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                <title>Polyhouse Farming - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Agricultural News: पॉलीहाउस खेती से बढ़ाएं मुनाफा जानें शिमला मिर्च, चेरी टमाटर और बिना बीज वाले खीरे की उन्नत खेती</title>
                                    <description><![CDATA[पॉलीहाउस और नेट हाउस में शिमला मिर्च, चेरी टमाटर, बिना बीज वाले खीरे और उन्नत बैंगन की वैज्ञानिक खेती से अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कैसे प्राप्त करें। जानें पौध तैयार करने की तकनीक, उन्नत किस्में और विशेषज्ञों की सलाह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-news-increase-profits-from-polyhouse-farming-know-advanced-cultivation/article-88963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/polyhouse-agriculture.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार</strong><br /></p><p style="text-align:justify;">बदलते समय के साथ सब्जी उत्पादन में भी आधुनिक तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है। पारंपरिक खेती के साथ अब किसान पॉलीहाउस और नेट हाउस जैसी संरक्षित खेती अपनाकर कम जोखिम में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। बाजार में रंगीन शिमला मिर्च, चेरी टमाटर, बिना बीज वाले खीरे और उन्नत बैंगन जैसी उच्च मूल्य वाली सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है। इन फसलों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से तैयार करने पर किसानों को सामान्य सब्जियों की तुलना में बेहतर कीमत मिल सकती है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के सब्जी विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, वैज्ञानिक तकनीकों से तैयार पौधों में रोगों का खतरा कम रहता है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। जुलाई और अगस्त का समय संरक्षित खेती के लिए पौध तैयार करने और नए चक्र की शुरूआत के लिए उपयुक्त माना जाता है। Agricultural News<br /></p><h3 style="text-align:justify;">ट्रे में तैयार करें पौध: <br /></h3><p style="text-align:justify;">पॉलीहाउस में बेहतर उत्पादन के लिए पौध तैयार करने की प्रक्रिया भी वैज्ञानिक तरीके से की जाती है। सामान्य मिट्टी में पौध तैयार करने की बजाय 99 खानों वाली काली प्लास्टिक ट्रे का उपयोग किया जाता है। इसमें कोकोपीट, परलाइट और वमीर्कुलाइट जैसे माध्यमों का प्रयोग किया जाता है, जिससे पौध को पर्याप्त हवा, नमी और पोषक तत्व मिलते हैं। प्रत्येक खाने में एक बीज बोया जाता है और लगभग 30 से 35 दिन में रोपाई योग्य पौध तैयार हो जाती है। तैयार पौध को 1 अगस्त से 15 सितंबर के बीच पॉलीहाउस या नेट हाउस में लगाया जा सकता है। जो किसान अगस्त के मध्य तक रोपाई कर लेते हैं, उन्हें फसल से जल्दी उत्पादन मिलने की संभावना रहती है। Agricultural News<br /></p><h3 style="text-align:justify;">शिमला मिर्च व टमाटर की उन्नत किस्में बढ़ाएंगी लाभ<br /></h3><p style="text-align:justify;">शिमला मिर्च की खेती में रंगीन किस्में किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिला सकती हैं। पीली और संतरी शिमला मिर्च में नेटा आॅरेंज, मिलीना, बचाटा, एनएस-281, औरोविले और कामोश जैसी किस्में उपयोगी मानी जाती हैं। वहीं हरी शिमला मिर्च के लिए इंदिरा, आशा, पसरेला, पालाडीन, कावेरी और अरिस्टोटल जैसी किस्में बेहतर विकल्प हो सकती हैं। लाल रंग की शिमला मिर्च में इंस्पिरेशन, बोम्बी, एनएस-280 और शीलिन जैसी किस्मों का चयन किया जा सकता है। टमाटर उत्पादन में भी अच्छी किस्मों का चुनाव जरूरी है। एनएस-4266, हिमसोना, हिमशिखर, नोवारा, लीडरटन, टॉलस्टॉय और एनएस-4190 जैसी हाइब्रिड किस्में अधिक उत्पादन देने वाली मानी जाती हैं। चेरी टमाटर में रोजा, शीजा, पंजाब सोना, मैस्कोटैल, पंजाब केसर, रूही और गोल्डी जैसी किस्में बाजार में पसंद की जाती हैं।<br /></p><h3 style="text-align:justify;">खीरे से जल्दी मिलेगा उत्पादन<br /></h3><p style="text-align:justify;">बिना बीज वाले खीरे की खेती में किसानों को पौध तैयार करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके बीज सीधे संरक्षित क्षेत्र या खेत में लगाए जा सकते हैं। 15 से 31 अगस्त के बीच बुवाई करने पर फसल सामान्य समय से करीब 15 से 20 दिन पहले तुड़ाई के लिए तैयार हो सकती है। खीरे की उन्नत किस्मों में सनस्टार, किंग स्टार, ईमिल स्टार, मल्टीस्टार, फाल्कोन स्टार, कैप्टन स्टार और हिल्टन जैसी किस्में शामिल हैं। इनकी बाजार में मांग अच्छी बनी रहती है। Agricultural News<br /></p><h3 style="text-align:justify;">इन बातों का रखें ध्यान<br /></h3><ul><li style="text-align:justify;">पौध हमेशा प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज से तैयार करें।</li><li style="text-align:justify;">पॉलीहाउस में तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखें।</li><li style="text-align:justify;">सिंचाई के लिए टपक प्रणाली अपनाना लाभकारी रहता है।</li><li style="text-align:justify;">समय-समय पर रोग और कीट की निगरानी करते रहें।</li><li style="text-align:justify;">बाजार की मांग के अनुसार किस्मों का चयन करें।</li></ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 11:54:43 +0530</pubDate>
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