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                <title>Adulteration - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Adulteration: मिलावट के खिलाफ प्रदेश में बड़ी कार्रवाई, नामी कंपनियों के मसाले मिले अनसेफ</title>
                                    <description><![CDATA[Adulteration: जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) के निर्देशों पर आमजन को शुद्ध खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दृष्टि से प्रदेश में मिलावट के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत की गई प्रभावी कार्रवाई में देश की नामी मसाला कम्पनियों के उत्पाद अनसेफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/big-action-against-adulteration-in-the-state-spices-of-famous-companies-found-unsafe/article-58436"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/adulteration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Adulteration: जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) के निर्देशों पर आमजन को शुद्ध खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दृष्टि से प्रदेश में मिलावट के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत की गई प्रभावी कार्रवाई में देश की नामी मसाला कम्पनियों के उत्पाद अनसेफ पाए गए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने इन कम्पनियों के विरूद्ध भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा इन अनसेफ मसालों को तत्काल प्रभाव से सीज किए जाने के निर्देश दिए हैं। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में मसालों के सैम्पल लेने के लिए 8 मई, 2024 को विशेष अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत नामी कम्पनियों सहित विभिन्न कम्पनियों के मसालों के प्रदेशभर में कुल 93 नमूने लिए गए। राज्य केंद्रीय जनस्वास्थ्य प्रयोगशाल की जांच रिपोर्ट के अनुसार कुछ नमूनों में पेस्टीसाइड एवं इनसेक्टीसाइड की मात्रा काफी अधिक पाई गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत सरकार एवं गुजरात व हरियाणा को लिखा कार्रवाई के लिए पत्र</h3>
<p style="text-align:justify;">सिंह ने बताया कि राज्य के सभी अभिहीत अधिकारियों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखकर अनसेफ पाए गए मसालों को सीज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, एमडीएच मसालों की निर्माण इकाई हरियाणा में होने, एवरेस्ट एवं गजानंद मसालों की निर्माण इकाई गुजरात में होने के कारण वहां के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। साथ ही, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी इन मामलों में कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">निर्धारित मात्रा से ज्यादा मिला पेस्टीसाइड | Jaipur News</h3>
<p style="text-align:justify;">खाद्य सुरक्षा आयुक्त इकबाल खान ने बताया कि जांच में एमडीएच, एवरेस्ट, गजानंद, श्याम, शीबा ताजा जैसी नामी कम्पनियों के मसाले अनसेफ पाए गए हैं। एमडीएच कंपनी के गरम मसाला में एसिटामिप्रिड, थियामेथोक्साम, इमिडाक्लोप्रिड, सब्जी मसाला एवं चना मसाला में ट्राईसाइलाजोन, प्रोफिनोफोस, श्याम कंपनी के गरम मसाला में एसिटामिप्रिड, शीबा ताजा कंपनी के रायता मसाला में थियामेथोक्साम एवं एसिटामिप्रिड, गजानंद कंपनी के अचार मसाला में इथियोन तथा एवरेस्ट कंपनी के जीरा मसाला में एजोक्सीस्ट्रोबिन व थियामेथोक्साम पेस्टीसाइड/इनसेक्टीसाइड निर्धारित मात्रा से काफी अधिक पाए गए, जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अन्य मसालों के भी लिए जाएंगे नमूने</h3>
<p style="text-align:justify;">खान ने बताया कि इन कंपनियों के अन्य मसालों तथा अनसेफ बैच के अतिरिक्त अन्य बैचों के भी नमूने लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन ब्रांड के मसालों के संबंधित लॉट या बैच को निर्माता, सी एण्ड एफ, डिस्ट्रीब्यूटर एवं हॉलसेलर के यहां से तत्काल प्रभाव से सीज किए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इन ब्रांड के अन्य मसाला एवं मसाला पाउडर के सैम्पल लेने के भी निर्देश दिए हैं। इसके लिए हरियाणा एवं गुजरात के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को भी पत्र लिखा गया है। Jaipur News</p>
<p><a title="Kangana Ranaut Slap Case: सीआईएसएफ कांस्टेबल कुलविंदर कौर गिरफ्तार, किसानों ने कही ये बड़ी बात!!" href="http://10.0.0.122:1245/kangana-ranaut-slap-case-cisf-constable-kulwinder-kaur-arrested/">Kangana Ranaut Slap Case: सीआईएसएफ कांस्टेबल कुलविंदर कौर गिरफ्तार, किसानों ने कही ये बड़ी बात!!</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 17:53:01 +0530</pubDate>
