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                <title>महात्मा गांधी के बारे में हेगड़े के बयान की थरूर ने की निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[थरूर ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के मंत्री लोगों को गोली मारने की बात करते हैं और इस तरह युवकों को हिंसा के लिए भड़काते है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/tharoor-condemns-hegdes-statement-about-mahatma-gandhi/article-12911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/shashi-tharoor.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर देश के सामने अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए (Shashi Tharoor)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता अनंत कुमार हेगड़े के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में दिए गए विवादास्पद बयान की कड़ी निंदा की है और कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मुद्दे पर देश के सामने अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए। थरूर ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक प्रश्न के जवाब में यह टिप्पणी की। उनका ध्यान जब कर्नाटक के भाजपा नेता श्री हेगड़े के उस बयान की तरफ दिलाया गया जिसमें उन्होंने कहा है कि महात्मा गांधी की आजादी की लड़ाई ‘एक ड्रामा था’ पर थरूर ने कहा कि भाजपा और संघ परिवार शुरू से ही महात्मा गांधी पर हमले करता रहा है और यह उसका इतिहास रहा है और इसमें कुछ भी नई बात नहीं है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक तरफ महात्मा गांधी के आदर्शों की बात करते है।</li>
<li style="text-align:justify;">दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता और संघ परिवार के लोग गांधी का अपमान करते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">उन पर हमले करते रहते हैं, पर प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोलते हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में काफी अंतर</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंंत्री को इस मामले में अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए ताकि देश को पता चल सके कि उनका रूख क्या है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में काफी अंतर है, वह बोलते कुछ हैं और उनकी पार्टी के नेता करते कुछ हैं। थरूर ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के मंत्री लोगों को गोली मारने की बात करते हैं और इस तरह युवकों को हिंसा के लिए भड़काते है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। उन्होंंने यह भी कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कांग्रेस के लिए हमेशा से ही आदर और सम्मान के व्यक्ति रहे हैं और हमारे लिए वह आज भी पूजनीय हैं जबकि भाजपा के लिए वह कभी सम्मान के पात्र नहीं रहे है और हेगड़े के बयान से यह स्पष्ट हो गया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 17:08:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विदेश मंत्री विवादित बयान:  भारत के लोग मुफ्त खाने और नौकरी के लिए आते हैं बांग्लादेश</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के मुकाबले हमारी इकॉनमी में ज़्यादा दम |Bangladesh Foreign Minister ढाका (एजेंसी) बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन (Bangladesh Foreign Minister) ने भारत को लेकर एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग बांग्लादेश आते हैं क्योंकि यहां की इकॉनमी भारत से अच्छी है और साथ ही यहां लोगों को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bangladesh-foreign-ministers-disputed-statement/article-11832"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/bangladesh-foreign-minister.jpg" alt=""></a><br /><h3>भारत के मुकाबले हमारी इकॉनमी में ज़्यादा दम |<strong>Bangladesh Foreign Minister</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका (एजेंसी) </strong>बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन<strong> (Bangladesh Foreign Minister)</strong> ने भारत को लेकर एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग बांग्लादेश आते हैं क्योंकि यहां की इकॉनमी भारत से अच्छी है और साथ ही यहां लोगों को मुफ्त में खाना मिलता है। उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग यहां अवैध तरीके से रहते हैं उन्हें वापस भारत भेजा जाएगा। बांग्लादेशी अखबार के मुताबिक, भारतीयों के बांग्लादेश आने के सवाल पर अब्दुल मोमिन ने कहा, ‘भारत से लोग इसलिए बांग्लादेश आ रहे हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बांग्लादेश  के आर्थिक हालात बेहतर हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> वहां से जो लोग आते हैं खासकर गरीबों को यहां नौकरी मिल जाती है </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>साथ ही फ्री का खाना भी मिल जाता है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> भारत के मुकाबले हमारी इकॉनमी में ज़्यादा दम है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भारत में नौकरी की कमी है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसलिए वहां के लोग यहां आ रहे हैं।’</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">बांग्लादेश ने मांगी लिस्ट</h2>
