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                <title>कन्याओं को समाज में जीने का हक</title>
                                    <description><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर आयोजित सेमीनार में बोले वक्ता कोटा। अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर कोटा ब्लॉक की साध-संगत ने छत्रपति शिवाजी स्कुल शीवपुरा में गुरूवार को एक सेमिनार का आयोजन किया। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के तत्वावधान में आयोजित इस सेमीनार के दौरान वक्ताओं ने लड़कियों को अपने अधिकारों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-right-to-live-in-society/article-6229"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/the-right-to-live-in-society.jpg" alt=""></a><br /><h1>अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर आयोजित सेमीनार में बोले वक्ता</h1>
<p><strong>कोटा।</strong></p>
<p>अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर कोटा ब्लॉक की साध-संगत ने छत्रपति शिवाजी स्कुल शीवपुरा में गुरूवार को एक सेमिनार का आयोजन किया। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के तत्वावधान में आयोजित इस सेमीनार के दौरान वक्ताओं ने लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक, स्वयं सक्षम, तथा कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने आदि के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि कन्याओं को भी समाज में जीने का हक है ऐसे में उन्हें भ्रूण में ही मरवा देना हैवानियत का कार्य है। इस अवसर पर अजय सिंह इन्सां, हरीओम इन्सां, राम बिलास इन्सां, प्रभु दयाल इन्सां, मदन मोहन सिंह इन्सां, बलभद्र इन्सां, डॉ दौलत इन्सां, जोरावर सिंह इन्सां, दिनेश इन्सां, श्याम शर्मा इन्सां, विजय चोपड़ा इन्सां, रितेश इन्सां, मनमोहन इन्सां आदि सेवादार उपस्थित रहे।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Oct 2018 17:05:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीन के पास भी जवाबी कार्रवाई का अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग (एजेंसी)। चीन ने कहा है कि चीनी कंपनियों के निवेश को लेकर अमेरिका ने जिन प्रतिबंधों की बात कही है वे विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ हैं और चीन सरकार के पास भी इसी तरह की जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है। वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने वीरवार को नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/china-also-has-the-right-to-retaliate/article-3870"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/chinya-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग (एजेंसी)। </strong>चीन ने कहा है कि चीनी कंपनियों के निवेश को लेकर अमेरिका ने जिन प्रतिबंधों की बात कही है वे विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ हैं और चीन सरकार के पास भी इसी तरह की जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है। वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने वीरवार को नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन यह बिल्कुल भी नहीं चाहता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार के क्षेत्र में किसी तरह की तनातनी या खटास बढे और हमारा मानना है कि दोनों देशों के पास व्यापार के क्षेत्र में सहयोग करने की अपार संभावनाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि कल अमेरिका ने कहा था कि वह चीन से होने वाले आयातों पर प्रतिबंध लगा सकता है और अमेरिकी बौद्धिक संपदा के मामले में जब तक चीन कोई कदम नहीं उठाएगा तब तक यह जारी रहेगा। इस पर प्रतिक्रिया करते हुए चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह इस घोषणा से हैरान है और यह बयान दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई सहमति के विरोध में है। चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध की अमेरिकी घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए चीन सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिकी सरकार व्यापार में आ रही तनातनी को दूर करने में कोई पहल नहीं करती है तो वह भी इस बारे में पूरी तरह मुकाबले के लिए तैयार है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 May 2018 12:19:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्यों जरुरी है &amp;#8216;निजता का अधिकार&amp;#8217;?</title>