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                <title>Stopping Adulteration: त्योहारी सीजन और यह मिलावटखोरी!</title>
                                    <description><![CDATA[Stopping Adulteration: त्योहारी सीजन के मिलावटी नकली घी, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों का बरामद होने की खबरें बेहद चिंताजनक है। यह अच्छी बात है कि स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है और मिलावटखोरों पर नकेल कस रहा है, लेकिन समस्या यह है कि मिलावट पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही। सभी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/festive-season-and-this-adulteration/article-54339"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/adulteration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Stopping Adulteration: त्योहारी सीजन के मिलावटी नकली घी, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों का बरामद होने की खबरें बेहद चिंताजनक है। यह अच्छी बात है कि स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है और मिलावटखोरों पर नकेल कस रहा है, लेकिन समस्या यह है कि मिलावट पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही। सभी मिलावटखोर पकड़े नहीं जा रहे। त्योहारी सीजन में तो बड़े पैमाने पर मिलावट होगी, उसका खामियाजा जनता को भुगतना ही पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार के कारण अधिकतर मामले सामने भी नहीं आते। वास्तव में मिलावटखोरी न केवल गैर-कानूनी है बल्कि मानवता के प्रति जघन्य अत्याचार भी है। आम लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता खो रहे हैं, ऊपर से मिलावटखोरी ‘आग में घी’ डालने वाली बात है। पैसे के लालच में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना धोखा है। मिलावट के लगातार बढ़ते चलन के कारण पिछले कुछ सालों में लोगों का रुझान सूखे मेवों की ओर भी बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि जनता पता होनी चाहिए जो दुकानदार नकली सामान बेचते पकड़े जाते हैं या मिलावट करते हुए या भ्रष्टाचार के कारण नहीं पकड़े जाते, उस दुकान से मिठाइयां न खरीदें। एक समय था जब लोग घर पर ही दूध से बनी मिठाइयां बनाते थे। दुकानदारों को भी समझना चाहिए कि मिलावट के कारण लोगों को ज्यादा समय तक गुमराह नहीं किया जा सकता। वास्तव में खाद्य पदार्थों व मानव जीवन के उपयोग में आने वाली किसी भी चीज के साथ खिलवाड़ करने वाले ये मिलावटखोर बहुत बड़े गुनाहगार हैं, क्योंकि ऐसा करके वो एक-दो नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। Diwali 2023</p>
<p style="text-align:justify;">दुकानदारों को शुद्धता का प्रमाण दिखाकर जनता का विश्वास जीतना चाहिए। नि:संदेह त्योहार खुशियां बांटने के अवसर होते हैं, जो समाज में अच्छा संदेश देते हैं। इसलिए पवित्र त्योहारों के नाम पर गलत तरीके से पैसा कमाने की भावना का त्याग किया जाए। मिलावटखोरी करना त्योहारों की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि त्योहार सामाजिक कल्याण को समर्पित होते हैं। समाज में मान-सम्मान ही सबसे सर्वोत्तम व आवश्यक है। Adulteration</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="DA Hike: सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, डीए-बोनस को मिली मंजूरी!" href="http://10.0.0.122:1245/very-good-news-for-government-employees-da-bonus-approved/">DA Hike: सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, डीए-बोनस को मिली मंजूरी!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 10:24:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>निरीक्षण दल ने दो दिन में भरे खाद्य सामग्री के नौ सैम्पल</title>
                                    <description><![CDATA[हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। जिले में मंगलवार एवं बुधवार को खाद्य सामग्री बनाने व बेचान करने वाले संस्थानों पर निरीक्षण की कार्यवाही की गई। इस दौरान खाद्य सामग्री के 9 सैम्पल भरे गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओपी चाहर ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए जिले में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-inspection-team-collected-nine-samples-of-food-items-in-two-days/article-52624"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/adulteration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिले में मंगलवार एवं बुधवार को खाद्य सामग्री बनाने व बेचान करने वाले संस्थानों पर निरीक्षण की कार्यवाही की गई। इस दौरान खाद्य सामग्री के 9 सैम्पल भरे गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओपी चाहर ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए जिले में खाद्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय करने वाले संस्थानों पर निरीक्षण की कार्यवाही की गई। निरीक्षण दल में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रफीक मोहम्मद, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुदेश कुमार गर्ग, हीरावल्लभ शामिल रहे। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">खाद्य सुरक्षा दल ने खाद्य सामग्री को बनाने एवं बेचान करने वाले संस्थानों की जांच की एवं सैम्पल एकत्र किए। डॉ. चाहर ने बताया कि मंगलवार को मै. श्याम ट्रेडिंग कम्पनी से घी, हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित होटल सम्राट से दही, गांव नौरंगदेसर में मै. शिवम मिष्ठान भंडार से दही, मै. जाखड़ किरयाना स्टोर से रिफाइंड आयल, मै. हरबंशराय विजय कुमार से बर्फी मिठाई, मै. सुथार किरयाना स्टोर से सरसों के तेल का सैम्पल लिया गया। इसी तरह, बुधवार को हनुमानगढ़ जंक्शन में मै. मीनाक्षी स्वीट्स कार्नर से दही, मै. कामधेनु स्वीट्स से मिल्क केक एवं मै. बंसल वैरायटी स्टोर से स्नैक्स सॉस का सैम्पल संग्रहित किया गया। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">संग्रहित किए गए सैम्पल्स को जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भिजवा दिया गया है। इस दौरान दुकानदारों को संस्थान में साफ-सफाई रखने, लाइसेंस बनाने एवं उन्हें सही समय पर नवीनीकरण करवाने के लिए निर्देशित किया गया। उन्होंने बताया कि जिले में अगर कहीं पर मिलावटी खाद्य पदार्थ तैयार अथवा बेचान किया जाता है, तो उसकी सूचना 01552-261190 पर दी जाए। Hanumangarh News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajasthan Assembly Elections: चुनावी सरगर्मियां तेज, मोदी, खड़गे एवं राहुल की होगी जनसभाएं" href="http://10.0.0.122:1245/election-activity-intensifies-public-meetings-will-be-held-by-modi-kharge-and-rahul/">Rajasthan Assembly Elections: चुनावी सरगर्मियां तेज, मोदी, खड़गे एवं राहुल की होगी जनसभाएं</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-inspection-team-collected-nine-samples-of-food-items-in-two-days/article-52624</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Sep 2023 18:27:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Desi Ghee: सावधान! पीला दिखने वाला हर घी देसी नहीं होता</title>
                                    <description><![CDATA[Pure Ghee VS Adulterated Ghee: अगर आप देसी घी खाने के शौकीन हैं या अपनी हैल्थ को लेकर देसी घी प्रयोग में लाते हैं तो आपको असली और नकली की भी पहचान होनी चाहिए और (Desi Ghee) अगर पहचान नहीं है तो बाजार से लेकर खाने वाले घी संभलकर खाएं क्योंकि बाजारू देसी घी में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/pure-ghee-vs-adulterated-ghee/article-48342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/desi-ghee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Pure Ghee VS Adulterated Ghee: अगर आप देसी घी खाने के शौकीन हैं या अपनी हैल्थ को लेकर देसी घी प्रयोग में लाते हैं तो आपको असली और नकली की भी पहचान होनी चाहिए और (Desi Ghee) अगर पहचान नहीं है तो बाजार से लेकर खाने वाले घी संभलकर खाएं क्योंकि बाजारू देसी घी में ज्यादातर स्टार्च, एसेंस और रिफाइन, यहां तक कि वनस्पति घी भी मिलाया जाता है और बाजार से लेकर खाते भी हैं उनकी असली और नकली की पहचान कैसे करें, इसके बारे में भी आपको सही जानकारी होना लाजिमी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खाने-पीने की चीजों में सबसे ज्यादा मिलावट का खेल चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">असल में देश में डेयरी प्रोडक्ट के रूप में सबसे ज्यादा देसी घी (Desi Ghee) का इस्तेमाल होता है। खाने में स्वाद बढ़ाने या किसी बीमारी में दवा के रूप देसी घी का प्रयोग किया जाता है। इसी का फायदा उठाकर मुनाफा खोर देशी घी में मिलावट करते हैं। मिलावट भी ऐसी करते हैं कि मिलावट के बाद भी घी रंग से पीला दिखाई देता है। तभी तो आपको ये बताया जा रहा है कि पीला दिखने वाला हर घी देसी नहीं होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि देशी घी में क्या मिलाया जाता है और कैसे मिनटों में असली और नकली देशी घी की पहचान कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे करें