<p style="text-align:justify;">अब्दुल मोमिन ने दो दिन पहले इस बात के भी संकते दिए थे कि भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी वापस वहां आ सकते हैं। उन्होंने भारत से अनुरोध किया कि अगर उसके पास वहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की सूची है तो उसे मुहैया कराए और वह उन्हें लौटने की मंजूरी देगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भारतीय नागरिक अवैध रूप से बांग्लादेश में घुस रहे हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">मोमिन ने  कहा है कि कुछ भारतीय नागरिक आर्थिक वजहों से बिचौलिए के जरिए अवैध रूप से बांग्लादेश में घुस रहे हैं। उन्होंने यहां मीडिया से कहा, ‘लेकिन अगर हमारे नागरिकों के अलावा कोई बांग्लादेश में घुसता है तो हम उसे वापस भेज देंगे। ’ उनसे उन रिपोर्टों के बारे में पूछा गया था कि कुछ लोग भारत के साथ लगती सीमा के जरिए अवैध रूप से देश में घुस रहे हैं ।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2019 13:58:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जेटली से मुलाकात के माल्या के बयान पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली, एजेंसी। [Edited by: Vijay Sharma] आर्थिक अपराधी विजय माल्या के देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने संबंधी बयान के बाद देश में सियासी हंगामा खड़ा हो गया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद माल्या की ओर से सफाई दी जा रही है तो विपक्ष वित्त मंत्री से इस्तीफा मांग रही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mallyas-statement-overheard-congress-demands-resignation/article-5912"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/vijay-malya.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, एजेंसी। [Edited by: Vijay Sharma] </strong>आर्थिक अपराधी विजय माल्या के देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने संबंधी बयान के बाद देश में सियासी हंगामा खड़ा हो गया है<strong>। </strong>मामले के तूल पकड़ने के बाद माल्या की ओर से सफाई दी जा रही है तो विपक्ष वित्त मंत्री से इस्तीफा मांग रही है<strong>। </strong>यह दिलचस्प है कि कांग्रेस और बीजेपी पहले ही एक-दूसरे पर भगोड़े आर्थिक अपराधियों की मदद का आरोप लगाते आए हैं<strong>।</strong> माल्या ने बुधवार को कोर्ट में सुनवाई के बाद बाहर यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि वो देश छोड़ने से पहले मामला सुलझाने के लिए वह वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे, लेकिन बैंकों की आपत्ति के वजह से मामला सुलझ नहीं सका<strong>।</strong></p>
<h2>जेटली ने सफाई देते हुए कहा, ‘माल्या का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है</h2>
<p>विजय माल्या के बयान के बाद फंसे जेटली को इस पर सफाई देनी पड़ गई<strong>।</strong>उन्होंने कहा कि संसद के गलियारे में माल्या उनके साथ हो लिए थे, उनसे कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हुई थी<strong>।</strong>जेटली ने फेसबुक पर इस संबंध में सफाई देते हुए कहा, ‘माल्या का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है<strong>।</strong> मैंने 2014 से अब तक उन्हें मिलने का टाइम नहीं दिया<strong>।</strong>वह राज्यसभा सदस्य थे और कभी-कभी सदन में आया करते थे<strong>।</strong>मैं सदन से निकलकर अपने कमरे में जा रहा था, इसी दौरान वह साथ हो लिए<strong>।</strong>उन्होंने समझौते की पेशकश की थी, जिस पर मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि मेरे साथ बात करने का कोई फायदा नहीं, यह प्रस्ताव बैंकों के साथ करें<strong>। </strong></p>
<h2>बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का एक तीन महीने पुराना ट्वीट भी चर्चा में</h2>
<ul>
<li>माल्या के जेटली से मिलने संबंधी बयान के बाद बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का एक तीन महीने पुराना ट्वीट भी चर्चा में आ गया<strong>।</strong></li>
<li>इस ट्वीट को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई लोगों ने रिट्वीट किया है जिसे 12 जून को शेयर किया गया था<strong>।</strong></li>
<li>इस ट्वीट में स्वामी ने लिखा, ‘माल्या देश नहीं छोड़ सकता क्योंकि हवाई अड्डों पर उसके खिलाफ कड़ा लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था</li>
<li>इसके बाद वो दिल्ली आया और उसने किसी प्रभावी शख्स से मुलाकात की</li>
<li>जो विदेश जाने से रोकने वाले उस नोटिस को बदल सकता था. वो शख्स कौन ने जिसने नोटिस को कमजोर किया ?’</li>
</ul>
<h3>विपक्ष ने साधा निशाना: अभिषेक मनु ने कहा कि देश जानना चाहता है कि जेटली और माल्या की उस बैठक में क्या हुआ</h3>
<p>विजय माल्या के बयान के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को आड़े हाथ लिया और जमकर निशाना साधा<strong>।</strong>कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि माल्या को देश छोड़ने की अनुमति कैसे मिल गई<strong>।</strong>देश जानना चाहता है कि जेटली और माल्या की उस बैठक में क्या हुआ था कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर वित्त मंत्री जेटली पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मसले पर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की<strong>।</strong> साथ ही यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक के लिए वित्त मंत्री जेटली को अपना पद छोड़ देना चाहिए<strong>।</strong></p>
<h2>कैसे भागे थे माल्या?</h2>
<p>माल्या मार्च 2016 में देश छोड़कर चले गए थे<strong>।</strong> राज्यसभा के रिकॉर्ड के मुताबिक विजय माल्या 1 मार्च 2016 को राज्यसभा में उपस्थित थे और उसके अगले दिन ही 2 मार्च को वह देश से बाहर निकल भागने में कामयाब हो गए थे<strong>।</strong>वह जेट एयरवेज की फ्लाइट से दिल्ली से लंदन गए थे<strong>। </strong>माल्या ने दो मार्च को लगभग पौने बारह बजे एयरलाइन को फोन कर अपनी यात्रा की सूचना दी थी, जिसके बाद दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर वह जेट एयरवेज की फ्लाइट 9W122 से लंदन रवाना हो गए थे<strong>।</strong> उन्होंने बोइंग 777-300 के फर्स्ट क्लास में ट्रैवल किया, उनके साथ 7 से 11 बैग थे. उनके साथ एक महिला भी थी<strong>।</strong></p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Sep 2018 10:28:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत विरोधी है महबूबा का बयान</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू कश्मीर की सत्ता जाते ही, महबूबा मुफ्ती के स्वर भी बदलने लगे हैं। उन्होंने अभी हाल ही में कहा है कि उनकी पार्टी को तोड़ने के प्रयास किए गए तो कश्मीर में 1990 जैसे हालात बन जाएंगे, इस बयान से ऐसा ही लगता है कि जैसे 1990 के हालात के लिए पीडीपी ही जिम्मेदार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-anti-mehbooba-statement/article-4845"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/mahbooba.