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                <title>World War - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>World War: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया ऐसा काम जिससे विश्व युद्ध का खतरा मंडराया?, जानिये &amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[World War: वाशिंगटन (एजेंसी)। दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, कैरिबियन सागर में पहुँच गया है। अमेरिकी नौसेना ने यह जानकारी दी है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि ट्रंप प्रशासन मादक पदार्थ-आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को निशाना बना रहा है। गेराल्ड आर. […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-president-trump-did-something-that-threatened-to-spark-a-world-war/article-78041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/world-war.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>World War: वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, कैरिबियन सागर में पहुँच गया है। अमेरिकी नौसेना ने यह जानकारी दी है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि ट्रंप प्रशासन मादक पदार्थ-आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को निशाना बना रहा है। गेराल्ड आर. फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती के साथ कैरिबियन में अमेरिकी सेना की संख्या बढ़कर अब 15,000 से अधिक हो गई है जो इस क्षेत्र में दशकों में सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा, “ये सुरक्षा बल मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों को कम करने तथा उन्हें खत्म करने के लिए मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाएंगे। लगभग 4,000 से ज्यादा नाविकों और दर्जनों सामरिक विमानों को ले जाने वाला यह प्रथम श्रेणी का वाहक अपने अभियानों में सहायता के लिए दिन-रात एक साथ स्थिर-पंख वाले विमानों को उड़ान भरने और उतरने में मददगार है।</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया है कि गेराल्ड आर. फोर्ड के साथ स्ट्राइक समूह में कैरियर एयर विंग आठ के नौ स्क्वाड्रन, विध्वंसक स्क्वाड्रन दो के आर्ले बर्क-श्रेणी के निर्देशित-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस बैनब्रिज और यूएसएस महान, और एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा कमान जहाज यूएसएस विंस्टन एस. चर्चिल शामिल हैं। अमेरिकी दक्षिणी कमान (साउथकॉम) के कमांडर एडमिरल एल्विन होल्सी ने कहा कि यह तैनाती “पश्चिमी गोलार्ध और अमेरिकी भूमि की सुरक्षा के हमारे संकल्प को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।” गौरतलब है कि दो सितंबर के बाद से अमेरिकी सेना ने कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत महासागर के अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में कथित तौर पर मादक पदार्थों को ले जा रही 19 नौकाओं को डुबो दिया है। इस अभियान में उनमें सवार कम से कम 76 लोग मारे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति मादुरो ने बार-बार अमेरिकी कार्रवाइयों की निंदा करते हुए इसे अपनी सरकार को अपदस्थ करने और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी सैन्य प्रभाव का विस्तार करने का प्रयास बताया है। कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने समुद्र में हुई हत्याओं के लिए अमेरिकी सरकार पर “हत्या” का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने कहा था कि उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि अमेरिका वेनेजुएला के अंदर जमीनी ठिकानों पर हमला करेगा या नहीं। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी को दक्षिण अमेरिकी देश में गुप्त अभियान चलाने के लिए अधिकृत किया है। अमेरिकी नौसेना के बयान के अनुसार, यूएस साउथकॉम का कार्यक्षेत्र मेक्सिको के दक्षिण में लैटिन अमेरिका का भूभाग, मध्य और दक्षिण अमेरिका से सटे जलक्षेत्र और कैरेबियन सागर को कवर करता है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 12:40:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>क्या काकेशस में युद्ध विश्वयुद्ध की शुरूआत है?</title>
