<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/relationship/tag-3757" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Relationship - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/3757/rss</link>
                <description>Relationship RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Live-in Relationship ठीक या गलत, जानें पूज्य गुरु जी की जुबानी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। हाल के कुछ महीनों में लिव इन रिलेशन का मामला बहुत चर्चा में है। हाल ही में श्रद्धा हत्याकांड जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। समाज के गणमान्य लोग फिर से यह सरकार से मांग कर रहे हैं कि इसको रोका जाए। ये समाज के लिए घातक सिद्ध […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/live-in-relationship/article-41591"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/live-in-relationship.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हाल के कुछ महीनों में लिव इन रिलेशन का मामला बहुत चर्चा में है। हाल ही में श्रद्धा हत्याकांड जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। समाज के गणमान्य लोग फिर से यह सरकार से मांग कर रहे हैं कि इसको रोका जाए। ये समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। वहीं हाल ही में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने बरनावा आश्रम से एक प्रश्न के जवाब में लिव इन रिलेशन के बारे में बताया कि यह कैसे हमारे समाज को खराब कर रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आइये जानते हैं पूज्य गुरु जी के वचन-</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल:</strong> गुरु जी जो आज का यूथ है वो वैस्टन कल्चर को काफी कॉपी कर रहा है, उसकी तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहा है। अगर मैं अनमैरिड की बात करूं तो अब लिव इन रिलेशनशिप का भी ट्रेंड चल पड़ा है। इसमें अनमैरिड कपलस साल 6 महीने एक साथ रहकर देखते हैं कि आगे चलकर क्या वे साथ रह भी सकते हैं। ये चीज हमारे देश में बाहर से आई है। इस पर कृपया मार्गदर्शन कीजिए।</p>
<p><iframe title="Live Talk Show with MSG | Youth Exclusive | Unfiltered | 27th October 2022" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/8hHGgB6kbjc?start=2516&amp;feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरु जी का जवाब :</strong> हमारे अनुसार ये सही नहीं है। हमारा कल्चर बहुत ही स्वस्थ है। जब आप 6 महीने साल रहते हैं चलो बाकी बात नहीं, आपके घर के बाहर गुलाब के फुल लगे हैं पहले दिन आप बहुत अच्छे से देखते हैं, बहुत सुंदर है, बड़ी इसकी खुशबु लेते हैं, लेकिन एक महीने, दो महीने, चार महीने बाद आपको पता नहीं रहता कि आपके घर के आगे गुलाब के फूल भी लगे हैं, क्योंकि आप बिजी है, भागके आते हैं और गेट खोला अंदर चले जाते हैं, कोई खुशबु नहीं आ रही, कोई बदबू नहीं आ रही, आप भागते रहते हैं। उसी तरह से संबंध हैं, रिश्ते नाते हैं कि भाई आप लगातार इस तरह से करते रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आप रह रहे हैं इकट्ठे, एक साथ रह रहे हैं तो आप एक-दूसरे की आदतों के आदि हो जाते हैं और फिर जब आदि हो गए तो आप चेंज ढूंढते हैं, आपका माइंड कहता है कि अपना कौन सा रिश्ता बना हुआ है, आपा कौन से रिश्ते में बंधे हुए हैं। ब्रेकअप पार्टी देकर ब्रेकअप करते हैं आप। गजब तो ये है ना, पहले ये प्यार था कि रिश्ते असल में तो रिश्ते टूटते ही नहीं थे, टूटता था तो मंजनू या जो-जो नाम दिए हैं वो ऐसे ही नहीं दिए गए, लोग रोते थे, तड़फते थे एक-दूसरे के बिना। लेकिन आज तो हैरानीजनक है रिश्ता टूट गया तो खुशी मनाते हैं, चलो ब्रेकअप की पार्टी हो रही है, बनता है तो आप पार्टी दे रहे होते हैं कि नया रिश्ता बन रहा है। क्योंकि उनको एनजोवायमेंट हो गई, चार महीने इसके साथ रह लो कोई हर्ज नहीं, चार महीने उसके साथ रह लिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे बीमारी फैलने का बहुत ज्यादा डर है, इससे आपके माइंड में पॉजिटिव वेबस हैं वो नहीं आ पाएंगी, जल्दी से नेगेटिव वेबस घर कर जाएंगी और आपके लिए मुश्किल पैदा कर देंगी तो इसलिए आप लोगों से गुजारिश, हम आपसे ये ही चाहते हैं कि आप अमल कीजिएगा और सबसे पहले विल पावर पैदा कीजिए जो हर समस्या का हल है। विल पावर के लिए कोई काम नहीं छोड़ना, हाथोें-पैरो से कर्म करते रहिए कर्मयोगी और जीभा ख्यालों से ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम थोड़ा-थोड़ा लेते रहिए, क्या जोर लगता है आपका।</p>
