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                <title>Melbourne Punjabi food - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Mustard Greens Pizza: सरसों के साग वाले पिज्जा पर होने लगी डॉलरों की बारिश </title>
                                    <description><![CDATA[सिमरनजीत सिंह और गुरप्रीत कौर जब करीब 10 साल पहले पंजाब से ऑस्ट्रेलिया आए थे, तो रोजगार के तौर पर पिज्जा बनाने वाले स्टोरों पर काम किया। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अपना खुद का कारोबार शुरू किया। शुरूआत में उन्होंने भी आम पिज्जा ही बनाए, लेकिन सरसों का साग वाला पिज्जा बनाने के एक विचार ने उन्हें इस आम बाजार से अलग पहचान दिला दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/it-started-raining-dollars-on-pizza-with-mustard-greens/article-90770"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/mustard-greens-pizza.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Mustard Greens Pizza: मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया), (सच कहूँ/रणजीत बठिंडा)।</strong> आंगन में सुलग रहे चूल्हे का धुआं और रसोई में काटी जा रही हरी-हरी कच्ची पत्तियाँ खाना बनाने की तैयारी का संकेत दे रही हैं। लेकिन आखिर यह देसी चूल्हा क्यों जलाया जा रहा है? अगर यह सब पंजाब में हो रहा होता तो बात अलग थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में रहने वाले सिमरनजीत सिंह अपने घर में यह चूल्हा लगभग रोज जलाते हैं और रसोई में गुरप्रीत कौर भी पूरे शौक से सरसों के साग की कटाई करती हैं। देसी घी का तड़का, मक्की के आटे का अलाण और चूल्हे की आग पर रखी मिट्टी की मटकी में पक रहा यह साग कुछ ही समय बाद अपने देसी अंदाज से निकलकर घर से करीब 6 किलोमीटर दूर एक ऐसा रूप लेता है, जिसकी कीमत डॉलरों में होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कहानी है ‘सर्दियों का मेवा’ कहे जाने वाले सरसों के साग की, जो पंजाब से चलकर ऑस्ट्रेलिया में इटली के पिज्जा के साथ मिलकर डॉलर कमा रहा है। सिमरनजीत सिंह और गुरप्रीत कौर जब करीब 10 साल पहले पंजाब से ऑस्ट्रेलिया आए थे, तो रोजगार के तौर पर पिज्जा बनाने वाले स्टोरों पर काम किया। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अपना खुद का कारोबार शुरू किया। शुरूआत में उन्होंने भी आम पिज्जा ही बनाए, लेकिन सरसों का साग वाला पिज्जा बनाने के एक विचार ने उन्हें इस आम बाजार से अलग पहचान दिला दी।</p>
<p style="text-align:justify;">शुरू में उनका यह आइडिया लोगों के लिए हंसी का विषय बना, लेकिन बाद में इसका खास स्वाद ग्राहकों की पसंद बन गया। सप्ताह में बनने वाला साग पिज्जा हर रोज बिकने लगा। गुरप्रीत कौर बताती हैं कि पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए साग में धुएं से लेकर मिट्टी के बर्तन तक की खुशबू इसे पुराने जमाने के स्वाद से जोड़ती है। पिज्जा बनाने के लिए बिजली वाली मशीन की जगह पंजाब की तरह ही लकड़ियों की आग का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि यह भी इतना आसान नहीं है, क्योंकि मेलबर्न का खराब मौसम चूल्हा जलाने में मुश्किल पैदा करता है और समय की खपत भी दोगुनी हो जाती है। इसके बावजूद बिना किसी समझौते के पंजाब का स्वाद ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। यही वजह है कि मेलबर्न से बाहर से आने वाले लोग भी साग वाले पिज्जा का पता तलाशते-तलाशते उन तक पहुंच जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-09/sarson-ka-saag.jpg" alt="Sarson-ka-Saag" width="1000" height="563"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 10:33:27 +0530</pubDate>
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