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                <title>Rajasthan School Education - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Rajasthan Education News: भूल गए स्टाफिंग पैटर्न, प्रारम्भिक शिक्षा में तीन बार हो चुकी समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[माध्यमिक शिक्षा विभाग की सुस्ती चाल के कारण 2015 में लागू होने के बाद एक बार भी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं की गई है। इस पैटर्न के तहत हर दो साल में इसकी समीक्षा किए जाने का नियम तय किया गया था लेकिन,बाद में अधिकारी इस बात को भूल गए। सूत्रों ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में पिछले कुछ सालों में करीब 25 लाख विद्यार्थियों के नामांकन में वृद्धि हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-education-news-forgotten-staffing-pattern-review-done-thrice-in/article-86381"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/staffing-pattern.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">School Staffing Pattern: श्रीगंगानगर। माध्यमिक शिक्षा विभाग की सुस्ती चाल के कारण 2015 में लागू होने के बाद एक बार भी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं की गई है। इस पैटर्न के तहत हर दो साल में इसकी समीक्षा किए जाने का नियम तय किया गया था लेकिन,बाद में अधिकारी इस बात को भूल गए। सूत्रों ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में पिछले कुछ सालों में करीब 25 लाख विद्यार्थियों के नामांकन में वृद्धि हुई। Rajasthan Education News</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर विभाग ने खूब अपनी पीठ थपथपाई लेकिन,अब जब इस शिक्षण सत्र में करीब 15 लाख विद्यार्थियों का नामांकन कम होने की बात सामने आ रही है,तो इसके लिए जिम्मेदार कारणों में से एक कारण रिक्त पदों का नहीं भरा जाना माना जा रहा है। शिक्षा जगत में चर्चा है कि अगर रिक्त पदों को नहीं भरा जाता है और स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं की जाती है, तो सरकारी स्कूलों में आने वाले वर्षों में नामांकन में और कमी आ सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिगड़ रहा छात्र-शिक्षक अनुपात</h3>
<p style="text-align:justify;">जिन स्कूलों में नामांकन बढऩे के हिसाब से शिक्षकों की जरूरत है, वहां शिक्षकों का अभाव हो रहा है और जहां नामांकन घटा है,उन स्कूलों में शिक्षक अधिशेष हो रहे हैं। अब हालात यह हैं कि जिन स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है, वहां से विद्यार्थी स्कूल छोड़कर जा रहे हैं। जिसके कारण इस शिक्षण सत्र में करीब 15 लाख विद्यार्थियों का नामांकन कम हो गया है। Rajasthan Education News</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिक्त पदों का ग्राफ भी बढ़ा</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों का ग्राफ भी बढऩे लगा है। क्योंकि क्रमोन्नत विद्यालयों में छह माह बाद भी वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता पदों का सृजन नहीं हुआ है। इसके अलावा दो साल से विभाग में विभिन्न संवर्गों में विभागीय पदोन्नतियां भी नहीं हो पाई हैं और न ही कोई सीधी भर्ती हुई है। प्रारम्भिक शिक्षा में लेवल प्रथम व लेवल द्वितीय के तृतीय श्रेणी अध्यापकों के अलावा माध्यमिक शिक्षा में किसी भी वर्ग की डीपीसी व सीधी भर्ती नहीं हो पाई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनिवार्य विषयों के नहीं व्याख्याता</h3>
<p style="text-align:justify;">राज्य में 2013 के बाद क्रमोन्नत किसी भी विद्यालय में अनिवार्य विषयों हिन्दी व अंग्रेजी के व्याख्याता पद स्वीकृत नहीं हैं। 17 हजार में से केवल 4 हजार विद्यालयों में ही अनिवार्य विषयों के व्याख्याता पद स्वीकृत हैं। प्रदेश के 13 हजार 759 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य भाषा विषयों के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं है। इन सभी विद्यालयों में केवल वैकल्पिक विषयों (प्रति विद्यालय 3-3) व्याख्याता पद ही स्वीकृत हैं। अब भी समीक्षा का इंतजार- माध्यमिक शिक्षा की तरह ही प्रारंभिक शिक्षा में भी स्टाफिंग पैटर्न लागू किया था। प्रारंभिक शिक्षा में तो 2015 से स्टाफिंग पैटर्न लागू होने के बाद 3 बार समीक्षा की जा चुकी है लेकिन, माध्यमिक शिक्षा में नौसाल में एक बार भी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं की गई है। Rajasthan Education News</p>
<h3 style="text-align:justify;">इतने विद्यालय किए क्रमोन्नत</h3>
<p style="text-align:justify;">सत्र              क्रमोन्नत विद्यालय<br />2013-14          1086<br />2014-15          5000<br />2017-18             300<br />2018-19          1100<br />2019-20            287<br />2020-21               82<br />2021-22            240<br />2022-23            3832 + 1151 = 4983<br />2023-24             672<br />2024-25             09<br />कुल क्रमोन्नत - 13759</p>
<h3 style="text-align:justify;">साल-दर-साल: सरकारी में स्कूलों में घटता-बढ़ता नामांकन</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा सत्र        सरकारी में रहा नामांकन<br />2018-19            82,58,519<br />2019-20            81,53,687<br />2020-21            85,04,779<br />2021-22            97,15,989<br />2022-23            92,44,692<br />2023-24            82,87,865<br />2024-25            78,03,846<br />2025-26            73,95,935<br />(वर्ष 2021-22 का समय कोविड काल का रहा)</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनिवार्य विषयों हिंदी अंग्रेजी के पद हो स्वीकृत</h3>
<p style="text-align:justify;">माध्यमिक शिक्षा में 2015 को लागू किए गए स्टाफिंग पैटर्न की 11 साल बाद एक बार भी समीक्षा नहीं की गई है जिसके कारण 2015 के बाद विद्यालयों के नामांकन में बदलाव हुआ है लेकिन नए पदों का सृजन नहीं किया गया है। 2013 के बाद क्रमोन्नत विद्यालयों में अनिवार्य विषयों हिन्दी व अंग्रेजी के व्याख्याता पदों की स्वीकृति आज तक नहीं हुई है। ऐसे में नए सिरे से नामांकन अनुसार पदों का निर्धारण किया जाना चाहिए एवं सभी उच्च माध्यमिक स्कूलों में अनिवार्य विषयों के पद स्वकृत करने चाहिए। Rajasthan Education News<br /><strong>मोहर सिंह सलावद,प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:24:39 +0530</pubDate>
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