<p style="text-align:justify;">आप गाड़ी चला रहे हैं या पैदल जा रहे हैं, चलना पैरो से है देखना आँखों से है, हाथ-पैर चल रहे हैं, जीभा तो नहीं चल रही, चल रही है दूसरो का बेड़ा गर्क करने के लिए और खुद का बेड़ा गर्क करने के लिए। आप दूसरों के बारे में बुरा सोचते जा रहे हैं, नेगेटिव सोच आती जा रही है, क्यों ना आप ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम लें, राम-नाम से आत्मबल भी आएगा और यकीनन आपकी हर समस्याओं का हल आत्मबल में ही छिपा हुआ है तो आप उसको हासिल करिए, हमारा आशीर्वाद है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है लव इन रिलेशनशिप</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लिव इन रिलेशनशिप पश्चिमी देशों से आया है और वहां के लिए यह आम बात है, लेकिन भारतीय सभ्यता में बिना शादी के एक स्त्री-पुरुष के साथ रहने को स्वीकार नहीं किया जाता, लेकिन बदलती जीवन शैली में इसे भारत में भी अपनाया जाने लगा है। चूंकि आज लिव इन रिलेशनशिप में रहना बड़े शहरों में आम हो जा चुका है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानून वैध करार दिया है। चूंकि लिव इन को लेकर भारतीय संसद ने कोई कानून पारित नहीं किया है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही इस मामले में कानून की तरह काम करता है।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/msg-tips-about-husband-wife-relationships/">कैसा होना चाहिए पति-पत्नी का रिश्ता? गुरु जी ने दिया शानदार जवाब</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“कैसा होना चाहिए पति-पत्नी का रिश्ता? गुरु जी ने दिया शानदार जवाब” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/msg-tips-about-husband-wife-relationships/embed/#?secret=PjX056OBFI%23?secret=bF1ByGhCyU" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/saint-msg-tips-on-friendship-between-boys-and-girls/">लड़के और लड़कियों की फ्रेंडशिप पर पूज्य गुरु जी के जोरदार वचन</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“लड़के और लड़कियों की फ्रेंडशिप पर पूज्य गुरु जी के जोरदार वचन” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/saint-msg-tips-on-friendship-between-boys-and-girls/embed/#?secret=NS28zH0VwQ%23?secret=YYw47Q0Obk" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/live-in-relationship/article-41591</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/live-in-relationship/article-41591</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 11:44:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-12/live-in-relationship.jpg"                         length="52397"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परवान चढ़तें भारत-ब्राजील संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील का मुख्य फोकस सुसुप्त होते व्यापारिक रिश्तों में दोबारा प्राण फूंकने पर रहा। हालांकी व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुए है, दोनों के बीच 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार 8.2 अरब अमरीकी डॉलर का रहा। इसमें 3.8 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात और 4.4 अरब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-brazil-relationship-improved/article-12899"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/india-brazil-relationship.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील का मुख्य फोकस सुसुप्त होते व्यापारिक रिश्तों में दोबारा प्राण फूंकने पर रहा। हालांकी व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुए है, दोनों के बीच 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार 8.2 अरब अमरीकी डॉलर का रहा। इसमें 3.8 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात और 4.4 अरब डॉलर का भारत का आयात शामिल है। बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपना द्विपक्षीय व्यापार 2022 तक 15 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।</h3>
<h3 style="text-align:justify;">एन.के. सोमानी</h3>