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर की सत्ता जाते ही, महबूबा मुफ्ती के स्वर भी बदलने लगे हैं। उन्होंने अभी हाल ही में कहा है कि उनकी पार्टी को तोड़ने के प्रयास किए गए तो कश्मीर में 1990 जैसे हालात बन जाएंगे, इस बयान से ऐसा ही लगता है कि जैसे 1990 के हालात के लिए पीडीपी ही जिम्मेदार है, वह जानती है कि ऐसे हालात कैसे बनाए जाते हैं। महबूबा मुफ्ती का आतंकवादियों के प्रति उनका नरम रवैया किसी से छिपा नहीं रहा है। अब तो उन्होंने आतंकी पैदा करने की धमकी देकर अपने अंदर आतंकियों व पाकिस्तान के प्रति छिपे प्रेम को सरेआम उजागर कर दिया है। उन्होंने यह कहकर आतंकियों की पैरवी की है कि यदि उनकी पार्टी में तोड़फोड़ की गई तो सलाउद्दीन व यासिन मलिक जैसे आतंकवादी पैदा होंगे। आतंकी पैदा करने की बात करके महबूबा मुफ्ती देश को क्या संदेश देना चाहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महबूबा मुफ्ती को यह समझना चाहिए कि उनकी पार्टी के अंदर जो भी चल रहा है, वह उन्हीं के कर्मों का फल है। वह खुद तो अपना घर संभाल नहीं पा रही है और दूसरों पर इसका दोषारोपण मढ़ कर अपनी नाकामियों को छिपाने में लगी हुई है। पीडीपी की वास्तविकता यह है कि यह पार्टी केवल एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है। इसमें आम कार्यकतार्ओं के बारे में सौतेला व्यवहार किया जाता है। चाहे पार्टी में कोई पद देने की बात हो या फिर सत्ता की मलाई खाने की बात हो, महबूबा ने दोनों में अपने परिवार के लोगों को महत्व दिया। ऐसे में पार्टी में बगावत होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर में दूसरी पार्टी नेशनल कान्फ्रेंस की बात की जाए तो कमोवेश उसके हालात भी लगभग पीडीपी जैसे ही हैं, उसके नेता भी केवल अपने परिवार पर केन्द्रित करके पूरी पार्टी का संचालन करते दिखाई देते हैं। इन्होंने भी अपने बयानों के माध्यम से अलगाववादी नेताओं का समर्थन करने जैसे बयान दिए हैं। जम्मू कश्मीर में चुनाव के बाद जब पीडीपी के साथ भाजपा ने गठबंधन कर सरकार बनाई, तब महबूबा को भाजपा ने कश्मीर की जनता के हितों को ध्यान में रखकर उसका समर्थन किया, लेकिन महबूबा का रवैया नहीं बदला। महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरी हिन्दुओंं को घाटी में बसाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी का कश्मीरी हिन्दुओं के बारे में प्रारंभ से ही यह उद्देश्य रहा है कि कैसे भी करके उनकी वापसी के बारे में सोचा जाए, लेकिन महबूबा शुरू से ही इस तिकड़म में लगी रहीं कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों का मुद्दा ही न उठ पाए। उल्लेखनीय है कि कश्मीर में अलगाववादी आतंकियों के बढ़ते प्रभाव और उन्हें मिले राजनीतिक संरक्षण के चलते कश्मीरी हिन्दुओं को वहां से विस्थापित होना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा देश इस बात का गवाह है कि महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्रित्व वाले कार्यकाल में किस तरह से रमजान के दिनों में आंतकवादियों और पत्थरबाजों ने वहां तांडव किया। बेगुनाह लोगों का कत्ल किया गया, पत्रकारों की हत्या हुई। इसे या तो राज्य सरकार की नाकामी कहा जा सकता है या आतंकियों को ऐसा करने के लिए राजनीतिक संरक्षण माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात सही है कि महबूबा की सरकार ने आतंकियों के विरोध में वैसे कदम नहीं उठाए जैसे उठाने चाहिए। यानी उनकी सरकार का आतंकियों के बारे में हमेशा नरम रवैया ही रहा। अपनी जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं करना ही सरकार की बहुत बड़ी विफलता थी, ऐसे में भाजपा ने समर्थन वापस लिया तो यह कदम न्याय संगत ही कहा जाना चाहिए। लेकिन अब महबूबा ने अपना असली रुप दिखा दिया है, उनका भाजपा के प्रति दोस्ताना रवैया कम, आतंकियों के प्रति उदारता ज्यादा दिखाई। इससे जम्मू कश्मीर के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, केंद्र सरकार ने विकास के लिए जो पैकेज दिए उसे भी जम्मू कश्मीर की जनता की भलाई के लिए नहीं लगाया गया। वह केवल आतंकियों को सुरक्षित करने वाले एजेंडा पर ही काम करती हुई दिखाई दे रही थीं। कश्मीर में सेना पर हमला करने वाले पत्थरबाजों को बच्चा कहकर उन्हें माफ किया गया। एक तरह से कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब कह सकते हैं कि जब से वहां राज्यपाल शासन लागू हुआ है तब से हालातों में सुधार हैं। सारे पत्थरबाज किसी गुफा में छिप गए हैं। खूंखार आतंकवादी मारे जा रहे हैं। कई आतंकवादी जंगलों में छिप गए हैं। ऐसे में जिन राजनीतिक दलों का आतंकियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता रहा है, उन्हें अब दर्द तो होगा ही। अब आतंकियों को किसी भी प्रकार का सरकारी संरक्षण नहीं मिल रहा, इसलिए महबूबा ने और आतंकी पैदा करने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद अब जब कश्मीर में शांति व्यवस्था कायम होने लगी है, आतंकवादियों का सफाया हो रहा है और इस सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान भी घबराया हुआ है, तब ऐसे में महबूबा मुफ्ती का बयान निश्चित ही जम्मू कश्मीर के वातावरण में जहर घोलने जैसा है। उनके इस बयान से जाहिर होता है कि वह जम्मू कश्मीर में शांति नहीं चाहती है। वे जिस सलाहुद्दीन व यासीन मलिक जैसे आतंकियों के पैदा होने की धमकी दे रही हैं, उनका इतिहास किसी से छिपा नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दोनों ने ही अलग अलग आतंकवादी संगठन बनाकर देश को नुकसान ही पहुंचाया। सैयद सलाहुद्दीन हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना है। उसने 1990 में अपना नाम यूसुफ शाह से बदलकर सैयद सलाहुद्दीन कर लिया था। सलाहुद्दीन ने 1987 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। उसी के बाद से उसने हाथों में बंदूक थाम ली। वहीं, यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का प्रमुख है। वह कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत करता रहा है। कश्मीर में शांति से रहने वालों का खून बहाने में इन दोनों ने ही कोई कसर नहीं छोड़ी। अब तो सलाहुद्दीन को अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकी भी घोषित किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीडीपी में जिस प्रकार के बगावत के सुर बढ़ रहे हैं, उसके मूल में महबूबा की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। यह