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                <title>Coronavirus :  चीनी नागरिकों से लोगों ने बनाई दूरी , होटल ने लिखा-नो एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोनावायरस (Coronavirus) से बढ़ते खतरे के बीच पूरी दुनिया में चीन विरोधी भावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। कई देशों ने चीन के यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/people-made-distance-from-chinese-citizens-all-over-the-world-hotel-restaurant-wrote-no-entry/article-12903"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/coronavirus.jpg" alt=""></a><br /><h2>चीन में कोरोनावायरस की वजह से अब तक 361 की मौत, 14,562 लोग चपेट में |Coronavirus</h2>
<h4>Edited By Vijay Sharma</h4>
<p><strong>सियोल(एजेंसी)।</strong> कोरोनावायरस <strong>(Coronavirus)</strong> से बढ़ते खतरे के बीच पूरी दुनिया में चीन विरोधी भावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। कई देशों ने चीन के यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया, जापान, हॉन्ग कॉन्ग और वियतनाम में कई रेस्त्रां ने चीनी ग्राहकों से दूरी बना ली है। इनके लिए नो एंट्री के बोर्ड लगा दिए हैं। फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अन्य हिस्सों में चीनी नागरिकों को अपमान झेलना पड़ रहा है। चीन में कोरोनावायरस की वजह से अब तक 361 की मौत हो गई है। वहीं, 14,562 लोग इसकी चपेट में हैं। वहीं, फिलीपींस में कोरोनावायरस की वजह से एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दक्षिण कोरिया में लोगों ने चीनी नागरिकों से दूरी बनाई | Coronavirus</h2>
<p style="text-align:justify;">न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई वेबसाइटों पर ऐसी अनेक टिप्पणियां आ रही हैं, जिन पर चीन के लोगों को बाहर निकालने या उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है। सियोल में एक सी फूड रेस्त्रां ने एक बोर्ड लगा दिया कि चीनी नागरिकों को प्रवेश नहीं। लेकिन विरोध के बाद इसे हटा लिया गया। अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में किसी ने चीनी-अमेरिकी नागरिक एरी देंग को लेकर यह अफवाह फैला दी कि उसे कोरोनावायरस है। वह कैम्पस में अपने दोस्तों के साथ बैठी थी। इसी दौरान छात्र परेशान होने लगे और अपना सामान लेकर वहां से निकल गए। इटली के एक रेस्त्रां में नोटिस लगाया गया कि जो लोग चीन से आ रहे हैं, उन्हें अंदर आने की इजाजत नहीं है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हॉन्ग कॉन्ग में खाना परोसने से इनकार किया | Coronavirus</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हॉन्गकॉन्ग में जापान के एक रेस्त्रां ने चीन के लोगों को भोजन परोसने से इनकार कर दिया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> फ्रांस में भी ऐसी स्थिति भी देखने को मिली ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जब लोगों ने एशियाई दिख रहे</strong><strong> व्यक्ति को देखकर अपना रास्ता बदल लिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पेरिस में चीनी समुदाय के कानूनी सलाहकार सोक लाम ने कहा कि लोगों को यह नहीं मानना चाहिए कि हम एशियाई हैं,</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> हमारे जरिए वायरस फैलने की संभावना ज्यादा है।’ </strong></li>
<li><strong>इटली के एक रेस्त्रां में नोटिस लगाया ।</strong></li>
<li><strong>नोटिस कहा कि जो लोग चीन से आ रहे हैं, उन्हें अंदर आने की इजाजत नहीं है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 11:53:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीनी वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड को स्वच्छ तरल ईंधन में बदलने के लिए नए उत्प्रेरक विकसित किया</title>