<h4 style="text-align:justify;">ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो की भारत यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील के बीच कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैव ऊर्जा, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, खनन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, स्वास्थय, महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। इसके अलावा तेल एवं प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता हुआ। साथ ही दोनों देश निवेश बढ़ाने और आपराधिक मामलों में एक-दूसरे का सहयोग करने पर भी सहमत हुए। बोलसोनारो भारत के 72वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि की हैसियत से भारत आए हुए थे। वे यहां चार दिन रहे। जनवरी 2019 में राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी। 11 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जब पीएम नरेन्द्र मोदी ब्राजील गये थे, उस वक्त उन्होंने बोलसोनारो को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि की हैसियत से भारत आने का न्यौता दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था।<br />
हालांकी इससे पहले साल 1996 में राष्ट्रपति फर्नेंडो हेनरीकुए कार्डोस और 2004 में राष्ट्रपति लुईस इनासिलयो लूला डिसिल्वा गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्यअतिथि के रूप में भारत आ चुके हैं, लेकिन बोलसोनारो की भारत यात्रा इस लिए अहम थी, क्योंकि राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा थी। दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील के साथ भारत के हमेशा से ही अच्छे रिश्ते रहें है। भौगोलिक दूरी होने के बावजूद दोनों अनेक वैश्विक मंचों पर एक साथ खडेÞ दिखते हंै। दोनों देश कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र और उससे बाहर कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सामरिक साझेदार है। ब्रिक्स, जी-20, जी-4, विश्व व्यापार संगठन और अंतरराष्ट्रीय सोलर सहयोग संगठन जैसे मंचों पर दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल देखा गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत-ब्राजील समान दृष्टिकोण रखते हैं। बोलसोनारो के भारत दौरे के दौरान भी दोनों देश बहुस्तरीय मुददों पर अपने सहयोग को और मजबूत करने तथा सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में आवश्यक सुधार के लिए मिलकर काम करने को तैयार हुए है।<br />
साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह चार दिवसीय दौरे पर ब्राजील गए थे। यह 38 वर्ष के बाद किसी भारतीय पीएम की ब्राजील यात्रा थी। इस यात्रा के बाद भारत-ब्राजील संबंधों में निरन्तर घनिष्ठता आयी। डॉ. सिंह की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्वता दोहरायी। साल 2016 में गोवा में आयोजित हुए आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेल में भाग लेने के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल तेमेर ने भारत का दौरा किया था। मिशेल की भारत यात्रा के दौरान भी भारत-ब्राजील के बीच कई अहम मसलों पर सहमति बनी थी। भारत-ब्राजील के बीच 1948 में कूटनीतिक संबंध शुरू हुए, अब सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। साल 2023 दोनों देश के बीच राजनयिक संबंधों की प्लैटिनम जुबली साल होगा।<br />
बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील का मुख्य फोकस सुसुप्त होते व्यापारिक रिश्तों में दोबारा प्राण फूंकने पर रहा। हालांकी व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुए है, दोनों के बीच 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार 8.2 अरब अमरीकी डॉलर का रहा। इसमें 3.8 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात और 4.4 अरब डॉलर का भारत का आयात शामिल है। बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपना द्विपक्षीय व्यापार 2022 तक 15 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। गन्ना किसानों के मामले में भी ब्राजील के भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में जाने के मुददे को दोनों पक्षों ने आपसी परामर्श से सुलझाने का निर्णय लिया है।<br />
भारत और ब्राजील के बीच मुक्त वीजा सिस्टम भी लागू है। दोनों देशों के पर्यटक और कारोबारी बिना वीजा के एक-दूसरे के देश में आ जा सकते हैं। अक्टूबर 2019 में राष्ट्रपति बोलसोनारो ने भारतीय नागरिकों को वीजा मुक्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की थी। हालांकी इससे पहले 22 देशों के साथ हमारा मुक्त वीजा समझौता है, लेकिन ब्राजील जैसे बड़े व मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश के साथ मुक्त वीजा समझौता अहम माना जा रहा है। अभी पीछले दिनों ही मोदी सरकार ने भारत और ब्राजील के बीच सामाजिक सुरक्षा के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी है। विदेशों में कम समय के लिए काम करने वाले भारतीयों के हितों की रक्षा करने तथा भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमताओं को बढ़ाने के दृष्टिगत भारत का कई देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता (एसएसए) है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जबकि ब्राजील 21 करोड़ की आबादी और 1800 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश। अर्थव्यवस्था के लिहाज से दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध होना जरूरी भी है।<br />