                                    <description><![CDATA[रोना महामारी और आर्थिक अंधेरों से पैदा हुई चुनौतियों के बीच हमें इस बात का अंदाजा भी नहीं हो पाया है कि काकेशस क्षेत्र में दो पड़ोसी मुल्कों अजरबैजान और आर्मीनिया के बीच पिछले एक हफ्ते से कितना भयानक युद्ध छिड़ा हुआ है। यह युद्ध ईसाईयत एवं इस्लाम के बीच है, ईसाईयत यानी आर्मीनिया पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/is-the-war-in-the-caucasus-the-beginning-of-world-war/article-19053"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/war-in-caucasus.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रोना महामारी और आर्थिक अंधेरों से पैदा हुई चुनौतियों के बीच हमें इस बात का अंदाजा भी नहीं हो पाया है कि काकेशस क्षेत्र में दो पड़ोसी मुल्कों अजरबैजान और आर्मीनिया के बीच पिछले एक हफ्ते से कितना भयानक युद्ध छिड़ा हुआ है। यह युद्ध ईसाईयत एवं इस्लाम के बीच है, ईसाईयत यानी आर्मीनिया पर इस्लाम यानी अजरबैजान का हमला हो चुका है। आर्मीनिया के साथ इसराइल, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन व भारत आदि नाटो देश हैं तो अजरबैजान के साथ इस्लामिक जगत का स्वयंभू खलीफा तुर्की, पाकिस्तान ईरान, उत्तरी कोरिया व चीन जैसी ताकतें हैं। दोनों देश पूर्व सोवियत संघ से निकले हैं और इनके बीच कुछ इलाकों को लेकर पुरानी रंजिश है। इसी कारण झड़पें भी होती रहती हैं, लेकिन इस बार की जंग पिछले कई दशकों में हुई लड़ाइयों से ज्यादा गंभीर, विनाशक एवं चुनौतीपूर्ण बतायी जा रही है। इन युद्ध की स्थितियों से तमाम दुनिया के लोग डरे एवं भयभीत हैं और उन पर निराशा और हताशा के बादल मंडरा रहे हैं। विश्व जनमत युद्ध का अंधेरा नहीं, शांति का उजाला चाहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">काकेशस युद्ध में 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों अन्य घायल है। इतनी बडी संख्या तब, जब आंकड़े आधे-अधूरे एवं एक ही पक्ष के मिल रहे हैं। अजरबैजान ने अपनी तरफ हताहत होने वालों की कोई संख्या नहीं बताई है। मामला मूलत: करीब साढ़े चार हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र नागोर्नो-कारबाख से जुड़ा है, जो पड़ता है अजरबैजान में लेकिन वहां की ज्यादातर आबादी आर्मीनियाई है। 1994 में हुए समझौते के मुताबिक यह क्षेत्र अजरबैजान का हिस्सा मान लिया गया, लेकिन इस पर स्वायत्त शासन आर्मीनियाई अलगाववादियों का ही बना रहा और इसे लेकर खटपट भी चलती रही।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रथम विश्वयुद्ध (1914-18) के बाद 40 देशों में बंटे खलीफा ऐ इस्लाम तुर्की (आॅटमन गणराज्य) को मित्र देशों ने युद्धोपरांत संधि के अंतर्गत सौ साल तक अपमानजनक संधि से बांधकर रखा हुआ था, जो अब पूरी होने जा रही है। इसीलिए मध्य एशिया में उबाल पूरी चरम स्थिति में है। कोई बड़ी बात नहीं कि यह चिंगारी यूरोप के साथ समूची दुनिया को भी लपेट ले। विश्व के सबसे बड़े युद्ध क्षेत्र में हो रही यह लड़ाई चंद दिनों के अंदर विश्व युद्ध में तब्दील हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं है। इस क्षेत्र में इसराइल बहुत आक्रामक हो ही चुका है और अपने दुश्मन चीन समर्थक इस्लामिक देशों को निशाना बना ही रहा है। अमेरिकी पहल पर यूएई से संधि कर इसराइल ने इस्लामी जगत में दो फाड़ करवा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
