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                <title>महंगाई पर नियंत्रण जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[यहां बात केवल सब्जियों की नहीं बल्कि संपूर्ण कृषि उत्पादों की है। यदि किसान से लेकर उपभोक्ता तक को मुख्य रखकर कृषि नीतियां नहीं बनाई जाएंगी, तब तक खुदरा वस्तुओं में महंगाई की मार से बचा नहीं जा सकता।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/inflation-control-is-important/article-12517"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/on-inflation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">थोक मूल्य सूचकांक दर तेजी से बढ़ रही है और इस माह 8 प्रतिशत दर को पार करने की संभावना है। नि:संदेह आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि चिंताजनक है और आम जनता के लिए बड़ी परेशानी है। प्याज की कीमतें 100 रुपए के करीब टिकी हुई हैं। आलू के भाव में 45 फीसदी महंगे होना भी महंगाई दर को शिखर पर पहुंचा रहा है। केंद्र सरकार लगातार दावा कर रही है कि सरकार महंगाई पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन महंगाई पर नियंत्रण दिख नहीं रहा। इस मामले का समाधान एक मिनट में होने वाला नहीं बल्कि नीतिगत मामला दरअसल कृषि नीतियों व व्यापारिक नीतियों के बीच तालमेल से ही सुलझता है जो नहीं दिख रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि प्रधान देश में कभी प्याज व आलू की भरमार होती है और कभी इनकी कीमतें आसमान को छू जाती हैं। किसान फसलों का वाजिब मूल्य प्राप्त करने के लिए सड़कों पर धरने दे रहा है और सरकारों को ज्ञापन दिए जाते हैं, लेकिन किसान से फसल खरीदने के बाद बिचौलिया उसी वस्तु को किसानों की मांग से कई गुणा ज्यादा कीमत पर खरीददार को बेच रहा है। पिछले दो दशकों से महंगाई की मार आवश्यक वस्तुओं पर ज्यादा पड़ रही है, जिसका सीधा सम्बन्ध कृषि के साथ है। किसानों से खरीदे जाने के बाद व्यापारिक व्यवस्था में वस्तु का भाव दस गुणा बढ़ जाता है, न किसान संतुष्ट होता है और न ही उपभोक्ता की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है। इस कमी को दूर करने के प्रयास केवल छापामारी तक सीमित रह जाते हैं। छापामारी की वास्तविकता भी कुछ और ही होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर राजनीति में भी प्याज जादूगरी का काम करता है जिसने कई बार राजनीतिक घमासान भी मचाया है। तकनीकी भाषा में प्याज प्रशासनिक कर्मियों की कमियां उजागर करने में सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। यहां बात केवल सब्जियों की नहीं बल्कि संपूर्ण कृषि उत्पादों की है। यदि किसान से लेकर उपभोक्ता तक को मुख्य रखकर कृषि नीतियां नहीं बनाई जाएंगी, तब तक खुदरा वस्तुओं में महंगाई की मार से बचा नहीं जा सकता। यह भी तथ्य है कि गेहूँ व धान की फसल खरीदना सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है, लेकिन किसानों को सब्जियों व अन्य फसलों की तरफ प्रोत्साहित करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल महाराष्ट के प्याज की कीमत से किसानों के लागत खर्च भी पूरे नहीं हुए थे अब किसानों से औने-पौने दाम पर ज्यादा खरीदकर महंगे भाव बेचा जा रहा है। किसान ठगा सा महसूस कर रहा है, ऐसे में किसान खेती करने की गलती क्यों करेंगे? कृषि नीतियां व व्यापार संबंधी नीतियों में सुधार किए बिना महंगाई से मुक्ति पाना संभव नहीं।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 20:24:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अर्ध कुंभ 2019 : पहली बार होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[आईबीएम दे रही है एआई बेस्ड वीडियो एनालिटिक्स सर्विस उतर प्रदेश (सच कहूँ)। इलाहाबाद में 15 जनवरी से शुरू हो रहे अर्ध कुंभ की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस धार्मिक मेले में रेलवे पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी आईबीएम द्वारा विकसित की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/railway-to-use-technology-for-crowd-control-at-kumbh-2019/article-6671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/kumbh-.jpg" alt=""></a><br /><h2>आईबीएम दे रही है एआई बेस्ड वीडियो एनालिटिक्स सर्विस</h2>
