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                <title>भारत पाकिस्तान तनाव - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>भारत पाकिस्तान तनाव RSS Feed</description>
                
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                <title>India Pakistan Relations: भारत के कड़े संदेश से पाकिस्तान में मची बेचैनी, बढ़ा सीमा पर तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[India Pakistan Relations:  भारत के सख्त रुख से बढ़ी पाकिस्तान की बेचैनी, हर मोर्चे पर बढ़ा दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-pakistan-relations/article-88071"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/india-pakistan-relations.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India Pakistan Relations: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति अपने रुख को पहले की अपेक्षा अधिक स्पष्ट और कठोर बनाया है। इसी क्रम में सिंधु जल संधि को लेकर भी नई स्थिति बनी है। भारत का कहना है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पर प्रभावी रोक नहीं लगती, तब तक पुराने ढंग से द्विपक्षीय संबंध आगे बढ़ाना संभव नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व देते हुए भारत ने यह संकेत दिया है कि अब हर निर्णय उसी दृष्टि से लिया जाएगा। सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से संपन्न हुई थी। इस समझौते ने दशकों तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार तैयार किया। बदलती परिस्थितियों में भारत का मानना है कि किसी भी समझौते की सफलता आपसी विश्वास और जिम्मेदार व्यवहार पर निर्भर करती है। यदि आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौती बनी रहती है, तो सहयोग की भावना भी प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसी कारण भारत ने अपने कूटनीतिक दृष्टिकोण में परिवर्तन के संकेत दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">    पाकिस्तान इस विषय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास कर रहा है और वहां के अनेक नेताओं ने जल संकट तथा क्षेत्रीय स्थिरता की चिंता व्यक्त की है। दूसरी ओर भारत लगातार दोहरा रहा है कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ नहीं चल सकते। भारत का मत है कि सीमा पार से हिंसा, घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई किसी भी सार्थक संवाद की पहली शर्त है। इस बीच दोनों देशों की कुछ सार्वजनिक हस्तियों ने संवाद बहाल करने की अपील भी की है। उनका विश्वास है कि बातचीत से तनाव कम हो सकता है, जबकि अनेक विशेषज्ञों का मत है कि विश्वास बहाली के लिए पहले आतंकवाद पर निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">    भारत का अनुभव भी यही बताता है कि अतीत में शांति की अनेक पहलें आतंकवादी घटनाओं के कारण बाधित हुईं। लाहौर बस यात्रा के बाद कारगिल संघर्ष और उसके बाद हुए बड़े आतंकी हमलों ने दोनों देशों के बीच विश्वास को गंभीर क्षति पहुंचाई। इसी पृष्ठभूमि में अब यह धारणा मजबूत हुई है कि स्थायी शांति का आधार दृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता है। दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए जल, सुरक्षा और कूटनीति तीनों विषयों को संतुलित दृष्टि से देखना होगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह शांतिपूर्ण संबंधों का समर्थक है, पर राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा से समझौते का प्रश्न नहीं उठता। आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ेंगे, यह काफी हद तक आतंकवाद पर उठाए जाने वाले ठोस कदमों और आपसी विश्वास की पुनर्स्थापना पर निर्भर करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">-मृत्युंजय दीक्षित<br />यह लेखक के अपने विचार हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:11:31 +0530</pubDate>
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