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                <title>FMGE 2026 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>FMGE पास करने में कितना समय लगता है? विदेश से MBBS करने वालों के लिए सामने आई बड़ी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[FMGE पास करने में कितना समय लगता है? विदेश से MBBS करने वालों के लिए सामने आई बड़ी जानकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-much-time-does-it-take-to-pass-fmge-big/article-88988"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/fmge-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेश से MBBS की पढ़ाई करने के बाद भारत में डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने का सपना देखने वाले मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए <strong>Foreign Medical Graduate Examination (FMGE)</strong> पास करना जरूरी होता है। यह परीक्षा विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के लिए भारत में मेडिकल प्रैक्टिस का रास्ता खोलती है। हालांकि, FMGE में सफल होना उम्मीदवारों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाल ही में संसद में FMGE के कम पास प्रतिशत को लेकर सवाल उठाए गए। केंद्र सरकार ने इसके जवाब में बताया कि <strong>जून 2026 सत्र में FMGE का कुल पास प्रतिशत सिर्फ 12.78 प्रतिशत रहा।</strong> सरकार के अनुसार परीक्षा के परिणाम पर अलग-अलग देशों के मेडिकल पाठ्यक्रम, पढ़ाई की गुणवत्ता और मेडिकल ट्रेनिंग में अंतर जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। वहीं, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की 2025 की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि विदेश से MBBS करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवारों को FMGE पास करने में कितना समय लगता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">6 महीने से 1 साल में सबसे ज्यादा उम्मीदवार हुए सफल</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">NBEMS के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 सत्र में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्होंने विदेश से मेडिकल डिग्री पूरी करने के <strong>6 महीने से 1 साल के भीतर FMGE पास किया।</strong> इस कैटेगरी में कुल <strong>6,326 उम्मीदवार</strong> सफल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा <strong>1,061 उम्मीदवारों</strong> ने डिग्री पूरी करने के 6 महीने के अंदर ही परीक्षा पास कर ली। वहीं <strong>1,156 उम्मीदवारों</strong> को डेढ़ से दो साल के बीच परीक्षा पास करने में सफलता मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिसंबर 2025 सत्र में कुल <strong>10,264 उम्मीदवार</strong> FMGE में सफल हुए थे। इनमें से <strong>8,543 उम्मीदवार</strong> इन्हीं तीन समय अवधि वाली कैटेगरी में शामिल थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जून 2025 में बदला हुआ नजर आया ट्रेंड</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून 2025 के FMGE सत्र में आंकड़ों का ट्रेंड कुछ अलग रहा। इस परीक्षा में सबसे ज्यादा <strong>2,478 उम्मीदवारों</strong> ने मेडिकल डिग्री पूरी करने के <strong>1 साल से डेढ़ साल के भीतर</strong> FMGE पास किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं, <strong>921 उम्मीदवार</strong> ऐसे रहे जिन्होंने डिग्री पूरी करने के 6 महीने के अंदर परीक्षा पास कर ली। इसके अलावा <strong>1,012 उम्मीदवारों</strong> को परीक्षा पास करने में दो से ढाई साल का समय लगा। जून 2025 सत्र में कुल <strong>6,709 उम्मीदवार</strong> सफल हुए थे। इनमें से <strong>4,411 उम्मीदवार</strong> उन तीन समय सीमाओं में परीक्षा पास करने वाले थे, जिनका आंकड़ा NBEMS की रिपोर्ट में प्रमुखता से सामने आया है। NBEMS ने दोनों सत्रों के आंकड़ों में अंतर का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। हालांकि, परीक्षा देने में ग्रेजुएशन के बाद लगने वाला समय और रिपीट कैंडिडेट्स की संख्या जैसे कारक इस अंतर की वजह हो सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जून 2026 में सिर्फ 12.78% रहा FMGE पास प्रतिशत</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून 2026 के FMGE रिजल्ट को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी। सरकार के मुताबिक, जून 2026 सत्र में परीक्षा का <strong>कुल पास प्रतिशत 12.78 प्रतिशत</strong> रहा। हालांकि पहली बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का प्रदर्शन रिपीट उम्मीदवारों की तुलना में बेहतर रहा। सरकार ने बताया कि पहली बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का पास प्रतिशत <strong>35 प्रतिशत से