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                <title>हर नागरिक से भरवाया जाए संपत्ति का फार्म</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/citizens-fill-there-property-form/article-342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/jangana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काले धन पर प्रहार से अपना कुछ न कुछ काला धन बचाने के लिए कालाबाजारियों ने सबसे पहले सर्राफा कारोबारियों का रूख किया। रातों रात सुनारों के शोरूम खाली कर दिये गए और 31000 रूपये प्रति दस ग्राम बिकने वाला सोना 60000 रूपये प्रति ग्राम तक खरीदे जाने की भी खबरें आई। लेकिन पिछल्ले दो दिन से आयकर अधिकारियों की सक्रियता से सोना बेच रहे व खरीद रहे लोगों में दहशत छा गई है और सरेआम काली कमाई को पीली धातु में बदले जाने का कारोबार रूकने लगा है। अब काली कमाई वाले उस पैसे को गरीबों के खाते में डाल रहे है, ताकि जब नई करंसी आयेगी तो ये धन वापिस निकाल लेंगे उसके लिए कालाधन रखने वाले गरीब लोगों को छूट दे रहे हंै कि लाख के बदले उन्हें भले 60 हजार ही लौटा देना। जिसके चलते ये लोग अपने विश्वास वाले नौकरों सहायक कर्मचारियों, आस पड़ौस के शरीफ गरीबों को अपना धन बांट रहे हैं। पश्चिम बंगाल के माल्दा में तो सरेआम कालाधन रिक्शा चालकों, फड़ी लगाने वालों, कचरा बीनने वालों व भिखारियों में बांट दिया गया, और ये गरीब लोग उस धन को बैंक के बाहर लाइन में खड़े लहरा-लहरा कर मीडिया व आने-जाने वालो को दिखाते रहे। कालेधन के विरूद्ध सरकार द्वारा छेड़ी गई लड़ाई की तैयारी यूं तो पिछले साल भर से हो रही थी। जब से सरकार ने जनधन योजना के अतंर्गत करोड़ों गरीब लोगों के बैंक खाते खुलवाए। तत्पश्चात कालाधन रखने वालों से अपील की गई कि वह अपनी अवैध कमाई की घोषणा कर दें और कुछ टैक्स भरकर ये कमाई को वैध कर लें। आखिर सरकार ने एक बड़ा स्ट्राइक शॉट खेल दिया और बडेÞ नोट बन्द कर दिये। अब बैकों में नयें नियम भी आ गए हैं कि पुराने नोट जमा होने या पहले हफ्ते तक एक ग्राहक को सिर्फ दो हजार नगद मिलेंगे, फिर अगले हफ्तों में ये नगद सीमा बढ़ाकर 10 से 20 हजार की जा रही है, लेकिन उससे आगे क्या होना है? उस पर अभी सरकार का मंथन चल रहा है। जापान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ कहा है कि देशवासियों को नगद का कारोबार छोड़ कर अपना सारा कारोबार बैकों के माध्यम से करने की आदत डाल लेनी चाहिए। साथ ही उन्होने यह भी स्पष्ट किया है कि कालेधन के विरूद्ध उनकी लड़ाई अभी बहुत गहराई तक मार करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ईमानदार लोगों को घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है। लेकिन जो लोग काली कमाई का मोह नहीं छोड़ रहे उन्हें 1947 तक का हिसाब देना पड़ेगा। एक तरह से भाजपा अपना वह वादा पूरा करने की ओर आगे बढ़ रही है जिसमें उसने कहा है कि देश के हर नागरिक के खाते में धन होगा। अब गरीब से लेकर बूढ़े मां-बाप तक के खाते भी लोगों द्वारा भरे जा रहे हैं। आगे सरकार यदि नगद राशि निकाले जाने की सीमा नहीं बढ़ाती है तब यह तय है कि काली कमाई गरीबों के खातों में बंद होकर रह जाएगी जिसे कि वह चैक से पुन: कैश करवाने की योजना बना रहे हंै। सरकार को चाहिए कि वह हर नागरिक से उसकी संपत्ति की घोषणा के विवरण भरवाए कि उनके पास जमीन, सोना, नगद, मशीनरी, फैक्ट्री क्या-क्या है। यदि ऐसा हो जाता है तब जिन लोगों ने आज सोना खरीदा है वह भी बाहर आ जाएगा। भविष्य के लिए भारत में लोग अपनी पीढ़ियों को कमाई करने की शिक्षा देने के साथ-साथ यह शिक्षा भी देंगे कि भले जितना मर्जी कमाना लेकिन कमाई को काली कर रखने की भूल नहीं करना।</p>
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                <pubDate>Sat, 12 Nov 2016 22:50:12 +0530</pubDate>
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