पहचान | Desi Ghee</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप हर रोज अपनी डाइट में देसी घी उपयोग करते हैं तो आपको पता ही होगा कि घी असली है या नकली। क्योंकि हर रोज खाने वाले को यह आमतौर पर पता ही होता है। अगर असली देसी घी की पहचान नहीं भी है तो देसी घी पहचानने के कई तरीके हैं, जिनको अपनाकर आप असली और नकली देसी घी की पहचान कर सकते हैं। इसके लिए कुछ वैज्ञानिक तरीके भी हैं, जिसको प्रयोग में लाकर बड़ी आसानी से देसी घी की पहचान की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">देसी घी की पहचान करने के लिए सबसे पहले आप एक कांच की कटोरी में बाजार से खरीदा हुआ घी लें। फिर घर में प्रयोग होने वाले सफेद रंग के टॉयलेट क्लीनर को मिलाएं, जिसमें आवश्यक रूप ये हाइड्रोक्लोरिक एसिड होना चाहएि। इसमें चार से पांच दाने चीनी के डालें और मिलाएं। अगर पूरे लिक्विड का रंग पीला दिखाई दे तो समझ जाएं कि कांच की कटोरी में रखे देसी घी में मिलावट है और अगर घी और एचसीएल लिक्विड दोनों अलग-अलग दिखाई दें तो समझ लें कि यह घी पूरी तरह से शुद्ध है। Desi Ghee</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा तरीका है कि एक चम्मच में बाजार से खरीदे हुए घी को लें और फिर इसमें आयोडीन टीचर को मिलाएं, अगर घी का रंग नीला हो जाता है तो इसमें स्टार्च की मिलावट है। अगर घी का रंग नहीं बदलता है तो यह शुद्ध है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हथेली पर रखकर देखें | Desi Ghee</h3>
<p style="text-align:justify;">घर पर पाम टेस्ट करके आप आसानी से असली और नकली घी का पता लगा सकते हैं। इसके लिए 1 चम्मच घी निकलाकर हथेलियों पर रख लें। अगर घी असली होगा तो जल्दी पिघलना शुरू हो जाएगा। वहीं नकली घी हाथों पर रखने के बावजूद देर तक जमा रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सामान्यता घी 27 डिग्री सेंटीग्रेड पर पूरी तरीके से पिघल जाता है, लेकिन अगर घी में रिफाइंड या डालडा की मिलावट होती है तो यह 40 डिग्री तापमान पर भी पूरी तरीके से नहीं पिघलता है। बाजार में एसेंस मिलाकर इस घी को देसी घी के नाम पर बेचा जाता है। इसलिए जब भी घी खरीदें तो इसको गर्म करके देखें। अगर यह घी जल्दी पिघलने लगे तो यह शुद्ध है, जबकि मिलावट वाला घी जल्दी नहीं पिघलता है। एक और तरीक से शुद्ध घी की पहचान करने के लिए उसकी कुछ बूंदे हथेली पर डालें और इसको तेजी से रगड़े। अगर घी में सुगंध आनी बंद हो जाए तो समझ लें यह मिलावट वाला भी घी है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम द्वारा हर त्यौहार पर छापेमारी की जाती है और मिलावट के कुछ मामलों से तो पर्दा उठाया जाता है लेकिन फिर भी मिलावटी वस्तुओं का कारोबार रोके नहीं रुक रहा है। बड़े पैमाने पर मिलावट खोर सक्रिय हैं। बता दें कि देसी घी में मिलावट करने वाले स्टार्च, एसेंस और रिफाइन के साथ-साथ वनस्पति घी भी मिलाते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 11:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मिलावटखोरी पर मिलेगी उम्रकैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[शिवराज सरकार का सख्त फैसला भोपाल। अब खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों पर मध्य प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में मिलावटखोरों के लिए आजीवन कारावास की सजा के प्रावधान से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया गया। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sentenced-to-life-imprisonment-for-adulteration/article-22051"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/adulteration.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">शिवराज सरकार का सख्त फैसला</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> अब खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों पर मध्य प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में मिलावटखोरों के लिए आजीवन कारावास की सजा के प्रावधान से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया गया। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कैबिनेट की बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने पर अब आजीवन कारावास की सजा होगी। कैबिनेट ने ‘मिलावट पर कसावट’ अभियान के तहत आरोपी का दोष साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा के प्रावधान को मंजूरी दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पहले मिलावट का आरोप सही साबित होने पर 6 महीने की सजा का ही प्रावधान था। छह महीने की सजा को बढ़ाकर पहले तीन साल कर दिया गया था। अब इसे संशोधित करते हुए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मिलावट से बड़ा कोई अपराध नहीं। क्योंकि मिलावटखोरी सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। इसलिए सजा को और बढ़ाया गया है। इसके अलावा एक्सपायरी डेट वाली वस्तु बेचने पर भी सजा के प्रावधान को मंजूरी दी गई है।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Feb 2021 11:28:36 +0530</pubDate>
