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                <title>Common krait Snake - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Common krait Snake RSS Feed</description>
                
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                <title>Common krait Snake: कोबरा से भी ज्यादा जानलेवा साबित होता है करैत, रात में सोते समय करता है हमला; शुरुआती लक्षण भी नहीं आते नजर</title>
                                    <description><![CDATA[Common krait Snake: कोबरा से भी ज्यादा जानलेवा साबित होता है करैत, रात में सोते समय करता है हमला; शुरुआती लक्षण भी नहीं आते नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/krait-proves-to-be-more-deadly-than-cobra-attacks-at/article-87426"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/common-krait-snake.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Common krait Snake: अनु सैनी। </strong>भारत में जहरीले सांपों का नाम आते ही सबसे पहले लोगों के मन में कोबरा की छवि उभरती है, लेकिन देश में सांप के काटने से होने वाली मौतों के लिए केवल कोबरा ही जिम्मेदार नहीं है। भारत के सबसे खतरनाक जहरीले सांपों में शामिल कॉमन करैत (Common Krait) कई मामलों में कोबरा से भी अधिक घातक साबित होता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका जहर और काटने का तरीका है। दरअसल करैत का जहर न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic) होता है, जो सीधे शरीर के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। यह जहर मस्तिष्क से मांसपेशियों तक जाने वाले संदेशों को प्रभावित करता है, जिससे धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। यदि समय पर उपचार और एंटी-स्नेक वेनम नहीं मिले तो मरीज की सांस लेने वाली मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं और श्वसन रुकने से जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रात में अधिक सक्रिय रहता है करैत</h4>
<p style="text-align:justify;">करैत मुख्य रूप से दिन की अपेक्षा रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। यही कारण है कि इसके काटने की अधिकांश घटनाएं देर रात या तड़के सुबह होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोग खुले आंगन, बरामदे, छत या जमीन पर सोते हैं, वहां इसके काटने की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती हैं। करैत आमतौर पर इंसानों पर हमला करने नहीं आता। लेकिन यदि वह किसी सोते हुए व्यक्ति के पास पहुंच जाए और व्यक्ति नींद में करवट लेते हुए अनजाने में उस पर दबाव डाल दे या उसे छू ले, तो वह बचाव में काट सकता है। हांलांकि ये माना जाता हैं कि करैत जानबूझकर इंसानों की बगल में सोता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">काटने के बाद तुरंत नहीं होता तेज दर्द | Common krait Snake</h4>
<p style="text-align:justify;">करैत के काटने की सबसे खतरनाक बात यह है कि कई मामलों में उसके दांतों के निशान भी स्पष्ट नहीं दिखाई देते और न ही तेज दर्द या ज्यादा सूजन होती है। कई पीड़ितों को केवल हल्का-सा चुभन महसूस होती है, जिसे वे मच्छर या किसी छोटे कीड़े के काटने जैसा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी वजह से अधिकांश लोग सोते रहते हैं और अस्पताल नहीं पहुंच पाते। ऐसा कहा जाता है कि करैत के जहर में "नींद की गोली" होती है। जिस कारण आदमी सोता ही वह जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ये लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">करैत के काटने के कुछ घंटों बाद मरीज में आंखों की पलकों का झुकना, धुंधला दिखाई देना, बोलने में कठिनाई, निगलने में परेशानी, गर्दन और शरीर में कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत और धीरे-धीरे लकवा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक खतरा</h4>
<p style="text-align:justify;">बरसात और गर्मी के मौसम में करैत गांवों और खेतों के आसपास अधिक दिखाई देता है। चूहों की मौजूदगी, झाड़ियां, लकड़ियों के ढेर और कच्चे मकान उसके छिपने के सामान्य स्थान होते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसके काटने की घटनाएं अधिक दर्ज की जाती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कैसे करें बचाव</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आपको खुले में सोना पड़े तो जमीन पर सोने के बजाय खाट या चारपाई का इस्तेमाल करें और मच्छरदानी अवश्य लगाएं। रात में बिना टॉर्च के बाहर न निकलें, घर के आसपास झाड़ियां और कचरा साफ रखें तथा चूहों की संख्या कम करने का प्रयास करें। खेतों या अंधेरी जगहों पर जाते समय जूते पहनें।<br />यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो झाड़-फूंक, ताबीज या घरेलू उपचार में समय बिल्कुल न गंवाएं। मरीज को शांत रखें और बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी-स्नेक वेनम और आवश्यक उपचार उपलब्ध हो। समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 12:04:45 +0530</pubDate>
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