पूर्व सेना प्रमुख रहे 65 वर्षीय बोलसोनारो ने अक्टूबर 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रचंड जीत हासिल कर पिछले साल जनवरी में राष्ट्रपति पद सभांला था। सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि वह विकासशील देशों के लिए भी अपनी नीतियोें में बदलाव करेंगें। भारत के लिए मुक्त वीजा की घोषणा बोलसोनारो की इन्हीं नीतियों का परिणाम कहा जा रहा है। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि बोलसोनारो के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।<br />
हालांकी बीच के काल खंड में दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाली कुछ घटनाएं भी हुई। गोवा की आजादी और इसके भारत में शामिल किए जाने को लेकर भारत-ब्राजील रिश्तों में कुछ ठहराव आया। इसकी बड़ी वजह यह थी कि ब्राजील गोवा में पुर्तगाल की मौजूदगी को सही बताता था। इसके पीछे उसके पुर्तगाल से ऐतिहासिक रिश्ते थे, ब्राजील मानता था कि भारत ने वहां सैन्य कार्रवाई कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है। इसी तरह साल 2009 में ब्राजील ने भारत की आपत्ती के बावजूद पाकिस्तान को 85 मिलियन यूरो की 100 एंटी विकिरण मिसाइलों की बिक्री का सौदा किया। लेकिन वर्तमान में दोनों देश इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि उनके संबंध अब सामरिक भागीदारी के एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां से वह अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाईयां प्रदान कर सकते है। दोनों यूएन को और अधिक व्यवहारिक व कारगार बनाने के लिए उसमें सुधार करने और इसे आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के मुद्दे पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। यूएन सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के लिहाज से दोनों के बीच मजबूत संबंध काफी जरूरी है, सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता के लिए दोनों वर्षों से दावेदार हैं। दोनों देश आईबीएसए (इब्सा वार्ता मंच) पहल में शामिल है। हाल ही मे ब्राजील और भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विकास, पर्यावरण, संयुक्त राष्ट्र के सुधार और यूएनएससी विस्तार जैसे मुद्दों पर बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग किया है।<br />
बोलसोनारो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आतंक के वित्तपोषण एवं राज्य प्रायोजित आतंकवाद की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए एफएटीएफ में साथ मिलकर काम करने का निश्चय किया है। दोनों देशों ने सभी देशों से आतंकवाद के शरणस्थली को खत्म करने, उनके नेटवर्क एवं वित्तपोषण के मार्गों को अवरूद्व कर देने तथा आतंकवादियों को सीमा के आर-पार, आने-जाने पर रोक देने की दिशा में मिलकर काम करने की अपील की।<br />
सच तो यह है कि भारत के साथ ब्राजील के बहुआयामी संबंध है। यह द्विपक्षीय संबंध साल 2014 में उस वक्त और गहरे हुए जब सत्ता में आने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार ब्राजील के उत्तर-पूर्वी शहर फोटार्लेजा में आयोजित ब्रिक्स देशों की छठी शिखर बैठक में भाग लेने के लिए ब्राजील गए थे। उसके बाद से दोनों देशों के संबंध कमोबेश अपनी गति से आगे बढ़ते रहें है। हालांकि इस बीच भारत-ब्राजील व्यापारिक संबंधों में जरूर गिरावट आई है। मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले साल 2011 में दोनों देशों के बीच 11 बिलियन से अधिक का व्यापार था, जो साल दर साल घटते हुए साल 2016 में 5.6 बिलियन रह गया है। भारत ब्राजील से चीनी, कपास, सोया, पैट्रोलियम उत्पाद और सोना आयात करता है, जबकि भारत ब्राजील को दवाइयां, केमिकल और फार्मा स्यूटिक्लस, आटोमोबाइल पार्टस और कपड़ों का निर्यात करता है। जनसंख्या के लिहाज से जहां भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, वही ब्राजील क्षेत्रफल की दृष्टि से पांचवा बड़ा देश है। दोनों देशों के पास एक बड़ा बाजार है, जो एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था को साधने और गति देने में कारगर हो सकते है।</h4>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><span lang="en" xml:lang="en"> </span></pre>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-brazil-relationship-improved/article-12899</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-brazil-relationship-improved/article-12899</guid>