                                    <description><![CDATA[हेफेई (एजेंसी) चीनी शोधकर्ताओं ने कार्बन डाइऑक्साइड को मेथनॉल में बदलने के लिए एक नया उत्प्रेरक विकसित किया है। चीन के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ ज़ेंग जेई के नेतृत्व में शोधकत्ताओं के एक दल ने प्लैटिनम के एकल परमाणुओं पर आधारित एक उत्प्रेरक विकसित किया। जो 150 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कार्बन डाइऑक्साइड को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/chinese-scientists-developed-new-catalysts-to-convert-carbon-dioxide-into-clean-liquid-fuels/article-8805"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/2019_5largeimg01_may_2019_094411487.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हेफेई (एजेंसी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">चीनी शोधकर्ताओं ने कार्बन डाइऑक्साइड को मेथनॉल में बदलने के लिए एक नया उत्प्रेरक विकसित किया है। चीन के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ ज़ेंग जेई के नेतृत्व में शोधकत्ताओं के एक दल ने प्लैटिनम के एकल परमाणुओं पर आधारित एक उत्प्रेरक विकसित किया। जो 150 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कार्बन डाइऑक्साइड को प्रभावी रूप से मेथनॉल में बदल सकता है। इसे व्यापक रूप से इंजनों के लिए एक स्वच्छ ईंधन माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेथनॉल के लिए प्लैटिनम आधारित उत्प्रेरक की चयनात्मकता 90.3 प्रतिशत है। जोकि आमतौर पर उपयोग किये जाने वाले तांबे, जस्ता और एल्यूमीनियम पर आधारित उत्प्रेरक से 10 प्रतिशत ज्यादा है। ज़ेंग ने कहा कि शोध उच्च शुद्धता के साथ मेथनॉल का उत्पादन करने के लिए एक नई विधि प्रदान करता है और वैज्ञानिकों को एकल-परमाणु कटैलिसीस के तंत्र को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। यह शोध शैक्षणिक पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 May 2019 10:09:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>चीनी जल वर्चस्व एवं जल हथियार की चुनौती एवं समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सीमा में चीन द्वारा लगातार घुसपैठ की खबरों के बीच तिब्बत के रास्ते भारत में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक दिया गया है। इसके पीछे चीन का हाथ होने की बात सामने आई है। पानी रूकने की वजह से अरूणाचल प्रदेश के तूतिंग, यिंगकियोंग और पासीघाट इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/challenges-and-solutions-of-chinese-water-supremacy-and-water-weapons/article-6501"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय सीमा में चीन द्वारा लगातार घुसपैठ की खबरों के बीच तिब्बत के रास्ते भारत में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक दिया गया है। इसके पीछे चीन का हाथ होने की बात सामने आई है। पानी रूकने की वजह से अरूणाचल प्रदेश के तूतिंग, यिंगकियोंग और पासीघाट इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। साथ ही अरूणाचल के जंगल और जलीय पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। गौरतलब है कि चीन ने तिब्बत में बहने वाली यारलुंग सांगपो नदी का पानी रोक दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये नदी जब अरुणाचलप्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसे सियांग के नाम से पुकारा जाता है। आगे चलकर असम में ये ब्रह्यपुत्र के नाम से पहचानी जाती है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस नदी के मिलिन सेक्शन में भारी मात्रा में भूस्खलन हुआ है, जिसकी वजह से ब्रह्यपुत्र की मुख्यधारा प्रभावित हुई है। लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक घटना नहीं मानते,अपितु यह चीन की जल कूटनीति का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि चीन ने कृत्रिम भूस्खलन कर ब्रह्यपुत्र नदी के बीच में एक झील का निर्माण कर दिया है, जिसमें पानी के स्तर में 40 मीटर की वृद्धि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह झील भी अब भारत के लिए खतरा बनी हुई है। जब इस ब्लॉकेज को साफ किया जाएगा तो नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि से तबाही भी आ सकती है। जून 2000 में कुछ ऐसा ही हुआ था,जब ब्रह्यपुत्र नदी में चीन की तरफ से अचानक पानी छोड़ने की वजह से अरुणाचल प्रदेश में काफी नुकसान हुआ था।<br />
वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो गया है, और यह संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन ने जलसंसाधनों को भी आक्रामक विस्तारवाद का न केवल हिस्सा बना दिया है, अपितु जल संसाधनों को भी हथियार के रुप में प्रयोग करने की तैयारी की है। इस तरह अब ‘जल संसाधन ‘का ‘जल हथियार’ के रुप में प्रयोग करने की चीनी मंशा की संभावनाएँ व्यक्त की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय चीन तिब्बत में विशाल जल संसाधन पर कब्जा किये हुए है और भारत में बहने वाली बहने वाली नदियों का स्रोत भी वही जल संसाधन है। भारत के उत्तर पूर्व में बहने वाली ब्रह्मपुत्र जलशक्ति का एक बड़ा स्रोत है और पनबिजली पैदा करने के लिए तथा अपने शुष्क उत्तरी क्षेत्र की तरफ बहाव मोड़ने के लिए चीन की इस पर नजर है। इस हालात ने भारत में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि भारत एक निम्न नदी तटीय देश है। इसके अलावा,पर्यावरण क्षरण तथा पानी की घटती मात्रा भारतीय नीति निमार्ताओं के समक्ष चुनौती है। बता दें कि साल की शुरूआत में भी सियांग और ब्रह्यपुत्र नदी में चीन की तरफ से भारी गंदगी और बाँधों के मलबों को फैला दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में चीन ने इसका कारण भी यारलुंग सांगपो में आए भूकंप के मलबे को बताया था। भारतीय देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन के पास पानी की इतनी शक्ति है कि अगर भारत ने उसपर नजर नहीं रखी तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक संतोष राय के अनुसार अगर चीन घाघरा,गंडक और ब्रह्यपुत्र जैसी नदियों का पानी रोककर अचानक छोड़ता है भारत के लिए हालत बेहद खतरनाक हो जाएंगे। इस संदर्भ में हाल ही में भारत और चीन के बीच यारलुंग सांगपो नदी के पानी का डेटा साझा करने का करार हुआ था। लेकिन चीन इस समझौते का सही ढंग से पालन करता हुआ नहीं दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन जल का प्रयोग संसाधन के रुप में तो कर ही रहा है, वहीं पानी का प्रयोग जल हथियार के रुप में भी कर सकता है। वैज्ञानिकों ने कई बार ब्रह्मपुत्र के जल बहाव में कई वर्ष पुराने पानी को पाया है, जो बांध का जमा हुआ पानी होता है। इससे चीन के खतरनाक इरादों को समझा जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार चीन पानी रोककर छोड़ता है तो असम बंगाल बांगलादेश और मेघालय को डुबा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी पर जोर देने वाले देश चीन के पास प्रति व्यक्ति पानी की हिस्सेदारी केवल 2093 क्यूबिक मीटर है तथा 2013 में चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने घोषणा कर दी कि विगत 60 सालों में 23,000 नदियाँ देश से लुप्त हो चुकी हैं। चूँकि ज्यादातर जल संसाधनों पर चीन का कब्जा है और भारत निम्न नदी तटीय देश है। भारत और चीन दोनों की बढ़ती जनसंख्या के लिए संसाधनों एवं बुनियादी वस्तुओं की बढ़ती माँग से संभावना व्यक्त की जाती है कि पानी की माँग भी बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन का किसी भी जल समझौते में प्रवेश करने से लगातार इंकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध को लेकर अहम टकराहट को बल दिया है। दुनिया के कुछ शुष्क क्षेत्रों के साथ एक आर्थिक शक्तिगृह के रुप में चीन भी एक प्यासा देश है। 