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                <title>Jind Roadways employees - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Haryana Roadways protest: निजीकरण के खिलाफ हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन, रखी ये मांगें</title>
                                    <description><![CDATA[जींद रोडवेज डिपो में कर्मचारियों ने दो घंटे प्रदर्शन कर निजी परमिट रद्द करने और 10 हजार सरकारी बसें बेड़े में शामिल करने की मांग की। जानें कर्मचारियों की प्रमुख मांगें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-roadways-protest-haryana-roadways-employees-protest-against-privatization-put/article-90673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/jind-roadways.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जींद (हि.स.)। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को जींद डिपो में रोडवेज कर्मचारियों ने दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार की परिवहन नीति पर नाराजगी जताते हुए निजी परमिट देने की प्रक्रिया रोकने और रोडवेज के बेड़े में 10 हजार सरकारी बसें शामिल करने की मांग उठाई। यूनियन का कहना है कि सरकारी बसों की संख्या बढ़ने से आम यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">500 नई बसों की घोषणा लागू करने की मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन के दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि 16 जून को परिवहन मंत्री के साथ हुई बैठक में रोडवेज के बेड़े में 500 अतिरिक्त बसें शामिल करने की घोषणा की गई थी। बातचीत के दौरान कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति बनी थी और करीब 40 दिन बाद दोबारा वार्ता करने का आश्वासन दिया गया था। कर्मचारियों का आरोप है कि सहमति के बावजूद मांगों को लागू करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। इसके उलट विभाग में सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने के बजाय निजी परमिट जारी किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूनियन नेताओं के अनुसार, इसी नाराजगी के चलते 4 सितंबर को प्रदेश के सभी रोडवेज डिपो में दो घंटे का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने निजी परमिट वापस लेने तथा सरकारी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की मांग दोहराई। नेताओं ने स्पष्ट किया कि रोडवेज के निजीकरण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सरकार बातचीत के जरिए लंबित समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो यूनियन जल्द बैठक कर आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्मचारियों की इन मांगों पर भी जोर</p>
<p style="text-align:justify;">रोडवेज कर्मचारियों ने वेतन और सेवा संबंधी कई मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उनकी मांगों में स्वतंत्र वेतन आयोग का गठन तथा वेतन विसंगतियों को दूर करना शामिल है। कर्मचारियों ने कहा कि चालक का वेतनमान 54,100 रुपये और परिचालक व लिपिक का वेतनमान 35,400 रुपये किए जाने की मांग पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इसके अलावा कर्मचारियों ने निम्न मांगें रखीं:</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">रिक्त पदों पर कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">2016 में भर्ती चालकों समेत सभी कच्चे कर्मचारियों को न्यायालय के निर्णय के अनुसार नियमित किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">पहले की व्यवस्था के अनुसार देय अर्जित अवकाश लागू किया जाए। लंबित रात्रि ठहराव भत्ते का भुगतान किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">ओवरटाइम नीति को दोबारा प्रभावी किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">गांवों में रात्रि ठहराव की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">लंबित ओवरटाइम का भुगतान जल्द किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">करीब 10 वर्षों से लंबित बोनस का भुगतान किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">विभाग के खाली पदों पर नियमित भर्ती शुरू की जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">निजी परमिट की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">निर्णायक आंदोलन की चेतावनी</h3>
<p style="text-align:justify;">यूनियन नेताओं ने कहा कि परिवहन मंत्री के साथ हुई वार्ता में जिन मांगों पर सहमति बनी थी, उन्हें तत्काल लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी जारी रही तो सभी कर्मचारी संगठनों को एकजुट कर बड़े आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल कर्मचारियों की मांगों को उठाना नहीं, बल्कि हरियाणा रोडवेज को मजबूत करना और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को निजीकरण से बचाना भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 17:23:44 +0530</pubDate>
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