                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 21:39:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-02/india-brazil-relationship.jpg"                         length="18966"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिल सियासत का फिल्मी दुनिया से गहरा रिश्ता</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण के सियासी दुर्ग पर एक बार फिर गहरा फिल्मी रंग चढ़ रहा है। इस बार तमिल की राजनीतिक भूमि पर कमल हासन और रजनीकांत चहलकदमी करते दिख रहे हैं। बशर्ते रजनीकांत ने अभी अपनी पार्टी का ऐलान नहीं किया है, लेकिन कमल हासन अपनी पार्टी का ऐलान कर सक्रिय राजनीति की तरफ कूच कर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/deep-relationship-with-film-of-tamil-political/article-3545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-02/rajni.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दक्षिण के सियासी दुर्ग पर एक बार फिर गहरा फिल्मी रंग चढ़ रहा है। इस बार तमिल की राजनीतिक भूमि पर कमल हासन और रजनीकांत चहलकदमी करते दिख रहे हैं। बशर्ते रजनीकांत ने अभी अपनी पार्टी का ऐलान नहीं किया है, लेकिन कमल हासन अपनी पार्टी का ऐलान कर सक्रिय राजनीति की तरफ कूच कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हासन ने पार्टी का नाम ‘मक्कल निधी मैयम’ रखा है, जिसका हिंदी नाम ‘जन इंसाफ केंद्र’ है। वैसे एक नजरिए से देखा जाए, तो तमिल दुर्ग काफी लंबे वक्त से फिल्मी साए में ही राजनीतिक वर्तमान जी रहा, उसी को भुनाने का प्रयास अभी भी सूबे में जारी है। आज के दौर में यह कहना गलत न होगा कि जो तमिलनाडु दशकों से शेष भारत से द्रविड़ राजनीति और हिंदी के विरोध के कारण से कटा हुआ था, उस दूरी को आईपीएल और फिल्मी दुनिया ने वर्तमान में दूर कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके कारण सूबे की सियासत से द्रविड़ राजनीतिक जमीं अब खिसक रही है। आज के वक्त में अम्मा के निधन के बाद से अभी तक उनकी कमी को तमिल सियासत पूरी नहीं कर पा रही। उसी सियासी बंजर भूमि पर अपना वजूद स्थापित करने के लिए रंगमंच के दो खिलाड़ी अपनी किस्मत आजमाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कमल हासन ने अगर पार्टी गठन के वक्त ही भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने की बात की है, तो इससे प्रभावित तमिलनाडु की सियासत के वर्तमान समय के सत्ताधारी और विपक्ष दोनों होंगे। जिसका फायदा आने वाले वक्त में दूसरी पार्टियों को होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे ‘कल हमारा है’ का नारा देने वाले कमल हासन की आगामी राहें फूलों की सेज भी साबित नहीं होने वाली, क्योंकि अरविंद केजरीवाल के अलावा कोई विराट राजनीतिक शख्सियत उनके साथ अभी दिखती नहीं। अभी अगर देखा जाए, तो भले कमल हासन की राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट नहीं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी राजनीतिक विचारधारा सेकुलरिज्म के आसपास ही रहने वाली है। साथ में अगर केजरीवाल शुरूआत से ही हसन के साथ खड़े दिख रहे हैं, तो यह भी स्पष्ट है, कि कमल हासन युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के मंसूबे के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं और केजरीवाल को साथ दिखाकर आम आदमी पार्टी का भ्रष्टाचार विरोधी होने का फायदा भी उठाना चाहते हैं। तमिल की सियासत जैसे आज भ्रष्टाचार के आकंठ सरोवर में डूबी दिखती है, चाहे सत्तापक्ष हो, या विपक्ष।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे ही सियासत के सियासतदां भी सूबे के आकंठ रंगमंच की दुनिया से तालुकात रखने वाले सूबे में वर्षों से दिखते हैं। जिसका उदाहरण यह है कि 1949 में डीएमके की स्थापना पटकथा लेखक अन्नादुरई ने की थी, उसके बाद तो सूबे की सियासत में अभिनेताओं के नाम से अभि हटने का सिलसिला चल निकला। वैसे तमिलनाडु की राजनीतिक भूमि का लगाव फिल्मी सितारों से काफी पुराना रहा है। तमिल राजनीति में यह कहना अतिश्योक्ति न होगा, कि लोगों का फिल्मी सितारों के प्रति भावनात्मक, सामाजिक जुड़ाव के साथ राजनीतिक भविष्य भी ज्यादा सुरक्षित समझ में आता है। तभी तो पहले एमजी रामचंद्रन और बाद में जे. जयललिता फिल्मी दुनिया के बाद राजनीति का हिस्सा बनी। साथ ही साथ सत्ता की कुर्सी तक पहुँच भी बनाई। इसके इतर अगर एम.