<p><strong>उतर प्रदेश (सच कहूँ)।</strong> इलाहाबाद में 15 जनवरी से शुरू हो रहे अर्ध कुंभ की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस धार्मिक मेले में रेलवे पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी आईबीएम द्वारा विकसित की गई इस तकनीक की मदद से मेले में वाली भीड़ को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा टीवी स्क्रीन और कैमरों से मेले पर नजर रखने की तैयारी हो रही है।</p>
<h2>एआई टेक्नोलॉजी से भीड़ को कंट्रोल करेंगे</h2>
<p>उत्तर-मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर राजीव चौधरी ने बताया कि ‘भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आईबीएम की एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर वीडियो एनालिटिक्स सर्विस देगा। इसके अलावा हर तरफ से सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी और लगातार टीवी स्क्रीन पर जानकारी अपडेट की जाएगी।’</p>
<h2>इस तरह काम करती है आईबीएम वीडियो एनालिटिक्स सर्विस :</h2>
<p>आईबीएम सिक्योरिटी और पब्लिक सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन को वीडियो का उपयोग कर सिक्योरिटी, इंटेलिजेंस और जांच में मदद करता है। इसकी मदद से कई कैमरों से लिए गए वीडियो में से फोटो और जरूरी जानकारी खोजने के लिए एडवांस्ड सर्च, रिडेक्शन और फेशियल रिकग्निशन का उपयोग कर सकते हैं।</p>
<ul>
<li>इसमें किसी अपराधी, वीआईपी जैसे लोगों की फोटो एड कर वॉच लिस्ट बना सकते हैं, ताकि कैमरा इनको पहचान सके।</li>
<li>आयु, लिंग, चेहरे का रंग, बालों का रंग, कपड़ों का रंग और पैटर्न के आधार पर कई कैमरों में से सही रिजल्ट निकालकर देगा।</li>
<li>लाइव-स्ट्रीमिंग फिक्स्ड कैमरा से, अगर कोई ऑब्जेक्ट तय किए गए पैटर्न से अलग मूवमेंट करता है, तो उसका अलर्ट तुरंत मिल जाएगा।</li>
<li>वीडियो इमेजेस को डेटा में बदल देता है, जिससे वीडियो मॉनिटरिंग करना आसान हो जाता है।</li>
</ul>
<h2>पहले दिन 1 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना</h2>
<ul>
<li>दिन श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या</li>
<li>15 जनवरी (मकर संक्रांति) 1.20 करोड़</li>
<li>21 जनवरी (पौष पूर्णिमा) 55 लाख</li>
<li>4 फरवरी (मौनी अमावस्या) 3 करोड़</li>
<li>10 फरवरी (वसंत पंचमी) 2 करोड़</li>
<li>19 फरवरी (माघी पूर्णिमा) 1.6 करोड़</li>
<li>4 मार्च (महाशिवरात्रि) 60 लाख</li>
</ul>
<h2>ट्रेन की जानकारी के लिए ऐप होगी शुरू</h2>
<p>रेलवे जल्द ही ‘कुंभ रेल सेवा’ नाम से एक नई मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिसकी मदद से यात्रियों को ट्रेन से जुड़ी सारी जानकारी दी जाएगी। अनुमान के मुताबिक, इस मेले में दुनियाभर से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इसके अलावा सोशल मीडिया की भी मदद ली जाएगी।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Nov 2018 08:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जरूरतमंद लड़कियों को वितरित की सिलाई मशीनें</title>
                                    <description><![CDATA[श्री मुक्तसर साहिब/लम्बी। समाज सेवी संस्था संकल्प वैल्फेयर ट्रस्ट (पंजाब) जिला श्री मुक्तसर साहब की तरफ से ब्लॉक लम्बी के गांव वड़िंगखेड़ा में बीती 9 मई से 29 मई तक जरूरतमन्द व आर्थिक पक्ष से कमजोर परिवारों की लड़कियों के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण सैंटर खोला गया था। आज कैंप की समाप्ति पर ट्रस्ट की तरफ से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/seven-members-of-the-robber-gang-control/article-3867"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/sili.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्री मुक्तसर साहिब/लम्बी। </strong>समाज सेवी संस्था संकल्प वैल्फेयर ट्रस्ट (पंजाब) जिला श्री मुक्तसर साहब की तरफ से ब्लॉक लम्बी के गांव वड़िंगखेड़ा में बीती 9 मई से 29 मई तक जरूरतमन्द व आर्थिक पक्ष से कमजोर परिवारों की लड़कियों के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण सैंटर खोला गया था। आज कैंप की समाप्ति पर ट्रस्ट की तरफ से जरूरतमंद 8 लड़कियों को सिलाई मशीनें वितरित की गई। मौके ट्रस्टी मैडम रेनूं बाला प्रिंसीपल वड़िंगखेड़ा ने बताया जो लड़कियां 10वीं या 12वीं कक्षा के बाद घर की आमदन