1.3 अरब जनसंख्या के साथ चीन दुनिया का सबसे आबादी वाला देश है। चीन में अप्रत्याशित रुप में प्रदूषित नदियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, ऐसे में चीन के लिए पानी बेहद महत्वपूर्ण संसाधन है। तिब्बत का क्षेत्रफल लगभग 470,000 वर्ग किमी है और इस पर चीन ने 1950 में ही कब्जा जमा लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तिब्बत का यह पठार सही मायने में पानी का विशाल भंडार है और उपमहाद्वीप में ज्यादातर नदियों का उद्गमस्थल भी है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन के पास जितना पानी है, उससे 40,000 गुना पानी तिब्बत के पास है। ज्यादातर नदियों का उद्गम तिब्बत से होने के कारण इस पर चीन का एकाधिकार है, ये नदियाँ निम्न तटीय देशों से होकर बहती हैं और आने वाले वर्षों में भारत ,बांग्लादेश तथा म्यांमार जैसे देशों की कठिनाइयाँ बढ़ सकती हैं। चीन ने दुर्भाग्यवश अपने इन पड़ोसियों की चिंताओं की अवहेलना की है। भारत तिब्बत से निकलने वाली नदियों पर बहुत हद तक निर्भर है, जिनका कुल बहाव प्रतिवर्ष 627 क्यूबिक किलोमीटर है और जो भारत के कुल नदी जल संसाधन का 34 प्रतिशत है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>राहुल लाल</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 29 Oct 2018 08:44:42 +0530</pubDate>
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                <title>अब चीनी वस्तुओं के आयात पर देना होगा 10 प्रतिशत शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने आयात होने वाली चीनी वस्तुओं की तैयार की  सूची वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक युुद्व में कमी आने के काेई आसार नजर नहीं आ रहे हैं और अमेरिका ने साफ शब्दों में कह दिया है कि चीन से होने वाले अतिरिक्त 200 अरब डालर कीमत के अायातित सामान पर वह 10 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/now-chinese-commodities-will-give-up-on-imports-of-10-percent-tariffs/article-4783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/tramp.jpg" alt=""></a><br /><h2>अमेरिका ने आयात होने वाली चीनी वस्तुओं की तैयार की  सूची</h2>
<p><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक युुद्व में कमी आने के काेई आसार नजर नहीं आ रहे हैं और अमेरिका ने साफ शब्दों में कह दिया है कि चीन से होने वाले अतिरिक्त 200 अरब डालर कीमत के अायातित सामान पर वह 10 प्रतिशत शुल्क लगाएगा अमेरिकी प्रशासन ने आयात होने वाली चीनी वस्तुओं की एक व्यापक सूची तैयार की है जिन पर शुल्क लगाए जाने का प्रस्ताव है और इसमें सैंकड़ाें खाने पीने की वस्तुआें के अलावा, तंबाकू, कोयला, रासायनिक पदार्थ, टायर, कुत्ते और बिल्लियों के खाने पीने के सामान , उपभाेक्ता इलैक्ट्रानिक वस्तुएं एवं टेलीविजन सामग्री शामिल है।</p>
<h2>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राबर्ट लाइटजियर ने की घोषणा</h2>
<p>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राबर्ट लाइटजियर ने प्रस्तावित शुल्क की घोषणा करते हुए कहा“ पिछले काफी समय से ट्रंप प्रशासन ने चीन से बार बार आग्रह किया थ कि वह व्यापार के क्षेत्र में गलत नीतियां नहीं अपनाएं अौर अपने बाजार को खोल दे तथा साफ सुथरी बाजार प्रतिस्पर्धा मेंं हिस्सा ले। लेकिन हमारी जायज चिंताओं पर ध्यान देने के बजाए चीन ने बदले की भावना से काम किया है और हमारे उत्पादों के खिलाफ शत्रुता का रवैया अपना लिया है और हमारा मानना है कि इस तरह की नीति का कोई न्यायोचित कारण भी नहीं है।”</p>
<h2>पिछले सप्ताह अमेरिका ने 34 अरब डालर के चीनी आयातों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था</h2>
<p>पिछले सप्ताह अमेरिका ने 34 अरब डालर के चीनी आयातों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और चीन ने इसके तुरंत बाद अपने यहां आयात होने वाले अमेरिकी सामानों पर इतना ही शुल्क लगा दिया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कह दिया है कि वह आखिरकार 500 अरब डालर कीमत से अधिक चीनी अायातों पर शुल्क लगा सकते हैं।लेकिन कुछ अमेरिकी व्यापरिक समूहों और वरिष्ठ सांसदों ने अमेरिकी की कल की घोषणा की जोरदार निंदा की है और सीनेट की वित्त मामलों की समिति के अध्यक्ष तथा रिपब्लिकन आेरिन हैच ने कहा कि यह जल्दबाजी भरा कदम है और संतुलित नजरिया नहीं अपनाया गया है।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Jul 2018 03:20:11 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप ने चीनी उत्पादों पर नये शुल्क लगाने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की थी घोषणा वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक युद्ध में ‘जैसे को तैसा’ की नीति पर अमल करते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बयान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trump-threatens-new-charges-on-chinese-products/article-4320"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/tramp-2.jpg" alt=""></a><br /><h1>चीन ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की थी घोषणा</h1>