करुणानिधि के शुरूआती समय पर निगाहें डालें, तो पता चलता है, कि उन्होंने भी तमिल फिल्मों के लिए पटकथा लेखन से अपने जीवन की शुरूआत की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी राह पर अब रजनीकांत और कमल भी निकल पड़े हैं। इसके साथ जब एआईडीएमके में दो फाड़ होने के साथ बीते महीनों में जिस हिसाब से कनिमोझी और ए. राजा को घोटाले से बरी किया गया, उसके बाद दक्षिण की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। जयललिता जहां अपने कार्यकाल के शुरूआती दौर से ही अपने बूते विकास और राजनीतिक कूटनीति पर चलते हुए ऐसा माहौल बनाया, कि तमिलनाड़ू की राजनीति ही क्या उनकी पार्टी में भी उनके बाद कोई बड़ा राजनेता खड़ा नजर नहीं आया।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ में वर्तमान में भाजपा जिस अंदाजे -बयां में सियासीलीला को खेल रही है, उससे ऐसा अंदाजा लगाया जा सकता है, कि भाजपा असम की भांति दक्षिण के दुर्ग को भेदने की ओर नई रणनीति चल सकती है। वैसे कांग्रेस की बात की जाए, तो उसका वजूद राष्ट्रीय स्तर पर जब नेतृत्व के अभाव में दरक रहा है, फिर क्षेत्रीय राजनीति में उससे कोई कारनामा करना टेडी खीर साबित होने वाला लगता है। कांग्रेस रणनीतियों को बनाने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन लोगों का विश्वास कहीं न कहीं कांग्रेस की कार्यकुशलता और नीतियों से ताल्लुकात रखती नजर नहीं आती। वह बात चाहे राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में हो, या क्षेत्रीय राजनीति में नेतृत्व का अभाव साफ नजर आता है, फिर दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस को अपना वाजूद निर्मित करने में काफी समय लग सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे डीएमके के एम करूणानिधि भी 93 साल के हो चुके हैं, फिर दक्षिण के दुर्ग को साधाने के लिए नई रणनीति और चेहरे की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिसके लिए द्रविड़ जाति को साधने वाले इन सियासी क्षेत्रीय दलों के पास चेहरे की कमी और लोकप्रियता स्पष्ट देखी जा सकती है। जिसे मोदी सरकार एक हद तक गरीबों और आम जनता में अपनी पैठ मजबूत करके साबित कर सकती है। जिस दिशा में भाजपा आगे बढ़ भी रही है। अम्मा की मौत के बाद से एआईडीएमके में दो फाड़ हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो यह साबित करता है, कि तमिल राजनीति में भारी उथलपुथल का दौर चल रहा है। इसके साथ आरके नगर उपचुनाव में शशिकला के भतीजे और निर्दलीय उम्मीदवार दिनकरन की जीत ने भाजपा को संकेत दे दिया है कि बिना सारथी के दक्षिण के दुर्ग जीतना उसके लिए भी आसान नहीं होने वाला। ऐसे में अगर डीएमके भाजपा के साथ आ जाती है, जिसके राजनीतिक कयास भी लगाए जा रहे हैं, तो भाजपा के लिए बात आने वाले समय में बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतिहास के पन्नों की खोजबीन करें, तो 1999 से 2004 के बीच वाजपेयी कार्यकाल में डीएमके ने भाजपा को समर्थन किया था। इसके इतर 2016 के विधानसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन को 98 सीटें मिली थी, इस लिहाज से डीएमके भी अपना रास्ता भविष्य में बनाना चाहेंगी। जिसके लिए वर्तमान में भाजपा से गठबंधन करना उसके लिए भी फायदेमंद हो सकता है। फिर ऐसे में फिल्मी दुनिया के समीप गोते लगाते तमिल राजनीति में कमल हासन और रजनीकांत की क्या भूमिका होगी, यह तो भविष्य बताएगा। आज अगर तमिल सियासत में पुराना किस्सा दोहराया जा रहा है, तो देखना होगा कि कमल हासन और रजनीकांत इस किस्से को किस स्तर तक हकीकत में तब्दील कर पाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ में देखने लायक बात यह भी होगी कि कमल और रजनीकांत, एमजीआर और करुणानिधि जैसे सफल नेता बनते हैं, या शिवाजी गणेशन की तरह राजनीति से धूमिल हो जाते हैं? इससे भी बड़ी दिलचस्प बात यह होने वाली है, आने वाले वक्त में कि जातीय समीकरण में उलझी तमिल की सियासत गैर-जातीय राजनीतिक समीकरण को किस हद तक हजम कर सकती है। तो इन घटनाकर्मो के लिए इंतजार तो करना ही पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-महेश तिवारी</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/deep-relationship-with-film-of-tamil-political/article-3545</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/deep-relationship-with-film-of-tamil-political/article-3545</guid>