बढ़ाने के लिए कोई काम करना चाहतीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन लड़कियों की सहायता के लिए ट्रस्ट ने पहले नि:शुल्क सिलाई सैंटर खोला, फिर जरूरतमन्दों को सिलाई मशीनें देकर समाज सेवा में अपना योगदान दिया है। इसके साथ ही ट्रस्ट गुरपाल कौर ने कहा कि लड़कियां आज के समय में लड़कों की अपेक्षा किसी बातों में कम नहीं हैं। इस लिए समाज में जब कहीं भी खासकर लड़की या किसी महिला को आर्थिक पक्ष से मजबूत करने की जरूरत महसूस हो तो उस जरूरत को पूरा करने में जरूर हिस्सा डालना चाहिए। प्रताप सिंह सन्दू ने कहा कि यदि लड़कियां पढ़ाई दौरान ही जिंदगी में कुछ बनने का लक्ष्य तय कर चलें तो वह भी कल्पना चावला की तरह देश का नाम रौशन कर सकतीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बलजिन्दर सिंह ने ट्रस्ट की तरफ से उनके गांव में जरूरतमन्द लड़कियों के लिए निशुल्क सिलाई सैंटर खोलने व जरूरतमन्द लड़कियों को सिलाई मशीनों बांटने प्रति सभी सदस्यों की प्रशंसा की, व आगे से ऐसे समाज सेवी कामों में सहयोग देने का वायदा किया। इस मौके कुलदीप सिंह सिद्धू, जगमीत सिंह नीटू, पंजाब सिंह, विज्ञान मास्टर गुरदीप सिंह, रणजीत सिंह, डॉ. जगतार सिंह, बखसीस सिंह व पूनम देवी आदि मौजूद थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 May 2018 11:10:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिवार नियोजन पर बल देने की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में जनसंख्या दबाव के कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गयी हैं, जिसके चलते सरकर को पुन: परिवार नियोजन पर विचार करना पड़ रहा है। पश्चिमी देशों ने जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण लगा दिया है। इसी तरह भारत को भी इस दिशा में कदम उठाने होंगे। जनसंख्या वृद्धि ने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-to-emphasize-on-family-planning/article-2305"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/family-planing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत में जनसंख्या दबाव के कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गयी हैं, जिसके चलते सरकर को पुन: परिवार नियोजन पर विचार करना पड़ रहा है। पश्चिमी देशों ने जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण लगा दिया है। इसी तरह भारत को भी इस दिशा में कदम उठाने होंगे। जनसंख्या वृद्धि ने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है और इस दिशा में गंभीर प्रयास की आवश्यकता है। हाल ही में सरकार ने परिवार नियोजन उपायों में तेजी लाने का निर्णय किया है और इसके लिए ऐसे 146 जिलों की पहचान की गयी है, जहां पर प्रजनन दर 3 प्रतिशत से अधिक है और इनकी जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या का 28 प्रतिशत है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्रलय ने इन जिलों में मिशन परिवार विकास शुरू किया है, जिसके अंतर्गत परिवार नियोजन सेवाओं में सुधार, जागरूकता और परिवार नियोजन विकल्प उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, संवर्धन योजनाएं, सामुदायिक सुरक्षा, क्षमता निर्माण, उचित वातावरण का निर्माण और गहन निगरानी पर ध्यान दिया गया है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे इस कार्यक्रम की अर्धवार्षिक समीक्षा करे और उपलब्धियों का आंकलन करे कि क्या कार्यक्रम सही दिशा में बढ़ रहा है या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">ये जिले बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम में स्थित हैं। ये जिले अपेक्षाकृत पिछड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आयी है किंतु जनसंख्या वृद्धि दर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। दक्षिणी राज्यों में इसमें गिरावट आयी है। 