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                <title>त्योहारी सीजन में मिलावट का महाजाल</title>
                                    <description><![CDATA[त्योहारी सीजन शुरू होते ही देशवासियों ने अपने अपने स्तर पर पर्व मनाने की तैयारी जोर शोर से शुरू कर दी है। त्योहारों पर आमजन अपने अपने सामर्थ्य के मुताबिक नए कपड़े, जेवर, मिठाइयां और फल फ्रूट आदि खरीदते हैं। खुद खाते हैं और अपने मित्रों तथा रिश्तेदारों को उपहार में देते हैं। भारत में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-net-of-adulteration-in-the-festive-season/article-10604"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/festivel-season.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">त्योहारी सीजन शुरू होते ही देशवासियों ने अपने अपने स्तर पर पर्व मनाने की तैयारी जोर शोर से शुरू कर दी है। त्योहारों पर आमजन अपने अपने सामर्थ्य के मुताबिक नए कपड़े, जेवर, मिठाइयां और फल फ्रूट आदि खरीदते हैं। खुद खाते हैं और अपने मित्रों तथा रिश्तेदारों को उपहार में देते हैं। भारत में हंसी खुशी के साथ त्योहार मनाने की समृद्ध परम्परा है। माह अक्टूबर में दशहरे से लेकर दीपावली तक लगभग एक दर्जन छोटे और बड़े त्योहार आते है। सभी त्योहार हमारी लोक संस्कृति में रचे बसे हैं। गीत संगीत नृत्य और खान पान के साथ हम अपने त्योहारों को मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही सोने से रसोई तक मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। हर चीज में मिलावट जैसे आम बात हो गई है। मिठाई के बिना त्योहार अधूरा है। त्योहार आये और मिठाई न खाये यह हो ही नहीं सकता। त्योहारी सीजन शुरू होते ही बाजार में ग्राहकी बढ़ने लगती है। मिठाई त्योहारों की खुशी को दुगुना कर देती है। मिलावटखोर भी इसी इंतजार में रहते हैं। उनकी दुकाने रंग बिरंगी मिठाइयों से सज जाती है और हम बिना जांचे परखे इन मिठाइयों को खरीद कर ले आते हैं। मिलावटखोर अधिक मुनाफे के चक्कर में धड़ल्ले से अपना मिलावटी सामान बेचते देर नहीं लगाते। मिलावटखोरों को नियम-कानून का भी भय नहीं रह गया। खासकर त्योहार के सीजन में तो इनकी पौ-बारह रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">खाद्य पदार्थों में अशुद्ध, सस्ती अथवा अनावश्यक वस्तुओं के मिश्रण को मिलावट कहते हैं। आज समाज में हर तरफ मिलावट ही मिलावट देखने को मिल रही है। पानी से सोने तक मिलावट के बाजार ने हमारी बुनियाद को हिला कर रख दिया है। पहले केवल दूध में पानी और शुद्ध देशी घी में वनस्पति घी की मिलावट की बात सुनी जाती थी, मगर आज घर-घर में प्रत्येक वस्तु में मिलावट देखने और सुनने को मिल रही है। मिलावट का अर्थ प्राकृतिक तत्त्वों और पदार्थों में बाहरी, बनावटी या दूसरे प्रकार के मिश्रण से है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुनाफाखोरी करने वाले लोग रातोंरात धनवान बनने का सपना देखते हैं। अपना यह सपना साकार करने के लिए वे बिना सोचे-समझे मिलावट का सहारा लेते हैं। सस्ती चीजों का मिश्रण कर सामान को मिलावटी कर महंगे दामों में बेचकर लोगों को न केवल धोखा दिया जाता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी किया जाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार होकर जीवन से हाथ धो बैठते हैं। मिलावट का धंधा हर तरफ देखने को मिल रहा है। दूध बेचने और मिलावट करने वाले से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ने मिलावट के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्य तो यह है कि हम जो भी पदार्थ सेवन कर रहे हैं चाहें वे खाद्य पदार्थ हों या दूसरे, सब में मिलावट ही मिलावट हो रही है। दूध, मावा, घी, हल्दी, मिर्च, धनिया, अमचूर, सब्जियां, फल आदि सभी मिलावट की चपेट में है। आज खाने पीने सहित सभी चीजों में धड़ले से मिलावट हो रही है। ऐसा कोई भोज्य पदार्थ नहीं है, जो जहरीले कीटनाशकों और मिलावटों से मुक्त हो। बाजार में पपीता, आम और केला, सेव अनार जैसे फलों को कैल्शियम कार्बाईड की मदद से पकाया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार यह स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। फलों को सुनहरा बनाने के लिए पैराफीन वैक्स भी लगाया जाता है। इन फलों को खाने से कैंसर और डायरिया जैसी