युद्ध का ताजा माहौल 27 सितम्बर 2020 को शुरू हुआ, जब अजरबैजान ने कथित तौर पर आर्मीनियाई अलगवावादियों द्वारा कब्जा किए गए कुछ क्षेत्रों को छुड़ाने की कार्रवाई शुरू की। जो बात फिलहाल एक खास क्षेत्र तक सीमित इस युद्ध को गंभीर और संवेदनशील बनाती है वह यह कि आर्मीनिया की ज्यादातर आबादी ईसाई है जबकि अजरबैजान एक मुस्लिम बहुल देश है। यहां की मुस्लिम आबादी शिया है और उसकी भाषा तुर्की है। ऐसे में तुर्की अजरबैजान के अपने मुस्लिम भाइयों के समर्थन में है, दूसरी तरफ ईसाई आर्मीनिया को फ्रांस का सपोर्ट हासिल है। खतरा यह है कि कहीं यह लड़ाई मुस्लिम बनाम ईसाई का रूप न ले ले। इस युद्ध को संवेदनशील बनाने वाली एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां से होकर कई सारी तेल और गैस पाइपलाइन गुजरती हैं जो काकेशस से यूरोपीय देशों को तेल और गैस पहुंचाती है। इन पाइपलाइनों की सुरक्षा का सवाल सबकी चिंता का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">काकेशस में युद्ध के कारण विश्व युद्ध का माहौल एवं स्थितियां उग्र होती जा रही है, इसका एक युद्ध-क्षेत्र दक्षिण व पूर्वी चीन सागर बनेंगे क्योंकि समुद्री खनिज व समुद्री व्यापारिक मार्गों पर कब्जे की लड़ाई यहाँ निर्णायक रूप लेती जा रही है और एक युद्ध का क्षेत्र दक्षिण एशिया है जो चीन को घेरने की पेंटागन की रणनीति में यह बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जिस स्तर पर आस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत युद्ध की तैयारी कर रहे हैं उससे स्पष्ट है कि चीन व उसके समर्थक देशों को घेरकर बुरी तरह निबटाया जाएगा। युद्ध की इन बन रही विभीषिका में बड़ी तबाही के साथ ही कई देशों के अस्तित्व ही बदल जाएँगे। आगे क्या होगा यह इसी पर निर्भर करता है कि हालात क्या मोड़ लेते हैं। जहाँ तक भारत का प्रश्न है वह चाहे कितना ही चीन के खिलाफ आग उगल ले मगर युद्ध की पहल नहीं करेगा और चीन भी भारत पर हमला करने से परहेज करेगा क्योंकि विश्व युद्ध की स्थिति में वह कई मोर्चों पर उलझने से बचेगा। दोनों के बीच नूरा कुश्ती यानी सीमाओं पर झड़पे अवश्य चलती रहेंगी। अगर मजबूरी हुई तो भारत पाकिस्तान पर हमला बोलेगा और अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान का सर्वनाश निश्चित है चाहे चीन उसकी कितनी भी मदद कर ले।</p>
<p style="text-align:justify;">अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका का भी युद्ध का मैदान बनना तय है क्योंकि यहाँ भी चीन की खासी घुसपैठ है और उत्तरी अमेरिका का प्रमुख देश यानि अमेरिका ही इस युद्ध को निर्देशित करेगा क्योंकि चीन के जैविक युद्ध (कोरोना वायरस) का सबसे बड़ा शिकार भी तो वो ही है। प्रश्न है कि इन स्थितियों फिर रुस कहाँ है? अजरबैजान और आर्मीनिया-ये दोनों देश युद्धरत हैं वे पूर्व सोवियत संघ से ही तो जुड़े थे। सच्चाई तो यही है कि दुनिया के मिडिल मेन के रूप में उभरे रुस ने ही लड़ाई का मुद्दा दिया है। अब वह पूरी दुनिया को उसी तरह हथियार बेचेगा जैसे कि दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने बेचे थे। युद्ध के बाद निश्चित रूप से अमेरिका व चीन कमजोर हो चुके होंगे, ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत कौन होगा? संयुक्त राष्ट्र की हालात ऐसी नहीं रह गई है कि उससे ज्यादा उम्मीद की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">युद्ध के लिये तत्पर राष्ट्र भी युद्ध नहीं चाहते, लेकिन उनका अहंकार उन्हें न केवल स्वयं को बल्कि दुनिया को नष्ट करने पर तुला है। इन जटिल एवं संकटकालीन स्थितियों को देखते हुए शांतिकर्मी शक्तियों को इस स्तर तक मुखर होना चाहिए कि बड़ी शक्तियों एवं युद्ध को अग्रसर राष्ट्रों को इनके दुरुपयोग से रोका जा सके, अन्यथा एक मर्यादा लांघने के बाद सर्वनाश की शुरूआत हो जाएगी। वैज्ञानिक इस बात की घोषणा कर चुके हैं कि युद्ध में प्रत्यक्ष रूप