                                    <description><![CDATA[सर्वोच्च न्यायालय के नौ न्यायाधीशों की पीठ इन दिनों नागरिकों के ‘राइट टू प्राइवेसी’ यानी निजता के अधिकार के संबंध में दायर की गई एक याचिका पर अहम सुनवाई कर रही है। संभव है, आगामी 27 अगस्त को आने वाले फैसले से स्पष्ट हो जाए कि निजता का अधिकार वास्तव में नागरिकों का मौलिक अधिकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-need-right-to-privacy/article-2786"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/need-of-privacy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय के नौ न्यायाधीशों की पीठ इन दिनों नागरिकों के ‘राइट टू प्राइवेसी’ यानी निजता के अधिकार के संबंध में दायर की गई एक याचिका पर अहम सुनवाई कर रही है। संभव है, आगामी 27 अगस्त को आने वाले फैसले से स्पष्ट हो जाए कि निजता का अधिकार वास्तव में नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं?गौरतलब यह है कि भारत सरकार इसकी संवैधानिक वैधता से पहले से ही इंकार करती आई है, जबकि दायर याचिका में कहा गया गया है कि यह प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21) का ही एक उपबंध है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पिछले कुछ समय में आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली करीब बीस याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई हैं। याचिकाकतार्ओं का कहना है कि आधार कार्ड बनाये जाने के दौरान बायोमेट्रिक पद्धति द्वारा शारीरिक चिन्हों जैसे ऊंगलियों के निशानों अथवा आँखों की पुतलियों की ली जाने वाली निजी जानकारी नागरिकों की निजता का उल्लंघन है। जबकि, सरकार आधार के माध्यम से अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए नागरिकों से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं को इकट्ठा करना उनकी निजता का उल्लंघन नहीं मानती।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत में केंद्र सरकार की तरफ से दलील पेश करने वाले महान्यायवादी केके वेणुगोपाल ने पीठ के समक्ष कहा, ‘निजता का कोई मूलभूत अधिकार नहीं है और यदि इसे मूलभूत अधिकार मान भी लिया जाए तो इसके कई आयाम हैं। हर आयाम को मूलभूत अधिकार नहीं माना जा सकता। ‘याचिकाकतार्ओं की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम, श्याम दीवान और सोली सोराबजी ने जिरह की है। इस संदर्भ में गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 को अगर एक साथ देखा जाए तो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का दायरा बहुत बड़ा हो जाता है। अगर यह कहा जाए कि निजता कोई अधिकार नहीं है तो यह बेमतलब है। हालांकि, दोनों पक्षों को सुनकर अब यह सुप्रीम कोर्ट को निर्धारित करना है कि निजता, नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में ‘निजता का अधिकार’ को लेकर हो रही बहस वर्षों पुरानी है, लेकिन आजतक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि यह अधिकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आती है नहीं?आजादी के बाद जब संविधान बना तब भी नागरिकों की निजता संबंधी अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई। फलस्वरुप 1950 के दशक से ही निजता के अधिकार को परिभाषित करने की मांग होती रही है। इस संबंध में, सर्वोच्च न्यायालय ने 1954 में एमपी शर्मा तथा 1962 के खड़ग सिंह केस में क्रमश: 8 और 6 जजों की बेंच द्वारा दिये गये फैसले के तहत निजता के अधिकार की संवैधानिक अस्तित्वता को स्वीकार नहीं किया। लेकिन, उसके बाद भी इस तरह की अनेक याचिकाएं दायर की गईं और सुप्रीम कोर्ट ने सदैव नपा-तुला फैसला ही दिया, जिसकी वजह से यह अस्पष्टता बनी रही। सुप्रीम कोर्ट कभी यह कहती रही कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है, तो कभी यह कि यह संपूर्ण मौलिक अधिकार नहीं है, इसलिए कुछ मामलों में राज्य नागरिकों की निजता में दखल दे सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर, भारतीय संविधान की बात करें, तो उसमें ‘निजता का अधिकार’ का स्पष्ट लिखित उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय समाज में वर्षों से इसे नैसर्गिक