बीमारियां होती है। डेयरी और कृषि उत्पादों-विशेषकर हरी सब्जियों में आॅक्सिटोसिन का खूब इस्तेमाल हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में मिलावट करने को एक गंभीर अपराध माना गया है। मिलावट साबित होने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 272 के तहत अपराधी को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। मगर बहुत कम मामलों में सजा और जुर्माना हो पाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से आदमी अनेक प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाता है। पेट की असाध्य बीमारियों से लेकर कैंसर तक का रोग लग जाता है। अंधापन और अपंगता को भी झेलना पड़ता है। मिलावट साबित होने पर कई बार छोटे-मोटे मिलावटखोरों की पकड-धकड़ के समाचार अवश्य पढ़ने और सुनने को मिल जाते हैं मगर मिलावट का थोक व्यापार करने वाले लोग अब तक कानून की पहुंच से दूर हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2019 20:08:08 +0530</pubDate>
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                <title>दीवाली से पहले मिलावटखोरी के मार से बचें</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान वैश्विक दुनिया का आधार ही बाजार व्यवस्था पर टिका हुआ है। बाजारवाद के इस आधुनिक युग में मनुष्य अपनी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की पूर्ति बाजार के माध्यम से करता है। हम अपने दैनिक जीवन में उपभोग योग्य खाद्य पदार्थों मसलन दूध, दही, घी, मिठाई, सब्जी, पनीर, सरसों तेल, चावल, दाल और की खरीदारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/avoid-adulteration/article-6523"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/adulteration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान वैश्विक दुनिया का आधार ही बाजार व्यवस्था पर टिका हुआ है। बाजारवाद के इस आधुनिक युग में मनुष्य अपनी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की पूर्ति बाजार के माध्यम से करता है। हम अपने दैनिक जीवन में उपभोग योग्य खाद्य पदार्थों मसलन दूध, दही, घी, मिठाई, सब्जी, पनीर, सरसों तेल, चावल, दाल और की खरीदारी स्थानीय दुकान या फिर शहरों में अवस्थित बाजार के माध्यम से करते है। खाद्य पदार्थों के अलावा हम सौन्दर्य प्रसाधन की वस्तुओं साबुन, शैम्पू, हेयर आॅयल, इत्र, कास्मेटिक क्रीम की खरीददारी भी स्थानीय दुकान से करते है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर मिलावटी खाद्य पदार्थ जहाँ हमारे स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते है तो वही दूसरी तरफ सौन्दर्य प्रसाधन में मिलावट से हमारा रुप बिगड़ जाता है और सुन्दर दिखने के बजाय हम और कुरुप दिखने लगते है। शैम्पू एवं हेयर आॅयल में मिलावट के कारण असमय बाल झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है तो वही साबुन और कॉस्मेटिक क्रीम में मिलावट हमारे चेहरे की चमक और सुन्दरता को बर्बाद करके छोड़ देता है। खाद्य पदार्थों में मिलावट से समाज के सभी धर्मों एवं वर्गों के उपभोक्ता बुरे तरीके से प्रभावित होते है।</p>
<p style="text-align:justify;">साधारणतया: किसी खाद्य पदार्थों को तब मिलावटी पदार्थों की श्रेणी में रखा जाता है। जिसके उपभोग मात्र से मनुष्य बीमार हो जाता है या अभीष्ट पदार्थ का पोषक तत्व समाप्त होता है या पोषक तत्वों में बड़ी मात्रा में कमी आ जाती है। किसी खाद्य पदार्थ या अन्य जनोपयोगी वस्तुओं में मिलावट के मुख्य दो ही कारण होते है। पहली अवस्था में दुकानदार अधिकतम लाभ कमाने के लोभ से वस्तुओं में मिलावट करता है तो वही मिलावट करने की दूसरी अवस्था तब उत्पन्न होती है, जब बाजार में मांग की मात्रा पूर्ति से अधिक हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, दोनों अवस्था में मिलावटखोरों का एकमात्र उद्देश्य मुनाफा कमाना ही होता है। खाद्य पदार्थों में समान्यतया तीन तरह से मिलावट की जाती है। पहला, वे चीजें जिसका इस्तेमाल इंसानों के लिए खतरनाक है। दूसरा, किसी समान में उससे कम कीमत या गुणवत्ता वाले पदार्थ का मिलाया जाना। तीसरा , ऐसी चीजों को मिलाना जो पूरी तरह या आंशिक रुप से उस पदार्थ के बहुमूल्य पोषक तत्वों को कम कर दें। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत मे सबसे ज्यादा मिलावट दूध, खाने के तेल, घी, चीनी, शहद और मसालों में की जाती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि देश में बेचे जाने वाले 68.7 फीसद दूध और दूध से बने सामान में मिलावट पाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आश्चर्यजनक तथ्य है कि भारत में सरसों तेल का उत्पादन उसके उपभोग के स्तर से कम है। सरसों तेल को उपभोग स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरसों तेल में व्यापक स्तर पर आजीमोन नामक खतरनाक रसायन की मिलावट की जाती है। खतरनाक रसायन आजीमोन मिलावट युक्त सरसों के तेल के उपयोग से कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा है। मिलावटखोरी की गंभीर समस्या से भारत को रु-ब-रु कराते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि 2025 तक भारत के 87 फीसद लोगों को मिलावटी खाना खानें के कारण गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। मिलावटी खाना का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों का शिकार मनुष्यों को होना पड़ रहा है। लिवर, पेट में गड़बड़ी, कैंसर, उल्टी, दस्त, जोड़ों में दर्द, ह्दय संबंधी परेशानियाँ एवं फूड प्वाइजनिंग की जड़ मिलावट युक्त खाद्य पदार्थ ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिलावटी खाना खाने की वजह से कई बार महिलाओं का गर्भपात हो जाता है। इसके अलावा , मानव मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचता है। जो बच्चे लंबे समय तक मिलावटी खानें का सेवन करते है, उनकी सोचने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके बाद नवम्बर, 2014 में मिलावटी दूध पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने एकबार फिर राज्यों से कानून में संशोधन या नया कानून लाए जाने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत नें मिलावट खोरी के सवाल पर सरकार से पूछा था कि सरकार मिलावटखोरी के अपराध के लिए उम्रकैद की सजा का प्रावधान लाने के बारे में सोच रही है या नहीं? लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कोई जवाब देना उचित नहीं समझा।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर अगस्त, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने मिलावट को गंभीर मुद्दा बताते हुए राज्य सरकारों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 को प्रभावी तरीके से लागु करने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट के बार बार निर्देश देने के बावजूद सरकार ने मिलावटखोरी जैसे अति संवेदनशील मुद्दे को अपने एजेंडे से बाहर रखा है। होना तो यह चाहिए था कि खाद्य मानकों से छेड़छाड़ या मिलावट करने वाले या गुणवत्ता में कोताही बरतने वालों को आतंकवादियों जैसी ही सजा मिलनी चाहिए। आखिर वे लोगों की जिदंगी से खिलवाड़ करते हैं और अपने स्वार्थ को साधने के लिए खाने- पीने की वस्तुओं को जरिया बनाते है। मिलावटखोर भी अपना स्वार्थ साधने के लिए पूरे समाज को वैसे ही नुकसान पहुंचाते है, जैसे कोई आतंकवादी। अत: आतंकवादियों एवं मिलावटखोरों के सजा की प्रकृति एक समान होनी चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;">यह समय की मांग है कि हम सभी को मिलकर ईमानदारीपूर्वक मिलावटखोरी के खिलाफ जंग छेड़ना होगा। हमें दुनिया के विकसित देशों से प्रेरणा लेकर मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कानून बनाने होंगे। अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों में यह व्यवस्था है कि वहाँ अगर किसी कंपनी के सामान पर मिलावट की आंशका होती है तो उसे तब तक के लिए बैन कर दिया जाता है, जबतक कि उसे क्लीन चिट न मिल जाए। भारत में इसी तरह का कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावे हम सभी को जागरुक होकर वैसे होटल, रेस्टॉरेंट और दुकानदार का सार्वजनिक बहिष्कार करना चाहिए, जहाँ थोड़ा भी मिलावट की आशंका दिखे। जबतक मिलावटखोरी के कालाबाजार को नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक विश्व की महाशक्ति एवं विश्वगुरु बनने का हमारा सपना मृगमरीचिका के ही जैसे रहेगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>कुन्दन कुमार</strong></p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/avoid-adulteration/article-6523</link>
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                <pubDate>Wed, 31 Oct 2018 08:38:23 +0530</pubDate>
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                <title>आप दूध पी रहे हैं या जहर</title>
