानकारी, भ्रांतियों और जागरूकता की कमी के कारण रक्तदान से हिचकिचाते हैं। World Blood Donor Day</p>
<p style="text-align:justify;">फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के ब्लड सेंटर एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख, डॉ. हिमांशु शर्मा ने रक्तदान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं कौन रक्तदान कर सकता है, मिथक, सुरक्षा उपाय और नियमित रक्तदान के जीवन रक्षक प्रभाव—पर प्रकाश डाला।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कौन कर सकता है रक्तदान? | World Blood Donor Day</h3>
<p style="text-align:justify;">रक्त बैंक दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। भारत में रक्तदान के लिए पात्रता इस प्रकार है:</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आयु: 18 से 65 वर्ष के बीच</li>
<li style="text-align:justify;">लिंग: पुरुष एवं महिला दोनों</li>
<li style="text-align:justify;">वजन: न्यूनतम 45 किलोग्राम (कुछ केंद्रों में 50 किलोग्राम आवश्यक)</li>
<li style="text-align:justify;">हीमोग्लोबिन: ≥ 12.5 g/dL</li>
<li style="text-align:justify;">सामान्य स्वास्थ्य: किसी भी संक्रामक बीमारी, बुखार या संक्रमण से मुक्त होना चाहिए</li>
<li style="text-align:justify;">वाइटल साइन: सामान्य नाड़ी दर, रक्तचाप और शरीर का तापमान</li>
</ul>
<h3>कितनी बार रक्तदान किया जा सकता है?</h3>
<ul>
<li>पुरुष: हर 3 महीने (90 दिन)</li>
<li>महिला: हर 4 महीने (120 दिन)</li>
</ul>
<h3>सामान्य मिथक और उनके तथ्य: </h3>
<p><strong>मिथक #1: मैं दवा ले रहा/रही हूं।</strong></p>
<p>अधिकांश सामान्य दवाएं (ओवर-द-काउंटर) रक्तदान में बाधा नहीं बनतीं। नियंत्रित ब्लड प्रेशर, डायबिटीज (ओरल दवाओं के साथ), हाई कोलेस्ट्रॉल या गर्भनिरोधक दवाएं लेने वाले लोग रक्तदान कर सकते हैं। हालांकि, ब्लड थिनर, कीमोथेरेपी या सक्रिय संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक लेने वालों को कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>मिथक #2: मेरे शरीर पर टैटू है।</strong></p>
<p>यदि टैटू लाइसेंस प्राप्त और स्वच्छता मानकों वाले केंद्र में, स्टरलाइज्ड सुई और नई स्याही से बनवाया गया है, तो आप रक्तदान कर सकते हैं। आमतौर पर 3 से 6 महीने का प्रतीक्षा समय होता है। World Blood Donor Day</p>
<p><strong>मिथक #3: मैं बहुत दुबला/पतला हूं।</strong></p>
<p>शरीर का प्रकार मायने नहीं रखता, यदि आपका स्वास्थ्य अच्छा है और वजन कम से कम 45 किलोग्राम है, तो आप रक्तदान कर सकते हैं।</p>
<p><strong>मिथक #4: रक्तदान करने से कमजोरी आती है।</strong></p>
<p>यह एक आम भ्रांति है। शरीर कुछ ही दिनों में दान किया गया रक्त पुनः बना लेता है। इससे ताकत या इम्यूनिटी पर कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ता। कुछ मामलों में हल्का चक्कर आ सकता है, जो सामान्य है। पर्याप्त पानी पीना और हल्का भोजन करना इससे बचाव करता है।</p>
<p><strong>मिथक #5: महिलाओं को रक्तदान नहीं करना चाहिए।</strong></p>
<p>पुरुष और महिलाएं दोनों रक्तदान कर सकते हैं और करना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रक्तदान से बचने और हर 4 महीने के अंतराल का पालन करने की सलाह दी जाती है।</p>
<p><strong>मिथक #6: मुझे COVID-19 हुआ था, इसलिए मैं रक्तदान नहीं कर सकता/सकती।</strong></p>
<p>यदि आप COVID-19 से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और आवश्यक रिकवरी अवधि पूरी कर चुके हैं, तो आप सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकते हैं। World Blood Donor Day</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/world-blood-donor-day-who-can-donate-blood-on-14th/article-86285</link>
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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:57:50 +0530</pubDate>
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