अधिकार माना जाता रहा है। दरअसल, निजता हर मानव-व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है और इसके बिना अन्य मौलिक अधिकारों की कोई प्रासंगिकता नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे अनेक अवसर आते हैं, जहां हमें निजता चाहिए होती है। हम किसी को चिट्ठी लिखते हैं, तो नहीं चाहते कि उसे कोई दूसरा पढ़े। हम अपना बैंक, फेसबुक, ईमेल अकाउंट की निजी जानकारी किसी से साझा नहीं करते, क्योंकि इससे हमारी गोपनीयता खत्म होती है। जाहिर है, निजता को मौलिक अधिकार से अलग नहीं किया जा सकता। इसे अलग करने का अर्थ, किसी शरीर से आत्मा को अलग करने की तरह होगा। निजता का प्राकृतिक अधिकार नागरिकों की गोपनीयता सुनिश्चित व सुरक्षित करती है। बिना निजता के जीवन का आनंद भी तो नहीं लिया जा सकता!</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक, हमारे संविधान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय संविधान की तरह अमेरिकी संविधान में भी ‘निजता का अधिकार’ का उल्लेख नहीं है लेकिन, वहां की सुप्रीम कोर्ट इसके अस्तित्व को स्वीकारती है। अमेरिकी सरकार निजता के अधिकार को काफी गंभीरता से लेती है और नीति-निर्माण के समय नागरिकों की निजता का विशेष ख्याल रखा जाता है। वहीं जापान की बात करें, तो वहां के नागरिकों के पास भी ऐसा कोई अधिकार नहीं है, लेकिन निजी जानकारियों की सुरक्षा के लिए वहां, ‘एक्ट आॅन द प्रोटेक्शन आॅफ पर्सनल इन्फोर्मेशन’ नाम से एक ठोस कानून जरुर है, जिसके मुताबिक व्यक्ति की अनुमति के बिना सरकार या कोई संस्था उसकी निजी जानकारियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती। इसी तरह, विश्व में पहली बार नागरिकों को व्यक्तिगत पहचान संख्या जारी करने वाले स्वीडन में भी एक ठोस कानून बनाकर नागरिकों से जुड़े गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। मौजूदा समय में, इंटरनेट प्रयोग के तौर पर भारत एक विशाल बाजार के रुप में परिणत हो चुका है। लेकिन, यहां की सरकार ने एक ठोस डेटा प्रोटेक्शन लॉ पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई!</p>
<p style="text-align:justify;">‘निजता के अधिकार’ पर हो रही बहस मुख्य रुप से ‘आधार’ पर आकर ठहर जा रही है। दरअसल, बैंक से लेकर मोबाइल-सिम तक बहुत सारी सेवाओं में आधार को अनिवार्य किया जा रहा है। ऐसे में अगर देश में ठोस डेटा प्रोटेक्शन एक्ट ना हो, तो नागरिकों की निजी सूचनाओं के हैक होने तथा उसके दुरुपयोग की संभावनाओं को बल मिल सकता है। याद हो, बीते साल के अक्तूबर महीने में भारत के 32 लाख ग्राहकों के डेबिट कार्ड की गोपनीय जानकारी अचानक से हैक हो जाने से सनसनी फैल गई थी। वहीं, पिछले दिनों ‘रैनसमवेयर’ वायरस ने एक साथ विश्वभर के सौ से अधिक देशों के दो लाख से ज्यादा कम्प्यूटरों को नुकसान पहुंचाया था। आधार को अन्य सेवाओं जैसे कि बैंक, सिम आदि से जोड़ने से बायोमेट्रिक प्रणाली से ली गई नागरिकों की निजी सूचनाओं की गोपनीयता खत्म होने तथा साइबर क्राइम के मामलों में वृद्धि की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि भारत में इंटरनेट से जुड़ी अधिकांश कंपनियां मसलन, गूगल, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप इत्यादि विदेशी हैं, इसलिए संभव है कि ये कंपनियां भविष्य में हमारी निजी सूचनाओं का दुरुपयोग करे!अत: निजता के अधिकार के साथ-साथ देश में एक ठोस डेटा प्रोटेक्शन कानून भी होना चाहिए;ताकि इन कंपनियों की गतिविधि तथा अनियंत्रित आजादी को नियंत्रित किया जा सके। फिर, कानून का उल्लंघन करने वाली देशी या विदेशी सभी कंपनियों के लिए कठोर दंड की व्यवस्था भी हो। पुनश्च, सरकार को नागरिकों की निजी सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित करने पर जोर देना चाहिए, ताकि तकनीकी रुप से भारत का वर्तमान और भविष्य सशक्त तथा उज्ज्वल बन सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-सुधीर कुमार</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 04:04:52 +0530</pubDate>
