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                <title>Drinking - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Drinking RSS Feed</description>
                
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                <title>Jaljeera: जलजीरे की ये है सादगी, एक घूंट में भर देता है ताजगी, जानें, चमत्कारिक गुण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। गर्मी अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगी है, शीतल पेय (Jaljeera) पदार्थों का सेवन करने का समय आ गया है। इस सीजन में किसी को लस्सी तो किसी को छाछ तो किसी को शर्बत तो किसी को दही खाना-पीना पसंद आता है। गर्मियों में लोगों को ठंडा-ठंडा जलजीरा पानी पीना भी खूब भाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/health-benefits-of-drinking-jaljeera/article-46148"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/jaljeera.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> गर्मी अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगी है, शीतल पेय (Jaljeera) पदार्थों का सेवन करने का समय आ गया है। इस सीजन में किसी को लस्सी तो किसी को छाछ तो किसी को शर्बत तो किसी को दही खाना-पीना पसंद आता है। गर्मियों में लोगों को ठंडा-ठंडा जलजीरा पानी पीना भी खूब भाता है। जलजीरा स्वाद में थोड़ा खट्टा और पेट को शीतलता प्रदान करने वाला होता है। इसे धनिया, पुदीना, जीरा सहित अन्य मसालों का उपयोग करके बनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के दिनों में जब बाजार घूम रहे हो, सिर पर (Jaljeera) पसीना हो, पैर थक गए हैं, तब जलजीरा पानी का बस एक घूंट आपको ताजगी से भर देता है। बता दें कि जलजीरा पानी न सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि खाने पचाने और पेट को ठंडा रखने का भी काम करता है। इसके अलावा, जलजीरा के पानी से गैस में भी राहत मिलती है। कुछ लोगों के लिए यह डिटॉक्सिफिकेशन और एसिडिटी को कम करने की प्रक्रिया में भी मदद करता है। न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर जलजीरा खाने के फायदे बताते हुए एक पोस्ट शेयर की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य लाभ :- | Jaljeera</h3>
<p style="text-align:justify;">1) यह पाचन एंजाइमों को रिलीज करने में मदद करता है।<br />
2) जलजीरा न सिर्फ प्यास बुझाता है बल्कि आपको ठंडा और हाइड्रेटेड भी रखता है। प्रचंड गर्मी में इसका स्वाद अमृत जैसा लगता है।<br />
3) यही नहीं जीरा और पुदीना का कॉम्बो आयरन के स्तर को बढ़ाता है, जो इसे एनीमिया का सुपर हीरो बनाता है, एक ऐसा पेय जो हमें ऊर्जा देता है और हमारी कोशिकाओं में आॅक्सीजन बढ़ाता है।<br />
नोट: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर से सलाह करें। सच कहूँ इस जानकारी के लिए जिÞम्मेदार नहीं होगा।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Apr 2023 12:39:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान में पानी ने रूलाया और गर्मी ने झुलसाया</title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के बाद से ही मरुस्थलीय क्षेत्र राजस्थान पेयजल के संकट से जूझता रहा है। पहले लोग कुंए, तालाब और बावड़ियों के पानी पर निर्भर थे। आबादी बढ़ने के साथ पानी की मांग भी बढ़ने लगी। जलप्रदाय की अनेक योजनाएं बनी मगर पानी का संकट कम होने के बजाय बढ़ता ही गया। परम्परागत श्रोत सूख […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/rajasthan-drinking-water-crisis/article-8504"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/rajasthan-drinking-water-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजादी के बाद से ही मरुस्थलीय क्षेत्र राजस्थान पेयजल के संकट से जूझता रहा है। पहले लोग कुंए, तालाब और बावड़ियों के पानी पर निर्भर थे। आबादी बढ़ने के साथ पानी की मांग भी बढ़ने लगी। जलप्रदाय की अनेक योजनाएं बनी मगर पानी का संकट कम होने के बजाय बढ़ता ही गया। परम्परागत श्रोत सूख गए और जल प्रदाय योजनाओं के नए केंद्र बनने शुरू हुए। हर साल करोड़ों अरबों की राशि इन कार्यों पर खर्च होने के बाद भी प्रदेश में पेयजल की किल्लत से हम जूझ रहे हैं। जल ही जीवन है। हम भोजन के बिना एक महीने से ज्यादा जीवित रह सकते हैं, लेकिन जल के बिना एक सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह सकते।</p>