<p><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक युद्ध में ‘जैसे को तैसा’ की नीति पर अमल करते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को उन चीनी उत्पादों को चिह्नित करने को कहा है जिन पर नये शुल्क लगाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम चीन द्वारा 50 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के जवाब में उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘अगर चीन अपना रवैया बदलने और अमेरिकी उत्पादों पर लगाये गये शुल्क को वापस लेने को राजी नहीं हुआ तो कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चीन के उत्पादों पर ये शुल्क लागू किये जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने शनिवार को 50 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इससे पहले अमेरिका ने शुक्रवार को ही 50 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी जिसके जवाब में चीन ने यह कदम उठाया था। श्री ट्रंप ने बौद्धिक संपदा की चोरी तथा अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों का हवाला देकर चीन से आयातित उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। चीन ने जवाबी कदम की चेतावनी दी थी। अब अमेरिका ने एक बार फिर चीन के उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है।</p>
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<p>Trump, Threatens, New, Charges, Chinese, Products</p>
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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 11:12:43 +0530</pubDate>
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                <title>चीनी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध का करारा जवाब दिया जाएगा: चीन</title>
                                    <description><![CDATA[शंघाई (एजेंसी)। चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध की अमेरिकी घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए चीन सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिकी सरकार व्यापार में आ रही तनातनी को दूर करने में कोई पहल नहीं करती है तो वह भी इस बारे में पूरी तरह मुकाबले के लिए तैयार है। गौरतलब है कि कल अमेरिका ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-restrictions-on-chinese-companies/article-3854"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/chinya.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शंघाई (एजेंसी)। </strong>चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध की अमेरिकी घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए चीन सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिकी सरकार व्यापार में आ रही तनातनी को दूर करने में कोई पहल नहीं करती है तो वह भी इस बारे में पूरी तरह मुकाबले के लिए तैयार है। गौरतलब है कि कल अमेरिका ने कहा था कि वह चीन से होने वाले आयातों पर प्रतिबंध लगा सकता है अौर अमेरिकी बौद्धिक संपदा के मामले में जब तक चीन कोई कदम नहीं उठाएगा तब तक यह जारी रहेगा। इस पर प्रतिक्रिया करते हुए चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह इस घोषणा से हैरान है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बयान दोनों देशाें के बीच हाल ही में हुई सहमति के विरोध में है। संवाद समिति शिन्हुआ ने बताया कि चीन सरकार उम्मीद करती है कि अमेरिका आवेश में आकर कोई कदम नहीं