<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/god-word/tag-3702" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>God Word - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/3702/rss</link>
                <description>God Word RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आत्मा को शक्ति देता है राम-नाम</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, एक ऐसी औषधि है और जो इंसान इसे ले लेता है तो यह दवा चहूं तरफ असर करती है। आंतरिक तौर पर आत्मा को वह शक्ति, वह नशा देती है जिसके द्वारा आत्मा उस भगवान, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, एक ऐसी औषधि है और जो इंसान इसे ले लेता है तो यह दवा चहूं तरफ असर करती है। आंतरिक तौर पर आत्मा को वह शक्ति, वह नशा देती है जिसके द्वारा आत्मा उस भगवान, उस राम के दर्शन कर सकती है और बाहरी तौर पर ऐसी तंदुरुस्ती, ताजगी देती है जिससे इंसान को कोई भी गम, चिंता, टेंशन नहीं सताती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां हैं, लेकिन नाम जपना इस कलियुग में मुश्किल लगता है। लोग और काम-धंधा कर लेते हैं, लेकिन जब राम-नाम की बात आती है तो कन्नी खिसकाते नजर आते हैं। मालिक के नाम से पतझड़ में भी बहार आ जाती है। मालिक के नाम से मुरझाई कलियां खिल जाती हंै। मालिक के नाम से सदियों से बिछड़ी आत्मा मालिक से मिलने के काबिल बन जाती है। मालिक का नाम सच्चे दिल से, तड़पसे लें तो इंसान जरूर प्रभु की कृपा-दृष्टि के काबिल बनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर रहमो-करम बरसता है और एक दिन वह सब पाप-गुनाहों से हल्का हो जाता है। आप जी फरमाते हैं कि जीव नाम ले लेता है तो दूसरी तरह नहीं लेता यानि जाप नहीं करता, सुमिरन नहीं करता। नाम लेकर सुमिरन करें, भक्ति-इबादत करें तो कोई गम, गम नहीं रहता कोई दु:ख, दु:ख नहीं रहता पर सुमिरन करें तो। सुमिरन करें ही न, भक्ति करें ही न तो कहां से अंत:करण में शांति आएगी, कहां से दिलो-दिमाग में खुशी आएगी। इंसान एक बोझ की तरह जीवन गुजारता रहता है। अगर आप चाहते हैं कि प्रभु की कृपा-दृष्टि हो, अगर आप चाहते हैं कि आपके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं दूर हो जाएं तो आप सच्ची तड़पसे, सच्ची लगन से चलते, बैठते, लेटके, काम-धंधा करते हुए ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को याद किया करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-gives-the-power-to-the-soul-saint-dr-msg/article-3503</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-gives-the-power-to-the-soul-saint-dr-msg/article-3503</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Nov 2017 04:05:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्संग में आने से भाग्यशाली बनते हैं जीव: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-change-the-life-saint-dr-msg/article-1966"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा कितना बड़ा है, इसके बारे में कुछ भी लिख-बोलकर नहीं बताया जा सकता,</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन यह हकीकत है कि जीव सत्संग सुनकर अमल करे तो जीव अपने भयानक से भयानक पाप-कर्मों से बच जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग सुनकर अमल करने का मतलब है कि आप नाम जपो, मालिक की औलाद से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो, कभी भी किसी का दिल न दुखाओ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय’</h2>
<p style="text-align:justify;">अहंकारवश, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, मन-मायावश जब जीव किसी का दिल दुखाता है तो उसकी भक्ति कटती है, वह खुद दुखी होता है और मालिक से दूर हो जाता है। इसलिए कभी किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। जब इतने बड़े महापुरुष, संत, पीर-फकीरों ने यह लिख दिया कि ‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन ऐसा कर मानेया, मीत हमारा सोय।।’ कहने का मतलब है कि कहने को कोई भी कह देगा कि मैं ये हूं, वो हूं लेकिन जो लोग ऐसा मान लेते हैं कि मैं दूसरों को बुरा क्यों कहूं और वो वाकई किसी को बुरा नहीं कहता, बल्कि अपने आपको ही बुरा कहता है तो जो ऐसा कहकर मान लेते हैं, वो मालिक के मीत, प्यारे, अति प्यारे हो जाया करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जो सत्संग सुनकर अमल करते हैं, वह खुशियों के हकदार बनते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में जीव को समझ आती है, लेकिन यह जरूरी है कि आदमी सुनकर अमल करे, तभी खुशियां हासिल होती हैं। सुनना अच्छी बात है। जैसे पत्थर गर्मी में रहते हैं तो किसी का पांव सड़ा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर थोड़ा पानी गिरता रहे तो वो ठंडे रहते हैं। सत्संग सुनने से जीव चाहे अमल न करे फिर भी न सुनने वाले से तो बेहतर हैं लेकिन सुनकर अमल करने से ही खुशियां आती हैं, वरना किए कर्मों का भुगतान करना पड़ता है। इसलिए आप सत्संग सुनो, अमल करो और जो सुनकर अमल कर लिया करते हैं, वो ही दोनों जहान की खुशियों के हकदार बनते हैं। उन्हीं के अंदर पवित्रता आती है, चेहरे पर नूर आता है। वो एक दिन मालिक के दर्श-दीदार के काबिल जरूर बन जाया करते हैं।</p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-change-the-life-saint-dr-msg/article-1966</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-change-the-life-saint-dr-msg/article-1966</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Jul 2017 05:47:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-07/msg.jpg"                         length="146345"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        