विद्रोही स्वर सरकार जाने के बाद से सुनाई दे रहे हैं, ऐसी बात नहीं है, लेकिन महबूबा पार्टी के घमासान को जिस प्रकार से मोड़ देने का प्रयास कर रही हैं, उससे ऐसा ही लगता है कि वर्तमान में वह बौखला रही हैं। हम जानते हैं कि जब भाजपा के साथ यहां सरकार थी, तब भी पीडीपी में बगावत के सुर सुनाई देते रहे हैं। अलबत्ता अब इतना जरूर हुआ कि भाजपा से समर्थन वापस लेने के बाद पीडीपी के असंतुष्ट विधायक खुल कर महबूबा के खिलाफ आ गए हैं और महबूबा इसका ठीकरा वह भाजपा पर फोड़कर अपना दामन बचाना चाहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jul 2018 14:51:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फारुख का विवादित बयान: &amp;#8216;पीओके पाक का हिस्सा&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला ने शनिवार को सरकार द्वारा नियुक्त किए गए वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा के बारे में कुछ बोलने से इंकार करते हुए कहा कि कश्मीर का विवाद भारत-पाक के बीच है इसलिए पाकिस्तान सरकार से वार्ता करनी होगी। अब्दुल्ला ने कहा है कि पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान का ही है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/farooqs-controversial-statement-part-of-pok-pak/article-3507"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/abdulla.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला ने शनिवार को सरकार द्वारा नियुक्त किए गए वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा के बारे में कुछ बोलने से इंकार करते हुए कहा कि कश्मीर का विवाद भारत-पाक के बीच है इसलिए पाकिस्तान सरकार से वार्ता करनी होगी। अब्दुल्ला ने कहा है कि पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान का ही है और उनका ही रहेगा। जम्मू कश्मीर बातचीत के लिए सरकार के प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया में यह बात कही। जम्मू-कश्मीर के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा पर फारूख अब्दुल्ला ने कहा, मैं उनपर अधिक नहीं बोल सकता। उन्होंने वार्ता की लेकिन एकमात्र समाधान बातचीत नहीं है। यह भारत और पाक के बीच का मामला है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार को पाकिस्तान सरकार से भी वार्ता करनी होगी क्योंकि कश्मीर का एक हिस्सा उनके पास है। जो हिस्सा (पीओके) पाकिस्तान के पास है वो पाकिस्तान का ही है और यह भारत का हिस्सा है। अगर वे शांति चाहते हैं तो सरकार को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए और हमारे साथ-साथ उनको भी स्वायत्ता देनी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तानी मंत्री ने बिल्कुल सही कहा कि आप भूल गए हो कि जो हिस्सा आपका है वह एक हथियार के द्वारा अधिकृत कर लिया गया है। आप अधिकृत करने वाले हथियार को भूल गए और कहते हो कि वह हिस्सा आपका है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आप यह बात करते हो कि यह आपका है तो हथियार को भी याद रखो।’ फारूख ने कहा कि आजादी की मांग बेमानी है। कश्मीर हर ओर से जमीन और परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों से घिरा है। इसलिए आजादी की मांग उचित नहीं है। उनका कहना है कि कश्मीर में भारत सरकार अमन चैन चाहती है तो उसे पाकिस्तान के साथ भी बातचीत करनी होगी। जबकि भारत सरकार का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Nov 2017 06:03:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शाह के बयान से 75+ के 25 नेताओं को उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: अमित शाह ने शनिवार को मध्यप्रदेश में यह कहकर सबको चौंका दिया कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाने का पार्टी में कोई नियम नहीं है। न ही ऐसी कोई परंपरा है। बीजेपी हाईकमान के रुख में इस लचीलेपन से पार्टी के 75+ के करीब 25 नेताओं में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> अमित शाह ने शनिवार को मध्यप्रदेश में यह कहकर सबको चौंका दिया कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाने का पार्टी में कोई नियम नहीं है। न ही ऐसी कोई परंपरा है। बीजेपी हाईकमान के रुख में इस लचीलेपन से पार्टी के 75+ के करीब 25 नेताओं में एक बार फिर सक्रिय राजनीति में लौटने की उम्मीद जग गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, 2014 में नरेंद्र मोदी ने 75 पार के नेताओं को कैबिनेट में नहीं रखा था। वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी तक को मार्गदर्शक मंडल तक सीमित कर दिया था। उसी दौरान पार्टी में स्पष्ट कर दिया गया था कि चुनाव लड़ने की अधिकतम आयु सीमा 75 साल है। बीजेपी शासित राज्यों में भी यही फॉर्मूला अपनाया गया। गुजरात में मुख्यमंत्री रहीं आनंदीबेन पटेल को 75 की उम्र पार होते ही कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने यह आयु सीमा पूरी होने से महीने पहले ही पद छोड़ दिया था। फेसबुक पोस्ट में उम्र ही उन्होंने इस्तीफे की वजह बताई थी।</p>
<h1 style="text-align:justify;">इन्हें हो चुका नुकसान</h1>
<p style="text-align:justify;">लालकृष्ण आडवाणी (89), मुरली मनोहर जोशी (83)। मंत्री और राष्ट्रपति पद से वंचित रहे। संगठन में मार्गदर्शक मंडल तक सीमित। जिसकी आजतक एक भी बैठक नहीं हुई। आनंदीबेन पटेल (75) गुजरात की मुख्यमंत्री थीं, पद से उम्र के फार्मूले की वजह से हटना पड़ा। नजमा हेपतुल्ला (77) मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थीं और केंद्र में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री। 75 की उम्र होने पर न चाहते हुए पद छोड़ना पड़ा। अब राज्यपाल। यशवंत सिन्हा (84) झारखंड के हजारीबाग से जीतते रहे हैं। अटल सरकार में वित्त-विदेश मंत्री रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार टिकट बेटे को मिला। जून 2015 में कहा- ‘बीजेपी में 75 पार के लोगों को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया है।’ उत्तराखंड के पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी (82) को मंत्री नहीं बनाया। जसवंत सिंह (79), अरुण शौरी (75), लालजी टंडन (82), कल्याण सिंह (85), केशरी नाथ त्रिपाठी (82) समेत कई नेता उम्र की वजह से सक्रिय राजनीति से दूर कर दिए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2017 00:03:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोविन्द के वक्तव्य में नये भारत का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन नये भारत को निर्मित करने के संकल्प को बल देता है। अपने इस सशक्त एवं जीवंत भाषण में उन्होंने उन मूल्यों एवं आदर्शों की चर्चा की, जिन पर नये भारत के विकास का सफर तय किया जाना है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/new-indias-resolution-in-the-statement-of-kovind/article-3168"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/kovind1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन नये भारत को निर्मित करने के संकल्प को बल देता है। अपने इस सशक्त एवं जीवंत भाषण में उन्होंने उन मूल्यों एवं आदर्शों की चर्चा की, जिन पर नये भारत के विकास का सफर तय किया जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, संविधान, नैतिकता और ईमानदारी को कैसे मजबूत करना है, किस तरह से राजनीतिक शुचिता एवं प्रशासनिक ईमानदारी बल मिले, कैसे घोटाले एवं भ्रष्टाचार मुक्त जीवनशैली विकसित हो, ‘सत्यमेव जयते’ का हमारा राष्ट्रीय घोष कैसे जीवन में दिखाई दे, किस तरह से पिछड़े़, आदिवासी एवं दलित लोगों का कल्याण हो, इन महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रपति का जागरूक होना और राष्ट्र को जागरूक करना देश के लिये शुभता का सूचक है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद का यह पहला स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या का उद्बोधन अनेक विशेषताएं लिये हुए है, उन्होंने अपने इस उद्बोधन से यह स्पष्ट कर दिया कि वे एक सशक्त राष्ट्रपति के रूप में देश को नयी दिशा देंगे। उन्होंने अपने भाषण में गांधी, नेहरू, नेताजी, पटेल से पहले क्रांतिकारी नेताओं भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद का नाम लिया और भाषण की शुरूआत महिला वीरांगनाओं से की, निश्चित ही एक नयी परम्परा का सूत्रपात है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद ने जहां सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर किया, वहीं सरकार के लिये करणीय कार्यों की नसीहत भी दी है। सरकार का पहला दायित्व होता है कि वह सबसे गरीब आदमी की स्थिति सुधारने के लिए सभी उपाय करे। इसके लिए भारत का शासन किस तरह जनकल्याणकारी शासन होगा, उसकी रूपरेखा भी उन्होंने प्रस्तुत की। उन्होंने सरकार के साथ-साथ नागरिकों के कर्तव्य एवं जिम्मेदारियों की भी चर्चा की। सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ अभियान शुरू किया है लेकिन भारत को स्वच्छ बनाना हर एक की जिम्मेदारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ने जिस समय अपना उद्बोधन दिया, उससे कुछ घंटों पहले ही ‘सुखी परिवार अभियान’ के प्रेरणा एवं ‘आदिवासी जनजीवन’ के मसीहा गणि राजेन्द्र विजयजी के साथ हम लोग राष्ट्रपति जी से मिले। सुखी परिवार फाउण्डेशन के माध्यम से आदिवासी क्षे़त्रों में संचालित की जा रही गतिविधियों की जानकारी से कोविन्द अभिभूत हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा भी है कि अनेक व्यक्ति और संगठन, गरीबों और वंचितों के लिए चुपचाप और पूरी लगन से काम कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। देश को खुले में शौच से मुक्त कराना, विकास के नए अवसर पैदा करना, शिक्षा और सूचना की पहुंच बढ़ाना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अभियान को बदल देना, बेटियों से भेदभाव न हो, ये किस तरह से सुनिश्चित हो, इसकी चर्चा राष्ट्रपति के वक्तव्य का हार्द है। दलगत राजनीति से परे राष्ट्रीय विचारधारा वाले व्यक्ति का इस सर्वोच्च पद पर निर्वाचित होना और उनका राष्ट्रीयता के साथ-साथ सामाजिक संदेश देना प्रेरक है।</p>
<p style="text-align:justify;">‘कदम-कदम बढ़ाये जा खुशी के गीत गाये जा, ये जिन्दगी है कौम की तू कौम पर लुटाये जा’। कोविंदजी का मन्तव्य भी यही है कि आजादी किसी की जागीर नहीं है बल्कि इस मुल्क के लोगों की सामूहिक हिम्मत से हासिल की गई कामयाबी है, इसको नये आयाम देने एवं विकास की नयी इबारत लिखने के लिये हर व्यक्ति आगे आये और देश विकास में सहभागी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">वे भारत को केवल राजनीति, आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक एवं लोकतांत्रिक दृष्टि से भी समुन्नत बनाना चाहते हैं और इसीलिये उन्होंने अपने भाषण में चरित्र निर्माण, शिक्षा, राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, संविधान आदि की चर्चा की। गांधीजी ने समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण पर बल दिया था। गांधीजी ने जिन सिद्धांतों को अपनाने की बात कही थी, वे आज भी प्रासंगिक हैं और कोविन्दजी उसी को बल दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नेताजी सुभाषचन्द बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का आह्वान किया तो भारतवासियों ने आजादी की लड़ाई में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। नेहरूजी ने सिखाया कि विरासतों और परंपराओं का टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल होना चाहिए, क्योंकि वे आधुनिक समाज के निर्माण में सहायक हो सकती हैं। सरदार पटेल ने हमें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति जागरूक किया, उन्होंने यह भी समझाया कि अनुशासन-युक्त राष्ट्रीय चरित्र क्या होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंबेडकर ने संविधान के दायरे में रहकर काम करने तथा ‘कानून के शासन’ की अनिवार्यता के विषय में समझाया। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि कोविन्दजी अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य का निर्माण करने के पक्षधर हैं और इस हेतु वे तत्पर भी दिखायी दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमने आजाद भारत के विकास में कितना सफर तय किया है, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि हम अब भारत को कैसा बनाना चाहते हैं। हमारा सफर लोकतन्त्र की व्यवस्था के साये में निश्चित रूप से सन्तोषप्रद रहा है लेकिन अब हमें ऐसा भारत निर्मित करना है जिसमें सबका संतुलित विकास हो। इसी संकल्प को आजादी के 75 साल पूरे होने तक हासिल करने की बात कोविन्द ने की है।</p>