उठाएगा और अगर उसका यही रूख रहता है तो चीन भी अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार है। शिन्हुआ के मुताबिक“ चीन का हमेशा से यही रूख रहा है कि हम किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं लेकिन हम किसी भी मुकाबले से पीछे हटने वाले भी नहीं है। चीन इस मामले में अमेरिका के साथ व्यावहारिक तरीके से बातचीत करेगा और उम्मीद है कि अमेरिका भी दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुरूप काम करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">”चीनी समाचार पत्र ‘ द ग्लोबल टाइम्स” के मुताबिक अमेरिका इस समय अपने बड़प्पन के मुगालते में जी रहा है लेकिन हम भी उसे बता देना चाहते हैं कि व्यापार समझौते से मुकरने के बाद वह इस खेल में अकेला ही नाचता रह जाएगा।”समाचार पत्र के मुताबिक पहले हुए समझौते से अमेरिका के पीछे हटने के बारे में चीन आवश्यक कदम उठाएगा आैर अगर अमेरिका कोई खेल ही खेलना चाहता है तो हम भी इसके लिए तैयार हैं अौर नतीजा आने तक यह खेल जारी रहेगा। दरअसल अमेरिका का आरोप है कि चीन ने विदेशी कंपनियाें पर इस बात के लिए दबाव डाला था कि वे चीनी व्यापारिक कंपनियों को तकनीकी हंस्तातरण करे। लेकिन चीन इससे इनकार कर रहा है और उसका कहना है कि ये आरोप निराधार है और अमेरिका अपने व्यापार काे संरक्षण के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Wed, 30 May 2018 13:17:30 +0530</pubDate>
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                <title>चीनी &amp;#8216;जल हथियार&amp;#8217; की चुनौती एवं समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो गया है और यह संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन ने जलसंसाधनों को भी आक्रामक विस्तारवाद का न केवल हिस्सा बना दिया है, अपितु जल संसाधनों को भी हथियार के रुप में प्रयोग करने की तैयारी की है। इस तरह अब ‘जल संसाधन’ का ‘जल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/chinese-water-weapons-challenges-and-solutions/article-2595"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/water-weapon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो गया है और यह संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन ने जलसंसाधनों को भी आक्रामक विस्तारवाद का न केवल हिस्सा बना दिया है, अपितु जल संसाधनों को भी हथियार के रुप में प्रयोग करने की तैयारी की है। इस तरह अब ‘जल संसाधन’ का ‘जल हथियार’ के रुप में प्रयोग करने की चीनी मंशा की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय चीन तिब्बत में विशाल जल संसाधन पर कब्जा किये हुए है और भारत में बहने वाली नदियों का स्रोत भी वही जल संसाधन हैं। भारत के उत्तर पूर्व में बहने वाली ब्रह्मपुत्र जलशक्ति का एक बड़ा स्रोत है और पनबिजली पैदा करने के लिए तथा अपने शुष्क उत्तरी क्षेत्र की तरफ बहाव मोड़ने के लिए चीन की इस पर नजर है। इस हालात ने भारत में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि भारत एक निम्न नदी तटीय देश है। इसके अलावा, पर्यावरण क्षरण तथा पानी की घटती मात्रा भारतीय नीति निमार्ताओं के समक्ष चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले एक माह से जिस तरह भारत-चीन के बीच डोकलाम मामले को लेकर तनाव बना हुआ है, उसके बीच भारतीय देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन के पास पानी की इतनी शक्ति है कि अगर भारत ने उस पर नजर नहीं रखी, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक संतोष राय के अनुसार अगर चीन घाघरा, गंडक और ब्रह्यपुत्र जैसी नदियों का पानी रोककर अचानक छोड़ता है, तो भारत के लिए हालत बेहद खतरनाक हो जाएंगे। सीमा पर जिस तरह से विवाद चल रहा है, उसके बाद हमारी सरकार और हमें इस मामले को लेकर चौकन्ना रहने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन दोनों की बढ़ती जनसंख्या के लिए संसाधनों एवं बुनियादी वस्तुओं की बढ़ती माँग से संभावना व्यक्त की जाती है कि पानी की माँग भी बढ़ेगी। चीन का किसी भी जल समझौते में प्रवेश करने से लगातार इंकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध को लेकर अहम् टकराहट को बल दिया है। दुनिया के कुछ शुष्क क्षेत्रों के साथ एक आर्थिक शक्तिगृह के रुप में चीन भी एक प्यासा देश है।</p>
