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                <title>Wayanad Court - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Muthanga Case Police Firing: 23 वर्ष पुराने मुथंगा मामले में अदालत का आया बड़ा फैसला, 35 आरोपी बरी, 21 दोषी करार</title>
                                    <description><![CDATA[केरल के चर्चित मुथंगा पुलिस फायरिंग मामले में वायनाड अदालत ने 23 वर्ष बाद फैसला सुनाया। 35 आरोपी बरी हुए, जबकि 21 लोगों को विभिन्न आरोपों में दोषी ठहराया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/muthanga-case-police-firing-courts-big-decision-in-23-year/article-88975"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/court-case9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Muthanga Case Police Firing: वायनाड। केरल के चर्चित मुथंगा पुलिस फायरिंग प्रकरण में करीब 23 वर्षों बाद न्यायिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण पर पहुंच गई। वायनाड की प्रधान सत्र अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए 35 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि 21 लोगों को दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा और वन भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़े विभिन्न मामलों में दोषी ठहराया। Kerala News</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जांच एजेंसी हत्या की साजिश और हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों को पर्याप्त प्रमाणों के साथ सिद्ध नहीं कर सकी। न्यायालय के अनुसार, पुलिस कॉन्स्टेबल के. वी. विनोद की हत्या का आरोप जिस व्यक्ति पर था, उसकी मुकदमे के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में हत्या के आरोप में किसी अन्य व्यक्ति को दंडित करने का आधार उपलब्ध नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 19 फरवरी 2003 को मुथंगा वन्यजीव अभयारण्य में हुई उस कार्रवाई से जुड़ा है, जब वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासी परिवारों को हटाने के लिए पुलिस अभियान चलाया गया था। उस समय आदिवासी गोत्र महासभा (AGMS) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय भूमि अधिकारों की मांग को लेकर वहां डटे हुए थे। Kerala News</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस कार्रवाई के दौरान हालात हिंसक हो गए थे। इस झड़प में एक पुलिसकर्मी और एक आदिवासी प्रदर्शनकारी की मृत्यु हुई थी। घटना के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने कई लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोपपत्र दायर किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि कथित हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी उपलब्ध नहीं था। घटना स्थल पर मौजूद लोगों की दृश्यता पुलिस कार्रवाई, धुएं और अफरातफरी के कारण सीमित थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि हत्या से संबंधित गंभीर आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले के साथ पुलिसकर्मी की मौत से जुड़ी आपराधिक सुनवाई का समापन हो गया है। हालांकि, आदिवासी संगठनों का कहना है कि घटना में जान गंवाने वाले आदिवासी प्रदर्शनकारी के मामले में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए और उस पहलू पर व्यापक जांच की आवश्यकता बनी हुई है। Kerala News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:39:12 +0530</pubDate>
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