2008 में देश में प्रजनन दर 2.6 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में 2.3 प्रतिशत है। विश्व मेंं भी अफ्रीकी देश में जनसंख्या वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत से गिरकर 4.1 प्रतिशत और एशिया में 2.4 प्रतिशत से गिरकर 2.2 प्रतिशत रह गयी है। विश्व के नौ देश जिनमें भारत, नाइजीरिया, अमरीका, युगांडा, तंजानिया, पाकिस्तान, आदि प्रमुख हैं 2050 तक विश्व जनसंख्या वृद्धि दर में इनका 50 प्रतिशत योगदान रहेगा। विकासशील देशों में संसाधनों की कमी है। इसलिए भी इन देशों में जनसंख्या वृिद्ध दर तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में जनसंख्या स्थिरीकरण आवश्यक है, ताकि आर्थिक विकास के अगले चरण में पहुंचा जा सके और इस नए कार्यक्रम का उद्देश्य यही है। यदि कुल प्रजनन दर अधिक होगी, तो मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्य दर भी अधिक होगी। इसलिए मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कुल प्रजनन दर में भी कमी लानी होगी। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण की ओर कदम बढ़ाना होगा, ताकि लोगोें की बदलती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और हमने गुणवत्ता सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं तथा ग्रमीण और शहरी क्षेत्रों में अंतिम उपभोक्ता तक परिवार नियोजन की सेवाओं को पहुंचाने का प्रयास किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली सरकारों ने परिवार नियोजन पर बल नहीं दिया, इसलिए आवश्यक है कि इस नए कार्यक्रम के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए गंभीर कदम उठाए जाएं। अब इसकी आशा भी की जाती है, क्योंकि मोदी सरकार ने अपनी परियोजनाओं और योजनाओं को पेशेवर ढंग से शुरू किया है। अत: लगता है कि स्वच्छ भारत अभियान की तरह परिवार विकास मिशन पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। भारत जैसे विकासशील देश में जनता के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए संसाधनों की कमी को देखते हुए प्रजनन दर को 2 प्रतिशत अर्थात् प्रति परिवर दो बच्चों तक लाने की आवश्यकता है। चीन ने इस दिशा में अनेक कदम उठाए, इसलिए वहां की जनसंख्या वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत तक आ गयी है और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 2024 तक भारत की जनसख्या चीन से अधिक हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">छोटे परिवार के लाभों के बारे में विशेषकर उत्तरी और मध्य भारत के गांवों में जागरूकता अभियान चलाया गया है। देश में स्वास्थ्य, पोषाहार, शिक्षा, आवास आदि के व्यय में वृद्धि के चलते छोटा परविार किसी भी परिवार के आर्थिक सामाजिक विकास को सुनिश्चित करता है। इस कार्यक्रम के कुशल क्रियान्वयन से जनसंख्या वृद्धि दर निर्धारित होगी। किंतु इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पंचायतों और जमीनी संगठनों की भागीदारी के साथ ही घर-घर अभियान भी आवश्यक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भी देश में मुसलमान एक से अधिक विवाह करते हैं और परिवार नियोजन उपायों को नहीं अपनाते। अल्पसंख्यक समुदाय होने के कारण वे किसी भी तरह अपनी जनसंख्या बढ़ाना चाहते हैं और इस प्रवृति को यदि आवश्यक हुआ तो कठोर उपायों के माध्यम से रोका जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय में तीन तलाक का मुद्दा लंबित है। यदि मुसलमानों को देश के पर्सनल लॉ का पालन करना है, तो उन्हें अपने बच्चों की संख्या सीमित रखनी होगी। गरीब और अशिक्षित लोग परिवार नियोजन तथा अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते है। विशेषकर बेटियों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता है।<br />
इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार के कन्याश्री प्रकल्प को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार दिया या है। पुरानी पीढ़ी में जनसख्या नियंत्रण के बारे में जागरूकता नही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा और जागरूता के प्रसार के कारण धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। परिवार नियोजन प्रभावी रहा है, क्योंकि इसका असर महानगरों और शहरों में देखने को मिला है। अर्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा और बुनियादी शिक्षा आवश्यक है। अब तक इस तरह की शिक्षा की उपेक्षा की जाती रही है, जिसके चलते परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रभावी नहीं हुए। प्रत्येक जिले और मंडल में परिवार नियोजन शिविर लगाए जाने चाहिएं, ताकि गरीब लोग इस बारे में जागरूक हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिमी देश इसलिए तेजी से विकास कर पाए, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर कम है और प्रति व्यक्ति आय अधिक है। यद्यपि भारत जनसंख्या वृद्धि दर को उन देशो के स्तर पर नहीं ला सकता, किंतु यदि परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो जनसंख्या वृद्धि पर रोक अवश्य लगेगी। इससे देश तेजी से सामाजिक आर्थिक विकास करेगा। देश की युवा जनसंख्या इस बारे में जागरूक है और जनसंख्या नियंत्रण में इस वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><br />
