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                <title>First Time - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सबरीमाला : 800 साल में पहली बार दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान अयप्पा की पूजा भी की, सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने पहले सबरीमाला में हर उम्र की महिला को दर्शन की अनुमति दी थी तिरुवनंतपुरम। केरल के सबरीमाला मंदिर में बुधवार तड़के 50 साल(Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश किया। इसके बाद मंदिर को शुद्धिकरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">भगवान अयप्पा की पूजा भी की, सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने पहले सबरीमाला में हर उम्र की महिला को दर्शन की अनुमति दी थी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>तिरुवनंतपुरम।</strong> केरल के सबरीमाला मंदिर में बुधवार तड़के 50 साल(Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश किया। इसके बाद मंदिर को शुद्धिकरण के लिए बंद कर दिया गया। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने महिला श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट से सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने के लगभग तीन महीने बाद पहली बार महिलाओं ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के दर्शन किए। मंदिर के 800 साल के इतिहास में पहली बार दो महिलाओं ने यहां प्रवेश कर भगवान अयप्पा की पूजा की है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मंदिर में प्रवेश करने वाली बिंदु और कनकदुर्गा की उम्र 40 से 50 साल के बीच, पुलिस सुरक्षा में पहुंचीं मंदिर</h2>
<p style="text-align:justify;">न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के नाम बिंदु और कनकदुर्गा हैं। (Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) उनकी उम्र 40 से 50 साल के बीच बताई जा रही है। दोनों महिलाएं पुलिसकर्मियों के साथ मंदिर में घुसीं और सुबह 3:45 बजे पूजा-अर्चना की। इन दोनों महिलाओं ने पिछले महीने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दौड़ती हुई मंदिर के अंदर पहुंचीं</h2>
<p style="text-align:justify;">दोनों महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने के सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। वे दौड़ती हुए मंदिर के अंदर (Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) जाती नजर आ रही हैं। दोनों महिलाएं उत्तरी केरल की रहने वाली हैं। उनके परिवारों को एहतियातन सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विजयन ने दोनों महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने की घटना की पुष्टि की। विजय ने कहा कि पहले ये महिलाएं ट्रैकिंग नहीं कर पाई थीं। इस बार वे कामयाब रहीं। बिंदु ने बाद में मीडिया को बताया कि हमने मंगलवार को ही पुलिस से संपर्क साधा था। इसके बाद हमें मदद का आश्वासन दिया गया। वहीं, कनकदुर्गा के भाई भरतन ने कहा कि उनकी बहन पिछले हफ्ते ही किसी काम का बहाना बताकर तिरुवनंतपुरम से निकली थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">एक दिन पहले महिलाओं ने बनाई थी 620 किमी लंबी श्रृंखला</h2>
<p style="text-align:justify;">सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वालों के खिलाफ महिलाओं ने मंगलवार को 620 किमी लंबी श्रृंखला बनाई थी। यह श्रृंखला कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक बनाई गई। यह 14 जिलों से होकर गुजरी। साथ ही करीब 150 से अधिक सामाजिक संगठन भी शामिल हुए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">800 साल से चली आ रही प्रथा</h2>
<p style="text-align:justify;">28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश देने की इजाजत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केरल (Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले यहां 10 से 50 साल उम्र की महिला के प्रवेश पर रोक थी। यह प्रथा 800 साल पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे राज्यभर में विरोध हुआ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आदेश के बाद 3 बार खुला मंदिर</h2>
<p style="text-align:justify;">आदेश के बाद 16 नवंबर को तीसरी बार मंदिर खोला गया। मंदिर 62 दिनों की पूजा के लिए खुला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी विरोध के चलते 1 जनवरी तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई थी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:43:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>फीफा विश्वकप में पहली बार वीडियो रेफरी</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को (एजेंसी)। रुस की मेज़बानी में 14 जून से शुरु होने जा रहे फुटबाल विश्वकप के दौरान रेफरी खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिखाते समय वीडियो असिस्टेंड रेफरी (वार) तकनीकी की मदद ले सकेंगे जो पहली बार उपयोग में लाई जा रही है। फुटबाल की नियम निर्धारण संस्था (आईएफएबी) ने बुधवार को बताया कि विश्वकप मैचों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/video-referee-first-time-fifa-world-cup-2018/article-3857"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/video-rafree.