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                <title>CAR-T Therapy India - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>CAR-T Therapy India: भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि, CAR-T थेरेपी बन रही कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (सीएआर-टी) थेरेपी देश में कैंसर विशेषकर रक्त कैंसर के गंभीर चरण पर पहुंच चुके मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indigenous-car-t-therapy-is-becoming-a-ray-of-hope-for/article-86747"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/car-t-therepy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">CAR-T Therapy India जालौन। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (सीएआर-टी) थेरेपी देश में कैंसर विशेषकर रक्त कैंसर के गंभीर चरण पर पहुंच चुके मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है।  थेरेपी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आईआईटी मुबंई में प्रोफेसर और शोधकर्ता डॉ. राहुल पुरवार ने यूनीवार्ता को बताया कि सीएआर-टी थेरेपी एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है, जिसमें मरीज के अपने टी-सेल्स यानी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से संशोधित कर कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद इन्हें वापस मरीज के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है। Blood Cancer Treatment</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में यह तकनीक मुख्य रूप से रक्त कैंसर (बी सेल एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया) के उन मरीजों पर इस्तेमाल की जाती है जिनकी बीमारी उपचार के बाद फिर लौट आई हो अथवा जिन पर पारंपरिक उपचार (कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी) प्रभावी न रहा हो। इसके अलावा बी-सेल नान होजकिन लिमफोमा (बी-एनएचएल) के मरीजों के उपचार में भी यह इस तकनीक की विशेषता यह है कि विदेशों में जिस उपचार की लागत चार से पांच करोड़ रुपये तक पहुंचती है, वही उपचार भारत में विकसित तकनीक के माध्यम से लगभग 26 से 40 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकता है। इससे हजारों कैंसर मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक कारगर साबित हुई है। उत्तर प्रदेश में इस थेरैपी का इस्तेमाल संजय गांधी स्रातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के अलावा मेंदाता सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल में किया जा रहा है। जालौन में विकासखंड रामपुरा के मूल निवासी डॉ. राहुल पुरवार ने अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों से न केवल जालौन बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के चलते उन्हें देश के चुनिंदा 120 नवाचारियों में शामिल किया गया है, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस दौरे पर जाने का अवसर मिला। यह दौरा भारत और फ्रांस के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। Blood Cancer Treatment</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. पुरवार के नेतृत्व में विकसित स्वदेशी सीएआर-टी थेरेपी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र को समर्पित कर चुकी हैं। डॉ. राहुल पुरवार के अनुसार, बायोटेक्नोलॉजी विभाग और बाइरैक के सहयोग से वर्ष 2021 में इस तकनीक का विकास शुरू हुआ। इसके बाद टाटा मेमोरियल अस्पताल और आईआईटी मुंबई में सफल क्लीनिकल परीक्षण किए गए। 60 मरीजों पर हुए परीक्षणों में अत्यंत सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए, जिनमें छह बच्चे भी शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक ने बताया कि वर्तमान में यह तकनीक मुख्यत: रक्त कैंसरों तक सीमित है। हालांकि फेफड़े, स्तन, प्रोस्टेट, यकृत या अन्य ठोस  ट्यूमर में सीएआर-टी पर शोध जारी है, लेकिन अभी इसका नियमित उपयोग नहीं होता। उन्होंने बताया कि बी सेल ल्यूकेमिया से ग्रसित मरीजों ने स्वस्थ होने की औसत दर लगभग 72 प्रतिशत और बी सेल लिमफोमा से पीड़ित मरीजों के स्वस्थ होने की औसत दर 68 से 72 प्रतिशत के बीच है। क्लिनिकल परीक्षणों में लगभग 50 प्रतिशत मरीजों में कैंसर पूरी तरह गायब हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ मरीजों में तीन वर्ष से अधिक समय तक रोगमुक्ति बनी रही है, जो इस थेरेपी की दीर्घकालिक क्षमता को दर्शाती है। यह उन मरीजों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है जिन पर कीमोथेरेपी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट या अन्य उपचार विफल हो चुके हों। लगभग 30 प्रतिशत मरीजों में अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती और कुछ मरीजों में बाद में बीमारी दोबारा भी लौट सकती है। इसलिए इसे विशेषज्ञ हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट की निगरानी में ही दिया जाता है। Blood Cancer Treatment</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:50:55 +0530</pubDate>
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