<em>डॉ. ओईशी मुखर्जी</em></strong><em> </em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2017 03:16:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एड्स पीड़िताएं भी दे सकेंगी शिशु को जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[एआरटी नामक दवा से होगा संभव बीच में छोड़ने पर दवाई नहीं करेगी असर करनाल (सच कहूँ न्यूज)। स्वास्थय विभाग द्वारा जारी की गई ए.आर.टी. नामक दवाई के इस्तेमाल से एक तरफ जहां एड्स से ग्रस्त महिलाएं भी शिशू को जन्म दे सकेंगी। वहीं इसी दवा के इस्तेमाल से महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/aids-sufferers-can-also-give-birth/article-2235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/hiv.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">एआरटी नामक दवा से होगा संभव</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बीच में छोड़ने पर दवाई नहीं करेगी असर</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>करनाल (सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्वास्थय विभाग द्वारा जारी की गई ए.आर.टी. नामक दवाई के इस्तेमाल से एक तरफ जहां एड्स से ग्रस्त महिलाएं भी शिशू को जन्म दे सकेंगी। वहीं इसी दवा के इस्तेमाल से महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। स्वास्थय विभाग द्वारा यह दवाई पूरे भारत में सप्लाई हो रही है।<br />
सीएमओ डा. योगेश शर्मा ने बताया कि एआरटी तीन दवाईयों का मिश्रण है। यह दवाई केवल उन्हें दी जाती है जिनकी सी.डी संख्या 350 से कम होती है। यह दवाई दिन में 2 बार लेनी होती है। यदि बीच में छोड़ दी जाए तो असर खत्म हो जाता है। ऐसे में मरीज को नए सिरे से दवाई शुरू करनी पड़ती है। सही उपचार और समय पर दवाई लेने से इस पर कंट्रोल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दवाई के लगातार सेवन से बच्चा तो <a href="http://10.0.0.122:1245/tips-for-better-health/">स्वस्थ</a> पैदा होगा ही साथ में महिला में यह बीमारी कंट्रोल हो जाएगी आगे नहीं बढ़ेगी। इस दिशा में विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतलों में उपलब्ध करवा रहा है। विभाग द्वारा यह दवाईयां प्रदेश के सभी अस्पतालों में भेजी जा रही हैं। सी.एम.ओ योगेश शर्मा ने बताया कि अगर एड्सग्रस्त या एच.आई.वी. पॉजीटिव ए.आर.टी. दवाई नियमित लेगा तो यह बीमारी काबू पाने के साथ रोगों से लड़ने की क्षमता बढाऐगी। सी.डी.-4 की जांच करवा सकते हैं। यही नहीं डयूटी दे रहे काऊंसलर से होने वो बच्चे में एच.आई.वी. संक्रमण की भी जांच कर सकते हैं।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 08:25:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>कालेधन पर लगाम की कोशिश है जीएसटी</title>
                                    <description><![CDATA[30जून 2017’ भारतीय इतिहास में 8 नवंबर के बाद एक और ऐतिहासिक तारीख साबित हुई। यहां 8 नवंबर का जिक्र इसलिए किया गया है, क्योंकि नोटबंदी कालेधन पर प्रहार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। जीएसटी को उसी लक्ष्य को हासिल करने हेतु अगला कदम समझा जा सकता है। क्योंकि नोटबंदी के बाद सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/gst-try-to-control-on-black-money/article-1891"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gst-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">30जून 2017’ भारतीय इतिहास में 8 नवंबर के बाद एक और ऐतिहासिक तारीख साबित हुई। यहां 8 नवंबर का जिक्र इसलिए किया गया है, क्योंकि नोटबंदी कालेधन पर प्रहार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। जीएसटी को उसी लक्ष्य को हासिल करने हेतु अगला कदम समझा जा सकता है। क्योंकि नोटबंदी के बाद सरकार के पास सबसे बड़ी चुनौती कालेधन को दोबारा नहीं पनपने देने की है। इस बात को समझने के लिए पहले यह समझना होगा कि कालाधन बनता कैसे है?</p>