<p style="text-align:justify;">जल की उपलब्धता को लेकर वर्तमान में भारत ही नहीं अपितु समूचा विश्व चिन्तित है। मानव का अस्तित्व जल पर निर्भर करता है। पृथ्वी पर कुल जल का अढ़ाई प्रतिशत भाग ही पीने के योग्य है। इनमें से 89 प्रतिशत पानी कृषि कार्यों एवं 6 प्रतिशत पानी उद्योग कार्यों पर खर्च हो जाता है। शेष 5 प्रतिशत पानी ही पेयजल पर खर्च होता है। यही जल हमारी जिन्दगानी को संवारता है। एक रपट में बताया गया है कि पृथ्वी के जलमण्डल का 97.5 प्रतिशत भाग समुद्रों में खारे जल के रूप में है और केवल 2.4 प्रतिशत ही मीठा पानी है। राजस्थान में भीषण गर्मी और आंधी तूफान ने आमजन के होश उड़ा दिए हैं। गर्मी शुरू होते ही सूर्य की किरणें आग उगलने लगी हैं। धरती का वातावरण गर्म हो उठता है। हवाएं भी गर्म होकर अपना रौद्र रूप दिखाने लगती हैं। बरसात कम होने से गर्मी जल्दी आ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान में गर्मियों में स्थानीय चक्रवात के कारण जो धूल भरे बवंडर बनते हैं उन्हें भभुल्या कहा जाता है। प्रदेश के कई जिले इस समय भभुल्या की चपेट में है। गर्मी और पानी का चोली दामन का साथ है। गर्मी अपने साथ पानी संकट भी लेकर आयी है। दोनों आपदाओं ने मिलकर लोगों का जीना हराम कर दिया है। जब तक प्रदेश में मानसून मेहरबान नहीं होंगे तब तक आम आदमी की मुश्किलें कम नहीं होंगी। राजस्थान में गत मानसून में औसत से कम बारिश ने प्रदेश में पेयजल संकट की स्थिति खड़ी कर दी है। सबसे बुरी स्थिति राजधानी जयपुर की दिख रही है। यहा जलापूर्ति के मुख्य स्रोत बीसलपुर बांध से पानी की सप्लाई बंद किए जाने की तैयारी की जा रही है, क्योंकि इस बार बांध में बहुत कम पानी आ पाया है। हालात से निपटने के लिए विभाग ने कार्ययोजना भी तैयार की है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों में बोरिंग खोदे जा रहे हंै ताकि किसी भी स्थिति का मुकाबला किया जा सके। गर्मी के रौद्र रूप धारण करते ही प्रदेश में एक बार फिर पेयजल संकट खड़ा हो गया है। एक तो भीषण गर्मी ऊपर से पानी की बेरहम मार ने हमारे सामने दुगुना संकट उपस्थित कर दिया है। मानव के साथ पशु धन भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति शहरों से अधिक गंभीर है जहाँ कई कई किलोमीटर दूर से पानी ढ़ोया जा रहा है। नीति आयोग की मानें तो राजस्थान में महज 44 फीसदी गांवों में राज्य सरकार पेयजल की आपूर्ति कर पा रही है। आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान पेयजल आपूर्ति स्तर के मामले में पीछे है और सिर्फ 44 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों में ही पूरी तरह से जलापूर्ति हो रही है। राजस्थान में मानसून के दौरान औसतन 508 मिमी बारिश होती है, लेकिन पिछली बार 497 मिमी बारिश दर्ज की गई यानी औसत से कम बारिश हुई। राज्य के सात में से पांच सम्भाग जयपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर और जोधपुर में सामान्य से कम बारिश हुई। जोधपुर में सामान्य के मुकाबले आधी बारिश भी नहीं हुई। इसी के चलते बांधों और तालाबों में भी पानी की आवक कम हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">बारिश कम होने के कारण राजस्थान के कुल 831 छोटे बडेÞ बांधों और तालाबों में से सिर्फ 123 ही पूरे भर पाए है, जबकि 385 आंशिक भरे हुए,वहीं 323 पूरी तरह खाली हैं। इस बार पेयजल संकट के मामले मे सबसे बुरी स्थिति जयपुर की होती दिख रही है। जयपुर राजस्थान