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                <title>मुझसे बहस करनी है तो सीएम आएं: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[कटारिया के सामने हमने भेजा उनके कद का नेता Jaipur, SachKahoon News: गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा के बीच चल रही बहस की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। अब इस बहस के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कूद गए हैं। उन्होंने कटारिया के बयान पर कहा है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/if-you-want-to-argue-with-me-right-cm-gehlot/article-694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/ashok-gehlot1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>कटारिया के सामने हमने भेजा उनके कद का नेता</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Jaipur, SachKahoon News:</strong> गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा के बीच चल रही बहस की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। अब इस बहस के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कूद गए हैं। उन्होंने कटारिया के बयान पर कहा है कि यदि मुझसे बहस करनी है तो खुद सीएम वसुंधरा राजे सामने आएं। कटारिया के सामने तो कांग्रेस ने उनके कद की नेता को ही भेजा था। गहलोत शुक्रवार को जैसलमेर में थे। पत्रकारों से सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि कटारिया मुझे बहस के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं कि वे तो राहुल गांधी को भी बहस के लिए आमंत्रित करेंगे तो क्या वे जाएंगे। कांग्रेस ने कटारिया के सामने उनके कद की नेता को भेजा था, बहस करनी है तो उनसे करनी चाहिए, सब कुछ सामने आ जाएगा। असल में कटारिया बार-बार सभाओं में कहते रहे हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था बेहतर है। सुधरी है और विकास भी हुआ है। इस पर उन्होंने कई बार कांग्रेस को चुनौती दी है कि चाहे तो इस पर कांग्रेस उनसे बहस कर सकती है। इस बार कटारिया के कहने पर कांग्रेस की ओर से अधिकृत डॉ. अर्चना शर्मा, जो पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और मीडिया सेंटर की चेयरपर्सन हैं, ने चुनौती को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कटारिया को फोन पर, मीडिया के जरिए और एसएमएस के जरिए सूचना दे दी कि वे आपकी चुनौती को स्वीकार करते हुए 27 दिसंबर को प्रेस क्लब में उपस्थित रहेंगी। कटारिया इस स्वीकारोक्ति पर बैकफुट में आ गए और वे वहां नहीं गए। इसके बाद भाजपा के कई नेताओं ने बहस को लेकर बयानबाजी की।</p>
<p><em>मैं कहना चाहता हूं कि वे तो राहुल गांधी को भी बहस के लिए आमंत्रित करेंगे तो क्या वे जाएंगे। कांग्रेस ने कटारिया के सामने उनके कद की नेता को भेजा था, बहस करनी है तो उनसे करनी चाहिए, सब कुछ सामने आ जाएगा।</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Dec 2016 01:03:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा की परिवर्तन रैलियों में उमडता जनसैलाब कर रहा है इशारा,सही पडी है नोट पर चोट: महेश शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[इटावा:  केंद्रीय पयर्टन मंत्री डा महेश शर्मा ने अाज दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की परिवर्तन रैलियों में उमडता जनसैलाब 500 और 1000 रूपये के नोटों को अमान्य करार देने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले को सही साबित करने के लिये काफी है। श्री शर्मा ने यहां पत्रकारों से कहा “ भारतीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/bjp-rallies-umdta-jnsailab-change-is-pointing-is-lying-right-on-the-injury-mahesh-sharma/article-344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/mahesh-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इटावा:</strong>  केंद्रीय पयर्टन मंत्री डा महेश शर्मा ने अाज दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की परिवर्तन रैलियों में उमडता जनसैलाब 500 और 1000 रूपये के नोटों को अमान्य करार देने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले को सही साबित करने के लिये काफी है।<br />
श्री शर्मा ने यहां पत्रकारों से कहा “ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भीड जुटाने के लिए गलत तरीके के इस्तेमाल के खिलाफ हमेशा रही है।<br />
इसके बावजूद रैलियो में उमड रही भीड़ जता रही है कि जनता कालेधन पर चोट करने के श्री मोदी के फैसले का तहेदिल से स्वागत कर रही है। (वार्ता)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2016 07:41:37 +0530</pubDate>
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