<p style="text-align:justify;">कालाधन दो तरह का होता है, एक वो जो भ्रष्टाचार के द्वारा सरकारी अधिकारियों द्वारा रिश्वत के रूप में लिया जाता है और दूसरा वो जो सरकार को कर न देकर बचाया जाता है। अधिकारियों द्वारा जो रिश्वत ली जाती है, उस कालेधन से आम आदमी पिसता है। जबकि कर बचाकर जो काला धन बनाया जाता है, उससे सरकार को राजस्व की हानि होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि वह देश जिसकी आबादी सवा करोड़ है, उसमें कर देने वालों की संख्या मात्र 1.5% है? कुल मिलाकर इन परिस्थितियों में नुकसान देश का ही है। तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जीएसटी रूपी यह कदम उस कालेधन पर लगाम लगाने की कोशिश कहा जा सकता है, जो कर चोरी द्वारा पनपता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां यह समझना जरूरी है कि कर दो प्रकार के होते हैं- एक प्रत्यक्ष और दूसरे अप्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष कर वो जो हम सरकार को सीधे तौर पर देते हैं- जैसे आयकर, सम्पत्ति कर आदि। अप्रत्यक्ष कर वो जो व्यापारी या फिर सर्विस प्रोवाइडर अपने ग्राहक से लेकर सरकार को देता है। सर्वप्रथम समझने वाली बात यह है कि जीएसटी के दायरे में केवल अप्रत्यक्ष कर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्ष कर यथावत् ही हैं। अब जो अप्रत्यक्ष कर हैं, वो अभी तक ग्राहक से तो ले लिए जाते थे, लेकिन सरकार के खाते में पहुंच नहीं पाते थे। बात केवल इतनी भी नहीं है, दरअसल भारतीय कर प्रणाली जो अभी तक चल रही थी, उसमें जटिलताएं भी बहुत थीं। अभी तक भारतीय संविधान के अनुसार वस्तुओं की बिक्री पर राज्य सरकार कर लेती थीं और वस्तुओं के उत्पादन व सेवाओं पर केन्द्र सरकार।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी सामान के निर्माण के साथ ही सर्वप्रथम उस पर एक्साइज ड्यूटी और किसी किसी मामले में एडीशनल एक्साइज ड्यूटी भी लगती थी। इसके बाद लगता था सर्विस टैक्स। यदि माल एक राज्य से दूसरे राज्य में जाता है, तो देना होता था एन्ट्री टैक्स। इसके बाद उस पर लगता था उस राज्य का वैट, यानी सेल्स टैक्स। और अगर उस सामान का नाता मनोरंजन से है, तो मनोरंजन अथवा लग्जरी टैक्स लगता था।</p>
<p style="text-align:justify;">टैक्स का यह सिलसिला काफी लम्बा था, कुल मिलाकर अलग-अलग लगभग 18 टैक्स लगते थे और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह कि भारत का उपभोक्ता एक आम आदमी इन परिस्थितियों में टैक्स पर टैक्स देने को विवश था। बावजूद इसके सरकारी खजाना खाली रहता था और काले धन से व्यापारियों की तिजोरियां भरी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन जीएसटी के लागू हो जाने से न सिर्फ इतने अलग-अलग प्रकार के टैक्सों से छुटकारा मिलेगा, बल्कि चूंकि टैक्स भरने की प्रक्रिया कम्प्यूटर पर होने के कारण टैक्स जमा करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से भी आजादी मिलेगी। अगर इसके तकनीकी पहलू पर बात करें, तो 20 लाख के टर्नओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि 75 लाख के टर्नओवर वाले व्यापारियों को कम्पोसिट स्कीम के अन्तर्गत केवल 1% टैक्स चुकाना है। यहां यह जानकारी विशेष महत्व रखती है कि भारत में लगभग 68% व्यापारी इन्हीं दो श्रेणियों में आते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तो कुल मिलाकर इतना तो तय है कि जीएसटी भारतीय अर्थव्यवस्था में न सिर्फ खुद एक बुनियादी बदलाव है, बल्कि सरकार द्वारा राजस्व प्राप्ती में भी ठोस बदलाव लाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। काले धन के एक प्रकार पर सरकार के जीएसटी रूपी वार के बाद देश को इंतजार रहेगा भ्रष्टाचार रूपी कालेधन पर लगाम का। क्योंकि सरकार होती तो जनता के लिए है, लेकिन जब तक उसे चलाने वाले नेता और अधिकारियों के भ्रष्ट आचरण को रोकने में वह नाकाम रहेगी, तब तक नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदम भी अपना मकसद हल करने में नाकाम ही सिद्ध होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ. नीलम महेंद्र</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 22:24:14 +0530</pubDate>
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