<p style="text-align:justify;">नया इंडिया के लिए कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य प्राप्त करने के लिये उनके कुछ राष्ट्रीय संकल्प है। नया इंडिया के बड़े स्पष्ट मापदंड भी हैं, जैसे सबके लिए घर, बिजली, बेहतर सड़कें और संचार के माध्यम, शिक्षा, चिकित्सा, आधुनिक रेल नेटवर्क, तेज और सतत विकास। नया इंडिया हमारे डीएनए में रचे-बसे मानवतावादी मूल्यों को समाहित करे। नया इंडिया का समाज ऐसा हो, जो तेजी से बढ़ते हुए संवेदनशील भी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद ने ‘अप्प दीपो भव’ यानी अपना दीपक स्वयं बनो की प्रेरणा देकर भारत को आध्यात्मिक रूप से विकसित करने की सलाह भी दी है। दीपक जब एक साथ जलेंगे तो सूर्य के प्रकाश के समान वह उजाला सुसंस्कृत और विकसित भारत के मार्ग को आलोकित करेगा। हम सब मिलकर आजादी की लड़ाई के दौरान उमड़े जोश और उमंग की भावना के साथ सवा सौ करोड़ दीपक बन सकते हैं। दीपक बनने की यह प्रेरणा ही उनके वक्तव्य की व्यापकता एवं दूरदर्शिता की भावना की अभिव्यक्ति है, जिसके माध्यम से वे एक सार्थक सन्देश दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति करने वाले स्वार्थी एवं अपरिपक्व नेताओं को भी कोविन्द ने नयी राजनीति-वास्तविक राजनीति का सन्देश दिया है। राजनीति में यदि वे जिन्दा रहना चाहते हैं तो उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी। सेवा को, विकास को एवं गुड गवर्नेंस को माध्यम बनाना होगा, आत्म-निरीक्षण करना होगा। मिल-जुलकर कार्य करने का पाठ सीखना होगा। विरोध की राजनीति को त्यागना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विचारधाराविहीन राजनीति, उनकी महत्वाकांक्षाएं, अराजक कार्यशैली और नकारात्मक एवं झूठ की राजनीति के कारण लोकतंत्र कमजोर होता रहा है, लेकिन अब लोकतंत्र को मजबूत करके ही राष्ट्र को सुदृढ़ किया जा सकेगा और यही इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के वक्तव्य का निचोड़, हार्द है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ललित गर्ग</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2017 23:40:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम महबूबा की दो टूक- अमेरिका-चीन अपना काम संभालें, कश्मीर हमारा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया है। महबूबा ने कहा कि अगर चीन और अमेरिका कश्मीर में हस्तक्षेप करेंगे, तो घाटी के हालात सीरिया और अफगानिस्तान जैसे हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि चीन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया है। महबूबा ने कहा कि अगर चीन और अमेरिका कश्मीर में हस्तक्षेप करेंगे, तो घाटी के हालात सीरिया और अफगानिस्तान जैसे हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि चीन और अमेरिका अपना काम करें। हमें पता है कि उन देशों की हालत क्या है, जहां अमेरिका ने हस्तक्षेप किया है। अफगानिस्तान, सीरिया या इराक के हालात हमारे सामने हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत और पाकिस्तान को बातचीत करनी चाहिए</h3>
<p style="text-align:justify;">महबूबा ने कहा कि सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से ही कश्मीर मुद्दे का समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर में कहा था, कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान को बातचीत करनी चाहिए। महबूबा ने आगे सवाल करते हुए कहा कि क्या फारूक अब्दुल्ला को पता नहीं है कि सीरिया और अफगानिस्तान में क्या हुआ?</p>
<p style="text-align:justify;"><em>दरअसल, जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रही थीं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और चीन को कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए दखल देना चाहिए।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2017 07:16:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीएम बोले जीएसटी पर कृषि मंत्री की ब्यानबाज़ी की खबर बेबुनियाद</title>
                                    <description><![CDATA[कहा जीएसटी पर निरंतर सुझाव मिल रहे हैं, सरकार करेगी गौर चंडीगढ़(सच कहूँ/अनिल कक्कड़)। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक दैनिक अखबार द्वारा छापी गई खबर जिसमें कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ द्वारा वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को जीएसटी का ज्ञान न होने की बात कही गई थी, को बेबुनियाद बताया है। मुख्यमंत्री आज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cms-statement-about-the-statement-of-agriculture-minister-on-gst-is-baseless/article-2399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/khattar.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">कहा जीएसटी पर निरं<strong>तर सुझाव मिल रहे हैं, सरकार करेगी गौर</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ/अनिल कक्कड़)।</strong> प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक दैनिक अखबार द्वारा छापी गई खबर जिसमें कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ द्वारा वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को जीएसटी का ज्ञान न होने की बात कही गई थी, को बेबुनियाद बताया है। मुख्यमंत्री आज राष्ट्रपति चुनाव के दौरान विधानसभा परिसर में मीडिया से मुखातिब हो रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि एक दैनिक अखबार में गत दिवस हुई विधायक दल की बैठक संबंधी खबर छपी थी। जिसमें कहा गया था कि बैठक के दौरान कृषि ओम प्रकाश धनखड़ ने वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु पर आरोप लगाया कि उन्हें जीएसटी का पूरा ज्ञान नहीं है तथा न ही उन्हें ग्राऊंड रियलटी का पता है। इस खबर बाबत जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का रिएक्शन जानने की कोशिश की गई तो उन्होंन कहा कि ये खबर मनगढंÞत एवं बेबुनियाद है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएम ने कहा कि विधायक दल की बैठक में जीएसटी पर विभिन्न विधायकों तथा मंत्रियों के सुझाव आए हैं, जिन पर सरकार गौर करेगी। उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए 70 साल हो गए हैं और जीएसटी एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी कदम है, जो कि देश की आर्थिक दशा एवं दिशा को सही ट्रैक पर लाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कैप्टन की गैरमौजूदगी में बोल गए धनखड़</h2>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अखबार की खबर पर विश्वास करें तो विधायक दल की मीटिंग में कैप्टन अभिमन्यु मौजूद नहीं थे। उनकी गैर मौजूदगी में कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि हमारे वित्त मंत्री ऐस हैं जिन्हें न तो जीएसटी का कुछ पता है और न ही ग्राऊंड रियलटी का।