                <pubDate>Sat, 24 Feb 2018 01:37:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-02/rajni.jpg"                         length="89623"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूरोपीय संघ से प्रगाढ़ होते संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[यह सुखद है कि यूरोपीय संघ से भारत का बहुआयामी संबंध और सामरिक भागीदारी लगातार प्रगाढ़ हो रहा है। नई दिल्ली में संपन्न शिखर बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच आतंकवाद समेत मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद, लखवी और दाऊद इब्राहिम जैसे वैश्विक आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर सहमति एक बड़ी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/eu-intensifies-the-relationship/article-3399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह सुखद है कि यूरोपीय संघ से भारत का बहुआयामी संबंध और सामरिक भागीदारी लगातार प्रगाढ़ हो रहा है। नई दिल्ली में संपन्न शिखर बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच आतंकवाद समेत मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद, लखवी और दाऊद इब्राहिम जैसे वैश्विक आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर सहमति एक बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिखर बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सौर गठबंधन निवेश, बेंगलुरु मेट्रो निवेश और विज्ञान अनुसंधान विनिमय समेत कई अन्य अहम समझौतों पर मुहर लगी है। यूरोपीय यूनियन ने भारत की समुद्री सीमा की रक्षा की वचनबद्घता के साथ भविष्य में सैन्य सहयोग बढ़ाने की भी हामी भरी है। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह भारत को अन्य विश्व शक्तियों की तरह एक क्षेत्रीय और वैश्विक महाशक्ति के रुप में महत्व देता है जिसकी वजह से दोनों के बीच व्यापारिक संबंध परवान चढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि साल 2016 में यूरोपीयन यूनियन के साथ करीब 88 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। इसके अलावा यूरोपीय यूनियन भारत के निर्यात का भी सबसे बड़ा केंद्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">  अभी गत वर्ष ही बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में संपन्न 13 वां भारत-यूरोपीय शिखर बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम मिला और व्यापार, उर्जा, सुरक्षा और वाणिज्य के मसले पर दोनों के बीच उल्लेखनीय प्रगति हुई। इस बैठक में आतंकवाद के मसले पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव को गंभीरता से लिया गया और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की प्रतिबद्घता जाहिर की गयी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन समझ से परे है कि एफटीए पर बार-बार वार्ता का संकेत दिए जाने के बावजूद भी इस दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं हो रही है। जबकि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इसे मूर्त रुप दिया जाना बहुत आवश्यक है। गौर करें तो एफटीए पर सहमति न बनना दोनों पक्षों के लिए नुकसानदायक है। उल्लेखनीय है कि कई तरह की बाधाओं ने इन वार्ताओं को दस वर्षों से रोक रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर इस दिशा में रचनात्मक पहल होती तो एफटीए लागू होता और वस्तुओं पर शुल्क काफी हद तक कम होता। भारत और यूरोपीय संघ के इतिहास में जाएं तो 1963 में भारत ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय के साथ कुटनीतिक संबंध स्थापित किए और 1973 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय द्वारा वाणिज्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2000 से भारत और यूरोपीय संघ एकदूसरे के काफी निकट आ गए। भारत और यूरोपीय संघ के बीच निकटता अनायास नहीं है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। दोनों क्षेत्र आतंकवाद से ग्रसित हैं। दोनों बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थक और एकध्रवीय व्यवस्था के विरुद्घ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भारत एक बड़ा बाजार है और यहां पूंजी निवेश और तकनीकी की आवश्यकता है। एक ओर भारत को विज्ञान, संचार, महासागरीय शोध, अंतरिक्ष व परमाणु क्षेत्र इत्यादि में यूरोपीय संघ के मदद की दरकार है वहीं वैश्विक स्तर पर जन्म ले रही समस्याओं जैसे पर्यावरण समस्या, लिंग असमानता, मानवाधिकार हनन व सतत विकास इत्यादि के समाधान के लिए यूरोपीय संघ को भारत की भी जरुरत है। मौजुदा समय में यूरोपिय संघ के सदस्य देशों की संख्या 28 है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपीय समुदाय को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे-यूरोपिय आर्थिक समुदाय, साझा बाजार, यूरोपिय साझा बाजार, और यूरोपिय आर्थिक सहयोग संगठन इत्यादि। यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रुप में मान्यता देता है एवं इसके कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है। यूरोपिय संघ में तकरीबन 500 मिलियन नागरिक हैं एवं यह विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का 31 फीसद योगदानकर्ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपिय संघ समूह आठ संयुक्त राष्ट्र संघ तथा विश्व व्यापार संगठन में अपने सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है। यूरोपिय संघ के 21 देश नाटो के भी सदस्य हैं। 