में भाग लेने वाले कम और दुष्परिणामों का शिकार बनने वाले संसार के सभी प्राणी होते हैं। युद्ध वह आग है, जिसमें मानव के लिये जीवन-निर्वाह के साधन, पर्यावरण, साहित्यकारों का साहित्य, कलाकारों की कला, वैज्ञानिकों का विज्ञान, राजनीतिज्ञों की राजनीति और भूमि की उर्वरता भस्मसात हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शांति के लिए सब कुछ हो रहा है-ऐसा सुना जाता है। युद्ध भी शांति के लिए, स्पर्धा भी शांति के लिए, अशांति के जितने बीज हैं, वे सब शांति के लिए-यह वर्तमान विश्व नेतृत्व के मानसिक झुकाव की भयंकर भूल एवं त्रासदी है। बात चले विश्वशांति की और कार्य हों अशांति के तो शांति कैसे संभव हो? विश्वशांति के लिए अणुबम आवश्यक है, यह घोषणा करने वालों ने यह नहीं सोचा कि यदि यह उनके शत्रु के पास होता तो। इसलिये युद्ध का समाधान असंदिग्ध रूप में शांति, अहिंसा और मैत्री है। कोई भी राष्ट्र कितना भी युद्ध करे, अंत में उसे समझौते की टेबल पर ही आना होता है। यह अंतिम शरण प्रारंभिक शरण बने, तभी दुनिया राहत की सांस लेगी। मंगल कामना है कि अब मनुष्य यंत्र के बल पर नहीं, भावना, विकास और प्रेम के बल पर जीए और जीते। अंधकार प्रकाश की ओर चलता है, पर अन्धापन मृत्यु की ओर।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                                                                    <strong>-ललित गर्ग</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Oct 2020 09:59:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में तैनात की पनडुब्बी, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में दखलअंदाजी के बाद अब चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी तैनात कर दी है। चीन के इस कदम से दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। चीन ने जिस पनडुब्बी को तैनात को तैनात किया है, उसे युआन क्लास […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/chinese-submarines-deployments-in-indian-ocean/article-1922"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/submarines.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong> कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में दखलअंदाजी के बाद अब चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी तैनात कर दी है। चीन के इस कदम से दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। चीन ने जिस पनडुब्बी को तैनात को तैनात किया है, उसे युआन क्लास की बताया जा रहा है। भारतीय नौसेना ने चीन की इस पनडुब्बी को भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करते देखा है। भारतीय नौसेना ने इस संबंध में साउथ ब्लॉक को भी अवगत करा दिया है।</p>
<p> </p>
<h1>पहले भी आते रही हैं चीनी पनडुब्बी</h1>
<p>यह पहले मौका नहीं है जब चीनी पनडुब्बी या नौसेना पोत को भारतीय क्षेत्र में देखा गया है। इससे पहले 2014 में भी चीनी युद्धपोत और पनडुब्बियों को भारतीय समुद्र क्षेत्र में देखा गया था। तब चीन ने इस हरकत के पीछे अदन की खाड़ी में एक ऑपरेशन का हवाला दिया था। उस घटना के बाद भारत के आसपास के क्षेत्र में चीनी युद्धपोतों के घूमने का सिलसिला बढ़ा है।</p>
<p> </p>
<p>सरकारी समाचार एजेंसी की खबर में कहा गया है कि रविवार को अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्टेथेम ने शिशा द्वीप के निकट चीन के जल क्षेत्र में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया। शिशा एक कृत्रिम द्वीप है। पड़ोसी देश इस द्वीप पर यह कहकर आपत्ति जताते रहे हैं कि चीन इसके जरिये अपनी आधिकारिक सीमा का विस्तार कर रहा है। इस मामले में अमेरिका भी कई बार आपत्ति जता चुका है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 00:02:26 +0530</pubDate>
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