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि वे जीएसटी की तमाम मीटिंग अटैंड करते हैं। व्यापारियों, और लोगों को परेशानी क्या है यह हमें पता है। इसी के साथ कुछ और विधायकों ने व्यापारियों का पक्ष रखा। मामला बढ़ता देख सीएम ने कहा कि जो लोग सुझाव देना चाहते हैं वे अपने सुझाव वित्त मंत्री के साथ-साथ उन्हें भी दें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2017 23:26:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>8 जुलाई को चीनी एम्बेसी से मिले थे राहुल गांधी, कांग्रेस ने किया था इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नए विवाद में फंस सकते हैं। कांग्रेस ने सोमवार को इस बात से इनकार किया कि राहुल गांधी ने 8 जुलाई को चीन के एम्बेसेडर से दोनों देशों के बीच सिक्किम में जारी तनाव पर बातचीत की थी। दरअसल, चीनी दूतावास के WeChat अकाउंट ने 8 जुलाई को राहुल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/congress-leader-rahul-gandhi-meet-with-chinese-ambassador/article-2183"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/rahul.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नए विवाद में फंस सकते हैं। कांग्रेस ने सोमवार को इस बात से इनकार किया कि राहुल गांधी ने 8 जुलाई को चीन के एम्बेसेडर से दोनों देशों के बीच सिक्किम में जारी तनाव पर बातचीत की थी। दरअसल, चीनी दूतावास के WeChat अकाउंट ने 8 जुलाई को राहुल की बैठक की पुष्टि की है  लेकिन बाद में इस स्टेटमेंट को हटा दिया। कांग्रेस की तरफ से इसे कुछ चैनलों की फेक न्यूज बताया गया है।</p>
<h2>राहुल की चीनी एम्बेसेडर से मुलाकात हुई या नहीं?</h2>
<p>दरअसल, रिपब्लिक टीवी ने अपनी वेबसाइट पर चीन एम्बेसी की वेबसाइट का वो स्टेटमेंट पब्लिश किया जिसमें मुलाकात की जानकारी दी गई थी। लेकिन इसमें टि्वस्ट तब आया जब एम्बेसी ने बाद में मुलाकात पर दिए गए अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट को वेबसाइट से हटा दिया। अब वहां पेज ना होने का मैसेज नजर आ रहा है।</p>
<p>सिक्किम में भारत और भूटान को जोड़ने वाले एरिया में चीन सड़क बनाना चाहता है। भारत-भूटान इसका विरोध कर रहे हैं। करीब एक महीने से इस इलाके में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। भारत सरकार इस मुद्दे को चीन के साथ बातचीत से डिप्लोमैटिक लेवल पर सुलझाने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख राम्या ने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि राहुल गांधी ने चीनी राजदूत से मुलाकात की या नहीं? उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सप्ताह जर्मनी के हैम्बर्ग में जी-20 सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सीमा विवाद का मुद्दा क्यों नहीं उठाया?</p>
<p> </p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 04:45:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मैं गरीब हूं’, इबारत गरीबी का मजाक है</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में गरीबों का मखौल उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जो हमारी राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक मूल्यहीनता एवं दिशाहीनता का परिचायक है। राजनीतिक लाभ लेने के लिये किस तरह सरकार के द्वारा जनयोजनाआेंं को भुनाने के प्रयत्न होते हैं, उसका राजस्थान एक घिनौना एवं अमानवीय उदाहरण बनकर प्रस्तुत हुआ है। गौरतलब है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/i-am-poor-the-statement-is-poverty-joke/article-1943"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/poor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राजस्थान में गरीबों का मखौल उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जो हमारी राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक मूल्यहीनता एवं दिशाहीनता का परिचायक है। राजनीतिक लाभ लेने के लिये किस तरह सरकार के द्वारा जनयोजनाआेंं को भुनाने के प्रयत्न होते हैं, उसका राजस्थान एक घिनौना एवं अमानवीय उदाहरण बनकर प्रस्तुत हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि राज्य के दौसा जिले में बीपीएल यानी गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों के घरों की दीवारों पर उकेर दिया गया है- ‘मैं गरीब हूं, मैं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन लेता हूं।’ कोई भी अपनी मर्जी से अपने घर की दीवार पर यह नहीं लिखना चाहेगा। दौसा में हजारों घरों पर यह लिखा मिलेगा, तो समझा जा सकता है कि अधिकारियों के निर्देश पर ही ऐसा हुआ होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों को निर्देश सत्ता से जुड़े शीर्ष नेतृत्व ने ही प्रदत्त किया होगा, यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र को दूषित करती है, जनभावनाओं को आहत करती हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्यवाही करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज का भौतिक दिमाग कहता है कि घर के बाहर और घर के अन्दर जो है, बस वही जीवन है। लेकिन राजनीतिक दिमाग मानता है कि जहां भी गरीब है, वही राजनीति के लिये जीवन है, क्योंकि राजनीति को उसी से जीवन ऊर्जा मिलती है। यही कारण है कि इस देश में सत्तर साल के बाद भी गरीबी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है, जितनी गरीबी बढ़ती है उतनी ही राजनीतिक जमीन मजबूती होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि सत्ता पर काबिज होने का मार्ग गरीबी के रास्ते से ही आता है। बहुत बड़ी योजनाएं इसी गरीबी को खत्म करने के लिये बनती रही हैं और आज भी बन रही हैं। लेकिन गरीब खत्म होते गये और गरीबी आज भी कायम