की राजधानी है जहाँ प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न स्थानों से हजारों लोग मजदूरी सहित विभिन्न कामों से जयपुर आते है। जयपुर महानगर की 40 लाख से ज्यादा आबादी के लिए पेयजल का एकमात्र स्रोत टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बांध है। इस बांध ने कम भराई के कारण इस बार धोखा दे दिया है जिसका खामियाजा हमें भोगना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी में पारा अभी से 45 डिग्री पार हो गया है। पानी की अधिक जरुरत महसूस की जा रही है कूलरों को भी पानी चाहिए ,पानी कहाँ से आएगा यह यक्ष प्रश्न हमारे सामने आ खड़ा हुआ है जिसका समाधान फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है। जब तक मानसून की बारिश नहीं होगी तब तक गर्मी के साथ पानी भी हमारी जिंदगानी को कष्ट देता रहेगा।सरकार को जनता में जागरूकता लाने के लिए विशेष प्रबन्ध और उपाय करने होंगे। आम आदमी को जल संरक्षण एवं समझाइश के माध्यम से पानी की बचत का सन्देश देना होगा। वर्षा की अनियमितता और भूजल दोहन के कारण भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि हम जल के महत्व को समझें और एक-एक बूंद पानी का संरक्षण करें तभी लोगों की प्यास बुझाई जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Apr 2019 20:11:37 +0530</pubDate>
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                <title>राजनीति में पिस रही गरीब जनता</title>
                                    <description><![CDATA[गरीबी एक प्रमुख वैश्विक समस्या है जिससे अधिकतम देश जूझ रहे हैं। साधारण शब्दों में अगर कहें तो गरीबी का मतलब है गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीना । किसी भी स्वतंत्र देश के लिए गरीबी एक बहुत ही शर्मनाक स्तिथि है। संयुक्त राष्ट्र संघ के मानव विकास सूचकांक 2011 के अनुसार ‘रिपब्लिक आॅफ कांगो’ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/poor-people-drinking-in-politics/article-5996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/pepole.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गरीबी एक प्रमुख वैश्विक समस्या है जिससे अधिकतम देश जूझ रहे हैं। साधारण शब्दों में अगर कहें तो गरीबी का मतलब है गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीना । किसी भी स्वतंत्र देश के लिए गरीबी एक बहुत ही शर्मनाक स्तिथि है। संयुक्त राष्ट्र संघ के मानव विकास सूचकांक 2011 के अनुसार ‘रिपब्लिक आॅफ कांगो’ विश्व का सबसे गरीब देश है। अगर हम भारत के परिपेक्ष्य में हम गरीबी को देखें तो पाएंगे की ब्रिटिश औपनिवेशिक काल से ही गरीबी हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है। 19वीं सदी के उत्तरार्ध और 20वीं सदी की शुरूआत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत में गरीबी तेज हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">1920 में भारत में गरीबी अपने चरम पे थी इस दौरान लाखों लोगों की मौत अकाल से हुई।1947 में आजादी के बाद अपनी समुचित नीतियों के कारण भारत सरकार ने इन अकालों को खत्म किया। भारत सरकार की 2012 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की 22 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा के नीचे है। संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल (एमडीजी) कार्यक्रम के अनुसार 2011-12 के दौरान भारत की 22.1 प्रतिशत जनता गरीबी से त्रस्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन के विभिन्न प्रयासों को देखें तो पाएंगे की गरीबी खत्म करने के लिए सभी सरकारों ने अपने स्तर से कार्यक्रम चलाये हैं और उनसे गरीबी खत्म करने में मदद भी मिली है। गरीबी में रिकॉर्ड गिरावट के मुख्य कारणों में से एक है। 1991 से भारत की तेजी से आर्थिक विकास दर और उद्योगों का उदारीकरण जिससे लोगों को रोजगार मिला और गरीबी में गिरावट आई। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के भी सफल कार्यान्वयन से गरीबी खत्म करने में मदद मिली है। 2012 के एक रिपोर्ट से पता चला है की मनरेगा से ग्रामीण गरीबी को कम करने में मदद मिली है लेकिन मनरेगा से समग्र गरीबी खत्म नहीं की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम जातिगत आधार पे गरीबी के आकड़ों को देखें तो पाएंगे की अनुसूचित जाती में 65.8 % लोग , अनुसूचित जनजाति में 81.4 % लोग , पिछड़े वर्ग में 58.3 % लोग और सवर्णों में 33.3 % लोग गरीब हैं। अगर हम भारत में गरीबी के घटते आंकड़ों पे नजर डालें तो पाएंगे की ब्रिटिशों के प्रस्थान के समय भारत में गरीबी दर 70 प्रतिशत थी लेकिन एक नए रिपोर्ट के अनुसार अब भारत की गरीबी दर 22 प्रतिशत तक घटी है। एक ताजा सरकारी रिपोर्ट से ये पता चला है की भारत में प्रति मिनट 44 लोग गरीबी रेखा से बाहर आ रहे हैं यानी प्रति मिनट 44 लोग कम गरीब हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अगर हम भारत के परिपेक्ष्य में गरीबी के मुख्य कारणों को देखें तो पाएंगे की भारत में गरीबी का सबसे बड़ा कारण जनसंख्या विस्फोट है, हालांकि बेरोजगारी भी गरीबी का एक मुख्य कारण है लेकिन बेरोजगारी और जनसंख्या का चोली दामन का साथ है। जब तक हम जनसंख्या की वृद्धि दर कम नहीं करेंगे तब तक ना हमें पूर्ण रूप से गरीबी से निजात मिलेगी ना ही बेरोजगारी से। देश में गरीबी खत्म करने के लिए गरीबों की ताकत को बढ़ाना होगा। यह ताकत सिर्फ दो रुपए किलो अनाज देने से नहीं आएगी, बल्कि उन्हें कानूनी संरक्षण देने और योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी वास्तविक भागीदारी कायम करने से ही बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीबी से निजात पाने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बाधा भ्रष्टाचार भी है । सच तो ये है की केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन हेतु चलायी गयी लोक कल्याणकारी योजनाओं को बिचौलिए धरातल पर नहीं उतरने देते हैं। वे गरीबों के हक का अधिकार छीन कर दूसरे लोगों को देते हैं जिनको ये जरुरत नहीं है। इन भ्रष्टाचारों में सरकारी अधिकारियों का भी हाथ रहता है। वे भी इन बिचौलियों के साथ मिले रहते हैं ।बालश्रम भी गरीबी का मुख्य कारण है. देश में एक दो नहीं, लाखों बच्चे ऐसे हैं जो उचित व्यवस्था के अभाव में मानसिक शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि देश में बाल अधिकारों के रक्षा से जुड़े कानून नहीं है लेकिन वे बाल अधिकारों को सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं। हमें सच्चाई को समझना होगा कि गरीबी के कारण बालश्रम नहीं बढ़ता, बल्कि बालश्रम के कारण गरीबी बढ़ती है। आज जरुरत इस बात की है कि बुनियादी ढांचे को इस प्रकार बनाया जाए किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को इस तरह के व्यवसायों में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए जिसके लिए जरूरी संसाधन आस-पास के इलाके में ही उपलब्ध हों। सरकार को किसी भौगोलिक क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की पड़ताल करने के पश्चात प्राथमिक उद्योगों में निम्न आय वर्ग के लोगों को नियोजित करना शुरू कर देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;">प्रणीत कुमार</p>
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<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 19 Sep 2018 08:32:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नहर में पानी, लेकिन शाहपुर ग्रामीणों के सूखे हलक</title>