<p style="text-align:justify;">1.3 अरब जनसंख्या के साथ चीन दुनिया का सबसे आबादी वाला देश है। चीन में अप्रत्याशित रुप प्रदूषित नदियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, ऐसे में चीन के लिए पानी बेहद महत्वपूर्ण संसाधन है। चीन विश्व का सबसे ताबड़तोड़ बाँध का निर्माता है और विश्व में सबसे ज्यादा बाँध चीन में ही हैं। चीन में कमोवेश 50 हजार से ज्यादा बड़े बाँध हैं। चीन अंतर्राष्ट्रीय नदियों पर बाँध निर्माण करने का एकपक्षीय कदम उठा रहा है,</p>
<p style="text-align:justify;">जो भारत के लिए चिंता का विषय है। चीन पहले ही ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों पर 10 बाँध बना चुका है तथा 3 बांध निमार्णाधीन हैं। इसी क्षेत्र में, चीन 7 और बाँध बनाने पर विचार कर रहा है, तथा 8 और बांध प्रस्तावित हैं। इसमें ‘झंग्मु’ नामक 510 मेगावाट वाली विद्युत परियोजना वाले बाँध का निर्माण भारत और चीन के बीच और टकराहट को जन्म दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह चीन को इस बात के लिए राजी करे कि वह ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित बांध निर्माण को आगे नहीं बढ़ाए।ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध निर्माण के मुद्दे पर सौदेबाजी की तलाश में चीन अक्साई चीन तथा अरुणाचल के मुद्दे पर रियायत देने के लिए भारत को मजबूर कर सकता है।वस्तुत: चीन यथार्थ राजनीति पर आगे बढ़ रहा है और इस कारण वह भारत के साथ किसी भी तरह के बराबरी वाले समाधान को लेकर रुचि नहीं दिखा रहा है,</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि तिब्बत में दस बड़े जल विभाजक पर चीन का कब्जा है और इस क्षेत्र में जल संसाधनों पर इसका नियंत्रण है। इसलिए,भारत को न सिर्फ मुखर होना होगा,बांग्लादेश की चिंता को लेकर भी चीन को उसी तरह ज्यादा पारदर्शी तथा तार्किक तरीके से प्रभावित करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतत: सवाल उठता है कि भारत आखिर चीन द्वारा पैदा की हुई इस हालत से कैसे निपटेगा? भारत को इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि तिब्बत से निकलने वाले जल संसाधनों पर चीन का नियंत्रण है। ऐसे में भारत को तिब्बत को लेकर अपनी नीति पर फिर से विचार करना होगा, उसे नया आकार देना होगा। चीन की नीतियों के सवाल पर भारत को चीन के अन्य जल संपदा संबंधित पड़ोसी देशों को भी शामिल करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही पर्यावरण की निरंतरता के संबंध में एक वैश्विक जागरुकता लानी होगी एवं भारत और बांग्लादेश दोनों देशों को पानी के वास्तविक उपयोग के लिए आवाज उठानी पड़ेगी। भारत को इस मामले में पानी जैसे आम संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी वैश्विक स्तर पर जागरूकता लानी होगी तथा इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के बीच दबाव बनाना होगा कि तिब्बत का जल संसाधन सिर्फ चीन के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व समुदाय के लिए है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन बिना किसी अन्य देश के हस्तक्षेप के जल संसाधनों के एक पक्षीय इस्तेमाल के अधिकार को सुरक्षित रखता है, इसीलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि चीन पर बहुपक्षीय वार्ता के लिए वैैैश्विक दबाव डाला जाए। बहुपक्षीय समायोजन ही चीन पर समझौते को स्वीकार करने का दबाव बना सकता है, जिससे इनमें शामिल सभी देशों को लाभ होगा तथा इससे पर्यावरण को भी नुकसान होने से बचाया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही चीन भारत से समझौतों के अनुसार अपने बांधों की स्थिति, उसमें जल संग्रहण की रियल टाइम सूचनाएँ भी समुचित रुप में साझा नहीं कर रहा है। इसके लिए आवश्यक है कि हम लोग अपने उपग्रहों के द्वारा चीन के बांधों एवं उसके जल संग्रहण की