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को (एजेंसी)। </strong>रुस की मेज़बानी में 14 जून से शुरु होने जा रहे फुटबाल विश्वकप के दौरान रेफरी खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिखाते समय वीडियो असिस्टेंड रेफरी (वार) तकनीकी की मदद ले सकेंगे जो पहली बार उपयोग में लाई जा रही है। फुटबाल की नियम निर्धारण संस्था (आईएफएबी) ने बुधवार को बताया कि विश्वकप मैचों के दौरान आॅफ द् बॉल के लिए दिए जाने वाले रेड कार्ड पेनल्टी देने के समय मैदान पर मौजूद रेफरी वार तकनीक की मदद ले सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आईएफएबी तकनीकी निदेशक डेविड एलेरे ने कहा कि यदि खेल के दौरान रेफरी से कोई घटना नज़रअंदाज़ हो जाती है तो उस समय वार या सहयोगी वार रेफरी की मदद ली जा सकती है जो रेफरी को किसी खिलाड़ी को बाहर भेजने के लिए रेड कार्ड पेनल्टी देने से जुड़ी सही जानकारी देगा। यदि ऐसी कोई घटना मैच में देरी से भी होती है तो वार मददगार होगा। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं मान रहे हैं कि ऐसा लगातार होगा, लेकिन यह केवल गंभीर रेड कार्ड पेनल्टी मामलों के लिए उपयोग में कारगर रहेगा। रुस में 14 जून से 15 जुलाई तक चलने वाले विश्वकप में इस तकनीक का उपयोग पहली बार किया जाएगा।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 May 2018 17:19:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जर्मनी ने चिली को हरा पहली बार जीता खिताब</title>
                                    <description><![CDATA[कन्फेडरेशन कप फुटबाल टूर्नामेंट के फाइनल में जर्मनी के लिए एकमात्र विजयी गोल लार्स स्टिंडल ने दागा सेंट पीटर्सबर्ग (एजेंसी)। जर्मनी ने चुनौतीपूर्ण और काफी रोमांचक मुकाबले में अंतत: दक्षिण अमेरिकी टीम चिली की गलती की बदौलत एकमात्र गोल से पहली बार कन्फेडरेशन कप फुटबाल टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया। जर्मनी के लिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/germany-won-the-title-for-the-first-time/article-1913"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/football.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">कन्फेडरेशन कप फुटबाल टूर्नामेंट के फाइनल में जर्मनी के लिए एकमात्र विजयी गोल लार्स स्टिंडल ने दागा</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सेंट पीटर्सबर्ग (एजेंसी)।</strong> जर्मनी ने चुनौतीपूर्ण और काफी रोमांचक मुकाबले में अंतत: दक्षिण अमेरिकी टीम चिली की गलती की बदौलत एकमात्र गोल से पहली बार कन्फेडरेशन कप फुटबाल टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया। जर्मनी के लिए एकमात्र विजयी गोल लार्स स्टिंडल ने दागा। लार्स ने मैच के पहले 20वें मिनट में गोल किया जब चिली के मिडफील्डर मार्सेलो डियाज़ ने गलती से अपने ही क्षेत्र में उन्हें गेंद थमा दी। चिली ने इस मैच में भी काफी आक्रामकता दिखाई और फारवर्ड आर्टूरो विदाल ने मैच में कमाल का खेल दिखाया लेकिन बाकी खिलाड़यिों से उन्हें खास मदद नहीं मिल सकी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पेनल्टी की अपील को खारिज किया</h2>
<p style="text-align:justify;">खिताबी मुकाबले में काफी ड्रामा भी देखने को मिला और दोनों ही टीमों ने गोल के कई मौके गंवाए, डिफेंस में भारी गलतियां हुई और दूसरे हॉफ में तो दो वीडियो रिव्यू काफी विवादास्पद भी रहे जिसने मैच को और दिलचस्प बना दिया। चिली के डिफेंडर गोंजाले जारा ने टिमो वेर्नर को कोहनी मारी और सर्बियाई रेफरी मिलोराड माजिक ने वीडियो की समीक्षा करवाई जिसके बाद उन्हें एलो कार्ड दिखाकर बाहर कर दिया गया। इसके थोड़ी देर बाद माजिक ने चिली की पेनल्टी की अपील को खारिज कर दिया और रिव्यू के बाद भी अपने निर्णय पर टिके रहे। हालांकि जर्मनी ने युवा टीम के साथ उतरने के बावजूद पहली बार कन्फेडरेशप कप का खिताब जीतकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कन्फेडरेशप कप के साथ एक भ्रांति भी जुड़ी है कि इसे जीतने के एक वर्ष बाद कभी भी उस टीम ने फिर विश्वकप नहीं जीता है। जर्मन कोच जोआकिम लू ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि हमारी युवा टीम ने पहली बार इस खिताब को जीतकर इतिहास में नाम दर्ज कर लिया है यह हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है। वहीं चिली के कोच जुआन एंटोनिया पिज्जी ने कहा कि हमने अपनी योजनाओं पर काम किया, हमने कई मौके भी बनाए लेकिन फिर कुछ गलतियां और दुर्घटनाएं हो गई जो अकसर फुटबाल में होती हैं। इस बार हमारे हारने का मौका था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2017 08:10:53 +0530</pubDate>
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