28 सदस्यीय यूरोपिय संघ वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकत हैं और साथ ही सेवा और सामान का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक एवं आयातक भी। यूरोपीय संघ भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के विशालतम स्रोतों में से है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए यूरोपीय संघ के सर्वाधिक महत्वपूर्ण देश ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड और इनके बाद फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम है। शीतयुद्घोत्तर युग में यूरोप में राजनीतिक-कुटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर कई तरह के बदलाव हुए जिन्होंने भारत की घरेलू और विदेश नीति को भी प्रभावित किया। नई दिल्ली में शिखर बैठक में आतंकवाद समेत कई आर्थिक-व्यापारिक मसलों पर सहमति जताकर भारत और यूरोपीय संघ ने अपने प्रगाढ़ होते रिश्ते को एक नई ऊंचाई दी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अरविंद जयतिलक</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/eu-intensifies-the-relationship/article-3399</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/eu-intensifies-the-relationship/article-3399</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Oct 2017 04:37:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-10/india-2.jpg"                         length="63417"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायल विकास और वैज्ञानिक तरक्की से विश्व में मिसाल: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और इजरायल के बीच रिश्ते 70 वर्ष पुराने तेल अवीब। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि इजरायल ने विशाल आकार और विशाल आबादी से विकास होने के तर्क को पीछे छोड़ते हए कम आबादी और छोटे आकार के बूते जो विकास तथा वैज्ञानिक तरक्की हासिल की है आज वह पूरी विश्व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/relationship-between-india-and-israel-70-years-old/article-2013"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/modi-4.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">भारत और इजरायल के बीच रिश्ते 70 वर्ष पुराने</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>तेल अवीब।</strong> भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि इजरायल ने विशाल आकार और विशाल आबादी से विकास होने के तर्क को पीछे छोड़ते हए कम आबादी और छोटे आकार के बूते जो विकास तथा वैज्ञानिक तरक्की हासिल की है आज वह पूरी विश्व के लिए एक मिसाल है। मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के चार हजार लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और इजरायल के बीच रिश्ते 70 वर्ष पुराने हैं और उन्हें यहां आने में 70 वर्ष लग गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें जो गौरव और सम्मान मिला है वह उसे सदैव याद रखंगे। मोदी ने हिब्रू भाषा में अपना भाषण शुरू करते हुए कहा कि दोनों देशों में अनेक समानताएं है और दोनों ही देशों को आजाद हुए 70 वर्ष हो गए हैं। उन्होंने इजराइल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आतिथ्य सत्कार की तहे दिल से प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत और इजरायल का संबंध पारंपरिक, भरोसे, मित्रता और विश्वास पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों ही देशों के त्योहारों में भी समानता है और यरुशलम हमारे 800 वर्षों की मित्रता का प्रतीक है। इजरायल की भूमि वीर सपूतों से संचित हुई है और इजरायल ने इस बात को सिद्ध कर दिया है कि किसी भी देश का विकास उसके विशाल संख्या बल अथवा विशाल आबादी से नहीं होता है बल्कि नागरिकों की प्रतिबद्धता और देश प्रेम की भावना पर होता है। संख्या और आकार कोई खास मायने नहीं रखता है और इजरायल ने इस बात को सही साबित कर दिखाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/relationship-between-india-and-israel-70-years-old/article-2013</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/relationship-between-india-and-israel-70-years-old/article-2013</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 05:28:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-07/modi-4.jpg"                         length="43555"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        