                                    <description><![CDATA[वाटर सप्लाई न होने निजी टैंकरों के भरोसे हैं ग्रामीण | Water हिसार (सच कहूँ न्यूज)। शहर के नजदीकी गांव शाहपुर में पिछले लंबे समय से पेयजल (Water) समस्या बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि गांव के बुस्टिंग स्टेशन में पानी नहीं है, बल्कि नहर में पानी आने के बाद से बुस्टिंग स्टेशन के टैंक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/drinking-water-problem/article-4666"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/water.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">वाटर सप्लाई न होने निजी टैंकरों के भरोसे हैं ग्रामीण | Water</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शहर के नजदीकी गांव शाहपुर में पिछले लंबे समय से पेयजल <strong>(Water)</strong> समस्या बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि गांव के बुस्टिंग स्टेशन में पानी नहीं है, बल्कि नहर में पानी आने के बाद से बुस्टिंग स्टेशन के टैंक से भरे हुए हैं। फि र भी गांव के विभिन्न इलाकों में पेयजल सप्लाई सुचारू नहीं की जा रही है। पेयजल की इस किल्लत पर शहीद भगत सिंह युवा संगठन शाहपुर ने भारी रोष व्यक्त किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संगठन के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह बैनीवाल ने बताया कि गांव के बुस्टिंग स्टेशन में बालसमंद ब्रांच से जुड़ी कबीर माइनर से पानी डाला जाता है। नहर में पानी आए हुए तीन दिन से अधिक समय हो चुका है। ऐसे में बुस्टिंग स्टेशन के टैंकों में भी पानी पहुंच गया है। लेकिन बुस्टिंग स्टेशन के कर्मचारियों की मनमानी के चलते गांव के विभिन्न इलाकों में पेयजल सप्लाई सुचारू तरीके से नहीं की जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष तौर पर हरिजन मोहल्ला व उंची जगह पर पानी नहीं पहुंच रहा है। जिसके चलते महिलाओं को मजबूरी वश बुस्टिंग स्टेशन से मटकों में तथा ग्रामीणों को बैलगाड़ी पर पानी ढोना पड़ रहा है। इसके अलावा जिन घरों में साधन नहीं है, वे निजी टैंकरों से पानी मंगवा रहे हंै। जब ग्रामीण बुस्टिंग स्टेशन के कर्मचारियों से बात करना चाहते हैं, तो जलघर पर कोई कर्मचारी मिलता ही नहीं।</p>
<h2 style="text-align:center;">समस्या का समाधान हो नहीं तो जलघर पर जड़ेंगे ताला | Water</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">गांव में पशुओं के लिए बने तालाब का भी यही हाल है।</li>
<li style="text-align:justify;">पिछले लंबे समय से तालाब में नहरी पानी नहीं डाला गया है,</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके चलते तालाब में काले रंग की गाद जमी हुई है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस दूषित पानी को पीकर पशु भी बीमारी के शिकार हो सकते हंै,</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि गांव की गलियों का गंदा पानी भी इसी तालाब में जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">लोगों ने प्रशासन से मांग की कि इस तालाब में भी नहरी पानी डलवाया जाए</li>
<li style="text-align:justify;">तथा जलघर के कर्मचारियों को भी गांव में पानी की सुचारू सप्लाई के लिए सख्त हिदायतें दी जाए।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/drinking-water-problem/article-4666</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Jul 2018 03:32:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरसा में पांच माह में भरे गए पेयजल के 90 सैंपल, 37 पास तो 53 फेल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के 10 से 12 इलाकों में पेयजल की स्थिति खराब मलेरिया रोधी माह के तहत मलेरिया के तीन केस मिले सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पांच माह के दौरान शहर के अलग-अलग वार्डों से पेयजल के 90 सैंपल भरे हैं। जिनमें से मात्र 37 सैंपल ही पास, जबकि 53 सैंपल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/90-samples-of-drinking-water-filled-in-five-months-in-sarasara-37-passed-53/article-4132"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pani-sirsa.