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                <title>NERAMAC Rice Case - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>NERAMAC Rice Case RSS Feed</description>
                
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                <title>FCI Rice Scam: सस्ते चावल के आवंटन में कथित गड़बड़ी, CBI ने दर्ज किया केस</title>
                                    <description><![CDATA[FCI Rice Scam: रियायती दर पर चावल आवंटित करने में कथित अनियमितताओं के मामले में CBI ने केस दर्ज किया है। जांच में 28.87 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का अनुमान सामने आया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/fci-rice-scam--cbi-registers-case-over-alleged-irregularities-in-the-allocation-of-subsidized-rice/article-90498"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/cbi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारतीय खाद्य निगम (FCI) से रियायती दर पर चावल आवंटित किए जाने के मामले में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज किया है। जांच के घेरे में एफसीआई दिल्ली के तत्कालीन अधिकारी, नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं अन्य अधिकारी, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की जानकारी जून में सामने आई थी। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की विजिलेंस जांच में चावल के आवंटन को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की गई। समिति को विशेष रूप से यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई कि ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत एफसीआई ने राज्य सरकारों को चावल उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था में NERAMAC को किस आधार पर चावल आवंटित किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">62 हजार मीट्रिक टन चावल का हुआ आवंटन</h3>
<p style="text-align:justify;">जांच में सामने आया कि एफसीआई दिल्ली क्षेत्र ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था। इसमें से करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल NERAMAC द्वारा उठाया गया। इस चावल की कीमत 23,200 रुपये प्रति मीट्रिक टन तय की गई थी। वहीं, संबंधित अवधि में चावल की रिजर्व अथवा बाजार कीमत करीब 28,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन बताई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित नियमों के अनुसार NERAMAC इस तरह बिना ई-ऑक्शन चावल प्राप्त करने की पात्रता नहीं रखता था। बिना ई-नीलामी के चावल आवंटित करने की सुविधा मुख्य रूप से राज्य सरकारों और उनकी अधिकृत कॉरपोरेशन के लिए निर्धारित थी। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि नियमों के बावजूद NERAMAC को यह आवंटन किस प्रक्रिया के तहत किया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">निजी कंपनियों के माध्यम से हुआ भुगतान</h3>
<p style="text-align:justify;">मामले में भुगतान को लेकर भी जांच में महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार चावल की राशि सीधे NERAMAC की ओर से नहीं आई, बल्कि अलग-अलग निजी कंपनियों के माध्यम से भुगतान किया गया। इन कंपनियों में चावल मिलर्स और थोक कारोबारी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी अब भुगतान की पूरी श्रृंखला और संबंधित कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि ऐसा पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि NERAMAC को आवंटित चावल उसी उद्देश्य के लिए आम लोगों तक पहुंचाया गया, जिसके आधार पर रियायती दर पर आवंटन किया गया था। इसके अलावा पुराने चावल के स्टॉक को पहले निकालने के लिए लागू FIFO यानी First In, First Out व्यवस्था का पालन किए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">FCI को करीब 28.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लाभ का अनुमान</h3>
<p style="text-align:justify;">विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार यदि आवंटित चावल की संबंधित मात्रा को करीब 28,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन की रिजर्व कीमत पर ई-ऑक्शन के जरिए बेचा जाता, तो एफसीआई को लगभग 28.87 करोड़ रुपये अधिक प्राप्त हो सकते थे। इसी संभावित वित्तीय अंतर को लेकर सरकारी खजाने को नुकसान होने की आशंका जताई गई है। अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि चावल आवंटन में नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ, किन लोगों की भूमिका रही और वित्तीय नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी संबंधित दस्तावेजों, आवंटन प्रक्रिया, भुगतान रिकॉर्ड, ई-ऑक्शन नियमों और चावल के अंतिम इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 11:40:45 +0530</pubDate>
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