है। हम जिन रास्तों पर चल कर एवं जिन योजनाओं को लागू करके देश में क्रांति की आशा करते हैं वे ही योजनाएं कितनी विषम और विषभरी हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">इसका अन्दाजा दौसा में गरीबों के घरों के बाहर सरकार के द्वारा लिखी गयी इबारत से पता चल जाता है । सभी कुछ अभिनय है, छलावा है, फरेब है। सब नकली, धोखा, गोलमाल, विषमताभरा। प्रधानमंत्री जी का लोक राज्य, स्वराज्य, सुराज्य, रामराज्य का सुनहरा स्वप्न ऐसी नींव पर कैसे साकार होगा? यहां तो सब अपना-अपना साम्राज्य खड़ा करने में लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी योजनाओं की विसंगतियां ही हैं कि गांवों में जीवन ठहर गया है। बीमार, अशिक्षित, विपन्न मनुष्य मानों अपने को ढो रहा है। शहर सीमेन्ट और सरियों का जंगल हो गया है। मशीन बने सब भाग रहे हैं। मालूम नहीं खुद आगे जाने के लिए या दूसरों को पीछे छोड़ने के लिए। कह तो सभी यही रहे हैं–बाकी सब झूठ है, सच केवल रोटी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोटी केवल शब्द नहीं है, बल्कि बहुत बड़ी परिभाषा समेटे हुए है अपने भीतर। जिसे आज का मनुष्य अपनी सुविधानुसार परिभाषित कर लेता है। रोटी कह रही है-मैं महंगी हूँ तू सस्ता है। यह मनुष्य का घोर अपमान है। रोटी कीमती, जीवन सस्ता। मनुष्य सस्ता, मनुष्यता सस्ती। और इस तरह गरीब को अपमानित किया जा रहा है, यह सबसे बड़ा खतरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस खतरे को महसूस किया, जबकि लोकतंत्र को हांकने वालों को इसे पहले महसूस करना चाहिए। घोर विडम्बना तो यह भी है कि ये शब्द लिखवाने के लिए बीपीएल परिवारों को कुछ पैसे भी दिए गए थे। ऐसी इबारत हर लिहाज से घोर आपत्तिजनक है। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है</p>
<p style="text-align:justify;">और इसका संदेश साफ है कि गरीब आदमी की भी गरिमा है, जिससे खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए, उसे अपमानित नहीं किया जा सकता। पीडीएस यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को मिलने वाला राशन कोई खैरात नहीं है। यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उन्हें मिलता है, जो कि उनका अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या अपने इस अधिकार का इस्तेमाल वे अपमानित होकर ही कर सकते हैं? महीने में दस या पंद्रह किलो गेहूं के लिए अगर दौसा के हजारों परिवारों ने अपने घर की बाहरी दीवार पर गरीब होने की घोषणा लिखवाना मंजूर किया, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तरक्की के तमाम दावों के बावजूद वे कैसी असहायता की हालत में जी रहे हैं और उनके कल्याण की बात करने वाले राजनेता कितनी एय्याशी भोग रहे हैं। सरकारी योजनाओं की जमीन एवं सच्चाई कितनी भयावह एवं भद्दी है, हमारी सोच कितनी जड़ हो चुकी है, सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हम भ्रष्टाचार के मामले में तो दुनिया में अव्वल हैं ही, लेकिन गरीबी के मामले में भी हमारा ऊंचा स्थान है। गत दिनों एक शोध संस्थान द्वारा ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी विश्व भूख सूचकांक जारी किया था। इस सूचकांक ने बताया कि भारत में भुखमरी के कगार पर जीने वालों और अधपेट सोने को मजबूर लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर गरीबों के साथ अपमानजनक व्यवहार पर कोई अध्ययन हो, तो उसमें भी भारत नंबर एक पर ही दिखेगा। गरीब होने की सूचना घरों पर जबरन पुतवाने की घटना से राजस्थान सरकार को शर्म एवं धिक्कार का सामना करना पड़ रहा है। जनता की नजरों में उसका कद इस एक घटना से गिरा है, वह आलोचना का पात्र बनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद मामले के तूल पकड़ने पर उसने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ने की कोशिश शुरू कर दी। राज्य के पंचायत मंत्री ने सफाई दी कि ऐसा कोई भी आदेश राज्य सरकार की तरफ से नहीं दिया गया था। पर आदेश के बगैर, संबंधित इबारत लिखवाने की बात कर्मचारियों को कैसे सूझी, और इसके लिए दिए गए पैसे कहां से आए? ऐसी कार्यवाही से प्रशासन को क्या लाभ है?</p>
<p style="text-align:justify;">अक्सर राजनेताओं या अधिकारियों पर जब इस तरह की अनुचित एवं अमानवीय कार्यवाहियों की जबावदेही तय होती है, जनता का विरोध उभरता एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर छवि का नाश होता है तो इन निरुत्तर एवं जवाबदेही स्थितियों में सभी अपना पल्ला झाड़ने लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर यह सरकारी आदेश नहीं था तो राज्य सरकार यह सफाई क्यों दे रही है कि गरीब होने की घोषणा दीवार पर अंकित करने के पीछे इरादा राशन वितरण में होने वाली हेराफेरी रोकना था।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर यह बात थी, तो राज्य सरकार निर्णय की जवाबदेही लेने से बच क्यों रही है? लेकिन इसी के साथ दूसरा सवाल यह उठता है कि अनियमितता और गड़बड़ी रोकने का कोई और तरीका उसे क्यों नहीं सूझा?</p>
<p style="text-align:justify;">जो हुआ वह गरीबों के अपमान के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली का भी मखौल है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से चार हफ्तों के भीतर जो स्पष्टीकरण मांगा है उसमें दोषियों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा देने को भी कहा है। कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए होगी, या किसी और का दोष किसी और के सिर मढ़ दिया जाएगा!</p>
<p style="text-align:justify;">गांधी और विनोबा ने सबके उदय के लिए ‘सर्वोदय’ की बात की गई। उसे निज्योदय बना दिया। जे. पी. ने जाति धर्म से राजनीति को बाहर निकालने के लिए ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा दिया। जो उनको दी गई श्रद्धांजलि के साथ ही समाप्त हो गया। ‘गरीबी हटाओ’ में गरीब हट गए। स्थिति ने बल्कि नया मोड़ लिया है कि जो गरीबी के नारे को जितना भुना सकते हैं, वे सत्ता प्राप्त कर सकते हैं। कैसे समतामूलक एवं संतुलित समाज का सुनहरा स्वप्न साकार होगा? कैसे मोदीजी का नया भारत निर्मित होगा?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ललित गर्ग</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 23:17:06 +0530</pubDate>
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