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                <title>Unique Relation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Unique Relation: अनोखा एवं पवित्र रिश्ता</title>
                                    <description><![CDATA[Unique Relation: यह बात कुछ पुरानी भी नहीं है और न ही नई। पांच-सात साल पहले की बात है। समय कब बदल जाता है कुछ पता नहीं चलता, लेकिन पता तब चलता है जब हमें उस रिश्ते का एहसास होता है। यह अनुभव बहुत ही अनोखा है और उतना ही सुंदर तथा पवित्र भी, जितना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/literature/unique-and-sacred-relationship/article-87078"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/facebook.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Unique Relation: यह बात कुछ पुरानी भी नहीं है और न ही नई। पांच-सात साल पहले की बात है। समय कब बदल जाता है कुछ पता नहीं चलता, लेकिन पता तब चलता है जब हमें उस रिश्ते का एहसास होता है। यह अनुभव बहुत ही अनोखा है और उतना ही सुंदर तथा पवित्र भी, जितना हम किसी रिश्ते को समझते है वह उससे कई गुना बढ़कर होता है। जिस तरह माँ का अपने बच्चों से जो रिश्ता होता है वह बहुत ही पवित्र एवं निस्वार्थ होता है। आज के युग में लोग इतना व्यस्त रहते है कि वह अपने जीवन को ही भूल जाते है। माला अपनी पढ़ाई कर रही थी। जब वह बीए के अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रही थी तो उसने एक फोन खरीदा था। माला को फोन इतना ही चलाना आता था कि कॉल को रिसिव कर सकें और काट सकें। समय बदल रहा था। समय के साथ लोगों की सोच भी बदल रही थी। माला भी अपनी पुरानी सोच को त्याग कर नए सिरे से जीवन जी रही थी। समय बदलता गया, माला ने अब छोटा फोन रखना बंद कर दिया क्योंकि उसके भाई ने उसे एंड्राइड फोन दिला दिया था। अब माला के लिए एंड्राइड फोन चलाना ऐसा था जैसे कोई पहली बार देश के लिए लड़ने जा रहा हो, पर दोस्तों की सहायता से उसने धीरे-धीरे फोन को चलाना सीख लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">माला ने अपने करीबी दोस्तों की मदद से फेसबुक पर अपना अकाउंट बनाया। उसकी दोस्ती फेसबुक पर बहुत से लोगों से हुई। उसने सुना था कि फेसबुक और वट्सएप पर अनजान लोगों से दोस्ती करना ठीक नहीं होता, पर माला फेसबुक पर दोस्तों से बात करती गई। काफी दोस्त उसे मिलने को कहते थे और काफी लोगों ने उसका फोन नंबर भी मांगा। हद तो यहां तक हो गई कि कुछ ने तो शादी का भी प्रस्ताव रखा, लेकिन माला ने किसी की बात नहीं सुनी। समय का पहिया किसी का इंतजार नहीं करता। वह अपनी गति से निरंतर आगे बढ़ता रहता है। माला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, वह फेसबुक और वाट्सअप की दुनिया में व्यस्त रहती है। जाने-अनजाने में उसकी दोस्ती एक ऐसे इंसान से हो गई जिसे वह नहीं जानती थी, जिससे वह बात करती थी वह महेश नाम का लड़का था। महेश बेहद पढ़ा-लिखा और नौकरी करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">माला और महेश की काफी दिनों तक फेसबुक मेसेज पर बात चलती रही। हर पल वह फोन को हाथ में लिए बैठी रहती। इसी इंतजार में कहीं महेश का तो मैसेज नहीं आया है? एक दिन महेश ने माला से कहा कि आप अपनी फोटो भेजो। माला ने अपनी फोटो भेज दी, पर वह बहुत डरी हुई थी, क्योंकि लोगों से सुना था कि फेसबुक पर फोटो भेजने से उसका गलत प्रयोग किया जाता है। पर माला को महेश पर पूरा विश्वास था और उसने अपनी फोटो महेश को भेज दी। फिर अब महेश की बारी थी, फोटो भेजने की। माला को भी महेश को देखना था। इसलिए महेश से उसने उसकी फोटो मांगी। महेश ने भी बिना सोचे फोटो भेज दी, फोटो देखकर माला ने सोचा, वह लड़का फोटो में बहुत ही अजीब सा लग रहा है। इसी बीच माला ने महेश से आठ-दस महीने तक बात बंद कर दी। महेश के मैसेज आते रहे, पर माला ने कोई जवाब नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अब माला का बड़ी कक्षा में दाखिला हो गया था। उस कक्षा में माला को किसी ऐसे व्यक्ति की जरुरत थी जो उसकी पढाई में मदद कर सकें। एक दिन माला आराम कर रही थी तो अचानक उसे महेश की याद आई। माला उठी और दोबारा से फेसबुक पर महेश को ढूंढना शुरू किया और महेश को मैसेज किया। महेश ने कहा कि कितने दिनों के बाद याद किया, कहां थी? फिर माला ने बताया कि मेरा दाखिला बड़ी कक्षा में हो गया है और मैं बहुत व्यस्त थी। पर अभी मुझे आप के मदद की आवश्यकता है। महेश ने अगले ही क्षण उत्तर दिया- काम बोलो, क्या करना है? आपका काम हो जाएगा। माला को यह उत्तर अपेक्षित नहीं था। वह कुछ देर के लिए सुन अवस्था में चली गई। कोई जवाब नहीं दिया और महेश का मैसेज पर मैसेज आते गए-बोलो क्या करना है? कुछ समय पश्चात माला को एहसास हुआ कि, सुनी-सुनाई सब बातें सही नहीं होती। जीवन में कुछ रिश्ते काफी पवित्र होते है और बहुत अनोखे भी, पर हमें उनका एहसास बहुत समय बाद होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">माला का काम महेश ने कर दिया। आज भी महेश ने माला को देखने की, मिलने की जिद्द नहीं की और ना ही माला ने भी। फेसबुक से दोनों की बाते धीरे-धीरे फोन पर जारी हो गई, परंतु वह अब भी एक-दूसरे से मिलने की बात नहीं करते। दोनों का यह रिश्ता इतना विश्वास का है। माला भी महेश के किसी बात को मना नहीं करती और न महेश माला के काम को कभी मना करता है। मैंने सुना था कि जोड़ी ऊपरवाला बनाता है। पर दोस्ती, शादी, जीवन, मृत्यु सबको ऊपर भगवान के घर पर ही मजूंरी मिल जाती है। आज के युग में एक सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल है लेकिन माला को एक अनोखा एवं सच्चा दोस्त मिला है। वो हमेशा भगवान का शक्रगुजार रहेगी। हमने पकड़ी थी रिश्तों की डोर। कुछ इस तरह पता नहीं कब वो देखते…अनोखे अनुभव बन गए।<br />
<strong>                                                                                                               -डॉ. सरिता यादव</strong></p>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 16:19:02 +0530</pubDate>
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