<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/palm-farming/tag-36100" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Palm Farming - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/36100/rss</link>
                <description>Palm Farming RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Date Palm Farming: धर्मपुरी के किसानों ने रचा नया कृषि मॉडल, 100 साल तक फल देने वाली इस फल की खेती की शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[कभी केवल इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य मध्य-पूर्वी रेगिस्तानी देशों की पहचान मानी जाने वाली खजूर (डेट पाम) की खेती अब तमिलनाडु की धरती पर भी सफलता की नई कहानी लिख रही है। धर्मपुरी और कृष्णागिरि जिलों के कई किसानों ने आधुनिक तकनीक और अपने अनुभव के दम पर खजूर की व्यावसायिक खेती शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/farmers-of-dharmapuri-created-a-new-agricultural-model-and-started/article-87377"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/palm-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">धर्मपुरी, (हि.स.)। कभी केवल इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य मध्य-पूर्वी रेगिस्तानी देशों की पहचान मानी जाने वाली खजूर (डेट पाम) की खेती अब तमिलनाडु की धरती पर भी सफलता की नई कहानी लिख रही है। धर्मपुरी और कृष्णागिरि जिलों के कई किसानों ने आधुनिक तकनीक और अपने अनुभव के दम पर खजूर की व्यावसायिक खेती शुरू कर दी है। अच्छी पैदावार और बाजार में मिलने वाले बेहतर दामों के कारण यह खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। Date Palm Farming</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से धर्मपुरी जिले के पालक्कोडु, मोरप्पूर, कंबैनल्लूर, अरियाकुलम तथा कृष्णागिरि जिले के सूलगिरि, बरगूर, कावेरीपट्टिनम और होसूर जैसे क्षेत्रों में खजूर के बाग तेजी से विकसित हो रहे हैं। इन इलाकों की अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु और पर्याप्त धूप खजूर की खेती के लिए अनुकूल मानी जा रही है, जिसके कारण अब अधिक किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मध्य-पूर्व के अनुभव से बदली किस्मत</h3>
<p style="text-align:justify;">धर्मपुरी जिले के अरियाकुलम गांव के किसान एस. निजामुद्दीन इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने कई वर्षों तक सऊदी अरब के एक खजूर फार्म में काम किया और वहीं से इस फसल की आधुनिक खेती की बारीकियां सीखीं। भारत लौटने के बाद उन्होंने तय किया कि जिस फसल ने रेगिस्तान में चमत्कार किया है, उसे अपने गांव की जमीन पर भी उगाया जा सकता है। Date Palm Farming</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने विदेशों से टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार खजूर के पौधे मंगवाकर प्रयोग के तौर पर खेती शुरू की। शुरुआती सफलता मिलने के बाद उन्होंने लगातार अपने बाग का विस्तार किया और आज लगभग 15 एकड़ भूमि में खजूर की खेती कर रहे हैं। उनके बाग में बर्री, मस्तूर, अम्मार, नूर, अजवा सहित 35 से अधिक किस्मों के खजूर लगाए गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">35 से अधिक किस्में, हर एक की अलग पहचान</h3>
<p style="text-align:justify;">दुनिया में खजूर की लगभग 3,000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। इनमें से कई व्यावसायिक किस्में अब धर्मपुरी की मिट्टी में भी उगाई जा रही हैं। किसान निजामुद्दीन के अनुसार, बर्री किस्म ने धर्मपुरी के अपेक्षाकृत सूखे मौसम में भी शानदार उत्पादन दिया है। वहीं नूर किस्म अपने स्वाद, मिठास और गुणवत्ता के कारण बाजार में विशेष मांग रखती है। अजवा जैसी लोकप्रिय किस्मों की भी खेती की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">खजूर के पौधे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबी आयु है। उचित देखभाल मिलने पर एक खजूर का पेड़ कई दशकों तक लगातार फल देता है और लगभग 100 वर्षों तक उत्पादक बना रह सकता है। यही कारण है कि किसान इसे दीर्घकालिक निवेश के रूप में भी देख रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जून-जुलाई में होती है कटाई</h3>
<p style="text-align:justify;">हर वर्ष जून से खजूर की कटाई शुरू हो जाती है। इस वर्ष मौसम में बदलाव के कारण कटाई कुछ देर से शुरू हुई, लेकिन उत्पादन अच्छा मिलने की उम्मीद है। खेतों से ताजा खजूर की तुड़ाई कर उन्हें सीधे व्यापारियों को भेजा जा रहा है। Date Palm Farming</p>
<p style="text-align:justify;">कटाई के बाद स्थानीय व्यापारी सीधे बागानों से खजूर खरीदकर खुदरा बाजार तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों के व्यापारी भी बड़ी संख्या में खरीदारी कर रहे हैं। किसानों के अनुसार किस्म और गुणवत्ता के आधार पर खजूर की कीमत 200 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल रही है। कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों की मांग विदेशों में भी है और इन्हें निर्यात के लिए भी खरीदा जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मदुरै में भी सफल हो रही खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">धर्मपुरी के अलावा मदुरै जिले के अलंगानल्लूर के निकट इडैयपट्टी गांव में भी खजूर की खेती सफल हो रही है। यहां किसान मूवेंधर ने लगभग दो एकड़ भूमि में 95 खजूर के पौधों का बाग तैयार किया है। पहले निजी कंपनी में कार्यरत रहे मूवेंधर ने नौकरी छोड़कर खेती को अपना व्यवसाय बनाया। उन्होंने पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपनाते हुए बकरी की खाद, गोबर, गुड़ और दही जैसे जैविक पोषक तत्वों का उपयोग किया। तीन वर्ष की मेहनत के बाद अब पहली बार प्रत्येक पेड़ पर तीन से चार फल के गुच्छे आए हैं, जिससे वे काफी उत्साहित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मूवेंधर बताते हैं कि शुरुआत में खजूर की खेती आसान नहीं थी। उनकी पत्नी अमुधा और भाई ने हर कदम पर उनका साथ दिया। खजूर के पौधों में कृत्रिम परागण (हाथ से नर फूलों का पराग मादा फूलों तक पहुंचाना) करना पड़ता है। कई बार परागण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पेड़ों पर सफलतापूर्वक फल लगने शुरू हुए। मार्च में शुरू हुई यह प्रक्रिया अब अच्छी पैदावार के रूप में सामने आ रही है और अगस्त तक पहली फसल पूरी तरह तैयार हो जाएगी। Date Palm Farming</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों के लिए बन रही नई उम्मीद</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में खजूर की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन सकती है। एक बार बाग स्थापित होने के बाद लंबे समय तक उत्पादन मिलता है, रखरखाव अपेक्षाकृत कम रहता है और बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में धर्मपुरी, कृष्णागिरि और मदुरै के किसानों की सफलता अन्य राज्यों के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। आने वाले वर्षों में यदि वैज्ञानिक तकनीक और बाजार की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होती है, तो खजूर की खेती दक्षिण भारत की प्रमुख नकदी फसलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। Date Palm Farming</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/business/farmers-of-dharmapuri-created-a-new-agricultural-model-and-started/article-87377</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/business/farmers-of-dharmapuri-created-a-new-agricultural-model-and-started/article-87377</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 13:35:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/palm-farming.jpg"                         length="120759"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        