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">शहर के 10 से 12 इलाकों में पेयजल की स्थिति खराब</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li>मलेरिया रोधी माह के तहत मलेरिया के तीन केस मिले</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)।</strong> स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पांच माह के दौरान शहर के अलग-अलग वार्डों से पेयजल के 90 सैंपल भरे हैं। जिनमें से मात्र 37 सैंपल ही पास, जबकि 53 सैंपल फेल पाए गए हैं। शहर के वार्डों से भरे गए कुल 90 सैंपलों में से डेढ़ गुणा सैंपल फेल पाए गए हैं, जोकि चिंतनीय विषय है। साल-दर-साल जनसंख्या वृद्धि के चलते शहर के वार्डों में पेयजल की स्थिति गंभीर हो रही है। डॉ. दीप ने बताया कि पिछले पांच माह के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के सभी वार्डों से पेयजल के सैंपल भरे हैं। सैंपलिंग की जांच के दौरान पाया गया है कि शहर के 10/12 क्षेत्र ऐसे हैं। जहां पेयजल पीने योग्य तो है, लेकिन उसमें बैक्टीरिया की मात्रा अधिक है। जोकि बीमारियों को दावत देती हैं। जिन इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब हैं, उनमें रानियां रोड स्थित जंडी वाली गली, भाखड़ा काटॅन मील, चत्तरगढ़पट्टी, सिकलीगर मोहल्ला, इंद्रपुरी मोहल्ला, गांधी कॉलोनी, संजय कॉलोनी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग भी इन क्षेत्रों में नजर बनाए हुए है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मलेरिया रोधी माह के रूप में मनाया जा रहा है जून माह</h3>
<p style="text-align:justify;">मलेरिया अधिकारी डॉ. दीप गगनेजा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जून माह को मलेरिया रोधी माह के रूप में मनाया जा रहा है। बरसाती मौसम को देखते हुए मलेरिया से निपटने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया गया है। लोगों को घर-घर जाकर टीम सदस्यों की ओर से जागरूक किया जा रहा है। डा. दीप ने कहा कि इस अभियान में आमजन को भी विभाग का सहयोग करना होगा। ताकि समय रहते समस्या से निपटा जा सके। लोगों से आह्वान किया जा रहा है कि अपने घरों के आसपास पानी एकत्रित न होने दें, कूलरों में सप्ताह में पानी एक बार जरूर बदलें, छत पर टायर व अन्य ऐसा सामान न छोड़ें, जिनमें पानी ठहरे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सभी वार्डों में होता है नहरों का पानी सप्लाई, जांच का काम स्वास्थ्य विभाग का है</h3>
<p style="text-align:justify;">पब्लिक हैल्थ विभाग की ओर से शहर के सभी वार्डों में नहरी पानी की सप्लाई की जाती है। कई वार्डों में आबादी अधिक होने के कारण खपत ज्यादा है। इसलिए वार्डों में स्थापित ट्यूबवैलों का पानी सप्लाई कर खपत पूरी की जाती है। पानी की जांच का कार्य स्वास्थ्य विभाग का है।<br />
<strong>-एसडीओ आंचल जैन, पब्लिक हैल्थ सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 09:11:30 +0530</pubDate>
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                <title>भिवानी के लोग पी रहे गंदा पानी, 67 में से 31 सैंपल फेल</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)। कहावत है बिन पानी सब सून, बात बिल्कुल सही भी है। अगर पानी नहीं होगा तो लोगों का जीवन संभव नहीं है। भिवानी ही नहीं, पूरा दक्षिण हरियाणा इन दिनों पानी की भारी कमी से जूझ रहा है, लेकिन खास बात यह है कि जहां पानी आ रहा है, तो वो भी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhiwanis-people-drinking-dirty-water-31-out-of-67-samples-fail/article-4031"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pani-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)।