अधिक</strong> था। वहीं, लगभग <strong>88 प्रतिशत उम्मीदवार रिपीट कैंडिडेट</strong> थे। यानी बड़ी संख्या में उम्मीदवार पहले भी FMGE दे चुके थे और इस बार दोबारा परीक्षा में शामिल हुए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अलग-अलग देशों की मेडिकल पढ़ाई का भी पड़ता है असर</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार के अनुसार, FMGE के परिणाम को प्रभावित करने वाले कई कारण हैं। इनमें अलग-अलग देशों में मेडिकल शिक्षा के पाठ्यक्रम, पढ़ाई की गुणवत्ता और प्रशिक्षण के तरीके में अंतर प्रमुख हैं। विदेश में MBBS करने वाले छात्रों को अलग-अलग मेडिकल सिस्टम और पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई करनी पड़ती है। ऐसे में भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए आवश्यक मानकों और FMGE के पैटर्न के साथ तालमेल बनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रूस से पढ़े सबसे ज्यादा उम्मीदवार हुए सफल</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">NBEMS की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, उस सत्र में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार <strong>रूस से MBBS करने वाले</strong> थे। रूस से मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले <strong>2,128 उम्मीदवारों</strong> ने FMGE पास किया। हालांकि, केवल सफल उम्मीदवारों की संख्या को देखें तो तस्वीर अलग है और पास प्रतिशत के मामले में दूसरे देश आगे रहे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जॉर्जिया के छात्रों का पास प्रतिशत सबसे बेहतर</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिसंबर 2025 सत्र में टॉप देशों में <strong>जॉर्जिया से पढ़े उम्मीदवारों का पास प्रतिशत सबसे बेहतर रहा।</strong> जॉर्जिया का FMGE पास प्रतिशत <strong>32.36 प्रतिशत</strong> दर्ज किया गया। वहीं चीन से मेडिकल पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों का पास प्रतिशत <strong>14.26 प्रतिशत</strong> रहा, जो टॉप 5 देशों में सबसे कम था। इससे साफ है कि किसी देश से सफल उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा होना जरूरी नहीं कि वहां का पास प्रतिशत भी सबसे ज्यादा हो। दोनों आंकड़ों को अलग-अलग देखना जरूरी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जून 2025 में चीन से सबसे ज्यादा उम्मीदवार हुए सफल</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून 2025 के FMGE सत्र में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार <strong>चीन से MBBS करने वाले</strong> रहे। इस दौरान चीन से पढ़ाई करने वाले <strong>1,043 उम्मीदवारों</strong> ने परीक्षा पास की। हालांकि, चीन से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का पास प्रतिशत केवल <strong>14.66 प्रतिशत</strong> रहा। इस सत्र में भी जॉर्जिया का प्रदर्शन बेहतर रहा। जॉर्जिया से MBBS करने वाले उम्मीदवारों का FMGE पास प्रतिशत <strong>27.68 प्रतिशत</strong> दर्ज किया गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विदेश से MBBS करने वालों के लिए FMGE क्यों अहम?</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए FMGE भारत में मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल कर लेने के बाद भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए निर्धारित नियमों के तहत परीक्षा पास करना जरूरी होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">NBEMS के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि कई उम्मीदवार पहली कोशिश में सफल नहीं हो पाते और उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है। ऐसे में विदेश में MBBS करने वाले छात्रों के लिए मेडिकल पढ़ाई के साथ-साथ FMGE के सिलेबस और परीक्षा पैटर्न को समझना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं आंकड़े?</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">FMGE के हालिया आंकड़ों से एक बात स्पष्ट है कि विदेश से MBBS करने के बाद परीक्षा पास करने में उम्मीदवारों का प्रदर्शन अलग-अलग रहता है। कुछ छात्र डिग्री पूरी करने के 6 महीने के भीतर ही सफल हो जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को 6 महीने से 1 साल या उससे ज्यादा समय लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जून 2026 में कुल पास प्रतिशत का 12.78 प्रतिशत रहना इस परीक्षा की कठिन चुनौती को भी दिखाता है। वहीं, पहली बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का 35 प्रतिशत से अधिक पास प्रतिशत यह संकेत देता है कि सही तैयारी और समय पर परीक्षा देने से सफलता की संभावना बेहतर हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:10:35 +0530</pubDate>
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