सूक्ष्म सूचनाएँ रखें। इससे हम चीन के किसी भी घृणित जल हथियार के प्रयोग के बारे में पूर्व बचाव की उत्कृष्ट रणनीति एवं बचाव कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक भूस्खलन से भी कई बार जलभराव हो जाता है, लेकिन इसके लिए भी चीन कोई सूचना नहीं देता है। उदाहरण के लिए चीन ने 2012 में इसी प्रकार की एक घटना से भारत का पासी घाट डूब गया था और हजारों लोग मर गए थे। इसलिए भारत की तरफ से मजबूत पूर्व तैयारी और उपग्रहों से पूर्व सूचना तंत्र अपरिहार्य हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में बहुपक्षीय नीतियों को बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधन के गैर-नौवहन उपयोग कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का एक मापदंड की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अनुच्छेद -11 बताता है कि दोनों देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधनों के इस्तेमाल के संदर्भ में सूचनाओं की साझेदारी आवश्यक है, जबकि अनुच्छेद 21 और 23 प्रदूषण की रोकथाम और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा की व्याख्या करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह यह भारत और चीन दोनों के लिए अहम है कि दोनों देश जलीय आँकड़ों को साझा करने के लिए संस्थागत तथा बहुपक्षीय स्तर पर एक अर्थपूर्ण बातचीत शुरू करें, ताकि इससे जल संसाधनों का स्थायी तथा परस्पर इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके एवं टकराहट की आशंका न्यूनतम हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">‘<strong>-राहुल लाल</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2017 00:19:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में तैनात की पनडुब्बी, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में दखलअंदाजी के बाद अब चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी तैनात कर दी है। चीन के इस कदम से दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। चीन ने जिस पनडुब्बी को तैनात को तैनात किया है, उसे युआन क्लास […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/chinese-submarines-deployments-in-indian-ocean/article-1922"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/submarines.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong> कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में दखलअंदाजी के बाद अब चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी तैनात कर दी है। चीन के इस कदम से दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। चीन ने जिस पनडुब्बी को तैनात को तैनात किया है, उसे युआन क्लास की बताया जा रहा है। भारतीय नौसेना ने चीन की इस पनडुब्बी को भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करते देखा है। भारतीय नौसेना ने इस संबंध में साउथ ब्लॉक को भी अवगत करा दिया है।</p>
<p> </p>
<h1>पहले भी आते रही हैं चीनी पनडुब्बी</h1>
<p>यह पहले मौका नहीं है जब चीनी पनडुब्बी या नौसेना पोत को भारतीय क्षेत्र में देखा गया है। इससे पहले 2014 में भी चीनी युद्धपोत और पनडुब्बियों को भारतीय समुद्र क्षेत्र में देखा गया था। तब चीन ने इस हरकत के पीछे अदन की खाड़ी में एक ऑपरेशन का हवाला दिया था। उस घटना के बाद भारत के आसपास के क्षेत्र में चीनी युद्धपोतों के घूमने का सिलसिला बढ़ा है।</p>
<p> </p>
<p>सरकारी समाचार एजेंसी की खबर में कहा गया है कि रविवार को अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्टेथेम ने शिशा द्वीप के निकट चीन के जल क्षेत्र में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया। शिशा एक कृत्रिम द्वीप है। पड़ोसी देश इस द्वीप पर यह कहकर आपत्ति जताते रहे हैं कि चीन इसके जरिये अपनी आधिकारिक सीमा का विस्तार कर रहा है। इस मामले में अमेरिका भी कई बार आपत्ति जता चुका है।</p>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 00:02:26 +0530</pubDate>
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