</strong> कहावत है बिन पानी सब सून, बात बिल्कुल सही भी है। अगर पानी नहीं होगा तो लोगों का जीवन संभव नहीं है। भिवानी ही नहीं, पूरा दक्षिण हरियाणा इन दिनों पानी की भारी कमी से जूझ रहा है, लेकिन खास बात यह है कि जहां पानी आ रहा है, तो वो भी गंदा जिसकी वजह से लोग बीमार पड़ रहे हंै। चिकित्सकों ने भी पानी के सैंपल लिए तो हैरान रह गए, क्योंकि 67 सैंपलो में से 31 सैंपल फेल हो गए यानि की भिवानी का पानी पीने लायक ही नहीं है। सीएमओ का तो यह तक कहना है कि पानी के लिए उन्होंने अलग से वार्ड की स्थापना भी कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भिवानी में इन दिनों पानी की कमी है जिस कारण पूरे शहर में हाहाकार मचा है। लोग पानी की मांग को लेकर जगह जगह-जाम लगा रहे हैं यहां तक की पानी खरीद कर भी पी रहे हंै। पीएं भी क्यों नही बिना पानी के जीवन भी संभव नहीं है। हद की बात तो यह है कि इन दिनों पानी की कमी से तो शहर जूझ ही रहा है, वहीं जो थोड़ा बहुत पानी राशनिंग के बाद आ रहा है वह पानी भी खराब आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी खराब आने के कारण सरकारी व प्राईवेट अस्पतालों में इन दिनों उल्टी व दस्त के मरीजों की संख्या बेशुमार हो रहे हैं। भिवानी सामान्य अस्पताल के फीजिशयन डॉ. रघुबीर शांडिल्य का कहना है कि इन दिनों पानी व गर्मी अत्याधिक  होने की वजह से लोगों को उल्टी व दस्त की समस्या अधिक हो रही है। उन्होंने लोगों को सलाह भी दी है कि वे 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक जरूरत ना हो तो घर में ही रहे। बाहर तापमान अत्यधिक होने के कारण उन्हें कई प्रकार की बीमारियों से जूझना पड़ सकता है। उन्होंने सलाह यह भी दी है कि लोग पानी घर में उबाल कर ठंडा करके ही पिएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">31 कालोनीवासियों को पीने लायक नहीं मिल रहा पानी</h3>
<p style="text-align:justify;">चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल के सीएमओ डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि पानी के कारण अक्सर इस समय बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टीमें लगी हुई जो लोगों को ना केवल सलाह दे रही हैं, बल्कि सैंपल भी चैंक कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मई माह में उनकी टीम ने जो सैंपल लिए वे भयावह थे, क्योंकि 67 सैंपल लिए गए जो कि ना केवल शहर की, बल्कि आस-पास के गांव के भी है, जिसमें 31 सैंपल फेल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यही है कि 31 स्थानों का पानी तो पीने लायक ही नहीं है जिसकी रिपोर्ट उन्होंंने डीसी व संबंधित विभाग को सौंप दी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jun 2018 10:44:31 +0530</pubDate>
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                <title>आप दूध पी रहे हैं या जहर</title>
                                    <description><![CDATA[आज के युग में आदमी रातों-रात अमीर होने के सुनहरे सपने देखता है और फिर अनैतिक कार्यों को अंजाम देना शुरू कर देता है। आज पूरा देश जहरीले सिंथेटिक दूध की लपेट में आ गया है। शिशुओं को प्रदूषित दूध पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे भयानक बीमारियों के पनपने का खतरा बना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/you-are-drinking-milk-or-poisoning/article-1944"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/milk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज के युग में आदमी रातों-रात अमीर होने के सुनहरे सपने देखता है और फिर अनैतिक कार्यों को अंजाम देना शुरू कर देता है। आज पूरा देश जहरीले सिंथेटिक दूध की लपेट में आ गया है। शिशुओं को प्रदूषित दूध पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे भयानक बीमारियों के पनपने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है जहरीला दूध रिफाइंड तेलों, कास्टिक सोडा, यूरिया और डिटरजेंट के मिश्रण से बनाया जाता है गर्भवती महिलाएं, बूढ़े लोग, दिल की बीमारियों से पीड़ित रोगी इस दूध के सेवन से प्रभावित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में 6 करोड़ 30 लाख टन दूध का उत्पादन होता है, जिसमें 3 करोड़ 80 लाख टन संगठित क्षेत्र से आता है</p>
