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                <title>Paddy Seeding: धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को मिलेगा 4500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में धीरे धीरे किसानों का धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) की तरफ रुझान बढ़ रहा है। इसका कारण है कि मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका के बीच धान की सीधी बुवाई तकनीक किसानों के लिए लाभकारी विकल्प है। जल संकट, बढ़ती मजदूरी और लागत के दौर में यह तकनीक धान उत्पादन के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रभावी मानी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/paddy-seeding-farmers-doing-direct-sowing-of-paddy-will-get/article-86877"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/paddy-seeding-subsidy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कैथल (कुलदीप नैन)। जिले में धीरे धीरे किसानों का धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) की तरफ रुझान बढ़ रहा है। इसका कारण है कि मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका के बीच धान की सीधी बुवाई तकनीक किसानों के लिए लाभकारी विकल्प है। जल संकट, बढ़ती मजदूरी और लागत के दौर में यह तकनीक धान उत्पादन के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रभावी मानी जा रही है। वहीं राज्य सरकार द्वारा डीएसआर विधि से धान की बिजाई करने वाले किसानों को भौतिक सत्यापन उपरांत 4500 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान प्रदान किया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों का मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 28 जून 2026 निर्धारित की गई है। Paddy Seeding</p>
<p style="text-align:justify;">बरटा निवासी जसवीर ने बताया कि वह पिछले दो सालों से बड़ी मात्रा में धान की सीधी बिजाई कर रहा है। इस साल भी 25 एकड़ में धान की सीधी बिजाई की है। धान की सीधी बिजाई किसानों के लिए लाभकारी है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ घटता है। गाँव में उनके अलावा अन्य किसान भी इसी विधि से धान उगाये हुए है। किसान जसवीर ने बताया कि उसने 4 जून को फसल बोई थी। उसने अपने खेत में 1401 और 1509 किस्म का धान बोया हुआ है। सारी फसल सही फुटाव कर रही है। थोड़ा घास जरूर उगा है। बीते वर्ष भी धान का झाड़ अच्छा रहता है। पानी का कम प्रयोग होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">15 हजार एकड़ का लक्ष्य </h3>
<p style="text-align:justify;">जिले में इस वर्ष 15 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले साल कैथल जिले के गुहणा, बरटा, ग्योंग, चौशाला, लाम्बा खेडी, सजूमा, नरड, बाता, ढुंढवा, राजौंद, कम्हेडी, महमदपुर मंझला , पाडला, आँहु में धान की सीधी बिजाई हुई थी। जिले के खेड़ी लांबा और गुहणा गाँव में सबसे ज्यादा सीधी बिजाई होती है Paddy Seeding</p>
<p style="text-align:justify;">डीएसआर विधि से धान की बुवाई करने से 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जबकि नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई में लगने वाली श्रम लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आती है। वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार जलभराव न होने से मिट्टी की संरचना और स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे होती है सीधी बिजाई</h3>
<p>धान की सीधी बिजाई के समय पनीरी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि इसे सामान्य फसलों की तरह बोया जाता है। इससे किसानों को फायदा हो रहा हैं। एक तो पानी की बचत होती है, उपर से खेत में कद्दू नहीं करना पड़ता, जिससे डीजल की भी बचत होती है। 15 दिन में एक बार किसान फसल में सिचाई कर सकता हैं। Paddy Seeding <img style="float:right;" src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/kuldeep-nain.jpg" alt="Kuldeep-Nain" width="117" height="426"></img></p>
<p style="text-align:justify;">कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि धान की सीधी बिजाई को बढ़ावा देने के लिए सरकार आधुनिक डीएसआर मशीनों की खरीद पर भी अनुदान प्रदान कर रही है। किसानों को मशीन के कुल मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 40 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के लिए किसान के पास मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पंजीकरण, ट्रैक्टर की वैध आरसी, परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड तथा बैंक खाते की जानकारी होना आवश्यक है। इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के कृषि विकास अधिकारी, खंड कृषि अधिकारी, उप मंडल कृषि अधिकारी, सहायक कृषि अभियंता अथवा उप कृषि निदेशक कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। Paddy Seeding </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:16:32 +0530</pubDate>
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