                                    <description><![CDATA[आज के युग में आदमी रातों-रात अमीर होने के सुनहरे सपने देखता है और फिर अनैतिक कार्यों को अंजाम देना शुरू कर देता है। आज पूरा देश जहरीले सिंथेटिक दूध की लपेट में आ गया है। शिशुओं को प्रदूषित दूध पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे भयानक बीमारियों के पनपने का खतरा बना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/you-are-drinking-milk-or-poisoning/article-1944"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/milk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज के युग में आदमी रातों-रात अमीर होने के सुनहरे सपने देखता है और फिर अनैतिक कार्यों को अंजाम देना शुरू कर देता है। आज पूरा देश जहरीले सिंथेटिक दूध की लपेट में आ गया है। शिशुओं को प्रदूषित दूध पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे भयानक बीमारियों के पनपने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है जहरीला दूध रिफाइंड तेलों, कास्टिक सोडा, यूरिया और डिटरजेंट के मिश्रण से बनाया जाता है गर्भवती महिलाएं, बूढ़े लोग, दिल की बीमारियों से पीड़ित रोगी इस दूध के सेवन से प्रभावित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में 6 करोड़ 30 लाख टन दूध का उत्पादन होता है, जिसमें 3 करोड़ 80 लाख टन संगठित क्षेत्र से आता है</p>
<p style="text-align:justify;">और शेष दूध का निर्माण अनैतिक ढंगों से किया जाता है। सिंथेटिक दूध बनाने का कारोबार हरियाणा के कुछ धोखेबाज लोगों ने आरंभ किया था लेकिन अब भारत में पूरी तरह फैल चुका है। पंजाब में उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला 40 प्रतिशत दूध ऐसा ही होता है जो प्राय: जहरीले पदार्थों से ही बनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध प्राकृतिक दूध में 86 प्रतिशत पानी होता है बाकी हिस्सा ठोस पदार्थों का होता है। भैंस के दूध में 6 प्रतिशत वसा होती है, जबकि गाय के दूध में वसा 3 प्रतिशत तक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोटीन, विटामिन और पोर्टेशियम-कैल्शियम के खनिज लवणों की मात्रा 9 प्रतिशत होती है। कच्चा दूध गर्मियोें में शीघ्र खराब हो जाता है यदि उसे उबाल न दिया जाए तो दो-तीन घंटों के भीतर-भीतर इसका प्रयोग करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंथेटिक दूध बिल्कुल वास्तविक दूध की तरह दिखाई देता है, लेकिन इसका स्वाद अलग सा होता है यह पौष्टिक होने की बजाय हानिकारक होता है। कपड़े धोने वाले डिटरजेंट का प्रयोग इमल्सीफाई करने में किया जाता है। इसके विलयन को पानी में मिलाकर झाग पैदा की जाती है और पूरा घोल दूध जैसा बना दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि सिंथेटिक दूध तैयार करने में 2 रुपये प्रति लीटर खर्च आता है। सिंथेटिक दूध निर्माण में सस्ते खाद्य तेल का प्रयोग किया जाता है इसमें यूरिया, चीनी, असली दूध के प्रोटीन, विटामिन, और खनिज लवण का स्थान लेते हैं और तेल वसा का स्थान लेता है। इसे कई बार प्राकृतिक दूध के साथ मिलाकर ऊंचे रेटों पर बेचा जाता है। विशेषज्ञों की राय है कि दूध के वसा और तेल के वसा के अंतर को विशेष उपकरणों के द्वारा ही पता लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिलावट को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है जागरूकता, न्याय की गुहार, उसके लिए दबाव और संघर्ष ही मिलावट के खिलाफ सबसे बड़ी गारंटी होते है। दूध की गुणवत्ता चैक करने के लिए पंजाब में केवल दो लैबारेट्री है जब कि शीघ्र रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए जिला हैडक्वार्टर पर लैब स्थापित की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग में व्यापक भ्रष्टाचार होने के कारण पंजाब में मिलावट का सिलसिला जारी है। दूध के सैंपल के पश्चात रिपोर्ट को लगभग एक महीना लग जाता है। अत: कानूनी कार्रवाई में बहुत देरी लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत को यूरोपीय देशों का अनुसरण करते हुए फूड सैफ्टी कमीशन प्रणाली को अपनाना चाहिए। ऐसा करने से देश में मिलावट को रोकने में सहायता मिलेगी। लालची लोग ज्यादा दूध प्राप्त करने के लिए गाय-भैंसों को आक्सीटोक्सिन के टीके लगाते हैं, यह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्वास्थ्य विभाग पर दृष्टि डाली जाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्येक जिले में तैनात जिला अफसर और फूड इंस्पेक्टर मिलकर दोषियों, हलवाइयों और दुकानदारों से महीना वसूलते हैं और उसके एवज में मिलावटी दूध और मिलावटी वस्तुएं बेचने की खुली छूट दे देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी का दूध का सैम्पल भर भी लिया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों/ कर्मचारियों के लैब में लिंक होने के कारण सैम्पल मोटी रकम देकर पास करा लिए जाते हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो देश के भविष्य का क्या होगा। अत: हमारी सरकारों को इस मिलावटखोरी के धंधे की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुभाष आनंद</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 23:20:25 +0530</pubDate>
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