<p style="text-align:justify;">और शेष दूध का निर्माण अनैतिक ढंगों से किया जाता है। सिंथेटिक दूध बनाने का कारोबार हरियाणा के कुछ धोखेबाज लोगों ने आरंभ किया था लेकिन अब भारत में पूरी तरह फैल चुका है। पंजाब में उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला 40 प्रतिशत दूध ऐसा ही होता है जो प्राय: जहरीले पदार्थों से ही बनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध प्राकृतिक दूध में 86 प्रतिशत पानी होता है बाकी हिस्सा ठोस पदार्थों का होता है। भैंस के दूध में 6 प्रतिशत वसा होती है, जबकि गाय के दूध में वसा 3 प्रतिशत तक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोटीन, विटामिन और पोर्टेशियम-कैल्शियम के खनिज लवणों की मात्रा 9 प्रतिशत होती है। कच्चा दूध गर्मियोें में शीघ्र खराब हो जाता है यदि उसे उबाल न दिया जाए तो दो-तीन घंटों के भीतर-भीतर इसका प्रयोग करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंथेटिक दूध बिल्कुल वास्तविक दूध की तरह दिखाई देता है, लेकिन इसका स्वाद अलग सा होता है यह पौष्टिक होने की बजाय हानिकारक होता है। कपड़े धोने वाले डिटरजेंट का प्रयोग इमल्सीफाई करने में किया जाता है। इसके विलयन को पानी में मिलाकर झाग पैदा की जाती है और पूरा घोल दूध जैसा बना दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि सिंथेटिक दूध तैयार करने में 2 रुपये प्रति लीटर खर्च आता है। सिंथेटिक दूध निर्माण में सस्ते खाद्य तेल का प्रयोग किया जाता है इसमें यूरिया, चीनी, असली दूध के प्रोटीन, विटामिन, और खनिज लवण का स्थान लेते हैं और तेल वसा का स्थान लेता है। इसे कई बार प्राकृतिक दूध के साथ मिलाकर ऊंचे रेटों पर बेचा जाता है। विशेषज्ञों की राय है कि दूध के वसा और तेल के वसा के अंतर को विशेष उपकरणों के द्वारा ही पता लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिलावट को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है जागरूकता, न्याय की गुहार, उसके लिए दबाव और संघर्ष ही मिलावट के खिलाफ सबसे बड़ी गारंटी होते है। दूध की गुणवत्ता चैक करने के लिए पंजाब में केवल दो लैबारेट्री है जब कि शीघ्र रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए जिला हैडक्वार्टर पर लैब स्थापित की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग में व्यापक भ्रष्टाचार होने के कारण पंजाब में मिलावट का सिलसिला जारी है। दूध के सैंपल के पश्चात रिपोर्ट को लगभग एक महीना लग जाता है। अत: कानूनी कार्रवाई में बहुत देरी लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत को यूरोपीय देशों का अनुसरण करते हुए फूड सैफ्टी कमीशन प्रणाली को अपनाना चाहिए। ऐसा करने से देश में मिलावट को रोकने में सहायता मिलेगी। लालची लोग ज्यादा दूध प्राप्त करने के लिए गाय-भैंसों को आक्सीटोक्सिन के टीके लगाते हैं, यह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्वास्थ्य विभाग पर दृष्टि डाली जाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्येक जिले में तैनात जिला अफसर और फूड इंस्पेक्टर मिलकर दोषियों, हलवाइयों और दुकानदारों से महीना वसूलते हैं और उसके एवज में मिलावटी दूध और मिलावटी वस्तुएं बेचने की खुली छूट दे देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी का दूध का सैम्पल भर भी लिया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों/ कर्मचारियों के लैब में लिंक होने के कारण सैम्पल मोटी रकम देकर पास करा लिए जाते हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो देश के भविष्य का क्या होगा। अत: हमारी सरकारों को इस मिलावटखोरी के धंधे की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुभाष आनंद</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 23:20:25 +0530</pubDate>
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